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पत्रकारिता में बहरूपियों से सावधान !

बहरूपिया यानी जो वेश बदलने में माहिर हो। माने वह जो दिखता है, वह हो इसकी गारंटी कम है...

समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago

मृत्युंजय त्रिपाठी

युवा पत्रकार ।।

पत्रकारिता में बहरूपियों से सावधान!

बहरूपिया यानी जो वेश बदलने में माहिर हो। माने वह जो दिखता है, वह हो इसकी गारंटी कम है क्योंकि वह वही वेश बनाता है जो उसका नहीं है। हां,चरित्र उसका अपना है, सोच उसकी अपनी है...। तो बहरूपियों के रूप से अधिक उनके चरित्र को पहचाना जाना जरूरी है। उनके व्यवहार को परखना जरूरी है और जरूरी है उनके कर्म का विश्लेषण, क्योंकि वह रूप तो बदल सकते हैं लेकिन कर्म नहीं! ...तो कर्मों से ही पहचान कीजिए। फिर चाहे वह पत्रकारिता के बहरूपिए हों, राजनीति के या धर्म के!

धर्म में कितने ही बहरूपिए हैं जो धंधा करने के लिए आए हैं! पत्रकारिता में कितने ही बहरूपिए हैं जो खास दल की राजनीति करने आए हैं! कितने ही बहरूपिए हैं जो खास विचारधारा को प्रमोट करने आए हैं! राजनीति में कितने ही बहरूपिए हैं जो अपने धर्म-अपनी जाति को बढ़ावा देने आए हैं! माने वे जो हैं, वे नहीं हैं। हां,मगर वे अपना चेहरा बदल सकते हैं, क्षेत्र बदल सकते हैं मगर कर्म नहीं,उद्देश्य नहीं। उन्हें पता है कि उन्हें पहुंचना कहां है! इसलिए कोई पत्रकारिता में है तो पत्रकार नहीं भी हो सकता है,राजनीति में है तो नेता नहीं भी हो सकता है,धर्म में है तो धर्म गुरु नहीं भी हो सकता है... मगर, इन सबके न कर्म छुप सकते हैं और न उद्देश्य। यदि इनके कर्म का सही विश्लेषण आप कर सकें तो आप इनके उद्देश्य भी जान जाएंगे और तब बहरूपिए का वास्तविक पेशा, वास्तविक चेहरा भी पहचान जाएंगे...।

देश को,आम आदमी को,देश के सहज स्वभाव को सबसे अधिक खतरा इन्हीं लोगों से है जो कि जो हैं, वह दिखते नहीं और जो दिखते हैं, वह होते नहीं! इन्हें आम आदमी नहीं पहचान सकता इसलिए जो भी इन्हें पहचान सकता है वह इनकी पहचान कर आम आदमी के सामने बेनकाब जरूर करे। यह पहचानने का काम वैसे तो सबसे अधिक पत्रकारिता का ही है लेकिन अब यही क्षेत्र सबसे अधिक इस समस्या से जूझ रहा है। अब यहां भी बहरूपियों की ही संख्या अधिक है, तो हो सकता है कि वही असली को बहरूपिया साबित कर दें। इसलिए अब खुद जनता को ही अपनी जिम्मेदारी निभानी है। अब सबकी परख, पहचान खुद आपको ही करनी है। पत्रकारिता में खास राजनीतिक, वैचारिक एजेंटों को पहचानने का काम! राजनीति में खास धर्म-जाति के एजेंटों को पहचानने का काम और धर्म में खास राजनीतिक दल-विचारधारा के एजेंटों को पहचानने का काम।

यह सभी बहरूपिए मिलकर हर क्षेत्र को तो संदिग्ध बना ही रहे हैं,देश में अविश्वास का माहौल तैयार कर रहे हैं। हालत यह है कि आम आम आदमी न धर्म गुरु पर भरोसा कर सकता है, न अपने ही चुने नेता पर, न पत्रकार पर। इसलिए हर क्षेत्र के बहरूपिए की पहचान कर, उस क्षेत्र में उसे उपेक्षित, हतोत्साहित करने का काम कीजिए तभी वह क्षेत्र भी कलंकित होने से बचेगा और देश भी। और हां, खुद जनता आप अपने बीच के भी उन बहरूपियों से सावधान रहिए जो कि रहते तो आपके ही बीच में हैं, रखते तो खुद को आपकी श्रेणी में हैं लेकिन होते हैं किसी खास का एजेंट।

अब हर क्षेत्र के इन बहरूपियों को पहचान सकिए तो पहचानिए और जितना हो सकता है इनसे बचिए। 


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