BARC रेटिंग्स फ्रीज से Meta व Google को मिल सकता है बड़ा फायदा

भारतीय टेलीविजन इंडस्ट्री इस साल के त्योहारी सीजन से पहले बड़ी अनिश्चितता का सामना कर रही है। इसकी वजह ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) की टीवी रेटिंग्स पर लगी रोक है।

Last Modified:
Friday, 03 July, 2026
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इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

भारतीय टेलीविजन इंडस्ट्री इस साल के त्योहारी सीजन से पहले बड़ी अनिश्चितता का सामना कर रही है। इसकी वजह ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) की टीवी रेटिंग्स पर लगी रोक है। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि इससे मीडिया प्लानिंग पर असर पड़ सकता है, ठीक ऐसे समय जब टीवी चैनल अपने बड़े शो लॉन्च करने की तैयारी में हैं और विज्ञापनदाता त्योहारों के लिए अपने विज्ञापन बजट को अंतिम रूप दे रहे हैं।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने BARC को निर्देश दिया है कि वह नई टेलीविजन रेटिंग एजेंसी नीति के तहत लाइसेंस रिन्यू होने तक किसी भी टीवी रेटिंग का प्रकाशन न करे। इस फैसले के बाद ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाताओं और मीडिया एजेंसियों के पास दर्शकों की संख्या मापने का सबसे बड़ा और भरोसेमंद पैमाना फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि इस फैसले का समय बेहद संवेदनशील है। जुलाई से सितंबर का समय आमतौर पर त्योहारी सीजन की मीडिया प्लानिंग का होता है। इसी दौरान कंपनियां गणेश चतुर्थी, ओणम, नवरात्रि, दुर्गा पूजा, दशहरा, दिवाली और साल के आखिर में होने वाली खरीदारी के सीजन के लिए अपने विज्ञापन बजट तय करती हैं। दूसरी ओर, टीवी नेटवर्क भी इसी समय नए फिक्शन शो, रियलिटी शो और बड़े एंटरटेनमेंट कार्यक्रम लॉन्च करते हैं ताकि त्योहारों के दौरान ज्यादा से ज्यादा दर्शकों को आकर्षित किया जा सके।

इंडस्ट्री का मानना है कि अगर दर्शकों के आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे तो विज्ञापनदाता डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर ज्यादा झुक सकते हैं, क्योंकि वहां उन्हें रियल-टाइम डेटा और कैंपेन की पूरी रिपोर्ट मिलती रहती है।

एक प्रमुख मीडिया एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ने कहा कि त्योहारी तिमाही में टीवी पर सबसे ज्यादा विज्ञापन खर्च होता है, क्योंकि इसी दौरान नए शो और बड़े एंटरटेनमेंट प्रोग्राम शुरू होते हैं। लेकिन विज्ञापनदाता यह भी चाहते हैं कि उनके निवेश का सही आकलन हो सके। अगर यह भरोसा खत्म होता है तो बजट खत्म नहीं होगा, बल्कि ऐसे प्लेटफॉर्म पर चला जाएगा जहां प्रदर्शन को मापा जा सकता है।

टीवी इंडस्ट्री के सबसे बड़े विज्ञापन सीजन पर संकट

त्योहारी सीजन टीवी चैनलों के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी समय माना जाता है। इसी दौरान मनोरंजन, समाचार, फिल्म और क्षेत्रीय चैनलों की आय का बड़ा हिस्सा विज्ञापनों से आता है।

एफएमसीजी कंपनियां, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, ऑटोमोबाइल कंपनियां, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन ब्रांड, ज्वेलरी रिटेलर, वित्तीय सेवा कंपनियां और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म इस दौरान बड़े स्तर पर विज्ञापन अभियान चलाते हैं क्योंकि त्योहारों में उपभोक्ताओं की खरीदारी बढ़ जाती है।

इसी समय टीवी चैनल भी अपने सबसे बड़े शो लॉन्च करते हैं। आने वाले हफ्तों में कई जनरल एंटरटेनमेंट चैनल नए फिक्शन शो शुरू करने वाले हैं, जबकि हिंदी और क्षेत्रीय बाजारों में बड़े रियलिटी शो और विशेष त्योहारी कार्यक्रम भी लॉन्च किए जाएंगे।

आमतौर पर BARC की साप्ताहिक रेटिंग्स से चैनलों को तुरंत पता चल जाता है कि नया शो कैसा प्रदर्शन कर रहा है। इसी आधार पर विज्ञापन दरें तय होती हैं और कंपनियां अपने विज्ञापन बजट में बदलाव करती हैं। लेकिन मौजूदा रेटिंग्स फ्रीज के कारण यह पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो गई है।

एक बड़ी एफएमसीजी कंपनी के मार्केटिंग अधिकारी का कहना है कि हर नए शो की पहचान उसकी रेटिंग से बनती है। स्वतंत्र ऑडियंस डेटा के बिना यह साबित करना मुश्किल हो जाता है कि शो कितने लोगों तक पहुंच रहा है और उस पर ज्यादा विज्ञापन दर क्यों ली जाए।

विज्ञापनदाता चाहते हैं साफ और मापने योग्य नतीजे

यह रेटिंग्स फ्रीज ऐसे समय आया है जब कंपनियां अपने मार्केटिंग खर्च का स्पष्ट परिणाम देखना चाहती हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म विज्ञापनदाताओं को तुरंत जानकारी देते हैं कि उनके विज्ञापन कितने लोगों ने देखे, कितने क्लिक मिले, कितने लोगों ने खरीदारी की और विज्ञापन पर खर्च का कितना फायदा हुआ।

मीडिया एजेंसियों का मानना है कि अगर टीवी लंबे समय तक बिना रेटिंग्स के रहा तो डिजिटल प्लेटफॉर्म की बढ़त और मजबूत हो सकती है।

एक वैश्विक मीडिया बाइंग एजेंसी के अधिकारी ने कहा कि मार्केटिंग बजट सीमित होता है। अगर एक माध्यम अपने प्रदर्शन का डेटा नहीं दे पा रहा है और दूसरा लगातार विस्तृत रिपोर्ट दे रहा है तो कंपनियां स्वाभाविक रूप से अपना अतिरिक्त बजट उसी माध्यम में लगाएंगी।

इंडस्ट्री का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबी चली तो Meta और Google जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म, कनेक्टेड टीवी, ऑनलाइन वीडियो और रिटेल मीडिया प्लेटफॉर्म को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों में भी कई कंपनियां सोशल मीडिया और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की बढ़ती लोकप्रियता के कारण डिजिटल विज्ञापनों पर खर्च बढ़ा चुकी हैं।

ब्रॉडकास्टर्स की मोलभाव करने की ताकत होगी कमजोर

टीवी चैनलों के लिए रेटिंग्स सिर्फ साप्ताहिक रिपोर्ट कार्ड नहीं होती, बल्कि विज्ञापन दरें तय करने, स्पॉन्सरशिप, इन्वेंट्री की कीमत और लंबे समय की मीडिया प्लानिंग का आधार भी होती हैं।

नई रेटिंग्स नहीं मिलने से अब विज्ञापन दरें तय करने में पुराने आंकड़ों, चैनलों के अपने डेटा और अनुमान का सहारा लेना पड़ेगा।

एक वरिष्ठ ब्रॉडकास्टर ने कहा कि टेलीविजन हमेशा स्वतंत्र रेटिंग्स के दम पर अपनी विश्वसनीयता साबित करता रहा है। जब यही पैमाना उपलब्ध नहीं होगा तो व्यावसायिक बातचीत पहले से ज्यादा कठिन हो जाएगी।

मीडिया एजेंसियों का कहना है कि फिलहाल पुराने रेटिंग्स डेटा का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन नए शो आने के बाद पुराने आंकड़े ज्यादा उपयोगी नहीं रहेंगे।

सबसे ज्यादा परेशानी नए शो को होगी, क्योंकि उनके पास दर्शकों की संख्या साबित करने के लिए कोई ताजा डेटा ही नहीं होगा। एक एजेंसी अधिकारी ने कहा कि नए शो के लिए रेटिंग्स सबसे ज्यादा जरूरी होती हैं, क्योंकि विज्ञापनदाता बड़ा बजट लगाने से पहले उसके प्रदर्शन का प्रमाण चाहते हैं।

मीडिया प्लानिंग भी होगी प्रभावित

कई बड़ी कंपनियां हर सप्ताह रेटिंग्स के आधार पर अपने विज्ञापन अलग-अलग चैनलों और कार्यक्रमों में शिफ्ट करती हैं। लेकिन नए डेटा के बिना ऐसा करना मुश्किल हो जाएगा।

मीडिया प्लानर्स का कहना है कि जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, कई विज्ञापनदाता टीवी पर नए विज्ञापन अभियान शुरू करने में सावधानी बरत सकते हैं।

एक मीडिया निवेश विशेषज्ञ ने कहा कि अगर अनिश्चितता लंबे समय तक बनी रही तो कई ब्रांड अपना अतिरिक्त और लचीला बजट डिजिटल प्लेटफॉर्म पर खर्च करना शुरू कर सकते हैं, जहां विज्ञापन अभियान को लगातार बेहतर बनाया जा सकता है।

पूरे टीवी इकोसिस्टम पर पड़ेगा असर

इसका असर सिर्फ टीवी चैनलों तक सीमित नहीं रहेगा। नए शो बनाने वाले प्रोडक्शन हाउस रेटिंग्स के आधार पर अपने कार्यक्रम की सफलता साबित करते हैं और अगला सीजन हासिल करते हैं। डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां चैनलों की प्लेसमेंट तय करने में रेटिंग्स का इस्तेमाल करती हैं। विज्ञापन एजेंसियां अपने अभियान की सफलता मापती हैं और कंपनियां निवेश पर मिलने वाले रिटर्न का आकलन करती हैं।

इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो ऐसे समय में टीवी की प्रतिस्पर्धी स्थिति कमजोर हो सकती है, जब दर्शकों का एक बड़ा वर्ग पहले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहा है।

हालांकि भारत में लाइव इवेंट, मनोरंजन और क्षेत्रीय कंटेंट के मामले में टीवी की पहुंच अब भी सबसे ज्यादा है, लेकिन बेहतर टारगेटिंग और विस्तृत डेटा के कारण डिजिटल प्लेटफॉर्म लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।

एक वरिष्ठ ब्रॉडकास्ट अधिकारी ने कहा कि टीवी इंडस्ट्री ने वर्षों तक भरोसेमंद रेटिंग्स के दम पर अपनी ताकत साबित की है। अगर देश के सबसे बड़े विज्ञापन सीजन में यही रेटिंग्स उपलब्ध नहीं होंगी तो प्रतिस्पर्धी माध्यमों को स्वाभाविक रूप से फायदा मिलेगा।

त्योहारी सीजन बनेगा पहली बड़ी परीक्षा

आने वाले कुछ हफ्तों में त्योहारी विज्ञापन अभियान तेज होने वाले हैं। ऐसे में टीवी चैनलों को उम्मीद है कि रेटिंग्स पर लगी रोक जल्द हट जाएगी। क्योंकि हर गुजरता सप्ताह विज्ञापन खरीद, मीडिया प्लानिंग और नए कार्यक्रमों की रणनीति को और अधिक अनिश्चित बना रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि टीवी रातोंरात अपना महत्व नहीं खोएगा, लेकिन फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर पूरे इंडस्ट्री के पास दर्शकों को मापने का साझा और भरोसेमंद पैमाना नहीं होगा तो त्योहारी सीजन के अतिरिक्त विज्ञापन बजट का बड़ा हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर जा सकता है।

यही वजह है कि इस समय टीवी इंडस्ट्री के लिए BARC रेटिंग्स की वापसी सिर्फ साप्ताहिक रैंकिंग का मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह देश के सबसे बड़े त्योहारी विज्ञापन बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने का भी अहम सवाल बन चुकी है।

 

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₹1 लाख के बजट से बड़ी स्क्रीन तक: कैसे MSMEs लिख रहे भारत में CTV विज्ञापन की नई ग्रोथ

कनेक्टेड टेलीविजन (CTV) भारत के विज्ञापन उद्योग का नया ग्रोथ एरिया बन रहा है। अब इसका इस्तेमाल सिर्फ बड़े ब्रांड नहीं, बल्कि छोटे और मझोले कारोबार यानी MSMEs भी तेजी से कर रहे हैं।

Last Modified:
Monday, 24 August, 2026
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इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

कनेक्टेड टेलीविजन (CTV) भारत के विज्ञापन उद्योग के लिए अगला बड़ा ग्रोथ एरिया बनकर उभर रहा है। लेकिन अब इसका फायदा सिर्फ बड़े राष्ट्रीय विज्ञापनदाताओं तक सीमित नहीं है। छोटे और मझोले कारोबार यानी MSMEs भी तेजी से CTV का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी वजह यह है कि CTV उन्हें टीवी की पहुंच और असर के साथ डिजिटल विज्ञापन जैसी टारगेटिंग, बजट में लचीलापन और नतीजों को मापने की सुविधा देता है।

यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब CTV तेजी से देश के बड़े शहरों से बाहर भी पहुंच बना रहा है। WPP Media और The Trade Desk ने Ormax Media के साथ मिलकर एक नई रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक भारत में CTV दर्शकों की संख्या 20.7 करोड़ तक पहुंच गई है और ये दर्शक 6.2 से 6.5 करोड़ घरों में हैं। 2022 के मुकाबले CTV दर्शकों की संख्या करीब तीन गुना बढ़ी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में ग्रामीण भारत में CTV देखने वालों की संख्या 110% बढ़ी है। वहीं छोटे शहरों में 55%, मिनी-मेट्रो शहरों में 46% और मेट्रो शहरों में 21% की बढ़ोतरी हुई है। MSMEs के लिए यह विस्तार काफी अहम है, क्योंकि CTV अब पारंपरिक टीवी विज्ञापन की बजाय परफॉर्मेंस आधारित डिजिटल मीडिया जैसा नजर आने लगा है।

सेल्स स्ट्रैटेजिस्ट और कनेक्टेड टेलीविजन एक्सपर्ट विशाल खन्ना ने कहा, “दो साल पहले किसी MSME के लिए टेलीविजन का मतलब 50 लाख रुपये का चेक और ऐसा सेल्स रिप्रेजेंटेटिव होता था, जो दोबारा फोन नहीं करता था। आज इसका मतलब एक डैशबोर्ड है।”

उन्होंने कहा, “JioHotstar, YouTube CTV और Samsung Ads पर सेल्फ-सर्व एक्सेस ने टेलीविजन के साथ वही किया है जो UPI ने पेमेंट के साथ किया था- बीच के गेटकीपर को हटा दिया, लेकिन प्रोडक्ट को नहीं।”

विशाल खन्ना के मुताबिक MSMEs अब डिजिटल विज्ञापन की तरह CTV पर भी विज्ञापन खरीद रहे हैं। इसमें जियोग्राफिकल टारगेटिंग, विज्ञापन दिखाने की फ्रीक्वेंसी को नियंत्रित करना, QR कोड और नतीजों के आधार पर माप जैसे तरीके शामिल हैं।

उन्होंने कहा, “MSMEs जिस तरह से अलग तरीके से काम कर रहे हैं, वह काफी कुछ बताता है। वे CTV को उसी तरह खरीद रहे हैं जैसे Meta पर विज्ञापन खरीदते हैं- पिनकोड के हिसाब से जियो-फेंसिंग, विज्ञापन दिखाने की तय फ्रीक्वेंसी, हर क्रिएटिव पर QR कोड और GRPs की बजाय प्रति लीड लागत के आधार पर नतीजों का आकलन।”

विशाल खन्ना के मुताबिक, उदाहरण के तौर पर नासिक की कोई सोलर इंस्टॉलेशन कंपनी या कोयंबटूर का कोई मैट्रेस ब्रैंड अब अपने जिले के घरों को टारगेट करते हुए 15 सेकंड के विज्ञापन चला सकता है और इसके लिए महीने का 1-2 लाख रुपये का बजट रख सकता है।

उन्होंने कहा, “यह टेलीविजन विज्ञापन नहीं है। यह टीवी की पोशाक पहने हुए परफॉर्मेंस मार्केटिंग है।”

MSME विज्ञापन का बड़ा और तेजी से बढ़ता बाजार

इस अवसर को MSME डिजिटल विज्ञापन बाजार का तेजी से बढ़ता आकार भी मजबूत कर रहा है। PMAR 2026 के मुताबिक 2025 में MSME डिजिटल विज्ञापन बाजार 35,814 करोड़ रुपये का था, जो 2024 के मुकाबले 21% ज्यादा है। 2026 में इस सेगमेंट के करीब 20% बढ़कर लगभग 42,976 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

यह रकम पूरे प्रिंट विज्ञापन बाजार से भी ज्यादा है और उभरते डिजिटल वीडियो तथा CTV प्लेटफॉर्म के लिए अतिरिक्त विज्ञापन खर्च की एक बड़ी संभावना को दिखाती है।

यह बदलाव भारत के विज्ञापन बाजार की व्यापक दिशा से भी मेल खाता है, जिसकी पहचान WPP Media के This Year Next Year (TYNY) फोरकास्ट में की गई है। फरवरी 2026 में जारी भारत के पूर्वानुमान में विज्ञापन से होने वाली आय 2026 में 9.7% बढ़कर 2,01,891 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया गया था। रिपोर्ट में SME के साथ टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम, रियल एस्टेट, ऑटोमोटिव और शिक्षा को विज्ञापन बाजार की ग्रोथ बढ़ाने वाली प्रमुख कैटेगरी में शामिल किया गया था।

इसके बाद WPP Media के जून के मिड-ईयर अपडेट में 2026 में भारत के विज्ञापन बाजार का आकार करीब 2 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया। इसमें डिजिटल अपनाने, ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और बड़ी SMB बेस को लंबे समय में ग्रोथ को सपोर्ट करने वाले प्रमुख कारण बताया गया। सोशल और अन्य डिजिटल विज्ञापन के 8.3 अरब डॉलर तक पहुंचने और 13.2% की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया।

CTV बाजार के लिए इसका सीधा मतलब है कि जैसे-जैसे SME विज्ञापन बाजार का कुल आकार बढ़ेगा, उस खर्च का एक बड़ा हिस्सा ऐसे टीवी प्लेटफॉर्म की ओर जा सकता है, जहां डिजिटल तरीके से विज्ञापन खरीदने और उसके नतीजों को मापने की सुविधा उपलब्ध है।

CTV अब सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं

WPP Media, The Trade Desk और Ormax की नई रिसर्च यह बताती है कि यह अवसर क्यों लगातार बढ़ रहा है।

अब CTV की पहुंच 20.7 करोड़ भारतीयों तक हो गई है। इनमें से 7 करोड़ दर्शक ग्रामीण भारत में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक CTV पर 80% से ज्यादा व्यूइंग परिवार या अन्य लोगों के साथ होती है। एक औसत CTV इम्प्रेशन 2.5 दर्शकों तक पहुंचता है।

CTV पर प्रीमियम और लंबे समय तक देखे जाने वाले कंटेंट की हिस्सेदारी भी बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक CTV पर होने वाली व्यूइंग में वेब सीरीज की हिस्सेदारी 69%, क्रिकेट की 64% और फिल्मों की 63% है। सप्ताह के दिनों में रात 8 से 10 बजे के प्राइम-टाइम स्लॉट में CTV के 78% यूजर्स बड़ी स्क्रीन पर कंटेंट देखते हैं।

रीजनल और MSME विज्ञापनदाताओं के लिए बड़ी स्क्रीन और लोकल टारगेटिंग का यह मेल खास तौर पर आकर्षक है।

पहले किसी रीजनल ब्रैंड के सामने महंगे और बड़े स्तर के टीवी कैंपेन तथा बेहद टारगेटेड डिजिटल कैंपेन में से किसी एक को चुनने की चुनौती होती थी। अब CTV के जरिए वह अपने दर्शकों को खास बाजारों तक सीमित रखते हुए टीवी स्क्रीन का विजुअल असर भी हासिल कर सकता है।

यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि छोटे बाजारों में CTV की पहुंच बढ़ रही है। ऐसे में CTV की अतिरिक्त ऑडियंस का बड़ा अवसर अब मेट्रो शहरों से बाहर भी दिखाई दे रहा है।

मापने योग्य नतीजे MSMEs के लिए बदल रहे हैं CTV की तस्वीर

एक और बड़ा बदलाव विज्ञापन के नतीजों को मापने के तरीके में हो रहा है। PrsmX के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट व हेड सौरभ गोलानी, ने कहा कि MSMEs अब ऐसी पहुंच चाहते हैं जिसे मापा जा सके, विज्ञापन की फ्रीक्वेंसी ज्यादा प्रभावी हो, एंगेजमेंट मजबूत हो और मीडिया पर किए गए निवेश और मार्केटिंग के नतीजों के बीच संबंध ज्यादा साफ हो।

सौरभ गोलानी ने कहा, “वे ऐसे ज्यादा इनोवेटिव फॉर्मेट भी तलाश रहे हैं, जिनमें कंटेंट के साथ मौसम, खेल के स्कोर या शेयर बाजार की कीमतों जैसी लाइव अपडेट दिखाई जाएं। इससे ब्रैंड्स को उस समय दर्शकों से जुड़ने के लिए ज्यादा क्रिएटिव तरीके मिलते हैं।” उन्होंने कहा कि CTV की ग्रोथ विज्ञापनदाताओं को इस माध्यम की भूमिका पर दोबारा विचार करने के लिए भी प्रेरित कर रही है।

सौरभ गोलानी ने कहा, “भारत में CTV विज्ञापन खर्च 2024 में करीब 35% बढ़कर लगभग 1,500 करोड़ रुपये हो गया था और इस सेगमेंट के हर साल करीब 40% की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया है।”

उन्होंने कहा, “हम MSMEs की बढ़ती दिलचस्पी देख रहे हैं, क्योंकि प्रोग्रामेटिक एक्सेस और लचीले कैंपेन मॉडल एंट्री की बाधा को कम कर रहे हैं। आने वाले समय में CTV उन ब्रैंड्स के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण चैनल बन सकता है, जो टारगेटिंग या मापने की क्षमता से समझौता किए बिना अपना कारोबार बढ़ाना चाहते हैं।”

नवीनतम बाजार अनुमानों के मुताबिक CTV विज्ञापन का अवसर इससे भी बड़ा है, हालांकि अलग-अलग रिपोर्ट में इसकी परिभाषा अलग होने के कारण आंकड़ों में अंतर है। PMAR 2026 के मुताबिक 2025 में CTV विज्ञापन बाजार करीब 6,000 करोड़ रुपये का था, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुना है। 2026 में इसके करीब 8,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

FICCI-EY ने व्यापक परिभाषा का इस्तेमाल करते हुए CTV विज्ञापन से होने वाली आय 9,900 करोड़ रुपये बताई है, जो 42% की बढ़ोतरी है। इसके साथ ही करीब 4 करोड़ साप्ताहिक एक्टिव CTV घरों का अनुमान है, जबकि एक साल पहले यह संख्या 3 करोड़ थी।

अलग-अलग अनुमान बाजार की परिभाषा में अंतर को दिखाते हैं, लेकिन सभी एक ही दिशा की ओर इशारा करते हैं। CTV तेजी से एक उभरते हुए फॉर्मेट से बदलकर विज्ञापन के एक महत्वपूर्ण चैनल में तब्दील हो रहा है।

पहली बार विज्ञापन देने वाले ब्रैंड्स बढ़ा रहे हैं अगला चरण

Frodoh के फाउंडर व सीईओ रुषभ आर. ठक्कर के मुताबिक CTV के लोकतांत्रिक होते जाने का सबसे स्पष्ट संकेत सिर्फ मौजूदा विज्ञापनदाताओं का ज्यादा खर्च करना नहीं है, बल्कि पहली बार इस माध्यम पर विज्ञापन देने वाले ब्रैंड्स की संख्या भी बढ़ रही है। रुषभ ठक्कर ने कहा, “ऑपरेशनल स्तर पर हम देख रहे हैं कि पहली बार CTV पर विज्ञापन देने वाले ब्रैंड्स की संख्या, जिनमें कई रीजनल और MSME ब्रैंड शामिल हैं, कुल CTV विज्ञापन खर्च की बढ़ोतरी से काफी तेजी से बढ़ रही है।”

उन्होंने कहा, “यह लोकतांत्रिक होने की प्रक्रिया को दिखाता है। प्रोग्रामेटिक CTV ने एंट्री की लागत और बाधा को कम कर दिया है। इसका मतलब है कि ज्यादा छोटे ब्रैंड अपना पहला कैंपेन चला रहे हैं, न कि सिर्फ बड़े ब्रैंड अपने बजट में बढ़ोतरी कर रहे हैं।”

रुषभ ठक्कर ने Nielsen की 2025 Annual Marketing Report का हवाला देते हुए कहा कि दुनियाभर में 56% मार्केटर्स ने CTV में अपना निवेश बढ़ाने की योजना बनाई थी। इस बढ़ती दिलचस्पी में मिड-मार्केट और रीजनल विज्ञापनदाताओं की हिस्सेदारी बढ़ रही है और यह सिर्फ राष्ट्रीय ब्रैंड्स तक सीमित नहीं है।

इसलिए भारत में अवसर सिर्फ इतना नहीं हो सकता कि बड़े विज्ञापनदाता अपने मौजूदा टीवी बजट को CTV की ओर ट्रांसफर कर दें। इससे भी बड़ा अवसर ऐसे नए विज्ञापनदाताओं को टीवी पर लाना हो सकता है, जो अब तक इस माध्यम का इस्तेमाल नहीं करते थे।

टीवी की पहुंच से एड्रेसेबल ग्रोथ तक

CTV में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि यह विज्ञापन के दो अलग-अलग मॉडल को एक साथ लाने का काम कर रहा है। पारंपरिक टेलीविजन में बड़े स्तर पर पहुंच, प्रीमियम कंटेंट और बड़ी स्क्रीन का असर था, लेकिन छोटे विज्ञापनदाताओं के लिए सटीक तरीके से विज्ञापन खरीदना अपेक्षाकृत मुश्किल था। वहीं डिजिटल विज्ञापन में बारीकी से टारगेटिंग, लचीला बजट और नतीजों को मापने की सुविधा थी, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा छोटी पर्सनल स्क्रीन पर दिखाई देता था।

CTV इन दोनों के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों को एक साथ ला रहा है। WPP Media, The Trade Desk और Ormax की नई रिपोर्ट के मुताबिक CTV पर विज्ञापन देखने के बाद 83% दर्शक कोई न कोई एक्शन लेते हैं। प्रीमियम दर्शकों में यह आंकड़ा बढ़कर 89% हो जाता है।

दर्शकों का यह एक्शन लेने वाला व्यवहार MSMEs के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके लिए विज्ञापन अक्सर तुरंत मिलने वाले कारोबारी नतीजों से जुड़ा होता है। इनमें पूछताछ, वेबसाइट विजिट, स्टोर पर आने वाले ग्राहक, लीड या बिक्री शामिल हो सकते हैं।

प्रोग्रामेटिक और सेल्फ-सर्व विज्ञापन खरीदने की सुविधा बढ़ने से छोटे विज्ञापनदाताओं के लिए CTV पर विज्ञापन शुरू करने का तरीका भी बदल रहा है। अब उन्हें कई महीने पहले बड़े टीवी कैंपेन के लिए बड़ी रकम लगाने की जरूरत नहीं है। वे सीमित भौगोलिक बाजारों में छोटे स्तर पर कैंपेन शुरू कर सकते हैं, अलग-अलग क्रिएटिव फॉर्मेट आजमा सकते हैं, लोगों की प्रतिक्रिया माप सकते हैं और प्रदर्शन के आधार पर कैंपेन को आगे बढ़ा सकते हैं।

किसी रीजनल रिटेलर, एजुकेशन कंपनी, रियल एस्टेट डेवलपर, हेल्थकेयर ब्रैंड, कंज्यूमर ड्यूरेबल कंपनी या स्थानीय सर्विस प्रोवाइडर के लिए इससे बड़ी स्क्रीन तक पहुंच काफी आसान हो सकती है।

अगली बड़ी लड़ाई छोटे विज्ञापनदाताओं के लिए

दुनिया भर का ट्रेंड बताता है कि CTV ऑडियंस के बढ़ने जितना ही महत्वपूर्ण विज्ञापनदाताओं के आधार का विस्तार भी हो सकता है। उद्योग विशेषज्ञों के हवाले से IAB के 2026 के डिजिटल वीडियो से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि CTV में निवेश करने वाले छोटे विज्ञापनदाताओं की हिस्सेदारी 2024 में 60% से बढ़कर 2026 में 85% हो गई है। भारत भी इसी तरह की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है, हालांकि यहां सेल्फ-सर्व और प्रोग्रामेटिक CTV विज्ञापन खरीदने की सुविधा बाजार में थोड़ी देर से आई है।

भारत के लिए यह समय काफी महत्वपूर्ण है। देश में MSME डिजिटल विज्ञापन बाजार पहले ही हर साल 20% से ज्यादा की दर से बढ़ रहा है। वहीं CTV की पहुंच उन बाजारों तक भी बढ़ रही है, जहां कई रीजनल और उभरते हुए ब्रैंड काम कर रहे हैं।

WPP Media का TYNY फोरकास्ट इस अवसर को और मजबूत करता है। इसमें SME को विज्ञापन बाजार की ग्रोथ में योगदान देने वाली कैटेगरी में शामिल किया गया है। वहीं व्यापक बाजार लगातार ज्यादा संगठित और डिजिटल होता जा रहा है। इसका नतीजा CTV विज्ञापन के पूरे स्वरूप में बड़ा बदलाव हो सकता है।

CTV सिर्फ टेलीविजन का ऐसा प्रीमियम एक्सटेंशन नहीं रहेगा, जिसे मुख्य रूप से बड़े राष्ट्रीय ब्रैंड खरीदते हैं। इसके बजाय यह हजारों छोटे विज्ञापनदाताओं के लिए ग्राहक जोड़ने और कारोबार बढ़ाने का माध्यम बन सकता है। इनमें किसी जिले के घरों को टारगेट करने वाला स्थानीय सोलर इंस्टॉलर भी हो सकता है और अपने घरेलू बाजार से बाहर पहचान बनाने की कोशिश कर रहा रीजनल कंज्यूमर ब्रैंड भी।

टेलीविजन इंडस्ट्री के लिए यह विज्ञापन की एक नई कमाई का जरिया है। वहीं MSMEs के लिए इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें घर की सबसे बड़ी स्क्रीन तक पहुंच मिल सकती है, वह भी उसी पुराने तरीके से टीवी विज्ञापन खरीदे बिना।

 

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FSSAI की बड़ी कार्रवाई, भ्रामक विज्ञापनों और गलत दावों पर 150 से ज्यादा नोटिस

खाद्य उत्पादों पर किए जाने वाले बड़े-बड़े दावों और विज्ञापनों को लेकर खाद्य नियामक FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) ने सख्ती बढ़ा दी है।

Last Modified:
Monday, 24 August, 2026
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खाद्य उत्पादों पर किए जाने वाले बड़े-बड़े दावों और विज्ञापनों को लेकर खाद्य नियामक FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) ने सख्ती बढ़ा दी है। FSSAI ने हाल के महीनों में खाद्य कारोबार से जुड़ी कंपनियों को 150 से ज्यादा नोटिस जारी किए हैं। इन मामलों में कथित तौर पर भ्रामक विज्ञापन, गलत दावे और लेबलिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन की शिकायतें शामिल हैं।

FSSAI ने शनिवार को अपनी कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि जांच के दायरे में कई बड़ी खाद्य, पेय और कंज्यूमर हेल्थ कंपनियां भी शामिल हैं। इनमें Nestlé India, PepsiCo India, Abbott India, Red Bull India, Danone India, Monster Energy India, Hell Energy, Mondelez India, Coca-Cola India, Diageo, Pernod Ricard, Ferrero India और Kenvue जैसे नाम शामिल हैं।

FSSAI के मुताबिक यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा कानूनों और उनसे जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है। नियामक ने हाल की कार्रवाई के दौरान कई कंपनियों के उत्पाद भी जब्त किए हैं।

एनर्जी ड्रिंक और अल्कोहल कंपनियों पर भी नजर

FSSAI की कार्रवाई में एनर्जी ड्रिंक और अल्कोहलिक बेवरेज कंपनियों पर खास ध्यान दिया गया है। नियामक यह देख रहा है कि इन कंपनियों के उत्पाद खाद्य सुरक्षा, विज्ञापन और लेबलिंग से जुड़े लागू नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं।

कार्रवाई का दायरा सिर्फ उत्पाद बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। FSSAI ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को भी 12 नोटिस जारी किए हैं। इनमें Amazon India और Flipkart जैसे बड़े प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

एक अहम कार्रवाई में FSSAI ने बताया कि Amazon के एक वेयरहाउस का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है।

KFC, McDonald’s और Domino’s भी जांच के दायरे में

रेस्तरां और फूड सर्विस कारोबार भी FSSAI की इस कार्रवाई से अछूता नहीं रहा। नियामक ने 30 से ज्यादा नोटिस ऐसे प्रतिष्ठानों को जारी किए हैं, जिनमें KFC India, McDonald’s India, Pizza Hut India, Domino’s India और Costa Coffee शामिल हैं।

FSSAI ने यह भी बताया कि कार्रवाई के तहत Domino’s के पांच लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। इससे पहले पिछले साल कई फाइव-स्टार होटलों को भी नोटिस जारी किए गए थे।

पैकेजिंग और विज्ञापनों में किए गए दावों पर सख्ती

FSSAI की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब खाद्य और पेय उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापनों में किए जाने वाले दावों की जांच पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। इससे पहले भी FSSAI ने कंपनियों को ऐसे लेबल बदलने के निर्देश दिए हैं, जिन पर किए गए दावे नियामकीय नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए।

नोटिस मिलने के बाद कई कंपनियों ने सुधारात्मक कदम उठाना शुरू कर दिया है। इसमें उत्पाद के लेबल में बदलाव, विज्ञापन में किए गए दावों को बदलना या दूसरी अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं में सुधार करना शामिल हो सकता है।

FSSAI की ताजा कार्रवाई से साफ है कि नियामक अब सिर्फ बड़ी खाद्य कंपनियों ही नहीं, बल्कि निर्माताओं, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और रेस्तरां समेत पूरे फूड बिजनेस सेक्टर पर नजर रख रहा है।

उपभोक्ताओं के लिए इसका सीधा मतलब है कि अगर किसी खाद्य या पेय उत्पाद की पैकेजिंग या विज्ञापन में कोई बड़ा दावा किया जा रहा है, तो अब नियामक उसकी बारीकी से जांच कर रहा है।

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FSSAI की कार्रवाई का असर: Amway, Emami समेत 6 कंपनियों ने हटाए ‘100%’ वाले दावे

खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापनों में किए जाने वाले ऐसे दावों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की सख्ती बढ़ती जा रही है, जो उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं।

Last Modified:
Thursday, 20 August, 2026
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खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापनों में किए जाने वाले ऐसे दावों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की सख्ती बढ़ती जा रही है, जो उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं। इसी कड़ी में Amway India, Emami, Bonn Biscuits समेत छह कंपनियों ने अपने प्रोडक्ट्स के लेबल, पैकेजिंग और विज्ञापनों से '100%' वाले दावों को हटा दिया है।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, FSSAI ने कहा है कि उसने खाद्य कारोबार से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है। खास तौर पर उन मामलों पर ध्यान दिया जा रहा है, जहां '100%' जैसे शब्दों का इस्तेमाल इस तरह किया जा रहा है कि उपभोक्ताओं के मन में उत्पाद को लेकर गलत या बढ़ा-चढ़ाकर धारणा बन सकती है।

रेगुलेटर ने कंपनियों को पैकेजिंग, लेबल, वेबसाइट और प्रमोशनल सामग्री से ऐसे दावों को हटाने के निर्देश दिए हैं।

इन छह कंपनियों ने बदले अपने दावे

FSSAI के मुताबिक, जिन कंपनियों ने नियामकीय कार्रवाई के बाद सुधार किया है, उनमें Amway India Enterprises, Emami, Bonn Biscuits, Apis India, Juza Foods और Masterchow Foods शामिल हैं।

Amway India ने अपने एक प्रोडक्ट पर इस्तेमाल किए जा रहे '100% Pure Coconut Oil' के दावे को हटा दिया है। कंपनी ने FSSAI को बताया कि जिस पुराने स्टॉक पर यह दावा मौजूद था, उसे बिक्री चैनलों से वापस ले लिया गया है।

वहीं, Emami ने अपने Zandu Honey प्रोडक्ट पर किए जाने वाले दावों में बदलाव किया है। Apis India ने भी नियामकीय सलाह मिलने के बाद अपने हनी प्रोडक्ट्स से इसी तरह के दावों को हटा दिया।

Bonn Biscuits ने भी विज्ञापन से हटाया '100%' दावा

Bonn Biscuits ने अपने Jeera Bite Biscuits के विज्ञापन में इस्तेमाल किए जा रहे '100%' वाले दावे को हटा दिया है। 

इसके अलावा Juza Foods ने बेबी फूड प्रोडक्ट्स से जुड़े ऐसे दावों को वापस लिया है, जबकि Masterchow Foods ने अपने नूडल्स प्रोडक्ट्स से इसी तरह के दावों को हटाया है।

FSSAI ने तेज की कार्रवाई

कंपनियों पर यह कार्रवाई FSSAI की व्यापक कंप्लायंस ड्राइव का हिस्सा है। रेगुलेटर पिछले कुछ समय से खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और विज्ञापनों में किए जाने वाले दावों की जांच तेज कर रहा है।

पिछले सप्ताह भी FSSAI ने बताया था कि Dabur India और Ferns N Petals समेत कई कंपनियों ने नोटिस मिलने के बाद लेबलिंग, विज्ञापन और प्रोडक्ट क्लेम से जुड़ी कमियों को सुधारा था।

इससे पहले भी कई खाद्य कंपनियों को भ्रामक लेबल, ट्रेडमार्क और प्रमोशनल दावों को लेकर सुधारात्मक कदम उठाने पड़े हैं। इससे साफ है कि FSSAI अब खाद्य उत्पादों की मार्केटिंग में किए जाने वाले दावों पर पहले से ज्यादा नजर रख रहा है।

उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले दावों पर नजर

FSSAI खास तौर पर ऐसे दावों पर ध्यान दे रहा है, जो बिना पर्याप्त आधार के उपभोक्ताओं के खरीदारी के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। इनमें उत्पाद की शुद्धता (Purity), स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits) और सामग्री (Ingredients) से जुड़े दावे शामिल हैं।

रेगुलेटर का फोकस सिर्फ '100%' जैसे शब्दों तक सीमित नहीं है। खाद्य और पेय पदार्थों की मार्केटिंग में किए जाने वाले ऐसे दावों की भी जांच की जा रही है, जिनसे किसी प्रोडक्ट को लेकर उपभोक्ता के मन में उसकी गुणवत्ता या फायदे को लेकर गलत धारणा बन सकती है।

FSSAI ने हाल के दिनों में एनर्जी ड्रिंक्स और अल्कोहलिक बेवरेज की मार्केटिंग से जुड़े मामलों पर भी नजर बढ़ाई है। ऐसे में आने वाले समय में कंपनियों को अपने पैकेजिंग और विज्ञापन दावों को लेकर ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ सकती है।

 

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विमल इलायची ऐड पर महाराष्ट्र FDA का एक्शन, अजय देवगन समेत 3 एक्टर्स को नोटिस

महाराष्ट्र Food and Drug Administration (FDA) ने विमल इलायची के विज्ञापन में शामिल बॉलीवुड एक्टर्स अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्राॉफ को शो-कॉज नोटिस जारी किया है।

Last Modified:
Monday, 17 August, 2026
VimalElaichi54

विमल इलायची का विज्ञापन एक बार फिर विवादों में आ गया है। महाराष्ट्र Food and Drug Administration (FDA) ने विमल इलायची के विज्ञापन में शामिल बॉलीवुड एक्टर्स अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्राॉफ को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। FDA ने सवाल उठाया है कि कहीं यह विज्ञापन विमल पान मसाला का अप्रत्यक्ष यानी सरोगेट प्रमोशन तो नहीं कर रहा।

FDA ने तीनों एक्टर्स से विज्ञापन में ब्रांड एंडोर्सर के तौर पर उनकी भूमिका को लेकर जवाब मांगा है। साथ ही, उन्हें अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से इस विज्ञापन का प्रमोशनल कंटेंट 15 दिनों के भीतर हटाने का निर्देश दिया गया है।

FDA ने किस बात पर उठाया सवाल?

महाराष्ट्र FDA इस पूरे मामले की जांच Food Safety and Standards Act, 2006 के तहत कर रहा है। खास तौर पर एक्ट की धारा 24 के तहत जांच की जा रही है। यह धारा खाने-पीने से जुड़े भ्रामक या धोखा देने वाले विज्ञापनों से संबंधित है।

रेगुलेटर का कहना है कि विमल इलायची के विज्ञापन में इस्तेमाल की गई प्रस्तुति, डायलॉग, प्रोडक्ट का नाम और बाजार में Vimal ब्रांड की मौजूदगी को देखते हुए उपभोक्ताओं के मन में इसका संबंध Vimal Pan Masala से बन सकता है।

महाराष्ट्र में तंबाकू या निकोटीन वाले पान मसाला पर प्रतिबंध है। ऐसे में FDA यह जांच कर रहा है कि Elaichi के नाम से किया जा रहा विज्ञापन कहीं प्रतिबंधित प्रोडक्ट की अप्रत्यक्ष ब्रांडिंग तो नहीं कर रहा।

10 लाख रुपये तक का जुर्माना

FDA ने अपने नोटिस में Food Safety and Standards Act की धारा 53 का भी जिक्र किया है। इस प्रावधान के तहत भ्रामक खाद्य विज्ञापन प्रकाशित या प्रसारित करने में शामिल व्यक्ति पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

हालांकि, फिलहाल एक्टर्स को शो-कॉज नोटिस जारी कर उनका पक्ष पूछा गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि उनके खिलाफ जुर्माना तय हो गया है। आगे की कार्रवाई उनके जवाब और FDA की जांच के आधार पर होगी।

महाराष्ट्र में गुटखा-पान मसाला के खिलाफ बड़ा अभियान

FDA की यह कार्रवाई महाराष्ट्र में प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाला के खिलाफ चलाए जा रहे बड़े अभियान के बीच हुई है।

विभाग के मुताबिक, 25 मई से 31 जुलाई 2026 के बीच अधिकारियों ने 658 ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान करीब 15.11 करोड़ रुपये का स्टॉक जब्त किया गया। अधिकारियों ने 519 FIR दर्ज कीं और 701 लोगों को गिरफ्तार किया।

इसके अलावा प्रतिबंधित प्रोडक्ट की कथित सप्लाई में इस्तेमाल हो रहे 78 वाहन भी जब्त किए गए। इन वाहनों में मिले सामान की कीमत करीब 6.6 करोड़ रुपये बताई गई है।

संगठित नेटवर्क पर भी FDA की नजर

महाराष्ट्र FDA की कार्रवाई अब सिर्फ दुकानों और सप्लाई तक सीमित नहीं है। विभाग प्रतिबंधित गुटखा, तंबाकू और निकोटीन वाले पान मसाला की सप्लाई से जुड़े संभावित संगठित नेटवर्क की भी जांच कर रहा है।

12 जून 2026 को FDA Commissioner Tukaram Mundhe ने अधिकारियों को पुलिस के साथ मिलकर काम करने और योग्य मामलों में Maharashtra Control of Organised Crime Act, 1999 (MCOCA) के इस्तेमाल की संभावना पर भी गौर करने का निर्देश दिया था।

Vimal के विज्ञापन पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

Vimal के विज्ञापन को लेकर यह पहली बार नहीं है जब नियामकीय सवाल उठे हैं। 2018 में Directorate General of Health Services (DGHS) ने Vishnu Pouch Packaging Pvt Ltd को शो-कॉज नोटिस जारी किए थे। आरोप था कि विमल इलायची के विज्ञापन के जरिए तंबाकू उत्पादों का अप्रत्यक्ष प्रचार किया जा रहा है।

कंपनी ने उस समय इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि घरेलू बाजार के लिए वह Vimal ब्रांड के तहत तंबाकू उत्पाद नहीं बनाती।

इसके बाद जनवरी 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उन आदेशों के खिलाफ DGHS की अपील खारिज कर दी थी, जिनके जरिए इन नोटिस पर रोक लगाई गई थी। कोर्ट ने कहा था कि कंपनी तंबाकू रहित पान मसाला बेच सकती है, बशर्ते वह लागू कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों का पालन करे। हालांकि, विज्ञापन को surrogate promotion माना जा सकता है या नहीं, इस मुद्दे पर विवाद बना रहा।

इस बार मामला अलग कानून के तहत

महाराष्ट्र FDA की मौजूदा कार्रवाई को पहले की कार्रवाई से अलग माना जा रहा है। ताजा नोटिस Food Safety and Standards Act के तहत जारी किए गए हैं, जबकि पहले की कार्रवाई Cigarettes and Other Tobacco Products Act (COTPA) से जुड़े प्रावधानों के तहत हुई थी।

फिलहाल अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्राॉफ के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि FDA के नोटिस का वे क्या जवाब देते हैं और क्या रेगुलेटर विमल इलायची के इस विज्ञापन को प्रतिबंधित पान मसाला के surrogate promotion के तौर पर देखता है। 15 दिनों में जवाब और सोशल मीडिया से विज्ञापन हटाने के निर्देश के बाद इस मामले में आगे की तस्वीर साफ होगी।

 

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Vertoz में हिरेन कुमार शाह को दोबारा मैनेजिंग डायरेक्टर बनाने की तैयारी

डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग कंपनी Vertoz Limited के बोर्ड ने कंपनी के मौजूदा मैनेजिंग डायरेक्टर और प्रमोटर हिरेन कुमार रसिकलाल शाह को फिर से मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

Last Modified:
Saturday, 15 August, 2026
HirenShah521

डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग और टेक्नोलॉजी कंपनी Vertoz Limited के लिए वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही अच्छी रही है। कंपनी ने 30 जून 2026 को खत्म हुई तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी के कंसोलिडेटेड नतीजों के मुताबिक, तिमाही में कुल आय बढ़कर करीब 82.24 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह करीब 70.90 करोड़ रुपये थी।

कंपनी का कंसोलिडेटेड मुनाफा भी बढ़ा है। जून 2026 तिमाही में कंपनी को करीब 6.47 करोड़ रुपये का प्रॉफिट हुआ, जबकि जून 2025 तिमाही में यह करीब 6.11 करोड़ रुपये था। यानी सालाना आधार पर मुनाफे में करीब 6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 13 अगस्त 2026 को हुई बैठक में वित्तीय नतीजों के अलावा मैनेजमेंट से जुड़े कई अहम फैसले भी लिए गए।

कंसोलिडेटेड आय 82 करोड़ रुपये के पार

Vertoz की कंसोलिडेटेड रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 तिमाही में ऑपरेशंस से कंपनी की आय करीब 81.64 करोड़ रुपये रही। अन्य आय करीब 60 लाख रुपये रही। इस तरह कुल आय करीब 82.24 करोड़ रुपये रही।

जून 2025 में ऑपरेशंस से आय करीब 70.49 करोड़ रुपये और कुल आय करीब 70.90 करोड़ रुपये थी। इस तरह एक साल में कंपनी की कुल आय में करीब 16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

तिमाही के दौरान कंपनी के कुल खर्च करीब 74.06 करोड़ रुपये रहे। इनमें डायरेक्ट सर्विस एक्सपेंस करीब 49.10 करोड़ रुपये, कर्मचारी लाभ पर 8.24 करोड़ रुपये, फाइनेंस कॉस्ट करीब 2.14 करोड़ रुपये, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन करीब 5.37 करोड़ रुपये और अन्य खर्च करीब 9.22 करोड़ रुपये रहे।

स्टैंडअलोन मुनाफे में भी मजबूत बढ़ोतरी

स्टैंडअलोन आधार पर भी कंपनी का प्रदर्शन बेहतर रहा। जून 2026 तिमाही में Vertoz की कुल आय करीब 26.69 करोड़ रुपये रही, जबकि जून 2025 में यह करीब 7.92 करोड़ रुपये थी।

तिमाही में कंपनी का प्रॉफिट करीब 1.50 करोड़ रुपये रहा। वहीं, जून 2025 तिमाही में कंपनी को करीब 75.43 लाख रुपये का मुनाफा हुआ था। इस तरह स्टैंडअलोन आधार पर भी मुनाफे में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली।

कंपनी के मुताबिक, जून 2026 तिमाही में अन्य कम्प्रिहेन्सिव इनकम का टैक्स के बाद कुल प्रभाव करीब 7.22 करोड़ रुपये का रहा। यह इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स और एक्चुरियल गेन/लॉस की फेयर वैल्यू के असर से जुड़ा है।

हिरेन कुमार शाह को फिर MD बनाने की तैयारी

Vertoz के बोर्ड ने कंपनी के मौजूदा मैनेजिंग डायरेक्टर और प्रमोटर हिरेन कुमार रसिकलाल शाह को फिर से मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

उन्हें मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद पांच साल के नए कार्यकाल के लिए फिर से मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया जाएगा। उनका मौजूदा कार्यकाल 13 जून 2027 को खत्म होना है। हालांकि, नए कार्यकाल के लिए कंपनी के सदस्यों की आगामी Annual General Meeting में मंजूरी जरूरी होगी।

कंपनी ने बताया कि इस प्रस्ताव को पहले से मंजूरी देने का मकसद मैनेजमेंट में निरंतरता बनाए रखना और कंपनी के कारोबार व कामकाज में किसी तरह का व्यवधान न आने देना है।

हिरेन कुमार शाह के पास बिजनेस मैनेजमेंट का लंबा अनुभव

हिरेन कुमार शाह Vertoz के मैनेजिंग डायरेक्टर और प्रमोटर हैं। कंपनी के मुताबिक, उन्हें बिजनेस मैनेजमेंट, स्ट्रैटेजिक प्लानिंग, ऑपरेशंस और कॉरपोरेट मैनेजमेंट का लंबा अनुभव है।

उन्होंने Vertoz से जुड़ने से पहले अलग-अलग स्टार्टअप वेंचर्स के साथ काम किया है। कंपनी के मुताबिक, उन्होंने Vertoz के कारोबार, ग्रोथ से जुड़ी पहलों और कंपनी के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वह कंपनी के नॉन-एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर आशीष रसिकलाल शाह के भाई हैं। वहीं, Vertoz की CFO और एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर डिंपल हिरेन कुमार शाह उनकी पत्नी हैं।

SHM & CO. को इंटर्नल ऑडिटर बनाया

बोर्ड ने M/s SHM & CO. को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कंपनी का इंटर्नल ऑडिटर नियुक्त करने को भी मंजूरी दी है। यह नियुक्ति 13 अगस्त 2026 से प्रभावी है।

SHM & CO. के प्रोपराइटर हितांशु शेठ हैं। कंपनी के मुताबिक, यह फर्म Internal Audit, Internal Controls, Accounting Processes और Compliance Framework को मजबूत करने के क्षेत्र में काम करती है।

इंटर्नल ऑडिटर के तौर पर यह फर्म सीधे बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और जरूरत के मुताबिक Audit Committee को रिपोर्ट करेगी।

कंपनी ने कई पॉलिसीज में किया बदलाव

बोर्ड ने SEBI के नियमों और दूसरे लागू कानूनों में हुए बदलावों के हिसाब से कंपनी की कई पॉलिसीज की समीक्षा भी की। इसके बाद संबंधित पॉलिसीज में जरूरी संशोधन और अपडेट को मंजूरी दी गई।

इनमें इनसाइडर ट्रेडिंग से जुड़े आचार संहिता (Code of Conduct) और अनपब्लिश्ड प्राइस सेंसिटिव इंफॉर्मेशन (UPSI) के निष्पक्ष खुलासे की पॉलिसी, महत्वपूर्ण घटनाओं और सूचनाओं की पहचान से जुड़ी पॉलिसी, नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन पॉलिसी, बोर्ड में विविधता से जुड़ी पॉलिसी और बोर्ड सदस्यों व वरिष्ठ प्रबंधन के लिए आचार संहिता शामिल हैं।

इसके अलावा इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स के परिचय एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम, महत्वपूर्ण कानूनी मामलों (Material Litigation) की पहचान, क्रेडिटर्स के बकाया की महत्वपूर्ण देनदारियों की पहचान, महत्वपूर्ण सहायक कंपनी (Material Subsidiary) और महत्वपूर्ण ग्रुप कंपनियों/संस्थाओं की पहचान से जुड़ी पॉलिसी में भी बदलाव किए गए हैं।

कंपनी ने व्हिसलब्लोअर पॉलिसी के साथ-साथ दस्तावेजों के संरक्षण और रिकॉर्ड में रखने (Preservation & Archival) से जुड़ी पॉलिसी को भी अपडेट किया है।

कंपनी ने कहा कि इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य मौजूदा रेगुलेटरी नियमों और कंपनी के गवर्नेंस एवं कम्प्लयांस फ्रेमवर्क के साथ पॉलिसीज को बेहतर तरीके से जोड़ना है।

शेयरधारकों को पहले ही दिया गया था अंतरिम डिविडेंड

कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बोर्ड ने 29 मई 2026 को 10 रुपये फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर 0.10 रुपये का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया था।

5 जून 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की गई थी और यह अंतरिम डिविडेंड 26 जून 2026 को शेयरधारकों को भुगतान कर दिया गया। खास बात यह रही कि प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप के शेयरधारकों ने स्वेच्छा से अपने हिस्से के अंतरिम डिविडेंड का अधिकार छोड़ दिया था।

करीब दो घंटे चली बोर्ड मीटिंग 

Vertoz की बोर्ड मीटिंग 13 अगस्त 2026 को शाम 5 बजे शुरू हुई और शाम 6:55 बजे समाप्त हुई। बैठक में वित्तीय नतीजों को मंजूरी देने के साथ मैनेजिंग डायरेक्टर की दोबारा नियुक्ति, इंटर्नल ऑडिटर की नियुक्ति और कई कंपनी पॉलिसीज में संशोधन को मंजूरी दी गई।

कंपनी ने बताया कि वित्तीय नतीजों की समीक्षा ऑडिट कमेटी ने की थी और उसकी सिफारिश के बाद बोर्ड ने इन्हें मंजूरी दी।

 

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Signpost India में दो स्वतंत्र निदेशकों की पुनर्नियुक्ति, एक का कार्यकाल खत्म

देश की प्रमुख डिजिटल ऑउट-ऑफ होम (DOOH) और ट्रांजिट विज्ञापन कंपनी साइनपोस्ट इंडिया (Signpost India Limited) के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों को लेकर हाल में दो बड़े बदलाव हुए हैं।

Last Modified:
Wednesday, 12 August, 2026
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देश की प्रमुख डिजिटल ऑउट-ऑफ होम (DOOH) और ट्रांजिट विज्ञापन कंपनी साइनपोस्ट इंडिया (Signpost India Limited) के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों को लेकर हाल में दो बड़े बदलाव हुए हैं। एक तरफ कंपनी के शेयरधारकों ने गिरिश कुलकर्णी और प्रशांत संघवी को स्वतंत्र निदेशकों के तौर पर पांच-पांच साल के दूसरे कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त करने की मंजूरी दी है। वहीं, दूसरी तरफ कंपनी की स्वतंत्र निदेशक  सयंतिका मित्रा का दूसरा कार्यकाल पूरा होने के बाद वह बोर्ड से बाहर हो गई हैं।

कंपनी ने 6 अगस्त 2026 को स्टॉक एक्सचेंज को बताया था कि 5 अगस्त 2026 को हुई असाधारण आम बैठक (EGM) में शेयरधारकों ने गिरिश कुलकर्णी और प्रशांत संघवी की पुनर्नियुक्ति से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी। दोनों का नया कार्यकाल 6 अगस्त 2026 से 5 अगस्त 2031 तक रहेगा।

गिरिश कुलकर्णी और प्रशांत संघवी को मिला दूसरा कार्यकाल

शेयरधारकों की मंजूरी के बाद गिरिश कुलकर्णी और प्रशांत संघवी दोनों कंपनी के गैर-कार्यकारी स्वतंत्र निदेशकों के तौर पर अगले पांच साल तक बोर्ड का हिस्सा रहेंगे।

गिरिश कुलकर्णी को एशिया के इंश्योरेंस और फाइनेंशियल सेक्टर में चार दशक से ज्यादा का अनुभव है। कंपनी के मुताबिक, उन्हें बिजनेस को खड़ा करने और बड़े स्तर पर ले जाने के साथ कॉरपोरेट गवर्नेंस और स्ट्रैटजिक प्लानिंग का भी व्यापक अनुभव है।

उन्होंने एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में कई जॉइंट वेंचर्स को शुरू करने और आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है। वह Dai-Ichi Life के Global Strategy Board के शुरुआती सदस्यों में शामिल रहे और Asia Pacific में चेयरमैन (नॉन-एग्जिक्यूटिव) की भूमिका भी निभाई। इसके अलावा उन्होंने करीब एक दशक तक Star Union Dai-Ichi Life Insurance के MD और CEO के तौर पर काम किया।

वहीं, प्रशांत संघवी को Business Development, Credit Appraisal, Structured Finance और IPO Listing के क्षेत्र में 25 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने Private Equity, बैंकों और Financial Institutions के जरिए फंड जुटाने के क्षेत्र में भी काम किया है।

उनके करियर का एक बड़ा हिस्सा HDFC Bank में रहा, जहां उन्होंने मुंबई में करीब 11 साल तक Business Banking Group (Working Capital) का नेतृत्व किया। इसके अलावा उन्होंने Centurion Bank of Punjab और ICICI Bank में भी काम किया है। उनके पास SBI Life, General Motors Finance (GMAC) और Generali Group से जुड़े अनुभव भी हैं।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि गिरिश कुलकर्णी और प्रशांत संघवी कंपनी के किसी भी अन्य डायरेक्टर से संबंधित नहीं हैं। साथ ही, दोनों को SEBI या किसी अन्य संबंधित अथॉरिटी के आदेश के तहत डायरेक्टर का पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है।

सयंतिका मित्रा का दूसरा कार्यकाल हुआ पूरा

इसके बाद Signpost India ने 10 अगस्त को एक और महत्वपूर्ण बोर्ड बदलाव की जानकारी दी। कंपनी की स्वतंत्र निदेशक  सयंतिका मित्रा का दूसरा कार्यकाल 8 अगस्त 2026 को कारोबारी घंटे खत्म होने के साथ पूरा हो गया।

इसके साथ ही वह कंपनी की स्वतंत्र निदेशकों नहीं रहीं। कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्होंने Nomination & Remuneration Committee की Chairperson और Audit Committee की Member की जिम्मेदारी भी छोड़ दी।

कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को दी जानकारी में बताया कि सयंतिका मित्रा का कार्यकाल पूरा होना ही उनके पद से हटने का कारण है। कंपनी ने उनकी किसी नई नियुक्ति या किसी अन्य पद पर जाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।

इस तरह अगस्त के पहले सप्ताह में Signpost India के बोर्ड में एक तरफ दो स्वतंत्र निदेशकों को अगले पांच साल के लिए बनाए रखने का फैसला हुआ, वहीं एक मौजूदा स्वतंत्र निदेशक का दूसरा कार्यकाल पूरा हो गया। यानी गिरिश कुलकर्णी और प्रशांत संघवी का दूसरा कार्यकाल 6 अगस्त 2026 से शुरू हुआ, जबकि सयंतिका मित्रा 8 अगस्त 2026 को अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद बोर्ड से बाहर हो गईं।

 

 

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Bislie नाम से पानी बेचने पर रोक, Bisleri से मिलते-जुलते ट्रेडमार्क को HC ने माना भ्रामक

पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर ब्रैंड Bisleri को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कर्नाटक की एक कंपनी को ‘Bislie’ नाम से पैकेज्ड पानी बनाने और बेचने पर फिलहाल रोक लगा दी है।

Last Modified:
Monday, 10 August, 2026
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पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर ब्रैंड Bisleri को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कर्नाटक की एक कंपनी को ‘Bislie’ नाम से पैकेज्ड पानी बनाने और बेचने पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने पहली नजर में माना कि ‘Bislie’ नाम रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क ‘Bisleri’ से इतना मिलता-जुलता है कि इससे लोगों के भ्रमित होने की संभावना है।

जस्टिस माधव जे. जमादार ने Bisleri International Private Limited की ओर से दायर अंतरिम याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। मामला कर्नाटक के बेलागुली महालिंगेगौड़ा किरणकुमार की कंपनी Kalabyraveshwara Mineral Water Industry से जुड़ा है, जो ‘Bislie’ ब्रैंड के नाम से पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर बेच रही थी।

नाम के साथ पैकेजिंग पर भी सवाल

Bisleri की ओर से कोर्ट में कहा गया कि ‘Bislie’ सिर्फ नाम में ही उसके ब्रैंड से मिलता-जुलता नहीं है, बल्कि दोनों प्रॉडक्ट्स की लेबल डिजाइन, आर्टवर्क, रंगों, लेआउट, एलिमेंट्स की प्लेसमेंट और पूरी पैकेजिंग में भी काफी समानता है।

कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि ‘Bislie’ के लिए इस्तेमाल की जा रही बोतल का डिजाइन भी Bisleri की बोतल से काफी मिलता-जुलता है।

Bisleri ने कोर्ट से मांग की थी कि संबंधित निर्माता को ‘Bislie’ नाम या उससे मिलते-जुलते किसी भी नाम, लेबल, पैकेजिंग या डिजाइन के तहत पानी बनाने, बेचने, स्टॉक करने और मार्केटिंग करने से रोका जाए।

मई में बाजार में मिले थे ‘Bislie’ के प्रोडक्ट

कोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, Bisleri की टीम ने मई 2026 के आखिरी हफ्ते में बाजार की निगरानी के दौरान ‘Bislie’ नाम से बिक रहे प्रॉडक्ट्स की पहचान की थी। इसके बाद कंपनी को पता चला कि इन प्रॉडक्ट्स का निर्माण कर्नाटक के चन्नरायपटना में किया जा रहा था।

Bisleri ने अपने ट्रेडमार्क के अलावा अपने लेबल पर इस्तेमाल होने वाले ओरिजिनल आर्टवर्क के लिए कॉपीराइट रजिस्ट्रेशन भी करा रखा है।

जून में कोर्ट ने दी थी तलाशी और जब्ती की अनुमति

इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने पहले 11 जून को निर्माता की गैरमौजूदगी में एक अंतरिम आदेश जारी किया था। कोर्ट ने कोर्ट रिसीवर नियुक्त करते हुए उसे ‘Bislie’ नाम वाले प्रॉडक्ट्स, लेबल, पैकेजिंग सामग्री, मशीनरी और इससे जुड़ी अन्य चीजों की तलाशी लेने और उन्हें जब्त करने की अनुमति दी थी।

इसके बाद कोर्ट के आदेश के मुताबिक परिसर में छापेमारी भी की गई।

‘Bislie’ और ‘Bisleri’ में काफी समानता

कोर्ट ने दोनों ब्रैंड के नाम और पैकेजिंग की तुलना की। कोर्ट के मुताबिक, ‘Bislie’ नाम ‘Bisleri’ की नकल जैसा दिखाई देता है, जिसमें कुछ अक्षरों में बदलाव करके नया नाम तैयार किया गया है।

कोर्ट ने नाम के अलावा दोनों ब्रैंड की पैकेजिंग में भी कई समानताएं पाईं। इनमें आर्टवर्क, कलर स्कीम, डिजाइन, लेआउट और पूरी विजुअल पहचान शामिल है।

कंपनी की गैरमौजूदगी में जारी रहा आदेश

7 अगस्त को हुई सुनवाई में संबंधित निर्माता कोर्ट में पेश नहीं हुआ, जबकि उसे मामले की जानकारी और नोटिस दिया जा चुका था। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि इस संबंध में सर्विस का एफिडेविट दाखिल किया गया था।

कोर्ट ने कहा कि Additional Special Receiver की रिपोर्ट भी Bisleri के दावों को समर्थन देती है। दूसरी ओर, प्रतिवादी ने न तो कोर्ट में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा और न ही जवाबी एफिडेविट दाखिल किया। ऐसे में इस चरण पर Bisleri की ओर से लगाए गए आरोपों का कोई विरोध नहीं हुआ।

अंतिम फैसला आने तक ‘Bislie’ पर रोक

इन परिस्थितियों को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने Bisleri की अंतरिम याचिका मंजूर कर ली। कोर्ट ने मुकदमे के अंतिम निपटारे तक निर्माता को ‘BISLIE’ या ‘BISLERI’ से मिलते-जुलते किसी भी नाम या लेबल के तहत पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर बनाने, बेचने, सप्लाई करने, स्टॉक करने, पैकेजिंग, मार्केटिंग या ऑफर करने से रोक दिया है।

यह रोक सिर्फ नाम तक सीमित नहीं है। इसमें विवादित आर्टवर्क, ट्रेड ड्रेस और बोतल के डिजाइन/शेप को भी शामिल किया गया है।

यानी फिलहाल कोर्ट के आदेश के बाद संबंधित निर्माता के लिए ‘Bislie’ नाम, उसकी पैकेजिंग और कथित तौर पर मिलते-जुलते बोतल डिजाइन के साथ बाजार में पानी बेचना मुश्किल होगा। वहीं, ट्रेडमार्क विवाद पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।

 

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डिजिटल ऐड इंडस्ट्री में बड़ा सौदा, Nielsen ने DoubleVerify के अधिग्रहण का किया ऐलान

मीडिया मेजरमेंट और ऑडियंस एनालिटिक्स कंपनी Nielsen Holdings ने डिजिटल विज्ञापन वेरिफिकेशन प्लेटफॉर्म DoubleVerify का अधिग्रहण करने का ऐलान किया है।

Last Modified:
Saturday, 08 August, 2026
Nielsen512

मीडिया मेजरमेंट और ऑडियंस एनालिटिक्स कंपनी Nielsen Holdings ने डिजिटल विज्ञापन वेरिफिकेशन प्लेटफॉर्म DoubleVerify का अधिग्रहण करने का ऐलान किया है। यह पूरी तरह नकद (All-Cash) सौदा है, जिसकी कुल कीमत करीब 2.15 अरब डॉलर है।

इस समझौते के तहत DoubleVerify के शेयरधारकों को प्रति शेयर 13.60 डॉलर नकद मिलेंगे। यह कीमत 5 अगस्त 2026 तक के पिछले 60 कारोबारी दिनों के औसत शेयर मूल्य से लगभग 30 फीसदी अधिक है।

दोनों कंपनियों के बोर्ड ने इस सौदे को मंजूरी दे दी है। हालांकि, इसे पूरा होने के लिए DoubleVerify के शेयरधारकों की मंजूरी और नियामकीय स्वीकृतियां मिलना बाकी हैं। उम्मीद है कि यह सौदा 2027 की पहली तिमाही तक पूरा हो जाएगा।

इस अधिग्रहण के बाद Nielsen की ऑडियंस मेजरमेंट और मीडिया इंटेलिजेंस सेवाएं, DoubleVerify की डिजिटल विज्ञापन वेरिफिकेशन, मीडिया क्वालिटी और कैंपेन मेजरमेंट तकनीक के साथ जुड़ जाएंगी। इससे विज्ञापनदाताओं को यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि उनके विज्ञापन असली लोगों तक पहुंच रहे हैं, सही माहौल में दिख रहे हैं और फर्जी ट्रैफिक से सुरक्षित हैं।

कंपनियों का दावा है कि विलय के बाद बनने वाली संयुक्त कंपनी का सालाना कारोबार 4 अरब डॉलर से अधिक होगा और यह 300 अरब डॉलर से ज्यादा के वैश्विक विज्ञापन खर्च वाले ग्राहकों को सेवाएं देने की स्थिति में होगी।

Nielsen के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कार्तिक राव ने कहा कि इस सौदे से कंपनी की डिजिटल विज्ञापन क्षेत्र में मौजूदगी और मजबूत होगी। वहीं, DoubleVerify के CEO मार्क ज़ागोर्स्की ने कहा कि Nielsen के साथ जुड़ने से कंपनी को अधिक संसाधन मिलेंगे और दोनों की तकनीक मिलकर विज्ञापन उद्योग में नए मानक स्थापित करेगी।

सौदा पूरा होने के बाद DoubleVerify, Nielsen के भीतर एक निजी (Private) कंपनी के रूप में काम करेगी। हालांकि, वह अपने मौजूदा DoubleVerify ब्रांड और नाम के साथ ही परिचालन जारी रखेगी। यह जानकारी BestMediaInfo में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर सामने आई है।

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सिर्फ सम्मान नहीं, भविष्य का निर्माण भी; AAAI को अपनानी होगी बड़ी सोच: डॉ. अनुराग बत्रा

इंडियन ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित संस्थाओं में से एक ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने हमेशा इस इंडस्ट्री की विरासत को सहेजने का काम किया है।

Last Modified:
Monday, 03 August, 2026
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डॉ. अनुराग बत्रा, चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ, एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप ।।

इंडियन ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित संस्थाओं में से एक ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने हमेशा इस इंडस्ट्री की विरासत को सहेजने का काम किया है। उसके लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड उन प्रोफेशनल्स को सम्मानित करते रहे हैं, जिन्होंने दशकों तक एजेंसीज खड़ी कीं, यादगार ऐड कैंपेन बनाए और इंडियन ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हर पेशे में ऐसे लोगों का सम्मान होना चाहिए, जिन्होंने उस क्षेत्र की नींव मजबूत की हो और उसकी दिशा तय की हो। AAAI लगातार यह जिम्मेदारी निभाता आया है।

लेकिन हर संस्था के जीवन में एक ऐसा समय भी आता है, जब उसे अपनी पुरानी उपलब्धियों से आगे बढ़कर खुद से एक अहम सवाल पूछना पड़ता है- आने वाले समय को आकार देने में उसकी क्या भूमिका होगी?

पिछले एक दशक में शायद ही कोई ऐसी इंडस्ट्री रही हो, जिसमें ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री जितना बड़ा बदलाव आया हो। डिजिटल मीडिया, डेटा, कंटेंट क्रिएटर्स, ई-कॉमर्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने इस क्षेत्र के कई पुराने नियम बदल दिए हैं। आज क्लाइंट्स तेजी से नए आइडिया, मापे जा सकने वाले नतीजे और एकीकृत समाधान चाहते हैं। वहीं, आज इस पेशे में आने वाली नई पीढ़ी ऐसे कारोबारी माहौल में काम शुरू कर रही है, जो उनके वरिष्ठों के दौर से बिल्कुल अलग है।

यही वजह है कि अब AAAI के भीतर चर्चा सिर्फ आजीवन योगदान देने वाले दिग्गजों को सम्मानित करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इस बात पर भी होनी चाहिए कि अगले बीस वर्षों के लिए ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री को कैसे तैयार किया जाए।

इंडस्ट्री के भीतर एक भावना लगातार मजबूत हो रही है कि AAAI का नेतृत्व अभी भी मुख्य रूप से पारंपरिक ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज से जुड़े वरिष्ठ लोगों के हाथों में है। उनके योगदान पर कोई सवाल नहीं है और वे हर सम्मान के हकदार हैं। लेकिन जिस इंडस्ट्री को उन्होंने बनाया, वह अब काफी बदल चुका है। ऐसे में डिजिटल कारोबार, टेक्नोलॉजी, कंटेंट, डेटा एनालिटिक्स और बदलते उपभोक्ता व्यवहार को समझने वाले युवा प्रोफेशनल्स की नई सोच इस संस्था को और मजबूत बना सकती है।

यह बात अनुभव की जगह युवाओं को लाने की नहीं है, बल्कि दोनों को साथ लेकर चलने की है। हर सफल संस्था तब बेहतर काम करती है, जब अनुभवी नेतृत्व के साथ युवा पेशेवर भी जुड़ते हैं, जो नए विचार, नई क्षमताएं और बाजार की नई समझ लेकर आते हैं।

AAAI को उन लोगों का दायरा भी बढ़ाना चाहिए, जिनसे वह सलाह लेता है। आज ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री अकेले काम नहीं करता। किसी भी अभियान को सफल बनाने में ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज के साथ-साथ मार्केटर्स, कंसल्टेंट्स, टेक्नोलॉजी कंपनियां, उपभोक्ता शोधकर्ता और बिजनेस स्ट्रैटेजिस्ट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर AAAI इन क्षेत्रों के सम्मानित प्रोफेशनल्स को सलाहकार परिषदों या विशेष समितियों में शामिल करे, तो संस्था को नई सोच और व्यापक दृष्टिकोण मिलेगा। कई बार सबसे अच्छे विचार उन लोगों से आते हैं, जो किसी इंडस्ट्री को बाहर से देखते हैं।

आज अधिकांश लोग AAAI के बारे में तब सुनते हैं, जब वह गोआफेस्ट का आयोजन द ऐडवर्टाइजिंग क्लब के साथ करता है या फिर जब लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड की घोषणा होती है। दुर्भाग्य से इस वर्ष इस पुरस्कार को लेकर हुआ विवाद, सम्मान समारोह से कहीं अधिक चर्चा का विषय बन गया। इन सालाना आयोजनों के अलावा भी AAAI के पास पूरे वर्ष अधिक सक्रिय, प्रभावशाली और प्रासंगिक बनने का बड़ा अवसर है।

संस्था नियमित रूप से इंडस्ट्री से जुड़े मंचों का आयोजन कर सकती है, जहां उभरते रुझानों पर चर्चा हो। वह रिसर्च रिपोर्ट प्रकाशित कर सकती है, युवा प्रोफेशनल्स के लिए मेंटरशिप प्रोग्राम शुरू कर सकती है और एजेंसीज, क्लाइंट्स, मीडिया कंपनियों तथा टेक्नोलॉजी पार्टनर्स के बीच संवाद को बढ़ावा दे सकती है। केवल आयोजनों के लिए पहचाने जाने के बजाय AAAI खुद को विचारों और सहयोग का सबसे सम्मानित मंच बना सकता है।

एक और महत्वपूर्ण पहल नेक्स्ट जेनरेशन काउंसिल का गठन हो सकती है, जिसमें एजेंसीज, डिजिटल कंपनियों, मीडिया संस्थानों और स्वतंत्र कंसल्टेंसी से जुड़े युवा पेशेवर शामिल हों। यह समूह प्रतिभा विकास, क्लाइंट्स की बदलती अपेक्षाओं और नए बिजनेस मॉडल जैसे विषयों पर अपने विचार साझा कर सकता है और वरिष्ठ इंडस्ट्री नेताओं के साथ मिलकर काम कर सकता है। इससे भविष्य का नेतृत्व भी व्यवस्थित तरीके से तैयार होगा, न कि केवल संयोग पर छोड़ दिया जाएगा।

इसके अलावा ऐसे पुरस्कार भी शुरू किए जा सकते हैं, जो उभरते हुए एजेंसी लीडर्स, नवाचारी उद्यमियों और डिजिटल दौर में ऐडवर्टाइजिंग की नई परिभाषा गढ़ने वाले प्रोफेशनल्स को सम्मानित करें। करियर के अलग-अलग चरणों में उत्कृष्टता को पहचानना यह संदेश देता है कि इंडस्ट्री अनुभव के साथ-साथ नए विचारों को भी समान महत्व देता है।

AAAI इससे भी बड़ा सपना देख सकता है। आज भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते और सबसे गतिशील ऐडवर्टाइजिंग बाजारों में शामिल है। यहां बनने वाले कई ऐडवर्टाइजिंग कैंपेंस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जाता है। ऐसे में क्यों न AAAI हर चार वर्ष में वर्ल्ड ऐडवर्टाइजिंग कांग्रेस आयोजित करने की पहल करे? ऐसा मंच दुनिया भर के एजेंसी प्रमुखों, मार्केटर्स, मीडिया कंपनियों, टेक्नोलॉजी संगठनों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं को एक साथ ला सकता है। इससे न केवल इंडियन ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि AAAI की छवि भी एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की इंडस्ट्री संस्था के रूप में मजबूत होगी।

विश्वविद्यालयों और प्रबंधन संस्थानों के साथ मजबूत जुड़ाव भी AAAI की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। छात्रों के लिए आउटरीच प्रोग्राम, मेंटरशिप, इनोवेशन चैलेंज और अतिथि व्याख्यान जैसे प्रयास कक्षा और कार्यस्थल के बीच की दूरी कम कर सकते हैं। युवा प्रोफेशनल्स को यह महसूस होना चाहिए कि AAAI ऐसी संस्था है, जो उनके विकास और करियर को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाती है।

ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री कभी स्थिर नहीं रहा और उसकी सबसे पुरानी संस्था को भी स्थिर नहीं रहना चाहिए। इंडस्ट्री की विरासत को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है, लेकिन उसे भविष्य के लिए तैयार करना भी उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी है।

कोई यह नहीं कह रहा कि AAAI उन दिग्गजों का सम्मान करना बंद कर दे, जिन्होंने इंडियन ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री की मजबूत नींव रखी। उनका योगदान हमेशा अमूल्य रहेगा। लेकिन यदि यह संस्था युवा प्रोफेशनल्स के लिए भी जगह बनाए, एजेंसी जगत के बाहर से आने वाले नए विचारों का स्वागत करे और व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करे, तो इससे उसकी प्रासंगिकता और विश्वसनीयता दोनों और मजबूत होंगी।

आखिरकार, बीते दौर के महान लोगों को सच्ची श्रद्धांजलि केवल उन्हें सम्मानित करना नहीं है, बल्कि ऐसी संस्था छोड़कर जाना भी है, जो आने वाले कल की चुनौतियों और अवसरों के लिए पूरी तरह तैयार हो।

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लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड का विवाद गहराया, तान्या गोयल ने AAAI को भेजा लीगल नोटिस

ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है।

Last Modified:
Friday, 31 July, 2026
AAAI65985

ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। इंडस्ट्री की वरिष्ठ प्रोफेशनल तान्या गोयल ने AAAI को कानूनी नोटिस भेजकर उस पर मानहानि, झूठे और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने तथा उनकी पेशेवर छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

सूत्रों के मुताबिक, तान्या गोयल ने AAAI से 29 जुलाई को जारी उसके मीडिया बयान पर स्पष्टीकरण और बिना शर्त सार्वजनिक माफी की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर तय समय के भीतर ऐसा नहीं किया गया तो वह संगठन और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ दीवानी और आपराधिक मानहानि का मामला दायर करेंगी।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब इस साल के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड के चयन को लेकर पहले से ही पारदर्शिता और गवर्नेंस पर सवाल उठ रहे हैं।

AAAI के बयान के बाद बढ़ा विवाद

कुछ दिन पहले AAAI ने एक सख्त मीडिया बयान जारी कर अपने अवॉर्ड चयन प्रक्रिया का बचाव किया था। संगठन ने आरोप लगाया था कि तान्या गोयल अपने पति और विज्ञापन जगत के वरिष्ठ पेशेवर संदीप गोयल के लिए यह सम्मान दिलाने की कोशिश कर रही थीं। AAAI ने यह भी कहा था कि बढ़ते विवाद के बीच उसने पूरी चयन प्रक्रिया की जांच के लिए एक स्वतंत्र पेशेवर संस्था को ऑडिट की जिम्मेदारी सौंपी है।

नोटिस में क्या कहा गया?

सूत्रों के अनुसार, कानूनी नोटिस में तान्या गोयल ने कहा है कि AAAI के प्रेस बयान में उनके खिलाफ झूठे, भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए गए हैं। उनका आरोप है कि इन बयानों को जानबूझकर मीडिया में जारी किया गया ताकि विज्ञापन जगत में उनकी साख को नुकसान पहुंचाया जा सके।

नोटिस में कहा गया है कि AAAI ने बिना किसी ठोस सबूत के यह दिखाने की कोशिश की कि उन्होंने संदीप गोयल के पक्ष में अवॉर्ड प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया। तान्या गोयल का कहना है कि संगठन ने बिना पर्याप्त आधार के ऐसे आरोप लगाए, जिनका उद्देश्य उनकी छवि खराब करना था।

सूत्रों का कहना है कि नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि अवॉर्ड प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों से ध्यान हटाने के लिए AAAI ने एक आलोचक को निशाना बनाया।

'रोल-ओवर' नामांकन पर भी सवाल

कानूनी नोटिस में AAAI की नामांकन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं।

29 जुलाई के अपने बयान में AAAI ने कहा था कि इस वर्ष पांच नए नामांकन मिले थे। इसके अलावा पिछले साल की जूरी ने पांच अन्य नाम—एम. जी. परमेश्वरन, नकुल चोपड़ा, आशीष भसीन, तपस गुप्ता और एल. वी. कृष्णन—को इस साल भी विचार के लिए रखने की सिफारिश की थी। इस तरह जूरी के सामने कुल 10 नाम थे।

तान्या गोयल ने इस तथाकथित 'रोल-ओवर' प्रक्रिया को पारदर्शिता के विपरीत बताया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या इस तरह नाम आगे बढ़ाने का प्रावधान संगठन के नियमों में है और क्या इसकी जानकारी सभी सदस्यों को दी गई थी। नोटिस में यह भी स्पष्ट करने की मांग की गई है कि किन अधिकारों के तहत इन नामों को अगले वर्ष के लिए आगे बढ़ाया गया।

ऑडिट कराने वाली संस्था का नाम क्यों नहीं बताया?

नोटिस में AAAI द्वारा चयन प्रक्रिया की जांच के लिए नियुक्त बाहरी संस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, तान्या गोयल ने पूछा है कि जब AAAI ने सार्वजनिक रूप से ऑडिट कराने की घोषणा की, तो उसने उस संस्था का नाम क्यों नहीं बताया। उनका कहना है कि संस्था का नाम सार्वजनिक न करना, उस पारदर्शिता के दावे को कमजोर करता है जिसकी बात AAAI खुद कर रहा है।

सार्वजनिक माफी की मांग

कानूनी नोटिस में AAAI से कथित मानहानिकारक बयान वापस लेने, बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने और झूठे आरोपों के लिए स्पष्टीकरण देने की मांग की गई है।

तान्या गोयल का कहना है कि यदि संगठन को वास्तव में लॉबिंग का संदेह था, तो उसे पहले शो कॉज नोटिस जारी करना चाहिए था और बोर्ड के सदस्यों को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि AAAI ने ऐसा नहीं किया।

नोटिस में चेतावनी दी गई है कि तय समय के भीतर जवाब नहीं मिलने पर वह मानहानि सहित अन्य कानूनी कार्रवाई करेंगी।

AAAI ने क्या कहा था?

अपने मीडिया बयान में AAAI ने कहा था कि लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड की चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और प्रक्रिया आधारित थी। संगठन का दावा था कि नामांकन और जूरी की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से अपनाई गई।

AAAI ने यह भी आरोप लगाया था कि तान्या गोयल लगातार संदीप गोयल को पुरस्कार दिए जाने की मांग कर रही थीं। संगठन के अनुसार, उन्होंने पहले जूरी का हिस्सा बनने की इच्छा जताई थी, लेकिन बाद में खुद ही इससे अलग हो गईं। AAAI ने यह भी कहा था कि उनका एकमात्र उद्देश्य संदीप गोयल को सम्मान दिलाना था और पुरस्कार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर उन्होंने इसकी गरिमा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।

संगठन ने इस पूरे विवाद की तुलना चुनाव परिणामों पर होने वाले राजनीतिक विवादों से भी की थी और कहा था कि ऐसे मुद्दे इसलिए उठाए जा रहे हैं क्योंकि परिणाम कुछ लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहे।

बढ़ी गवर्नेंस पर बहस

इस कानूनी नोटिस के बाद AAAI की कार्यप्रणाली और गवर्नेंस को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है। पहले से ही विज्ञापन उद्योग के कई लोग लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड की चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता, जूरी की स्वतंत्रता और संस्थागत जवाबदेही पर सवाल उठा रहे हैं।

उधर, इस कानूनी नोटिस पर प्रतिक्रिया के लिए exchange4media ने AAAI से संपर्क किया है। खबर लिखे जाने तक संगठन की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला था। जवाब मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

 

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