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मीडिया के लिए अभद्र भाषा बोलने वाले राजीव त्यागी कब मागेंगे माफी?
अमर्यादित भाषा शैली के इस्तेमाल का भारतीय राजनीति में जैसे प्रचलन सा चल पड़ा हो...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
अमर्यादित भाषा शैली के इस्तेमाल का भारतीय राजनीति में जैसे प्रचलन सा चल पड़ा हो। मानों अमर्यादित व अपशब्दों के प्रयोग की कतार में हर कोई आगे आने को आतुर हो। अब आलम ये है कि कई राजनेता तो लाइव चैनल पर भी इस तरह की भाषा के इस्तेमाल से गुरेज नहीं करते हैं, जैसे इसे अपनी शान समझते हों। ताजा मामला एक दिन पहले ‘न्यूज18 इंडिया’ पर देखने को भी मिला, जब कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी ने सीनियर न्यूज एंकर अमीष देवगन से अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। हैरान करने वाली बात ये रही कि एंकर के बार-बार मना करने पर भी राजीव त्यागी नहीं रुके, बल्कि मानों, अपने व्यवहार से देश-दुनिया को परिचय कराते हुए वे अपनी एक अलग छवि गढ़ रहे हों, जोकि बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण एवं निन्दनीय है।
लाइव डिबेट में त्यागी के लिए इस तरह की बात कोई नई नहीं है, बल्कि अपनी इस छवि का परिचय वे पहले भी इस साल मई में करा चुके हैं और वह भी इत्तेफाकन ‘न्यूज18इंडिया’ चैनल पर। लेकिन तब उनकी तकरार जाने-माने न्यूज एंकर सुमित अवस्थी से हुई थी। खैर, जो लोग इस तरह के व्यवहार को अपनी शान समझते हों, उनके लिए तो मानों यह व्यहार एक ऐसा फार्मूला हो, जो कहीं भी फंसने पर निकलने का एक अलग मार्ग प्रशस्त करता हो।
वैसे भी कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं के हालिया विवादित बयानों की वजह से कुछ दिनों पहले ही पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी सामने आकर अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को भाषा और व्यवहार की मर्यादा का पाठ पढ़ा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद भी उनकी ये बात तब बहुत ही छोटी हो जाती है जब टीवी चैनलों पर दिखाई देने वाले उनके प्रवक्ताओं का चयन हर कसौटी पर खरा पाकर किया जाता हो। ऐसे में सवाल का सीधा या फिर राजनीति भाषा में कहें तो गोल-मटोल जवाब देने की बजाय गुस्से में अभद्र भाषा का प्रयोग कर अपनी पार्टी का बचाव करना, कई मायनों में पार्टी पर ही प्रश्न चिन्ह लगाता है, क्योंकि इस तरह के अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल के बाद भी न तो पार्टी और न ही खुद राजीव त्यागी माफी मांगते हैं। इसलिए ये सवाल खड़ा होता है कि क्या पार्टी के अंदरखानों में ही एंकर के सवालों से इस तरह के व्यवहार का इस्तेमाल कर बच निकलने का फार्मूला तैयार किया जाता है, या फिर इस तरह का व्यवहार करने वाले राजनेताओं की ये अपनी एक क्रांतिकारी उपज है।
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