बता दें कि यह इस कार्यक्रम का 16वां एडिशन है। जूरी द्वारा चुने गए विजेताओं को सम्मानित करने के लिए 30 मार्च 2024 को दिल्ली में अवॉर्ड वितरण समारोह का आयोजन किया जाएगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
‘एक्सचेंज4मीडिया’ समूह द्वारा बहुप्रतिष्ठित ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) 2023 के विजेताओं के नाम से जल्द पर्दा उठ जाएगा। दरअसल, विभिन्न श्रेणियों में तमाम एंट्रीज में से विजेताओं का चुनाव करने के लिए 19 मार्च 2024 को दिल्ली के ‘द लीला पैलेस’ होटल में जूरी मीट का आयोजन किया गया। इस जूरी में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठित नाम शामिल हुए।
बता दें कि यह इस कार्यक्रम का 16वां एडिशन है। जूरी द्वारा चुने गए विजेताओं को सम्मानित करने के लिए 30 मार्च 2024 को अवॉर्ड वितरण समारोह का आयोजन किया जाएगा।
इस आयोजन के बारे में ‘बिजनेसवर्ल्ड’ समूह के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ समूह के फाउंडर व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा का कहना था, ‘लोकतंत्र का महापर्व आम चुनाव नजदीक हैं और इसकी कवरेज करने के लिए न्यूज मीडिया यानी न्यूज चैनल्स, प्रिंट और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स देश में व्युअर्स और मतदाताओं के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहेंगे। एक्सचेंज4मीडिया पिछले 24 वर्षों से मीडिया, एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में देश का नंबर वन एडिटोरियल प्लेटफॉर्म है। न्यूज ब्रॉडकास्टिंग में ‘इनबा’ उत्कृष्टता का सुनहरा मानक बन गया है। इनबा के 16वां एडिशन में रिकॉर्ड एंट्रीज और रिकॉर्ड भागीदारी देखने को मिली है।’
गौरतलब है कि वर्ष 2008 में अपनी शुरुआत के बाद से ही हर साल ये अवॉर्ड्स मीडिया में कार्यरत उन शख्सियतों को दिए जाते हैं, जिन्होंने देश में टेलिविजन न्यूज इंडस्ट्री को एक नई दिशा दी है और अपने योगदान से इस इंडस्ट्री को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।
इसके तहत बेस्ट न्यूज चैनल ऑफ द ईयर इन हिंदी/अंग्रेजी से लेकर बेस्ट सीईओ ऑफ द ईयर और बेस्ट एडिटर-इन-चीफ जैसी कई श्रेणियों में अवॉर्ड दिए जाते हैं। इनबा के 15वें एडिशन में चेयरपर्सन की भूमिका देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने निभाई थी।
पूर्व के वर्षों में इनबा की जूरी में हरिवंश नारायण सिंह-राज्य सभा के डिप्टी चेयरमैन; डॉ. किरण कार्णिक-पूर्व प्रेजिडेंट, नैसकॉम; डॉ. नसीम जैदी-भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त; एस.वाई. कुरैशी-भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त; एन. राम-चेयरमैन, कस्तूरी एंड संस लिमिटेड, पूर्व एडिटर-इन-चीफ द हिंदू एंड ग्रुप न्यूजपेपर्स; संजय गुप्ता-मैनेजिंग डायरेक्टर, स्टार इंडिया जैसे जाने-माने नाम शामिल रहे हैं।
विजेताओं का चयन करने के लिए 19 मार्च को हुई जूरी मीट में ये प्रमुख नाम शामिल रहे।
| NAME | DESIGNATION | COMPANY | |
| 1 | Acharya Praveen Chauhan | Astrologer, Palmist, Occultist, Author, Research Scholar(Psychology) | |
| 2 | Acharya Shailesh Tiwary | Vedic Tantra Guru | |
| 3 | Alok Mehta | (Padma Shri) Former President EGI | |
| 4 | Amit Gujral | Chief Marketing Officer | JK Tyre & Industries Ltd. |
| 5 | Anu Sehgal | Founder | Digital Mill Consultants and Social Media Influencer |
| 6 | Anurag Bhadouria | National Spokesperson | Samajwadi Party |
| 7 | Arjan Kumar Sikri | Jurist and Former Judge | |
| 8 | Ashish Shelar | President Maharashtra BJP | |
| 9 | Atif Rasheed | National Executive Member | Bharatiya Janata Party OBC Morcha |
| 10 | Atul Hegde | Co-founder | Rainmaker Ventures |
| 11 | Charu Pragya | Spokesperson | BJP |
| 12 | Deepali Naair | Group CMO | CK Birla Group |
| 13 | Dhanendra Kumar | Chairman | Competition Advisory Services (India) LLP |
| 14 | Dikshu C. Kukreja | Honorary Consul General of The Republic of Albania, New Delhi | |
| 15 | Dr Arvind Kumar Goel | Renowned Educationist and Philanthropist | |
| 16 | Dr. Amit Goel | Editorial Director | The Pioneer |
| 17 | Dr. Annurag Batra | Chairman & Editor in chief | exchange4media & Businessworld |
| 18 | Dr. Bhuvan Lall | Author & Film Producer | |
| 19 | Dr. Shama Mohamed | National Spokesperson | Indian National Congress |
| 20 | Dr. Vishal Talwar | Director | IMT Ghaziabad |
| 21 | Gaurav Khullar | Honorary Emeritus, Khullar Group of Companies & Enterpreneur | |
| 22 | Harsha Razdan | CEO - South Asia | Dentsu |
| 23 | Harvannsh Chawla | Founder & Managing Partner | K R Chawla & Co. Advocates |
| 24 | Ishank Joshi | CEO | Mobavenue Media |
| 25 | Jaiveer Shergill | National Spokesperson | BJP |
| 26 | Jamal Shaikh | Chief Operating Officer - Lifestyle Media Businesses | RP Sanjiv Goenka Group |
| 27 | Janardan Pandey | Founder & Managing Director | Nett Value Media |
| 28 | Kunal Katyal | Managing Director | Konig Group |
| 29 | Kunal Tandon | Counsel, Delhi High Court and Supreme Court of India | |
| 30 | M.Q. SYED | C.M.D. | Exhicon Events Media Solutions Ltd. |
| 31 | Markand Adhikari | Chairman & MD | SRI ADHIKARI BROTHERS (SABGROUP) |
| 32 | Mohit Saraf | Founder & Managing Partner | Saraf and Partners |
| 33 | Namita Chaddha | Founder & Managing Partner | Chadha & Co. |
| 34 | Naziya Alvi Rahman | Editor | exchange4media |
| 35 | Noor Fathima Warsia | Group Editorial Director | BW Businessworld |
| 36 | Pramod Dubey | Senior Advocate | Supreme Court of India |
| 37 | Prateek Bhatt | Writer, Astrologer, Face Reader, Numerologist, Spiritual Guru | |
| 38 | Pulkit Narayan | Founder & CEO |
DangleAds Technologies |
| 39 | Rahul Suri | Founder | Rabaan Enterprises |
| 40 | Rajeev Jain | Sr. Vice President- Corporate Marketing | DS Group |
| 41 | Rajesh Lalwani | CEO | Scenario Consulting |
| 42 | Rajiv Dubey | Senior GM Head of Media | Dabur India |
| 43 | Rohit Ohri | FCB Global Partner | |
| 44 | Ruby Sinha | Founder, sheatwork.com and President, BRICS CCI WE | |
| 45 | S. Ravi | Managing Partner | Ravi Rajan & Company,Chairman- TFCI |
| 46 | Salil Kapoor | Independent director on board , ESSCI ( Electronic Sector Skill Council of India ) | |
| 47 | Sandeep Dahiya | Founder & CEO | Branquila Brand Ventures |
| 48 | Sandeep Mahajan | Chairman & Managing Director | Goodyear India Limited |
| 49 | Saurav Banerjee | Managing Director & Founder | MyyTake |
| 50 | Shalabh Mani Tripathi | Media Advisor, Hon. CM, Uttar Pradesh | |
| 51 | Shashank Bajpai | Counsel for Union of India Supreme Court and Managing Partner Vardharma chambers | |
| 52 | Shazia Ilmi | National Spokesperson | BJP |
| 53 | Shivani Malik | Founder | Mother's Kitchen |
| 54 | Shubhranshu Singh | Chief Marketing Officer | Tata Motors CV |
| 55 | Sudhir Mishra | Founder & Managing Partner | Trust Legal |
| 56 | Suman Saraf | Managing Director | Radha TMT |
| 57 | Sunil Bhargava | IAS (Retired) and Cultural Entrepreneur | |
| 58 | Sunil Chauhan | Founder | Fabcafe by Fabindia |
| 59 | Syed Zafar Islam | Former MP | Rajya Sabha |
| 60 | Vaibhav Dange | Former Advisor | National Highways Authority of India, Ministry of Road Transport & Highways |
| 61 | Vandana Bhargava | Founder and Chairperson | House of VSB |
| 62 | Veer Sagar | Chairman | Selectronic India |
| 63 | Vinit Goenka | Spokesperson | BJP Delhi |
| 64 | Vinod Agnihotri | Consulting editor | Amar Ujala |
| 65 | Sanjay Jha | Head of Newsgathering (South Asia) | ITV News, London |
देश के टीवी इंडस्ट्री के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शुक्रवार को TRAI यानी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के उस नियम को सही ठहराया
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Samachar4media Bureau
देश के टीवी इंडस्ट्री के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शुक्रवार को TRAI यानी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के उस नियम को सही ठहराया, जिसमें टीवी चैनलों पर हर घंटे सिर्फ 12 मिनट विज्ञापन दिखाने की सीमा तय की गई है। इसके साथ ही 13 साल से चल रही कानूनी लड़ाई भी खत्म हो गई।
दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन शामिल थे, ने ब्रॉडकास्टर्स और इंडस्ट्री संगठनों की याचिकाएं खारिज कर दीं। TRAI ने यह नियम साल 2013 में लागू किया था। इसके तहत किसी भी चैनल को एक घंटे में 10 मिनट कमर्शियल विज्ञापन और 2 मिनट अपने प्रमोशनल कंटेंट दिखाने की इजाजत है।
यह फैसला टीवी इंडस्ट्री, खासकर न्यूज चैनलों और फ्री-टू-एयर चैनलों पर बड़ा असर डाल सकता है, क्योंकि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा विज्ञापनों से आता है। पिछले कई सालों से कई न्यूज चैनल प्राइम टाइम डिबेट, ब्रेकिंग न्यूज और लाइव कवरेज के दौरान तय सीमा से ज्यादा विज्ञापन दिखाते रहे हैं।
दरअसल, दिसंबर 2013 में हाई कोर्ट ने चैनलों को अस्थायी राहत देते हुए TRAI को सख्त कार्रवाई से रोक दिया था। तभी से यह मामला अदालत में लंबित था। अब कोर्ट ने साफ कर दिया है कि TRAI का नियम वैध है।
TRAI का कहना था कि जरूरत से ज्यादा विज्ञापन दर्शकों के देखने के अनुभव को खराब करते हैं और कार्यक्रमों की निरंतरता टूटती है। वहीं ब्रॉडकास्टर्स का तर्क था कि TRAI के पास विज्ञापनों की अवधि तय करने का अधिकार नहीं है। उनका यह भी कहना था कि अगर विज्ञापन समय घटा दिया गया, तो कई चैनलों के बिजनेस मॉडल पर असर पड़ेगा।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस फैसले के बाद चैनलों को अपनी प्रोग्रामिंग और कमाई की रणनीति बदलनी पड़ सकती है। विज्ञापन स्लॉट कम होने से चैनल प्रीमियम रेट बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि इससे विज्ञापनदाता डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की तरफ और तेजी से जा सकते हैं, जहां टारगेटेड और सस्ते विज्ञापन विकल्प मौजूद हैं।
मनोरंजन चैनल, मूवी चैनल और लाइव स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्ट करने वाले नेटवर्क्स को भी अब अपने एड शेड्यूल और इन्वेंट्री प्लानिंग में बदलाव करना पड़ सकता है। इंडस्ट्री अब कोर्ट के विस्तृत आदेश का इंतजार कर रही है, जिससे यह साफ होगा कि नियम लागू करने का तरीका क्या होगा और लाइव इवेंट्स या स्पोर्ट्स प्रसारण को कोई छूट मिलेगी या नहीं।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब टीवी इंडस्ट्री पहले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया वीडियो और OTT से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले समय में टीवी नेटवर्क्स सब्सक्रिप्शन, ब्रांडेड कंटेंट, स्पॉन्सरशिप और डिजिटल कारोबार पर ज्यादा फोकस कर सकते हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की सीमा तय करने वाले TRAI के नियम को सही ठहराया है।
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Samachar4media Bureau
दिल्ली हाई कोर्ट ने टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की सीमा तय करने वाले TRAI के नियम को सही ठहराया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब टीवी चैनल एक घंटे में सिर्फ 12 मिनट ही विज्ञापन दिखा सकेंगे। इसमें 10 मिनट कमर्शियल विज्ञापन और 2 मिनट चैनल के खुद के प्रमोशनल कंटेंट के लिए होंगे।
इस फैसले के साथ ब्रॉडकास्टर्स और TRAI के बीच पिछले 13 साल से चल रही कानूनी लड़ाई भी खत्म हो गई है। हालांकि मीडिया इंडस्ट्री के कई खिलाड़ी अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।मीडिया इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि इस फैसले का सबसे ज्यादा असर न्यूज चैनलों और फ्री-टू-एयर (FTA) चैनलों पर पड़ सकता है। वजह यह है कि इन चैनलों की कमाई का बड़ा हिस्सा विज्ञापनों से आता है।
दरअसल, कई न्यूज चैनल प्राइम टाइम डिबेट, चुनाव कवरेज, ब्रेकिंग न्यूज और लाइव इवेंट्स के दौरान तय सीमा से ज्यादा विज्ञापन दिखाते रहे हैं। अब 12 मिनट की सीमा लागू होने के बाद उनके पास बेचने के लिए कम विज्ञापन स्लॉट बचेंगे। इससे उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ सकता है।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब चैनलों के सामने दो रास्ते होंगे। पहला, कम विज्ञापन स्लॉट होने की वजह से विज्ञापन दरें बढ़ाई जाएं। दूसरा, अपने बिजनेस मॉडल और प्रोग्रामिंग स्ट्रैटेजी में बदलाव किया जाए। खासतौर पर हिंदी न्यूज चैनलों और रीजनल चैनलों पर ज्यादा दबाव बन सकता है, क्योंकि इन बाजारों में प्रतिस्पर्धा पहले से काफी ज्यादा है और सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई सीमित है।
मीडिया एजेंसियों का मानना है कि इस फैसले के बाद टीवी विज्ञापनों की उपलब्धता कम हो जाएगी। ऐसे में प्राइम टाइम शो, बड़े एंटरटेनमेंट प्रोग्राम और लाइव स्पोर्ट्स के दौरान विज्ञापन स्लॉट की कीमतें बढ़ सकती हैं।
हालांकि विज्ञापनदाता ज्यादा महंगे टीवी विज्ञापन स्वीकार करेंगे या नहीं, यह बड़ा सवाल है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पहले ही ऐडवर्टाइजर्स को बेहतर टार्गेटिंग, पर्फॉमेंस ट्रैकिंग और फ्लैक्सिबल प्राइजिंग जैसे विकल्प दे रहे हैं। ऐसे में अगर टीवी चैनल विज्ञापन दरें बहुत ज्यादा बढ़ाते हैं, तो कई ब्रांड डिजिटल प्लेटफॉर्म की तरफ तेजी से शिफ्ट हो सकते हैं।
इंडस्ट्री के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला भारतीय टीवी ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री के बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव ला सकता है। आने वाले समय में चैनलों को कम विज्ञापनों में ज्यादा कमाई का नया रास्ता तलाशना पड़ सकता है।
मुंबई में आयोजित Goafest ABBY Awards 2026 में Zee Entertainment Enterprises Ltd. ने एक बार फिर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।
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Samachar4media Bureau
मुंबई में आयोजित Goafest ABBY Awards 2026 में Zee Entertainment Enterprises Ltd. ने एक बार फिर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। कंपनी के मुताबिक, उसने लगातार चौथी बार ‘Broadcaster of the Year’ का खिताब अपने नाम किया।
इस साल Zee ने कुल 15 अवॉर्ड जीते, जिनमें 3 गोल्ड, 6 सिल्वर, 5 ब्रॉन्ज और 1 मेरिट अवॉर्ड शामिल हैं। कंपनी की इस उपलब्धि को टीवी और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में उसकी मजबूत पकड़ और दर्शकों के बीच बढ़ती लोकप्रियता के तौर पर देखा जा रहा है।
Zee Kannada, Zee Bangla, Zee Marathi और Zee Cinema जैसे चैनलों ने अलग-अलग कैटेगरी में शानदार प्रदर्शन किया। Zee Kannada के शो ‘श्री राघवेंद्र महात्मे’ को ‘Best Launch of a TV Program Using Multi-Media’ कैटेगरी में गोल्ड अवॉर्ड मिला। वहीं Zee Cinema पर ‘Pushpa 2: The Rule’ के वर्ल्ड टीवी प्रीमियर को भी दो अलग-अलग कैटेगरी में गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
कंपनी का कहना है कि बदलते मीडिया माहौल में भी उसका लीनियर टीवी नेटवर्क लगातार मजबूत बना हुआ है और दर्शकों के बीच उसकी पकड़ कायम है।
इस उपलब्धि पर Zee Entertainment Enterprises Ltd. के प्रवक्ता ने कहा कि लगातार चौथी बार ‘Broadcaster of the Year’ जीतना इस बात का सबूत है कि कंपनी लगातार ऐसा कंटेंट देने पर फोकस कर रही है, जो बड़े स्तर पर दर्शकों से जुड़ता है। उन्होंने कहा कि यह सफलता टीम और पार्टनर्स की मेहनत का नतीजा है, जो लगातार नई कहानियों और दमदार किरदारों के जरिए स्टोरीटेलिंग को नई पहचान दे रहे हैं।
कंपनी ने हाल के वर्षों में अपनी कंटेंट रणनीति को और मजबूत किया है। मजबूत किरदारों और भारतीय संस्कृति से जुड़े नए शो लॉन्च करने की वजह से Zee ने एंटरटेनमेंट नेटवर्क में अपनी पकड़ और मजबूत की है। कंपनी फिलहाल 17.4% मार्केट शेयर के साथ भारत का नंबर-2 एंटरटेनमेंट नेटवर्क बनी हुई है।
हिंदी, बांग्ला, ओड़िया और कन्नड़ बाजारों में Zee की मजबूत स्थिति बनी हुई है। इसके साथ ही Zee Cinema ने नए शो और बड़ी फिल्म प्रीमियर के दम पर दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनाई है।
ABBY Awards को देश के सबसे प्रतिष्ठित क्रिएटिव और मीडिया अवॉर्ड्स में गिना जाता है। इसमें देशभर की बड़ी एजेंसियां, मार्केटर्स और क्रिएटिव लीडर्स हिस्सा लेते हैं। ऐसे में लगातार चौथी बार यह सम्मान जीतना Zee के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
देश की टीवी न्यूज इंडस्ट्री इस समय FAST TV और इंटरनेट के जरिए चलने वाले टीवी चैनलों को लेकर दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है।
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Samachar4media Bureau
देश की टीवी न्यूज इंडस्ट्री इस समय FAST TV और इंटरनेट के जरिए चलने वाले टीवी चैनलों को लेकर दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है। मामला TRAI यानी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के उस प्रस्ताव से जुड़ा है, जिसमें Application-based Linear Television Distribution (ALTD) और Free Ad-Supported Streaming Television (FAST) सेवाओं के लिए रेगुलेशन लाने की बात कही गई है।
TRAI ने 6 अप्रैल को इस विषय पर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया था और कंपनियों से राय मांगी थी। इसके बाद टाइम्स नेटवर्क, एबीपी नेटवर्क, टीवी टुडे नेटवर्क और नेटवर्क18 जैसी बड़ी मीडिया कंपनियों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी। इन प्रतिक्रियाओं से साफ हो गया है कि टीवी और डिजिटल ब्रॉडकास्टिंग के भविष्य को लेकर इंडस्ट्री के भीतर बड़ी बहस चल रही है।
टाइम्स नेटवर्क और एबीपी नेटवर्क का मानना है कि FAST चैनल्स और इंटरनेट आधारित टीवी प्लेटफॉर्म तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन उन पर वैसी जिम्मेदारियां और नियम लागू नहीं हैं जैसे केबल, डीटीएच और IPTV प्लेटफॉर्म पर होते हैं। उनका कहना है कि इससे बाजार में असंतुलन पैदा हो रहा है।
टाइम्स नेटवर्क ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि कई प्रीमियम चैनल, जो पहले पेड टीवी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध थे, अब FAST प्लेटफॉर्म्स पर मुफ्त में दिखाए जा रहे हैं। इससे लोगों का पेड टीवी से दूरी बनाना बढ़ रहा है और सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई पर असर पड़ रहा है।
कंपनी ने यह भी चिंता जताई कि स्मार्ट टीवी कंपनियां और ऑपरेटिंग सिस्टम प्रोवाइडर्स अब यह तय करने लगे हैं कि कौन-सा चैनल दर्शकों को ज्यादा दिखाई देगा। भविष्य में ये कंपनियां चैनलों से “दिखाई देने” के बदले फीस भी मांग सकती हैं, जैसा पहले पारंपरिक टीवी डिस्ट्रीब्यूशन में देखा गया था।
एबीपी नेटवर्क ने भी कई मुद्दों पर टाइम्स नेटवर्क का समर्थन किया, लेकिन उसने पूरी तरह सख्त नियमों की बजाय “हल्के लेकिन सक्रिय रेगुलेशन” की बात कही। कंपनी का कहना है कि अगर FAST इकोसिस्टम बिना किसी निगरानी के बढ़ता रहा, तो कुछ बड़ी टेक कंपनियों का दबदबा बहुत ज्यादा बढ़ सकता है।
एबीपी नेटवर्क ने एल्गोरिदम के जरिए अपने कंटेंट को बढ़ावा देने, विज्ञापन व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी और दर्शकों के डेटा पर असमान नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी चिंता जताई। कंपनी ने मांग की कि ब्रॉडकास्टर्स के कंटेंट से जुड़े विज्ञापन इन्वेंटरी पर उनका ही नियंत्रण रहना चाहिए।
वहीं दूसरी तरफ टीवी टुडे नेटवर्क और नेटवर्क18 ने TRAI के इस प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया है। उनका कहना है कि FAST और ALTD सेवाएं असल में OTT और इंटरनेट आधारित एप्लिकेशन हैं, इसलिए इन्हें टेलीकॉम सर्विस की तरह रेगुलेट नहीं किया जा सकता।
टीवी टुडे नेटवर्क ने कहा कि ये सेवाएं सिर्फ इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन खुद टेलीकॉम सर्विस नहीं हैं। कंपनी का यह भी कहना है कि न्यूज और कंटेंट प्लेटफॉर्म पहले से ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, केबल टीवी नेटवर्क एक्ट, आईटी नियमों और सेल्फ-रेगुलेटरी संस्थाओं के दायरे में आते हैं। ऐसे में नए नियम सिर्फ अतिरिक्त बोझ बढ़ाएंगे।
नेटवर्क18 ने और भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि FAST और ALTD सेवाओं को टेलीकॉम रेगुलेशन के दायरे में लाना कानूनी और संवैधानिक रूप से गलत हो सकता है। कंपनी का कहना है कि संसद ने पहले ही टेलीकॉम एक्ट के अंतिम मसौदे में OTT सेवाओं को बाहर रखा था।
नेटवर्क18 ने यह भी कहा कि इंटरनेट आधारित ऐप्स और टेलीकॉम नेटवर्क दोनों अलग-अलग स्तर पर काम करते हैं। ऐसे में इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर लाइसेंस फीस, बैंक गारंटी और पुराने ब्रॉडकास्टिंग नियम लागू करना डिजिटल इंडिया और कारोबार आसान बनाने की नीति के खिलाफ होगा।
दरअसल, भारत में FAST TV बाजार तेजी से बढ़ रहा है। स्मार्ट टीवी की बढ़ती पहुंच, सस्ता इंटरनेट और मुफ्त विज्ञापन आधारित कंटेंट की बढ़ती मांग इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है। यही कारण है कि ब्रॉडकास्टर्स इसे एक बड़े मौके के साथ-साथ अपने पारंपरिक बिजनेस के लिए खतरे के रूप में भी देख रहे हैं।
अब इस पूरे मामले पर सभी की नजर TRAI की अगली कार्रवाई पर टिकी है। माना जा रहा है कि इस फैसले का असर भारत के कनेक्टेड टीवी बाजार, डिजिटल विज्ञापन इंडस्ट्री और ब्रॉडकास्टर्स, टेक कंपनियों तथा रेगुलेटर्स के बीच ताकत के संतुलन पर पड़ सकता है।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज ने स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए बड़ा ऐलान किया है।
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Samachar4media Bureau
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज ने स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए बड़ा ऐलान किया है। कंपनी अब ‘Unite8 Sports’ नाम से चार नए स्पोर्ट्स चैनल लॉन्च करने जा रही है। इसके जरिए Zee फुटबॉल, कबड्डी, क्रिकेट, बैडमिंटन, रेसलिंग, बॉक्सिंग और कॉम्बैट स्पोर्ट्स जैसे खेलों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
कंपनी के मुताबिक, वह चार चैनल लॉन्च करेगी- Unite8 Sports 1, Unite8 Sports 1 HD (हिंदी) और Unite8 Sports 2, Unite8 Sports 2 HD (अंग्रेजी)। इन चैनलों के जरिए अलग-अलग तरह के खेलों का लाइव एक्शन दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा। चैनल लॉन्च करने के लिए जरूरी आवेदन भी कंपनी ने जमा कर दिए हैं।
Zee का कहना है कि भारत में लाइव स्पोर्ट्स कंटेंट की मांग तेजी से बढ़ रही है और दर्शकों की दिलचस्पी अब कई तरह के खेलों में बढ़ रही है। इसी को देखते हुए कंपनी अपने स्पोर्ट्स कारोबार का विस्तार कर रही है।
इस नए स्पोर्ट्स कारोबार की जिम्मेदारी भावेश जनावेल्कर को दी गई है। वह अब Unite8 Sports चैनलों के Chief Business Officer के तौर पर काम संभालेंगे। इससे पहले वह कंपनी के मराठी मूवी बिजनेस को संभाल रहे थे।
भावेश जनावलेकर ने कहा कि भारत जैसे बड़े देश में ऐसे खेलों की मांग बढ़ रही है, जिनकी वैश्विक पहचान हो लेकिन जिनसे देश के आम दर्शक भी जुड़ाव महसूस करें। उन्होंने कहा कि लाइव स्पोर्ट्स कंटेंट की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है और कंपनी इसी मौके का फायदा उठाना चाहती है।
कंपनी ने यह भी बताया कि वह FIFA के साथ बातचीत कर रही है, ताकि भारत में FIFA World Cup 2026 के मैचों का प्रसारण और स्ट्रीमिंग की जा सके।
Zee का मानना है कि नए स्पोर्ट्स चैनलों के जरिए वह तेजी से बढ़ रहे स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगी और लंबे समय में कारोबार को नई मजबूती मिलेगी।
मिहिर रंजन ने पिछले साल जुलाई में इस न्यूज चैनल के साथ मीडिया में अपनी नई पारी का आगाज किया था।
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Samachar4media Bureau
वरिष्ठ पत्रकार मिहिर रंजन ने देश के प्रमुख न्यूज नेटवर्क्स में शुमार ‘भारत एक्सप्रेस’ (Bharat Express) से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पिछले साल जुलाई में इस न्यूज चैनल के साथ मीडिया में अपनी नई पारी का आगाज किया था और बतौर मैनेजिंग एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अपनी इस भूमिका में मिहिर रंजन चैनल की संपादकीय रणनीति और आउटपुट संचालन का नेतृत्व कर रहे थे।
मिहिर रंजन ने इस्तीफा क्यों दिया और उनका अगला कदम क्या होगा, फिलहाल इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं मिल सकी है। मिहिर रंजन इससे पहले हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया डेली लाइव’ (India Daily Live) से जुड़े हुए थे। बतौर मैनेजिंग एडिटर वह इस चैनल की सभी डिजिटल प्रॉपर्टीज की कमान संभाल रहे थे। इसी के साथ वह कंसल्टिंग एडिटर के तौर पर टीवी चैनल को भी अपने सुझाव दे रहे थे।
‘इंडिया डेली लाइव’ से पहले मिहिर रंजन ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) की टीम का हिस्सा थे, जहां उन्होंने एसोसिएट वाइस प्रेजिडेंट के पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद वह IIM, इंदौर में डिजिटल मीडिया का एक कोर्स करने चले गए थे।
‘एबीपी न्यूज’ में मिहिर रंजन करीब दो साल तक रहे थे। उन्होंने मई 2020 में बतौर आउटपुट हेड ‘एबीपी न्यूज’ जॉइन किया था।
इसके बाद वह ‘इंडिया डेली लाइव’ के साथ जुड़ गए थे और फिर पिछले साल उन्होंने ‘भारत एक्सप्रेस’ के साथ अपना सफर शुरू किया था।
मिहिर रंजन को विभिन्न मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का लंबा अनुभव है। ’एबीपी न्यूज’ से पहले वह ’रिपब्लिक भारत’ (Republic Bharat) से जुड़े हुए थे। वह ‘रिपब्लिक टीवी’ की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा रहे हैं और ‘रिपब्लिक भारत’ में आउटपुट एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इससे पहले वह ‘टीवी टुडे नेटवर्क’ (TV Today Network) में भी अपनी अहम भूमिका निभा चुके हैं।
‘टीवी टुडे नेटवर्क’ के साथ अपनी 14-15 साल की लंबी पारी के दौरान वह कई अहम प्रोग्राम भी कर चुके हैं। यही नहीं, मिहिर रंजन करीब पांच साल तक जानी-मानी न्यूज एजेंसी ‘यूएनआई’ (UNI) के साथ भी काम कर चुके हैं। इसमें करीब ढाई साल उन्होंने लखनऊ और करीब ढाई साल दिल्ली में बतौर रिपोर्टर और डेस्क पर अपनी जिम्मेदारी संभाली है।
मूल रूप से बिहार के रहने वाले मिहिर रंजन ने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) से पढ़ाई की है। इसके साथ ही उन्होंने डिफेंस करेसपॉन्डेंट (Defence Correspondent) का कोर्स भी किया है।
ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) और डेन नेटवर्क्स लिमिटेड (DEN Networks Limited) ने केंद्र सरकार की नई TV Ratings Policy 2026 को चुनौती देते हुए केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
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Samachar4media Bureau
टीवी इंडस्ट्री में TRP को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कोर्ट तक पहुंच गया है। ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) और डेन नेटवर्क्स लिमिटेड (DEN Networks Limited) ने केंद्र सरकार की नई TV Ratings Policy 2026 को चुनौती देते हुए केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि नई नीति के तहत ‘लैंडिंग पेज’ की व्यूअरशिप को TRP में शामिल नहीं करना केबल ऑपरेटर्स और मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स (MSOs) के कारोबार को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।
दरअसल, ‘लैंडिंग पेज’ वह चैनल होता है जो सेट-टॉप बॉक्स ऑन करते ही सबसे पहले स्क्रीन पर दिखाई देता है। केबल और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए यह एक बड़ा रेवेन्यू सोर्स माना जाता है, क्योंकि कई ब्रॉडकास्टर्स बेहतर प्लेसमेंट के लिए भुगतान करते हैं।
नई नीति में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने साफ कहा है कि लैंडिंग पेज से आने वाली व्यूअरशिप को TRP में नहीं गिना जाएगा और इसे सिर्फ मार्केटिंग टूल माना जाएगा। इसी फैसले को AIDCF और DEN Networks ने अदालत में चुनौती दी है।
मामले की सुनवाई जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस की बेंच में हुई। केरल हाईकोर्ट ने फिलहाल बिना लैंडिंग पेज डेटा वाले TRP जारी करने पर रोक लगा दी है। हालांकि अदालत ने नई TRP नीति के लागू होने पर रोक नहीं लगाई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि OTT प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया की बढ़ती चुनौती के बीच केबल टीवी इंडस्ट्री पहले से दबाव में है। ऐसे में लैंडिंग पेज से जुड़ी कमाई खत्म होने से कारोबार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
AIDCF और DEN Networks ने यह भी आरोप लगाया है कि सरकार अप्रत्यक्ष रूप से वही काम कर रही है, जिसे लेकर पहले से सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है। यह विवाद 2017 से चला आ रहा है, जब Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने लैंडिंग पेज पर रेटेड चैनल दिखाने पर रोक लगाने की कोशिश की थी।
बाद में यह मामला TDSAT और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही TRAI को सीधे तौर पर ऐसे प्रतिबंध लागू करने से रोका था, लेकिन अब नई TRP नीति के जरिए वही काम दूसरे तरीके से किया जा रहा है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) ने पहले से ऐसा एल्गोरिद्म तैयार किया हुआ है, जो यह पहचान सकता है कि दर्शक किसी चैनल को सिर्फ ऑटोमेटिक प्लेसमेंट की वजह से देख रहा है या वास्तव में उसमें रुचि ले रहा है। इसलिए पूरी तरह से लैंडिंग पेज व्यूअरशिप हटाना तकनीकी रूप से भी सही नहीं माना जा सकता।
नई TV Ratings Policy 2026 में सिर्फ लैंडिंग पेज ही नहीं, बल्कि पूरे टीवी मेजरमेंट सिस्टम में बड़े बदलाव किए गए हैं। अब TV रेटिंग्स में केबल, DTH, OTT और Connected TV को भी शामिल करने की बात कही गई है। इसके अलावा मापे जाने वाले घरों की संख्या बढ़ाने, ऑडिट और निगरानी को सख्त करने जैसे कई नए नियम भी लागू किए गए हैं।
AIDCF और DEN Networks ने अदालत से मांग की है कि लैंडिंग पेज व्यूअरशिप हटाने वाले प्रावधान को असंवैधानिक घोषित किया जाए और नई गाइडलाइंस के अमल पर रोक लगाई जाए।
Dish TV ने IPL सीजन के दौरान Star Sports 1 Hindi SD और HD की फ्री एक्सेस बंद कर दी है। अब मैच देखने के लिए ग्राहकों को चैनल अलग से अपने पैक में जोड़ना होगा।
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Samachar4media Bureau
आईपीएल (IPL) सीजन के बीच Dish TV यूजर्स को बड़ा झटका लगा है। प्लेटफॉर्म ने Star Sports 1 Hindi SD और HD चैनलों की फ्री एक्सेस बंद कर दी है। अब क्रिकेट मैच देखने के लिए ग्राहकों को इन चैनलों को अलग से अपने पैक में जोड़ना होगा। पहले यह चैनल आईपीएल प्रसारण के दौरान कई ग्राहकों को मुफ्त उपलब्ध कराया गया था।
हालांकि अब इन्हें फिर से पेड कैटेगरी में डाल दिया गया है। Dish TV पर आईपीएल के बाकी मैच देखने के लिए सब्सक्राइबर्स को Star Sports 1 Hindi चैनल 19 रुपये प्लस जीएसटी देकर एक्टिवेट करना होगा। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब आईपीएल लगातार स्पोर्ट्स चैनलों के लिए हाई व्यूअरशिप ला रहा है। खासतौर पर हिंदी क्रिकेट फीड्स की मांग काफी ज्यादा बनी हुई है।
डीटीएच ऑपरेटर्स अक्सर प्रमोशनल ऑफर या सैंपलिंग के तहत कुछ पेड चैनलों को सीमित समय के लिए फ्री उपलब्ध कराते हैं। बाद में कंपनी अपनी नीति या ऑफर के अनुसार इन्हें वापस पेड कैटेगरी में डाल सकती है। हालांकि Dish TV की ओर से फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह बदलाव सभी ग्राहकों पर लागू हुआ है या केवल कुछ चुनिंदा पैक्स वाले यूजर्स पर इसे लागू किया गया है।
जनवरी 2025 की एक सुबह। यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड हुई। न कोई टीवी चैनल, न कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस- बस एक कैमरा, एक माइक्रोफोन, और दो आदमी आमने-सामने बैठे।
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Vikas Saxena
जनवरी 2025 की एक सुबह। यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड हुई। न कोई टीवी चैनल, न कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस- बस एक कैमरा, एक माइक्रोफोन, और दो आदमी आमने-सामने बैठे। Zerodha के को-फाउंडर निखिल कामत के पॉडकास्ट 'People by WTF' पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैठे थे और यह उनका पहला पॉडकास्ट अपीयरेंस था। फिर मार्च 2025 में मोदी अमेरिकी पॉडकास्टर Lex Fridman के साथ करीब तीन घंटे बात करते दिखे। क्लिप्स वायरल हुईं, न्यूज चैनलों ने उन्हें चलाया, सोशल मीडिया पर बहस हुई। यह महज एक इंटरव्यू नहीं था। यह एक संकेत था, भारत में मीडिया की शक्ति का केंद्र बदल रहा है।
टीवी का दरबार खाली होने लगा
कुछ साल पहले तक प्राइम टाइम टीवी डिबेट ही वह जगह थी जहां जनमत बनता था। लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है।
FICCI-EY की 2026 मीडिया एंड एंटरटेनमेंट रिपोर्ट (मार्च 2026, 2025 के आंकड़े) के अनुसार, भारत में लीनियर टीवी विज्ञापन राजस्व में लगभग 10% (10.3%) की गिरावट आई, और ब्रैंड्स की संख्या भी 3% घटी जो TV पर विज्ञापन दे रहे थे। इसी साल डिजिटल विज्ञापन 26% बढ़कर ₹947 अरब पर पहुंच गया, जो कुल विज्ञापन राजस्व का 63% हो गया, पहली बार डिजिटल ने TV को पीछे छोड़ा।
Kantar की मीडिया कम्पास रिपोर्ट (Q3 2025) बताती है कि लीनियर TV की पहुंच Q1 2025 के 70.5 करोड़ से घटकर Q3 2025 में 68.9 करोड़ रह गई। इसके विपरीत, डिजिटल-ओनली दर्शक, यानी जो लोग बिना TV देखे केवल इंटरनेट पर कंटेंट देखते हैं, 2024 की तुलना में 30% बढ़कर 31.3 करोड़ हो गए, जो भारत की 15+ आबादी का 26% है।
IPL 2026 का आंकड़ा और भी चौंकाने वाला है। BARC India और TAM Sports के data के मुताबिक TV रेटिंग्स 4.57 (IPL 2025) से गिरकर 3.71 (IPL 2026) पर आ गईं, 18.8% की गिरावट। औसत viewership 26% गिरकर 1.06 करोड़ से 78.4 लाख रह गई। जबकि JioStar ने पहले वीकेंड पर डिजिटल में 51.5 करोड़ की रीच और 32.6 अरब मिनट का वाच टाइम दर्ज किया।
यह सिर्फ कंटेंट का बदलाव नहीं है। यह ऑडियंस के भरोसे का पलायन है, TV स्टूडियो से माइक्रोफोन की तरफ।
पॉडकास्ट का विस्फोट: नंबर बोलते हैं
भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पॉडकास्ट बाजार है, अमेरिका और चीन के बाद।
Deloitte की TMT Predictions 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पॉडकास्ट श्रोता 2024 के करीब 10 करोड़ से बढ़कर 2025 में 20 करोड़ हो गए। Astute Analytica के अनुसार भारत का पॉडकास्ट बाजार 2024 में $56 करोड़ (USD 560 million) का था और 2033 तक $424.8 करोड़ (USD 4.24 billion) तक पहुंचने का अनुमान है, 25.5% CAGR के साथ।
भारत में करीब 2.5 करोड़ लोग रोजाना कम से कम एक पॉडकास्ट सुनते हैं। और वे सुनते कब हैं? ऑफिस जाते समय, जिम में, खाना बनाते हुए। यह "बैकग्राउंड कंजप्शन" का नया युग है।
वैश्विक तस्वीर भी उतनी ही तेज है। Deloitte TMT Predictions 2026 का अनुमान है कि 2026 में वैश्विक पॉडकास्ट और वीडियो पॉडकास्ट (vodcast) का कुल विज्ञापन राजस्व $5 अरब (USD 5 billion) तक पहुंचेगा, पिछले साल की तुलना में करीब 20% की वृद्धि। IAB/PwC की 2025 Internet ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू रिपोर्ट के अनुसार 2025 में पॉडकास्ट ad revenue 17.6% बढ़कर $2.9 अरब (USD 2.9 billion) पर पहुंचा। इसी दौरान अमेरिका में TV ऐडवर्टाइजिंग 13.4% गिरा।
नेता अब TV स्टूडियो नहीं, माइक्रोफोन ढूंढते हैं
राजनेताओं का पॉडकास्ट की तरफ झुकाव इस पूरे बदलाव की सबसे बड़ी गवाही है।
जनवरी 2025 में PM मोदी ने निखिल कामत के साथ करीब दो घंटे की बातचीत की, यह उनका पहला पॉडकास्ट था। मार्च 2025 में Lex Fridman के साथ लगभग तीन घंटे की चर्चा हुई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प ने Joe Rogan के पॉडकास्ट पर तीन घंटे बिताए, जो उस चुनाव के सबसे चर्चित मीडिया मूमेंट्स में से एक बना।
सवाल यह है कि नेता TV से पॉडकास्ट की तरफ क्यों जा रहे हैं?
जवाब सीधा है: नैरेटिव कंट्रोल।
टीवी डिबेट्स में अक्सर शोर-शराबा, टोका-टाकी और बहस के बीच बात अधूरी रह जाती है। वहीं पॉडकास्ट एक शांत और कंट्रोल माहौल देते हैं, जहां लोग खुलकर और लंबी बातचीत कर पाते हैं। यहां सिर्फ छोटे ‘साउंड बाइट’ नहीं, बल्कि पूरी कहानी सुनने को मिलती है। यही वजह है कि पॉडकास्ट के छोटे-छोटे क्लिप्स सोशल मीडिया पर कई दिनों तक वायरल होते रहते हैं।
लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। सवाल उठ रहा है कि क्या पॉडकास्ट अब कठिन पत्रकारिता से बचने का जरिया बनते जा रहे हैं? जब नेता अपने पसंदीदा होस्ट के साथ बैठते हैं, तो अक्सर मुश्किल सवाल कम पूछे जाते हैं और जवाबदेही भी कम नजर आती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निखिल कामत के पॉडकास्ट पर आने के बाद कांग्रेस ने भी यही सवाल उठाए थे। पॉडकास्ट की ‘ऑथेंटिसिटी’ और अपनी कहानी को कंट्रोल करने की कोशिश, इन दोनों के बीच का यही टकराव अब मीडिया की बड़ी बहस बनता जा रहा है।
युवा भरोसा क्यों करते हैं, TV की बजाय?
ऑडियो-वीडियो हाइब्रिड: पॉडकास्ट सिर्फ "सुनने की चीज" नहीं रहा
पॉडकास्ट अब सिर्फ ऑडियो तक सीमित नहीं रहे। धीरे-धीरे यह एक पूरा वीडियो फॉर्मेट बनते जा रहे हैं।
Deloitte की TMT Predictions 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, एक बड़ा पॉडकास्ट प्लेटफॉर्म अब अपने 60% से ज्यादा टॉप शोज में वीडियो भी दे रहा है। यानी लोग अब सिर्फ सुन नहीं रहे, बल्कि पॉडकास्ट देख भी रहे हैं। Deloitte के 2025 Digital Media Trends सर्वे में यह भी सामने आया कि 27% लोग हर हफ्ते वीडियो पॉडकास्ट देखते हैं, और इसमें Gen Z और मिलेनियल्स सबसे आगे हैं।
वीडियो पॉडकास्ट के बढ़ने से “क्लिप्स इकॉनमी” भी तेजी से बढ़ी है। अब एक पॉडकास्ट सिर्फ एक वीडियो नहीं रहता, बल्कि उससे कई तरह का कंटेंट बनता है। उदाहरण के लिए, 2 घंटे के एक पॉडकास्ट से 20-30 छोटे क्लिप्स निकल जाते हैं, जो Reels, Shorts और X जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लाखों व्यूज़ और इम्प्रेशंस लाते हैं।
Interactive Advertising Bureau और PwC की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में डिजिटल वीडियो रेवेन्यू 25.4% बढ़कर 78 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह सबसे तेजी से बढ़ने वाला फॉर्मेट रहा। इसका सीधा फायदा वीडियो पॉडकास्ट्स को मिल रहा है, क्योंकि अब advertisers ऑडियो और वीडियो, दोनों को साथ में खरीद रहे हैं।
विज्ञापन का पैसा: TV से माइक्रोफोन की तरफ
खतरे भी हैं: जब माइक बेलगाम हो जाए
इस पूरी तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
टीवी में चाहे कितना भी शोर-शराबा हो, लेकिन वहां एक संपादकीय व्यवस्था होती है। एक एडिटर होता है, लीगल टीम होती है और ब्रॉडकास्टिंग के नियम भी होते हैं। लेकिन पॉडकास्ट की दुनिया में ऐसी निगरानी अभी बहुत कम है।
सबसे बड़ा खतरा गलत जानकारी फैलने का है। जब लाखों-करोड़ों लोग किसी होस्ट पर भरोसा करने लगते हैं, तो उसकी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। लेकिन अभी पॉडकास्ट की दुनिया में जवाबदेही तय करने का सिस्टम उतना मजबूत नहीं है।
दूसरी चिंता “पर्सनैलिटी कल्ट” की है। यानी जब किसी क्रिएटर की हर बात को बिना सवाल किए सच मान लिया जाए। टीवी पर नेताओं को अक्सर एंकर के कठिन सवालों का सामना करना पड़ता है, लेकिन पॉडकास्ट में माहौल ज्यादा दोस्ताना होता है। ऐसे में बिना जांचे दावे, भरोसेमंद आवाज और बड़ी पहुंच, ये मिलकर एक तरह के “सॉफ्ट प्रोपेगेंडा” का जरिया भी बन सकते हैं।
तीसरा बड़ा सवाल क्षेत्रीय भाषाओं का है। भारत की बड़ी आबादी हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं में सोचती और समझती है। Deloitte की रिपोर्ट भी कहती है कि बिजनेस, एजुकेशन और हेल्थ जैसे क्षेत्रों में क्षेत्रीय भाषाओं के पॉडकास्ट तेजी से बढ़ेंगे। Kuku FM और Hubhopper जैसे प्लेटफॉर्म इस दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन यह बाजार अभी शुरुआती दौर में ही है।
अब आगे क्या?
FICCI-EY, Deloitte और Grand View Research, इन तीनों की रिपोर्ट एक बात साफ कहती हैं: आने वाले पांच सालों में भारत का मीडिया जगत जितना बदलेगा, उतना शायद पिछले बीस सालों में भी नहीं बदला।
भारत का पॉडकास्ट बाजार तेजी से बढ़ रहा है। दूसरी तरफ टीवी विज्ञापनों की रफ्तार धीमी पड़ रही है, जबकि डिजिटल-ओनली दर्शकों की संख्या 31 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। और सबसे बड़ा संकेत यह है कि देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi भी अब पॉडकास्ट पर नजर आ रहे हैं।
इसका मतलब यह नहीं कि टीवी खत्म हो जाएगा। FICCI-EY की रिपोर्ट के मुताबिक, टीवी आज भी करीब 74.5 करोड़ साप्ताहिक दर्शकों वाला बड़ा माध्यम है। इतना बड़ा प्लेटफॉर्म अचानक खत्म नहीं होता। लेकिन अब वह अकेला भी नहीं है।
जो ताकत कभी सिर्फ टीवी के पास थी, लोगों की राय बनाने की और मुद्दे तय करने की, वह अब धीरे-धीरे उन लोगों की तरफ जा रही है, जिनके पास एक अच्छा माइक्रोफोन, एक कैमरा और अपनी बात कहने का भरोसा है।
हो सकता है कि भारत के अगले बड़े opinion leaders किसी बड़े टीवी स्टूडियो में नहीं, बल्कि घर के एक छोटे से कमरे में, हेडफोन लगाकर माइक्रोफोन के सामने बैठे हों।
AIDCF की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से मांगा जवाब, 11 जून से न्यूज रेटिंग्स दोबारा शुरू करने की तैयारी में था BARC
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Samachar4media Bureau
टेलीविजन न्यूज रेटिंग्स यानी TRP को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। केरल हाईकोर्ट ने बिना लैंडिंग पेज डेटा के न्यूज चैनलों की TRP जारी करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह फैसला ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) की याचिका पर आया है।
जानकारी के मुताबिक, AIDCF ने संशोधित ऑडियंस मेजरमेंट फ्रेमवर्क के क्लॉज 5.4.1 को चुनौती देते हुए केरल हाईकोर्ट का रुख किया था। मामले की सुनवाई जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस की बेंच में हुई। कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) को इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार की TRP पॉलिसी गाइडलाइंस के अमल पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन बिना लैंडिंग पेज डेटा के रेटिंग्स जारी करने पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) ने 11 जून से न्यूज चैनलों की साप्ताहिक रेटिंग्स दोबारा जारी करने की घोषणा की थी।
दरअसल, BARC ने कहा था कि शुरुआती चरण में न्यूज रेटिंग्स में लैंडिंग पेज इम्प्रेशंस को शामिल नहीं किया जाएगा। इसी फैसले को लेकर इंडस्ट्री में विवाद बढ़ गया।
न्यूज ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री से जुड़े कई विशेषज्ञों का मानना है कि अनिवार्य या प्रोत्साहित किए गए लैंडिंग पेज दर्शकों की वास्तविक पसंद को प्रभावित करते हैं और इससे TRP आंकड़ों में असंतुलन पैदा होता है। वहीं, कई ब्रॉडकास्टर्स का तर्क है कि लैंडिंग पेज चैनलों के प्रमोशन का एक वैध तरीका है और इन्हें पूरी तरह हटाने से प्रतिस्पर्धी बाजार में चैनलों की पहुंच और विजिबिलिटी प्रभावित हो सकती है।
मीडिया इंडस्ट्री के लिए यह मामला बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि न्यूज TRP दोबारा शुरू होने से विज्ञापन दरों, चैनलों की मार्केट पोजिशनिंग और फेस्टिव सीजन की रणनीतियों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि केरल हाईकोर्ट में चल रही यह सुनवाई भविष्य में टीवी ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम और ब्रॉडकास्टर्स व डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म्स के बीच शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई केंद्र सरकार के जवाब दाखिल करने के बाद होगी।