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अरनब गोस्वामी ने बताया रिपब्लिक की सफलता का राज

बिजनेसवर्ल्ड’ (BW Businessworld) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में अपने धमाकेदार भाषण से सबका दिल जीता

समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago

रिपब्लिक मीडिया समूह के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी ने बिजनेसवर्ल्ड’ (BW Businessworld) द्वारा आयोजित 'BW Disrupt 40 Under 40' कार्यक्रम में अपने धमाकेदार भाषण से सबका दिल जीत लिया। उन्होंने अपने विचारों को लोगों तक पहुंचाने के लिए हमेशा की तरह भारी-भरकम शब्द इस्तेमाल किये, लेकिन इस अंदाज में कि हर कोई उनका कायल हो गया। कार्यक्रम के तीसरे संस्करण में बोलने के लिए मंच पर पहुंचे अरनब ने सबसे पहले ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ अनुराग बत्रा की जमकर तारीफ की।

हालांकि, इससे पहले वो यह भी साफ करना नहीं भूले कि उन्हें असीमित समय देकर आयोजकों ने भूल की है। माइक थामते हुए चेहरे पर मुस्कान के साथ अरनब ने कहा, ‘एक बात मैं कहना चाहता हूं कि मुझे कभी भी असीमित समय और दो माइक मत दीजिये। यदि आप ऐसा करते हैं तो ये बहुत खतरनाक हो जायेगा। क्योंकि मुझमें लगातार दो घंटे बोलने की क्षमता है। जब मैं ‘टाइम्स नाउ’ में था, तब मेरा एक प्रोग्राम था ‘न्यूज ऑवर’, ये एक घंटे का प्रोग्राम था, लेकिन ये एकमात्र ऐसा प्रोग्राम बन गया था जो कभी-कभी दो घंटे 9 से 11 तक चल जाता था। यदि अब आप मुझे रिपब्लिक पर देखें तो 9 से 1 बजे तक लगातार डिबेट करता हूं। इसलिए मुझे असीमित समय देना खतरनाक है।’

अनुराग बत्रा की तारीफ करते हुए अरनब ने कहा, ‘आपके साथ यह मंच साझा करना मेरे लिए सम्मान की बात है। अनुराग जब भी मुझे अपने किसी प्रोग्राम में बुलाते हैं तो उन्हें पता होता है कि मैं उन्हें ‘न’ नहीं कह पाऊंगा और ऐसा इसलिए कि मैं अनुराग को काफी लंबे समय से देख रहा हूं। मैं जानता हूं कि इस मीडिया इंडस्ट्री में बोलने वाले कई लोग हैं, लेकिन करने वाले बेहद कम और अनुराग उन्हीं में से एक हैं जिन्होंने अपनी मेहनत से इंडस्ट्री में अपना एक अलग मुकाम बनाय है। वो एंटरप्रिन्योर हैं। मैं कहना चाहूंगा कि अनुराग इस मीडिया इंडस्ट्री में सबसे पहले एंटरप्रिन्योर हैं। जीवन में आप जो कुछ करते हैं उसमें अनुरूपता बनाये रखना जरूरी है और अनुराग बत्रा दो दशक से ज्यादा से ऐसा करते आ रहे हैं। वो कई संस्थानों में रहे और बेहतरीन काम किया। उन्होंने 25 वर्ष की उम्र में शुरुआत की, लेकिन (हंसते हुए) अभी उनकी उम्र क्या है मैं नहीं बताऊंगा। अनुराग आपके साथ मंच साझा करना मेरे लिए सम्मान की बात है।’

’मुख्य मुद्दे पर आते हुए अरनब थोड़े गंभीर हुए और कहा, ‘आज मैं एंटरप्रिन्योरशिप पर बोल रहा हूं, जैसा कि मैंने महसूस किया है, ये 40 साल से कम वालों के लिए है और मैं जो कहने जा रहा हूं वो उनके काम आएगा। मेरा पहला अनुभव है कि डिस्रप्शन (Disruption) और एंटरप्रिन्योरशिप को एक्सेल शीट पर नहीं किया जा सकता। आप कभी भी अपने व्यवसाय की योजना नहीं बना सकते। जो व्यवसाय चला रहा है उसे ये कुछ अजीब लग सकता है। यदि व्यवसाय में सबकुछ कैलकुलेशन के द्वारा किया जा सकता, यदि पेपर प्रोजेक्शन द्वारा किया जा सकता, यदि लागतों या खर्चों को संगठनात्मक संस्कृति या टीम फिलॉसफी के आधार पर प्रबंधित नहीं किया जाता, बल्कि ऑडिट टूल के आधार पर किया जाता, यदि चार्टर्ड अकाउंटेंट आपको यह बता सकते कि आपको अपना व्यवसाय कैसे चलाना है, तो हर कोई कॉस्ट सेंटर में माहिर हो सकता है। यदि व्यवसाय को एक्सेल शीट पर चलाया जा सकता है, तो हमारा देश अरबों यूनिकॉर्न का देश होता। जब मैं व्यवसाय कहता हूं, तो आप इसे एक संप्रदाय, ऑफरिंग, उत्पाद, कुटुम्ब कह सकते हैं।’

अरनब का कहना था, ‘मैंने बेस्ट अकाउंटेंट, बेस्ट ऑडिटर को संघर्ष करते देखा है। मैंने ऐसे लोगों को भी देखा है, जिन्हें नंबर की भले ही समझ न हो, लेकिन वो व्यवसाय को ज्यादा बेहतर तरह से संभालते हैं। तो मेरा पहला पॉइंट ये है कि आप एक्सेल शीट के आधार पर व्यवसाय का निर्माण नहीं कर सकते। यदि मैं अपने शुरुआती वर्षों के बारे में बात करूं तो उस समय उस समाचार चैनल को किसने सफल बनाया? क्या यह एक एक्सेल शीट थी, जिसे कोई भी बना सकता है? आप में से कई लोग मुझसे बेहतर एक्सेल शीट बना सकते हैं। वास्तव में, मुझे नहीं पता कि इसका उपयोग कैसे करना है।’

अपनी उद्यमशीलता की यात्रा के बारे में अरनब ने कहा, ‘मैंने इस देश में दो बड़े मीडिया व्यवसायों को लॉन्च किया, स्थापित किया, प्रबंधित किया और चलाया है। पहला नेटवर्क जिसकी मैंने स्थापना की थी वो था टाइम्स नेटवर्क। मुझे नहीं पता कि आप ये जानते हैं या नहीं कि हमें टाइम्स के मालिकों से इसके लिए बहुत कम पैसा मिला था। टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी शुरुआत में टाइम्स के व्यवसाय में निवेश नहीं किया था। हमने पैसा इकठ्ठा किया। हम न्यूयॉर्क गए, रॉयटर्स के पास गए, जो दुनिया की सबसे बड़ी मल्टीमीडिया न्यूज एजेंसी है और रॉयटर्स ने हमारे व्यवसाय में निवेश किया। रॉयटर्स के ऑफिस के बाहर उन कंपनियों की लाइन लगती है,  जो चाहती हैं कि रॉयटर्स उनके यहां निवेश करे, लेकिन ये मौका हमें मिला।’

इसके साथ ही अरनब का यह भी कहना था, ‘मैं रॉयटर्स के ऑफिस में क्रिस ईहान (अध्यक्ष) के साथ बैठा था, बैंकर्स भी थे। रॉयटर्स के लोगों द्वारा पूछे गए कई वित्तीय सवालों के जवाब मुझे नहीं पता थे। तब मुझे लगा कि मैं क्या कर रहा हूं। मैं ऐसे लोगों के बीच क्यों हूं, जो बस पैसे की बात करते हैं। मैं पत्रकार हूं, मुझे पैसे की भाषा नहीं आती, मुझे लगा कि मैं कभी रॉयटर्स या कहीं और से पैसा नहीं जुटा पाऊंगा और आप विश्वास करें कि भारतीय मीडिया का हर शख्स आश्चर्यचकित था, अनुराग आप भी, जब यह घोषणा हुई कि रॉयटर्स, टाइम्स नेटवर्क में निवेश करने जा रही है और वो भी बहुत बड़ी मात्रा में। ये वर्ष 2005 की बात है, जब रॉयटर्स ने 100 करोड़ रुपए निवेश किये थे।’

अरनब ने कहा, ‘रॉयटर्स ने पैसा क्यों लगाया? ये केवल पैसे की बात नहीं थी। मुझे उस बड़ी पार्टी में बुलाया गया जो उन्होंने निवेश के मौके पर लंदन में आयोजित की थी और दो ही सालों में हमने टाइम्स नाउ को नंबर1 चैनल बना दिया। फिर रॉयटर्स का शेयर होल्डिंग स्ट्रक्चर बदल गया। मुझे नहीं पता कि आप यह जानते हैं कि नहीं, लेकिन टाइम्स ने फिर रॉयटर्स के शेयर खरीद लिए। मैं एक बार फिर लंदन में एक पार्टी में शामिल होने गया। तब मैंने रॉयटर्स के लोगों से पूछा कि अब जब आप कंपनी में भागीदारी छोड़ रहे हैं तो फिर पार्टी किसलिए, तो उस समय रॉयटर्स के प्रबंध निदेशक टॉम ग्लोसा ने कहा ये हमारा सबसे कम निवेश था, लेकिन हमें काफी कुछ मिला। इस निवेश की हमारे लिए काफी रणनीतिक वैल्यू थी। टाइम्स न्यूजरूम में हमने अलग देशों के लोगों को प्रशिक्षित किया। उद्यमशीलता की खूबसूरत संस्कृति का गवाह बने।’

अपने मौजूदा वेंचर के बारे में अरनब ने कहा, ‘व्यवसाय मेरी नजर में, इसे अन्यथा न लें, आप इसे उत्पाद कह सकते हैं। आप इसे ऑफरिंग, कंपनी भी कह सकते हैं, आप कुछ भी कह सकते हैं, क्योंकि मेरी नजर में कंपनी एक रूखा शब्द है। यदि आप मुझसे पूछेंगे कि रिपब्लिक क्या है तो मैं इसे संप्रदाय कहूंगा। हम एक जैसी सोच वाले लोगों का समुदाय हैं। हम खबर में विश्वास रखते हैं, हमें विश्वास है कि हम खबरों के योद्धा हैं। हमें विश्वास है कि हम लुटियंस मीडिया को हरा देंगे। मैं ये भी मानता हूं कि व्यवसाय दिमाग में भी नहीं बनते। यदि ऐसा होता तो सबसे बुद्धिमान लोग सबसे सफल कंपनियों का नेतृत्व कर रहे होते। खुद से पूछें कि क्या आईआईएम अहमदाबाद के स्टूडेंट सफल एंटरप्रिन्योर हैं। व्यवसायों को न तो एक्सेल शीट पर और न ही दिमाग में बनाया या जीता जा सकता है।’

इसके साथ ही अरनब गोस्वामी का यह भी कहना था, ‘जहां तक मीडिया व्यवसाय का सवाल है तो मैं कहना चाहता हूं कि मैं 14 सालों से मीडिया एंटरप्रिन्योर हूं। मुझे लगता है कि इस मामले में केवल एक ही फार्मूला काम करता है, वो जो सीधे आपके दिल को प्रभावित करे, दिमाग को नहीं। बड़े उत्पाद दिल से जुड़ाव से तैयार होते हैं, दिमाग से नहीं। दिल यहां क्या है, मैं बताता हूं।  मैंने ये कहना बंद कर दिया है कि हम नंबर 1 चैनल थे, हम सबसे तेज थे। क्योंकि उत्पाद की परिभाषा उपभोक्ता के लिए मायने नहीं रखती। हम मानते हैं कि उत्पाद की विशेषता नहीं बल्कि फिलॉसफी लोगों को एकसाथ लाती है। तो हमारी फिलॉसफी क्या है, हमारी फिलॉसफी क्या थी? मैं अपनी फिलॉसफी बताता हूं। मेरी फिलॉसफी अंग्रेजी में नेशन फर्स्ट चलाना है, यह बताना जरूरी है कि रिपब्लिक नेशन फर्स्ट, न कि रिपब्लिक, भारत का सबसे तेज न्यूज चैनल है। जब मैं कहता हूं कि ‘रिपब्लिक नेशन फर्स्ट, कोई समझौता नहीं’, तो मैं आपसे देश के प्रति अपने प्यार को सामने लाने की अपील करता हूं।’

उन्होंने कहा, ‘मैं आपसे यह अपील करता हूं कि ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ पर ध्यान दें। पिछले हफ्ते हमने अपने चैनल पर चार प्रोमो कट किये। पहला प्रोमो चंद्रयान का था। मैं एडिटिंग रूम में गया और संपादक से कहा कि मुझे चंद्रयान के इतने शॉट नहीं चाहिए। मुझे बस एक शॉट चाहिए, रॉ शॉट चाहिए। एडिटर ने कहा कि हम एक शॉट में प्रोमो नहीं बना सकते तो मेरा कहना था कि क्यों नहीं बना सकते। मैंने कहा कि जब मैं चंद्रयान के बारे में सोचता हूं तो मैं एक शॉट के बारे में सोचता हूं। संपादक ने कहा म्यूजिक का क्या? मैंने कहा कि उसे छोड़ दो, आवाज़ ऐसी होनी चाहिए जो हम वास्तव में फीड पर सुनते हैं जैसे 10, 9,. 8. और कुछ नहीं बस इतना ही। मैं आपको ये सब इसलिए बता रहा हूं क्योंकि जब आप ये प्रोमो देखते हैं तो ये आपके दिल को छूता है, क्योंकि हम भारतीय हैं।’ इस मौके पर अरनब गोस्वामी ने अपनी भविष्य की योजनाओं पर भी प्रकाश डाला। इसके बाद अनुराग बत्रा ने उनसे कुछ सवाल भी पूछे, जिसका उन्होंने खूबसूरती के साथ जवाब दिया।

अरनब की पूरी स्पीच आप यहां देख सकते हैं:


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