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महाकुंभ में राहुल, केजरीवाल ने डुबकी क्यों नहीं लगाई: रजत शर्मा
महाकुंभ मूल रूप से गरीबों और मध्यम वर्ग के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन गया। देश के कोने-कोने से आए करोड़ों लोगों की श्रद्धा की अभिव्यक्ति का मंच बन गया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 11 months ago
रजत शर्मा, इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ।
महाकुंभ का समापन हो गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि यह एकता का महाकुंभ युगपरिवर्तन की आहट है, हजारों साल की गुलामी की मानसिकता को तोड़कर सनातन की भव्य विरासत का विश्वदर्शन है। योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ में तैनात सफाईकर्मियों को सम्मानित किया।
32 हजार सफाईकर्मियों की तैनाती हुई। नदी के किनारे घाटों की सफाई के लिए 1800 गंगादूत तैनात किए गए, डेढ़ लाख टॉयलेट बनाए गए, 50,000 से ज्यादा चेंजिंग रूम्स बनाए गए, घाटों के किनारे कूड़ा डालने के लिए बीस हजार से ज्यादा ट्रैश बिन रखे गए, नदी में कचरा न रहे इसके लिए बड़ी-बड़ी फ्लोटिंग मशीन लगाई गई जो रोज पन्द्रह टन कचरा नदी से निकलती थी। योगी ने 32 हजार सफाईकर्मियों का वेतन 10,000 रुपये से बढ़ाकर 16,000 रुपये करने का ऐलान किया और उन्हें 10,000 रुपये बोनस देने की घोषणा की।
रेलवे ने भी कहा है कि वह अच्छा काम करने वालों को पुरस्कृत करेगा। महाकुंभ का एक और सुनहरा पक्ष है, यहां अमीर गरीब का भेद मिट गया। गरीब आदमी ने खूब पैसे कमाए, अमीरों ने जी खोलकर दान दक्षिणा पर लुटाए। छोटे दुकानदारों, रेहड़ी पटरी लगाने वालों को कितना लाभ हुआ, इसके बहुत सारे उदाहरण हैं।
किसी ने चाय बेचकर 5 हजार रुपये रोज़ कमाए, किसी ने 10 रुपये में चंदन का टीका लगाकर 65 हजार रुपये बनाए, किसी ने दातून बेचकर 40 हजार रुपये कमाने का दावा किया। एक यूट्यूबर वहां जाकर लेमन टी बेचने लगा और 3 लाख रुपये कमाए। कुछ लोगों ने गंगा से सिक्के बटोरे और कइयों को तीस हजार रुपये तक मिल गए।
दूसरी तरफ बड़ी कंपनियों ने लोगों की खूब मदद की। कोका कोला ने प्लास्टिक बोटल्स को रिसाइकिल करके 21 हजार जैकेट्स बनाई और सफाई कर्मचारियों और नाविकों को बांटीं। मैनकाइंड फार्मा ने फ्री मेडिकल कैंप्स लगाए। एवररेडी ने पुलिस को 5 हजार सायरन वाली टॉर्चेज और बैटरीज मुफ्त में दी। गौतम अडानी ने भंडारा लगाया जहां एक लाख लोगों को हर रोज मुफ्त खाना दिया गया।
बड़ी कंपनियों ने तो अपने शटर डाउन कर दिए, लेकिन आज जब खोमचा लगाने वालों, छोटा-मोटा सामान बेचने वालों ने अपनी दुकानें समेटनी शुरू की तो उनकी आंखों में आंसू थे। उन्हें आने वाले दिनों में रोजगार की चिंता थी।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि योगी ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में आने वाले जिन 3 लाख करोड़ रुपयों का जिक्र किया है, उसका लाभ इन सब लोगों को मिलेगा, जिनके लिए महाकुंभ रोजगार का एक बड़ा स्रोत था। इस महाकुंभ से पूरे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिलेगा और प्रयागराज के विकास को पंख लग जाएंगे। महाकुंभ से पहले सनातन की भक्ति की इतनी चर्चा तब हुई थी जब राम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह हुआ था।
लेकिन वहां लोगों को आमंत्रित किया गया था। महाकुंभ में लोग स्वेच्छा से पहुंचे थे। प्राण प्रतिष्ठा समारोह भव्य था। वहां सेलिब्रिटिज थे। महाकुंभ देश के आम आदमी का मेला था। यहां सेलिब्रिटिज और VIPs दिखाई तो दिए पर भीड़ में खो गए।
महाकुंभ मूल रूप से गरीबों और मध्यम वर्ग के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन गया। देश के कोने-कोने से आए करोड़ों लोगों की श्रद्धा की अभिव्यक्ति का मंच बन गया। इतनी बड़ी संख्या में लोग आए कि उसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी। अब इसके राजनीतिक नफे नुकसान की बात होगी। 66 करोड़ श्रद्धालु आए।
उनके सियासी असर की बात होगी। मोदी और योगी को सफल आयोजन का श्रेय मिलेगा तो विरोधियों को बहुत तकलीफ होगी। अखिलेश यादव ने कुंभ में आने वाले लोगों की भावनाओं को समझने में काफी देर की। पहले सवाल उठाते रहे, लेकिन जब भक्तों की भीड़ देखी तो वह भी डुबकी लगा आए ताकि कल कोई ये न पूछ पाए कि वह महाकुंभ में स्नान करने क्यों नहीं गए।
कांग्रेस में 2 तरह के लोग दिखाई दिए। एक तरफ तो डीके शिवकुमार और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे नेताओं ने महाकुंभ में स्नान किया लेकिन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी नहीं आए। मैं हैरान हूं। अगर राहुल गांधी संगम में डुबकी लगा लेते तो क्या बिगड़ जाता? अगर उनका तर्क ये है कि ये उनका पर्सनल मामला है, तो फिर अपनी अनुपस्थिति से होने वाले राजनीतिक नुकसान के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
केजरीवाल ने तो कैमरे पर कहा था कि वो दिल्ली का चुनाव होने के बाद कुंभ जाएंगे पर उनकी लुटिया यहीं डूब गई। अब जब-जब चुनाव होंगे, योगी लोगों को याद दिलाएंगे कि ये सब चुनावी हिंदू हैं। राहुल, केजरीवाल और तेजस्वी यादव जैसे नेताओं के लिए जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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