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न्यूज चैनलों की TRP रेटिंग्स अब सिर्फ परसेप्शन है!

देश में न्यूज चैनलों की टीआरपी इसके उद्भव से लेकर आज तक कई बार कंट्रोवर्सीज में रही है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago

देश में न्यूज चैनलों की टीआरपी इसके उद्भव से लेकर आज तक कई बार कंट्रोवर्सीज में रही है। पहले जहां 'टैम' (TAM) के जरिये न्यूज चैनलों की रेटिंग्स की गणना कर उनकी रैंकिंग की जाती थी, पर उसमें कई तरह की खामियां पाई गईं तो ये काम फिर एक नई संस्था बनाकार बार्क (BARC) को सौपा गया है। एक ऐसा दौर भी आया, जब बार्क के अस्तित्व पर ही सवाल उठ गए। स्टिंग ऑपरेशन के जरिये दूसरों की पोल खोलने वाला मीडिया ही एक-दूसरे चैनलों पर टीआरपी रेटिंग्स से छेड़छाड़ के आरोप लगाने लगा, बात यहीं नहीं ठहरी, मामला कोर्ट तक जा पहुंचा था।

कई तरह से व्यवधानों और प्रक्रियायों के बाद कोविड काल मे बंद रही टीआरपी पिछले साल फिर से खुली, पर इस बार जिस तरह रेटिंग्स दिखीं, उसे पूरी इंडस्ट्री मन से स्वीकार नहीं कर पा रही है। लगातार उस पर सवाल उठ रहे थे, ऐसे में बार्क को बड़ा झटका तब लगा जब देश के सबसे पुराने मीडिया हाउस ने एकाएक चौंकाने वाला निर्णय लेते हुए खुद को बार्क से अलग कर लिया। भारतीय टीवी न्यूज की दुनिया में ये किसी भी चैनल का अप्रत्याशित कदम था, इसके बाद माना जा रहा था कि कुछ और बड़े चैनल भी ऐसा कर सकते हैं, स्वाभाविक इसका दवाब भी बार्क पर आया ही होगा। जी न्यूज के बार्क से हटने के बाद आईटीवी नेटवर्क ने भी बार्क से अपनी असहमति जताते हुए इस कड़ी को आगे बढ़ाया और बार्क से 'तलाक' का ऐलान कर दिया।

रजनीश आहूजा के नेतृत्व में ‘जी न्यूज’ के लिए ऐसा निर्णय करना बहुत ही साहसी कदम माना जा रहा है, क्योंकि पानी में रहकर मगर से बैर लेना कोई आसान काम नहीं है। मार्केट प्रेशर और रेवेन्यू अर्निंग जैसे अहम विषयों पर सेल्स और मैनेजमेंट को 'कंटेंट इज किंग' की थ्योरी ही रास आती है, ऐसे में 'जी न्यूज' के टीवी कंटेंट को लेकर संपादक महोदय लगातार नए प्रयोगों पर जमे हैं। प्रतिद्वंद्वी चैनलों के कई बड़े चेहरों को यहां लाकर उन्होंने जहां इंडस्ट्री को 'जी न्यूज' के आगे बढ़ने की ललक को दर्शाया है, वहीं कई शो में डूयल एंकर शो बनाकर वे इंडस्ट्री को नई तरह की चुनौती भी दे रहे हैं। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि ‘जी’ ने यह निर्णय इसलिए लिया कि उनकी रेटिंग नहीं आ रही थी और फ्रीडिश जाने के बाद उनकी रेटिंग और कम हो रही थी।

ऐसे में दो बड़े चैनल-'आजतक' और 'एबीपी' भी लगातार इस मंथन में जुटे हैं कि अब आखिर उनको भी क्या इस बड़े निर्णय में शामिल होना है। बताया जा रहा है कि 'आजतक' के मैनेजमेंट ने अब रेटिंग्स को एक रुटीन प्रक्रिया मानकर उसे एक परसेप्शन बेस्ड टूल मान लिया है। ऐसे में चैनल अब अपनी पुरानी धाक को पूरी तरह से कैश कर रहा है। सालों तक खुद को नंबर वन बताने वाला 'आजतक' अब खुद को सर्वश्रेष्ठ चैनल कहकर एक तरह से नंबर रैंकिंग के गेम में ज्यादा उलझ नहीं रहा है। ऐसे में चैनल का फोकस अपनी एडिटोरियल कवरेज को जबर्दस्त तरीके से कर मार्केट में अपनी पुरानी पकड़ को कायम रखना है, ताकि उसके रेवेन्यू पर रेटिंग्स का कोई खास असर न पड़ सके।

चैनल जहां टीवी न्यूज मीडिया के सबसे बड़े नामों को अपने साथ जोड़कर रखने और समय-समय पर उनकी ब्रैंडिंग को केश करने का कोई मौका नहीं छोड़ता है तो लगातार बड़े इवेंट्स और कान्क्लेव के जरिये पूरी ताकत से रेवेन्यू कलेक्शन पर भी लगा है। सुधीर चौधरी, अंजना ओम कश्यप, श्वेता सिंह, चित्रा त्रिपाठी और सईद अंसारी जैसे पांच 'पांडवों' के जरिये चैनल हर तरह की 'महाभारत' के समर में कूद विजयश्री प्राप्त करने की हरसंभव कोशिश कर रहा है तो नई पौध के तौर पर नेहा बाथम, आशुतोष चतुर्वेदी, शुभांकर मिश्रा से लेकर अर्पिता आर्या पर भी बड़ा दांव खेलने से नहीं चूकता है।

अब बात करते हैं 'एबीपी न्यूज' की। रेटिंग्स के दौर में टॉप 3 का ये चैनल कोविड काल में संक्रमण से जूझा और लगातार इससे उबरने की कोशिश में है। बड़ी बात ये है कि ऐसे में रेवेन्यू के मोर्चे पर चैनल के सीईओ के मेहनत के चलते कई तरह की युक्तियां अपनाई जा रही हैं। माना जा रहा है कि चैनल जल्द ही अपने पारंपरिक दर्शकों को एक बार फिर अपने से जोड़कर अपनी धाक और पुरानी चाल पर नजर आएगा। हालांकि, माना यह भी जा रहा है कि लगातार चैनल प्रबंधन और संपादक कई छोटी-बड़ी 'सर्जरी' के जरिये अब चैनल की दशा और दिशा को सही ओर ले आए हैं और जल्दी ही इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।


टैग्स रेटिंग्स न्यूज चैनल टीआरपी बार्क
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