enba 2023: विजेताओं के चयन के लिए हुई जूरी मीट, 30 मार्च को उठेगा लिस्ट से पर्दा

बता दें कि यह इस कार्यक्रम का 16वां एडिशन है। जूरी द्वारा चुने गए विजेताओं को सम्मानित करने के लिए 30 मार्च 2024 को दिल्ली में अवॉर्ड वितरण समारोह का आयोजन किया जाएगा।

Last Modified:
Tuesday, 19 March, 2024
Jury Meet


‘एक्सचेंज4मीडिया’ समूह द्वारा बहुप्रतिष्ठित ‘एक्‍सचेंज4मीडिया न्‍यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) 2023 के विजेताओं के नाम से जल्द पर्दा उठ जाएगा। दरअसल, विभिन्न श्रेणियों में तमाम एंट्रीज में से विजेताओं का चुनाव करने के लिए 19 मार्च 2024 को दिल्ली के ‘द लीला पैलेस’ होटल में जूरी मीट का आयोजन किया गया। इस जूरी में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठित नाम शामिल हुए।

बता दें कि यह इस कार्यक्रम का 16वां एडिशन है। जूरी द्वारा चुने गए विजेताओं को सम्मानित करने के लिए 30 मार्च 2024 को अवॉर्ड वितरण समारोह का आयोजन किया जाएगा।

इस आयोजन के बारे में ‘बिजनेसवर्ल्ड’ समूह के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ समूह के फाउंडर व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा का कहना था, ‘लोकतंत्र का महापर्व आम चुनाव नजदीक हैं और इसकी कवरेज करने के लिए न्यूज मीडिया यानी न्यूज चैनल्स, प्रिंट और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स देश में व्युअर्स और मतदाताओं के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहेंगे। एक्सचेंज4मीडिया पिछले 24 वर्षों से मीडिया, एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में देश का नंबर वन एडिटोरियल प्लेटफॉर्म है। न्यूज ब्रॉडकास्टिंग में ‘इनबा’ उत्कृष्टता का सुनहरा मानक बन गया है। इनबा के 16वां एडिशन में रिकॉर्ड एंट्रीज और रिकॉर्ड भागीदारी देखने को मिली है।’

गौरतलब है कि वर्ष 2008 में अपनी शुरुआत के बाद से ही हर साल ये अवॉर्ड्स मीडिया में कार्यरत उन शख्सियतों को दिए जाते हैं, जिन्‍होंने देश में टेलिविजन न्‍यूज इंडस्‍ट्री को एक नई दिशा दी है और अपने योगदान से इस इंडस्‍ट्री को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

इसके तहत बेस्ट न्यूज चैनल ऑफ द ईयर इन हिंदी/अंग्रेजी से लेकर बेस्ट सीईओ ऑफ द ईयर और बेस्ट एडिटर-इन-चीफ जैसी कई श्रेणियों में अवॉर्ड दिए जाते हैं। इनबा के 15वें एडिशन में चेयरपर्सन की भूमिका देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने निभाई थी।

पूर्व के वर्षों में इनबा की जूरी में हरिवंश नारायण सिंह-राज्य सभा के डिप्टी चेयरमैन;  डॉ. किरण कार्णिक-पूर्व प्रेजिडेंट, नैसकॉम; डॉ. नसीम जैदी-भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त; एस.वाई. कुरैशी-भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त;  एन. राम-चेयरमैन, कस्तूरी एंड संस लिमिटेड, पूर्व एडिटर-इन-चीफ द हिंदू एंड ग्रुप न्यूजपेपर्स; संजय गुप्ता-मैनेजिंग डायरेक्टर, स्टार इंडिया जैसे जाने-माने नाम शामिल रहे हैं।

विजेताओं का चयन करने के लिए 19 मार्च को हुई जूरी मीट में ये प्रमुख नाम शामिल रहे।

  NAME DESIGNATION  COMPANY
1 Acharya Praveen Chauhan Astrologer, Palmist, Occultist, Author, Research Scholar(Psychology)  
2 Acharya Shailesh Tiwary Vedic Tantra Guru  
3 Alok Mehta (Padma Shri) Former President EGI  
4 Amit Gujral Chief Marketing Officer JK Tyre & Industries Ltd.
5 Anu Sehgal Founder Digital Mill Consultants and Social Media Influencer
6 Anurag Bhadouria National Spokesperson Samajwadi Party
7 Arjan Kumar Sikri Jurist and Former Judge  
8 Ashish Shelar President Maharashtra BJP  
9 Atif Rasheed National Executive Member Bharatiya Janata Party OBC Morcha
10 Atul Hegde Co-founder Rainmaker Ventures
11 Charu Pragya Spokesperson BJP
12 Deepali Naair Group CMO CK Birla Group
13 Dhanendra Kumar Chairman Competition Advisory Services (India) LLP
14 Dikshu C. Kukreja Honorary Consul General of The Republic of Albania, New Delhi  
15 Dr Arvind Kumar Goel Renowned Educationist and Philanthropist  
16 Dr. Amit Goel Editorial Director The Pioneer
17 Dr. Annurag Batra Chairman & Editor in chief exchange4media & Businessworld
18 Dr. Bhuvan Lall Author & Film Producer  
19 Dr. Shama Mohamed National Spokesperson Indian National Congress
20 Dr. Vishal Talwar Director IMT Ghaziabad
21 Gaurav Khullar Honorary Emeritus, Khullar Group of Companies & Enterpreneur  
22 Harsha Razdan CEO - South Asia Dentsu
23 Harvannsh Chawla Founder & Managing Partner K R Chawla & Co. Advocates
24 Ishank Joshi CEO Mobavenue Media
25 Jaiveer Shergill National Spokesperson BJP
26 Jamal Shaikh Chief Operating Officer - Lifestyle Media Businesses RP Sanjiv Goenka Group
27 Janardan Pandey Founder & Managing Director Nett Value Media
28 Kunal Katyal Managing Director Konig Group
29 Kunal Tandon Counsel, Delhi High Court and Supreme Court of India  
30 M.Q. SYED C.M.D. Exhicon Events Media Solutions Ltd.
31 Markand Adhikari Chairman & MD SRI ADHIKARI BROTHERS (SABGROUP)
32 Mohit Saraf Founder & Managing Partner Saraf and Partners
33 Namita Chaddha Founder & Managing Partner Chadha & Co.
34 Naziya Alvi Rahman Editor exchange4media
35 Noor Fathima Warsia Group Editorial Director BW Businessworld
36 Pramod Dubey Senior Advocate Supreme Court of India
37 Prateek Bhatt Writer, Astrologer, Face Reader, Numerologist, Spiritual Guru  
38 Pulkit Narayan
Founder & CEO
DangleAds Technologies
39 Rahul Suri Founder Rabaan Enterprises
40 Rajeev Jain Sr. Vice President- Corporate Marketing DS Group
41 Rajesh Lalwani CEO Scenario Consulting
42 Rajiv Dubey Senior GM Head of Media Dabur India
43 Rohit Ohri FCB Global Partner  
44 Ruby Sinha Founder, sheatwork.com and President, BRICS CCI WE  
45 S. Ravi Managing Partner Ravi Rajan & Company,Chairman- TFCI
46 Salil Kapoor Independent director on board , ESSCI ( Electronic Sector Skill Council of India )  
47 Sandeep Dahiya Founder & CEO Branquila Brand Ventures
48 Sandeep Mahajan Chairman & Managing Director Goodyear India Limited
49 Saurav Banerjee Managing Director & Founder MyyTake
50 Shalabh Mani Tripathi Media Advisor, Hon. CM, Uttar Pradesh  
51 Shashank Bajpai Counsel for Union of India Supreme Court and Managing Partner Vardharma chambers  
52 Shazia Ilmi National Spokesperson BJP
53 Shivani Malik Founder Mother's Kitchen
54 Shubhranshu Singh Chief Marketing Officer Tata Motors CV
55 Sudhir Mishra Founder & Managing Partner Trust Legal
56 Suman Saraf Managing Director Radha TMT
57 Sunil Bhargava IAS (Retired) and Cultural Entrepreneur  
58 Sunil Chauhan Founder Fabcafe by Fabindia
59 Syed Zafar Islam Former MP Rajya Sabha
60 Vaibhav Dange Former Advisor National Highways Authority of India, Ministry of Road Transport & Highways
61 Vandana Bhargava Founder and Chairperson House of VSB
62 Veer Sagar Chairman Selectronic India
63 Vinit Goenka Spokesperson BJP Delhi
64 Vinod Agnihotri Consulting editor Amar Ujala
65 Sanjay Jha Head of Newsgathering (South Asia) ITV News, London
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राज टेलीविजन नेटवर्क की आम बैठक में इन दो निदेशकों की पुनर्नियुक्ति, सभी प्रस्ताव मंजूर

राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड की 32वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 30 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई।

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 01 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 01 October, 2026
RajTelevision874

राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड की 32वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 30 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई और 11:45 बजे खत्म हुई। कंपनी ने शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि बैठक में रखे गए सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए।

बैठक की शुरुआत कंपनी की कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर प्रियंका मुदलियार ने की। उन्होंने सदस्यों का स्वागत किया और कंपनी के निदेशकों और प्रमुख अधिकारियों का परिचय कराया। बैठक में कंपनी के ऑडिटर, कॉस्ट ऑडिटर, सेक्रेटेरियल ऑडिटर, इंटरनल ऑडिटर और स्क्रूटिनाइजर भी मौजूद रहे।

इसके बाद कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर एम. राजेंद्रन ने सदस्यों का स्वागत किया और जरूरी कोरम पूरा होने के बाद बैठक शुरू की। उन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी के सफर, आर्थिक और मीडिया उद्योग की स्थिति, वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ऑडिटेड वित्तीय नतीजे, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और ऑडिटर्स की रिपोर्ट, अनक्वालिफाइड ऑडिटर्स रिपोर्ट और सेक्रेटेरियल ऑडिटर्स रिपोर्ट सदस्यों को पहले ही भेजी जा चुकी थी और इन्हें बैठक में पढ़ा हुआ माना गया।

AGM में इन प्रस्तावों को मंजूरी

AGM में कुल चार प्रस्ताव रखे गए। इनमें सामान्य और विशेष, दोनों तरह के प्रस्ताव शामिल थे।

  1. 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के ऑडिटेड वित्तीय विवरण और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स व ऑडिटर्स की रिपोर्ट को मंजूरी दी गई।
  2. एम. रघुनाथन को रोटेशन के आधार पर दोबारा निदेशक नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। वह रिटायर होने के बाद दोबारा नियुक्ति के लिए योग्य थे और उन्होंने अपना नाम पेश किया था।
  3. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट ऑडिटर के पारिश्रमिक को मंजूरी/रैटिफाई किया गया।
  4. भारती श्रीधर को कंपनी की स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरे कार्यकाल के लिए लगातार 5 साल के लिए दोबारा नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली।

शेयरधारकों ने सवाल भी पूछे

AGM में रजिस्टर्ड स्पीकर-शेयरहोल्डर्स अभिषेक जे. और महेश कुमार बोहरा ने अपने विचार रखे और कंपनी के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कुछ सवाल भी पूछे, जिनका जवाब कंपनी के मैनेजमेंट ने दिया। इसके बाद कोई और सवाल नहीं उठाया गया।

ई-वोटिंग के जरिए हुआ मतदान

कंपनी ने बताया कि रिमोट ई-वोटिंग 26 सितंबर 2026 सुबह 9 बजे से 29 सितंबर 2026 शाम 5 बजे तक हुई। जिन सदस्यों ने रिमोट ई-वोटिंग के जरिए वोट नहीं किया था, उन्हें AGM के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की सुविधा भी दी गई। AGM खत्म होने के बाद भी 15 मिनट तक ई-वोटिंग खुली रखी गई, ताकि सदस्य अपना वोट दे सकें।

कंपनी के मुताबिक, सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत से पास हो गए हैं। ई-वोटिंग के विस्तृत नतीजे और कंसोलिडेटेड स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट AGM खत्म होने के दो कार्यदिवस के भीतर जारी की जाएगी। इसे कंपनी की वेबसाइट, स्टॉक एक्सचेंजों और CDSL पर उपलब्ध कराया जाएगा।

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Zee Media: राज कुमार गुप्ता का स्वतंत्र निदेशक के तौर पर कार्यकाल पूरा, पद से हुए अलग

जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड ने बताया है कि राज कुमार गुप्ता का कंपनी में स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरा कार्यकाल पूरा हो गया है।

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 01 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 01 October, 2026
ZMedia87

जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड ने बताया है कि राज कुमार गुप्ता का कंपनी में स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरा कार्यकाल पूरा हो गया है। उनका कार्यकाल 30 सितंबर 2026 को कारोबारी समय खत्म होने के साथ समाप्त हो गया।

कंपनी ने दी जानकारी में कहा कि राज कुमार गुप्ता का दूसरा कार्यकाल पूरा होने के बाद वह अब कंपनी के स्वतंत्र निदेशक नहीं रहे हैं।

कंपनी के मुताबिक, उनका कार्यकाल कंपनी अधिनियम, 2013 और उससे जुड़े नियमों के तहत एक स्वतंत्र निदेशक के लिए तय अधिकतम अवधि पूरी होने के कारण समाप्त हुआ है। 

कार्यकाल पूरा होने के साथ ही राज कुमार गुप्ता कंपनी के निदेशक मंडल की विभिन्न समितियों में सदस्य या अध्यक्ष, जहां भी लागू था, उस पद से भी अलग हो गए हैं। 

 

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सुरभि तिवारी ने 'न्यूज़ इंडिया 24X7' को कहा अलविदा : लिखी भावुक पोस्ट

पत्रकार और एंकर सुरभि तिवारी ने एक्स पोस्ट के जरिए 'न्यूज़ इंडिया 24X7' से ढाई साल बाद विदाई की जानकारी दी और संस्था, टीम तथा वरिष्ठों के प्रति आभार जताया।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2026
surbhi

पत्रकार और एंकर सुरभि तिवारी (Surbhi Tiwari) ने न्यूज़ इंडिया 24X7 (News India 24X7) से अपने सफर के खत्म होने की जानकारी दी है। उन्होंने एक्स (X) पर एक भावुक पोस्ट शेयर कर ढाई साल के सफर को याद किया और संस्था व टीम के प्रति आभार जताया।

समाचार4मीडिया से बातचीत में सुरभि ने बताया कि न्यूज़ इंडिया उनके लिए घर जैसा हो गया था और यहां से अलग होने का फैसला लेना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें सभी का साथ, सहयोग, प्यार, विश्वास और समर्थन मिला, जिसके लिए वह सभी की दिल से आभारी हैं।

उन्होंने संस्था और टीम के साथ काम करने को अपने लिए गर्व की बात बताया। सुरभि ने कहा कि इस दौरान उन्होंने जो कुछ सीखा और अनुभव हासिल किया, वह सभी के सहयोग से संभव हुआ।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस दौरान उनसे कोई गलती हुई हो या अनजाने में किसी का दिल दुखा हो, तो वह इसके लिए माफी चाहती हैं। उन्होंने न्यूज़ इंडिया 24X7 के उज्ज्वल भविष्य और लगातार आगे बढ़ने की कामना की।

सुरभि ने अपने ढाई साल के सफर में विजेंद्र सर और शैलेंद्र सर का विशेष तौर पर धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि दोनों ने उन्हें जिम्मेदारी दी, उनके काम को सराहा और पूरा सम्मान दिया, जो उनके लिए बेहद मूल्यवान है और जिसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगी।

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पंकज त्रिपाठी के साथ सोनी ने लॉन्च किया ‘इंडिया की सबसे बड़ी पार्टी’ अभियान

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया ने पंकज त्रिपाठी के साथ ‘इंडिया की सबसे बड़ी पार्टी’ अभियान शुरू किया है, जिसमें भारत के पनामा, ब्राजील और उरुग्वे मुकाबलों को शामिल किया गया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2026
sonytv

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (Sony Pictures Networks India) ने अभिनेता पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) के साथ ‘इंडिया की सबसे बड़ी पार्टी’ (India Ki Sabse Badi Party) अभियान शुरू किया है। इसका मकसद पनामा, ब्राजील और उरुग्वे के खिलाफ भारतीय फुटबॉल टीम के मुकाबलों को लेकर दर्शकों में उत्साह बढ़ाना है।

अभियान की शुरुआत 65 सेकंड की एक फिल्म से हुई है। इसमें पंकज त्रिपाठी लोगों को एक पार्टी में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हैं, लेकिन शुरुआत में पार्टी की वजह नहीं बताते। बाद में पता चलता है कि यह पार्टी भारतीय टीम के पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील के खिलाफ मुकाबले से जुड़ी है। भारत और ब्राजील के बीच मैच 3 अक्टूबर को कोलकाता में खेला जाएगा। अभियान में 25 सितंबर को पनामा और 6 अक्टूबर को उरुग्वे के खिलाफ होने वाले मुकाबले भी शामिल हैं।

अभियान को ‘इंडिया की सबसे बड़ी पार्टी एक्स फैन एडिशन’ के तौर पर भी आगे बढ़ाया जाएगा। इसमें पंकज त्रिपाठी देशभर के फुटबॉल फैंस (Football Fans) के साथ उनकी स्थानीय भाषाओं में नजर आएंगे। इसके अलावा ‘त्रिपाठी जी की ट्यूशन’ नाम से शॉर्ट-फॉर्म फिल्मों (Short-Form Films) की सीरीज भी पेश की जाएगी, जिसमें अभिनेता फुटबॉल से जुड़े विषयों पर नजर आएंगे।

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया सोशल मीडिया (Social Media) पर आधारित एक अन्य अभियान भी शुरू करेगा। इसमें पंकज त्रिपाठी भारतीय फुटबॉल खिलाड़ियों के साथ बातचीत करते दिखेंगे। इस अभियान में भारतीय टीम के कप्तान गुरप्रीत सिंह संधू (Gurpreet Singh Sandhu) भी शामिल होंगे।

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर और स्पोर्ट्स एंड इंटरनेशनल बिजनेस हेड (Chief Revenue Officer and Sports & International Business Head) राजेश कौल (Rajesh Kaul) ने कहा कि भारत का पनामा, ब्राजील और उरुग्वे से मुकाबला भारतीय फुटबॉल के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। इसलिए अभियान को इन मैचों के उत्साह और स्तर के अनुरूप तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा कि पंकज त्रिपाठी की लोकप्रियता, सहजता और दर्शकों से जुड़ने की क्षमता उन्हें इस जश्न के लिए देश को आमंत्रित करने के लिए उपयुक्त बनाती है। अभियान के जरिए मनोरंजन और खेल को भारतीय अंदाज में जोड़ने की कोशिश की गई है, ताकि मुख्य फुटबॉल दर्शकों से आगे भी उत्साह पैदा हो और इन मुकाबलों को देशभर के लोगों के साझा आयोजन के रूप में देखा जाए।

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राज टीवी के शेयर में तेज हलचल पर कंपनी ने कही ये बात

राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड ने अपने शेयर की कीमत में हुई तेज हलचल को लेकर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को सफाई दी है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2026
RajTV5842

राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड ने अपने शेयर की कीमत में हुई तेज हलचल को लेकर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को सफाई दी है। कंपनी ने कहा है कि उसके शेयर की कीमत में हुआ बदलाव पूरी तरह बाजार की स्थिति की वजह से है और यह पूरी तरह बाजार से संचालित है।

कंपनी ने 28 सितंबर 2026 को बीएसई और एनएसई से मिले ईमेल का जवाब देते हुए यह जानकारी दी है। इन ईमेल में कंपनी के शेयर की कीमत में हुई महत्वपूर्ण हलचल को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था।

कंपनी ने कहा कि उसके शेयर की कीमत में हुई इस महत्वपूर्ण हलचल के कारणों पर प्रबंधन का न तो कोई नियंत्रण है और न ही उसे इसकी जानकारी है।

राज टेलीविजन नेटवर्क ने कहा कि वह सेबी के लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) रेगुलेशंस, 2015 के रेगुलेशन 30 के तहत अपनी सभी जरूरी जानकारियां लगातार साझा करता रहा है और आगे भी अपनी जिम्मेदारियों के मुताबिक सभी संबंधित खुलासे करता रहेगा।

कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज के साथ हुए अपने समझौतों के तहत भी जरूरी खुलासे करने की बात कही है। यह जवाब कंपनी की ओर से कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर प्रियंका मुदलियार ने दिया है।   

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डिश टीवी की AGM में सभी प्रस्ताव मंजूर, डायरेक्टर के पद पर मनोज डोभाल की पुनर्नियुक्ति

डिश टीवी इंडिया लिमिटेड की 38वीं सालाना आम बैठक में कंपनी के शेयरधारकों ने एजेंडे में रखे गए सभी तीन प्रस्तावों को जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी दे दी।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2026
DishTV652

डिश टीवी इंडिया लिमिटेड की 38वीं सालाना आम बैठक (एजीएम) 29 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। बैठक में कंपनी के शेयरधारकों ने एजेंडे में रखे गए सभी तीन प्रस्तावों को जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी दे दी।

एजीएम की शुरुआत सुबह 11:30 बजे हुई और यह दोपहर 12:27 बजे समाप्त हुई। बैठक में कुल 76 शेयरधारक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। इनमें 15 प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप से, जबकि 61 सार्वजनिक शेयरधारक थे।

वित्त वर्ष 2025-26 के वित्तीय नतीजों को मंजूरी

पहले प्रस्ताव के तहत वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिट किए गए स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय विवरणों के साथ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और ऑडिटर्स की रिपोर्ट को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव के पक्ष में 99.7072% वोट पड़े, जबकि 0.2928% वोट विरोध में रहे।

मनोज डोभाल फिर बने डायरेक्टर

दूसरे प्रस्ताव में मनोज डोभाल को कंपनी के डायरेक्टर के तौर पर फिर नियुक्त करने को मंजूरी दी गई। वह रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के बाद दोबारा नियुक्ति के लिए योग्य थे और उन्होंने खुद को पुनर्नियुक्ति के लिए पेश किया था। इस प्रस्ताव को 98.4873% वोट के साथ मंजूरी मिली, जबकि 1.5127% वोट इसके खिलाफ पड़े।

कॉस्ट ऑडिटर्स के पारिश्रमिक को भी मंजूरी

तीसरे प्रस्ताव में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट ऑडिटर्स के पारिश्रमिक को मंजूरी देने का प्रस्ताव था। इसे भी शेयरधारकों ने मंजूर कर दिया। इसके पक्ष में 99.7055% वोट पड़े, जबकि 0.2945% वोट विरोध में रहे।

कंपनी ने बताया कि तीनों प्रस्तावों को रिमोट ई-वोटिंग और एजीएम के दौरान हुई ई-वोटिंग के जरिए जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी मिली। 

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लीनियर टेलीविजन का नियामकीय बोझ और लागत कम करना जरूरी : केविन वज

केविन वज ने रैखिक टेलीविजन का नियामकीय बोझ और लागत घटाने के लिए रोडमैप बनाने तथा बार्क ऑडियंस रेटिंग फिर शुरू करने की मांग की है।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 29 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 29 September, 2026
jiohotstar

जियोस्टार (JioStar) के एंटरटेनमेंट बिजनेस के सीईओ (CEO) और फिक्की मीडिया एंड एंटरटेनमेंट कमेटी (FICCI Media and Entertainment Committee) के चेयरमैन केविन वज (Kevin Vaz) ने रैखिक टेलीविजन (Linear Television) के नियामकीय बोझ और लागत को कम करने के लिए ठोस रोडमैप बनाने की मांग की है।

उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (Broadcast Audience Research Council) यानी बार्क (BARC) की ऑडियंस रेटिंग (Audience Rating) जारी करने की प्रक्रिया तुरंत बहाल करने का भी आग्रह किया।

फिक्की फ्रेम्स 2026 (FICCI FRAMES 2026) के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए केविन वज ने कहा कि ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री (Broadcasting Industry) को ज्यादा नियामकीय लचीलापन देने की जरूरत है, ताकि रैखिक टेलीविजन डिजिटल प्लेटफॉर्म (Digital Platform) के साथ आगे बढ़ सके। इससे उपभोक्ताओं को यह तय करने की ज्यादा आजादी मिलेगी कि वे क्या, कहां और किस स्क्रीन पर देखना चाहते हैं।

वज ने 10+2 विज्ञापन सीमा हटाने के मंत्रालय के फैसले का भी स्वागत किया। उन्होंने इसे ऐसे नियामकीय ढांचे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया, जो रैखिक प्रसारण और व्यापक मीडिया लैंडस्केप (Media Landscape) में हो रहे बदलावों को ध्यान में रखता है।

ऑडियंस मेजरमेंट (Audience Measurement) को लेकर उन्होंने बार्क रेटिंग जारी करने की प्रक्रिया फिर शुरू करने की मांग की। उनका कहना था कि विश्वसनीय और सत्यापन योग्य ऑडियंस डेटा (Audience Data) उपलब्ध नहीं होने से ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों के बीच अनिश्चितता पैदा हो रही है, खासकर त्योहारी सीजन के दौरान।

उन्होंने कहा कि विश्वसनीय मापन जरूरी है, ताकि ब्रांड अपने कैंपेन (Campaign) की बेहतर प्लानिंग कर सकें और दर्शकों तक प्रभावी तरीके से पहुंच सकें।

केविन वज ने कहा कि टेलीविजन आज भी भारत में सबसे ज्यादा देखे जाने वाले और किफायती मीडिया प्लेटफॉर्म (Media Platform) में से एक है। उनके मुताबिक, ब्रॉडकास्टिंग और विज्ञापन क्षेत्र व्यापक आर्थिक व्यवस्था में भी योगदान देते हैं। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच प्रसारकों और विज्ञापनदाताओं को समर्थन देने के लिए विश्वसनीय ऑडियंस मापन जरूरी है।

उन्होंने यह बातें ऐसे समय कहीं हैं, जब मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (Media and Entertainment Industry) में कंटेंट कंजम्पशन (Content Consumption) के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। रैखिक टेलीविजन, स्ट्रीमिंग, मोबाइल और कनेक्टेड टीवी (Connected TV) अब समानांतर रूप से आगे बढ़ रहे हैं।

फिक्की फ्रेम्स 2026 का आयोजन ‘इंडियाज मीडिया मोमेंट: क्रिएटिंग वैल्यू इन एन एज ऑफ इनफिनिट कंटेंट’ थीम के तहत किया जा रहा है। वज ने डिजिटल मीडिया, कनेक्टेड टीवी, माइक्रो-ड्रामा और कंटेंट कॉमर्स के विस्तार पर भी बात की। उन्होंने ऐसे इंडस्ट्री एनवायरनमेंट (Industry Environment) की जरूरत बताई, जो इनोवेशन और सेल्फ-रेगुलेशन (Self-Regulation) को बढ़ावा दे।

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टीवी रेटिंग्स: अब सवाल अस्तित्व का

BARC के निलंबन से त्योहारों के सीजन में टीवी चैनलों के सामने अनिश्चितता है, लेकिन सभी पक्ष इंडस्ट्री के हित में मिलकर काम करें तो समाधान संभव है।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 28 September, 2026
Last Modified:
Monday, 28 September, 2026
MarkandAdhikari521

मार्कंड अधिकारी, चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर,

मानसून का मौसम अब खत्म होने की ओर है और बाजार साल के सबसे बड़े त्योहारों के सीजन के लिए तैयार हो रहा है। दिवाली से पहले का समय कंपनियों के लिए विज्ञापन पर खर्च करने और मीडिया के लिए कमाई का अहम दौर माना जाता है। लेकिन इस बार लीनियर टीवी इंडस्ट्री में त्योहारों जैसा उत्साह नहीं दिख रहा है। इसके बजाय इंडस्ट्री में अनिश्चितता का माहौल है।

इसकी बड़ी वजह टेलीविजन ऑडियंस रेटिंग को लेकर साफ तस्वीर नहीं होना है। विज्ञापन एजेंसीज अलग-अलग चैनलों पर विज्ञापनदाताओं का बजट तय करने के लिए उनकी रेटिंग को आधार बनाती हैं। ऐसे में टीवी रेटिंग उपलब्ध नहीं होने पर अलग-अलग चैनलों और कार्यक्रमों पर विज्ञापन खर्च तय करना मुश्किल हो जाता है।

क्यों नहीं मिल रही टीवी रेटिंग?

इसका कारण है ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) से जुड़ा मौजूदा मामला। जुलाई 2026 में सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने BARC को टीवी रेटिंग प्रकाशित करने से रोकने का निर्देश दिया था, जब तक कि उसकी लाइसेंस प्रक्रिया नई टीवी रेटिंग पॉलिसी 2026 के तहत पूरी नहीं हो जाती।

सरकार ने मार्च 2026 में नई टीवी रेटिंग पॉलिसी जारी की थी। इसका मकसद टीवी दर्शक मापन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता को मजबूत करना है। नई पॉलिसी में रेटिंग एजेंसीज के लिए पंजीकरण, संचालन, ऑडिट और निगरानी से जुड़े नियम तय किए गए हैं।

नई पॉलिसी में टीवी रेटिंग एजेंसीज के लिए स्वतंत्र निदेशकों, ऑडिट, डेटा सुरक्षा और बड़े सैंपल के जरिए दर्शकों की माप जैसे प्रावधान भी किए गए हैं। सरकार ने रेटिंग एजेंसी बनने के लिए नेटवर्थ की शर्त को 20 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये किया है, ताकि इस क्षेत्र में और कंपनियों के आने की संभावना बढ़े।

इसके बावजूद अब तक BARC ही टीवी रेटिंग के क्षेत्र में प्रमुख और अकेली रेटिंग एजेंसी बनी हुई है। ऐसे में रेटिंग का रुकना पूरी टीवी इंडस्ट्री के लिए चिंता का विषय बन गया है।

BARC को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

BARC के कामकाज और पारदर्शिता को लेकर इंडस्ट्री के कुछ हिस्सों में पहले भी सवाल उठते रहे हैं। पुराने समय में BARC के कामकाज को लेकर यह शिकायत रही कि वह अपने हितधारकों के सवालों का पर्याप्त जवाब नहीं देती थी और अपनी प्रणाली के बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं करती थी। इसके बाद एजेंसी की एक अन्य मैनेजमेंट टीम पर रेटिंग में गड़बड़ी, हेरफेर और भ्रष्टाचार जैसे आरोप लगे थे, जिसके बाद सीबीआई जांच भी हुई। इन घटनाओं से इंडस्ट्री के कुछ हितधारकों का भरोसा प्रभावित हुआ।

मौजूदा व्यवस्था में भी हितधारकों के सवालों को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं दिखाई गई। BARC का लंबे समय तक अकेली रेटिंग एजेंसी बने रहना और उससे जुड़ी शिकायतें टीवी रेटिंग व्यवस्था में भरोसे को प्रभावित करती रही हैं।इसी तरह की चिंताओं के बीच सरकार ने टीवी रेटिंग के लिए नई पॉलिसी बनाई है। सरकार के मुताबिक, नई पॉलिसी का उद्देश्य देश में टीवी दर्शक मापन व्यवस्था में पारदर्शिता, स्वतंत्रता और जवाबदेही को मजबूत करना है।

त्योहारों के सीजन में बढ़ी चिंता

टीवी रेटिंग को लेकर यह अनिश्चितता ऐसे समय में आई है, जब दिवाली से पहले विज्ञापन बाजार में गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद रहती है। लीनियर टीवी चैनल पहले से ही डिजिटल मीडिया और मल्टीमीडिया प्लेटफॉर्म से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पारंपरिक टीवी के विज्ञापन कारोबार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। ऐसे माहौल में टीवी चैनलों के लिए रेटिंग का उपलब्ध नहीं होना एक और बड़ी चुनौती बन गया है।

विज्ञापनदाता और एजेंसीज यह जानना चाहती हैं कि किस चैनल या कार्यक्रम की पहुंच और दर्शक संख्या कितनी है, ताकि उसी आधार पर विज्ञापन का बजट तय किया जा सके। रेटिंग नहीं होने पर यह फैसला लेना मुश्किल हो जाता है।

इंडस्ट्री को जल्द समाधान की जरूरत

मौजूदा स्थिति में पूरी टीवी इंडस्ट्री के हित में जल्द कोई व्यावहारिक समाधान निकालने की जरूरत है। सभी संबंधित पक्षों को मिलकर ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे टीवी रेटिंग व्यवस्था दोबारा सुचारु हो सके और साथ ही नई पॉलिसी के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही भी बनी रहे।

साथ ही, BARC जैसी रेटिंग एजेंसी के लिए भी यह जरूरी है कि वह अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाए और अपने कामकाज में ज्यादा पारदर्शिता लाए। नई टीवी रेटिंग पॉलिसी 2026 इसी दिशा में बदलाव का आधार तैयार करती है।

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'डीडी फ्री डिश' पर इन तीन नए चैनलों को मिली जगह

प्रसार भारती की ओर से जारी नतीजों के मुताबिक, इन स्लॉट का आवंटन 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक छह महीने की अवधि के लिए किया गया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 28 September, 2026
Last Modified:
Monday, 28 September, 2026
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प्रसार भारती ने अपने 'डीडी फ्री डिश' प्लेटफॉर्म पर खाली पड़े तीन MPEG-4 स्लॉट की नीलामी पूरी कर ली है। 102वीं मिड-ईयर ई-नीलामी के बाद न्यूज लीडर, TV7 भारत और PTC सिमरन सफल चैनल रहे हैं।

प्रसार भारती की ओर से जारी नतीजों के मुताबिक, इन स्लॉट का आवंटन 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक छह महीने की अवधि के लिए किया गया है।

यह नीलामी डीडी फ्री डिश की खाली MPEG-4 क्षमता के मिड-ईयर आवंटन का हिस्सा थी। डीडी फ्री डिश भारत का फ्री-टू-एयर डायरेक्ट-टू-होम प्लेटफॉर्म है। प्रसार भारती ने ई-ऑक्शन मेथडोलॉजी 2025 के तहत इस नीलामी के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे।

उपलब्ध क्षमता को चैनल की जॉनर और भाषा के आधार पर पांच कैटेगरी में बांटा गया था। इनमें G1 न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनलों, जबकि G2 गैर-न्यूज चैनलों के लिए था। R1, R2 और R3 क्षेत्रीय भाषाओं के चैनलों के लिए रखे गए थे।

R1 में तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम चैनल शामिल थे। R2 में पंजाबी, मराठी, गुजराती, बंगाली और ओड़िया चैनल रखे गए थे। वहीं, संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को, हिंदी और उर्दू को छोड़कर, R3 कैटेगरी में रखा गया था।

नीलामी में G1 और G2 कैटेगरी के लिए सबसे ज्यादा रिजर्व प्राइस तय किया गया था। G1 स्लॉट के लिए शुरुआती बोली 39.83 लाख रुपये, जबकि G2 के लिए 36.40 लाख रुपये थी। R2 के लिए शुरुआती कीमत 21.56 लाख रुपये, R3 के लिए 3.31 लाख रुपये और R1 के लिए 3 लाख रुपये रखी गई थी।

मेथडोलॉजी के तहत, कुछ कैटेगरी के बोलीदाताओं को दूसरी कैटेगरी के स्लॉट के लिए भी बोली लगाने की अनुमति थी। G1 के बोलीदाता G1, G2, R2, R1 और R3 में बोली लगा सकते थे। G2 के बोलीदाता G2, R2, R1 और R3 के लिए बोली लगा सकते थे। इसी तरह R2 के बोलीदाता R2, R1 और R3, जबकि R3 के बोलीदाता R3 और R1 के लिए बोली लगा सकते थे। R1 में बोली लगाने की अनुमति सिर्फ R1 के बोलीदाताओं को थी।

भाषा और जॉनर की जांच हुई सख्त

क्षेत्रीय स्लॉट के लिए आवेदन करने वाले ब्रॉडकास्टर्स के लिए प्रसार भारती ने दस्तावेजों से जुड़ी शर्तें भी सख्त की थीं। इसके तहत चैनलों को अपनी घोषित भाषा और जॉनर साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज देने थे।

पहले से चल रहे चैनलों को किसी एमएसओ या डीटीएच प्लेटफॉर्म पर अपनी मौजूदगी का दस्तावेजी सबूत देना था। इसके साथ ही चैनल किस भाषा और जॉनर के तहत चल रहा है, इसकी जानकारी भी देनी थी। आवेदक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, ट्राई और टीवी रेटिंग एजेंसियों जैसे BARC से मिले दस्तावेज भी जमा कर सकते थे।

नीलामी की शर्तों के मुताबिक, चैनलों को मुख्य रूप से अपनी घोषित जॉनर और भाषा में ही कार्यक्रम प्रसारित करने होंगे। प्रसार भारती ने ‘मुख्य रूप से’ का मतलब 75 फीसदी कंटेंट बताया है। साथ ही, घोषित भाषा और जॉनर का कंटेंट चैनल के कुल मासिक कंटेंट के 60 फीसदी से कम नहीं होना चाहिए।

अगर कोई चैनल अपनी घोषित भाषा या जॉनर की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो उसके प्रसारण की रिकॉर्डिंग की समीक्षा की जा सकती है। इसके बाद उसे शो-कॉज नोटिस भी दिया जा सकता है। शर्तों का पालन नहीं करने पर प्रसार भारती डीडी फ्री डिश से चैनल को हटाने का फैसला भी ले सकता है।

डीडी फ्री डिश पर जुड़ेंगे तीन चैनल

न्यूज लीडर, TV7 भारत और PTC सिमरन के जुड़ने के साथ प्रसार भारती डीडी फ्री डिश की खाली क्षमता को समय-समय पर ई-नीलामी के जरिए आवंटित करने की प्रक्रिया जारी रखे हुए है।

सफल बोलीदाताओं को नीलामी नोटिस में तय भुगतान, तकनीकी और कैरिज से जुड़ी सभी शर्तों का पालन करना होगा। इनमें लेटर ऑफ अलॉटमेंट मिलने के 15 दिनों के भीतर तय समझौते पर हस्ताक्षर करना और प्रसार भारती की ओर से तय शेड्यूल के अनुसार भुगतान करना शामिल है।

शर्तों के मुताबिक, बकाया भुगतान पर 14.5 फीसदी सालाना ब्याज देना होगा। लगातार भुगतान में डिफॉल्ट होने पर रकम जब्त करने और चैनल को डीडी फ्री डिश से हटाने का भी प्रावधान है। सफल चैनलों को डीडी फ्री डिश पर जगह मिलने से पहले कैरिज फीस की पहली किस्त का भुगतान करना होगा। इसके अलावा, उन्हें जरूरी तकनीकी उपकरण और सैटेलाइट पैरामीटर दूरदर्शन के तोड़ापुर, नई दिल्ली स्थित डीटीएच स्टेशन को उपलब्ध कराने होंगे। 

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FAST और ALTD सेवाओं के लिए रेगुलेट्री फ्रेमवर्क लाने की सिफारिश कर सकता है TRAI

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण जल्द ही एप्लिकेशन-बेस्ड लीनियर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन और फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन सेवाओं को एक औपचारिक नियामकीय ढांचे के तहत लाने की सिफारिश कर सकता है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 25 September, 2026
Last Modified:
Friday, 25 September, 2026
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इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) जल्द ही एप्लिकेशन-बेस्ड लीनियर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन (ALTD) और फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन (FAST) सेवाओं को एक औपचारिक नियामकीय ढांचे (रेगुलेट्री फ्रेमवर्क) के तहत लाने की सिफारिश कर सकता है। मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, TRAI अब भारत में इंटरनेट के जरिए दी जा रही टेलीविजन सेवाओं के नियमन के तरीके में बड़े बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने TRAI से यह जांचने को कहा था कि क्या FAST और ALTD सेवाओं को लाइसेंसिंग के दायरे में लाया जाना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, TRAI अपने इस रुख को कायम रख सकता है कि खुले इंटरनेट पर लीनियर और तय शेड्यूल वाले चैनल उपलब्ध कराने वाली टेलीविजन सेवाओं को पूरी तरह किसी औपचारिक नियामकीय ढांचे से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।

यह मुद्दा भारत के तेजी से बदलते टेलीविजन वितरण बाजार में एक अहम बहस बन गया है। पारंपरिक वितरण प्लेटफॉर्म, जिनमें केबल और डीटीएच ऑपरेटर शामिल हैं, का कहना है कि FAST सेवाएं तेजी से टेलीविजन वितरण की तरह काम कर रही हैं, लेकिन उन्हें लाइसेंस प्राप्त डिस्ट्रीब्यूटर्स पर लागू होने वाली कई जिम्मेदारियों का पालन नहीं करना पड़ता।

वहीं, टेक्नोलॉजी कंपनियों, ओटीटी प्लेटफॉर्म, स्मार्ट-टीवी निर्माताओं और FAST ऑपरेटर्स का कहना है कि इंटरनेट आधारित सेवाएं पारंपरिक प्रसारण से मूल रूप से अलग हैं और उन पर पुराने लाइसेंसिंग नियम लागू नहीं किए जाने चाहिए।

इसलिए नियामकीय बहस अब इस सवाल पर केंद्रित हो गई है कि किसी सेवा की प्रकृति उसके कंटेंट पहुंचाने के लिए इस्तेमाल होने वाली तकनीक से तय होनी चाहिए या फिर इस बात से कि वह उपभोक्ताओं को किस तरह का टेलीविजन जैसा अनुभव देती है।

पारंपरिक डिस्ट्रीब्यूशन के बराबर नियमों की मांग

नियमन का समर्थन करने वाले ब्रॉडकास्टर्स ने पारंपरिक टेलीविजन वितरण और इंटरनेट आधारित लीनियर टेलीविजन के बीच बढ़ते नियामकीय अंतर की ओर इशारा किया है।

टाइम्स नेटवर्क ने TRAI को दिए अपने सुझाव में कहा कि FAST सेवाएं पारंपरिक टेलीविजन वितरण की तरह काम कर रही हैं, लेकिन केबल, डीटीएच और आईपीटीवी ऑपरेटरों पर लागू लाइसेंसिंग, टैरिफ, गुणवत्ता और कंटेंट से जुड़े नियम इन पर लागू नहीं होते।

ब्रॉडकास्टर के मुताबिक, मुफ्त इंटरनेट आधारित टेलीविजन चैनलों की तेजी से बढ़ती संख्या से प्रतिस्पर्धा का संतुलन प्रभावित हो रहा है और पे-टीवी कारोबार की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ रहा है। टाइम्स नेटवर्क ने कहा कि केबल और डीटीएच प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध प्रीमियम चैनल अब FAST सेवाओं के जरिए मुफ्त में भी उपलब्ध हो रहे हैं। इससे दर्शकों के पारंपरिक पेड टीवी से हटने की रफ्तार बढ़ सकती है और सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई पर दबाव पड़ सकता है।

टाइम्स नेटवर्क ने विज्ञापन से होने वाली कमाई के बंटवारे में पारदर्शिता की कमी, शिकायतों के समाधान के लिए मानकीकृत व्यवस्था नहीं होने और स्मार्ट-टीवी निर्माताओं तथा ऑपरेटिंग सिस्टम कंपनियों के चैनल खोजने और विज्ञापन इन्वेंट्री पर बढ़ते प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई।

उसने आशंका जताई कि ये टेक्नोलॉजी कंपनियां भविष्य में कनेक्टेड-टीवी इंटरफेस पर चैनलों को दिखाने और उनकी पहुंच बढ़ाने के लिए शुल्क लेकर पारंपरिक टीवी के कैरिज फीस मॉडल जैसा सिस्टम बना सकती हैं।

एबीपी नेटवर्क ने भी नियमन का समर्थन किया है, लेकिन उसने पुराने टेलीविजन नियमों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सीधे लागू करने के बजाय “हल्के लेकिन सक्रिय” नियामकीय ढांचे की मांग की है। कंपनी ने एल्गोरिदम के जरिए अपने ही कंटेंट को प्राथमिकता देने, प्रोग्रामेटिक विज्ञापन व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी और दर्शकों से जुड़े डेटा तक असमान पहुंच जैसे जोखिमों की ओर इशारा किया।

एबीपी ने “इन्वेंट्री सॉवरेन्टी” के लिए भी सुरक्षा उपाय मांगे हैं। उसका कहना है कि ब्रॉडकास्टर द्वारा बनाए गए कंटेंट से जुड़ी विज्ञापन इन्वेंट्री पर ब्रॉडकास्टर का नियंत्रण बना रहना चाहिए।

Zee ने लाइसेंस और ‘Must Carry’ नियम की मांग की

जी एंटरटेनमेंट ने नियामकीय बराबरी के पक्ष में ज्यादा मजबूत रुख अपनाया है। कंपनी का कहना है कि एप्लिकेशन आधारित लीनियर टेलीविजन प्लेटफॉर्म तेजी से पारंपरिक टेलीविजन वितरण की तरह काम कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा कई जिम्मेदारियों से बाहर हैं।

ब्रॉडकास्टर के मुताबिक, पारंपरिक ब्रॉडकास्टर्स और डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर्स पर प्रोग्राम और विज्ञापन कोड, टैरिफ और इंटरकनेक्शन नियम, उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़े नियम और सार्वजनिक सेवा से जुड़ी जिम्मेदारियां लागू हैं। इससे नियमन में असमानता पैदा होती है।

जी ने प्रस्ताव दिया है कि ALTD प्रोवाइडर्स को औपचारिक अनुमति लेनी चाहिए। इसके तहत एप्लिकेशन प्रोवाइडर को मुख्य नियामकीय इकाई माना जाए, क्योंकि वही चैनलों को एक जगह लाता है, इलेक्ट्रॉनिक प्रोग्राम गाइड संभालता है और उपभोक्ताओं की चैनल तक पहुंच नियंत्रित करता है।

कंपनी ने पूरे भारत के लिए 10 साल की अवधि वाली अनुमति का प्रस्ताव दिया है। इसके लिए भारत में व्यावसायिक मौजूदगी रखने वाली भारतीय कंपनियों को पात्र माना जा सकता है और न्यूनतम नेटवर्थ 10 करोड़ रुपये या डीटीएच ऑपरेटरों पर लागू समान सीमा रखने का सुझाव दिया गया है।

जी ने ALTD सेवाओं पर ‘Must Carry’ और ‘Must Provide’ नियम लागू करने की भी मांग की है। कंपनी का कहना है कि इंटरनेट पर बैंडविड्थ की कमी नहीं होने के कारण सभी चैनलों को उपलब्ध कराना तकनीकी रूप से संभव है।

इसके अलावा, उसने प्रसार भारती के साथ अनिवार्य स्पोर्ट्स सिग्नल शेयरिंग के नियमों को भी ALTD प्लेटफॉर्म तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।

कई ब्रॉडकास्टर्स ने टेलीकॉम जैसा नियमन लागू करने का किया विरोध 

हालांकि, कई बड़े ब्रॉडकास्टर्स ने FAST और ALTD को टेलीकॉम जैसी अनुमति व्यवस्था के तहत लाने का विरोध किया है। टीवी टुडे नेटवर्क और नेटवर्क18 का कहना है कि FAST और ALTD सेवाएं मूल रूप से इंटरनेट आधारित ओटीटी एप्लिकेशन हैं और इन्हें टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट, 2023 या TRAI एक्ट के तहत टेलीकॉम सेवाएं नहीं माना जा सकता।

टीवी टुडे ने कहा कि ये सेवाएं केवल टेलीकॉम कंपनियों और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स के नेटवर्क का इस्तेमाल करती हैं। ये खुद वह ट्रांसमिशन काम नहीं करतीं, जो किसी सेवा को टेलीकॉम सेवा की श्रेणी में लाने के लिए जरूरी है।

कंपनी ने यह भी कहा कि इन सेवाओं पर पहले से ही MIB की अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग गाइडलाइंस, केबल टेलीविजन नेटवर्क्स एक्ट, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स और इंडस्ट्री की सेल्फ-रेगुलेटरी व्यवस्था जैसे नियम लागू हैं।

नेटवर्क18 ने कहा कि ओटीटी सेवाओं को अंतिम टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट से जानबूझकर बाहर रखा गया था, जबकि इसके पुराने ड्राफ्ट में इन्हें शामिल करने का प्रस्ताव था। कंपनी के मुताबिक, FAST “एप्लिकेशन लेयर” पर काम करता है, जबकि टेलीकॉम ऑपरेटर “नेटवर्क लेयर” पर काम करते हैं।

कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट और जियोस्टार ने भी इसी तरह के कानूनी और संवैधानिक तर्क दिए हैं। कल्वर मैक्स का कहना है कि FAST सेवाएं टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क की उपयोगकर्ता हैं, न कि टेलीकम्युनिकेशन सेवा देने वाली कंपनियां।

वहीं, जियोस्टार का कहना है कि ओटीटी सेवाएं टेलीकॉम नेटवर्क स्थापित नहीं करतीं, स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल नहीं करतीं और एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं करातीं। दोनों कंपनियों ने यह सवाल भी उठाया है कि स्पेक्ट्रम और बुनियादी ढांचे की कमी पर आधारित टेलीकॉम लाइसेंसिंग के सिद्धांतों को खुले इंटरनेट पर चलने वाले एप्लिकेशन पर कैसे लागू किया जा सकता है।

जियो प्लेटफॉर्म्स ने ब्रॉडकास्टिंग नियमन का विरोध किया

जियो प्लेटफॉर्म्स का कहना है कि सिर्फ इसलिए कि ओटीटी सेवाओं पर तय शेड्यूल के मुताबिक कार्यक्रम और विज्ञापन दिखाए जाते हैं, उन्हें पारंपरिक टेलीविजन चैनल नहीं माना जा सकता। 11 मई को दिए अपने सुझाव में कंपनी ने कहा कि FAST चैनलों समेत ओटीटी के जरिए उपलब्ध कराए जाने वाले कंटेंट को इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स के तहत ही नियंत्रित किया जाना चाहिए। इन पर केबल, डीटीएच, एचआईटीएस या आईपीटीवी ऑपरेटरों वाले नियम लागू नहीं होने चाहिए।

जियो का कहना है कि ब्रॉडकास्टिंग और ओटीटी की डिलीवरी तकनीक, नेटवर्क कंट्रोल, सेवा की गुणवत्ता, कंटेंट अधिकार और कारोबारी ढांचे अलग-अलग हैं। कंपनी ने नेट न्यूट्रैलिटी से जुड़े मौजूदा नियमों का भी हवाला दिया और कहा कि अतिरिक्त ‘Must Carry’ या ‘Must Provide’ नियमों की जरूरत नहीं है।

जियो ने यूट्यूब, जियोहॉटस्टार, जियोटीवी, नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो और सोशल मीडिया की लाइव स्ट्रीमिंग सेवाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि सिर्फ कंटेंट को चैनल की तरह दिखाने से उसकी नियामकीय श्रेणी तय नहीं होनी चाहिए।

स्मार्ट-टीवी कंपनियों को ब्रॉडकास्टर माने जाने की चिंता

संभावित नए नियामकीय ढांचे को लेकर स्मार्ट-टीवी निर्माताओं और टेक्नोलॉजी कंपनियों ने भी चिंता जताई है। एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया ने कहा है कि सिर्फ इसलिए टेलीविजन निर्माताओं को ब्रॉडकास्टर या डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि उनके स्मार्ट टीवी में FAST एप्लिकेशन पहले से इंस्टॉल हो सकते हैं।

कंपनी का कहना है कि टीवी निर्माता टेक्नोलॉजी उपलब्ध कराने का काम करते हैं और थर्ड-पार्टी एप्लिकेशन के संपादकीय कंटेंट पर उनका नियंत्रण नहीं होता।

मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन फॉर इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MAIT) ने भी चेतावनी दी है कि ब्रॉडकास्टिंग से जुड़ी अतिरिक्त जिम्मेदारियां उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए अनुपालन का बोझ बढ़ा सकती हैं। इन कंपनियों पर पहले से ही बीआईएस सर्टिफिकेशन, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण से जुड़े नियम लागू हैं।

FAST प्लेटफॉर्म क्लाउडटीवी और रनटीवी ने पूरी लाइसेंसिंग व्यवस्था के बजाय MIB के साथ हल्के, रजिस्ट्रेशन आधारित ढांचे का प्रस्ताव दिया है।

नियामकीय फैसला बदल सकता है कनेक्टेड टीवी का बाजार

कनेक्टेड टीवी का इस्तेमाल बढ़ने के साथ इस पूरे मामले का महत्व भी बढ़ रहा है। स्विफ्ट टीवी के हवाले से दिए गए इंडस्ट्री अनुमानों के मुताबिक, भारत में कनेक्टेड टीवी वाले घरों की संख्या मौजूदा करीब 2 करोड़ से बढ़कर 2028 तक 4 करोड़ से ज्यादा हो सकती है। इसी अवधि में FAST से होने वाली विज्ञापन आय करीब 60 करोड़ डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

अलग-अलग पक्षों की ओर से दिए गए सुझाव भारत के टेलीविजन बाजार में हो रहे बड़े बदलाव को दिखाते हैं। ब्रॉडकास्टिंग, ओटीटी और इंटरनेट आधारित डिस्ट्रीब्यूशन के बीच की सीमाएं तेजी से धुंधली हो रही हैं।

पारंपरिक ब्रॉडकास्टर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए इंटरनेट पर टीवी के बढ़ते इस्तेमाल के बीच नियमन का सवाल बराबर का प्रतिस्पर्धी माहौल बनाने से जुड़ा है। वहीं, टेक्नोलॉजी कंपनियों और FAST ऑपरेटर्स की मुख्य चिंता यह है कि बुनियादी ढांचे पर आधारित पारंपरिक ब्रॉडकास्टिंग के लिए बनाए गए नियम एप्लिकेशन लेयर पर काम करने वाली सेवाओं के लिए जरूरत से ज्यादा अनुपालन बोझ पैदा कर सकते हैं।

अब अंतिम नियामकीय व्यवस्था यह तय करेगी कि भारत का उभरता हुआ इंटरनेट टेलीविजन बाजार किसी नए और अलग नियामकीय ढांचे के तहत विकसित होगा या फिर मुख्य रूप से मौजूदा डिजिटल और कंटेंट नियमों के तहत ही चलता रहेगा। 

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