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नेपाल में बरसों से सुलगता हुआ गुस्सा फूट पड़ा: रजत शर्मा
नेपाल के युवाओं का गुस्सा उबाल पर है। इन्हें मीडिया में GenZ कहा जा रहा है। बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार से तंग आ चुकी जनता सोशल मीडिया पर बैन लगाये जाने के बाद सड़कों पर उतर आई और तख्तापलट कर दिया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 5 months ago
रजत शर्मा , इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ।
नेपाल में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ फूटा जनाक्रोश हिंसक तख्तापलट में बदल गया और दूसरे ही दिन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। काठमांडू, पोखरा सहित तमाम शहरों में संसद भवन, प्रधानमंत्री निवास, राष्ट्रपति भवन, सुप्रीम कोर्ट, राजनीतिक दलों के दफ्तरों और बड़े होटलों को भीड़ ने आग के हवाले कर दिया, मंत्रियों और पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा तक को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया और हालात इतने बिगड़े कि काठमांडू अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा बंद करना पड़ा तथा नेताओं को सेना ने हेलीकॉप्टर से सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया।
सोमवार को पुलिस फायरिंग में 21 युवाओं की मौत और ढाई सौ से ज्यादा के घायल होने से गुस्सा और भड़क गया, मृतकों के सीने पर गोलियां मिलीं और देशभर में आंदोलन "Gen-Z मूवमेंट" के नाम से फैल गया जिसमें 1997 से 2012 के बीच जन्मे डिजिटल युग के युवा शामिल हैं, जो इंस्टाग्राम, यूट्यूब, फेसबुक, ट्विटर और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय रहते हैं और बेरोजगारी व पलायन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
नेपाल की तीन करोड़ की आबादी में करीब सवा करोड़ सोशल मीडिया अकाउंट्स हैं और विदेशी कमाई देश की GDP का 25% है, इसलिए सोशल मीडिया पर तीन सितंबर को लगाए गए बैन ने युवाओं की नाराज़गी को विस्फोटक रूप दे दिया। गुस्साई भीड़ ने सोशल मीडिया पाबंदी के खिलाफ नहीं बल्कि भ्रष्टाचार, महंगाई और नेताओं की चीनपरस्ती के खिलाफ नारे लगाए और ओली सरकार को जनआक्रोश का सामना करना पड़ा।
नेपाल में पिछले 35 साल में 32 सरकारें बन चुकी हैं और पिछले 10 साल में 9 प्रधानमंत्री बदले हैं, जिससे अस्थिरता और गहरी हुई। ओली पर आरोप था कि वे चीन के दबाव में TikTok को छोड़ बाकी प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाकर नेपाल को बीजिंग के नजदीक ले जा रहे थे, जिससे युवाओं में असंतोष बढ़ा। सरकार के भीतर भी संकट गहराया, गृह मंत्री ने इस्तीफा दिया लेकिन आंदोलन थमा नहीं।
ओली ने अपने त्यागपत्र में राजनीतिक समाधान की बात कही और सर्वदलीय बैठक बुलाने का ऐलान किया, लेकिन जनता का भरोसा टूट चुका है। इस पूरे घटनाक्रम ने भारत को भी सतर्क कर दिया है क्योंकि नेपाल से सीमा और रोटी-बेटी का गहरा रिश्ता है, लिहाज़ा सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई है। यह साफ है कि सोशल मीडिया बैन ने सिर्फ चिंगारी का काम किया, असली आग भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और आर्थिक मंदी ने भड़काई, जिसने नेपाल को सबसे बड़े जनआंदोलन और सत्ता परिवर्तन की ओर धकेल दिया।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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