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'मीडिया के लिए सबसे खराब रहा 2022, इन मायनों में बेहतर रहेगा नया साल'
पिछले पांच सालों में देखें तो वर्ष 2022 मीडिया के लिए सबसे खराब साल रहा, जबकि इस साल से उम्मीदें सबसे ज्यादा थीं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
शमशेर सिंह।।
पिछले पांच सालों में देखें तो वर्ष 2022 मीडिया के लिए सबसे खराब साल रहा, जबकि इस साल से उम्मीदें सबसे ज्यादा थीं। लगातार दो साल कोरोना की चपेट में रहा। उसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि यह साल बेहतर होगा। करीब एक साल से ज्यादा समय से बंद टीआरपी भी फिर से शुरू होनी थी, कोरोना से उबरने के बाद रेवेन्यू को लेकर उम्मीदें थीं और जाहिर सी बात है कि जॉब की सुरक्षा का मामला भी था। जॉब के विकल्प और अवसर भी बढ़ते।
वर्ष 2022 में कई नए प्लेयर्स की भी एंट्री होनी थी। यानी सब गदगद थे 2022 को लेकर। उम्मीदें आसमान पर थीं। प्रमोटर की भी, रेवेन्यू से जुड़े लोगों की भी, जॉब करने वालों की भी और जॉब तलाशने वालों की भी।
शुरुआत अच्छी रही, टीआरपी आई, एक विश्वास बना फिर से, रेवेन्यू भी बढ़ा, डिजिटल एक्सपेंशन खूब हुआ, लोगों ने खूब जॉब स्विच किए, भर्तियाँ खूब रहीं, खूब ब्रेक मिले। हर जगह अप्रैजल भी ठीक हुए। हालत ये थी कि लोगों को उस नौकरी में बनाए रखना मुश्किल हो रहा था। लेकिन ये चमक जून के बाद से फीकी पड़ने लगी।
अगस्त तक तो हालात काफी खराब हो गई। टीआरपी को लेकर सवाल उठने लगे, रेवेन्यू,टारगेट से काफी कम आने लगा, हालत बिगड़ने लगी। अक्टूबर आते-आते स्थिति बदतर हो गई। कई चैनल ‘बार्क’ से बाहर हो गए, ‘बार्क’ संदेह के घेरे में आ गया। रेवेन्यू और गिर गया। और फिर कॉस्ट कटिंग के नाम पर छंटनी शुरू हो गई। जिस रफ्तार से साल के शुरू में विस्तार और जॉब के अवसर बढ़े थे, उससे दोगुनी रफ्तार में चैनल बंद होने शुरू हुए। सैकड़ों लोगों को रातों रात निकाल दिया गया। कई संस्थानों ने सैलरी कट की।
रही बात 2023 की तो नए साल को लेकर काफी आशान्वित हूं। इतनी उम्मीद तो है कि आने वाला साल इस साल से बेहतर होगा। कुछ बड़े प्लेयर्स आ रहे हैं। नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे। कई लोग जो अभी बेरोजगार हुए हैं, वो सैटल हो जाएंगे। आम चुनाव का माहौल बनना शुरू हो जाएगा, रेवेन्यू पर असर पड़ेगा और इसमें बढ़ोतरी होगी।
अप्रैजल को लेकर शक है। एक-दो को छोड़ शायद ही कोई ऑर्गेनाइजेशन अपने एंप्लॉयीज को अप्रैजल या Variable pay देने की सोचेगा भी। बार्क को लेकर भी अच्छी खबर आ सकती है। नए सिरे से सब इससे जुड़ सकते हैं। डिजिटल का जबर्दस्त विस्तार होगा। हर लिहाज से डिजिटल बढ़ेगा। कुल मिलाकर यही कह सकते है कि इस साल की क्षतिपूर्ति वर्ष 2023 में होने की उम्मीद है।
(यह लेखक के निजी विचार हैं। लेखक हिंदी न्यूज चैनल ‘भारत24’ के मैनेजिंग एडिटर हैं।)
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