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ZEE-Sony मर्जर डील को लेकर अब तलाशने होंगे इन सवालों के जवाब: डॉ. अनुराग बत्रा

‘सोनी’ और ‘जी’ दोनों ही बड़े ब्रैंड्स हैं। ऐसे में इन दोनों का विलय देश की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक ऐसे बड़े नाम और ब्रैंड का निर्माण करेगा, जो धमाल मचा देगा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago

डॉ. अनुराग बत्रा।।

विलियम शेक्सपियर ने कहा था कि नाम में क्या रखा है? ऐसे में मैं अक्सर लोगों से पूछता हूं कि क्या वे पांच मिलियन डॉलर के लिए अपना नाम बदल देंगे? मेरा मानना है कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि क्या आपने यह सवाल किसी ऐसे व्यक्ति से पूछा है, जिसके बैंक खाते में 50 मिलियन डॉलर से ज्यादा हैं अथवा उसने अपनी ब्रैंड वैल्यू इतनी बनाई है। नाम हमारी पहचान है। हम जीवन भर अपने नाम, जो हमारी पहचान भी है, उससे गहराई से जुड़े रहते हैं। नाम हमारा ब्रैंड होता है। नाम से ही पता चलता है कि हम कौन हैं और लोग हमें किस नाम से बुलाते हैं। नाम से ही लोगों की हमसे अपेक्षाएं होती हैं और संबंध बनते हैं और आगे बने रहते हैं। यानी हम कह सकते हैं कि हमारे जीवन में नाम बहुत ज्यादा मायने रखता है।

अब बात करें ‘सोनी’ (Sony) और ‘जी’ (ZEE) के होने वाले विलय में तो देश में मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का यह सबसे बड़ा विलय पूरा होने के कगार पर है। ‘सोनी’ और ‘जी’ दोनों ही मल्टीप्लेटफॉर्म्स वाले काफी बड़े नाम हैं, जिनकी एक ब्रैंड आइडेंटिटी और व्युअर्स संख्या है, जो उनके साथ जुड़ी हुई है।  

शब्दों में और नाम में काफी शक्ति होती है। ‘सोनी’ और ‘जी’ दोनों ही बड़े ब्रैंड्स हैं। मार्केट में ‘जी’ लगातार काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। ऐसे में ‘सोनी’ और ‘जी’ का विलय देश की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक ऐसे बड़े नाम और ब्रैंड का निर्माण करेगा, जो धमाल मचा देगा।  

मैं यह पहले भी लिख चुका हूं कि इन दोनों के बीच होने वाला विलय सभी हितधारकों (stakeholders), व्युअर्स, ऐडवर्टाइजर्स और ओमनी ब्रॉडकास्टिंग ईकोसिस्टम के लिए काफी अच्छी बात है। अब जब हमने नाम और इसके महत्व के बारे में चर्चा की है तो अब लाखों-करोड़ों का सवाल यह भी बनता है कि ‘सोनी’ और ‘जी’ के विलय के बाद जो नई इकाई (entity) बनेगी, उसका नाम क्या होगा। क्या यह सोनी इंडिया और जी टेलिफिल्म्स की संयुक्त रूप से एक इकाई होगी।  

‘जी’ बहुत ही बड़ा कंज्यूमर ब्रैंड है। यह देश और अपने व्युअर्स के लिए गर्व का विषय है। विज्ञापनदाता (Advertisers) और निवेशक (investors) इस पर बहुत ही ज्यादा भरोसा करते हैं और इसने सभी दिशाओं में बहुत ही बेहतर प्रदर्शन किया है। 25 नवंबर 1982 को स्थापित ‘जी’ अपने 41वें वर्ष में है। मैं इस बात पर ध्यान दिलाना चाहूंगा कि इस विलय के बाद ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज’ का नई इकाई में विलय हो जाएगा। ऐसे में दो बड़े सवाल उठना लाजिमी है।

पहला ये कि इस विलय के बाद जो नई इकाई बनेगी, क्या उसका नया नाम रखा जाएगा? इसका जवाब ‘हां’ है। दूसरा बड़ा सवाल यह उठता है कि उस नई इकाई का नाम क्या होगा? आपको बता दूं कि कुछ समय पहले जब मैं सैम बलसारा के यहां एक कार्यक्रम में एनपी सिंह से मिला था, तो मैंने उनसे इस बारे में सवाल पूछा था। इस सवाल का एनपी सिंह ने सटीक जवाब नहीं दिया था और कहा था कि वह इस बारे में सोच रहे हैं। निश्चित रूप से कोई नया नाम ही रखा जाएगा।   

मुझे विश्वास है कि आप जानते होंगे कि सोनी पिक्चर्स का मुख्यालय यूनाइटेड स्टेट्स के कैलिफोर्निया स्थित कल्वर सिटी में है, इसलिए इसका नाम कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट रखा गया है। इसमें प्रमुख एग्जिक्यूटिव्स की बात करें तो एनपी सिंह एमडी और सीईओ हैं, नितिन नाडकर्णी सीएफओ और अशोक नंबिसन जनरल काउंसिल हैं।

सोनी के पास ‘सोनी पिक्चर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से मीडिया कंज्यूमर फ्रेंचाइजी भी है। सोनी एक बड़ा ब्रैंड है और भारत में 27 साल से अधिक समय से अपने काम से इसने अपनी काफी मजबूत स्थिति बनाई है। सोनी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के साथ जुड़कर इसने अपनी स्थिति और मजबूत की है। ऐसे में ‘यक्ष प्रश्न’ उठता है कि विलय के बाद बनने वाली कॉरपोरेट इकाई का नाम क्या होना चाहिए? हालांकि, इस बारे में मुझे भी कुछ नहीं पता है। हमें आने वाले दिनों में इसके बारे में जानने को मिलेगा।

हालांकि, इस बात का मुझे पूरा भरोसा है कि ‘जी’ एक ऐसा नाम है, जिस पर देश के निवेशकों ने दांव लगाया है और यह अच्छा विचार होगा कि ऐसा नाम पेश किया जाए, जिसमें ‘सोनी’ और ‘जी’ दोनों ही ब्रैंड हों। ‘जी’ देश में एक बड़ा ब्रैंड है, फिर चाहे बात शहरी अथवा ग्रामीण क्षेत्रों की ही क्यों न हो। देश में ‘सोनी’ जितने समय से है, उससे थोड़ा ज्यादा समय से ‘जी’ यहां है। तो क्या इस नई बनने वाली इकाई का नाम ‘सोनी-जी इंडिया’ (Sony-Zee India) होना चाहिए?

दूसरा सवाल यह है कि क्या प्लेटफॉर्म्स और चैनल का नाम बदला जाना चाहिए? इसके लिए मैं कह सकता हूं कि कंज्यूमर्स और व्युअर्स को इन बड़े ब्रैंड्स व प्लेटफार्म्स का काफी अनुभव रहा है। ऐसे में ब्रैंड फ्रेंचाइजी को बरकरार रखना सही होगा।

पिछले तीन दशकों की बात करें तो ‘जी’ और ‘सोनी’ ने व्युअर्स के बीच अपना नाम और अपनी पहचान बनाने में काफी निवेश किया है और इन बड़े ब्रैंड फ़्रैंचाइजी में व्युअर्स के विश्वास को बनाए रखना सबसे अच्छा होगा। 

इस समय मार्च चल रहा है और आदर्श रूप में देखा जाए तो विलय की प्रक्रिया को मार्च के आखिर अथवा अप्रैल के शुरू में पूरा किया जाना है। मुझे उम्मीद है कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी।  

अब देखना यह है कि कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट और जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज किस नाम को जन्म देते हैं। मुझे यकीन है कि यह एक ऐसा नाम होगा, जो ‘जी’ और ‘सोनी’ दोनों मजबूत ब्रैंड्स पर आधारित होगा।

(मूल रूप से अंग्रेजी में लिखे इस आर्टिकल को आप exchange4media.com पर पढ़ सकते हैं। लेखक ‘बिजनेसवर्ल्ड’ समूह के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ समूह के फाउंडर व एडिटर-इन-चीफ हैं। लेखक दो दशक से ज्यादा समय से मीडिया पर लिख रहे हैं।)


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