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TV रेटिंग एजेंसीज के लिए गाइडलाइंस में बड़ा बदलाव प्रस्तावित, MIB ने मांगे सुझाव
सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने भारत में टेलीविजन रेटिंग एजेंसीज के लिए मौजूदा पॉलिसी गाइडलाइंस में अहम बदलावों का प्रस्ताव रखा है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 7 months ago
सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने भारत में टेलीविजन रेटिंग एजेंसीज के लिए मौजूदा पॉलिसी गाइडलाइंस में अहम बदलावों का प्रस्ताव रखा है। 2 जुलाई 2025 को जारी किए गए एक ड्राफ्ट ऑर्डर में मंत्रालय ने इन प्रस्तावित संशोधनों पर सार्वजनिक और हितधारकों से 30 दिनों के भीतर सुझाव आमंत्रित किए हैं। ये गाइडलाइंस सबसे पहले 16 जनवरी 2014 को अधिसूचित की गई थी।
प्रस्तावित संशोधन का मुख्य उद्देश्य हितों के टकराव (conflict of interest) को रोकना और पंजीकरण मानदंडों को अधिक सख्त और स्पष्ट बनाना है।
संशोधित क्लॉज 1.1 के तहत अब कोई भी संस्था जो टेलीविजन रेटिंग सेवाओं के लिए पंजीकरण कराना चाहती है, उसे भारतीय कंपनियों अधिनियम, 2013 के तहत रजिस्टर्ड कंपनी होना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा, क्लॉज 1.4 में संशोधन करते हुए यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि रेटिंग एजेंसीज कोई भी ऐसा परामर्श या सलाहकार कार्य नहीं कर सकतीं जो उनके मुख्य कार्य यानी दर्शकों की माप के साथ टकराव पैदा करे। संशोधन में कहा गया है, “कंपनी कोई भी परामर्श या इस प्रकार की सलाह की सेवा नहीं देगी, जो उसके मुख्य उद्देश्य यानी रेटिंग कार्य के साथ संभावित हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न कर सके।”
मंत्रालय ने क्लॉज 1.5 और 1.7 समेत एक संबंधित प्रावधान को भी हटा दिया है ताकि नियामकीय ढांचे को अधिक सरल और स्पष्ट बनाया जा सके। संशोधित प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू होंगे और ये नए आवेदकों के साथ-साथ पहले से पंजीकृत रेटिंग एजेंसीज पर भी समान रूप से लागू होंगे।
सरकार का यह कदम रेटिंग की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। यह संशोधन टेलीविजन न्यूज व एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली को और अधिक जिम्मेदार व संतुलित बनाने की दिशा में असर डाल सकते हैं।
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