‘अगर देश ही नहीं रहा तो पत्रकारिता कहां होगी?’

कोरोना की इस भीषण आपदा में पत्रकारिता के तमाम अवतार यदि व्यवस्था की नाकामियों को उजागर करते हैं तो इसे राष्ट्रीय हित से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।

Last Modified:
Tuesday, 11 May, 2021
Reporter554


राजेश बादल, वरिष्ठ पत्रकार ।। देश के हित और अभिव्यक्ति के सरोकार  लोकतंत्र में कोई भी महत्वपूर्ण स्तंभ सौ फीसदी निर्दोष नहीं हो सकता। इस नि...
Read More
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए