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'डीडी फ्री डिश' पर स्लॉट पाने के बदले ये नियम
प्रसार भारती ने अपने फ्री-टू-एयर डीटीएच प्लेटफॉर्म डीडी फ्री डिश पर टीवी चैनलों को स्लॉट देने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
प्रसार भारती ने अपने फ्री-टू-एयर डीटीएच प्लेटफॉर्म डीडी फ्री डिश पर टीवी चैनलों को स्लॉट देने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इसके लिए ई-ऑक्शन मेथडोलॉजी में पहला संशोधन जारी किया गया है, जो 9 जनवरी 2026 से तुरंत लागू हो गया है।
इस संशोधन के तहत अब ब्रॉडकास्टर्स के लिए नियम ज्यादा सख्त कर दिए गए हैं और खास तौर पर MPEG-2 स्लॉट्स के लिए रिजर्व प्राइस यानी शुरुआती बोली कीमत भी बढ़ा दी गई है। नए नियमों के मुताबिक अब जो निजी सैटेलाइट टीवी चैनल MPEG-4 स्लॉट के लिए आवेदन करेंगे, उन्हें पहले से ऑन-एयर होना जरूरी होगा। यानी चैनल उस भाषा में पहले से चल रहा होना चाहिए, जिसके लिए वह स्लॉट मांग रहा है।
इसके साथ ही चैनल का किसी एक प्राइवेट डीटीएच प्लेटफॉर्म या डीडी फ्री डिश पर पहले से उपलब्ध होना या फिर किसी रजिस्टर्ड केबल ऑपरेटर के नेटवर्क पर होना भी जरूरी कर दिया गया है। प्रसार भारती का मकसद ऐसे चैनलों को बाहर रखना है जो सिर्फ अनुमान के आधार पर बोली लगाते हैं और असल में ऑन-ग्राउंड मौजूद नहीं होते।
बता दें कि MPEG-2 स्लॉट्स के लिए यह ऑक्शन अनुमानित तौर पर 16 फरवरी, 2026 से शुरू होने वाला हैं। यानी तारीख फिक्स नहीं है, लेकिन लगभग इसी दिन से प्रक्रिया शुरू होगी। बता दें कि यह ऑक्शन उन टीवी चैनलों के लिए बहुत अहम है जो DD Free Dish की बड़ी पहुंच का फायदा उठाना चाहते हैं। इस प्लेटफॉर्म के जरिए लगभग 43 से 45 मिलियन (4.3 – 4.5 करोड़) घरों तक टीवी चैनल पहुंच सकते हैं।
MPEG-2 स्लॉट्स की नई कैटेगरी
डीडी फ्री डिश के MPEG-2 स्लॉट्स को अब नए तरीके से पांच बकेट में बांटा गया है।
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बकेट A+ में हिंदी और उर्दू के जनरल एंटरटेनमेंट चैनल होंगे
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बकेट A में हिंदी और उर्दू मूवी चैनल रखे गए हैं
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बकेट B में हिंदी-उर्दू म्यूजिक और स्पोर्ट्स चैनल, सभी भोजपुरी चैनल और बाकी हिंदी-उर्दू चैनल शामिल होंगे
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बकेट C सिर्फ हिंदी और उर्दू न्यूज और करंट अफेयर्स चैनलों के लिए तय किया गया है
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बकेट D में धार्मिक, आध्यात्मिक, आयुष चैनल, हिंदी-उर्दू को छोड़कर सभी क्षेत्रीय भाषाओं के चैनल और अंग्रेजी न्यूज चैनल शामिल होंगे
रिजर्व प्राइस में बढ़ोतरी
प्रसार भारती ने ई-ऑक्शन के हर राउंड के लिए रिजर्व प्राइस भी बढ़ा दी है। पहले राउंड में
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बकेट A+ के लिए ₹15 करोड़
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बकेट A के लिए ₹12 करोड़
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बकेट B के लिए ₹10 करोड़
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बकेट C के लिए ₹7 करोड़
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बकेट D के लिए ₹6 करोड़
रखी गई है। इसके बाद हर अगले राउंड में कीमत और बढ़ती जाएगी। साथ ही आगे के राउंड्स में ऊंचे बकेट वाले चैनलों को नीचे के बकेट में बोली लगाने की अनुमति नहीं होगी।
प्रसार भारती ने DD Free Dish स्लॉट्स के लिए जो नए नियम जारी किए, वे इस प्रकार हैं-
प्रसार भारती ने 85वें ई-ऑक्शन में DD Free Dish के खाली MPEG-2 स्लॉट्स के लिए नई शर्तें और नियम जारी किए हैं। इन नियमों के मुताबिक, अब चैनल प्रदाता (Channel Provider) को कई बातों की गारंटी देनी होगी।
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चैनल का कंटेंट:
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चैनल का कंटेंट मुख्य रूप से (कम से कम 75%) उसी जॉनर और भाषा में होना चाहिए, जो उसने आवेदन में बताया है।
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विज्ञापन और प्रोमो को इस प्रतिशत में नहीं गिना जाएगा। कुल मिलाकर महीने भर का कम से कम 60% कंटेंट घोषित जॉनर और भाषा में होना चाहिए।
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सत्यापन और जिम्मेदारी:
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आवेदन में दी गई सारी जानकारी सही, सत्य और जाँच योग्य होनी चाहिए।
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अगर कोई जानकारी गलत या भ्रामक पाई जाती है, तो चैनल को ई-ऑक्शन से बाहर किया जा सकता है या उसका स्लॉट रद्द किया जा सकता है।
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अधिकारित हस्ताक्षरकर्ता:
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कंपनी अपने बोर्ड की मंजूरी से किसी व्यक्ति को ई-ऑक्शन में प्रतिनिधित्व करने और सभी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने का अधिकार दे सकती है।
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ईमानदारी और पारदर्शिता (Integrity Pact):
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प्रसार भारती और चैनल प्रदाता दोनों ई-ऑक्शन में भ्रष्टाचार और अनुचित लाभ से बचेंगे।
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प्रसार भारती के किसी भी अधिकारी से रिश्वत नहीं ली जा सकती और न ही चैनल प्रदाता किसी अधिकारी को रिश्वत देगा।
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अगर किसी अधिकारी या चैनल प्रदाता की तरफ से अनियमितता पाई गई, तो जांच की जाएगी और कार्रवाई की जाएगी।
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उल्लंघन पर कार्रवाई:
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नियम तोड़ने पर चैनल को तुरंत ई-ऑक्शन से बाहर किया जा सकता है।
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सुरक्षा जमा या फीस जब्त की जा सकती है।
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पहले से किए गए अनुबंध रद्द किए जा सकते हैं।
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भविष्य में 1 से 3 साल तक ई-ऑक्शन में भाग लेने से रोका जा सकता है।
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गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
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स्वतंत्र निरीक्षक (Independent Monitor):
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नियमों के पालन के लिए एक स्वतंत्र निरीक्षक नियुक्त किया गया है।
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निरीक्षक को सभी दस्तावेज़ और जानकारी तक पहुँच होगी और किसी उल्लंघन की स्थिति में सुधारात्मक सुझाव देगा।
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वैधता:
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अगर चैनल ई-ऑक्शन जीतता है, तो यह समझौता स्लॉट की अवधि तक या एक साल तक वैध रहेगा।
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अगर चैनल नहीं जीतता है, तो यह समझौता 6 महीने तक वैध रहेगा।
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कुछ नियम हटाए गए
इस संशोधन में कुछ पुराने सब-क्लॉज हटा दिए गए हैं और ‘बकेट R’ और ‘राउंड 7’ से जुड़े सभी नियमों को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, ताकि पूरी प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके।
प्रसार भारती के नए नियमों का मकसद है कि चैनल प्रदाता ई-ऑक्शन में पूरी तरह पारदर्शिता और ईमानदारी से हिस्सा लें और दर्शकों को उनका घोषित कंटेंट ही मिले।
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