आदिवासी समुदाय के लिए उनकी अपनी भाषा का पहला सैटेलाइट टीवी न्यूज चैनल लॉन्च होगा, जिसका नाम है
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
आदिवासी समुदाय के लिए एक और अच्छी खबर है। दरअसल, इस समुदाय के लिए उनकी अपनी भाषा का पहला सैटेलाइट टीवी न्यूज चैनल लॉन्च होगा, जिसका नाम है 'ट्राइब टीवी'। 'दैनिक जागरण' के प्रदीप सिंह एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस न्यूज टीवी चैनल का प्रसारण लाइसेंस जारी होने के बाद टेस्ट रन चल रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पंद्रह दिनों के अंदर यह चैनल विभिन्न सैटेलाइट प्लेटफार्म पर दर्शकों के लिए लॉन्च हो जाएगा, जिसका मुख्यालय बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर के रायगंज में इस चैनल का मुख्यालय है। इसका संचालन इंफोटेंमेंट के क्षेत्र में काम करने वाली कल्याणी सोल्वेक्स नामक संस्था करेगी। फिलहाल संताली भाषा में इस चैनल को लॉन्च किया गया है। संताली के बाद ट्राइब टीवी की योजना अन्य लोकप्रिय जनजातीय भाषाओं मुंडारी, कुडूख में भी टीवी चैनल लॉन्च करने की है।
चैनल से जुड़े अधिकांश पेशेवर भी जनजातीय समुदाय के हैं। संताली भाषा आदिवासी समुदाय की सबसे प्रचलित और अधिक उपयोग की जाने वाली भाषा है। फिलहाल ट्राइब टीवी का फोकस बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और बिहार में होगा। इन प्रदेशों में संताली आदिवासियों की बड़ी तादाद है। असम में भी विस्तार करने का लक्ष्य है, जहां झारखंड से गए आदिवासी समुदाय के लोग बड़ी संख्या में हैं।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र रहे सुरेंद्र सोरेन इसकी संपादकीय टीम को लीड कर रहे हैं। सोरेन पाकुड़ के रहने वाले हैं और विभिन्न मीडिया संस्थानों में उन्हें कार्य करने का लंबा अनुभव है। उन्होंने विभिन्न टीवी चैनलों को सेवाएं दी हैं। संताली भाषा पर भी उनकी गहरी पकड़ है।
हिंदी न्यूज चैनलों के सबसे अहम माने जाने वाले 9 बजे के प्राइम टाइम स्लॉट में एक बार फिर हलचल तेज होती दिखाई दे रही है।
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Vikas Saxena
हिंदी न्यूज चैनलों के सबसे अहम माने जाने वाले 9 बजे के प्राइम टाइम स्लॉट में एक बार फिर हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। हाल के दिनों में एंकरों की अदला-बदली, नए शो की लॉन्चिंग और टाइम स्लॉट में बदलाव ने इस मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
दर्शकों की नजरें अब 8:30 बजे से 9 बजे के बीच होने वाली उस प्रतिस्पर्धा पर टिकी हैं, जहां देश के दो चर्चित पत्रकार- रजत शर्मा और सुशांत सिन्हा अपने-अपने चैनलों के साथ नए अंदाज में मैदान में उतर रहे हैं।
इंडिया टीवी के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा का लोकप्रिय शो ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ का टाइम स्लॉच बदल दिया गया है, जोकि 15 जून से यानी आज रात 9 बजे की बजाय 8:30 बजे प्रसारित होगा। चैनल ने इसे अपनी प्राइम टाइम रणनीति को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
वहीं, न्यूज18 इंडिया ने अपने प्राइम टाइम लाइनअप को मजबूत करते हुए वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सिन्हा के साथ नए फ्लैगशिप शो ‘देश की पाठशाला’ (Desh Ki Pathshala) की शुरुआत की है। यह शो 16 जून से रोजाना रात 8:50 बजे प्रसारित होगा। चैनल का दावा है कि यह पारंपरिक डिबेट फॉर्मेट से अलग डेटा, रिसर्च और विश्लेषण आधारित एक्सप्लेनर शो होगा, जो खबरों को सिर्फ बताएगा नहीं बल्कि समझाएगा भी।
मीडिया जगत के जानकारों का मानना है कि यह बदलाव केवल टाइम स्लॉट का फेरबदल नहीं है, बल्कि दर्शकों को आकर्षित करने की एक बड़ी रणनीतिक लड़ाई है। एक तरफ रजत शर्मा का शो वर्षों से हिंदी न्यूज के सबसे चर्चित प्राइम टाइम कार्यक्रमों में शामिल रहा है, वहीं दूसरी ओर सुशांत सिन्हा अपने विश्लेषणात्मक अंदाज और डिजिटल दर्शकों के बीच मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि अब दोनों कार्यक्रम लगभग एक ही समयावधि में दर्शकों का ध्यान खींचने की कोशिश करेंगे। ऐसे में 8:30 से 9 बजे का स्लॉट हिंदी न्यूज चैनलों के लिए नया रणक्षेत्र बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि दर्शक किस फॉर्मेट को ज्यादा पसंद करते हैं- रजत शर्मा का स्थापित और भरोसेमंद विश्लेषण या सुशांत सिन्हा का नया एक्सप्लेनर मॉडल।
फिलहाल इतना तय है कि हिंदी न्यूज का प्राइम टाइम एक बार फिर गर्म हो चुका है और टीआरपी की जंग में नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं।
टाइम्स नेटवर्क ने जानी-मानी पत्रकार रुबिका लियाकत की नियुक्ति का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।
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Samachar4media Bureau
टाइम्स नेटवर्क ने जानी-मानी पत्रकार रुबिका लियाकत की नियुक्ति का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। उन्हें हिंदी न्यूज चैनल 'टाइम्स नाउ नवभारत' में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही वह नेटवर्क में वाइस प्रेजिडेंट (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) की अतिरिक्त भूमिका भी निभाएंगी। वह नोएडा स्थित नेटवर्क के कार्यालय से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगी।
रुबिका लियाकत के पास ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म, राजनीतिक रिपोर्टिंग, प्राइम-टाइम एंकरिंग और न्यूजरूम नेतृत्व का 19 वर्षों से अधिक का समृद्ध अनुभव है। पत्रकारिता जगत में उन्होंने अपनी मजबूत और प्रभावशाली पहचान बनाई है।
'टाइम्स नाउ नवभारत' से जुड़ने से पहले रुबिका लियाकत 'नेटवर्क18 इंडिया' में कंसल्टिंग एडिटर और प्राइम-टाइम एंकर के रूप में कार्यरत थीं, जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और विशेष कवरेज का नेतृत्व किया।
अपने लंबे पत्रकारिता करियर के दौरान उन्होंने देश के कई प्रमुख समाचार संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। इनमें एबीपी न्यूज, ज़ी न्यूज, न्यूज24, भारत24 और लाइव इंडिया जैसे बड़े मीडिया संस्थान शामिल हैं।
टाइम्स नेटवर्क में उनकी यह नई पारी हिंदी समाचार प्रसारण क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उनके व्यापक अनुभव और संपादकीय नेतृत्व से टाइम्स नाउ नवभारत को अपनी कंटेंट रणनीति और दर्शकों के साथ जुड़ाव को और मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
जी मीडिया (Zee Media) ने 13 जून 2026 को आयोजित असाधारण आम बैठक में श्वेता गोपालन को कंपनी की स्वतंत्र महिला निदेशक के रूप में पुनर्नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
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Vikas Saxena
जी मीडिया (Zee Media) ने 13 जून 2026 को आयोजित असाधारण आम बैठक (Extra Ordinary General Meeting - EGM) में श्वेता गोपालन को कंपनी की स्वतंत्र महिला निदेशक के रूप में पुनर्नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) और अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यमों (OAVM) के जरिए आयोजित की गई थी। शेयरधारकों की मंजूरी के बाद श्वेता गोपालन का दूसरा लगातार पांच वर्षीय कार्यकाल 1 अगस्त 2026 से शुरू होकर 31 जुलाई 2031 तक रहेगा।
कंपनी ने सेबी (लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशंस, 2015 के रेगुलेशन 30 के तहत यह जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को दी।
कंपनी ने बताया कि 18 मई 2026 को हुई बोर्ड बैठक में निदेशक मंडल ने श्वेता गोपालन से प्राप्त पुष्टि के आधार पर यह भी नोट किया था कि उन्हें भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) या किसी अन्य प्राधिकरण द्वारा निदेशक पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है।
श्वेता गोपालन को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के रूप में दूसरे कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति 1 अगस्त 2026 से 31 जुलाई 2031 तक पांच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगी। इस पुनर्नियुक्ति को 13 जून 2026 को आयोजित EGM में शेयरधारकों ने मंजूरी प्रदान की।
श्वेता गोपालन का दूसरा लगातार पांच वर्षीय कार्यकाल 1 अगस्त 2026 से 31 जुलाई 2031 तक रहेगा। इस दौरान वे रोटेशन के आधार पर सेवानिवृत्त होने के लिए उत्तरदायी नहीं होंगी।
श्वेता गोपालन ने अन्ना यूनिवर्सिटी से इंडस्ट्रियल बायोटेक्नोलॉजी में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (B.Tech) की डिग्री हासिल की है। इसके अलावा उन्होंने सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी से जनरल मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरा किया है और अमेरिका के केलॉग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की डिग्री प्राप्त की है। उनके पास FITCH से क्वांटिटेटिव फाइनेंस में सर्टिफिकेशन भी है।
श्वेता गोपालन ने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत वर्ष 2010 में अमेरिका स्थित Johns Hopkins Medicine International के साथ की थी। इसके बाद उन्होंने 2011-2012 के दौरान सिंगापुर की Parkway Health में और 2012-2013 के दौरान Noble Group, Singapore में कार्य किया।
बाद में वर्ष 2015 से 2016 के बीच उन्होंने अमेरिका में Tata Consultancy Services (TCS) में बिजनेस एनालिस्ट के रूप में अपनी सेवाएं दीं।
केंद्र सरकार ने प्रसारण क्षेत्र में बड़ा बदलाव करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए टेलीकम्युनिकेशंस (टेलीविजन, रेडियो एंड एसोसिएटेड सर्विसेज) रूल्स, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है।
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Vikas Saxena
केंद्र सरकार ने प्रसारण क्षेत्र में बड़ा बदलाव करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए टेलीकम्युनिकेशंस (टेलीविजन, रेडियो व एसोसिएटेड सर्विसेज) रूल्स, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है। ये नियम 2023 में लागू हुए नए टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट के तहत तैयार किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य टीवी चैनलों, डीटीएच, HITS, IPTV, प्राइवेट एफएम रेडियो और कम्युनिटी रेडियो से जुड़े बिखरे हुए नियमों को एक ही ढांचे में लाना है, ताकि इंडस्ट्री को एक सरल, पारदर्शी और एकीकृत व्यवस्था मिल सके।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अनुसार नया टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट 2023 पुराने और 1885 के टेलीग्राफ एक्ट की जगह लेकर आया है। टीवी और रेडियो सेवाओं से संबंधित प्रावधानों को लागू करने की जिम्मेदारी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पास है। इसी के तहत नए ड्राफ्ट नियम तैयार किए गए हैं। इन नियमों में सैटेलाइट टीवी चैनलों की अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग गाइडलाइंस, डीटीएच ब्रॉडकास्टिंग सर्विसेज, हेडएंड-इन-द-स्काई (HITS), प्राइवेट एफएम रेडियो फेज-III, कम्युनिटी रेडियो और IPTV सेवाओं से जुड़े विभिन्न दिशा-निर्देशों को एक साथ समाहित किया गया है।
नए नियमों के तहत टीवी चैनल, टीवी चैनल डिस्ट्रीब्यूशन सर्विस, टेलीपोर्ट, टीवी न्यूज एजेंसी, प्राइवेट रेडियो सेवा और कम्युनिटी रेडियो सेवा के लिए अलग-अलग प्रकार के ऑथराइजेशन का प्रावधान किया गया है। टीवी चैनलों को न्यूज और नॉन-न्यूज श्रेणियों में बांटा गया है और इन्हें सैटेलाइट या टेरेस्ट्रियल माध्यम से प्रसारित किया जा सकेगा।
टीवी चैनल शुरू करने के लिए कंपनी या एलएलपी होना जरूरी होगा। आवेदक को विदेशी निवेश संबंधी नियमों का पालन करना होगा और निर्धारित न्यूनतम नेटवर्थ की शर्तें पूरी करनी होंगी। इसके अलावा चैनल के नाम और लोगो के लिए ट्रेडमार्क या संबंधित अधिकार होना भी अनिवार्य होगा। चैनल के पास अपने कंटेंट के मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन अधिकार भी होने चाहिए।
डीटीएच और HITS सेवाओं के लिए भी कई नई शर्तें प्रस्तावित की गई हैं। सरकार ने क्रॉस मीडिया ओनरशिप को सीमित करने के लिए स्पष्ट नियम तय किए हैं। किसी टीवी चैनल या मल्टी सिस्टम ऑपरेटर की डीटीएच कंपनी में हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेगी। इसी तरह डीटीएच ऑपरेटर भी किसी टीवी चैनल या एमएसओ में 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी नहीं रख सकेगा। HITS और टीवी चैनलों के बीच भी हिस्सेदारी की अधिकतम सीमा 20 प्रतिशत तय की गई है।
प्राइवेट एफएम रेडियो सेवाओं के लिए सरकार नीलामी के जरिए ऑथराइजेशन देगी। आवेदन करने वाली कंपनी में सबसे बड़े भारतीय शेयरधारक की हिस्सेदारी कम से कम 51 प्रतिशत होनी चाहिए। साथ ही कंपनी किसी राजनीतिक, धार्मिक या गैर-लाभकारी संगठन से जुड़ी नहीं होनी चाहिए। विज्ञापन एजेंसियों और उनसे जुड़ी कंपनियों को भी इस क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
सरकार ने एफएम रेडियो सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए यह भी प्रस्ताव रखा है कि कोई भी ऑपरेटर किसी शहर में कुल एफएम चैनलों के 40 प्रतिशत से अधिक चैनलों का संचालन नहीं कर सकेगा। इसके अलावा प्रत्येक शहर में कम से कम तीन अलग-अलग ऑपरेटरों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी।
कम्युनिटी रेडियो के लिए भी नए मानदंड तय किए गए हैं। ऐसी सेवा के लिए आवेदन करने वाले संगठन को संबंधित क्षेत्र में कम से कम तीन वर्षों से सामुदायिक विकास कार्यों में सक्रिय होना होगा। कोई भी संस्था अधिकतम छह कम्युनिटी रेडियो ऑथराइजेशन ही रख सकेगी। साथ ही उसे विदेशी निवेश और विदेशी अंशदान से जुड़े कानूनों का पालन करना होगा।
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार IPTV सेवा शुरू करने के लिए संबंधित संस्था के पास या तो इंटरनेट सेवा प्रदान करने का ऑथराइजेशन होना चाहिए या फिर वह केबल टीवी कानून के तहत मल्टी सिस्टम ऑपरेटर के रूप में पंजीकृत होनी चाहिए।
सरकार ने पुराने लाइसेंस धारकों को नए ढांचे में आने का विकल्प भी दिया है। जो कंपनियां पुराने टेलीग्राफ एक्ट के तहत लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन या अनुमति लेकर काम कर रही हैं, वे नए नियमों के तहत माइग्रेशन के लिए आवेदन कर सकेंगी। हालांकि इसके लिए उन्हें अपने सभी बकाया भुगतान और देनदारियां पहले चुकानी होंगी।
सुरक्षा को लेकर भी नियमों में सख्ती दिखाई गई है। सभी अधिकृत संस्थाओं और उनके प्रमुख अधिकारियों को पूरे ऑथराइजेशन काल के दौरान सुरक्षा मंजूरी बनाए रखनी होगी। न्यूज चैनल, टीवी न्यूज एजेंसी, डीटीएच और प्राइवेट रेडियो सेवाओं में अधिकांश निदेशक और प्रमुख अधिकारी भारत में निवासी होने चाहिए। किसी विदेशी तकनीकी विशेषज्ञ की नियुक्ति से पहले केंद्र सरकार की सुरक्षा मंजूरी लेना भी अनिवार्य होगा।
नए नियमों में निगरानी और जवाबदेही पर भी विशेष जोर दिया गया है। सभी अधिकृत संस्थाओं को अपने कार्यक्रमों और विज्ञापनों की रिकॉर्डिंग कम से कम 90 दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी। यदि किसी कार्यक्रम को लेकर शिकायत, विवाद, जांच या न्यायिक कार्यवाही चल रही हो तो उसकी रिकॉर्डिंग अंतिम निर्णय तक सुरक्षित रखनी होगी। सरकार को किसी भी समय निरीक्षण और जांच का अधिकार भी दिया गया है।
टीवी चैनलों के लिए प्रस्तावित नियमों के अनुसार उन्हें स्पेक्ट्रम आवंटन के एक वर्ष के भीतर अपना संचालन शुरू करना होगा। यदि कोई चैनल लगातार 90 दिनों तक बंद रहता है तो उसका ऑथराइजेशन वापस लिया हुआ माना जा सकता है। टीवी चैनलों को केवल अधिकृत डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म, मल्टी सिस्टम ऑपरेटर या IPTV सेवा प्रदाताओं को ही अपने सिग्नल उपलब्ध कराने की अनुमति होगी।
ड्राफ्ट में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि सभी टीवी चैनलों को प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट ऐसे कार्यक्रम प्रसारित करने होंगे जो राष्ट्रीय महत्व और सामाजिक सरोकारों से जुड़े हों। इनमें शिक्षा, साक्षरता, कृषि, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, विज्ञान एवं तकनीक, महिला कल्याण, कमजोर वर्गों का उत्थान, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता जैसे विषय शामिल होंगे। यह प्रसारण सुबह 6 बजे से रात 11 बजे के बीच करना होगा। हालांकि सरकार कुछ विशेष चैनलों को इस प्रावधान से छूट दे सकती है।
टीवी चैनलों को अपने चैनल की उपलब्धता और लैंडिंग पेज से जुड़ी जानकारी सरकार तथा अधिकृत टीवी रेटिंग एजेंसियों को भी उपलब्ध करानी होगी।
यदि कोई टीवी चैनल अपनी श्रेणी बदलना चाहता है, जैसे न्यूज से नॉन-न्यूज या नॉन-न्यूज से न्यूज, अथवा सैटेलाइट से टेरेस्ट्रियल माध्यम में बदलाव करना चाहता है, तो उसे सरकार से अनुमति लेनी होगी। चैनल का नाम या लोगो बदलने के लिए भी आवेदन करना होगा और संबंधित ट्रेडमार्क अधिकारों का प्रमाण देना होगा।
डीटीएच और अन्य टीवी डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं को भी स्पेक्ट्रम आवंटन के एक वर्ष के भीतर अपना संचालन शुरू करना होगा। उन्हें केवल अधिकृत टीवी चैनलों का ही पुनर्प्रसारण करने की अनुमति होगी। सभी प्रसारण भारतीय सीमा के भीतर स्थित एन्क्रिप्शन और कंडीशनल एक्सेस सिस्टम के जरिए संचालित करने होंगे। सरकार समय-समय पर कुछ सार्वजनिक प्रसारण चैनलों को अनिवार्य रूप से प्रसारित करने का निर्देश भी दे सकेगी।
प्राइवेट एफएम रेडियो सेवाओं के लिए सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये सेवाएं पूरी तरह फ्री-टू-एयर होंगी और श्रोताओं से कोई शुल्क नहीं लिया जा सकेगा। रेडियो स्टेशनों को प्रतिदिन कम से कम एक घंटे ऐसे कार्यक्रम प्रसारित करने होंगे जो राष्ट्रीय और सामाजिक महत्व के विषयों पर आधारित हों। इसके अलावा कुल प्रसारण का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय कंटेंट होना अनिवार्य होगा।
एफएम रेडियो स्टेशनों को स्वतंत्र समाचार प्रसारण की अनुमति नहीं होगी। वे केवल आकाशवाणी के बिना बदलाव वाले समाचार बुलेटिन प्रसारित कर सकेंगे। हालांकि खेल, ट्रैफिक, मौसम, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, रोजगार, परीक्षाओं और जनहित से जुड़ी सूचनाओं को गैर-समाचार श्रेणी में रखा गया है और उनका प्रसारण किया जा सकेगा।
कम्युनिटी रेडियो सेवाओं को प्रतिदिन कम से कम दो घंटे संचालित करना होगा। वे भी फ्री-टू-एयर होंगी और श्रोताओं से कोई शुल्क नहीं लिया जा सकेगा। चैनल की पहचान में "कम्युनिटी रेडियो" शब्द प्रमुखता से दिखाना अनिवार्य होगा। साथ ही हर कम्युनिटी रेडियो स्टेशन को एक सलाहकार और कंटेंट समिति बनानी होगी, जिसमें स्थानीय समुदाय के सदस्य शामिल होंगे और कम से कम आधी सदस्य महिलाएं होंगी।
कम्युनिटी रेडियो स्टेशन कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, संस्कृति और सामाजिक विकास से जुड़े स्थानीय मुद्दों पर कार्यक्रम प्रसारित कर सकेंगे। उन्हें स्वतंत्र समाचार प्रसारण की अनुमति नहीं होगी, लेकिन वे आकाशवाणी के समाचार बुलेटिन का स्थानीय भाषा या बोली में अनुवाद करके प्रसारण कर सकेंगे, बशर्ते समाचार की मूल भावना और सामग्री में कोई बदलाव न किया जाए।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इन ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक और अंतर-मंत्रालयी परामर्श के लिए जारी किया है। मंत्रालय ने इंडस्ट्री, ब्रॉडकास्ट कंपनियों, हितधारकों और आम नागरिकों से 27 जुलाई 2026 तक सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। सरकार का मानना है कि इन नियमों के लागू होने के बाद टीवी, रेडियो, डीटीएच, HITS और IPTV क्षेत्र के लिए लाइसेंसिंग, संचालन, निगरानी और अनुपालन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल और आधुनिक हो जाएगी।
e4m CTV Conference में मार्केटिंग एक्सपर्ट्स का मानना था कि CTV की ताकत केवल रीच बढ़ाने में नहीं, बल्कि दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने व ब्रैंड पर भरोसा बनाने में है।
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Samachar4media Bureau
Connected TV (CTV) ने भारत में तेजी से विस्तार किया है, लेकिन इंडस्ट्री अभी भी इस सवाल से जूझ रही है कि आखिर इसकी असली वैल्यू क्या है। e4m CTV Conference 2026 में मार्केटिंग एक्सपर्ट्स का मानना था कि CTV की ताकत केवल रीच बढ़ाने में नहीं, बल्कि दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने, ब्रैंड पर भरोसा बनाने और उसे वास्तविक बिजनेस नतीजों में बदलने में है।
WPP Media में Advanced TV के बिजनेस हेड राजीव राजगोपाल की अध्यक्षता में आयोजित "From Impressions to Impact: The CMO's CTV Playbook" सत्र में Huella में रेवेन्यू के के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट पंकज राय, Teads India की डायरेक्टर (एंटरप्राइज सॉल्यूशंस) रिद्धि पिमपुटकर, Visa के मार्केटिंग हेड (CMO) गौरव रामदेव, Tata AIG के मार्केटिंग हेड शेखर सौरभ और Castrol India में मार्केटिंग वाइस प्रेजिडेंट कौशिक वेदुला शामिल हुए।
राजीव राजगोपाल ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि भारत में CTV घरों की संख्या लगभग 6 करोड़ तक पहुंच चुकी है और इसकी आधे से ज्यादा ग्रोथ मेट्रो शहरों के बाहर से आई है। इसके बावजूद विज्ञापन खर्च उसी गति से नहीं बढ़ रहा है। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?
रिद्धि पिमपुटकर के अनुसार इसकी सबसे बड़ी वजह मीजरमेंट (Measurement) को लेकर भरोसे की कमी है। उन्होंने कहा, "कई मार्केटर्स को अभी भी यह विश्वास नहीं है कि CTV उस प्रभाव को सही तरीके से माप सकता है, जिसके लिए इसकी चर्चा की जाती है।"
वहीं Visa के गौरव रामदेव ने कहा कि मामला सिर्फ मीजरमेंट तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, "विज्ञापन निवेश का फैसला ROI यानी निवेश पर मिलने वाले रिटर्न के आधार पर होता है। लेकिन आज सवाल यह भी है कि CTV अन्य मीडिया विकल्पों से अलग क्या देता है। क्या यह अतिरिक्त रीच देता है? क्या यह प्रीमियम दर्शकों तक पहुंच बनाता है? इन सवालों के जवाब अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।"
चर्चा के दौरान यह बात बार-बार सामने आई कि कई मार्केटर्स अभी भी CTV को सिर्फ एक और रीच प्लेटफॉर्म की तरह देख रहे हैं, जबकि इसकी क्षमता इससे कहीं ज्यादा है।
पंकज राय ने कहा कि लगभग एक दशक तक पारंपरिक मीडिया बेचने के अनुभव के बाद उन्हें लगता है कि मार्केटर्स अभी भी CTV को पुराने नजरिए से देख रहे हैं। उन्होंने कहा, "मार्केटर्स यह देख रहे हैं कि क्या CTV उन्हें अतिरिक्त 6 करोड़ घरों तक पहुंच दे रहा है या बेहतर टार्गेटिंग दे रहा है। लेकिन यह माध्यम इससे कहीं ज्यादा गहराई रखता है, जिसे समझने की जरूरत है।"
कौशिक वेदुला ने कहा कि CTV को अपनाने की रफ्तार हर कैटेगरी और ऑडियंस में अलग-अलग है। उन्होंने कहा, "Measurement सबसे बड़ी चुनौती है और अगर इसे बेहतर किया जाए तो CTV की ग्रोथ काफी तेज हो सकती है। लेकिन साथ ही यह भी देखना होगा कि सभी उपभोक्ता अभी इस प्लेटफॉर्म पर नहीं आए हैं, इसलिए निवेश करते समय ऑडियंस मिक्स को भी ध्यान में रखना जरूरी है।"
उन्होंने बताया कि Castrol के विभिन्न प्रोडक्ट और ग्राहक वर्गों में CTV की मौजूदगी लगातार बढ़ी है।
शेखर सौरभ के मुताबिक विज्ञापन खर्च में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा, "पिछले साल की तुलना में इस साल जो अतिरिक्त विज्ञापन खर्च बढ़ा है, उसका बड़ा हिस्सा नए दौर के ब्रैंड्स से आ रहा है। ये छोटे ब्रैंड्स पूरी तरह कन्वर्जन और परफॉर्मेंस पर फोकस कर रहे हैं।"
हालांकि स्थापित ब्रैंड्स के लिए CTV अब भी ब्रैंड बिल्डिंग का एक मजबूत माध्यम बना हुआ है। उन्होंने बताया कि उनकी पिछली संस्था के अधिकांश पारंपरिक विज्ञापनदाता CTV में अपने निवेश को लगातार बढ़ा रहे हैं, खासकर SSEA क्षेत्र में।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कुछ नए और प्रोडक्ट-केंद्रित ब्रैंड जैसे The Whole Truth CTV या टीवी की बजाय सोशल मीडिया और परफॉर्मेंस मार्केटिंग को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में विज्ञापन बजट का यह हिस्सा शायद CTV की ओर न आए।
CTV को प्रीमियम अटेंशन प्लेटफॉर्म के रूप में समझने की जरूरत
राजीव राजगोपाल ने सवाल उठाया कि मार्केटर्स को CTV के बारे में सबसे जरूरी क्या समझना चाहिए।
इस पर रिद्धि पिमपुटकर ने कहा कि सबसे बड़ा बदलाव सोच में आना चाहिए। उन्होंने कहा, "CTV सिर्फ एक और वीडियो प्लेसमेंट नहीं है, बल्कि यह एक प्रीमियम अटेंशन एनवायरनमेंट है। जब कोई व्यक्ति स्मार्ट टीवी ऑन करता है, तो वह कंटेंट देखने के लिए पूरी तरह तैयार और केंद्रित होता है। बड़ी स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने वाला यह दर्शक ब्रैंड्स के लिए कहानी कहने का बेहतरीन अवसर देता है।"
उन्होंने सुझाव दिया कि मार्केटर्स को यह पूछने के बजाय कि CTV मीडिया मिक्स में कैसे फिट होता है, यह सोचना चाहिए कि CTV पूरे मीडिया मिक्स की प्रभावशीलता को कैसे बढ़ा सकता है।
गौरव रामदेव ने भी इसी सोच का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि Visa अब पारंपरिक जागरूकता (Awareness) से आगे बढ़कर मिड-फनल मेट्रिक्स पर फोकस कर रहा है। उन्होंने कहा, "हम उपभोक्ताओं के साथ भरोसा बनाने की प्रक्रिया को बड़े पैमाने और सटीकता के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं।"
रामदेव के अनुसार CTV तीन बड़े फायदे देता है- प्रीमियम घरों तक पहुंच, बेहतर देखने का अनुभव और अधिक प्रभावी फॉर्मेट्स के जरिए भरोसा बनाने की क्षमता।
सिर्फ रीच नहीं, कैटेगरी के हिसाब से अलग भूमिका
ऑटोमोटिव आफ्टरमार्केट जैसी कैटेगरी के संदर्भ में चर्चा करते हुए राजगोपाल ने पूछा कि क्या CTV खरीदारी के फैसलों को प्रभावित कर रहा है।
इस पर कौशिक वेदुला ने कहा कि नतीजों की शुरुआत उपभोक्ता की जरूरतों को समझने से होती है। उन्होंने कहा, "अगर हमारा संदेश उपभोक्ता की जरूरतों से जुड़ा होगा तो कंसिडरेशन बढ़ेगा, लेकिन सामान्य और गैर-प्रासंगिक कम्युनिकेशन से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।"
उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया को अलग-अलग हिस्सों में देखकर मूल्यांकन करने का दौर खत्म हो जाना चाहिए। उनके मुताबिक, "डिजिटल हमें टार्गेटिंग देता है, जबकि CTV हमें अटेंशन देता है। असली सवाल यह है कि क्या हम उस अटेंशन को हासिल करने के लिए पर्याप्त अच्छा और क्रिएटिव कंटेंट बना रहे हैं?"
पंकज राय ने भी इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि CTV की ताकत सिर्फ टार्गेटिंग तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह है कि विज्ञापन देखने के बाद उपभोक्ता क्या करता है—क्या वह वेबसाइट पर जाता है, ब्रोशर डाउनलोड करता है, टेस्ट ड्राइव बुक करता है या किसी सेवा के बारे में पूछताछ करता है?
उनके अनुसार CTV की असली गहराई इन्हीं वास्तविक बिजनेस परिणामों में दिखाई देती है।
कौन से मेट्रिक्स सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं?
विज्ञापन जगत में अब केवल यह नहीं देखा जाता कि विज्ञापन कितनी बार दिखा (Impressions) या एक क्लिक की कीमत कितनी रही (CPC), बल्कि यह देखा जाता है कि उससे कारोबार को कितना फायदा हुआ।
राजीव राजगोपाल ने कहा कि किसी भी कंपनी के बोर्डरूम में मार्केटिंग की सफलता को सिर्फ "इम्प्रेशन" (कितनी बार विज्ञापन दिखा) या "CPC" (प्रति क्लिक लागत) से नहीं मापा जाता। वहां यह देखा जाता है कि विज्ञापन से बिजनेस को क्या फायदा हुआ। यानी क्या बिक्री बढ़ी, नए ग्राहक आए या ब्रैंड की स्थिति मजबूत हुई। उनका कहना है कि CTV को भी सिर्फ विज्ञापन दिखाने वाले प्लेटफॉर्म के बजाय ऐसा माध्यम बनना होगा जो सीधे बिजनेस परिणाम दे सके।
जब पूछा गया कि CTV पर कौन-से मेट्रिक्स सबसे महत्वपूर्ण हैं, तो पंकज राय ने तीन चीजों पर जोर दिया। पहली है "Unique Household Reach" यानी विज्ञापन ज्यादा से ज्यादा अलग-अलग घरों तक पहुंचे, न कि एक ही परिवार को बार-बार दिखाया जाए। इससे विज्ञापन का दायरा बढ़ता है और नए दर्शकों तक पहुंच बनती है। दूसरा मेट्रिक "Quality Engagement" है। इसका मतलब सिर्फ विज्ञापन दिख जाना नहीं, बल्कि दर्शक वास्तव में उसे ध्यान से देख रहा है या नहीं। अगर टीवी चल रहा है लेकिन व्यक्ति मोबाइल में व्यस्त है, तो वह प्रभावी एंगेजमेंट नहीं माना जाएगा। विज्ञापन का असर तभी होगा जब दर्शक कंटेंट और संदेश में रुचि ले। तीसरा मेट्रिक "Measurable Impact" है। यानी विज्ञापन देखने के बाद दर्शक ने कोई कार्रवाई की या नहीं। उदाहरण के लिए वेबसाइट पर गया, QR कोड स्कैन किया, ऐप डाउनलोड किया या किसी प्रोडक्ट के बारे में जानकारी ली। इससे पता चलता है कि विज्ञापन ने वास्तविक परिणाम दिए या नहीं। इसके बाद चर्चा फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस सेक्टर पर पहुंची। राजगोपाल ने कहा कि इस सेक्टर की कंपनियों पर हमेशा दबाव रहता है कि वे अपने मार्केटिंग खर्च को सही साबित करें, क्योंकि यहां भरोसा और पारदर्शिता बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए उन्होंने पूछा कि इस क्षेत्र में कौन-से मेट्रिक्स सबसे ज्यादा मायने रखते हैं।
इस पर शेखर सौरभ ने कहा कि इंश्योरेंस इंडस्ट्री में लोग अक्सर किसी ब्रैंड का नाम तो जानते हैं, लेकिन उसके उत्पादों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखते। उदाहरण के लिए लोग Tata AIG का नाम पहचान सकते हैं, लेकिन यह नहीं जानते कि कंपनी हेल्थ इंश्योरेंस भी देती है। इसी तरह कई लोगों को अपनी गाड़ी का इंश्योरेंस किस कंपनी से है, यह भी याद नहीं रहता। यानी सिर्फ ब्रैंड की पहचान होना काफी नहीं है, लोगों को उत्पादों की जानकारी भी होनी चाहिए।
इसी वजह से शेखर सौरभ के लिए सबसे महत्वपूर्ण मेट्रिक सही घरों तक पहुंच (Reach) है। उनका मानना है कि विज्ञापन सही ऑडियंस तक पहुंचे और एक तय संख्या में दिखाई दे, ठीक वैसे ही जैसे पारंपरिक टीवी विज्ञापनों में किया जाता है। उन्होंने बताया कि Tata AIG अपने मार्केटिंग बजट का लगभग 50% CTV पर खर्च करता है क्योंकि यह उन लोगों तक पहुंचता है जो पारंपरिक केबल या डीटीएच टीवी कम देखते हैं या छोड़ चुके हैं। उन्होंने इंडस्ट्री के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत में लगभग 32 करोड़ घर हैं, जिनमें से करीब 24 करोड़ घरों में टीवी मौजूद है। इनमें लगभग 5 से 6 करोड़ घर ऐसे हैं जो पारंपरिक टीवी बहुत कम देखते हैं या पूरी तरह छोड़ चुके हैं। यही वर्ग CTV का मुख्य दर्शक है। इसलिए CTV ब्रैंड्स को ऐसे दर्शकों तक पहुंचने का मौका देता है, जिन तक सामान्य टीवी से पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
अंत में सौरभ ने कहा कि CTV पर Reach, View-through Rate (विज्ञापन को पूरा देखने की दर) और Engagement जैसे बुनियादी मेट्रिक्स को अच्छी तरह ट्रैक किया जा सकता है। इसलिए उनके अनुसार CTV सिर्फ एक नया विज्ञापन माध्यम नहीं है, बल्कि ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां विज्ञापनदाता यह समझ सकते हैं कि उनके विज्ञापन को कितने लोगों ने देखा, कितना देखा और उससे कितनी रुचि पैदा हुई।
भविष्य: इम्प्रेशन से आगे, परिणामों की ओर
रिद्धि पिमपुटकर ने भविष्य की मार्केटिंग दिशा की बात की। उनका कहना है कि आने वाले समय में मार्केटर्स सिर्फ यह नहीं देखेंगे कि विज्ञापन कितने लोगों ने देखा, बल्कि यह देखेंगे कि उससे वास्तविक बिजनेस में कितना फर्क पड़ा। वह "Incrementality" पर जोर देती हैं, जिसका मतलब है कि विज्ञापन से कितना अतिरिक्त फायदा या नया परिणाम मिला, जो बिना विज्ञापन के शायद नहीं मिलता। रिद्धि ने कहा कि Attention (ध्यान) और Engagement (जुड़ाव) अभी भी महत्वपूर्ण हैं, जो ये बताते हैं कि मीडिया की गुणवत्ता कैसी है। लेकिन किसी CMO का अंतिम लक्ष्य सिर्फ लोगों का ध्यान खींचना नहीं होता। कंपनी पैसा इसलिए खर्च करती है ताकि बिक्री बढ़े, ग्राहक जुड़ें या ब्रैंड को व्यावसायिक लाभ मिले। इसलिए असली महत्व नतीजों का है, सिर्फ ध्यान आकर्षित करने का नहीं।
रिद्धि ने कहा कि जैसे-जैसे मीजरमेंट टेक्नोलॉजी बेहतर होगी, मार्केटर्स पहले "Exposure" यानी विज्ञापन दिखने, फिर "Attention" यानी ध्यान मिलने और अंत में "Business Impact" यानी वास्तविक व्यापारिक परिणामों पर फोकस करेंगे। उनके मुताबिक CTV ऐसा माध्यम है जो इन तीनों चरणों को जोड़ने की क्षमता रखता है।
इसके बाद राजीव राजगोपाल ने एक पुराने मार्केटिंग विवाद को उठाया और पूछा कि क्या CTV ने ब्रैंड अवेयरनेस (Top Funnel) और ग्राहक की वास्तविक भागीदारी या एक्शन (Bottom Funnel) के बीच की दूरी को कम करने में मदद की है? आसान भाषा में कहें तो क्या CTV सिर्फ ब्रैंड पहचान बनाने तक सीमित है या यह लोगों को खरीदारी और कार्रवाई के लिए भी प्रेरित कर सकता है?
इस सवाल पर गौरव रामदेव ने कहा कि यह विभाजन काफी हद तक कृत्रिम है। उनका मानना है कि ब्रैंड मार्केटिंग और परफॉर्मेंस मार्केटिंग को अलग-अलग देखना मार्केटर्स की बनाई हुई सोच है। वास्तव में दोनों का अंतिम उद्देश्य एक ही है- बिक्री बढ़ाना और बिजनेस को आगे ले जाना।
गौरव रामदेव आगे समझाते हैं कि पहले से ही ब्रैंड मेट्रिक्स जैसे Brand Preference या Top-of-Mind Recall का मकसद भी अंततः बिजनेस प्रदर्शन को बेहतर बनाना था। जब कोई ग्राहक किसी ब्रैंड को याद रखता है या उसे पसंद करता है, तो भविष्य में उसके उत्पाद खरीदने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए ब्रैंडिंग और परफॉर्मेंस दोनों एक ही यात्रा के अलग-अलग पड़ाव हैं।
CTV की भूमिका को समझाते हुए गौरव रामदेव कहते हैं कि इसकी सबसे बड़ी ताकत "Memorability" यानी यादगार प्रभाव पैदा करना है। कई बार ग्राहक विज्ञापन देखकर तुरंत कोई कार्रवाई नहीं करता, लेकिन बाद में जब उसे जरूरत पड़ती है तो वही विज्ञापन उसके दिमाग में आता है और वह ब्रैंड को खोजता है। इसलिए सिर्फ अलग-अलग मेट्रिक्स देखने के बजाय यह समझना जरूरी है कि विज्ञापन भविष्य में ग्राहक के व्यवहार को कितना प्रभावित कर सकता है। इसी सोच के तहत रामदेव "Actionability" शब्द का इस्तेमाल करते हैं। इसका मतलब है कि विज्ञापन ऐसा होना चाहिए जो या तो ग्राहक के मन में खरीदने की इच्छा पैदा करे या पहले से मौजूद इच्छा को मजबूत करे। यानी विज्ञापन का काम सिर्फ दिखाई देना नहीं, बल्कि भविष्य की कार्रवाई के लिए जमीन तैयार करना भी है।
इसके बाद राजगोपाल ने Castrol India के कौशिक वेदुला से पूछा कि उनकी कंपनी CTV पर प्रीमियम ग्राहकों और बड़े जनसमूह दोनों को टार्गेट करती है। ऐसे में वे इन दोनों तरह के अभियानों को कैसे अलग-अलग देखते हैं? इस पर वेदुला ने कहा कि बिजनेस परिणाम महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वे "Lagging Indicators" होते हैं। इसका मतलब है कि परिणाम बाद में दिखाई देते हैं। बिक्री या लीड बढ़ना अंतिम नतीजा है, लेकिन उससे पहले कुछ संकेत मिलते हैं, जैसे लोगों का ध्यान, रुचि और एंगेजमेंट। इसलिए सिर्फ अंतिम परिणाम देखने से पूरी तस्वीर नहीं मिलती।
वेदुला ने आगे कहा कि CTV को इंडस्ट्री में एक ऐसे माध्यम के रूप में पेश किया गया था जो ज्यादा और बेहतर Attention देता है, लेकिन इसकी कीमत भी अधिक होती है। अगर उस Attention को सही तरीके से मापा ही नहीं जा सके, तो मार्केटर्स के मन में हमेशा यह सवाल बना रहेगा कि क्या उन्हें अपने निवेश का पूरा मूल्य मिल रहा है।
ब्रैंड बनाम परफॉर्मेंस की बहस पर कौशिक वेदुला भी रामदेव से सहमत नजर आते हैं। उनका कहना है कि आखिरकार हर मार्केटिंग गतिविधि का उद्देश्य प्रदर्शन यानी Performance ही होता है, चाहे उसका असर तुरंत दिखे या लंबे समय बाद। इसलिए CMOs को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि उनका संदेश लोगों के दिमाग में लंबे समय तक बना रहे।
कहानी कहने की ताकत ही असली अंतर
आज के समय में विज्ञापन फॉर्मेट छोटे होते जा रहे हैं और लोगों का ध्यान आकर्षित करना पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है। ऐसे माहौल में ब्रैंड्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे अपनी कहानी (Storytelling) को प्रभावी ढंग से कैसे पेश करें। यानी कम समय में लोगों तक सही संदेश पहुंचाना अब पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
कौशिक वेदुला ने कहा कि ब्रैंड्स हमेशा यह दावा करते हैं कि वे उपभोक्ताओं की जरूरतों और उनकी आवाज़ को समझते हैं। लेकिन असली चुनौती यह है कि वे उपभोक्ता को कितनी स्पष्ट, सरल और प्रभावी भाषा में बता पाते हैं कि उनका प्रोडक्ट या सेवा उसके लिए क्यों प्रासंगिक है। अगर कोई ब्रैंड यह बात समझाने में सफल नहीं होता, तो यह समस्या उपभोक्ता की नहीं बल्कि मार्केटिंग टीम और ब्रैंड की है।
इसके बाद चर्चा के समापन की ओर बढ़ते हुए राजीव राजगोपाल, पंकज राय से सवाल पूछते हैं। चूंकि राय क्रिएटिव इनोवेशन और विज्ञापन की रचनात्मकता पर ज्यादा काम करते हैं, इसलिए उनसे पूछा गया कि प्रभावी कम्युनिकेशन की इस जरूरत को पूरा करने में क्रिएटिविटी की क्या भूमिका है।
इस पर पंकज राय कहते हैं कि क्रिएटिविटी कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे रणनीति बनने के बाद आखिर में जोड़ दिया जाए। उनके अनुसार क्रिएटिविटी और रणनीति एक-दूसरे से अलग नहीं हैं, बल्कि दोनों साथ-साथ चलते हैं। उनका मानना है कि किसी भी ब्रैंड की सबसे बड़ी ताकत उसका क्रिएटिव आइडिया होता है और पूरी मार्केटिंग रणनीति उसी के आसपास तैयार की जानी चाहिए। पंकज राय आगे कहते हैं कि अच्छी क्रिएटिविटी सिर्फ लोगों का ध्यान नहीं खींचती, बल्कि उनके भीतर रुचि (Engagement) और इच्छा (Intent) भी पैदा करती है। यही रुचि आगे चलकर ग्राहक को ब्रैंड पर विचार करने और खरीदारी के फैसले तक ले जाती है। यानी क्रिएटिविटी सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि बिजनेस परिणामों की नींव भी रखती है।
अंत में पंकज राय एक महत्वपूर्ण बात कहते हैं कि मीडिया का काम सिर्फ ब्रैंड को दर्शकों के ड्रॉइंग रूम या स्क्रीन तक पहुंचाना है। लेकिन एक बार जब विज्ञापन दर्शक के सामने पहुंच जाए, तो उसका ध्यान बनाए रखना और उसे बीच में विज्ञापन छोड़ने से रोकना क्रिएटिविटी का काम है। दूसरे शब्दों में, मीडिया आपको मौका देता है, लेकिन उस मौके को सफलता में बदलने का काम बेहतरीन क्रिएटिव कंटेंट करता है।
देश के प्रतिष्ठित हिंदी न्यूज चैनल 'न्यूज18 इंडिया' (News18 India) ने अपने नए फ्लैगशिप प्राइम-टाइम शो ‘देश की पाठशाला’ के लॉन्च की घोषणा की है।
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Samachar4media Bureau
News18 India का बड़ा कदम: सुशांत सिन्हा के साथ शुरू होगा ‘देश की पाठशाला’, खबरों को समझाने का नया अंदाज
देश के प्रतिष्ठित हिंदी न्यूज चैनल 'न्यूज18 इंडिया' (News18 India) ने अपने नए फ्लैगशिप प्राइम-टाइम शो ‘देश की पाठशाला’ के लॉन्च की घोषणा की है। जाने-माने टीवी न्यूज एंकर व वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सिन्हा इस कार्यक्रम को होस्ट करेंगे। यह शो चैनल के प्राइम-टाइम लाइनअप को और मजबूत करेगा और दर्शकों के सामने समाचार प्रस्तुत करने का एक बिल्कुल नया एक्सप्लेनर फॉर्मेट लेकर आएगा। इसका उद्देश्य सिर्फ खबरें बताना नहीं, बल्कि उनके पीछे का संदर्भ, कारण और प्रभाव भी समझाना है।
तेज रफ्तार न्यूज साइकिल और सूचनाओं की भरमार वाले इस दौर में ‘देश की पाठशाला’ इस सोच पर आधारित है कि खबरों को केवल रिपोर्ट करना ही पर्याप्त नहीं है, उन्हें समझना भी उतना ही जरूरी है। इसी विचार को शो की टैगलाइन में समेटा गया है- “खबर सिर्फ बताने के लिए नहीं, समझाने के लिए भी होती है।”
यह कार्यक्रम विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करेगा। दुनिया के समृद्ध इतिहास और जटिल भूगोल से लेकर बदलते राजनीतिक परिदृश्य, नई वैज्ञानिक खोजों, सरकारी नीतियों और महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों तक, शो का उद्देश्य दर्शकों को हर विषय की पूरी तस्वीर दिखाना है।
अपने नाम के अनुरूप ‘देश की पाठशाला’ जटिल और बहुस्तरीय विषयों को आसान भाषा में समझाएगा। इसमें मैप्स, टाइमलाइन, डेटा ग्राफिक्स और ग्राउंड रिपोर्ट्स का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि छात्र से लेकर नीति-निर्माता तक हर दर्शक विषय को स्पष्ट रूप से समझ सके। कार्यक्रम लगातार तीन अहम सवालों के जवाब देने की कोशिश करेगा- यह खबर क्यों हो रही है, इसका आप पर क्या असर पड़ेगा और इतिहास हमें इसके बारे में क्या बताता है?
News18 India की मैनेजिंग एडिटर Jyoti Kamal ने कहा, “News18 India में हमारा हमेशा से मानना रहा है कि दर्शक सिर्फ हेडलाइंस से ज्यादा के हकदार हैं। ‘देश की पाठशाला’ ऐसी पत्रकारिता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है जो जानकारी देने के साथ-साथ शिक्षित और सशक्त भी बनाती है। मीडिया के शोर-शराबे के बीच हम ऐसा शो तैयार कर रहे हैं जो गहराई और गंभीरता का प्रतिनिधित्व करेगा। हमें विश्वास है कि सुशांत के नेतृत्व में यह कार्यक्रम न केवल हमारे प्राइम-टाइम ऑफरिंग को मजबूत करेगा, बल्कि हिंदी न्यूज टेलीविजन में एक्सप्लेनर पत्रकारिता का नया मानक भी स्थापित करेगा।”
अपने नए शो के बारे में बात करते हुए Sushant Sinha ने कहा, “हम ऐसे समय में जी रहे हैं जब जानकारी तो बहुत है, लेकिन समझ कम है। ‘देश की पाठशाला’ इसी अंतर को भरने की कोशिश है। हमारा उद्देश्य दर्शकों को सिर्फ ब्रेकिंग न्यूज तक सीमित न रखकर, उस खबर के पीछे की पूरी कहानी तक ले जाना है। हर एपिसोड डेटा, इतिहास और विश्लेषण की एक यात्रा होगा, जिसे हर वर्ग के दर्शकों के लिए आसान और रोचक बनाया जाएगा। मैं चाहता हूं कि किसी छोटे शहर का छात्र भी उतनी ही जानकारी हासिल कर सके, जितनी किसी नीति-निर्माण कक्ष में बैठा व्यक्ति करता है। यही इस शो का वादा है।”
‘देश की पाठशाला’ का प्रसारण 16 जून से हर दिन रात 8:50 बजे किया जाएगा। दर्शक इसे टीवी, CTV और YouTube पर देख सकेंगे। यह शो हिंदी न्यूज टेलीविजन में एक्सप्लेनर पत्रकारिता को नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
‘जियोस्टार’ (JioStar) ने ICC Women’s T20 World Cup 2026 के लिए अपने स्पॉन्सर्स की घोषणा की है। Google Gemini, Herbalife, Havells और Parle Products समेत कई बड़े ब्रांड्स टूर्नामेंट से जुड़े हैं।
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ICC Women’s T20 World Cup 2026 के आधिकारिक ब्रॉडकास्टर (Broadcaster) और स्ट्रीमिंग पार्टनर (Streaming Partner) ‘जियोस्टार’ (JioStar) ने गुरुवार को टूर्नामेंट के लिए अपनी स्पॉन्सर लाइन-अप (Sponsor Line-up) की घोषणा की। 'गूगल जेमिनी' (Google Gemini), 'हर्बालाइफ' (Herbalife), 'हैवेल्स' (Havells) और 'पार्ले प्रोडक्ट्स' (Parle Products) को Co-Presenting Partners बनाया गया है।
वहीं 'गूगल पे' (Google Pay), 'राडो' (Rado) और 'कैंपा एनर्जी' (Campa Energy) एसोसिएट पार्टनर्स (Associate Partners) के रूप में जुड़े हैं। इसके अलावा 'एडिडास' (adidas) को प्री और पोस्ट लाइव शोज़ (Pre and Post Live Shows) का टाइटल पार्टनर (Title Partner) बनाया गया है।
‘जियोस्टार’ (JioStar) के अनुसार, इस बार महिला क्रिकेट में उसकी तरफ से तीन नए तरह के ब्रांड्स पहली बार जुड़े हैं। 'एडिडास' (adidas) महिला क्रिकेट से जुड़ने वाला पहला वैश्विक स्पोर्ट्सवियर ब्रांड (Global Sportswear Brand) बना है। वहीं 'राडो' (Rado) के रूप में पहली बार कोई लग्जरी ब्रांड (Luxury Brand) महिला क्रिकेट के लाइव प्रसारण से जुड़ा है। 'कैंपा एनर्जी' (Campa Energy) ने भी महिला क्रिकेट को अपनी पहुंच और पहचान बढ़ाने के मंच के रूप में चुना है।
'ICC Women’s T20 World Cup 2026' की शुरुआत 12 जून यानी आज से होगी। उद्घाटन मुकाबले में मेजबान इंग्लैंड (England) का सामना श्रीलंका (Sri Lanka) से होगा। भारतीय टीम 14 जून को पाकिस्तान (Pakistan) के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी। टूर्नामेंट का सीधा प्रसारण 'स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क' (Star Sports Network) पर किया जाएगा, जबकि इसकी लाइव स्ट्रीमिंग (Live Streaming) 'जियोहॉटस्टार' (JioHotstar) पर उपलब्ध होगी।
तमिलनाडु के सरकारी केबल टेलीविजन नेटवर्क अरसु केबल टीवी पर मंगलवार को तीन तमिल न्यूज चैनल- पोलिमर न्यूज, न्यूज तमिल 24x7 और तमिल जनम का प्रसारण बंद हो गया।
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तमिलनाडु के सरकारी केबल टेलीविजन नेटवर्क अरसु केबल टीवी पर मंगलवार को तीन तमिल न्यूज चैनल- पोलिमर न्यूज, न्यूज तमिल 24x7 और तमिल जनम का प्रसारण बंद हो गया।
विपक्ष का आरोप है कि इन चैनलों को सरकार ने निशाना बनाया है, क्योंकि वे लगातार कानून-व्यवस्था, सत्तारूढ़ दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं की कथित ज्यादतियों, महिलाओं की सुरक्षा और राज्य में बढ़ते नशे के खतरे जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे थे।
AIADMK प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने सरकार पर असहमति की आवाज को दबाने और प्रेस की स्वतंत्रता का गला घोंटने का आरोप लगाया है।
मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए एक पोस्ट में एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने कहा कि यह कदम उस घटना के बाद उठाया गया है, जब एक अन्य न्यूज चैनल को भी ऑफ एयर कर दिया गया था। उस चैनल ने मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के दौरान पत्रकारों से मुलाकात नहीं करने के फैसले पर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दलों और मीडिया संगठनों के व्यापक विरोध के बाद ही उस चैनल का प्रसारण दोबारा बहाल किया गया था।
इस बीच, चेन्नई प्रेस क्लब ने भी न्यूज चैनलों के कथित ब्लैकआउट की कड़ी निंदा की है। क्लब ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल चैनलों का प्रसारण बहाल करने की मांग की है।
हालांकि, तमिलनाडु सरकार की फैक्ट-चेक इकाई TN Fact Check ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। इकाई ने X पर जारी अपने बयान में कहा कि चैनलों को हटाए जाने की खबरें गलत हैं।
फैक्ट-चेक इकाई के अनुसार, तीनों चैनल केवल कुछ सेट-टॉप बॉक्स पर तकनीकी कारणों से अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं हैं। प्रभावित चैनलों को इस बारे में जानकारी दे दी गई है और समस्या को दूर करने का काम किया जा रहा है।
इकाई ने बताया कि अनुबंधित सेवा प्रदाता मंतरा इंडस्ट्रीज लिमिटेड सुधारात्मक कदम उठा रही है और सामान्य प्रसारण को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर प्रयास किए जा रहे हैं।
TN Fact Check ने उन आरोपों को भी खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि चैनलों का प्रसारण सेट-टॉप बॉक्स कंपनी को बकाया भुगतान न किए जाने की वजह से बाधित हुआ है।
அரசு கேபிள் ஒளிபரப்பிலிருந்து 3 செய்தி சேனல்கள் நீக்கம் என பரவும் தவறான தகவல்
— TN Fact Check (@tn_factcheck) June 9, 2026
பரவும் செய்தி
தமிழக அரசு கேபிள் ஒளிபரப்பிலிருந்து பாலிமர், நியூஸ் தமிழ் 24X7 மற்றும் தமிழ் ஜனம் ஆகிய செய்தி சேனல்கள் நீக்கப்பட்டுள்ளதாக சமூக வலைதளங்களில் தவறான தகவல் பரவி வருகிறது.
உண்மை என்ன ?
இது… pic.twitter.com/RbEZYLrvGO
e4m Connected TV Conference के एक खास फायरसाइड चैट में Publicis Media South Asia के सीईओ लालतेंदु दास और 'एक्सचेंज4मीडिया' के को-फाउंडर नवल आहूजा के बीच बातचीत होगी।
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Samachar4media Bureau
e4m Connected TV Conference का चौथा संस्करण 11 जून को मुंबई में आयोजित होने जा रहा है। इस सम्मेलन में विज्ञापन और मार्केटिंग जगत के कई प्रमुख इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स, मार्केटर्स और बिजनेस लीडर्स एक मंच पर जुटेंगे। इस बार के e4m Connected TV Conference में एक खास फायरसाइड चैट होगी, जिसमें Publicis Media South Asia के सीईओ लालतेंदु दास और 'एक्सचेंज4मीडिया' के को-फाउंडर नवल आहूजा के बीच बातचीत होगी।
यह चर्चा ‘AI, Data & CTV: Building the Next Generation of Media Growth’ विषय पर केंद्रित होगी। Connected TV (CTV) की बढ़ती लोकप्रियता के बीच यह सत्र इस बात पर प्रकाश डालेगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा आधारित रणनीतियां किस तरह मीडिया इंडस्ट्री को बदल रही हैं। इस बातचीत से यह समझने का अवसर मिलेगा कि तकनीक की बदलती भूमिका किस तरह बेहतर व्यावसायिक परिणाम हासिल करने में मदद कर रही है।
e4m Connected TV Conference में CTV के अगले दौर पर होगी गहन चर्चा
लालतेंदु दास इस सत्र में अपने अनुभव और महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करेंगे। वह बताएंगे कि ब्रांड्स किस तरह AI और डेटा का इस्तेमाल करके Connected TV प्लेटफॉर्म्स पर उपभोक्ताओं को अधिक व्यक्तिगत और प्रभावी अनुभव दे सकते हैं।
इस चर्चा में यह भी सामने आएगा कि AI, डेटा और Connected TV का मेल किस तरह इनोवेशन, ऑडियंस एंगेजमेंट और विज्ञापन की प्रभावशीलता के नए अवसर पैदा कर रहा है। साथ ही यह सत्र इंडस्ट्री के सामने उभर रहे नए अवसरों, दर्शकों के बदलते व्यवहार, भविष्य की चुनौतियों और संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा करेगा।
इंडस्ट्री जगत के सीनियर लीडर्स, मार्केटर्स, मीडिया प्रोफेशनल्स और एक्सपर्ट्स की मौजूदगी में होने वाली यह फायरसाइड चैट मीडिया ग्रोथ के भविष्य को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित होगी। इसमें शामिल होने वाले लोगों को Connected TV, AI और डेटा आधारित मीडिया रणनीतियों के भविष्य से जुड़ी कई अहम जानकारियां और उपयोगी इनसाइट्स मिलने की उम्मीद है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का मानना है कि जब न्यूज ब्रॉडकास्टर्स को रेटिंग डेटा ही उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, तो उनसे उस सेवा के लिए शुल्क लेना उचित नहीं होगा।
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न्यूज चैनलों की TRP पर जारी रोक के बीच केंद्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) को निर्देश दिया है कि जब तक न्यूज चैनलों की टेलीविजन रेटिंग (TRP) जारी नहीं की जा रही है, तब तक उनसे ऑडियंस मेजरमेंट सर्विस के लिए कोई सब्सक्रिप्शन शुल्क न लिया जाए।
मामले से जुड़े इंडस्ट्री जगत के अधिकारियों के अनुसार, मंत्रालय का मानना है कि जब न्यूज ब्रॉडकास्टर्स को रेटिंग डेटा ही उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, तो उनसे उस सेवा के लिए शुल्क लेना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर BARC को निर्देश दिया गया है कि TRP सस्पेंशन या तथाकथित ‘डार्क पीरियड’ के दौरान न्यूज चैनलों से फीस न वसूली जाए।
हालांकि, इस फैसले के बाद BARC की स्वायत्तता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। इंडस्ट्री से जुड़े कई विशेषज्ञों का कहना है कि BARC एक इंडस्ट्री-नेतृत्व वाली संस्था है और सदस्यता शुल्क जैसे मामलों में निर्णय आमतौर पर संस्था के भीतर ही लिए जाते रहे हैं। ऐसे में मंत्रालय का सीधे हस्तक्षेप करना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। खबर लिखे जाने तक BARC की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी।
TRP बंदी से पहले ही जूझ रही है इंडस्ट्री
टीवी न्यूज इंडस्ट्री लंबे समय से साप्ताहिक TRP डेटा के बिना काम कर रही है। TRP को विज्ञापन सौदों, मीडिया प्लानिंग और कार्यक्रमों की स्ट्रैटेजी तय करने का प्रमुख आधार माना जाता है। ऐसे में रेटिंग्स के अभाव ने न्यूज चैनलों और विज्ञापनदाताओं दोनों के सामने चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
BARC अपनी आय का एक हिस्सा ब्रॉडकास्टर्स और अन्य हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) से मिलने वाले सब्सक्रिप्शन शुल्क से प्राप्त करता है। TRP डेटा बंद होने के बाद इंडस्ट्री में यह बहस चल रही थी कि जब सेवा उपलब्ध नहीं है तो क्या चैनलों को इसके लिए भुगतान करना चाहिए। मंत्रालय के ताजा निर्देश के बाद फिलहाल यह विवाद समाप्त होता नजर आ रहा है।
चार सप्ताह और बढ़ाई गई TRP सस्पेंशन अवधि
यह निर्देश ऐसे समय आया है जब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने न्यूज चैनलों की टीवी रेटिंग्स पर लगी रोक को चार सप्ताह और बढ़ा दिया है। BARC ने हाल ही में अपने सब्सक्राइबर्स को सूचित किया था कि मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार न्यूज चैनलों की ऑडियंस रेटिंग्स को फिलहाल और जारी नहीं किया जाएगा।
इस साल मार्च में मंत्रालय ने पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़ी टीवी न्यूज कवरेज में कथित सनसनीखेज और अटकलों पर आधारित रिपोर्टिंग की चिंताओं का हवाला देते हुए न्यूज रेटिंग्स पर रोक लगाई थी। सरकार का तर्क था कि TRP आधारित प्रतिस्पर्धा गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग को बढ़ावा दे सकती है। इसके बाद इस रोक को कई बार बढ़ाया जा चुका है।
नई TRP नीति पर भी जारी है विवाद
TRP सस्पेंशन के समानांतर सरकार ने हाल ही में टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी 2026 लागू की है, जिसने 2014 के पुराने दिशानिर्देशों की जगह ली है। नई नीति में कई संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं, जिनका उद्देश्य दर्शक मापन प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना बताया गया है।
नई नीति का सबसे चर्चित प्रावधान ‘लैंडिंग पेज’ व्यूअरशिप को अंतिम रेटिंग गणना से बाहर करना है। लैंडिंग पेज वह चैनल होता है जो टीवी ऑन करते ही डिफॉल्ट रूप से दिखाई देता है। कई न्यूज चैनल लंबे समय से इस व्यवस्था को रेटिंग्स को कृत्रिम रूप से बढ़ाने वाला मानते रहे हैं।
हालांकि, इस प्रावधान का केबल डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म और मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स (MSOs) ने विरोध किया। मामला बाद में केरल हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने मई में इस प्रावधान पर अंतरिम रोक लगा दी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि मंत्रालय ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे जाकर यह फैसला लिया है।
विज्ञापन बाजार पर भी असर
इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि TRP डेटा की अनुपलब्धता से विज्ञापनदाताओं के लिए विभिन्न न्यूज चैनलों के बीच निवेश का आकलन करना कठिन हो गया है। TRP विज्ञापन दरें तय करने, प्रायोजन समझौतों और कंटेंट रणनीति बनाने का प्रमुख आधार होती है।
फिलहाल कई चैनल पुराने प्रदर्शन, ब्रांड वैल्यू और विज्ञापनदाताओं के साथ सीधे संबंधों के आधार पर कारोबार चला रहे हैं। हालांकि, लंबे समय तक TRP डेटा उपलब्ध न रहने से टीवी विज्ञापन बाजार में पारदर्शिता प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
मंत्रालय के ताजा निर्देश से न्यूज चैनलों को आर्थिक राहत जरूर मिली है, लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं है कि नियमित TRP सेवाएं कब से दोबारा शुरू होंगी। ऐसे में भारतीय टीवी न्यूज इंडस्ट्री अब भी अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है।