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NTV के तीन पत्रकारों को हिरासत में लेने से मचा राजनीतिक बवाल, विपक्ष ने साधा निशाना
तेलंगाना में कांग्रेस सरकार के खिलाफ विपक्ष और पत्रकार संगठनों का गुस्सा उस वक्त भड़क गया, जब 13 जनवरी की देर रात तेलंगाना पुलिस ने तेलुगु न्यूज चैनल NTV से जुड़े तीन पत्रकारों को हिरासत में ले लिया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
तेलंगाना में कांग्रेस सरकार के खिलाफ विपक्ष और पत्रकार संगठनों का गुस्सा उस वक्त भड़क गया, जब 13 जनवरी की देर रात तेलंगाना पुलिस ने तेलुगु न्यूज चैनल 'एनटीवी' (NTV) से जुड़े तीन पत्रकारों को हिरासत में ले लिया। इन पत्रकारों पर आरोप है कि उन्होंने एक महिला आईएएस अधिकारी और एक राज्य मंत्री से जुड़ी कथित तौर पर गलत और विवादित खबर प्रसारित की थी। हिरासत में लिए गए पत्रकारों में एनटीवी के इनपुट एडिटर डोंथु रमेश के अलावा रिपोर्टर परिपूर्णा चारी और सुधीर शामिल हैं। डोंथु रमेश को हैदराबाद एयरपोर्ट से पकड़ा गया जबकि बाकी दो पत्रकारों को उनके घरों से उठाया गया।
इस कार्रवाई के बाद भारत राष्ट्र समिति यानी बीआरएस के कई बड़े नेताओं और पत्रकार संगठनों ने कांग्रेस सरकार पर मीडिया की आवाज दबाने का आरोप लगाया। बीआरएस नेताओं ने कहा कि त्योहार के दिन और वह भी आधी रात को पत्रकारों को गिरफ्तार करना लोकतंत्र पर सीधा हमला है। उनका कहना है कि अगर खबर से जुड़ी कोई आपत्ति थी तो पुलिस नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुला सकती थी लेकिन सीधे गिरफ्तारी करना गलत है।
बीआरएस नेता और पूर्व मंत्री सिंगिरेड्डी निरंजन रेड्डी ने कहा कि सरकार न सिर्फ पत्रकारों बल्कि बेरोजगार युवाओं किसानों छात्रों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी डराने का काम कर रही है। बीआरएस विधायक वेमुला प्रशांत रेड्डी ने कहा कि रात में पत्रकारों को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान है।
तेलंगाना भवन में हुई प्रेस मीट में बीआरएस के अन्य नेताओं ने भी सरकार पर हमला बोला। पूर्व विधायक मेथुकु आनंद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार अपने नेताओं और मंत्रियों पर लगे आरोपों से ध्यान हटाने के लिए पत्रकारों को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं के खिलाफ शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
सीपीआई के एमएलसी नेल्लिकंती सत्यम ने भी पत्रकारों की गिरफ्तारी की निंदा की। उन्होंने कहा कि बिना नोटिस दिए आधी रात को घरों पर छापे मारना और पत्रकारों को अपराधियों की तरह गिरफ्तार करना पूरी तरह गलत है। उन्होंने सभी पत्रकारों की तुरंत रिहाई की मांग की।
इस बीच तेलंगाना स्टेट वीडियो जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ने भी इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। संगठन ने कहा कि अगर रिपोर्टिंग को लेकर कोई समस्या थी तो पुलिस को जवाब मांगना चाहिए था न कि पत्रकारों को अपराधियों की तरह गिरफ्तार करना चाहिए था। संगठन ने साफ किया कि वह गलत खबरों के खिलाफ है लेकिन अवैध गिरफ्तारी और उत्पीड़न का भी विरोध करता है।
बीआरएस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री टी हरीश राव ने भी इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने डीजीपी शिवधर रेड्डी से फोन पर बात कर पत्रकारों की रिहाई की मांग की। हरीश राव ने सवाल उठाया कि त्योहार के दिन और आधी रात को गिरफ्तारी की क्या जरूरत थी। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को आतंकियों या अपराधियों की तरह ट्रीट नहीं किया जाना चाहिए और संक्रांति के बाद नोटिस देकर पूछताछ की जा सकती थी। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया।
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामाराव यानी केटीआर ने भी कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई आपातकाल के दिनों की याद दिलाती है। केटीआर ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पत्रकारों और उनके परिवारों को डराने के लिए आधी रात को उनके घरों के दरवाजे तोड़े। उन्होंने कहा कि इस मामले में सभी धाराएं जमानती हैं फिर भी नोटिस देने के बजाय गिरफ्तारी की गई।
केटीआर ने राहुल गांधी को भी इस मुद्दे पर घेरा और कहा कि तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को कुचल रही है। उन्होंने मांग की कि पुलिस कानूनी प्रक्रिया का पालन करे और राजनीति का हिस्सा न बने।
इस मामले में तेलंगाना पुलिस ने दो मामलों की जांच के लिए आठ सदस्यीय विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन किया है जिसकी अगुवाई हैदराबाद पुलिस कमिश्नर वी सी सज्जनार कर रहे हैं। यह मामला एनटीवी के साथ-साथ टी न्यूज और कुछ अन्य चैनलों यूट्यूब चैनलों और सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी दर्ज किया गया है। शिकायत आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन की ओर से जयेश रंजन ने दी थी। शिकायत में कहा गया है कि 8 जनवरी को महिला आईएएस अधिकारी को लेकर प्रसारित खबर पूरी तरह झूठी और मनगढ़ंत थी।
दिलचस्प बात यह है कि एनटीवी प्रबंधन ने कानूनी सलाह के बाद मंगलवार शाम को माफी भी मांग ली थी जिससे लगा कि मामला शांत हो गया है लेकिन इसके बावजूद देर रात पत्रकारों की हिरासत ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। भाजपा ने भी इस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे आपातकालीन सोच करार दिया है।
फिलहाल पुलिस की ओर से गिरफ्तारी और धाराओं को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और पूरे मामले ने तेलंगाना की राजनीति में प्रेस की आजादी को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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