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TV चैनल्स से जुड़े इस मामले में केरल हाई कोर्ट में सुनवाई आज
‘ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन’ ने ब्रॉडकास्टर्स की ओर से भेजे गए डिस्कनेक्शन नोटिस से अंतरिम राहत के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
केरल हाई कोर्ट ने कहा है कि वह ‘ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन‘ (AIDCF) और ‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) मामले में मंगलवार को सुनवाई करेगा।बता दें कि ‘ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन’ ने ब्रॉडकास्टर्स द्वारा जारी डिस्कनेक्शन नोटिस से अंतरिम राहत के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
केबल ऑपरेटर्स के इस निकाय ने पहले ब्रॉडकास्टर्स के उस नोटिस को खारिज कर दिया था, जिसमें उनसे ‘न्यू टैरिफ ऑर्डर’ (NTO 3.0) के लिए रेफरेंस इंटरकनेक्ट ऑफर (RIO) पर हस्ताक्षर करने को कहा गया था। इस मामले में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर कस्टमर्स के साथ अनुचित व्यवहार करने और झूठी सूचना फैलाने का आरोप लगाया है।
19 फरवरी को, इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) ने एक प्रेस नोट जारी किया, जिसमें कहा गया कि AIDCF ने 1 फरवरी, 2023 को लागू हुई नई मूल्य व्यवस्था के संबंध में कुछ गलत टिप्पणियां की हैं।
इसमें कहा गया है कि भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने 22 नवंबर, 2022 को संशोधित रेगुलेशंस और टैरिफ ऑर्डर को अधिसूचित किया। AIDCF और उसके सदस्यों को ट्राई द्वारा निर्धारित समयसीमा के बारे में पता था और वह यह भी जानते थे कि टीवी चैनलों को लेकर किया जाने वाला यह प्रावधान केवल एक हस्ताक्षरित इंटरकनेक्ट समझौते के तहत ही किया जा सकता है।
IBDF ने कहा कि अभी तक सभी ब्रॉडकास्टर्स, डीटीएच प्रोवाइडर्स और अधिकांश केबल ऑपरेटर्स, जिनमें कुछ एआईडीसीएफ के सदस्य भी हैं, ने संशोधित नियामक ढांचे को अपना लिया है। मतलब 90% से अधिक डीपीओ ने ब्रॉडकास्टर्स द्वारा जारी संशोधित इंटरकनेक्ट समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जोकि यह सुनिश्चित करता है कि कानून का पालन किया गया है और अधिकांश ग्राहकों के लिए सेवा बाधित नहीं है।
वहीं, 18 फरवरी को, AIDCF ने बड़े ब्रॉडकास्टर्स इस निर्देश को ‘तानाशाही’ करार दिया और उसके फैसले की आलोचना की, जिसमें AIDCF के सदस्यों के लिए चैनल के सिग्नल बंद कर दिए गए। दरअसल, यह कदम उन केबल आरपरेटर्स के खिलाफ उठाया गया था, जिन्होंने ब्रॉडकास्टर्स द्वारा चैनलों की कीमतें बढ़ाए जाने का पालन नहीं किया था।
बता दें कि देश के बड़े ब्रॉडकास्टर्स ने 15 फरवरी को केबल ऑपरेटर्स को नोटिस भेजा था, जिसमें उन्होंने केबल ऑपरेटर्स को न्यू टैरिफ ऑर्डर (NTO 3.0) के लिए रेफरेंस इंटरकनेक्ट ऑफर (RIO) पर हस्ताक्षर करने को कहा था। यह नोटिस ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) के उन सदस्यों को भेजा गया था, जिन्होंने चैनल की कीमत नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। बता दें कि केरल हाई कोर्ट एनटीओ 3.0 (NTO 3.0) के कार्यान्वयन से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रहा है।
IBDF ने कहा कि नए मूल्य निर्धारण प्रणाली के तहत, सब्सक्राइबर के पास एक चैनल या चैनलों के बुके चुनने का विकल्प है। किसी चैनल को बुके में शामिल करने के लिए अधिकतम मासिक सदस्यता शुल्क 19/- रुपए है, जो देश में आवश्यक वस्तुओं की कीमत से काफी कम है। IBDF ने AIDCF पर न केवल कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया, बल्कि अपने स्वयं के व्यावसायिक कारणों के चलते और भ्रामक जानकारी प्रसारित करने के लिए 25 मिलियन से कम ग्राहकों को होल्ड करने का आरोप लगाया। केबल ऑपरेटर्स के संघ के खिलाफ अपने हमले को और तेज करते हुए, IBDF ने यह भी कहा कि AIDCF की प्रेस विज्ञप्ति अदालत के समक्ष विचाराधीन मामले के संबंध में जनता को प्रभावित करने का प्रयास करती है।
IBDF ने आगे कहा कि ये DPOs उन लोगों की तुलना में बहुत कम हैं, जिन्होंने पहले ही हस्ताक्षर कर दिए हैं। उनके इस तरह के व्यवहार के चलते दर्शक अपने पसंदीदा चैनल नहीं देख पा रहे हैं। लिहाजा इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) ने प्रभावित दर्शकों से अपील की है कि वह अपने पसंदीदा चैनलों की सदस्यता लेने के लिए अन्य ऑपरेटर्स की ओर रुख कर सकते हैं।
IBDF के बयान के जवाब में AIDCF ने ब्रॉडकास्टर्स द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दों पर स्पष्टीकरण जारी किया। AIDCF ने अपने बयान में कहा कि 2017 में ट्राई द्वारा घोषित नए नियामक ढांचे (एनटीओ 1.0) ने केबल टीवी और डीटीएच प्लेटफार्मों पर उपभोक्ताओं की पसंद और चैनलों के लिए कम कीमतों का वादा किया था। AIDCF ने कहा कि ब्रॉडकास्टर्स ने पहली बार उपभोक्ताओं के लिए एमआरपी की घोषणा की, जो कुछ मामलों में 400% तक बढ़ा दी गई थी। अधिकांश लोकप्रिय चैनलों की कीमतें 19 रुपए की तय की गई थी।
AIDCF ने कहा कि ब्रॉडकास्टर्स ने उन चैनलों के बंडलों की भी घोषणा की जिनमें एक ही बंडल (बुके) में लोकप्रिय चैनल और जो लोकप्रिय चैनल नहीं हैं, दोनों को शामिल किया गया। हालांकि, ब्रॉडकास्टर्स ने अ-ला-कार्टे कीमतों की तुलना में भारी छूट वाली कीमतों पर इन बुके का मूल्य निर्धारण करके उपभोक्ताओं की पसंद को ही खत्म कर दिया है।
बयान में आगे कहा गया कि उपभोक्ताओं के साथ-साथ केबल टीवी और डीटीएच प्लेटफार्म्स के पास प्रभावी रूप से बुके की सदस्यता लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। न्यू टैरिफ ऑर्डर (NTO 3.0) की लागत और इसके प्रभाव पर AIDCF ने कहा कि ब्रॉडकास्टर्स ने अपने चैनल की कीमतों और बुके की कीमतों में लगभग 18% से 35% की वृद्धि की है, जो निश्चित रूप से उपभोक्ताओं के बजट को भी प्रभावित करेगी।
AIDCF ने आगे कहा कि मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद, IBDF ने सदस्यों को कानूनी नोटिस भेजा, जिसमें 48 घंटे के भीतर समझौते पर हस्ताक्षर करने या तुरंत सिग्नल डिस्कनेक्ट करने की बात कही गयी।
AIDCF ने अपने स्टेटमेंट में कहा कि डिज्नी-स्टार, सोनी और जी ने 18 फरवरी की सुबह अपने चैनल बंद कर दिए। केवल तीन ब्रॉडकास्टर्स ने कार्रवाई की है। अन्य ब्रॉडकास्टर्स जिन्होंने सिग्नल्स बंद नहीं किए है, उनमें कलर्स, टाइम्स, डिस्कवरी, सन टीवी, ईटीवी आदि शामिल हैं। वहीं AIDCF ने ब्रॉडकास्टर्स पर उपभोक्ताओं से सर्विस प्रोवाइडर्स बदलने की अपील करने का भी आरोप लगाया।
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