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संसद की सुरक्षा में सेंध पर बोले रजत शर्मा, असली मास्टरमाइंड का पता लगाएं
पता चला है कि संसद में बड़ा हंगामा करने की प्लानिंग एक साल पहले से बन रही थी। पांचों आरोपित करीब एक साल से लगातार एक ऐप के जरिए संपर्क में थे।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
रजत शर्मा, चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ (इंडिया टीवी)
दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया है कि संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने का मामला एक आतंकवादी घटना है और इसके पीछे बड़ी साजिश हो सकती है। ये काम चार-छह लोगों का नहीं है, इसमें और भी लोग शामिल सकते हैं। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार चारों आरोपितों के खिलाफ आंतकवाद की दफाओं में ही केस दर्ज किया है। जो रिमांड आवेदन कोर्ट में पेश किया गया है, उसमें दिल्ली पुलिस ने कहा है कि इस मामले की प्लानिंग लम्बे वक्त से चल रही थी, संसद की दो बार रेकी की जा चुकी थी। दिल्ली पुलिस का दावा है कि संसद में बुधवार को जो कुछ हुआ, उसका मकसद डर फैलाना था।
कोर्ट ने सभी आरोपितों को सात दिन के लिए स्पेशल सेल की रिमांड में भेजा है और कहा है कि जरूरत पड़ने पर रिमांड बढ़ाई जा सकती है। गुरुवार रात को इस केस के कथित मास्टर माइंड ललित झा ने दिल्ली के कर्तव्य पथ थाने में जाकर सरेंडर कर दिया। ललित झा घटना के बाद चारों आरोपितों के सेलफोन लेकर राजस्थान के नागौर भाग गया था। जो चार आरोपित पुलिस की गिरफ्त में हैं, उनके बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पूरे प्लान की कड़ियां जुड़ गई हैं। पता चला है कि संसद में बड़ा हंगामा करने की प्लानिंग एक साल पहले से बन रही थी।
पांचों आरोपित करीब एक साल से लगातार एक ऐप के जरिए संपर्क में थे। ये सभी तीन दिन पहले ही दिल्ली पहुंच गए थे। तीन महीने पहले ही संसद भवन की रेकी हो चुकी थी। जो बातें सामने आई हैं, उससे इतना साफ हो गया कि संसद में जो सेंध लगी, वो सुरक्षाकर्मियों की तरफ से गंभीर चूक थी।
लापरवाही के आरोप में संसद के 8 सुरक्षा अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। शुरुआती जांच से जो जानकारी मिली है, उससे इस बात की पुष्टि हुई है कि जिन लोगों ने संसद में आतंक मचाया, उनके पीछे कोई बड़ी ताकत है। इस मामले से जुड़े सभी लोग साधारण परिवारों से हैं, उनकी कमाई का कोई खास साधन नहीं है, पर इस शर्मनाक हरकत के लिए उनके पास पैसे की कोई कमी नहीं थी।
साल भर तक तैयारी करने के लिए ये लोग देशभर में इधर से उधर घूमते रहे। जो 6 लोग इस अपराध में शामिल थे, वे पढ़े-लिखे हैं, जागरूक हैं, वे जानते थे कि वो जो कर रहे हैं, उसकी सज़ा क्या है। फिर भी वो इसमें क्यों कूदे? वो क्या हासिल करना चाहते थे? इसका जवाब मिलना बाकी है।
ये बात भी पता चलना जरूरी है कि इन लोगों का इस्तेमाल करने वाले कौन थे और संसद में आतंक फैलाने के पीछे मकसद क्या था?
(यह लेखक के निजी विचार हैं)
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