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'हैप्पी बर्थडे चित्रा त्रिपाठी, यही खूबियां बनाती हैं आपको दूसरों से खास'
चित्रा सिर्फ रिपोर्टिंग ही नहीं करतीं, बल्कि उसके माध्यम से आम जनता के बीच जाकर उनके दुख-दर्द को टटोलती हैं और उन्हें दूर करने का प्रयास करती हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
मालविका हरिओम, कवयित्री व सामाजिक कार्यकर्ता।।
उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर गोरखपुर से निकलने वाली एक बड़ी शख्सियत के रूप में चित्रा त्रिपाठी ने न सिर्फ अपने शहर और अपने प्रदेश का ही नाम रोशन किया, बल्कि उन सभी लोगों को गर्व की अनुभूति भी करवाई, जो कभी न कभी, किसी न किसी रूप में उनसे जुड़े रहे। उनकी मम्मी पढ़ी-लिखी होने के बावजूद तमाम दूसरी भारतीय महिलाओं की तरह घर पर ही रहीं। सिर्फ परिवार को देखा और अपने सपनों को तिलांजलि दे दी, लेकिन वे अपनी बेटी चित्रा में लगातार कुछ अच्छा करने और आगे बढ़ने की ललक को भरती रहीं। यही कारण है कि कुछ अच्छा करने का जज्बा जन्म के साथ ही मां के आशीर्वाद के रूप में चित्रा को मिल गया और फिर उस सफर को देखें तो जिन छोटी जगहों के बच्चे ठीक से शिक्षा भी प्राप्त नहीं कर पाते, वहां से एक लड़की अपने दम पर धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और एक दिन उस ऊंचाई पर पहुंच जाती है, जहां से दुनिया उसे आसानी से देख सके।
सुंदर चेहरा, विनम्र स्वभाव, संवेदनशील हृदय और कुछ कर गुजरने का जज्बा, इन सबको मिलाकर चित्रा की एक ऐसी तस्वीर तैयार होती है जो श्रोताओं और दर्शकों को एक अपनत्व और जुड़ाव का अहसास कराती है। चित्रा सिर्फ रिपोर्टिंग ही नहीं करतीं, बल्कि उसके माध्यम से आम जनता के बीच जाकर उनके दुख-दर्द को टटोलती हैं और उन्हें दूर करने का प्रयास करती हैं। सोशल मीडिया पर उनके भावनात्मक लाइव प्रसारण उनकी सकारात्मक छवि को स्थापित और पुख्ता करते हैं।
आज चित्रा एक सेलिब्रिटी हैं। लेकिन मुझे याद आती है वो प्यारी चित्रा, जिसे मैंने गोरखपुर में उसके संघर्ष के दिनों में देखा था। वहां कई नए लड़के-लड़कियां जो बतौर रिपोर्टर अखबारों में काम करते थे, घर आया करते थे। पतिदेव डॉ. हरिओम उन दिनों जिलाधिकारी गोरखपुर के पद पर तैनात थे और हम दोनों ही चूंकि सांस्कृतिक गतिविधियों में रुचि लेते थे, इसलिए कोई न कोई घर पर इंटरव्यू लेने या बातचीत करने जरूर आ जाता था। इसी सिलसिले में एक दिन चित्रा का भी आना हुआ। लॉन में दो कुर्सियाँ लगाई गईं। उन दिनों वहां एक लोकल चैनल 'सत्या' हुआ करता था। चित्रा उसी में खबरें पढ़ती थीं। सुंदर चेहरा, चमकती आंखें, गर्दन तक कटे हुए छोटे-छोटे बाल, नई उम्र का उत्साह, गज़ब का आत्मविश्वास और कुछ कर गुजरने का जज्बा, ये सबकुछ एकसाथ मुझे उस लड़की में नज़र आया। ज़िलाधिकारी का इंटरव्यू लेने के नाते चित्रा पूरी तैयारी के साथ आई थी। हाथ में ढेर सारे पन्ने, उन पर लिखे हुए सवाल और चेहरे पर हमेशा की तरह एक प्यारी-सी मुस्कुराहट। इंटरव्यू बहुत अच्छा हुआ। चित्रा ने साबित कर दिया कि ख़ूबसूरत चेहरे के साथ-साथ उसमें क़ाबिलियत भी भरपूर है।
फिर एक दिन किसी काम से जब ‘सत्या’ चैनल पर जाना हुआ तो गर्मी के दिनों में दूसरे फ्लोर पर, एक कमरे के छोटे-से स्टूडियो में चित्रा खबरें पढ़ने के लिए तैयार खड़ी थी। गर्मी की वजह से चेहरे पर काफ़ी पसीना आ रहा था। मैंने देखा कि वो खबरों की तैयारी के साथ-साथ, अपने मेकअप का काम भी ख़ुद ही देख रही थी। हम दोनों मिले, थोड़ी-सी बात हुई और उसके बाद वो अपने समाचार प्रसारण की तैयारी में लग गई। मैं देखती ही रह गई कि इतनी छोटी-सी लड़की में कितना आत्मविश्वास है और काम के प्रति कितनी लगन और ईमानदारी है। समाचार पढ़ने में अभी वक़्त था लेकिन चित्रा को खाली बैठना गंवारा नहीं था। वह कुर्सी पर बैठ गयी और समाचार पढ़ने की रिहर्सल करने लगी। जब मैंने उसकी ओर देखा तो वो मुस्कुराई। वो मुस्कुराहट मुझे आज तक याद है।
आज चित्रा मेरी छोटी बहन की तरह है। हम लोग फोन पर बात करते हैं, मिल भी लेते हैं। जब भी उसको देखती हूं तो यही लगता है कि लड़कियां अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। अच्छी सोच हो, काम के प्रति निष्ठा हो और कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो छोटे शहरों से आई लड़कियां भी देश-दुनिया की तमाम लड़कियों के लिए प्रेरणा बन सकती हैं। चित्रा ने यह कर दिखाया। आज 'चित्रा त्रिपाठी' सिर्फ़ एक नाम नहीं बल्कि एक 'प्रेरणा' है, उन तमाम लड़कियों के लिए जो न सिर्फ अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हैं बल्कि समाज-दुनिया की बेहतरी के लिए कुछ अच्छा और सकारात्मक भी करना चाहती हैं।
जन्मदिन की अनंत शुभकामनाओं के साथ प्रिय चित्रा के लिए मेरी ये पंक्तियां-
ऊंची लहरों पे चढ़ के आई हूं
मैं जमाने से लड़ के आई हूं
मुफ्त का ज्ञान ना थोपो मुझपर
अपने हिस्से का पढ़ के आई हूं
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