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TV रेटिंग सिस्टम पर TRAI की सिफारिशों को लेकर इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने उठाए ये सवाल

बार्क का कहना है कि वह ट्राई की सिफारिशों की समीक्षा कर रही है, जबकि इंडस्ट्री से जुड़े तमाम एक्सपर्ट्स ने अपनी चिंता जताई है

समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago

‘टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (TRAI) ने मंगलवार को टेलिविजन ऑडियंस मीजरमेंट बॉडी के स्ट्रक्चर, गवर्नेंस, ऑपरेशंस, ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी के संदर्भ में ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया के लिए तमाम सिफारिशें जारी की हैं। अपनी इन सिफारिशों में ट्राई का कहना है कि कार्यप्रणाली साझा करने में पारदर्शिता की कमी और विभिन्न प्लेटफॉर्म्स के बीच पैनल होम के प्रतिनिधित्व के कारण बार्क (BARC) की रेटिंग सेवा से हितधारक (Stakeholders) संतुष्ट नहीं हैं। अपनी सिफारिशों में ‘ट्राई’ ने यह उल्लेख भी किया है कि बार्क में ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ (आईबीएफ) का बहुमत होने के साथ ही इसकी निष्पक्षता के साथ समझौता किया जाता है।

इस बारे में बार्क इंडिया के प्रवक्ता का कहना है कि ट्राई की सिफारिशें अभी-अभी प्राप्त हुई हैं और इनकी समीक्षा की जा रही है। बार्क इंडिया के अनुसार, ‘इन सिफारिशों को लेकर बार्क अपने बोर्ड और स्टेकहोल्डर्स के साथ सलाह-मशविरा कर रही है। इंडस्ट्री के सभी स्टेकहोल्डर्स, सरकार और संबंधित निकाय इस बात से भली भांति अवगत हैं कि बार्क इंडिया द्वारा जारी किए जाने वाले डाटा कितने वैज्ञानिक, सांख्यिकी और तकनीकी रूप से मजबूत होते हैं।’

प्रवक्ता का यह भी कहना है, ‘बार्क सही मायने में इंडस्ट्री के सभी पहलुओं का प्रतिनिधित्व करती है, जिसमें एडवर्टाइजर्स, एजेंसीज और ब्रॉडकास्टर्स शामिल हैं।’ ट्राई की सिफारिशों में कहा गया है कि स्टेकहोल्डर्स को इसके डाटा में पारदर्शिता की कमी लगती है, क्योंकि ऑरिजिनल डाटा व मार्केट में जो डाटा रिलीज किया जाता है, उसमें अंतर होता है। कई मार्केट्स से कम सैंपल लिए जाने से व्युअरशिप को लेकर अनियमितता रहती है और इसका परिणाम गलत व्याख्या के रूप में आता है। ट्राई के अनुसार, स्टेकहोल्डर्स की ओर से एक आपत्ति यह है कि टेक्नोलॉजी पर भारी निवेश किए जाने के बावजूद बार्क डाटा एक हफ्ते की देरी से आते हैं और रोजाना प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं

टीवी व्युअरशिप के डाटा कलेक्शन के बारे में ट्राई के बयान को लेकर एक वरिष्ठ मीडिया एग्जिक्यूटिव का कहना है, ‘पहली बात तो यह है कि रेटिंग सिस्टम को ट्राई के तहत नहीं आना चाहिए। रेगुलेटरी अथॉरिटी को तभी कुछ बोलना चाहिए, जब विवाद सीधे कंज्यूमर्स से जुड़ा हो। बार्क में ब्रॉडकास्टर्स, एजेंसीज और क्लाइंट्स शामिल हैं। इसका डाटा चैनल के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो क्लाइंट्स द्वारा खर्च किए गए पैसे को निर्धारित करता है। पूरे रेटिंग सिस्टम को ट्राई के तहत नहीं आना चाहिए, क्योंकि यह कंज्यूमर्स को सीधे प्रभावित नहीं करता है।’

ट्राई ने यह भी सिफारिशें दी हैं कि रेटिंग एजेंसी के लिए वर्तमान टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सैंपल साइज मौजूदा 44000 से बढ़ाकर वर्ष 2020 के अंत तक 60000 और वर्ष 2022 के अंत तक 100000 किया जाना चाहिए।   

ट्राई की इन सिफारिशों के बारे में एक अन्य वरिष्ठ मीडिया एग्जिक्यूटिव का कहना है कि कुछ सिफारिशें तो मान्य हैं और बार्क इन पर पहले से ही काम कर रहा है। उनका कहना है, ‘सैंपल साइज बढ़ाने के लिए बहुत ज्यादा निवेश की जरूरत होती है और उसे सभी तीनों पार्टियों द्वारा समान रूप से किए जाने की जरूरत है। एक-दो साल के अंदर पैनल साइज बढ़ाने और नई टेक्नोलॉजी लाने के लिए बार्क तैयारी कर रहा है।’

एक और सिफारिश बार्क को बोर्ड के पुनर्गठन के बारे में थी। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि बार्क के गठन के समय यह तय हुआ था कि बोर्ड में क्लाइंट्स और एजेंसियों की समान हिस्सेदारी होगी, क्योंकि कोई भी ज्यादा पैसा लगाना नहीं चाहता था। इसके गठन के समय कहा गया था कि चूंकि यह निवेश ब्रॉडकास्टर्स को पैसा कमाने में मदद करेगा, इसलिए फंड्स में उनकी हिस्सेदारी सबसे अधिक होनी चाहिए और यही कारण है कि ब्रॉडकास्टर्स का शेयर सबसे ज्यादा है। इंडस्ट्री से जुड़े एक विशेषज्ञ का कहना है, ‘जब तक तीनों निकाय इस बारे में कोई चिंता नहीं जताते, मुझे यह समझ नहीं आया कि ट्राई ने इस तरह का प्रस्ताव क्यों रखा है।’

ट्राई की अन्य सिफारिशों में यह भी शामिल है कि बार्क की कार्यप्रणाली को दो भागों में कर दिया जाए। इनमें एक के पास रेटिंग की कार्यप्रणाली, डाटा का सत्यापन और डाटा के पब्लिशिंग आदि की जिम्मेदारी हो, जबकि दूसरे भाग में डाटा की प्रोसेसिंग, वाटर मार्किंग और इसी तरह के अन्य तकनीकी कार्य के साथ डाटा कलेक्शन एजेंसियों के प्रबंधन की जिम्मेदारी भी शामिल हो। इन सिफारिशों में यह भी कहा गया है कि एक बार जब रेटिंग प्रक्रिया के लिए कई एजेंसी आगे आएं तो बार्क को आंकड़े पब्लिश करने आदि के कामों में अपनी भूमिका को सीमित कर देना चाहिए ताकि एक से ज्यादा एजेंसी नई टेक्नोलॉजी के साथ कई रेटिंग सिस्टम्स विकसित कर सकें।  

अपन नाम न छापने की शर्त पर एक अन्य इंडस्ट्री एक्सपर्ट ने इन सिफारिशों को जारी करने की तात्कालिता (urgency) पर सवाल उठाया। उनका कहना था, ‘ ट्राई ने Review of TV audience measurement and ratings in India  को लेकर तीन दिसंबर 2018 को कंसल्टेशन पेपर जारी किया था और वर्तमान रेटिंग सिस्टम से संबंधित मुद्दों पर स्टेकहोल्डर्स के लिखित कमेंट्स मांगे गए थे। ट्राई ने अपनी सिफारिशों के लिए यह समय क्यों चुना है, जब बार्क अपने पांच साल पूरे करने वाली है। बार्क एक प्रोजेक्ट था, जिसे पूरी तरह अमल में आने में लंबा समय लगा है। एक संयुक्त इकाई बनाने की प्रक्रिया वर्ष 2006 में शुरू हुई थी जो वर्ष 2015 नें पूरी हुई। इसमें करीब एक दशक का समय लगा है’

बार्क इंडिया में ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ (IBF), ‘इंडियन सोसायटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ (ISA) और ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI) की संयुक्त साझेदारी है और इसमें इनका प्रतिशत अनुपात 60:20:20 यानी (IBF 60%, ISA 20%, AAAI 20%) है। अधिकांश इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स इस बात को लेकर चिंतित हैं कि ट्राई की सिफारिशों से पूरे ईकोसिस्टम में एक और नया मोड़ आ जाएगा, जिससे इस सेक्टर में व्यवधान का नया दौर शुरू हो जाएगा।


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