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ट्रेंड सेटर भूपेंद्र चौबे का ‘ViewPoint’ क्यों है खास?

‘आउट ऑफ़ द बॉक्स’ सोचने वाले चौबे अपने शो ViewPoint (व्यूपॉइंट) के माध्यम से उन लोगों के बीच पहुंच रहे हैं, जिन्हें अक्सर अनसुना कर दिया जाता है

समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago

मीडिया, खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर यह आरोप लगता है कि उसने खुद को स्टूडियो तक सीमित करके रख लिया है। सीधे शब्दों में कहें तो स्टूडियो में होने वाली डिबेट को ही एंकर आवाम की राय मान लेते हैं और उसी पल जज बनकर फैसला भी सुना देते हैं। इस आरोप को भले ही स्वीकार न किया जाए, लेकिन इससे इंकार भी नहीं किया जा सकता। 

हालांकि, वरिष्ठ पत्रकार और CNN News18 (सीएनएन न्यूज) 18 के एग्जीक्यूटिव एडिटर भूपेंद्र चौबे इस सीमित दायरे को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं और उसमें काफी हद तक सफल भी हुए हैं। ‘आउट ऑफ़ द बॉक्स’ सोचने वाले चौबे अपने शो ViewPoint (व्यूपॉइंट) के माध्यम से उन लोगों के बीच पहुंच रहे हैं, जिन्हें अक्सर अनसुना कर दिया जाता है। उदाहरण के लिए ‘अयोध्या विवाद’ पर जहां अधिकांश खबरिया चैनल दोनों पक्षों के नेताओं को बुलाकर बांसी खिचड़ी पकाते रहे, वहीं चौबे ने उनकी राय जानी, जो अयोध्या पर कोर्ट के फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले हैं यानी आम जनता। 

‘व्यूपॉइंट’ हर रोज शाम 5:57 बजे प्रसारित होता है, शो में चौबे कोई ज्वलंत मुद्दा उठाते हैं और उसे लेकर सीधे जनता के बीच पहुंच जाते हैं। आमतौर पर न्यूज चैनलों के लिए 9 बजे का स्लॉट प्राइम टाइम स्लॉट होता है, ज़्यादातर प्रमुख शो इसी समय आते हैं। लेकिन चौबे के ‘व्यूपॉइंट’ ने प्राइम टाइम की परिभाषा ही बदल दी है।

चौबे और उनके ‘व्यूपॉइंट’ की ख़ास बात यह है कि वो केवल सीमित मुद्दों तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि उन समस्याओं को भी मुद्दा बनाकर सामने लाते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना आदत बनती जा रही है। महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव की आज वोटिंग हैं। दोनों ही राज्यों में मतदाताओं का मिजाज भांपने के लिए लगभग सभी मीडिया हाउस ने विशेष कार्यक्रम तैयार किये, लेकिन चौबे ने सबसे जुदा तस्वीर पेश की। उन्होंने सियासी आंकड़ेबाजी से इतर यह सवाल किया कि बदहाल सड़कें, ध्वस्त होतीं इमारतें, कटते पेड़ और पीएमसी बैंक पीड़ितों का दर्द राजनीतिक दलों के लिए मुद्दा क्यों नहीं है, क्यों कोई इस पर बात नहीं करता? उन्होंने लोगों से भाजपा के वादों पर भी बात की, और नेताओं के हाल भी जानें। यानी एक तरह से उन्होंने ‘व्यूपॉइंट’ के रूप में एक ऐसा चुनावी पैकेज पेश किया, जिसमें नेताओं का ही नहीं आम आदमी का भी जिक्र था।

‘व्यूपॉइंट’ अंग्रेजी मीडिया में अपनी तरह का एकमात्र ऐसा प्रोग्राम है, जहां आम जनता के बीच जाकर बात की जाती है। इसके समय का निर्धारण भी एक खास रणनीति के तहत किया गया है। दरअसल, भूपेंद्र चौबे ‘व्यूपॉइंट’ को सामान्य शो से हटकर जनता से जुड़ाव वाले शो में तब्दील करना चाहते थे, इसके लिए लोगों से संवाद जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए 6 बजे का स्लॉट तय किया गया, ताकि जब चौबे सड़कों पर निकलें वह लोगों से भरी नजर आएं। 

समाचार4 मीडिया से बात करते हुए चौबे ने कहा ‘आजकल अधिकांश शो स्टूडियो आधारित हो गए हैं, जनता वहां से गायब है। हमारी कोशिश है कि लोगों के दृष्टिकोण को ज्यादा तवज्जो दी जाए। जनता को दोबारा से जोड़ा जाए। लिहाजा, जहां कहानी होती है, हम वहीं पहुंच जाते हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मैं चार दिन मुंबई में रहा, लोकल से लेकर ऑटो तक में सफर किया, लोगों की राय जानी। कई बाज़ारों में घूमा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वादों को पूरा करने में सरकार कितनी सफल हुई है।’

‘व्यूपॉइंट’ में भले ही ज्वलंत मुद्दों को उठाया जाता है, लेकिन जैसा कि शो की थीम है ‘पीपुल्स फर्स्ट’, लोगों की इच्छा को भी प्राथमिकता मिलती है और उनकी इच्छा जानने के लिए चौबे एक अनोखा प्रयोग कर रहे हैं। वह जब मॉर्निंग वॉक पर निकलते हैं, तो केवल वॉक ही नहीं करते बल्कि टॉक भी करते हैं। यानी सैर के साथ ही अपने दर्शकों का दिल भी टटोल लेते हैं। डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म जैसे फेसबुक लाइव के माध्यम से चौबे अपने दर्शकों से कनेक्ट होते हैं और उनसे पूछते हैं कि आखिरी वह ‘व्यूपॉइंट’ में क्या देखना चाहते हैं। इतना ही नहीं, टहलते-टहलते कई मुद्दों पर सार्थक चर्चा भी होती है। लोगों को जोड़ने का चौबे यह प्रयोग काफी कारगर साबित हो रहा है, और इसका फायदा सीधे तौर पर ‘व्यूपॉइंट’ और चैनल को मिलना तय है।  

 गौरतलब है कि चौबे के पास पत्रकारिता का लंबा अनुभव है। ‘नेटवर्क18’ समूह का हिस्सा बनने से पहले वो ‘एनडीटीवी’ में थे। वहां पांच साल की पारी खेलने के बाद उन्होंने वर्ष 2005 में सीएनएन-न्यूज़ 18 (CNN-IBN) में कदम रखा और तब से अब तक यहीं अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रहे हैं। बीस वर्षों से ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय चौबे की न सिर्फ अंग्रेजी बल्कि हिंदी भाषा पर भी काफी अच्छी पकड़ है। 


टैग्स भूपेंद्र चौबे सीएनएन न्यूज18
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