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नए नियमों से कुछ यूं तालमेल बिठाने की तैयारी में है टीवी इंडस्ट्री
नए नियमों से कुछ यूं तालमेल बिठाने की तैयारी में है टीवी इंडस्ट्री
टेलिविजन इंडस्ट्री में नए रेगुलेशंस को लेकर इस इंडस्ट्री से जुड़े दिग्गजों के अलग-अलग विचार हैं और उसी के अनुसार ज्यादा से ज्यादा दर्शकों को जोड़ने के लिए वे अपनी स्ट्रैटेजी बनाने में जुटे हैं
समाचार4मीडिया ब्यूरो
6 years ago
टेलिविजन इंडस्ट्री में नए रेगुलेशंस को लेकर इस इंडस्ट्री से जुड़े दिग्गजों के अलग-अलग विचार हैं। नए रेगुलेशन से इस क्षेत्र में ज्यादा स्थायित्व और इंडस्ट्री की अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। इसके साथ ही कई ब्रॉडकास्टर्स ऐसे रणनीतिक रास्ते तलाश रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा व्युअर्स को अपने साथ जोड़ा जा सके। एक ओर कुछ बड़े ब्रॉडकास्टर्स लिनियर टीवी (Linear TV) और तेजी से बढ़ते डिजिटल क्षेत्र को मिलाने की बात कर रहे हैं, ताकि एडवर्टाइजर्स से अच्छी डील की जा सके, वहीं कुछ ब्रॉडकास्टर्स व्युअर्स की जरूरतों के अनुसार उन्हें पहले से ज्यादा बेहतर और आकर्षक कंटेंट देने की जुगत में लगे हुए हैं।
इन्हीं सब बातों को लेकर हमारी सहयोगी मैगजीन ‘इंपैक्ट’ (IMPACT) ने टीवी इंडस्ट्री से जुड़े कुछ दिग्गजों से बातचीत की। आइए, जानते हैं कि इस मामले पर इंडस्ट्री से जुड़ी इन शख्सियतों ने क्या कहा।
रेगुलेशनंस से विज्ञापन कैटेगरी में बढ़ोतरी के साथ स्थायित्व आएगा: ‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) के एमडी और सीईओ एमके आनंद का कहना है कि फरवरी 2019 में लागू किए गए न्यू टैरिफ ऑर्डर (NTO) ने टीवी की पहुंच और विज्ञापन बिक्री (Ad Sales) पर काफी प्रभाव डाला है। इस नए बदलाव से तालमेल बैठाने के लिए ब्रॉडकास्टर्स लगे हुए हैं। उम्मीद है कि रेगुलेशन में प्रस्तावित बदलावों से स्थायित्व में मदद मिलेगी। पिछले कुछ महीनों में खराब प्रदर्शन के बाद उम्मीद है कि वित्तीय वर्ष 2020 में विज्ञापन की कुछ श्रेणियों में दोबारा से बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। इससे ब्रॉडकास्टर्स को राहत मिलेगी।
कंज्यूमर को ही प्राथमिकता: 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ के सीईओ (इंडिया ब्रॉडकास्ट बिजनेस) पुनीत मिश्रा का कहना है कि सिर्फ भाषा और कंटेंट के बारे में सोचने के बजाय सबसे पहले आप अपने कंज्यूमर के बारे में कैसे सोचते हैं? यह बहुत जरूरी है। एफएमसीजी वर्ल्ड ने इस दिशा में काफी किया है, जहां साबुन की एक टिकिया के लिए 18 महीने तक काफी कंज्यूर रिसर्च की जाती है। उस साबुन को व्यक्ति सिर्फ तीन मिनट इस्तेमाल करता है, लेकिन वह कंटेंट को दिन में करीब चार घंटे देखता है। ऐसे में आपको यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि आप अपने कंज्यूमर को समझते हैं और तभी वह आपके साथ इतना समय व्यतीत करता है। हम इस दिशा में लगातार जुटे हुए हैं और इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि कंटेंट को ऑन एयर करते समय सबसे पहले कंज्यूमर को ध्यान में रखा जाए।
काफी अच्छा रहा है ये कदम: ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स’ इंडिया के प्रेजिडेंट (नेटवर्क सेल्स एंड इंटरनेशनल बिजनेस) रोहित गुप्ता का कहना है कि बड़े ब्रॉडकास्टर्स अपनी डिजिटल और टेलिविजन ऑफरिंग को मजबूती देंगे। हालांकि, इन्हें अलग-अलग तरीके से खरीदा और बेचा जाता है। जल्द ही इसमें बदलाव होने वाला है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर व्युअरशिप काफी ज्यादा है और इसलिए दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। ग्लोबल स्तर पर देखें तो ब्रैंड्रस अपनी एजेंसियों को मजबूती देने में जुटे हैं, ताकि उनसे रिटर्न भी सुनिश्चित किया जा सके। यह कदम भी ब्रॉडकास्टर और एजेंसी के साथ एडवर्टाइजर के लिए भी काफी अच्छा रहा है।
टीवी की पहुंच और दर्शकों में इसकी पैठ बढ़ेगी: ‘देशभर में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था 'ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल' (BARC) इंडिया के सीईओ सुनील लुल्ला का कहना है कि पिछले चार साल में टीवी पर बिताए जाने वाले समय में लगातार वृद्धि हुई है। इस साल भी इस तरह की स्थिति बनी रहेगी और लोग टीवी पर इस साल भी ज्यादा से ज्यादा समय बिताएंगे। मेरा मानना है कि वर्ष 2020 में टीवी की पहुंच (खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में) बढ़ेगी और बड़ी संख्या में लोग भी इससे जुड़ेगे। बार्क भी अपनी मीजरमेंट प्रक्रिया में और मजबूती ला रहा है, ताकि टेलिविजन इंडस्ट्री को बेस्ट मीजरमेंट दिया जा सके, जिससे वे उसी के अनुसार अपनी स्ट्रैटेजी भी बना सकें।
रीजनल कंटेंट और विश्लेषण से इस सेक्टर को मिलेगी और गति: इस बारे में मीडिया नेटवर्क ‘वायकॉम18’ (Viacom18) की हेड (Hindi Mass Entertainment & Kids TV Network) नीना इलाविया जयपुरिया का कहना है कि इस साल टेलिविजन सेक्टर को आगे बढ़ाने में रीजनल कंटेंट और विश्लेषण (Analytics) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नीना इलाविया के अनुसार, ‘हमारे देश विभिन्न भाषाओं वाला देश है। पिछले एक साल की बात करें तो रीजनल कंटेंट के मार्केट में जबर्दस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है। आने वाले समय में भी यह ट्रेंड जारी रहेगा, क्योंकि व्युअर्स अपनी पसंद की भाषा में कंटेंट देखना ज्यादा पसंद करते हैं। डिस्ट्रीब्यूशन, व्युअरशिप और एडवर्टाइजमेंट के मोर्चे पर सफलता के लिए रीजनल फ्रेंचाइजी काफी अहम बनी रहेगी। मीडिया के क्षेत्र में बिग डाटा और एनालिटिक्स भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे कंज्यूमर्स और उनकी प्राथमिकताओं को बेहतर तरीके से समझने में काफी मदद मिलेगी।’
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