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न्यूज रेटिंग्स को लेकर NDTV के गंभीर आरोप, विरोध के लिए उतारी अपने 'सूरमाओं' की टीम
न्यूज चैनल्स की रेटिंग्स को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दिनों ही ‘एनडीटीवी’ (NDTV) ने BARC इंडिया के रेटिंग सिस्टम से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
न्यूज चैनल्स की रेटिंग्स को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दिनों ही ‘NDTV 24x7’ और ‘NDTV India’ न्यूज चैनल्स के स्वामित्व वाले न्यूज ब्रॉडकास्टर्स ‘एनडीटीवी’ (NDTV) ने ‘ब्रॉडकास्टर्स ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया के रेटिंग सिस्टम से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं।
पिछले दिनों हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) से ‘एनडीटीवी’ ग्रुप की प्रेजिडेंट सुपर्णा सिंह कह चुकी हैं, ‘एनडीटीवी ने बार-बार इस ओर इशारा किया है कि यदि बार्क एक ऐसी मापन प्रणाली (measurement process) सुनिश्चित करने के लिए गंभीर है, जिसमें हेराफेरी या छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है, तो एक बड़े सैंपल साइज (मीटर) की आवश्यकता है।‘
अब इस मामले को लेकर ‘एनडीटीवी’ ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है। वरिष्ठ टीवी पत्रकार और 'एनडीटीवी' में कंसल्टिंग एडिटर संकेत उपाध्याय ने इस वीडियो को अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है। इस वीडियो में संकेत उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि टीवी चैनल्स की रेटिंग खरीदी जाती है। इसमें घपला और फिक्सिंग सब चलता है। वहीं, इस वीडियो में ‘एनडीटीवी’ के ग्रुप एडिटर रवीश कुमार का कहना है कि इस घपले को पकड़ा जा चुका है, फिर भी इसमें कुछ कार्रवाई नहीं हुई है।
‘एनडीटीवी’ की एग्जिक्यूटिव एडिटर निधि कुलपति का कहना है कि इस तरह से हर महीने दर्शकों के सैकड़ों करोड़ रुपये का दुरुपयोग हो रहा है। विज्ञापन देने वालों को भी झांसे में रखा जा रहा है। आपका पैसा ऐसे चैनल्स को दिया जा रहा है, जिन्होंने व्युअरशिप हासिल नहीं की है, बल्कि उन्होंने आंकड़े खरीदे हैं। इस वीडियो में चैनल के सीनियर एंकर्स का कहना है कि रेटिंग पर भरोसा मत कीजिए, बल्कि सच्चाई का साथ दीजिए। संकेत उपाध्याय का इस वीडियो में यह भी कहना है, ’बहुत से आंकड़े ऐसे हैं, जो यह बताते हैं कि एनडीटीवी आपके भरोसे का ब्रैंड है। पिछले दो साल में एनडीटीवी ने छह बार सबसे विश्वसनीय ब्रैंड होने का सम्मान हासिल किया है। वीडियो के आखिर में एनडीटीवी की ओर से कहा गया है कि हम व्युअरशिप खरीदते नहीं, अर्जित करते हैं।’
कमाया जाता है भरोसा pic.twitter.com/pBbJlxAoO2
— Sanket Upadhyay (@sanket) June 17, 2022
गौरतलब है कि ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन‘ (NBDA) ने भी कुछ माह पूर्व ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) द्वारा जारी न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप रेटिंग्स में ‘गड़बड़ियों और अनियमितताओं’ को लेकर चिंता जताई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘एनबीडीए’ का कहना था कि कुछ चैनल्स ने अपनी व्युअरशिप में बढ़ोतरी और रैंकिंग में बदलाव की बात कही है, जो असामान्य प्रतीत होती है।
बता दें कि 17 महीने के अंतराल के बाद ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) के आदेश के बाद बार्क ने 17 मार्च से न्यूज रेटिंग्स देना दोबारा शुरू किया है। नई व्यवस्था के अंतर्गत न्यूज और विशिष्ट वर्ग के लिए रेटिंग्स चार सप्ताह की रोलिंग औसत परिकल्पना (four-week rolling average basis) के आधार पर जारी की जा रही है।
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