ACP बनते ही न्यूज एंकर ने इस तरह चलाया 'कानून का राज', देखें विडियो

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर नोएडा पुलिस ने ‘इंडिया टीवी’ की न्यूज एंकर मीनाक्षी जोशी को सम्मान देते हुए एक दिन के लिए एसीपी बनाया

Last Modified:
Monday, 09 March, 2020
Meenakshi Joshi


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर नोएडा पुलिस ने ‘इंडिया टीवी’ की न्यूज एंकर मीनाक्षी जोशी को सम्मान देते हुए एक दिन के लिए एसीपी बनाया। पुलिस अधिकारी की यह भूमिका निभाने के दौरान मीनाक्षी ने यह जानने की कोशिश की कि महिला पुलिसकर्मी किस तरीके से काम करती हैं और काम के दौरान उन्हें किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा मीनाक्षी जोशी ने महिलाओं को फूल बांटकर उन्हें सुरक्षा से संबंधित कई जानकारियां भी दीं।

मीनाक्षी को नोएडा के जिस इलाके का एसीपी बनाया गया, उसके अन्तर्गत आने वाले थानों का उन्होंने निरीक्षण किया। वह पुलिस फोर्स के साथ अपने इलाकों के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निरीक्षण करने के लिए भी गईं। मीनाक्षी महिला थाने भी पहुंचीं और अपने स्तर पर उन्होंने कुछ मामले सुलझाने का प्रयास भी किया। एक पत्रकार को पहली बार इस भूमिका में देखा गया।

बता दें कि मीनाक्षी पिछले हफ्ते देश भर में तब काफी चर्चा में रहीं, जब उन्होंने दिल्ली के शाहीन बाग प्रदर्शन पर रिपोर्ट तैयार की थी। रजत शर्मा के शो ‘आज की बात’ में भी मीनाक्षी की वो रिपोर्ट चली थी, जिसमें वह शाहीन बाग के ‘दम तोड़ते’ प्रदर्शन की कलई खोलती नजर आईं थीं। इस रिपोर्ट को तैयार करते वक्त उन्हें धमकी भी मिली थी और ‘इंडिया टीवी’ के कैमरे को जबरन बंद करवाने का प्रयास भी किया गया था। मीनाक्षी ने जिस बहादुरी से बिना डरे यह रिपोर्ट तैयार की, उसकी हर जगह तारीफ हुई।

मीनाक्षी पिछले आठ सालों से टीवी न्यूज इंडस्ट्री में हैं। जोधपुर से करियर की शुरुआत करने वाली मीनाक्षी ‘इंडिया टीवी’ से पहले ‘इंडिया न्यूज’, ‘फोकस न्यूज’ और ‘न्यूज एक्सप्रेस’ में भी बतौर एंकर काम कर चुकी हैं।

एसीपी की भूमिका में मीनाक्षी जोशी ने किस तरह अपने कर्तव्य का पालन किया, वह आप यहां इस विडियो में देख सकते हैं। 

 

 

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'जी टीवी' ने की बड़ी घोषणा: लौट रहा है लोकप्रिय शो ‘सा रे गा मा पा’

'ज़ी टीवी' (Zee TV) ने अपने लोकप्रिय सिंगिंग रियलिटी शो ‘सा रे गा मा पा’ (Sa Re Ga Ma Pa) के नए सीजन की घोषणा की है। देश के 12 शहरों में ऑडिशन आयोजित किए जाएंगे।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 19 June, 2026
Last Modified:
Friday, 19 June, 2026
Zeetv

'ज़ी टीवी' (Zee TV) ने अपने प्रतिष्ठित सिंगिंग रियलिटी शो ‘सा रे गा मा पा’ (Sa Re Ga Ma Pa) के नए सीजन की घोषणा कर दी है। चैनल ने बताया है कि आगामी सीजन के लिए देशभर के 12 शहरों में ऑडिशन आयोजित किए जाएंगे, जहां उभरते गायक अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्राप्त कर सकेंगे।

वर्षों से ‘सा रे गा मा पा’ (Sa Re Ga Ma Pa) भारतीय संगीत जगत के सबसे लोकप्रिय रियलिटी शोज़ में गिना जाता रहा है। इस मंच ने 'श्रेया घोषाल' (Shreya Ghoshal), 'शेखर रवजियानी' (Shekhar Ravjiani) और 'कुणाल गांजावाला' (Kunal Ganjawala) जैसे कई प्रसिद्ध गायकों को पहचान दिलाई है।

चैनल के अनुसार, नए सीजन में संगीत और प्रस्तुति के स्तर को और भव्य बनाया जाएगा। इसके लिए बड़े मंच, विस्तारित प्रोडक्शन सेटअप और कॉन्सर्ट जैसी प्रस्तुति शैली को शामिल किया गया है। शो में 100 से अधिक लाइव संगीतकार, गायक और वादक एक साथ प्रस्तुति देंगे, जिससे दर्शकों को अधिक प्रभावशाली संगीत अनुभव मिल सकेगा।

ऑडिशन दिल्ली, मुंबई, जयपुर, चंडीगढ़, नागपुर, इंदौर, कोलकाता, गुवाहाटी, अहमदाबाद, बेंगलुरु, लखनऊ और वाराणसी में आयोजित किए जाएंगे। इससे देश के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिभाशाली गायकों को मंच तक पहुंचने का मौका मिलेगा।

'ज़ी टीवी' (Zee TV) का मानना है कि नया सीजन न केवल शो की विरासत को आगे बढ़ाएगा, बल्कि देश के अगले बड़े सिंगिंग स्टार की खोज में भी अहम भूमिका निभाएगा।

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अब अर्पिता आर्या के हाथों में 'न्यूज18 इंडिया' के शो ‘गूंज’ की कमान

'न्यूज़18 इंडिया' (News18 India) ने अपने प्रमुख डिबेट शो ‘गूंज’ को नए फॉर्मेट और नई प्रस्तुति के साथ शुरू कर दिया है। 18 जून से अर्पिता आर्या शो की एंकरिंग संभाल ली हैं।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 19 June, 2026
Last Modified:
Friday, 19 June, 2026
news18india

'न्यूज़18 इंडिया' (News18 India) ने अपने प्रमुख डिबेट शो ‘गूंज’ (Goonj) को नए फॉर्मेट और नए संपादकीय दृष्टिकोण के साथ शुरू कर दिया है। 18 जून से शुरू हुए इस शो की कमान अब एंकर अर्पिता आर्या (Arpita Arya) ने संभाल ली हैं। चैनल का उद्देश्य तथ्य आधारित और अधिक संरचित समाचार बहसों के जरिए दर्शकों को बेहतर संदर्भ और विश्लेषण उपलब्ध कराना है।

सप्ताह के दिनों में शाम 4:50 बजे प्रसारित होने वाला ‘गूंज’ (Goonj) लंबे समय से राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा का प्रमुख मंच रहा है। नए संस्करण में सत्यापित आंकड़ों, तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और विजुअल एक्सप्लेनर्स (Visual Explainers) पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही जटिल विषयों को सरल तरीके से समझाने के लिए ग्राफिक्स आधारित स्टोरीटेलिंग को भी प्रमुखता दी गई है।

'न्यूज़18 इंडिया' (News18 India) के अनुसार, नए संस्करण में विश्वसनीय, तीखी और प्रभावशाली पत्रकारिता पर फोकस जारी रहेगा, जबकि तथ्यों और संदर्भों को और अधिक मजबूती से प्रस्तुत किया जाएगा। नए फॉर्मेट और नए प्रस्तुतीकरण के साथ ‘गूंज’ अब 'न्यूज़18 इंडिया' (News18 India) और उसके 'यूट्यूब' (YouTube) प्लेटफॉर्म पर दर्शकों तक पहुंच रहा है।

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'फीफा' वर्ल्ड कप 2026 की धमाकेदार शुरुआत: तीन मैचों ने जुटाए 5.4 करोड़ दर्शक

'फीफा' (FIFA) के अनुसार वर्ल्ड कप 2026 के मेजबान देशों के शुरुआती मुकाबलों को 5.4 करोड़ से अधिक लोगों ने देखा। कई मैचों ने अपने-अपने बाजारों में नए व्यूअरशिप रिकॉर्ड भी बनाए।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 18 June, 2026
Last Modified:
Thursday, 18 June, 2026
fifaworldcup2026

'फीफा' (FIFA) वर्ल्ड कप 2026 के शुरुआती मुकाबलों ने दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह पैदा किया है। 'फीफा' (FIFA) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार मेजबान देशों अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा के पहले मुकाबलों को कुल मिलाकर 5.4 करोड़ से अधिक दर्शकों ने देखा।

सबसे बड़ी दर्शक संख्या अमेरिका और पैराग्वे के बीच खेले गए मुकाबले को मिली। यह मैच 'फॉक्स' (FOX) और 'टेलीमुंडो' (Telemundo) पर औसतन 2.75 करोड़ दर्शकों तक पहुंचा। 'फीफा' (FIFA) के मुताबिक यह अमेरिका के टेलीविजन इतिहास में सबसे ज्यादा देखा गया फुटबॉल प्रसारण बन गया है। 'फॉक्स' (FOX) ने इसे अमेरिका में पुरुष फीफा वर्ल्ड कप के किसी भी अंग्रेजी भाषा प्रसारण की सर्वाधिक व्यूअरशिप बताया, जबकि स्ट्रीमिंग के मामले में भी यह नया रिकॉर्ड स्थापित करने में सफल रहा।

वहीं मेक्सिको की दक्षिण अफ्रीका पर जीत को औसतन 2.34 करोड़ दर्शकों ने देखा। 'फीफा' (FIFA) के अनुसार यह 21वीं सदी में मेक्सिको का सबसे ज्यादा देखा गया फीफा वर्ल्ड कप मुकाबला बन गया। मैच ने मेक्सिको में 72.1 प्रतिशत टेलीविजन मार्केट शेयर हासिल किया। अमेरिका में भी इस मुकाबले को लगभग 2 करोड़ दर्शकों ने देखा।

कनाडा और बोस्निया-हर्जेगोविना के बीच खेले गए मुकाबले को अंग्रेजी और फ्रेंच भाषा प्रसारकों पर औसतन 31 लाख दर्शक मिले। 'फीफा' (FIFA) ने इसे इस सदी में कनाडा की पुरुष राष्ट्रीय टीम से जुड़ा तीसरा सबसे ज्यादा देखा गया वर्ल्ड कप मैच बताया।

'फीफा' (FIFA) अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो (Gianni Infantino) ने कहा कि शुरुआती आंकड़े दर्शाते हैं कि टूर्नामेंट को लेकर प्रशंसकों का उत्साह बेहद मजबूत है और वर्ल्ड कप 2026 वैश्विक स्तर पर नए दर्शक रिकॉर्ड स्थापित कर सकता है।

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डिबेट से डेटा तक: क्या हिंदी न्यूज चैनल में 'एक्सप्लेनेर शोज' का नया दौर शुरू हो गया है?

हिंदी न्यूज चैनलों का प्राइम टाइम लंबे समय से तेज-तर्रार बहसों, ऊंची आवाजों और राजनीतिक टकरावों के लिए जाना जाता रहा है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 17 June, 2026
Last Modified:
Wednesday, 17 June, 2026
NewsChanels54

हिंदी न्यूज चैनलों का प्राइम टाइम लंबे समय से तेज-तर्रार बहसों, ऊंची आवाजों और राजनीतिक टकरावों के लिए जाना जाता रहा है। रात 8 बजे से 10 बजे तक का समय अक्सर ऐसे कार्यक्रमों से भरा रहता था, जिनमें कई पैनलिस्ट एक साथ बहस करते दिखाई देते थे। लेकिन अब तस्वीर धीरे-धीरे बदलती नजर आ रही है। हिंदी न्यूज इंडस्ट्री में एक नया ट्रेंड उभर रहा है- 'एक्सप्लेनेर शोज' का ट्रेंड।

यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब दर्शकों की मीडिया आदतें तेजी से बदल रही हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म, यूट्यूब, सोशल मीडिया और शॉर्ट वीडियो कंटेंट ने दर्शकों को केवल खबर सुनने के बजाय उसे समझने की आदत भी दी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या हिंदी न्यूज चैनल अब डिबेट-प्रधान पत्रकारिता से आगे बढ़कर डेटा, रिसर्च और फैक्ट आधारित पत्रकारिता की ओर बढ़ रहे हैं?

16 जून 2026 को 'न्यूज18 इंडिया' अपना नया प्राइमटाइम शो "देश की पाठशाला" लॉन्च किया, जिसकी कमान सीनियर जर्नलिस्ट सुशांत सिन्हा के हाथ में है। शो रात 8:50 बजे टीवी, CTV और YouTube- तीनों प्लेटफॉर्म पर एक साथ प्रसारित होने लगा और लगभग इसी समय, Times Now Navbharat का "न्यूज की पाठशाला", जिसे सुशांत सिन्हा ही चलाते थे और उनके यहां से जाने के बाद से चैनल को इस प्रोग्राम के लिए एक नए चेहरे की तलाश थी। लिहाजा रुबिका लियाकत के आने से यह तलाश अब पूरी हो गई, क्योंकि 17 जून यानी आज से वह "न्यूज की पाठशाला" की जिम्मेदारी उठाएंगी और वह भी नए अंदाज में।

यह संयोग नहीं, एक सिग्नल है। हिंदी न्यूज इंडस्ट्री, जो दशकों से "बड़ी बहस", "आर-पार", "दंगल" और "ताल ठोक के" जैसे डिबेट फॉर्मेट पर टिकी थी, अब करवट ले रही है। सवाल यह है- क्या यह बदलाव असली है, या सिर्फ पुरानी बोतल में नई शराब?

डिबेट कल्चर का वह सुनहरा दौर

2000 के दशक के बाद हिंदी न्यूज टीवी की पहचान काफी हद तक प्राइम टाइम डिबेट्स बन गई। एंकर माइक संभालता, कई पैनलिस्ट एक साथ अपनी बात रखते, स्क्रीन कई हिस्सों में बंट जाती और दर्शक उस शोर-शराबे के बीच अपनी पसंद की आवाज तलाशता। TRP की दौड़ में इस फॉर्मेट ने लंबे समय तक चैनलों को फायदा पहुंचाया। लेकिन अब यह मॉडल अपनी सीमाओं से जूझता नजर आ रहा है। हिंदी न्यूज मार्केट में प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं ज्यादा कड़ी हो गई है और लगभग सभी बड़े चैनल मिलते-जुलते फॉर्मेट और प्रस्तुति शैली के साथ दर्शकों का ध्यान खींचने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में जब कंटेंट और प्रस्तुति में बहुत ज्यादा अंतर न दिखे, तो दर्शकों के लिए एक चैनल को दूसरे से अलग पहचानना मुश्किल हो जाता है।

डिजिटल क्रांति ने बदला खेल

असली धक्का आया डिजिटल से। FICCI-EY मीडिया एंड एंटरटेनमेंट रिपोर्ट 2026 के अनुसार, 2025 में पहली बार डिजिटल मीडिया ने भारत में टेलीविजन को पीछे छोड़ते हुए सबसे बड़े सेगमेंट का दर्जा हासिल किया। डिजिटल मीडिया ने ₹1 लाख करोड़ का आंकड़ा पार किया, जबकि पूरा M&E सेक्टर 9% बढ़कर ₹2.78 लाख करोड़ पर पहुंच गया।

भारत में ऑनलाइन वीडियो दर्शकों की संख्या 2025 में 57.2 करोड़ तक पहुंच गई। इसी दौरान Kantar Media Compass की 2025 की तीसरी तिमाही की रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया: भारत के 15+ आयु वर्ग में से 31.3 करोड़ लोग (26%) अब पूरी तरह डिजिटल-ओनली दर्शक हैं, यानी वे लिनियर टीवी देखते ही नहीं। यह संख्या 2024 की तुलना में 30% ज्यादा है।

ब्रॉडकास्ट सेक्टर का हाल भी चिंताजनक है। FICCI-EY रिपोर्ट 2026 के अनुसार 2025 में लिनियर TV विज्ञापन राजस्व में 10% से अधिक की गिरावट आई और सब्सक्रिप्शन में 8% की कमी हुई, जिसके चलते 1.1 करोड़ pay-TV घर कम हो गए।

YouTube पर न्यूज का नया अखाड़ा

टेलीविजन जहां सिकुड़ रहा है, वहीं YouTube पर हिंदी न्यूज का साम्राज्य फैल रहा है। Aaj Tak के YouTube चैनल पर 2026 तक 7.53 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर हो चुके हैं- यह किसी भी न्यूज चैनल का दुनिया में सबसे बड़ा YouTube फॉलोइंग है। ABP News ~5.09 करोड़, IndiaTV ~5.07 करोड़ और News18 India ~4.03 करोड़ सब्सक्राइबर के साथ खड़ा है।

लेकिन यहां एक और कहानी है- The Lallantop की। 2017 में शुरू हुए इस डिजिटल-फर्स्ट प्लेटफॉर्म के मार्च 2026 तक 3.48 करोड़ YouTube सब्सक्राइबर हो चुके हैं और कुल व्यूज 17.8 अरब के पार। The Lallantop की खासियत यही है कि यह डिबेट नहीं करता- यह समझाता है। लंबी स्क्रिप्ट, डेटा, इतिहास, संदर्भ, यही इसकी पहचान है। यह सफलता बाकी चैनलों के लिए आईना है।

'देश की पाठशाला' से शुरू हुआ नया ट्रेंड

'न्यूज18 इंडिया' के प्राइमटाइम लाइनअप में हुए ताजा बदलाव इस ट्रेंड का सबसे ठोस सबूत हैं। चैनल ने अपने नए एडिटोरियल आर्किटेक्चर में एक्सप्लेनर जर्नलिज्म को केंद्र में रखा है। रात 8:50 बजे का प्राइमटाइम स्लॉट अब डिबेट का नहीं, "देश की पाठशाला" का है- जहां राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का संदर्भ, पृष्ठभूमि और विश्लेषण प्रस्तुत किया जाएगा।

चैनल के मुताबिक, यह नया लाइनअप एक "इंटीग्रेटेड एडिटोरियल फ्रेमवर्क" है- स्ट्रैटेजी, राजनीति, ग्राउंड रिपोर्टिंग, एक्सप्लेनर और डिबेट, सभी अलग-अलग पर एक-दूसरे के पूरक।

उधर Times Now Navbharat का "न्यूज की पाठशाला", जो एक्सप्लेनर फॉर्मेट में पहले से मौजूद था, अब भी जारी रहेगा। सुशांत सिन्हा के जाने के बाद चैनल ने इसके लिए नए चेहरे की तलाश शुरू की, जोकि उसे अब रूबिका लियाकत के रूप में मिल चुका है, लेकिन शो एक नए अंदाज में पेश किया जाएगा, लेकिन बताया जा रहा है कि शो का फॉर्मेट नहीं बदला गया है। यह इस बात का संकेत है कि एक्सप्लेनर फॉर्मेट को अब "एंकर से बड़ा ब्रैंड" माना जाने लगा है।

एंकर की बदलती भूमिका

हिंदी न्यूज टीवी के पारंपरिक दौर में एंकर की भूमिका मुख्य रूप से बहस का संचालन करने, अलग-अलग पक्षों को सामने लाने और चर्चा को आगे बढ़ाने की होती थी। अब पत्रकारिता के बदलते स्वरूप के साथ एंकर की भूमिका भी विकसित हो रही है। वह केवल चर्चा का संचालक नहीं, बल्कि एक विश्लेषक, डेटा को सरल भाषा में समझाने वाला और जटिल मुद्दों को दर्शकों तक स्पष्ट रूप से पहुंचाने वाला मार्गदर्शक भी बन रहा है।

इस बदलाव को BBC Explainers, Vox और The Economist जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया से सीखा जा सकता है, जिन्होंने एक्सप्लेनर जर्नलिज्म को एक लाभदायक और विश्वसनीय मॉडल बनाया। Vox मीडिया का पूरा बिजनेस मॉडल ही "we explain the news" पर टिका है।

AI और डेटा पत्रकारिता का प्रवेश

FICCI-EY 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत का M&E सेक्टर तेजी से "डेटा-लेड और प्लेटफॉर्म-एग्नॉस्टिक" होता जा रहा है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंटेंट क्रिएशन, डिस्ट्रीब्यूशन और ऑडियंस एंगेजमेंट में बड़ी भूमिका निभा रहा है। न्यूजरूम अब AI टूल्स से रिसर्च, डेटा विजुअलाइजेशन और फैक्ट-चेकिंग तेज कर सकते हैं।

2025 में डिजिटल विज्ञापन 26% बढ़कर ₹94,700 करोड़ हो गया- कुल विज्ञापन खर्च का 63%। यह संख्या बताती है कि विज्ञापनदाता भी अब डिजिटल की ओर मुड़ चुके हैं। जो चैनल डेटा-आधारित एक्सप्लेनर कंटेंट के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मजबूत उपस्थिति बनाएगा, उसे इस विज्ञापन पाई में बड़ा हिस्सा मिलेगा।

टीआरपी की लड़ाई में डेटा बनेगा नया हथियार?

यक्ष प्रश्न यह है: क्या एक्सप्लेनर शो वाकई टीआरपी ला पाएंगे? FICCI-EY रिपोर्ट 2026 के अनुसार 2025 में भारत में कुल TV households 19.3 करोड़ थे, जो 2024 के 19 करोड़ से बढ़े हैं। यानी टेलीविजन की पहुंच अभी भी व्यापक है। लेकिन युवा दर्शक, जो डिजिटल-ओनली हैं, उनके लिए एक्सप्लेनर फॉर्मेट YouTube और पॉडकास्ट पर ज्यादा कारगर है।

FICCI-EY रिपोर्ट 2026 की एक अहम बात यह है कि "दर्शक अब केवल कंटेंट के निष्क्रिय उपभोक्ता नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार हैं।" वे वही देखते हैं जो उन्हें कुछ सिखाए, कुछ समझाए। भारत में लोगों ने 2025 में अपने स्मार्टफोन पर 1.23 ट्रिलियन (खरब) घंटे बिताए, यह संख्या कल्पना से परे है, जिसमें से 59% समय मीडिया व एंटरटेनमेंट में गया। इस विशाल ध्यान को खींचने के लिए सिर्फ शोर काफी नहीं, समझ भी देनी होगी।

 नई पैकेजिंग या असली बदलाव?

क्या हिंदी न्यूज इंडस्ट्री वास्तव में डिबेट-प्रधान दौर से निकलकर डेटा और एक्सप्लेनर पत्रकारिता की ओर बढ़ रही है, या यह केवल प्राइम टाइम की नई पैकेजिंग है? आंकड़े साफ कहते हैं कि मजबूरी असली है। डिजिटल-ओनली दर्शकों में 30% की वृद्धि, लीनियर टीवी विज्ञापन राजस्व में 10% से अधिक की गिरावट- यह सब यों ही नहीं हो रहा।

The Lallantop जैसे प्लेटफॉर्म की सफलता यह साबित कर चुकी है कि हिंदी दर्शक "समझना" चाहते हैं, न सिर्फ "सुनना।" 'न्यूज18 इंडिया' का "देश की पाठशाला" और 'टाइम्स नाउ नवभारत' का "न्यूज की पाठशाला"- दोनों इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।

लेकिन असली परीक्षा आगे है। क्या ये चैनल सिर्फ नाम बदलकर पुराना फॉर्मेट चलाएंगे, या सच में डेटा, ग्राफिक्स, टाइमलाइन और शोध-आधारित पत्रकारिता को अपना लेंगे? आने वाले कुछ साल इस सवाल का जवाब तय करेंगे और हिंदी न्यूज का चेहरा भी।

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विज्ञापन सीमा पर TV इंडस्ट्री की बड़ी लड़ाई: डिजिटल दौर में पुराने नियम बदलने की मांग तेज

पिछले एक दशक में डिजिटल प्लेटफॉर्म, स्ट्रीमिंग सेवाओं और दर्शकों की बदलती आदतों ने मीडिया इंडस्ट्री का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है, जबकि मौजूदा नियम आज भी पुराने दौर की सोच पर आधारित हैं।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 16 June, 2026
Last Modified:
Tuesday, 16 June, 2026
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इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

देश के टीवी ब्रॉडकास्टर्स ने विज्ञापन समय सीमा (Ad Cap) से जुड़े नियमों की समीक्षा की मांग एक बार फिर तेज कर दी है। उनका कहना है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) को ऐसी नई नीति बनानी चाहिए जो आज के मीडिया माहौल की वास्तविकताओं को ध्यान में रखे। पिछले एक दशक में डिजिटल प्लेटफॉर्म, स्ट्रीमिंग सेवाओं और दर्शकों की बदलती आदतों ने मीडिया इंडस्ट्री का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है, जबकि मौजूदा नियम आज भी पुराने दौर की सोच पर आधारित हैं।

ब्रॉडकास्टर्स की यह नई पहल हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले के बाद सामने आई है, जिसमें टीवी चैनलों पर विज्ञापन समय सीमा लागू करने के मुद्दे पर फैसला दिया गया था। इस फैसले के बाद उद्योग जगत में यह चिंता फिर बढ़ गई है कि अगर प्रति घंटे 12 मिनट की विज्ञापन सीमा को सख्ती से लागू किया गया तो टीवी चैनलों के कारोबार पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

मामले से जुड़े कई वरिष्ठ उद्योग अधिकारियों के मुताबिक, हाल ही में देश के बड़े ब्रॉडकास्टिंग नेटवर्क और इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) के प्रतिनिधियों ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा नीति जिन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर 2013 में बनाई गई थी, आज का मीडिया बाजार उससे बिल्कुल अलग है और यह नियम अब मौजूदा हालात से मेल नहीं खाते।

ब्रॉडकास्टर्स ने मंत्रालय को बताया कि पिछले दस वर्षों में मीडिया और विज्ञापन उद्योग में बड़े संरचनात्मक बदलाव हुए हैं। डिजिटल विज्ञापन तेजी से बढ़ा है, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है, दर्शक कई प्लेटफॉर्म्स में बंट गए हैं और वैश्विक टेक कंपनियों से प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।

सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान मंत्रालय ने ब्रॉडकास्टर्स को भरोसा दिलाया कि दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के तुरंत बाद टीवी चैनलों के खिलाफ कोई सख्त या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इससे फिलहाल उद्योग को कुछ राहत मिली है और उसे कानूनी विकल्पों पर विचार करने तथा आगे की रणनीति तैयार करने का समय मिल गया है।

अब माना जा रहा है कि कोर्ट की छुट्टियां खत्म होने के बाद IBDF इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा। संगठन विज्ञापन सीमा से जुड़े नियमों की व्याख्या और उनके क्रियान्वयन को लेकर कानूनी स्पष्टता चाहता है।

एक वरिष्ठ ब्रॉडकास्टिंग अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि 2013 की तुलना में आज का मीडिया बाजार पूरी तरह बदल चुका है। उस समय टीवी विज्ञापन का सबसे बड़ा माध्यम था और डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरुआती दौर में थे। लेकिन आज स्थिति बिल्कुल अलग है। अब टीवी चैनलों को उन वैश्विक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से मुकाबला करना पड़ रहा है, जिनके पास लगभग असीमित विज्ञापन स्पेस है और जिन पर टीवी जैसे नियम लागू नहीं होते।

उन्होंने कहा कि आज भारतीय टीवी उद्योग की सबसे बड़ी चुनौती दर्शकों का ध्यान बनाए रखना और अपने विज्ञापन स्लॉट भरना है। अगर कोई चैनल जरूरत से ज्यादा विज्ञापन दिखाएगा तो दर्शक तुरंत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की ओर चले जाएंगे। कोई भी समझदार ब्रॉडकास्टर अपने दर्शकों को दूसरे चैनलों या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की तरफ नहीं धकेलना चाहेगा। उनका मानना है कि अब समय आ गया है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और ट्राई (TRAI) दोनों नए मीडिया माहौल को समझें और उसी के अनुसार नीतियां बनाएं।

उद्योग का कहना है कि टीवी नेटवर्क इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रहे हैं। एक तरफ संचालन और कंटेंट निर्माण की लागत लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ विज्ञापन से होने वाली आय की वृद्धि धीमी पड़ गई है। ऐसे में कमाई के लिए लचीलापन पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।

विज्ञापन सीमा का मुद्दा टीवी उद्योग के लिए लंबे समय से सबसे विवादित नियामकीय विषयों में से एक रहा है। उपभोक्ता समूहों का मानना है कि विज्ञापन सीमित करने से दर्शकों का अनुभव बेहतर होता है और अत्यधिक विज्ञापन से बचाव होता है। लेकिन ब्रॉडकास्टर्स लगातार कहते रहे हैं कि मौजूदा ढांचा विभिन्न प्रकार के चैनलों और उनके अलग-अलग बिजनेस मॉडल की वास्तविक जरूरतों को ठीक से नहीं समझता।

उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पिछले दस वर्षों में टीवी कारोबार की अर्थव्यवस्था काफी चुनौतीपूर्ण हो गई है। कंटेंट निर्माण की लागत तेजी से बढ़ी है, बड़े मनोरंजन कार्यक्रमों और खेल प्रसारण अधिकारों की कीमतें कई गुना बढ़ गई हैं और दर्शक अब अपना समय पारंपरिक टीवी, कनेक्टेड टीवी, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया ऐप्स के बीच बांट रहे हैं।

इसी दौरान विज्ञापनदाताओं का बड़ा हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की ओर चला गया है। इसकी वजह डिजिटल माध्यमों की बेहतर टार्गेटिंग क्षमता, रियल-टाइम डेटा और प्रदर्शन आधारित विज्ञापन मॉडल हैं।

मीडिया उद्योग के अनुमानों के अनुसार, जब विज्ञापन सीमा का ढांचा बनाया गया था, उस समय की तुलना में आज भारत के कुल विज्ञापन खर्च में डिजिटल की हिस्सेदारी काफी ज्यादा हो चुकी है। ब्रॉडकास्टर्स का तर्क है कि ऐसे माहौल में टीवी पर सख्त विज्ञापन सीमा लागू करना उसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति को और कमजोर कर सकता है।

एक वरिष्ठ मीडिया एजेंसी अधिकारी का कहना है कि इस मुद्दे को केवल पारंपरिक टीवी प्रसारण के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। अब मीडिया बाजार एकीकृत हो चुका है, जहां टीवी और डिजिटल वीडियो के बीच का अंतर लगातार कम होता जा रहा है। दर्शक कई स्क्रीन पर कंटेंट देख रहे हैं और विज्ञापनदाता भी एकीकृत मीडिया रणनीति के तहत अभियान चला रहे हैं। ऐसे में पुराने दौर के लिए बनाए गए नियमों की समीक्षा जरूरी हो सकती है ताकि वे आज भी प्रासंगिक और निष्पक्ष बने रहें।

ब्रॉडकास्टर्स का यह भी कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स अपनी जरूरत के अनुसार विज्ञापन की मात्रा और कमाई की रणनीति बदल सकते हैं, जबकि टीवी नेटवर्क बेहद नियंत्रित और नियमों से बंधे माहौल में काम करते हैं। इससे बाजार की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप प्रतिक्रिया देने की उनकी क्षमता सीमित हो जाती है।

इसी वजह से अब उद्योग के कई हितधारक नई परामर्श प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे हैं, जिसमें ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाता, उपभोक्ता संगठन और नीति निर्माता सभी शामिल हों। उद्योग के भीतर ऐसी कई संभावनाओं पर चर्चा चल रही है, जिनमें अलग-अलग श्रेणी के चैनलों के लिए अलग नियम, विज्ञापन सीमा में संशोधन या ऐसा लचीला ढांचा शामिल है जो दर्शकों के हित और उद्योग की आर्थिक जरूरतों के बीच संतुलन बना सके।

मीडिया नीति से जुड़े एक विशेषज्ञ का कहना है कि यह बहस सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया भर के नियामकों के सामने यही चुनौती है कि तकनीकी बदलावों और मीडिया के एकीकरण के दौर में पुराने नियमों को कैसे अपडेट किया जाए। उनके अनुसार, उपभोक्ताओं के हित में विज्ञापन सीमा का उद्देश्य आज भी सही है, लेकिन यह भी देखना होगा कि दस साल पहले बनाए गए नियम आज के प्रतिस्पर्धी माहौल को कितनी अच्छी तरह दर्शाते हैं। बाजार की संरचना, दर्शकों का व्यवहार और विज्ञापन उद्योग तीनों में भारी बदलाव आ चुका है।

उद्योग से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि इस कानूनी लड़ाई का नतीजा भारतीय टीवी उद्योग के भविष्य पर दूरगामी असर डाल सकता है। उनका कहना है कि यह केवल विज्ञापन आय का मुद्दा नहीं है। इसका असर कंटेंट निवेश, क्षेत्रीय चैनलों की आर्थिक स्थिति, खेल प्रसारण के कारोबार और वैश्विक स्ट्रीमिंग तथा टेक कंपनियों से मुकाबला करने की क्षमता पर भी पड़ सकता है।

एक अन्य वरिष्ठ ब्रॉडकास्टिंग अधिकारी के अनुसार, असली सवाल सिर्फ विज्ञापन के मिनटों का नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि क्या पुराने दौर के नियम उस बाजार को नियंत्रित कर सकते हैं, जो पिछले कुछ वर्षों में पूरी तरह बदल चुका है। अब टीवी की प्रतिस्पर्धा सिर्फ दूसरे टीवी चैनलों से नहीं, बल्कि पूरे डिजिटल इकोसिस्टम से है।

IBDF के सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी और ब्रॉडकास्टर्स की सरकार के साथ बढ़ती बातचीत को देखते हुए यह विवाद अब सिर्फ विज्ञापन सीमा तक सीमित नहीं रहने वाला। आने वाले समय में यह इस बात पर व्यापक बहस का रूप ले सकता है कि डिजिटल और एकीकृत मीडिया युग में मीडिया नियमन को किस तरह बदला जाना चाहिए।

सरकार के सामने चुनौती यह होगी कि वह दर्शकों के हितों और नियामकीय उद्देश्यों के साथ-साथ उस उद्योग की आर्थिक मजबूती भी बनाए रखे, जो आज भी देश के करोड़ों घरों तक पहुंचता है। वहीं ब्रॉडकास्टर्स के लिए यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका अंतिम परिणाम तय करेगा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते दबदबे वाले विज्ञापन बाजार में टीवी नेटवर्क कितनी प्रभावी ढंग से अपनी जगह बनाए रख पाते हैं।

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'पाठशाला' की जंग: सुशांत सिन्हा के सामने नई चुनौती, रूबिका लियाकत संभालेंगी पुरानी पाठशाला

पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने जिस तरह एक्सप्लेनेर आधारित पत्रकारिता को लोकप्रिय बनाया है, उसने उन्हें हिंदी न्यूज के सबसे प्रभावशाली एंकरों में शामिल कर दिया है।

Vikas Saxena by
Published - Tuesday, 16 June, 2026
Last Modified:
Tuesday, 16 June, 2026
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हिंदी न्यूज के प्राइम टाइम में एक दिलचस्प मुकाबला शुरू हो गया है, लेकिन इस मुकाबले का सबसे बड़ा और सबसे चर्चित चेहरा वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सिन्हा हैं। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने जिस तरह एक्सप्लेनेर आधारित पत्रकारिता को लोकप्रिय बनाया है, उसने उन्हें हिंदी न्यूज के सबसे प्रभावशाली एंकरों में शामिल कर दिया है। अब उनकी नई पारी और उनकी पुरानी पहचान, दोनों एक-दूसरे के सामने खड़ी नजर आ रही हैं।

एक तरफ सुशांत सिन्हा न्यूज18 इंडिया पर "देश की पाठशाला" के साथ नई शुरुआत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर टाइम्स नाउ नवभारत ने अपने चर्चित शो "न्यूज की पाठशाला" की जिम्मेदारी रूबिका लियाकत को सौंप दी है। दिलचस्प बात यह है कि "न्यूज की पाठशाला" को लोकप्रिय बनाने और उसे दर्शकों के बीच स्थापित करने का श्रेय काफी हद तक सुशांत सिन्हा को जाता है। ऐसे में अब उनकी नई पाठशाला और उनकी पुरानी पाठशाला के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा।

16 जून 2026 से न्यूज18 इंडिया "देश की पाठशाला" लॉन्च कर रहा है। शो का नेतृत्व सुशांत सिन्हा करेंगे और यह रात 8:50 बजे टीवी, CTV और यूट्यूब पर एक साथ प्रसारित होगा। चैनल इसे पारंपरिक डिबेट से अलग डेटा, फैक्ट्स, ग्राफिक्स और गहन विश्लेषण पर आधारित एक्सप्लेनेर फॉर्मेट के रूप में पेश कर रहा है।

सुशांत सिन्हा आज हिंदी न्यूज के उन चुनिंदा पत्रकारों में गिने जाते हैं जिनकी मजबूत टीवी उपस्थिति के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी बड़ी फैन फॉलोइंग है। उनके वीडियो नियमित रूप से लाखों दर्शकों तक पहुंचते हैं और सोशल मीडिया पर भी उनकी प्रभावशाली मौजूदगी है। टाइम्स नाउ नवभारत पर "पाठशाला" और "राष्ट्रगर्व" जैसे कार्यक्रमों ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई। करीब दो दशक के करियर में वह इंडिया टीवी, एनडीटीवी इंडिया, न्यूज24 और इंडिया न्यूज जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुके हैं।

उधर, टाइम्स नाउ नवभारत भी अपनी "न्यूज की पाठशाला" को नए अंदाज में पेश करने की तैयारी कर चुका है। सुशांत सिन्हा के चैनल छोड़ने के बाद यह सवाल लगातार उठ रहा था कि शो की कमान किसे सौंपी जाएगी। अब चैनल ने इस जिम्मेदारी के लिए रूबिका लियाकत पर भरोसा जताया है।

टाइम्स नेटवर्क ने रूबिका लियाकत को सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर और वाइस प्रेसिडेंट (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) नियुक्त किया है। वह 17 जून से "न्यूज की पाठशाला" की मेजबानी करेंगी। रूबिका हिंदी टीवी पत्रकारिता का एक स्थापित नाम हैं और राजनीतिक रिपोर्टिंग तथा प्राइम टाइम एंकरिंग में उनका लंबा अनुभव रहा है। उन्होंने नेटवर्क18 इंडिया, एबीपी न्यूज, ज़ी न्यूज, न्यूज24, भारत24 और लाइव इंडिया जैसे संस्थानों में काम किया है।

हालांकि इस पूरे मुकाबले में सबसे ज्यादा चर्चा सुशांत सिन्हा की नई पारी को लेकर है। इसकी वजह सिर्फ चैनल परिवर्तन नहीं, बल्कि वह दर्शक आधार भी है जो वर्षों से उनके साथ जुड़ा हुआ है। मीडिया इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि एक्सप्लेनेर फॉर्मेट को हिंदी न्यूज के मुख्यधारा प्राइम टाइम में लोकप्रिय बनाने वालों में सुशांत सिन्हा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

दरअसल, यह मुकाबला सिर्फ दो एंकरों का नहीं है। यह हिंदी न्यूज में बदलती कंटेंट रणनीति का भी संकेत है। लंबे समय तक प्राइम टाइम बहस, शोर-शराबे और राजनीतिक टकराव के इर्द-गिर्द घूमता रहा, लेकिन अब दर्शक खबरों को समझने वाले कंटेंट की ओर बढ़ रहे हैं। डेटा, फैक्ट्स, रिसर्च और विजुअल स्टोरीटेलिंग तेजी से महत्व हासिल कर रहे हैं।

"देश की पाठशाला" और "न्यूज की पाठशाला" इसी बदलाव का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों शो का मूल उद्देश्य खबरों को आसान भाषा में समझाना है, लेकिन इस फॉर्मेट के साथ सुशांत सिन्हा का जुड़ाव और उनकी स्थापित दर्शक स्वीकार्यता उन्हें इस मुकाबले में शुरुआती बढ़त देती नजर आती है।

आने वाले दिनों में दर्शक तय करेंगे कि उन्हें कौन-सी पाठशाला ज्यादा पसंद आती है, लेकिन फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि हिंदी न्यूज का यह नया मुकाबला काफी हद तक सुशांत सिन्हा की नई पारी के इर्द-गिर्द केंद्रित दिखाई दे रहा है। प्राइम टाइम में अब डिबेट बनाम डिबेट नहीं, बल्कि ''एक्सप्लेनर'' बनाम 'एक्सप्लेनर'' की जंग होगी, और इस जंग में सबसे ज्यादा नजरें उस चेहरे पर होंगी, जिसने इस फॉर्मेट को सबसे ज्यादा पहचान दिलाई।

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हिंदी न्यूज में प्राइम टाइम की जंग तेज, बड़े चेहरों ने बदली रणनीति

हिंदी न्यूज चैनलों के सबसे अहम माने जाने वाले 9 बजे के प्राइम टाइम स्लॉट में एक बार फिर हलचल तेज होती दिखाई दे रही है।

Vikas Saxena by
Published - Monday, 15 June, 2026
Last Modified:
Monday, 15 June, 2026
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हिंदी न्यूज चैनलों के सबसे अहम माने जाने वाले 9 बजे के प्राइम टाइम स्लॉट में एक बार फिर हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। हाल के दिनों में एंकरों की अदला-बदली, नए शो की लॉन्चिंग और टाइम स्लॉट में बदलाव ने इस मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

दर्शकों की नजरें अब 8:30 बजे से 9 बजे के बीच होने वाली उस प्रतिस्पर्धा पर टिकी हैं, जहां देश के दो चर्चित पत्रकार- रजत शर्मा और सुशांत सिन्हा अपने-अपने चैनलों के साथ नए अंदाज में मैदान में उतर रहे हैं।

इंडिया टीवी के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा का लोकप्रिय शो ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ का टाइम स्लॉच बदल दिया गया है, जोकि 15 जून से यानी आज रात 9 बजे की बजाय 8:30 बजे प्रसारित होगा। चैनल ने इसे अपनी प्राइम टाइम रणनीति को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया है।

वहीं, न्यूज18 इंडिया ने अपने प्राइम टाइम लाइनअप को मजबूत करते हुए वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सिन्हा के साथ नए फ्लैगशिप शो ‘देश की पाठशाला’ (Desh Ki Pathshala) की शुरुआत की है। यह शो 16 जून से रोजाना रात 8:50 बजे प्रसारित होगा। चैनल का दावा है कि यह पारंपरिक डिबेट फॉर्मेट से अलग डेटा, रिसर्च और विश्लेषण आधारित एक्सप्लेनर शो होगा, जो खबरों को सिर्फ बताएगा नहीं बल्कि समझाएगा भी।

मीडिया जगत के जानकारों का मानना है कि यह बदलाव केवल टाइम स्लॉट का फेरबदल नहीं है, बल्कि दर्शकों को आकर्षित करने की एक बड़ी रणनीतिक लड़ाई है। एक तरफ रजत शर्मा का शो वर्षों से हिंदी न्यूज के सबसे चर्चित प्राइम टाइम कार्यक्रमों में शामिल रहा है, वहीं दूसरी ओर सुशांत सिन्हा अपने विश्लेषणात्मक अंदाज और डिजिटल दर्शकों के बीच मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि अब दोनों कार्यक्रम लगभग एक ही समयावधि में दर्शकों का ध्यान खींचने की कोशिश करेंगे। ऐसे में 8:30 से 9 बजे का स्लॉट हिंदी न्यूज चैनलों के लिए नया रणक्षेत्र बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि दर्शक किस फॉर्मेट को ज्यादा पसंद करते हैं- रजत शर्मा का स्थापित और भरोसेमंद विश्लेषण या सुशांत सिन्हा का नया एक्सप्लेनर मॉडल।

फिलहाल इतना तय है कि हिंदी न्यूज का प्राइम टाइम एक बार फिर गर्म हो चुका है और टीआरपी की जंग में नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं।

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'टाइम्स नाउ नवभारत' में इस बड़े पद पर जुड़ीं रुबिका लियाकत

टाइम्स नेटवर्क ने जानी-मानी पत्रकार रुबिका लियाकत की नियुक्ति का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 15 June, 2026
Last Modified:
Monday, 15 June, 2026
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टाइम्स नेटवर्क ने जानी-मानी पत्रकार रुबिका लियाकत की नियुक्ति का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। उन्हें हिंदी न्यूज चैनल 'टाइम्स नाउ नवभारत' में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही वह नेटवर्क में वाइस प्रेजिडेंट (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) की अतिरिक्त भूमिका भी निभाएंगी। वह नोएडा स्थित नेटवर्क के कार्यालय से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगी।

रुबिका लियाकत के पास ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म, राजनीतिक रिपोर्टिंग, प्राइम-टाइम एंकरिंग और न्यूजरूम नेतृत्व का 19 वर्षों से अधिक का समृद्ध अनुभव है। पत्रकारिता जगत में उन्होंने अपनी मजबूत और प्रभावशाली पहचान बनाई है।

'टाइम्स नाउ नवभारत' से जुड़ने से पहले रुबिका लियाकत 'नेटवर्क18 इंडिया' में कंसल्टिंग एडिटर और प्राइम-टाइम एंकर के रूप में कार्यरत थीं, जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और विशेष कवरेज का नेतृत्व किया।

अपने लंबे पत्रकारिता करियर के दौरान उन्होंने देश के कई प्रमुख समाचार संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। इनमें एबीपी न्यूज, ज़ी न्यूज, न्यूज24, भारत24 और लाइव इंडिया जैसे बड़े मीडिया संस्थान शामिल हैं।

टाइम्स नेटवर्क में उनकी यह नई पारी हिंदी समाचार प्रसारण क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उनके व्यापक अनुभव और संपादकीय नेतृत्व से टाइम्स नाउ नवभारत को अपनी कंटेंट रणनीति और दर्शकों के साथ जुड़ाव को और मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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Zee Media: श्वेता गोपालन का स्वतंत्र निदेशक के रूप में पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव मंजूर

जी मीडिया (Zee Media) ने 13 जून 2026 को आयोजित असाधारण आम बैठक में श्वेता गोपालन को कंपनी की स्वतंत्र महिला निदेशक के रूप में पुनर्नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

Vikas Saxena by
Published - Monday, 15 June, 2026
Last Modified:
Monday, 15 June, 2026
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जी मीडिया (Zee Media) ने 13 जून 2026 को आयोजित असाधारण आम बैठक (Extra Ordinary General Meeting - EGM) में श्वेता गोपालन को कंपनी की स्वतंत्र महिला निदेशक के रूप में पुनर्नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) और अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यमों (OAVM) के जरिए आयोजित की गई थी। शेयरधारकों की मंजूरी के बाद श्वेता गोपालन का दूसरा लगातार पांच वर्षीय कार्यकाल 1 अगस्त 2026 से शुरू होकर 31 जुलाई 2031 तक रहेगा। 

कंपनी ने सेबी (लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशंस, 2015 के रेगुलेशन 30 के तहत यह जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को दी।

कंपनी ने बताया कि 18 मई 2026 को हुई बोर्ड बैठक में निदेशक मंडल ने श्वेता गोपालन से प्राप्त पुष्टि के आधार पर यह भी नोट किया था कि उन्हें भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) या किसी अन्य प्राधिकरण द्वारा निदेशक पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है।

श्वेता गोपालन को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के रूप में दूसरे कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति 1 अगस्त 2026 से 31 जुलाई 2031 तक पांच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगी। इस पुनर्नियुक्ति को 13 जून 2026 को आयोजित EGM में शेयरधारकों ने मंजूरी प्रदान की।

श्वेता गोपालन का दूसरा लगातार पांच वर्षीय कार्यकाल 1 अगस्त 2026 से 31 जुलाई 2031 तक रहेगा। इस दौरान वे रोटेशन के आधार पर सेवानिवृत्त होने के लिए उत्तरदायी नहीं होंगी।

श्वेता गोपालन ने अन्ना यूनिवर्सिटी से इंडस्ट्रियल बायोटेक्नोलॉजी में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (B.Tech) की डिग्री हासिल की है। इसके अलावा उन्होंने सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी से जनरल मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरा किया है और अमेरिका के केलॉग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की डिग्री प्राप्त की है। उनके पास FITCH से क्वांटिटेटिव फाइनेंस में सर्टिफिकेशन भी है।

श्वेता गोपालन ने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत वर्ष 2010 में अमेरिका स्थित Johns Hopkins Medicine International के साथ की थी। इसके बाद उन्होंने 2011-2012 के दौरान सिंगापुर की Parkway Health में और 2012-2013 के दौरान Noble Group, Singapore में कार्य किया।

बाद में वर्ष 2015 से 2016 के बीच उन्होंने अमेरिका में Tata Consultancy Services (TCS) में बिजनेस एनालिस्ट के रूप में अपनी सेवाएं दीं।

 

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टीवी-रेडियो सेवाओं को लेकर नए नियमों का ड्राफ्ट जारी, सरकार ने जनता से मांगी राय

केंद्र सरकार ने प्रसारण क्षेत्र में बड़ा बदलाव करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए टेलीकम्युनिकेशंस (टेलीविजन, रेडियो एंड एसोसिएटेड सर्विसेज) रूल्स, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है।

Vikas Saxena by
Published - Monday, 15 June, 2026
Last Modified:
Monday, 15 June, 2026
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केंद्र सरकार ने प्रसारण क्षेत्र में बड़ा बदलाव करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए टेलीकम्युनिकेशंस (टेलीविजन, रेडियो व एसोसिएटेड सर्विसेज) रूल्स, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है। ये नियम 2023 में लागू हुए नए टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट के तहत तैयार किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य टीवी चैनलों, डीटीएच, HITS, IPTV, प्राइवेट एफएम रेडियो और कम्युनिटी रेडियो से जुड़े बिखरे हुए नियमों को एक ही ढांचे में लाना है, ताकि इंडस्ट्री को एक सरल, पारदर्शी और एकीकृत व्यवस्था मिल सके।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अनुसार नया टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट 2023 पुराने और 1885 के टेलीग्राफ एक्ट की जगह लेकर आया है। टीवी और रेडियो सेवाओं से संबंधित प्रावधानों को लागू करने की जिम्मेदारी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पास है। इसी के तहत नए ड्राफ्ट नियम तैयार किए गए हैं। इन नियमों में सैटेलाइट टीवी चैनलों की अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग गाइडलाइंस, डीटीएच ब्रॉडकास्टिंग सर्विसेज, हेडएंड-इन-द-स्काई (HITS), प्राइवेट एफएम रेडियो फेज-III, कम्युनिटी रेडियो और IPTV सेवाओं से जुड़े विभिन्न दिशा-निर्देशों को एक साथ समाहित किया गया है।

नए नियमों के तहत टीवी चैनल, टीवी चैनल डिस्ट्रीब्यूशन सर्विस, टेलीपोर्ट, टीवी न्यूज एजेंसी, प्राइवेट रेडियो सेवा और कम्युनिटी रेडियो सेवा के लिए अलग-अलग प्रकार के ऑथराइजेशन का प्रावधान किया गया है। टीवी चैनलों को न्यूज और नॉन-न्यूज श्रेणियों में बांटा गया है और इन्हें सैटेलाइट या टेरेस्ट्रियल माध्यम से प्रसारित किया जा सकेगा।

टीवी चैनल शुरू करने के लिए कंपनी या एलएलपी होना जरूरी होगा। आवेदक को विदेशी निवेश संबंधी नियमों का पालन करना होगा और निर्धारित न्यूनतम नेटवर्थ की शर्तें पूरी करनी होंगी। इसके अलावा चैनल के नाम और लोगो के लिए ट्रेडमार्क या संबंधित अधिकार होना भी अनिवार्य होगा। चैनल के पास अपने कंटेंट के मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन अधिकार भी होने चाहिए।

डीटीएच और HITS सेवाओं के लिए भी कई नई शर्तें प्रस्तावित की गई हैं। सरकार ने क्रॉस मीडिया ओनरशिप को सीमित करने के लिए स्पष्ट नियम तय किए हैं। किसी टीवी चैनल या मल्टी सिस्टम ऑपरेटर की डीटीएच कंपनी में हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेगी। इसी तरह डीटीएच ऑपरेटर भी किसी टीवी चैनल या एमएसओ में 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी नहीं रख सकेगा। HITS और टीवी चैनलों के बीच भी हिस्सेदारी की अधिकतम सीमा 20 प्रतिशत तय की गई है।

प्राइवेट एफएम रेडियो सेवाओं के लिए सरकार नीलामी के जरिए ऑथराइजेशन देगी। आवेदन करने वाली कंपनी में सबसे बड़े भारतीय शेयरधारक की हिस्सेदारी कम से कम 51 प्रतिशत होनी चाहिए। साथ ही कंपनी किसी राजनीतिक, धार्मिक या गैर-लाभकारी संगठन से जुड़ी नहीं होनी चाहिए। विज्ञापन एजेंसियों और उनसे जुड़ी कंपनियों को भी इस क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

सरकार ने एफएम रेडियो सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए यह भी प्रस्ताव रखा है कि कोई भी ऑपरेटर किसी शहर में कुल एफएम चैनलों के 40 प्रतिशत से अधिक चैनलों का संचालन नहीं कर सकेगा। इसके अलावा प्रत्येक शहर में कम से कम तीन अलग-अलग ऑपरेटरों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी।

कम्युनिटी रेडियो के लिए भी नए मानदंड तय किए गए हैं। ऐसी सेवा के लिए आवेदन करने वाले संगठन को संबंधित क्षेत्र में कम से कम तीन वर्षों से सामुदायिक विकास कार्यों में सक्रिय होना होगा। कोई भी संस्था अधिकतम छह कम्युनिटी रेडियो ऑथराइजेशन ही रख सकेगी। साथ ही उसे विदेशी निवेश और विदेशी अंशदान से जुड़े कानूनों का पालन करना होगा।

ड्राफ्ट नियमों के अनुसार IPTV सेवा शुरू करने के लिए संबंधित संस्था के पास या तो इंटरनेट सेवा प्रदान करने का ऑथराइजेशन होना चाहिए या फिर वह केबल टीवी कानून के तहत मल्टी सिस्टम ऑपरेटर के रूप में पंजीकृत होनी चाहिए।

सरकार ने पुराने लाइसेंस धारकों को नए ढांचे में आने का विकल्प भी दिया है। जो कंपनियां पुराने टेलीग्राफ एक्ट के तहत लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन या अनुमति लेकर काम कर रही हैं, वे नए नियमों के तहत माइग्रेशन के लिए आवेदन कर सकेंगी। हालांकि इसके लिए उन्हें अपने सभी बकाया भुगतान और देनदारियां पहले चुकानी होंगी।

सुरक्षा को लेकर भी नियमों में सख्ती दिखाई गई है। सभी अधिकृत संस्थाओं और उनके प्रमुख अधिकारियों को पूरे ऑथराइजेशन काल के दौरान सुरक्षा मंजूरी बनाए रखनी होगी। न्यूज चैनल, टीवी न्यूज एजेंसी, डीटीएच और प्राइवेट रेडियो सेवाओं में अधिकांश निदेशक और प्रमुख अधिकारी भारत में निवासी होने चाहिए। किसी विदेशी तकनीकी विशेषज्ञ की नियुक्ति से पहले केंद्र सरकार की सुरक्षा मंजूरी लेना भी अनिवार्य होगा।

नए नियमों में निगरानी और जवाबदेही पर भी विशेष जोर दिया गया है। सभी अधिकृत संस्थाओं को अपने कार्यक्रमों और विज्ञापनों की रिकॉर्डिंग कम से कम 90 दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी। यदि किसी कार्यक्रम को लेकर शिकायत, विवाद, जांच या न्यायिक कार्यवाही चल रही हो तो उसकी रिकॉर्डिंग अंतिम निर्णय तक सुरक्षित रखनी होगी। सरकार को किसी भी समय निरीक्षण और जांच का अधिकार भी दिया गया है।

टीवी चैनलों के लिए प्रस्तावित नियमों के अनुसार उन्हें स्पेक्ट्रम आवंटन के एक वर्ष के भीतर अपना संचालन शुरू करना होगा। यदि कोई चैनल लगातार 90 दिनों तक बंद रहता है तो उसका ऑथराइजेशन वापस लिया हुआ माना जा सकता है। टीवी चैनलों को केवल अधिकृत डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म, मल्टी सिस्टम ऑपरेटर या IPTV सेवा प्रदाताओं को ही अपने सिग्नल उपलब्ध कराने की अनुमति होगी।

ड्राफ्ट में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि सभी टीवी चैनलों को प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट ऐसे कार्यक्रम प्रसारित करने होंगे जो राष्ट्रीय महत्व और सामाजिक सरोकारों से जुड़े हों। इनमें शिक्षा, साक्षरता, कृषि, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, विज्ञान एवं तकनीक, महिला कल्याण, कमजोर वर्गों का उत्थान, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता जैसे विषय शामिल होंगे। यह प्रसारण सुबह 6 बजे से रात 11 बजे के बीच करना होगा। हालांकि सरकार कुछ विशेष चैनलों को इस प्रावधान से छूट दे सकती है।

टीवी चैनलों को अपने चैनल की उपलब्धता और लैंडिंग पेज से जुड़ी जानकारी सरकार तथा अधिकृत टीवी रेटिंग एजेंसियों को भी उपलब्ध करानी होगी।

यदि कोई टीवी चैनल अपनी श्रेणी बदलना चाहता है, जैसे न्यूज से नॉन-न्यूज या नॉन-न्यूज से न्यूज, अथवा सैटेलाइट से टेरेस्ट्रियल माध्यम में बदलाव करना चाहता है, तो उसे सरकार से अनुमति लेनी होगी। चैनल का नाम या लोगो बदलने के लिए भी आवेदन करना होगा और संबंधित ट्रेडमार्क अधिकारों का प्रमाण देना होगा।

डीटीएच और अन्य टीवी डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं को भी स्पेक्ट्रम आवंटन के एक वर्ष के भीतर अपना संचालन शुरू करना होगा। उन्हें केवल अधिकृत टीवी चैनलों का ही पुनर्प्रसारण करने की अनुमति होगी। सभी प्रसारण भारतीय सीमा के भीतर स्थित एन्क्रिप्शन और कंडीशनल एक्सेस सिस्टम के जरिए संचालित करने होंगे। सरकार समय-समय पर कुछ सार्वजनिक प्रसारण चैनलों को अनिवार्य रूप से प्रसारित करने का निर्देश भी दे सकेगी।

प्राइवेट एफएम रेडियो सेवाओं के लिए सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये सेवाएं पूरी तरह फ्री-टू-एयर होंगी और श्रोताओं से कोई शुल्क नहीं लिया जा सकेगा। रेडियो स्टेशनों को प्रतिदिन कम से कम एक घंटे ऐसे कार्यक्रम प्रसारित करने होंगे जो राष्ट्रीय और सामाजिक महत्व के विषयों पर आधारित हों। इसके अलावा कुल प्रसारण का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय कंटेंट होना अनिवार्य होगा।

एफएम रेडियो स्टेशनों को स्वतंत्र समाचार प्रसारण की अनुमति नहीं होगी। वे केवल आकाशवाणी के बिना बदलाव वाले समाचार बुलेटिन प्रसारित कर सकेंगे। हालांकि खेल, ट्रैफिक, मौसम, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, रोजगार, परीक्षाओं और जनहित से जुड़ी सूचनाओं को गैर-समाचार श्रेणी में रखा गया है और उनका प्रसारण किया जा सकेगा।

कम्युनिटी रेडियो सेवाओं को प्रतिदिन कम से कम दो घंटे संचालित करना होगा। वे भी फ्री-टू-एयर होंगी और श्रोताओं से कोई शुल्क नहीं लिया जा सकेगा। चैनल की पहचान में "कम्युनिटी रेडियो" शब्द प्रमुखता से दिखाना अनिवार्य होगा। साथ ही हर कम्युनिटी रेडियो स्टेशन को एक सलाहकार और कंटेंट समिति बनानी होगी, जिसमें स्थानीय समुदाय के सदस्य शामिल होंगे और कम से कम आधी सदस्य महिलाएं होंगी।

कम्युनिटी रेडियो स्टेशन कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, संस्कृति और सामाजिक विकास से जुड़े स्थानीय मुद्दों पर कार्यक्रम प्रसारित कर सकेंगे। उन्हें स्वतंत्र समाचार प्रसारण की अनुमति नहीं होगी, लेकिन वे आकाशवाणी के समाचार बुलेटिन का स्थानीय भाषा या बोली में अनुवाद करके प्रसारण कर सकेंगे, बशर्ते समाचार की मूल भावना और सामग्री में कोई बदलाव न किया जाए।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इन ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक और अंतर-मंत्रालयी परामर्श के लिए जारी किया है। मंत्रालय ने इंडस्ट्री, ब्रॉडकास्ट कंपनियों, हितधारकों और आम नागरिकों से 27 जुलाई 2026 तक सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। सरकार का मानना है कि इन नियमों के लागू होने के बाद टीवी, रेडियो, डीटीएच, HITS और IPTV क्षेत्र के लिए लाइसेंसिंग, संचालन, निगरानी और अनुपालन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल और आधुनिक हो जाएगी।

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