शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों की कीमत में हाल में आई गिरावट के बीच जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEEL) ने 12 नवंबर 2026 को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक बुलाई है।
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Vikas Saxena
शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों की कीमत में हाल में आई गिरावट के बीच जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEEL) ने 12 नवंबर 2026 को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक बुलाई है। इस बैठक में निवेशकों की चिंताओं और शेयरों में गिरावट को लेकर उनके विचारों पर चर्चा की जाएगी। साथ ही, निवेशकों का भरोसा मजबूत करने और लंबे समय में शेयरधारकों के लिए बेहतर मूल्य तैयार करने के उपायों पर भी विचार होगा।
कंपनी ने 6 नवंबर को शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि बोर्ड की बैठक में कई प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। इनमें कंपनी के पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयरों का बायबैक (Buyback) और अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) देने का प्रस्ताव भी शामिल है। इनके अलावा, कंपनी और उसके शेयरधारकों के हित में कोई अन्य उपयुक्त कदम उठाने पर भी विचार किया जा सकता है।
हालांकि, कंपनी ने साफ किया है कि अभी इनमें से किसी भी प्रस्ताव पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। इन पर अंतिम निर्णय 12 नवंबर को होने वाली बोर्ड बैठक में विचार और मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा। बैठक के नतीजे की जानकारी कंपनी लागू नियमों के मुताबिक शेयर बाजारों को देगी।
कंपनी ने यह भी बताया कि सेबी के इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों और कंपनी की आचार संहिता के तहत उसके नामित लोगों और उनके करीबी रिश्तेदारों के लिए शेयरों में कारोबार की विंडो बंद रहेगी। यह पाबंदी बोर्ड बैठक के नतीजे की घोषणा के 48 घंटे बाद तक लागू रहेगी।
जी एंटरटेनमेंट (ZEEL) के CEO पुनीत गोयनका ने दूसरी तिमाही के नतीजों पर कॉन्फ्रेंस कॉल में कंपनी की रणनीति, स्पोर्ट्स और डिजिटल बिजनेस में निवेश, ZEE5 की ग्रोथ और भविष्य की योजनाओं पर बात की।
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Vikas Saxena
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEEL) के CEO पुनीत गोयनका ने कंपनी के वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजों पर हुई कॉन्फ्रेंस कॉल में कारोबार की रणनीति, स्पोर्ट्स और डिजिटल बिजनेस में निवेश, ZEE5 की ग्रोथ, टीवी कारोबार, विज्ञापन से होने वाली कमाई और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि कंपनी ने दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर ऑपरेटिंग रेवेन्यू में 13% की बढ़ोतरी दर्ज की है। उनके मुताबिक, यह ग्रोथ मुख्य रूप से स्पोर्ट्स बिजनेस में किए गए भविष्य को ध्यान में रखकर किए गए निवेश का नतीजा है।
30 अक्टूबर को हुई इस कॉन्फ्रेंस कॉल में गोयनका ने कहा कि दूसरी तिमाही कंपनी के लिए ग्रोथ, भविष्य को ध्यान में रखकर किए गए रणनीतिक निवेश और दर्शकों को बेहतर अनुभव देने वाले रचनात्मक फैसलों की तिमाही रही। उन्होंने कहा कि वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद कंपनी ने अपनी उद्यमशीलता, दूरदर्शी सोच और सावधानी से लिए गए फैसलों के दम पर बेहतर प्रदर्शन किया।
FIFA वर्ल्ड कप से डिजिटल बिजनेस को मिला फायदा
गोयनका ने कहा कि कंपनी के स्पोर्ट्स बिजनेस में किए गए समय पर और रणनीतिक निवेश से उसे कई स्तरों पर फायदा हुआ है। FIFA वर्ल्ड कप के प्रसारण ने न सिर्फ दर्शकों को बेहतर अनुभव दिया, बल्कि डिजिटल बिजनेस की ग्रोथ में भी अहम योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि FIFA के लाइव मैचों के साथ प्री-मैच और पोस्ट-मैच कार्यक्रमों ने दर्शकों को टीवी और डिजिटल, दोनों प्लेटफॉर्म पर जोड़े रखा। इस पहल से कंपनी के प्लेटफॉर्म पर नए दर्शक आए और स्पोर्ट्स बिजनेस के लिए मजबूत आधार तैयार हुआ। खासतौर पर हाल ही में शुरू किए गए Unite8 Sports चैनलों को इससे मजबूती मिली।
गोयनका ने बताया कि कंपनी ने अपने स्पोर्ट्स कंटेंट को और मजबूत करने के लिए जर्मनी की फुटबॉल लीग Bundesliga और इटली की फुटबॉल लीग Serie A के प्रीमियम अधिकार भी हासिल किए हैं। इससे दर्शकों को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बेहतर और व्यापक स्पोर्ट्स कंटेंट उपलब्ध कराया जा सकेगा।
हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि स्पोर्ट्स समेत कंपनी के किसी भी बिजनेस में निवेश का फैसला सोच-समझकर लिया जाता है। कंपनी का ध्यान लंबे समय की रणनीति और मुनाफे पर बना रहेगा।
ZEE5 की कमाई दोगुनी, सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू में 30% बढ़ोतरी
डिजिटल बिजनेस पर बात करते हुए गोयनका ने कहा कि ZEE5 ने दूसरी तिमाही में कई भाषाओं में नया कंटेंट पेश किया। दर्शकों ने इस कंटेंट को पसंद किया, जिससे प्लेटफॉर्म पर उनकी भागीदारी और बिताया जाने वाला समय बढ़ा है। उन्होंने बताया कि ZEE5 का रेवेन्यू सालाना आधार पर दोगुना हो गया है।
उनके मुताबिक, अलग-अलग भाषाओं के मनोरंजन कंटेंट और ग्लोबल स्पोर्ट्स कंटेंट की वजह से कंपनी की कुल सब्सक्रिप्शन कमाई में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है। इसमें सालाना आधार पर 30% का इजाफा दर्ज किया गया।
गोयनका ने कहा कि कंपनी खुद को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार कर रही है। उसका लक्ष्य विश्वस्तरीय कंटेंट और आधुनिक तकनीक के दम पर दर्शकों का ध्यान आकर्षित करना और उससे होने वाली कमाई में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि कंपनी अपने कारोबार में तकनीक आधारित नए बदलाव ला रही है, ताकि कामकाज की क्षमता बढ़ाई जा सके और दर्शकों को बेहतर अनुभव दिया जा सके। कंटेंट कंपनी होने के नाते दर्शकों को उनकी पसंद के मुताबिक कंटेंट उपलब्ध कराना और प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल आसान बनाना जरूरी है। इसमें तकनीक की अहम भूमिका होगी।
गोयनका ने यह भी बताया कि कंपनी अलग-अलग विभागों में तकनीकी विशेषज्ञों और बेहतर प्रतिभाओं को जोड़ रही है, ताकि जरूरी बदलावों को सही तरीके से लागू किया जा सके।
टीवी कारोबार में फिक्शन के साथ नॉन-फिक्शन पर भी जोर
टीवी कारोबार पर बात करते हुए गोयनका ने कहा कि कंपनी के फिक्शन शोज की कहानियां दर्शकों का ध्यान खींच रही हैं। इसके साथ ही कंपनी ने नॉन-फिक्शन कंटेंट को मजबूत करने के लिए भी काफी समय और मेहनत लगाई है।
उन्होंने कहा कि Zee ने देश की अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों की क्षमता को काफी पहले पहचाना था। कंपनी का कंटेंट देश की विविध परंपराओं, रीति-रिवाजों और मान्यताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है। नॉन-फिक्शन शोज को लेकर भी कंपनी की रणनीति दर्शकों की पसंद और उनकी जरूरतों को समझने पर आधारित है।
गोयनका ने बताया कि तिमाही के दौरान कंपनी ने अलग-अलग भाषाओं में कई अहम नॉन-फिक्शन कार्यक्रम शुरू किए। इनमें 'सा रे गा मा पा' भी शामिल है। उन्होंने इसे कंपनी के प्रमुख नॉन-फिक्शन शोज में से एक बताया, जिसने देशभर में कई बेहतरीन प्रतिभाओं को पहचान दिलाई है।
इसके अलावा, कंपनी अपने पुराने और लोकप्रिय शो 'जीना इसी का नाम है' को भी नए अंदाज में तैयार कर रही है। इसके जरिए दर्शकों को उनकी पसंदीदा हस्तियों की जिंदगी की खास झलक देखने को मिलेगी।
उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री के मान्यता प्राप्त आंकड़ों के आधार पर Zee नेटवर्क की शेयर हिस्सेदारी 20% से ऊपर पहुंच गई है। गोयनका ने इस आंकड़े को रेखांकित करते हुए कहा कि यह कंपनी के फिक्शन और नॉन-फिक्शन कंटेंट की मजबूती को दिखाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि इंडस्ट्री में रेटिंग सिस्टम दोबारा शुरू होने का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन कंपनी का ध्यान दर्शकों को अच्छा कंटेंट देने पर है। उनके मुताबिक, दर्शक किसी चैनल को सिर्फ रेटिंग या नंबर देखकर नहीं चुनते, बल्कि इस आधार पर पसंद करते हैं कि उसका कंटेंट उनके दिल को कितना छूता है।
विज्ञापन से होने वाली कमाई में गिरावट थमी
विज्ञापन कारोबार पर गोयनका ने कहा कि कंपनी ने दूसरी तिमाही में विज्ञापन से होने वाली कमाई में गिरावट को स्थिर करने में सफलता हासिल की है। उन्होंने माना कि महंगाई, कमजोर मानसून और दूसरे बाहरी कारणों की वजह से आर्थिक माहौल में सुस्ती बनी हुई है। इसके बावजूद कंपनी को उपभोक्ताओं की मांग से जुड़े कुछ सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कंपनी बदलते कारोबारी माहौल के हिसाब से खुद को ढाल रही है और विज्ञापन से कमाई के नए रास्ते तलाश रही है। इसके लिए रणनीतिक साझेदारियों पर भी काम किया जा रहा है, ताकि विज्ञापन के बदलते बाजार में कंपनी के लिए ज्यादा मौके तैयार किए जा सकें।
कॉन्फ्रेंस कॉल के सवाल-जवाब सत्र में जब उनसे पूछा गया कि क्या दूसरी छमाही में विज्ञापन से होने वाली कमाई में मौजूदा स्थिरता बनी रह सकती है, तो गोयनका ने कहा कि कंपनी को उम्मीद है कि दूसरी छमाही में विज्ञापन रेवेन्यू को बनाए रखा जा सकेगा और इसमें आगे कोई बड़ी गिरावट नहीं आएगी।
फिल्मों और म्यूजिक बिजनेस में भी विस्तार
फिल्म कारोबार पर बात करते हुए गोयनका ने बताया कि Zee Studios ने गुजराती बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। इसके तहत स्टूडियो ने फैमिली कॉमेडी-ड्रामा फिल्म 'टॉम एंड चेरी' बनाई है।
उन्होंने कहा कि Zee Studios ने हिंदी के साथ मराठी, तेलुगु, तमिल, मलयालम, कन्नड़ और दूसरी भाषाओं में भी फिल्मों के जरिए अपने कंटेंट की पेशकश को मजबूत किया है।
म्यूजिक बिजनेस में भी कंपनी की रणनीति अलग-अलग भाषाओं में अपने कंटेंट का विस्तार करने की है। गोयनका ने बताया कि Zee Music Company ने इस दिशा में कुछ अहम कंटेंट अधिग्रहण किए हैं। कंपनी आगे भी अपने म्यूजिक कैटलॉग को बढ़ाएगी और अपने पूरे बिजनेस नेटवर्क में अलग-अलग तरह के म्यूजिक कंटेंट की पेशकश पर ध्यान देगी।
बच्चों के कंटेंट, लाइव इवेंट और माइक्रो ड्रामा से नई ग्रोथ की उम्मीद
गोयनका ने कहा कि कंपनी अपने मौजूदा कारोबार को मजबूत करने के साथ नए बिजनेस तैयार करने के बीच संतुलन बनाकर चल रही है। बच्चों के कंटेंट, लाइव एक्सपीरियंस, एनिमेटेड कंटेंट, माइक्रो ड्रामा और स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में कंपनी की रणनीतिक पहल भविष्य में ग्रोथ के अहम मौके बन सकती हैं।
उन्होंने माना कि इनमें से कई नए कारोबार फिलहाल निवेश के दौर में हैं। इसलिए इन पहलों को तुरंत मिलने वाले फायदे के बजाय लंबे समय की ग्रोथ और बाजार में प्रतिस्पर्धी बढ़त के नजरिए से देखा जाना चाहिए।
गोयनका ने कहा कि कंपनी ने दूसरी तिमाही का समापन सकारात्मक स्थिति में किया है और उन्हें उम्मीद है कि आगे भी इस गति को बनाए रखा जा सकेगा।
FIFA से हुई कमाई का ब्योरा देने से किया इनकार
सवाल-जवाब के दौरान एक निवेशक ने पूछा कि FIFA वर्ल्ड कप से कंपनी को टीवी और ZEE5 पर कितनी कमाई हुई और अगर FIFA का योगदान हटा दिया जाए तो तिमाही के नतीजे कैसे दिखते।
इस पर गोयनका ने कहा कि FIFA से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा टीवी और डिजिटल, दोनों प्लेटफॉर्म पर सब्सक्रिप्शन से आया है। फुटबॉल में विज्ञापन के लिए उपलब्ध समय सीमित होता है, इसलिए इस तरह के कंटेंट से विज्ञापन के मुकाबले सब्सक्रिप्शन के जरिए ज्यादा कमाई होती है।
हालांकि, उन्होंने FIFA से हुई कमाई का अलग-अलग आंकड़ा बताने से इनकार किया। उन्होंने इतना जरूर कहा कि इस प्रॉपर्टी से कंपनी को अच्छी कमाई हुई है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या स्पोर्ट्स कंटेंट की वजह से टीवी सब्सक्रिप्शन में भी बढ़ोतरी हुई है, तो गोयनका ने कहा कि इसका असली फायदा अगले वित्त वर्ष में दिखाई देगा। फिलहाल टीवी बिजनेस के ज्यादातर सब्सक्रिप्शन समझौते पहले से तय हैं, इसलिए अकेले टीवी बिजनेस में तुरंत ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है।
उन्होंने कहा कि Bundesliga और दूसरी स्पोर्ट्स प्रॉपर्टी जुड़ने से कंपनी को आगे सब्सक्रिप्शन से जुड़े समझौतों पर बातचीत करने में मदद मिलेगी।
Zee Music की अलग से रिपोर्टिंग पर अभी समयसीमा नहीं
एक निवेशक ने Zee Music के कारोबार की अलग से जानकारी देने और इसके जरिए वैल्यू अनलॉक करने की कंपनी की योजना पर सवाल पूछा। इस पर गोयनका ने कहा कि कंपनी सिर्फ म्यूजिक बिजनेस ही नहीं, बल्कि दूसरे कारोबारों के लिए भी अलग-अलग सेगमेंट की रिपोर्टिंग शुरू करने पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि कंपनी इस मामले में अलग-अलग कारोबारों को अलग-अलग तरीके से देखने के बजाय पूरे संगठन के स्तर पर फैसला लेना चाहती है। जब कंपनी को लगेगा कि सेगमेंट के हिसाब से जानकारी देना सही होगा, तब इस दिशा में कदम उठाया जाएगा।
गोयनका ने यह भी कहा कि कंपनी के कई नए कारोबार अभी निवेश के दौर में हैं। यही एक वजह है कि फिलहाल मैनेजमेंट अलग-अलग बिजनेस की रिपोर्टिंग को लेकर जल्दबाजी नहीं करना चाहता। उन्होंने इस बारे में कोई निश्चित समयसीमा देने से भी इनकार किया, लेकिन भरोसा दिलाया कि कंपनी इस पर काम कर रही है।
विज्ञापन रेवेन्यू में आगे और गिरावट की आशंका नहीं
एक अन्य निवेशक ने विज्ञापन से होने वाली कमाई में ठहराव और आगे की स्थिति पर सवाल किया। इस पर गोयनका ने कहा कि कंपनी को उम्मीद है कि दूसरी छमाही में विज्ञापन रेवेन्यू को मौजूदा स्तर पर बनाए रखा जा सकेगा और इसमें आगे कोई गिरावट नहीं आएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी अपने विज्ञापन कारोबार को मजबूत करने के लिए बदलते बाजार के मुताबिक नए अवसर तलाश रही है।
कानूनी मामलों पर क्या बोले पुनीत गोयनका?
कॉन्फ्रेंस कॉल में कंपनी के कानूनी मामलों को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर गोयनका ने कहा कि सबसे प्रमुख मामला ICC से जुड़ा है, जिसका जिक्र कंपनी ने अपने खातों से जुड़े नोट्स में किया है। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि वे वहां दिए गए अपडेट देख सकते हैं। कंपनी के दूसरे कानूनी मामलों की जानकारी भी इन्हीं नोट्स में उपलब्ध है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या तीसरी तिमाही में LCIA आर्बिट्रेशन मामले में कोई अपडेट आने की उम्मीद है, तो उन्होंने कहा कि यह पहले से बताना संभव नहीं है कि अदालत क्या समयसीमा तय करेगी या दूसरा पक्ष क्या कदम उठाएगा। इसलिए इस मामले में इंतजार करना होगा।
कंपनी की ग्रोथ और मुनाफे पर भरोसा
अपनी शुरुआती टिप्पणी में गोयनका ने कहा कि कंपनी इस समय मौजूदा कारोबार को मजबूत करने और नए क्षेत्रों में निवेश करने के बीच संतुलन बना रही है। उनके मुताबिक, स्पोर्ट्स, डिजिटल, टीवी, फिल्म, म्यूजिक और नए कंटेंट फॉर्मेट में किए जा रहे निवेश कंपनी को भविष्य की ग्रोथ के लिए तैयार करेंगे।
उन्होंने कहा कि दूसरी तिमाही कंपनी के लिए सकारात्मक रही है और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में कंपनी इस गति को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कॉन्फ्रेंस कॉल के अंत में निवेशकों और उनके परिवारों को दिवाली की शुभकामनाएं भी दीं।
राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड (Raj Television Network) के लिए राहत की खबर है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (India Ratings) ने कंपनी की बैंक लोन सुविधाओं की रेटिंग में सुधार किया है।
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Vikas Saxena
राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड (Raj Television Network) के लिए राहत की खबर है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (India Ratings) ने कंपनी की बैंक लोन सुविधाओं की रेटिंग में सुधार किया है। एजेंसी ने कंपनी की लॉन्ग टर्म रेटिंग को ‘IND D’ से बढ़ाकर ‘IND B’ कर दिया है। वहीं, इसका आउटलुक ‘Stable’ यानी स्थिर रखा है।
कंपनी ने 5 नवंबर 2026 को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि रेटिंग एजेंसी ने उसकी लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म बैंक लोन सुविधाओं की रेटिंग अपग्रेड की है। शॉर्ट टर्म रेटिंग को भी ‘IND D’ से बढ़ाकर ‘IND A4’ कर दिया गया है। कंपनी की बैंक लोन सुविधाओं की कुल रेटेड राशि 222 मिलियन रुपये (22.2 करोड़ रुपये) है।
लगातार तीन महीने समय पर कर्ज चुकाने का असर
इंडिया रेटिंग्स के मुताबिक, कंपनी की रेटिंग में सुधार की एक बड़ी वजह पिछले लगातार तीन महीनों से कर्ज की किस्तों और ब्याज का समय पर भुगतान करना है। एजेंसी को वित्त वर्ष 2026-27 में कंपनी के कारोबार के आकार और क्रेडिट मेट्रिक्स में भी सुधार की उम्मीद है।
हालांकि, एजेंसी ने कंपनी के सामने कुछ चुनौतियों का भी जिक्र किया है। इनमें कारोबार का सीमित आकार, EBITDA मार्जिन और क्रेडिट मेट्रिक्स का कमजोर रहना और इंडस्ट्री में कड़ी प्रतिस्पर्धा शामिल है। कंपनी की आय में विज्ञापन पर निर्भरता भी एक जोखिम है।
रेवेन्यू में गिरावट, लेकिन EBITDA में सुधार
इंडिया रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में राज टेलीविजन नेटवर्क का रेवेन्यू 70.045 करोड़ रुपये रहा, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 125.82 करोड़ रुपये था। यानी कंपनी के रेवेन्यू में गिरावट आई।
इसके बावजूद कंपनी का EBITDA वित्त वर्ष 2025-26 में 4.112 करोड़ रुपये रहा, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में उसे 19.699 करोड़ रुपये का EBITDA घाटा हुआ था। कंपनी का EBITDA मार्जिन भी वित्त वर्ष 2025-26 में 5.87 फीसदी रहा, जबकि पिछले साल यह 15.66 फीसदी नेगेटिव था।
एजेंसी के अनुसार, कंपनी ने कम मार्जिन वाले सब-कॉन्ट्रैक्टेड विज्ञापन कारोबार को बंद किया और लागत घटाने के कदम उठाए। इससे रेवेन्यू में गिरावट के बावजूद EBITDA मार्जिन में सुधार हुआ।
कंपनी के पास 13 टीवी चैनल और एक OTT चैनल
राज टेलीविजन नेटवर्क की स्थापना 1994 में हुई थी। कंपनी दक्षिण भारत में सैटेलाइट टीवी चैनलों का संचालन करती है। इसके पास कुल 13 टीवी चैनल, एक OTT चैनल और एक डिजिटल चैनल है। ये सभी पांच भाषाओं में काम करते हैं।
इंडिया रेटिंग्स के मुताबिक, कंपनी के प्रमोटर्स को दक्षिण भारतीय टेलीविजन बाजार में तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है। एजेंसी ने इसे कंपनी की एक बड़ी ताकत माना है।
लिक्विडिटी की स्थिति अब भी कमजोर
रेटिंग एजेंसी ने कंपनी की लिक्विडिटी यानी नकदी उपलब्धता की स्थिति को कमजोर बताया है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का वर्किंग कैपिटल साइकिल बढ़कर 119 दिन हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 76 दिन था। इस दौरान कंपनी को ग्राहकों से भुगतान मिलने में औसतन 156 दिन लगे।
31 मार्च 2026 तक कंपनी के पास नकद और नकद के बराबर राशि 23.1 लाख रुपये थी। एजेंसी के मुताबिक, कंपनी को वित्त वर्ष 2027-28 में 27 लाख रुपये और वित्त वर्ष 2028-29 में 67 लाख रुपये के कर्ज का भुगतान करना है।
इंडिया रेटिंग्स का मानना है कि अगर कंपनी के कारोबार का आकार बढ़ता है और उसके क्रेडिट मेट्रिक्स व लिक्विडिटी की स्थिति में लगातार सुधार होता है, तो भविष्य में रेटिंग में और सुधार हो सकता है। वहीं, कारोबार में गिरावट, मुनाफे पर दबाव या नकदी की स्थिति और खराब होने पर रेटिंग पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
NDTV ग्रुप ने दिनेश सिंह (Dinesh Singh) को अपना नया चीफ टेक्नोलॉजी एंड इंफॉर्मेशन ऑफिसर (CTIO) नियुक्त किया है।
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Samachar4media Bureau
NDTV ग्रुप ने दिनेश सिंह (Dinesh Singh) को अपना नया चीफ टेक्नोलॉजी एंड इंफॉर्मेशन ऑफिसर (CTIO) नियुक्त किया है। अगस्त 2026 में उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई। वह करीब 27 साल 9 महीने से NDTV के साथ जुड़े हुए हैं और मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 33 साल से ज्यादा का अनुभव है। इस नई जिम्मेदारी के साथ वह कंपनी के टेक्नोलॉजी और इंफॉर्मेशन से जुड़े कामकाज की कमान संभालेंगे।
दिनेश सिंह फरवरी 1999 में NDTV से जुड़े थे। इससे पहले मई 2010 से वह ग्रुप में चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) के पद पर काम कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने टेलीविजन नेटवर्क ऑपरेशंस, कॉरपोरेट आईटी, ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम और डिजिटल OTT इकोसिस्टम की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने टीवी ब्रॉडकास्ट सुविधाओं और डिजिटल OTT वर्कफ्लो को शुरू से तैयार करने और उनके संचालन में भी अहम भूमिका निभाई।
इसके अलावा वह कंपनी के बिजनेस ऑपरेशंस, बजट, लंबी अवधि की योजनाओं, खर्च और बड़े टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स के प्रबंधन से भी जुड़े रहे हैं।
ब्रॉडकास्ट ऑपरेशंस से शुरू हुआ सफर
NDTV में CTO बनने से पहले दिनेश सिंह ने फरवरी 1999 से मई 2010 तक हेड ऑफ ब्रॉडकास्ट ऑपरेशंस एंड इंजीनियरिंग के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने ब्रॉडकास्टिंग से जुड़ी कई आधुनिक तकनीकों पर काम किया और अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन हासिल किए।
1999 में Panasonic Professional Equipment Division, Singapore ने उन्हें DVCPRO कैमकॉर्डर और VTR तकनीक के लिए सर्टिफिकेट ऑफ अचीवमेंट दिया। इसके बाद 2001 में जापान की Ikegami Broadcast Limited से कैमकॉर्डर और स्टूडियो कैमरा टेक्नोलॉजी का सर्टिफिकेट हासिल किया।
2003 में उन्होंने अमेरिका की Harmonic से MPEG-2 कम्प्रेशन टेक्नोलॉजी और Envivo से MPEG-4 कम्प्रेशन टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन प्राप्त किया। इसके अलावा वह Omnibus News Automation के सुपर यूजर और Irdeto Encryption Systems के लिए भी प्रमाणित हुए।
टेक्नोलॉजी में इनोवेशन के लिए मिले सम्मान
दिनेश सिंह के काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। 2004 में CBA ने उन्हें किफायती इंजीनियरिंग के लिए सम्मानित किया। उन्होंने DSNG OB वैन में MPEG-4 तकनीक अपनाई थी, जिससे सैटेलाइट बैंडविड्थ की लागत कम करने में मदद मिली।
वहीं, 2008 में अमेरिका के NAB ने उन्हें International Broadcasting Excellence सम्मान से नवाजा। यह सम्मान उन्हें चलते-फिरते स्टूडियो (Studio on Wheels) को डिजाइन करने और उसके प्रभावी इस्तेमाल के लिए मिला था। इस स्टूडियो का इस्तेमाल जनरल इलेक्शन 2009 और Metro Nation, Delhi के दौरान किया गया था।
NDTV से पहले भी कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर किया काम
NDTV से जुड़ने से पहले दिनेश सिंह नवंबर 1996 से जनवरी 1999 तक Cinecita Compotronics Pvt. Ltd. में मैनेजर-प्रोजेक्ट के पद पर कार्यरत थे। यहां उन्होंने भारत का पहला डिजिटल स्टूडियो प्रोजेक्ट पूरा किया था। इसके तहत संसद के लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में नौ-नौ कैमरे लगाए गए थे।
इस प्रोजेक्ट में कैमरों का संचालन रोबोटिक्स तकनीक के जरिए होता था, इसलिए दोनों सदनों में कैमरा चलाने के लिए अलग से कैमरामैन की जरूरत नहीं थी। इस पूरे प्रोजेक्ट को आठ महीने में पूरा किया गया था।
इसके अलावा उन्होंने हैदराबाद की रामोजी राव फिल्म सिटी में एक फिल्म आधारित प्रोजेक्ट को चार महीने में पूरा किया। उनका एक अन्य प्रमुख प्रोजेक्ट बांग्लादेश नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी से जुड़ा था। इसे सात महीने में पूरा किया गया। इसमें तीन स्टूडियो और PCR यूनिट, तीन ऑडियो स्टूडियो, FM ब्रॉडकास्ट स्टेशन, टेप लाइब्रेरी, पोस्ट-प्रोडक्शन सुविधा और माइक्रोवेव रेडियो लिंक जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं।
Sony के साथ भी कर चुके हैं काम
अपने शुरुआती करियर में जनवरी 1994 से अक्टूबर 1996 तक दिनेश सिंह New Video Limited में सीनियर इंजीनियर के पद पर काम कर चुके हैं। यह कंपनी Sony Broadcast and Professional Equipment Division की अधिकृत सेल्स और सर्विस प्रतिनिधि थी।
इस दौरान उन्होंने U-Matic, Betacam SP और Digital Betacam VTRs, कैमकॉर्डर, वीडियो स्विचर और राउटर जैसे उपकरणों की सर्विसिंग और मरम्मत का काम संभाला।
दिनेश सिंह ने इंजीनियरिंग में बीई (B.E.) और बिजनेस मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी किया है। उनकी तकनीकी विशेषज्ञता और बिजनेस मैनेजमेंट का अनुभव उनके अब तक के करियर में अहम रहा है। NDTV में करीब 28 साल के सफर के बाद CTIO की नई जिम्मेदारी मिलना उनके लंबे अनुभव और कंपनी में योगदान को दर्शाता है।
टीवी चैनलों पर क्या दिखाया जा रहा है और कहीं प्रसारण के दौरान नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा, इस पर नजर रखने के लिए केंद्र सरकार के पास विशेष तकनीकी व्यवस्था है।
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Vikas Saxena
टीवी न्यूज चैनलों पर दिनभर में क्या दिखाया जा रहा है, किस खबर को किस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है और कहीं प्रसारण के दौरान तय नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है, इस पर नजर रखने के लिए केंद्र सरकार के पास एक विशेष तकनीकी व्यवस्था है। इसका नाम इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मॉनिटरिंग सेंटर (EMMC) है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करने वाला यह केंद्र टीवी चैनलों के कंटेंट की निगरानी करता है। इसकी तकनीकी क्षमता एक साथ 900 टीवी चैनलों के कंटेंट को हासिल करने, रिकॉर्ड करने, सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर दोबारा देखने की है।
मंत्रालय की अक्टूबर 2026 में जारी वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के मुताबिक, EMMC चौबीसों घंटे तीन शिफ्ट में काम करता है। इसकी निगरानी व्यवस्था के जरिए टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाले कंटेंट को रियल टाइम में रिकॉर्ड किया जाता है। खास बात यह है कि इस रिकॉर्डिंग को 90 दिनों तक सुरक्षित रखा जाता है, ताकि किसी कार्यक्रम या विज्ञापन को लेकर शिकायत आने पर उसकी दोबारा जांच की जा सके।
2008 में हुई थी EMMC की स्थापना
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मॉनिटरिंग सेंटर की स्थापना साल 2008 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में प्रसारित होने वाले सैटेलाइट टीवी चैनलों के कंटेंट पर नजर रखना है। खासतौर पर यह देखा जाता है कि चैनल अपने कार्यक्रमों और विज्ञापनों में केबल टेलीविजन नेटवर्क (रेगुलेशन) एक्ट, 1995 और इसके तहत बनाए गए नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं।
इस कानून के तहत टीवी चैनलों के लिए प्रोग्राम कोड और एडवर्टाइजमेंट कोड तय किए गए हैं। इनमें प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों और विज्ञापनों के लिए जरूरी नियम शामिल हैं। EMMC इन नियमों के संभावित उल्लंघन की पहचान करने के साथ शिकायतों के आधार पर भी चैनलों के कंटेंट की जांच करता है।
900 चैनलों की निगरानी के लिए 24×7 तकनीकी व्यवस्था
मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, EMMC के पास एक विशेष तकनीकी ढांचा है, जिसमें डिश फार्म, आरएफ डाउनलिंक रूम, स्टोरेज रूम और डीटीएच रूम जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इनकी मदद से सैटेलाइट टीवी चैनलों के सिग्नल प्राप्त किए जाते हैं और उनके कंटेंट को रिकॉर्ड किया जाता है।
इस सेंटर की क्षमता 900 टीवी चैनलों तक के कंटेंट को एक साथ हासिल करने, रिकॉर्ड करने, स्टोर करने और जरूरत के समय वापस देखने की है। इसके लिए 24 घंटे तीन शिफ्ट में निगरानी की जाती है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि चैनलों के प्रसारण की रिकॉर्डिंग रियल टाइम में होती है और इसे 90 दिनों तक सुरक्षित रखा जाता है। इसका फायदा यह है कि किसी पुराने कार्यक्रम, खबर या विज्ञापन को लेकर शिकायत आने पर संबंधित प्रसारण को दोबारा देखा जा सकता है।
यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक देश में कुल 920 टीवी चैनलों को प्रसारण की अनुमति दी गई थी। इनमें 415 न्यूज और करंट अफेयर्स चैनल, जबकि 505 नॉन-न्यूज चैनल थे। वहीं, EMMC की बताई गई तकनीकी क्षमता 900 चैनलों तक की है।
46.86 करोड़ रुपये की तकनीकी परियोजना पर काम
टीवी चैनलों की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सरकार ने तकनीकी ढांचे को अपग्रेड करने की परियोजना भी शुरू की है। मंत्रालय की रिपोर्ट में सरकारी कंपनी ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (BECIL) के माध्यम से EMMC के ऑडियो-विजुअल लॉगिंग और मॉनिटरिंग सिस्टम को नया रूप देने का जिक्र किया गया है।
इस परियोजना के तहत एक अत्याधुनिक डेटा सेंटर स्थापित करने की योजना है, जो 365 दिन और 24 घंटे काम करने में सक्षम होगा। इस व्यवस्था में 900 टीवी चैनलों के प्रसारण की लॉगिंग और निगरानी के लिए हाई-एंड सर्वर, स्टोरेज सिस्टम, नेटवर्क स्विच और आधुनिक मॉनिटरिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाना है।
इस सिस्टम के जरिए टीवी चैनलों के प्रसारण को लगातार रिकॉर्ड करने और 90 दिनों तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा, डेटा की सुरक्षा के लिए डिजास्टर रिकवरी (DR) की सुविधा भी शामिल की गई है। इसके तहत 300 महत्वपूर्ण टीवी चैनलों के 24 घंटे के प्रसारण का रिकॉर्ड क्लाउड स्टोरेज पर 90 दिनों तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जाएगी।
मंत्रालय की रिपोर्ट में इस पूरी परियोजना की लागत 46.86 करोड़ रुपये बताई गई है। इसका उद्देश्य टीवी कंटेंट की निगरानी, रिकॉर्डिंग और जरूरत पड़ने पर उसकी जांच करने की व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाना है।
नियमों का उल्लंघन मिलने पर क्या होती है कार्रवाई?
EMMC का काम केवल टीवी चैनलों की रिकॉर्डिंग करना नहीं है। अगर निगरानी के दौरान किसी चैनल के कार्यक्रम या विज्ञापन में नियमों का संभावित उल्लंघन दिखाई देता है, तो आगे जांच की प्रक्रिया भी शुरू होती है।
इसकी प्रक्रिया के तहत सबसे पहले संबंधित मामले की जांच स्क्रूटनी कमेटी करती है। इस कमेटी की अध्यक्षता सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी (ब्रॉडकास्टिंग) करते हैं। इसमें विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं।
कमेटी की सिफारिशों के आधार पर संबंधित ब्रॉडकास्टर को नोटिस भेजकर उससे जवाब मांगा जाता है। जिन मामलों में आगे जांच की जरूरत होती है, उन्हें इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) के पास भेजा जाता है। इस कमेटी की अध्यक्षता सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी करते हैं। इसके बाद मामले में उचित कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
यानी EMMC खुद किसी चैनल पर जुर्माना लगाने या उसे सजा देने का फैसला नहीं करता, बल्कि निगरानी और संभावित उल्लंघन की पहचान कर मामले को संबंधित समितियों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है।
2025 में 13 मामलों पर हुई चर्चा
मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) की एक बैठक 17 जून को हुई थी। इस बैठक में कुल 13 मामले रखे गए। इन मामलों में कमेटी ने सिफारिशें कीं और केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमों के तहत उचित कदम उठाए गए।
वहीं, 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2025 के बीच निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों पर प्रसारित कंटेंट से जुड़ी 398 शिकायतों का निपटारा किया गया। ये शिकायतें पीजी पोर्टल पर प्राप्त हुई थीं।
चुनाव के दौरान भी अहम होती है EMMC की भूमिका
EMMC की जिम्मेदारी सामान्य दिनों में टीवी चैनलों की निगरानी तक ही सीमित नहीं है। चुनाव के दौरान भी इसकी भूमिका अहम हो जाती है। भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के निर्देशों के तहत यह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में चुनाव से जुड़ी कवरेज पर नजर रखता है और जरूरत के अनुसार आयोग को रिपोर्ट भेजता है।
इस तरह EMMC सरकार के लिए टीवी प्रसारण की निगरानी करने वाला एक महत्वपूर्ण तकनीकी केंद्र है। 24 घंटे तीन शिफ्ट में काम करने वाली इसकी व्यवस्था, 90 दिनों तक रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की सुविधा और 46.86 करोड़ रुपये की तकनीकी अपग्रेड परियोजना बताती है कि सरकार टीवी प्रसारण की निगरानी के लिए अपने तकनीकी ढांचे को मजबूत करने पर काम कर रही है।
न्यूज एंकर और एसोसिएट एग्जिक्यूटिव प्रोड्यूसर गृह अतुल (Griha Atul) ने CNN-News18 से अपनी चार साल की पारी खत्म कर दी है।
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Samachar4media Bureau
न्यूज एंकर और एसोसिएट एग्जिक्यूटिव प्रोड्यूसर गृह अतुल (Griha Atul) ने CNN-News18 से अपनी चार साल की पारी खत्म कर दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए चैनल से विदाई लेने की जानकारी साझा की। हालांकि, उन्होंने अभी अपने अगले प्रोफेशनल कदम को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है।
गृह अतुल ने लिंक्डइन पर अपनी पोस्ट में CNN-News18 के साथ बिताए समय को याद करते हुए लिखा, "CNN-News18 से विदाई ले रही हूं। चार साल, अनगिनत बुलेटिन और जिंदगी भर की यादें।"
गृह अतुल का पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब 20 साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने ब्रॉडकास्ट न्यूज, फील्ड रिपोर्टिंग और एडिटोरियल लीडरशिप जैसी अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाली हैं।
CNN-News18 से पहले गृह अतुल Times Network और India Today जैसे मीडिया संस्थानों के साथ भी काम कर चुकी हैं। इन संस्थानों में उन्होंने न्यूज कवरेज और संपादकीय से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाईं।
फिलहाल यह साफ नहीं है कि गृह अतुल अपनी अगली पारी किस मीडिया संस्थान के साथ शुरू करेंगी। उन्होंने अपने अगले करियर प्लान को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेजगद (ZEEL) अब अपने पारंपरिक टेलीविजन कारोबार से आगे बढ़कर नए क्षेत्रों में विस्तार की तैयारी कर रही है।
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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेजगद (ZEEL) अब अपने पारंपरिक टेलीविजन कारोबार से आगे बढ़कर नए क्षेत्रों में विस्तार की तैयारी कर रही है। कंपनी स्पोर्ट्स, क्षेत्रीय कंटेंट, माइक्रो-ड्रामा, एनीमेशन और लाइव इवेंट्स जैसे नए फॉर्मेट में निवेश कर रही है। कंपनी का मकसद आने वाले समय में कारोबार की ग्रोथ के लिए नए रास्ते तैयार करना है।
कंपनी के सीईओ पुनीत गोयनका ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजों पर हुई चर्चा के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कंपनी अपने मौजूदा कारोबार को मजबूत बनाने के साथ-साथ नए क्षेत्रों में भी निवेश कर रही है। ये कदम लंबे समय में कंपनी की प्रतिस्पर्धी स्थिति को बेहतर बनाने में मदद करेंगे।
पुनीत गोयनका के मुताबिक, बच्चों के कंटेंट, लाइव इवेंट्स, एनीमेशन, माइक्रो-ड्रामा और स्पोर्ट्स में किया जा रहा निवेश भविष्य में कंपनी के लिए ग्रोथ के नए मौके तैयार कर सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि ये नए कारोबार फिलहाल निवेश के दौर में हैं और इनका फायदा लंबे समय में देखने को मिलेगा।
स्पोर्ट्स कारोबार को मिल रही है अहमियत
ZEEL की विस्तार रणनीति में स्पोर्ट्स की भूमिका लगातार अहम हो रही है। कंपनी ने फीफा वर्ल्ड कप के प्रसारण अधिकारों में निवेश किया था। इन अधिकारों के जरिए दर्शकों को ZEE5 और Unite8Sports पर मैच देखने का मौका मिला। कंपनी के मुताबिक, इससे उसके प्लेटफॉर्म पर नए दर्शक जुड़े और स्पोर्ट्स कंटेंट की पहुंच बढ़ी।
पुनीत गोयनका ने कहा कि लाइव मैचों के साथ मैच से पहले और बाद के खास कार्यक्रमों ने टीवी और डिजिटल, दोनों प्लेटफॉर्म पर दर्शकों को जोड़े रखा। उनके मुताबिक, इस निवेश से दर्शकों की भागीदारी बढ़ी और कंपनी के स्पोर्ट्स कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए एक आधार भी तैयार हुआ।
इसके बाद ZEEL ने जर्मनी की बुंडेसलीगा और इटली की सीरी ए जैसी अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल लीग के अधिकार भी हासिल किए हैं। हालांकि, गोयनका ने कहा कि कंपनी स्पोर्ट्स समेत अपने हर कारोबार में निवेश को लेकर सावधानी बरतेगी। कंपनी का ध्यान लंबे समय की योजना के साथ मुनाफे पर भी बना रहेगा।
ZEE5 पर बढ़ा मल्टीलिंगुअल कंटेंट का जोर
डिजिटल कारोबार में ZEEL का फोकस अलग-अलग भाषाओं में मनोरंजन कंटेंट बढ़ाने और दर्शकों की भागीदारी मजबूत करने पर है। इसके लिए कंपनी अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स कंटेंट का भी सहारा ले रही है।
तिमाही के दौरान ZEE5 ने अलग-अलग भाषाओं में नए कंटेंट की पेशकश की। गोयनका के मुताबिक, दर्शकों ने इस कंटेंट को पसंद किया और इससे प्लेटफॉर्म पर उनकी भागीदारी और देखने में बिताया गया समय बढ़ा।
कंपनी ने बताया कि ZEE5 का रेवेन्यू सालाना आधार पर दोगुना हो गया, जबकि सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इसमें मल्टीलिंगुअल मनोरंजन और अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स कंटेंट का योगदान रहा।
गोयनका का मानना है कि दर्शकों का ध्यान हासिल करने की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच ZEE5 कंपनी के लिए ग्रोथ का एक अहम जरिया बन सकता है। इसके लिए कंपनी टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से कामकाज को बेहतर बनाने और दर्शकों के अनुभव को आसान करने पर भी काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कंटेंट आधारित कारोबार में दर्शकों की पसंद के मुताबिक सुझाव देना और बिना रुकावट देखने का अनुभव देना काफी अहम है। इसी दिशा में कंपनी अलग-अलग टीमों में टेक्नोलॉजी से जुड़े लोगों को शामिल कर रही है।
टीवी कारोबार में क्षेत्रीय कहानियों पर फोकस
टेलीविजन कारोबार में ZEEL अलग-अलग भाषाओं में फिक्शन और नॉन-फिक्शन कार्यक्रमों पर निवेश जारी रखे हुए है। गोयनका ने कहा कि सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से जुड़ी कहानियां दर्शकों का ध्यान खींच रही हैं। इसके साथ ही कंपनी नॉन-फिक्शन कार्यक्रमों की अपनी पेशकश को भी मजबूत कर रही है।
तिमाही के दौरान नेटवर्क ने कई भाषाओं में नए कार्यक्रम शुरू किए, जिनमें 'सा रे गा मा पा' भी शामिल है। इसके अलावा कंपनी 'जीना इसी का नाम है' को भी वापस ला रही है। गोयनका ने इसे एक लोकप्रिय शो बताते हुए कहा कि इसके जरिए दर्शकों को अपनी पसंदीदा हस्तियों की जिंदगी की झलक देखने को मिलेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि इंडस्ट्री के आखिरी मान्यता प्राप्त आंकड़ों के आधार पर नेटवर्क की हिस्सेदारी 20 फीसदी से ज्यादा रही है। फिलहाल टीवी रेटिंग दोबारा शुरू नहीं हुई हैं। ऐसे में कंपनी का जोर अच्छी क्वालिटी का कंटेंट पेश करने पर है।
विज्ञापन से होने वाली कमाई में गिरावट थमी
विज्ञापन कारोबार को लेकर पुनीत गोयनका ने कहा कि कंपनी ने रेवेन्यू में आ रही गिरावट को स्थिर कर लिया है। कमजोर आर्थिक माहौल के बावजूद उपभोक्ता मांग में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
उन्होंने विज्ञापन बाजार की चुनौतियों के लिए महंगाई, कमजोर मानसून और दूसरे बाहरी कारणों को जिम्मेदार बताया। कंपनी इस बदलते माहौल में रणनीतिक साझेदारियों के जरिए कमाई के नए रास्ते तलाश रही है, ताकि अलग-अलग स्रोतों से रेवेन्यू बढ़ाया जा सके।
क्षेत्रीय फिल्मों में भी Zee Studios का विस्तार
ZEEL अपने फिल्म कारोबार के जरिए भी क्षेत्रीय बाजारों में पहुंच बढ़ा रही है। कंपनी के Zee Studios ने तिमाही के दौरान गुजराती बाजार में 'टॉम एंड जेरी' नाम की फैमिली कॉमेडी-ड्रामा फिल्म के साथ कदम रखा।
इसके अलावा स्टूडियो ने हिंदी, मराठी, तेलुगु, तमिल, मलयालम और कन्नड़ भाषाओं की फिल्मों के साथ अपनी कंटेंट सूची को भी मजबूत किया है।
इसी तरह Zee Music Company भी अपने म्यूजिक कैटलॉग को बढ़ाने के लिए नए अधिकार हासिल कर रही है। गोयनका के मुताबिक, कंपनी अपने पूरे कारोबार में अलग-अलग तरह के कंटेंट और पेशकश को बढ़ावा देती रहेगी।
इंडिया टुडे ग्रुप की कंपनी टीवी टुडे नेटवर्क (TV Today Network) ने 2 नवंबर 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग में जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही और पहली छमाही के अनऑडिटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी दी।
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इंडिया टुडे ग्रुप की कंपनी टीवी टुडे नेटवर्क (TV Today Network) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 7.75 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी को 1.98 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। कंपनी ने 2 नवंबर 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग में जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही और पहली छमाही के अनऑडिटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी दी।
कंपनी की ओर से स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई जानकारी के मुताबिक, दूसरी तिमाही में ऑपरेशंस से रेवेन्यू बढ़कर 194.38 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 185.68 करोड़ रुपये था। इस तरह कंपनी के रेवेन्यू में करीब 4.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
कंपनी की कुल आय 204.92 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 195.21 करोड़ रुपये थी। इस दौरान कुल खर्च बढ़कर 194.41 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 187.49 करोड़ रुपये था।
पहली छमाही में भी मुनाफे में बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान TV Today Network का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 400.60 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की इसी अवधि में यह 382.87 करोड़ रुपये था।
इस दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़कर 18.01 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही में यह 5.37 करोड़ रुपये था। वहीं, कुल आय 417.58 करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल 403.04 करोड़ रुपये थी।
स्टैंडअलोन नतीजों में भी मुनाफा
स्टैंडअलोन आधार पर कंपनी ने दूसरी तिमाही में 8.05 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी को 2.04 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। इस दौरान स्टैंडअलोन रेवेन्यू 194.38 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल यह 185.68 करोड़ रुपये था।
पहली छमाही में स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 18.54 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 5.28 करोड़ रुपये से ज्यादा है। वहीं, रेवेन्यू बढ़कर 400.60 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही में 382.87 करोड़ रुपये था।
रेडियो कारोबार की बिक्री का प्रस्ताव
कंपनी ने अपने रेडियो ब्रॉडकास्टिंग कारोबार को बंद किए जा रहे ऑपरेशन (Discontinued Operations) के तौर पर अलग दिखाया है। कंपनी ने नवंबर 2025 में अभिजीत रियल्टर्स एंड इंफ्रावेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ रेडियो कारोबार को 10 करोड़ रुपये में बेचने के लिए समझौता किया था।
इस प्रस्तावित सौदे के तहत पहले रेडियो कारोबार को कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी वाइबग्योर ब्रॉडकास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर किया जाना है। इसके बाद वाइबग्योर की पूरी हिस्सेदारी खरीदार को सौंपी जानी है। कंपनी ने बताया कि इस सौदे को पूरा होने की अच्छी संभावना मानते हुए 30 सितंबर 2026 तक रेडियो कारोबार से जुड़ी संपत्तियों और देनदारियों को बिक्री के लिए रखी गई संपत्तियों के तौर पर वर्गीकृत किया गया है। हालांकि, फाइलिंग में सौदा पूरा होने की जानकारी नहीं दी गई है।
मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी शेमारू एंटरटेनमेंट (Shemaroo Entertainment Limited) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2) के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं।
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मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी शेमारू एंटरटेनमेंट (Shemaroo Entertainment Limited) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2) के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी को जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में 7.50 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट लॉस हुआ है। हालांकि, पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले कंपनी का घाटा काफी कम हुआ है। सितंबर 2025 तिमाही में कंपनी को 45.26 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 2 नवंबर, 2026 को हुई बैठक में दूसरी तिमाही के अनऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी दी।
रेवेन्यू में करीब 1.5 फीसदी की गिरावट
कंसोलिडेटेड नतीजों के मुताबिक, Shemaroo Entertainment का ऑपरेशंस से रेवेन्यू दूसरी तिमाही में 141.25 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह 143.38 करोड़ रुपये था। इस तरह कंपनी के रेवेन्यू में करीब 1.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
कंपनी की कुल आय 142.09 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले साल की सितंबर तिमाही में यह 143.82 करोड़ रुपये थी।
वहीं, कंपनी का कुल खर्च घटकर 153.03 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 206.83 करोड़ रुपये था। खर्च में कमी आने का असर कंपनी के घाटे पर भी दिखाई दिया।
पहली छमाही में 15.55 करोड़ रुपये का घाटा
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 272.93 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 282.90 करोड़ रुपये था।
इस छह महीने की अवधि में कंपनी को 15.55 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट लॉस हुआ, जबकि पिछले साल इसी अवधि में कंपनी का घाटा 91.07 करोड़ रुपये था।
स्टैंडअलोन नतीजों में भी घाटा कम हुआ
स्टैंडअलोन नतीजों की बात करें तो कंपनी को सितंबर 2026 तिमाही में 8.15 करोड़ रुपये का नेट लॉस हुआ। पिछले साल की समान तिमाही में यह घाटा 46.33 करोड़ रुपये था।
कंपनी का स्टैंडअलोन ऑपरेशंस से रेवेन्यू 130.19 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 135.21 करोड़ रुपये था।
GST मामले का भी किया जिक्र
कंपनी ने अपने वित्तीय नतीजों में GST से जुड़े मामले की भी जानकारी दी है। कंपनी के मुताबिक, पहले GST विभाग ने कथित तौर पर गलत तरीके से लिए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को लेकर 70.26 करोड़ रुपये की वसूली का आदेश दिया था। इसके अलावा ब्याज और करीब 63.35 करोड़ रुपये की पेनल्टी भी लगाई गई थी।
कंपनी ने इस आदेश के खिलाफ अपील की थी, जिसे विभाग के पक्ष में निपटा दिया गया। इसके बाद कंपनी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। कंपनी के मुताबिक, हाई कोर्ट ने संबंधित आदेशों के खिलाफ विभाग को आगे की कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। बाद में मामले को विचार के लिए बड़ी बेंच के पास भेज दिया गया।
देशभर में रिजीम चेंज यानी सत्ता परिवर्तन को लेकर छिड़ी बहस के बीच ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ (Times Now Navbharat) ने अपने व्यापक अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन के जरिए कई अहम खुलासे किए हैं।
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Samachar4media Bureau
देशभर में रिजीम चेंज यानी सत्ता परिवर्तन को लेकर छिड़ी बहस के बीच ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ (Times Now Navbharat) ने अपने व्यापक अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन के जरिए कई अहम खुलासे किए हैं। चैनल की इन्वेस्टिगेटिव टीम ने देश के अलग-अलग हिस्सों में खुफिया कैमरों के जरिए उन चेहरों तक पहुंचने की कोशिश की, जिनकी इस मुद्दे पर सक्रियता और भूमिका चर्चा में है। इस दौरान अंडरकवर रिपोर्टर्स ने बातचीत के जरिए रिजीम चेंज को लेकर उनके विचारों, संभावित रणनीतियों और आंदोलनों से जुड़े पहलुओं को समझने का प्रयास किया।
स्टिंग ऑपरेशन में सामने आई बातचीत में यह संकेत मिले कि कुछ लोग वोट के जरिए लोकतांत्रिक बदलाव के बजाय अन्य तरीकों से बदलाव के मौके की तलाश में हैं । स्टिंग के दौरान कई ऐसे बयान सामने आए, जिन्होंने देश में चल रही रिजीम चेंज की बहस को और गंभीर बना दिया है।
मुंबई में मौलाना सिराज खान का बयान: स्टिंग ऑपरेशन के दौरान मुंबई में जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के मुंबई चीफ मौलाना सिराज खान से अंडरकवर रिपोर्टर ने बातचीत की। सड़क पर फ्रांस जैसे हिंसक प्रोटेस्ट की संभावना को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने गैर-मुस्लिमों की तरफ से सड़क पर उतरने की बात कही। इस बातचीत में मौलाना सिराज खान का बयान था, 'मोमिन जिस दिन खड़ा होगा, किसी के संभाले संभलेगा नहीं'
टाइम्स नाउ नवभारत के स्टिंग ऑपरेशन में साफवान नाम के व्यक्ति से भी अंडरकवर रिपोर्टर ने बातचीत की। साफवान MSF यानी मुस्लिम स्टूडेंट फेडरेशन का दिल्ली यूनिवर्सिटी में अध्यक्ष है। भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसी परिस्थितियां बनने की आशंका को लेकर सवाल पूछे जाने पर साफवान ने कहा, 'ये पक्का है कुछ तो होगा, सबकुछ लंबे वक्त तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता।'
इसके बाद अंडरकवर रिपोर्टर ने पूछा कि क्या भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसी परिस्थितियां बनती दिख रही हैं? खुफिया कैमरे पर इस सवाल के जवाब में साफवान का कहना था, 'मुझे लगता है अगर फिर 20 जुलाई जैसा दिन आया तो नेपाल जैसे हालात हो सकते हैं।' बातचीत को आगे बढ़ाते हुए अंडरकवर रिपोर्टर ने पूछा कि क्या आप लोग बांग्लादेश और नेपाल के लिए तैयार हैं? इस पर साफवान का जवाब था, 'कुछ तो करना पड़ेगा।'
प्रदर्शनों में लड़कियों को आगे रखने की रणनीति पर बातचीत: हाल में वोट चोरी को लेकर हुए प्रदर्शनों में लड़कियों की अग्रिम भूमिका ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया था। इस दौरान लड़कियां प्रदर्शनों की अगली कतार में दिखाई दी थीं। हालांकि, टाइम्स नाउ नवभारत के अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन में प्रदर्शनों में लड़कियों को आगे रखने की कथित रणनीति को लेकर भी बातचीत सामने आई।
अंडरकवर रिपोर्टर ने साफवान से पूछा, 'प्रदर्शनों में लड़कियों के आगे करने का नया तरीक दिखा है?' इस पर साफवान का जवाब था, 'हां, ऐसा कुछ है, वे किले की दीवार की तरह खड़ी हो जाती हैं औऱ बाकी लोग अंदर आ जाते हैं।' इसी बातचीत में आगे कहा गया, 'जब एक पुरुष पुलिस के सामने आता है तो वो पुलिस उसे काबू कर सकती है लेकिन जब एक महिला, 'पुरुष पुलिस' वाले के सामने आती है तो इससे दिल्ली पुलिस की नकारात्मक छवि बनती है । ऐसा हो भी रहा है।' इस बातचीत ने प्रदर्शनों में महिलाओं की भूमिका और उन्हें आगे रखने के पीछे की संभावित रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।
इसी क्रम में चैनल की अगली टीम क्रांतिकारी युवा संगठन के कन्वीनर भीम तक पहुंची। अंडरकवर रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि 20 जुलाई से पहले प्रदर्शनों में दरी और टेंट दिखाई देते थे, लेकिन बाद में पंखे, कूलर और दूसरी व्यवस्थाएं भी नजर आने लगीं। आखिर इन व्यवस्थाओं के लिए संसाधन कहां से आ रहे थे?
इस सवाल के जवाब में भीम ने कथित तौर पर बताया कि करीब पांच लाख रुपये प्रतिदिन खर्च हो रहे थे। आगे बातचीत में उनका कहना था, 'शुरू में, ये चीज पता चल गई थी. ज्यादातर AAP के फैन थे. आम आदमी से जुड़े थे. बाउंसर कौन लेकर चलता है. जिसके पास कुछ नहीं है वो बाउंसर लेकर चल रहा है।'
इस पर अंडरकवर रिपोर्टर ने पूछा, 'किसके पास, दिपके के पास था?' भीम ने हां में सिर हिलाया। इस बातचीत ने प्रदर्शनों में होने वाले खर्च, संसाधनों की व्यवस्था और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की संभावित भागीदारी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। बांग्लादेश जैसे आंदोलन की इच्छा पर क्रान्तिकारी युवा संगठन की प्रक्ता मुदिता से ..बांग्लादेश जैसे आंदोलन की इच्छा को लेकर सवाल किए गए, जिस पर उन्होंने कथित तौर पर सहमति जताई।
स्टिंग ऑपरेशन में हिंसक आंदोलन का विरोध करने वाले बयान भी सामने आए। टाइम्स नाउ नवभारत यह भी स्पष्ट करता है कि स्टिंग ऑपरेशन के दौरान बातचीत में शामिल सभी लोगों ने हिंसक आंदोलन की बात का समर्थन नहीं किया। कई चेहरों ने हिंसक आंदोलन की संभावना को सिरे से खारिज भी किया।
राष्ट्रहित में सच्चाई सामने लाने की पहल: टाइम्स नाउ नवभारत की इन्वेस्टिगेटिव टीम ने देश के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ कई टीमें तैनात कर इस व्यापक स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम दिया। इसका उद्देश्य किसी खास व्यक्ति, वर्ग, समुदाय, धर्म या विचारधारा को निशाना बनाना नहीं, बल्कि रिजीम चेंज की बहस के बीच सामने आ रहे दावों, बयानों और संभावित रणनीतियों की पड़ताल करना है।
#OperationRegimeChange: ऐसा खुलासा, जो सियासत में भूचाल ला देगा सबसे बड़ा पर्दाफाश 'धुरंधर' में देखिए- ऑपरेशन रिजीम चेंज @AMISHDEVGAN के साथ देखिए, 'धुरंधर' LIVE #Dhurandhar #DhurandharWithAmish #DhurandharAmishOnNavBharat https://t.co/6sCtvsN0Mw
— Times Now Navbharat (@TNNavbharat) November 2, 2026
खुशबू गोतेचा ने एनडीटीवी से नाता खत्म कर लिया है। वह नेशनल हेड पद पर कार्यरत थीं। इससे पहले टाइम्स नेटवर्क में काम कर चुकी हैं। उनकी भूमिका की जानकारी नहीं दी गई है।
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Samachar4media Bureau
खुशबू गोतेचा (Khushbu Gotecha) ने एनडीटीवी (NDTV) से अपना नाता खत्म कर लिया है। वह कंपनी में नेशनल हेड के पद पर कार्यरत थीं। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपने बाहर होने की जानकारी साझा की।
खुशबू गोतेचा जून 2024 में एनडीटीवी से रीजन हेड- वेस्ट, स्पेशल प्रोजेक्ट्स के तौर पर जुड़ी थीं। इससे पहले वह टाइम्स नेटवर्क (Times Network) के साथ काम कर रही थीं।
टाइम्स नेटवर्क में गोतेचा ने वेस्ट रीजन के लिए इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज (IP) का नेतृत्व करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्हें ब्रांडेड कंटेंट और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी से जुड़े प्रोजेक्ट्स को तैयार करने और सफलतापूर्वक लागू करने का व्यापक अनुभव है।
खुशबू गोतेचा रेड एफएम (Red FM) और रेडियो मिर्ची (Radio Mirchi) सहित कई संस्थानों के साथ भी काम कर चुकी हैं। एनडीटीवी से बाहर निकलने के बाद उन्होंने अपनी अगली पेशेवर भूमिका के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की है।