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सीज़फायर का पछतावा शायद सदियों तक बना रहेगा : नीरज बधवार
हम पीओके ले लेंगे, हम पाकिस्तान को सबक सिखाएंगे। सुनने में अच्छा लगता है। आपके वोटर्स में जोश भी भरता है। पहले के लोग तो आतंकी हमलों के बाद कुछ भी नहीं करते थे।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 9 months ago
नीरज बधवार, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक।
पाकिस्तान ने इसलिए सीज़फायर नहीं किया क्योंकि वो शांति चाहता है। वो इसलिए माना क्योंकि उसे पता था कि वो एक भी दिन और लड़ नहीं सकता था। उसने सीज़फायर करके आपके खिलाफ दोबारा लड़ने के लिए मोहलत ले ली है। जिस तरह 71 में माफ कर देने के बाद वो 98 में न्यूक्लियर बम की ब्लैकमेलिंग ले आया था। फिर अगले 20 सालों तक हमने इस ब्लैकमेलिंग में आकर अपने सैकड़ों हज़ारों लोगों की जान गंवाई। उसी तरह वो आपको सताने के लिए फिर कोई नया हथियार बनाएगा। आप फिर उसके उस हथियार के सामने खुद को मजबूर पाएंगे और अपने हज़ारों लोगों को मरता देखते रहेंगे।
कश्मीरी एक्टिविस्ट ने धारा 370 हटने के बाद भी कश्मीर में पंडितों के कश्मीर न लौटने पर कहा था, सरकारों की दिलचस्पी दरअसल समस्याओं को resolve करने में नहीं, उन्हें manage करने में होती है। उन्होंने विस्तार से बताया था कि किस तरह पंडितों को कश्मीर में बसाने के लिए अगर दस चीज़ें ज़रूरी हैं तो उसमें धारा 370 का हटना एक चीज़ है। लेकिन बाकी 9 का क्या हुआ। वो वहां बसे या नहीं... नहीं बसे तो क्यों नहीं। इसकी किसी को परवाह नहीं।
मेरा भी मानना है कि कश्मीर में टूरिस्टों की संख्या दिखाकर कश्मीर में जिन सामान्य हालात का दावा किया जाता है वो भी एक managed शांति है। आप एक बार पंडितों को बसाने की कोशिश कीजिए उस शांति की पोल आधे दिन में खुल जाएगी। और उन्हें बसाने की कोशिश कर सरकार शांति के उस भ्रम को तोड़ना नहीं चाहती। मतलब आप समस्या की आंख में आंख डालकर उसे address नहीं कर रहे। उसे सुलझाने की इच्छाशक्ति नहीं दिखा रहे। बस उस हद तक जा रहे हैं जहां लगे कि समस्या manage हो गई है।
हम POK ले लेंगे, हम पाकिस्तान को सबक सिखाएंगे... सुनने में अच्छा लगता है। आपके वोटर्स में जोश भी भरता है। पहले के लोग तो आतंकी हमलों के बाद कुछ भी नहीं करते थे, हमने देखो कितना कर दिया ये भी अच्छा लगता है। पहले वालों की अकर्मण्यता ने आपको खुद को बेहतर बताने का मौका दे दिया, ये भी आपके लिए अच्छा है।
मगर एक हज़ार साल के इतिहास से सबक न लेकर अगर आप भी वो गलती करें जो आज तक बाकी करते आए हैं, तो कहानी बदलने वाली नहीं है। आप भी समस्या को manage कर रहे हैं, उसे resolve नहीं कर रहे। पहलगाम के बाद भारत-पाकिस्तान में शुरू हुआ तनाव अगर इसी सीज़फायर पर ख़त्म हो जाता है, तो ये भारत की ऐतिहासिक चूक होगी। ऐसी चूक जिसका पछतावा शायद सदियों तक बना रहेगा।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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