पूर्व में रजनीश शर्मा ‘जी हिंदुस्तान’, ‘रिपब्लिक भारत’, ‘इंडिया न्यूज’ और ‘एएनआई’ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
पत्रकार रजनीश शर्मा ने अब वरिष्ठ टीवी पत्रकार शमशेर सिंह के नेतृत्व में नोएडा से जल्द ही लॉन्च होने वाले नए न्यूज चैनल से अपनी नई पारी का आगाज किया है। रजनीश शर्मा यहां इन्वेस्टीगेटिंग रिपोर्टिंग करेंगे।
रजनीश को रिपोर्टिंग में काम करने का 14 साल से ज्यादा का अनुभव है। अब तक वह दिल्ली दंगे, सीएए एनआरसी, किसान आंदोलन, पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला हत्या व श्रद्धा हत्याकांड जैसी तमाम बड़ी घटनाओं की कवरेज समेत दिल्ली के बड़े माफियाओं पर इन्वेस्टीगेटिंग स्टोरीज कर चुके हैं।
पूर्व में रजनीश शर्मा ‘जी हिंदुस्तान’, ‘रिपब्लिक भारत’, ‘इंडिया न्यूज’ और ‘एएनआई’ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं।
पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो रजनीश शर्मा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करने के बाद ‘भारतीय विद्या भवन‘ से मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा किया है। इसके बाद उन्होंने हरियाणा की कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।
समाचार4मीडिया की ओर से रजनीश शर्मा को उनकी नई पारी के लिए ढेरों शुभकामनाएं।
देश की टीवी न्यूज इंडस्ट्री इस समय FAST TV और इंटरनेट के जरिए चलने वाले टीवी चैनलों को लेकर दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है।
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Samachar4media Bureau
देश की टीवी न्यूज इंडस्ट्री इस समय FAST TV और इंटरनेट के जरिए चलने वाले टीवी चैनलों को लेकर दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है। मामला TRAI यानी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के उस प्रस्ताव से जुड़ा है, जिसमें Application-based Linear Television Distribution (ALTD) और Free Ad-Supported Streaming Television (FAST) सेवाओं के लिए रेगुलेशन लाने की बात कही गई है।
TRAI ने 6 अप्रैल को इस विषय पर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया था और कंपनियों से राय मांगी थी। इसके बाद टाइम्स नेटवर्क, एबीपी नेटवर्क, टीवी टुडे नेटवर्क और नेटवर्क18 जैसी बड़ी मीडिया कंपनियों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी। इन प्रतिक्रियाओं से साफ हो गया है कि टीवी और डिजिटल ब्रॉडकास्टिंग के भविष्य को लेकर इंडस्ट्री के भीतर बड़ी बहस चल रही है।
टाइम्स नेटवर्क और एबीपी नेटवर्क का मानना है कि FAST चैनल्स और इंटरनेट आधारित टीवी प्लेटफॉर्म तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन उन पर वैसी जिम्मेदारियां और नियम लागू नहीं हैं जैसे केबल, डीटीएच और IPTV प्लेटफॉर्म पर होते हैं। उनका कहना है कि इससे बाजार में असंतुलन पैदा हो रहा है।
टाइम्स नेटवर्क ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि कई प्रीमियम चैनल, जो पहले पेड टीवी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध थे, अब FAST प्लेटफॉर्म्स पर मुफ्त में दिखाए जा रहे हैं। इससे लोगों का पेड टीवी से दूरी बनाना बढ़ रहा है और सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई पर असर पड़ रहा है।
कंपनी ने यह भी चिंता जताई कि स्मार्ट टीवी कंपनियां और ऑपरेटिंग सिस्टम प्रोवाइडर्स अब यह तय करने लगे हैं कि कौन-सा चैनल दर्शकों को ज्यादा दिखाई देगा। भविष्य में ये कंपनियां चैनलों से “दिखाई देने” के बदले फीस भी मांग सकती हैं, जैसा पहले पारंपरिक टीवी डिस्ट्रीब्यूशन में देखा गया था।
एबीपी नेटवर्क ने भी कई मुद्दों पर टाइम्स नेटवर्क का समर्थन किया, लेकिन उसने पूरी तरह सख्त नियमों की बजाय “हल्के लेकिन सक्रिय रेगुलेशन” की बात कही। कंपनी का कहना है कि अगर FAST इकोसिस्टम बिना किसी निगरानी के बढ़ता रहा, तो कुछ बड़ी टेक कंपनियों का दबदबा बहुत ज्यादा बढ़ सकता है।
एबीपी नेटवर्क ने एल्गोरिदम के जरिए अपने कंटेंट को बढ़ावा देने, विज्ञापन व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी और दर्शकों के डेटा पर असमान नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी चिंता जताई। कंपनी ने मांग की कि ब्रॉडकास्टर्स के कंटेंट से जुड़े विज्ञापन इन्वेंटरी पर उनका ही नियंत्रण रहना चाहिए।
वहीं दूसरी तरफ टीवी टुडे नेटवर्क और नेटवर्क18 ने TRAI के इस प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया है। उनका कहना है कि FAST और ALTD सेवाएं असल में OTT और इंटरनेट आधारित एप्लिकेशन हैं, इसलिए इन्हें टेलीकॉम सर्विस की तरह रेगुलेट नहीं किया जा सकता।
टीवी टुडे नेटवर्क ने कहा कि ये सेवाएं सिर्फ इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन खुद टेलीकॉम सर्विस नहीं हैं। कंपनी का यह भी कहना है कि न्यूज और कंटेंट प्लेटफॉर्म पहले से ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, केबल टीवी नेटवर्क एक्ट, आईटी नियमों और सेल्फ-रेगुलेटरी संस्थाओं के दायरे में आते हैं। ऐसे में नए नियम सिर्फ अतिरिक्त बोझ बढ़ाएंगे।
नेटवर्क18 ने और भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि FAST और ALTD सेवाओं को टेलीकॉम रेगुलेशन के दायरे में लाना कानूनी और संवैधानिक रूप से गलत हो सकता है। कंपनी का कहना है कि संसद ने पहले ही टेलीकॉम एक्ट के अंतिम मसौदे में OTT सेवाओं को बाहर रखा था।
नेटवर्क18 ने यह भी कहा कि इंटरनेट आधारित ऐप्स और टेलीकॉम नेटवर्क दोनों अलग-अलग स्तर पर काम करते हैं। ऐसे में इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर लाइसेंस फीस, बैंक गारंटी और पुराने ब्रॉडकास्टिंग नियम लागू करना डिजिटल इंडिया और कारोबार आसान बनाने की नीति के खिलाफ होगा।
दरअसल, भारत में FAST TV बाजार तेजी से बढ़ रहा है। स्मार्ट टीवी की बढ़ती पहुंच, सस्ता इंटरनेट और मुफ्त विज्ञापन आधारित कंटेंट की बढ़ती मांग इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है। यही कारण है कि ब्रॉडकास्टर्स इसे एक बड़े मौके के साथ-साथ अपने पारंपरिक बिजनेस के लिए खतरे के रूप में भी देख रहे हैं।
अब इस पूरे मामले पर सभी की नजर TRAI की अगली कार्रवाई पर टिकी है। माना जा रहा है कि इस फैसले का असर भारत के कनेक्टेड टीवी बाजार, डिजिटल विज्ञापन इंडस्ट्री और ब्रॉडकास्टर्स, टेक कंपनियों तथा रेगुलेटर्स के बीच ताकत के संतुलन पर पड़ सकता है।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज ने स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए बड़ा ऐलान किया है।
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Samachar4media Bureau
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज ने स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए बड़ा ऐलान किया है। कंपनी अब ‘Unite8 Sports’ नाम से चार नए स्पोर्ट्स चैनल लॉन्च करने जा रही है। इसके जरिए Zee फुटबॉल, कबड्डी, क्रिकेट, बैडमिंटन, रेसलिंग, बॉक्सिंग और कॉम्बैट स्पोर्ट्स जैसे खेलों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
कंपनी के मुताबिक, वह चार चैनल लॉन्च करेगी- Unite8 Sports 1, Unite8 Sports 1 HD (हिंदी) और Unite8 Sports 2, Unite8 Sports 2 HD (अंग्रेजी)। इन चैनलों के जरिए अलग-अलग तरह के खेलों का लाइव एक्शन दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा। चैनल लॉन्च करने के लिए जरूरी आवेदन भी कंपनी ने जमा कर दिए हैं।
Zee का कहना है कि भारत में लाइव स्पोर्ट्स कंटेंट की मांग तेजी से बढ़ रही है और दर्शकों की दिलचस्पी अब कई तरह के खेलों में बढ़ रही है। इसी को देखते हुए कंपनी अपने स्पोर्ट्स कारोबार का विस्तार कर रही है।
इस नए स्पोर्ट्स कारोबार की जिम्मेदारी भावेश जनावेल्कर को दी गई है। वह अब Unite8 Sports चैनलों के Chief Business Officer के तौर पर काम संभालेंगे। इससे पहले वह कंपनी के मराठी मूवी बिजनेस को संभाल रहे थे।
भावेश जनावलेकर ने कहा कि भारत जैसे बड़े देश में ऐसे खेलों की मांग बढ़ रही है, जिनकी वैश्विक पहचान हो लेकिन जिनसे देश के आम दर्शक भी जुड़ाव महसूस करें। उन्होंने कहा कि लाइव स्पोर्ट्स कंटेंट की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है और कंपनी इसी मौके का फायदा उठाना चाहती है।
कंपनी ने यह भी बताया कि वह FIFA के साथ बातचीत कर रही है, ताकि भारत में FIFA World Cup 2026 के मैचों का प्रसारण और स्ट्रीमिंग की जा सके।
Zee का मानना है कि नए स्पोर्ट्स चैनलों के जरिए वह तेजी से बढ़ रहे स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगी और लंबे समय में कारोबार को नई मजबूती मिलेगी।
मिहिर रंजन ने पिछले साल जुलाई में इस न्यूज चैनल के साथ मीडिया में अपनी नई पारी का आगाज किया था।
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Samachar4media Bureau
वरिष्ठ पत्रकार मिहिर रंजन ने देश के प्रमुख न्यूज नेटवर्क्स में शुमार ‘भारत एक्सप्रेस’ (Bharat Express) से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पिछले साल जुलाई में इस न्यूज चैनल के साथ मीडिया में अपनी नई पारी का आगाज किया था और बतौर मैनेजिंग एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अपनी इस भूमिका में मिहिर रंजन चैनल की संपादकीय रणनीति और आउटपुट संचालन का नेतृत्व कर रहे थे।
मिहिर रंजन ने इस्तीफा क्यों दिया और उनका अगला कदम क्या होगा, फिलहाल इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं मिल सकी है। मिहिर रंजन इससे पहले हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया डेली लाइव’ (India Daily Live) से जुड़े हुए थे। बतौर मैनेजिंग एडिटर वह इस चैनल की सभी डिजिटल प्रॉपर्टीज की कमान संभाल रहे थे। इसी के साथ वह कंसल्टिंग एडिटर के तौर पर टीवी चैनल को भी अपने सुझाव दे रहे थे।
‘इंडिया डेली लाइव’ से पहले मिहिर रंजन ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) की टीम का हिस्सा थे, जहां उन्होंने एसोसिएट वाइस प्रेजिडेंट के पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद वह IIM, इंदौर में डिजिटल मीडिया का एक कोर्स करने चले गए थे।
‘एबीपी न्यूज’ में मिहिर रंजन करीब दो साल तक रहे थे। उन्होंने मई 2020 में बतौर आउटपुट हेड ‘एबीपी न्यूज’ जॉइन किया था।
इसके बाद वह ‘इंडिया डेली लाइव’ के साथ जुड़ गए थे और फिर पिछले साल उन्होंने ‘भारत एक्सप्रेस’ के साथ अपना सफर शुरू किया था।
मिहिर रंजन को विभिन्न मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का लंबा अनुभव है। ’एबीपी न्यूज’ से पहले वह ’रिपब्लिक भारत’ (Republic Bharat) से जुड़े हुए थे। वह ‘रिपब्लिक टीवी’ की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा रहे हैं और ‘रिपब्लिक भारत’ में आउटपुट एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इससे पहले वह ‘टीवी टुडे नेटवर्क’ (TV Today Network) में भी अपनी अहम भूमिका निभा चुके हैं।
‘टीवी टुडे नेटवर्क’ के साथ अपनी 14-15 साल की लंबी पारी के दौरान वह कई अहम प्रोग्राम भी कर चुके हैं। यही नहीं, मिहिर रंजन करीब पांच साल तक जानी-मानी न्यूज एजेंसी ‘यूएनआई’ (UNI) के साथ भी काम कर चुके हैं। इसमें करीब ढाई साल उन्होंने लखनऊ और करीब ढाई साल दिल्ली में बतौर रिपोर्टर और डेस्क पर अपनी जिम्मेदारी संभाली है।
मूल रूप से बिहार के रहने वाले मिहिर रंजन ने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) से पढ़ाई की है। इसके साथ ही उन्होंने डिफेंस करेसपॉन्डेंट (Defence Correspondent) का कोर्स भी किया है।
ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) और डेन नेटवर्क्स लिमिटेड (DEN Networks Limited) ने केंद्र सरकार की नई TV Ratings Policy 2026 को चुनौती देते हुए केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
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Samachar4media Bureau
टीवी इंडस्ट्री में TRP को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कोर्ट तक पहुंच गया है। ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) और डेन नेटवर्क्स लिमिटेड (DEN Networks Limited) ने केंद्र सरकार की नई TV Ratings Policy 2026 को चुनौती देते हुए केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि नई नीति के तहत ‘लैंडिंग पेज’ की व्यूअरशिप को TRP में शामिल नहीं करना केबल ऑपरेटर्स और मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स (MSOs) के कारोबार को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।
दरअसल, ‘लैंडिंग पेज’ वह चैनल होता है जो सेट-टॉप बॉक्स ऑन करते ही सबसे पहले स्क्रीन पर दिखाई देता है। केबल और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए यह एक बड़ा रेवेन्यू सोर्स माना जाता है, क्योंकि कई ब्रॉडकास्टर्स बेहतर प्लेसमेंट के लिए भुगतान करते हैं।
नई नीति में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने साफ कहा है कि लैंडिंग पेज से आने वाली व्यूअरशिप को TRP में नहीं गिना जाएगा और इसे सिर्फ मार्केटिंग टूल माना जाएगा। इसी फैसले को AIDCF और DEN Networks ने अदालत में चुनौती दी है।
मामले की सुनवाई जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस की बेंच में हुई। केरल हाईकोर्ट ने फिलहाल बिना लैंडिंग पेज डेटा वाले TRP जारी करने पर रोक लगा दी है। हालांकि अदालत ने नई TRP नीति के लागू होने पर रोक नहीं लगाई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि OTT प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया की बढ़ती चुनौती के बीच केबल टीवी इंडस्ट्री पहले से दबाव में है। ऐसे में लैंडिंग पेज से जुड़ी कमाई खत्म होने से कारोबार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
AIDCF और DEN Networks ने यह भी आरोप लगाया है कि सरकार अप्रत्यक्ष रूप से वही काम कर रही है, जिसे लेकर पहले से सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है। यह विवाद 2017 से चला आ रहा है, जब Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने लैंडिंग पेज पर रेटेड चैनल दिखाने पर रोक लगाने की कोशिश की थी।
बाद में यह मामला TDSAT और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही TRAI को सीधे तौर पर ऐसे प्रतिबंध लागू करने से रोका था, लेकिन अब नई TRP नीति के जरिए वही काम दूसरे तरीके से किया जा रहा है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) ने पहले से ऐसा एल्गोरिद्म तैयार किया हुआ है, जो यह पहचान सकता है कि दर्शक किसी चैनल को सिर्फ ऑटोमेटिक प्लेसमेंट की वजह से देख रहा है या वास्तव में उसमें रुचि ले रहा है। इसलिए पूरी तरह से लैंडिंग पेज व्यूअरशिप हटाना तकनीकी रूप से भी सही नहीं माना जा सकता।
नई TV Ratings Policy 2026 में सिर्फ लैंडिंग पेज ही नहीं, बल्कि पूरे टीवी मेजरमेंट सिस्टम में बड़े बदलाव किए गए हैं। अब TV रेटिंग्स में केबल, DTH, OTT और Connected TV को भी शामिल करने की बात कही गई है। इसके अलावा मापे जाने वाले घरों की संख्या बढ़ाने, ऑडिट और निगरानी को सख्त करने जैसे कई नए नियम भी लागू किए गए हैं।
AIDCF और DEN Networks ने अदालत से मांग की है कि लैंडिंग पेज व्यूअरशिप हटाने वाले प्रावधान को असंवैधानिक घोषित किया जाए और नई गाइडलाइंस के अमल पर रोक लगाई जाए।
Dish TV ने IPL सीजन के दौरान Star Sports 1 Hindi SD और HD की फ्री एक्सेस बंद कर दी है। अब मैच देखने के लिए ग्राहकों को चैनल अलग से अपने पैक में जोड़ना होगा।
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Samachar4media Bureau
आईपीएल (IPL) सीजन के बीच Dish TV यूजर्स को बड़ा झटका लगा है। प्लेटफॉर्म ने Star Sports 1 Hindi SD और HD चैनलों की फ्री एक्सेस बंद कर दी है। अब क्रिकेट मैच देखने के लिए ग्राहकों को इन चैनलों को अलग से अपने पैक में जोड़ना होगा। पहले यह चैनल आईपीएल प्रसारण के दौरान कई ग्राहकों को मुफ्त उपलब्ध कराया गया था।
हालांकि अब इन्हें फिर से पेड कैटेगरी में डाल दिया गया है। Dish TV पर आईपीएल के बाकी मैच देखने के लिए सब्सक्राइबर्स को Star Sports 1 Hindi चैनल 19 रुपये प्लस जीएसटी देकर एक्टिवेट करना होगा। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब आईपीएल लगातार स्पोर्ट्स चैनलों के लिए हाई व्यूअरशिप ला रहा है। खासतौर पर हिंदी क्रिकेट फीड्स की मांग काफी ज्यादा बनी हुई है।
डीटीएच ऑपरेटर्स अक्सर प्रमोशनल ऑफर या सैंपलिंग के तहत कुछ पेड चैनलों को सीमित समय के लिए फ्री उपलब्ध कराते हैं। बाद में कंपनी अपनी नीति या ऑफर के अनुसार इन्हें वापस पेड कैटेगरी में डाल सकती है। हालांकि Dish TV की ओर से फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह बदलाव सभी ग्राहकों पर लागू हुआ है या केवल कुछ चुनिंदा पैक्स वाले यूजर्स पर इसे लागू किया गया है।
जनवरी 2025 की एक सुबह। यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड हुई। न कोई टीवी चैनल, न कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस- बस एक कैमरा, एक माइक्रोफोन, और दो आदमी आमने-सामने बैठे।
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Vikas Saxena
जनवरी 2025 की एक सुबह। यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड हुई। न कोई टीवी चैनल, न कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस- बस एक कैमरा, एक माइक्रोफोन, और दो आदमी आमने-सामने बैठे। Zerodha के को-फाउंडर निखिल कामत के पॉडकास्ट 'People by WTF' पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैठे थे और यह उनका पहला पॉडकास्ट अपीयरेंस था। फिर मार्च 2025 में मोदी अमेरिकी पॉडकास्टर Lex Fridman के साथ करीब तीन घंटे बात करते दिखे। क्लिप्स वायरल हुईं, न्यूज चैनलों ने उन्हें चलाया, सोशल मीडिया पर बहस हुई। यह महज एक इंटरव्यू नहीं था। यह एक संकेत था, भारत में मीडिया की शक्ति का केंद्र बदल रहा है।
टीवी का दरबार खाली होने लगा
कुछ साल पहले तक प्राइम टाइम टीवी डिबेट ही वह जगह थी जहां जनमत बनता था। लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है।
FICCI-EY की 2026 मीडिया एंड एंटरटेनमेंट रिपोर्ट (मार्च 2026, 2025 के आंकड़े) के अनुसार, भारत में लीनियर टीवी विज्ञापन राजस्व में लगभग 10% (10.3%) की गिरावट आई, और ब्रैंड्स की संख्या भी 3% घटी जो TV पर विज्ञापन दे रहे थे। इसी साल डिजिटल विज्ञापन 26% बढ़कर ₹947 अरब पर पहुंच गया, जो कुल विज्ञापन राजस्व का 63% हो गया, पहली बार डिजिटल ने TV को पीछे छोड़ा।
Kantar की मीडिया कम्पास रिपोर्ट (Q3 2025) बताती है कि लीनियर TV की पहुंच Q1 2025 के 70.5 करोड़ से घटकर Q3 2025 में 68.9 करोड़ रह गई। इसके विपरीत, डिजिटल-ओनली दर्शक, यानी जो लोग बिना TV देखे केवल इंटरनेट पर कंटेंट देखते हैं, 2024 की तुलना में 30% बढ़कर 31.3 करोड़ हो गए, जो भारत की 15+ आबादी का 26% है।
IPL 2026 का आंकड़ा और भी चौंकाने वाला है। BARC India और TAM Sports के data के मुताबिक TV रेटिंग्स 4.57 (IPL 2025) से गिरकर 3.71 (IPL 2026) पर आ गईं, 18.8% की गिरावट। औसत viewership 26% गिरकर 1.06 करोड़ से 78.4 लाख रह गई। जबकि JioStar ने पहले वीकेंड पर डिजिटल में 51.5 करोड़ की रीच और 32.6 अरब मिनट का वाच टाइम दर्ज किया।
यह सिर्फ कंटेंट का बदलाव नहीं है। यह ऑडियंस के भरोसे का पलायन है, TV स्टूडियो से माइक्रोफोन की तरफ।
पॉडकास्ट का विस्फोट: नंबर बोलते हैं
भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पॉडकास्ट बाजार है, अमेरिका और चीन के बाद।
Deloitte की TMT Predictions 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पॉडकास्ट श्रोता 2024 के करीब 10 करोड़ से बढ़कर 2025 में 20 करोड़ हो गए। Astute Analytica के अनुसार भारत का पॉडकास्ट बाजार 2024 में $56 करोड़ (USD 560 million) का था और 2033 तक $424.8 करोड़ (USD 4.24 billion) तक पहुंचने का अनुमान है, 25.5% CAGR के साथ।
भारत में करीब 2.5 करोड़ लोग रोजाना कम से कम एक पॉडकास्ट सुनते हैं। और वे सुनते कब हैं? ऑफिस जाते समय, जिम में, खाना बनाते हुए। यह "बैकग्राउंड कंजप्शन" का नया युग है।
वैश्विक तस्वीर भी उतनी ही तेज है। Deloitte TMT Predictions 2026 का अनुमान है कि 2026 में वैश्विक पॉडकास्ट और वीडियो पॉडकास्ट (vodcast) का कुल विज्ञापन राजस्व $5 अरब (USD 5 billion) तक पहुंचेगा, पिछले साल की तुलना में करीब 20% की वृद्धि। IAB/PwC की 2025 Internet ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू रिपोर्ट के अनुसार 2025 में पॉडकास्ट ad revenue 17.6% बढ़कर $2.9 अरब (USD 2.9 billion) पर पहुंचा। इसी दौरान अमेरिका में TV ऐडवर्टाइजिंग 13.4% गिरा।
नेता अब TV स्टूडियो नहीं, माइक्रोफोन ढूंढते हैं
राजनेताओं का पॉडकास्ट की तरफ झुकाव इस पूरे बदलाव की सबसे बड़ी गवाही है।
जनवरी 2025 में PM मोदी ने निखिल कामत के साथ करीब दो घंटे की बातचीत की, यह उनका पहला पॉडकास्ट था। मार्च 2025 में Lex Fridman के साथ लगभग तीन घंटे की चर्चा हुई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प ने Joe Rogan के पॉडकास्ट पर तीन घंटे बिताए, जो उस चुनाव के सबसे चर्चित मीडिया मूमेंट्स में से एक बना।
सवाल यह है कि नेता TV से पॉडकास्ट की तरफ क्यों जा रहे हैं?
जवाब सीधा है: नैरेटिव कंट्रोल।
टीवी डिबेट्स में अक्सर शोर-शराबा, टोका-टाकी और बहस के बीच बात अधूरी रह जाती है। वहीं पॉडकास्ट एक शांत और कंट्रोल माहौल देते हैं, जहां लोग खुलकर और लंबी बातचीत कर पाते हैं। यहां सिर्फ छोटे ‘साउंड बाइट’ नहीं, बल्कि पूरी कहानी सुनने को मिलती है। यही वजह है कि पॉडकास्ट के छोटे-छोटे क्लिप्स सोशल मीडिया पर कई दिनों तक वायरल होते रहते हैं।
लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। सवाल उठ रहा है कि क्या पॉडकास्ट अब कठिन पत्रकारिता से बचने का जरिया बनते जा रहे हैं? जब नेता अपने पसंदीदा होस्ट के साथ बैठते हैं, तो अक्सर मुश्किल सवाल कम पूछे जाते हैं और जवाबदेही भी कम नजर आती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निखिल कामत के पॉडकास्ट पर आने के बाद कांग्रेस ने भी यही सवाल उठाए थे। पॉडकास्ट की ‘ऑथेंटिसिटी’ और अपनी कहानी को कंट्रोल करने की कोशिश, इन दोनों के बीच का यही टकराव अब मीडिया की बड़ी बहस बनता जा रहा है।
युवा भरोसा क्यों करते हैं, TV की बजाय?
ऑडियो-वीडियो हाइब्रिड: पॉडकास्ट सिर्फ "सुनने की चीज" नहीं रहा
पॉडकास्ट अब सिर्फ ऑडियो तक सीमित नहीं रहे। धीरे-धीरे यह एक पूरा वीडियो फॉर्मेट बनते जा रहे हैं।
Deloitte की TMT Predictions 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, एक बड़ा पॉडकास्ट प्लेटफॉर्म अब अपने 60% से ज्यादा टॉप शोज में वीडियो भी दे रहा है। यानी लोग अब सिर्फ सुन नहीं रहे, बल्कि पॉडकास्ट देख भी रहे हैं। Deloitte के 2025 Digital Media Trends सर्वे में यह भी सामने आया कि 27% लोग हर हफ्ते वीडियो पॉडकास्ट देखते हैं, और इसमें Gen Z और मिलेनियल्स सबसे आगे हैं।
वीडियो पॉडकास्ट के बढ़ने से “क्लिप्स इकॉनमी” भी तेजी से बढ़ी है। अब एक पॉडकास्ट सिर्फ एक वीडियो नहीं रहता, बल्कि उससे कई तरह का कंटेंट बनता है। उदाहरण के लिए, 2 घंटे के एक पॉडकास्ट से 20-30 छोटे क्लिप्स निकल जाते हैं, जो Reels, Shorts और X जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लाखों व्यूज़ और इम्प्रेशंस लाते हैं।
Interactive Advertising Bureau और PwC की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में डिजिटल वीडियो रेवेन्यू 25.4% बढ़कर 78 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह सबसे तेजी से बढ़ने वाला फॉर्मेट रहा। इसका सीधा फायदा वीडियो पॉडकास्ट्स को मिल रहा है, क्योंकि अब advertisers ऑडियो और वीडियो, दोनों को साथ में खरीद रहे हैं।
विज्ञापन का पैसा: TV से माइक्रोफोन की तरफ
खतरे भी हैं: जब माइक बेलगाम हो जाए
इस पूरी तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
टीवी में चाहे कितना भी शोर-शराबा हो, लेकिन वहां एक संपादकीय व्यवस्था होती है। एक एडिटर होता है, लीगल टीम होती है और ब्रॉडकास्टिंग के नियम भी होते हैं। लेकिन पॉडकास्ट की दुनिया में ऐसी निगरानी अभी बहुत कम है।
सबसे बड़ा खतरा गलत जानकारी फैलने का है। जब लाखों-करोड़ों लोग किसी होस्ट पर भरोसा करने लगते हैं, तो उसकी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। लेकिन अभी पॉडकास्ट की दुनिया में जवाबदेही तय करने का सिस्टम उतना मजबूत नहीं है।
दूसरी चिंता “पर्सनैलिटी कल्ट” की है। यानी जब किसी क्रिएटर की हर बात को बिना सवाल किए सच मान लिया जाए। टीवी पर नेताओं को अक्सर एंकर के कठिन सवालों का सामना करना पड़ता है, लेकिन पॉडकास्ट में माहौल ज्यादा दोस्ताना होता है। ऐसे में बिना जांचे दावे, भरोसेमंद आवाज और बड़ी पहुंच, ये मिलकर एक तरह के “सॉफ्ट प्रोपेगेंडा” का जरिया भी बन सकते हैं।
तीसरा बड़ा सवाल क्षेत्रीय भाषाओं का है। भारत की बड़ी आबादी हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं में सोचती और समझती है। Deloitte की रिपोर्ट भी कहती है कि बिजनेस, एजुकेशन और हेल्थ जैसे क्षेत्रों में क्षेत्रीय भाषाओं के पॉडकास्ट तेजी से बढ़ेंगे। Kuku FM और Hubhopper जैसे प्लेटफॉर्म इस दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन यह बाजार अभी शुरुआती दौर में ही है।
अब आगे क्या?
FICCI-EY, Deloitte और Grand View Research, इन तीनों की रिपोर्ट एक बात साफ कहती हैं: आने वाले पांच सालों में भारत का मीडिया जगत जितना बदलेगा, उतना शायद पिछले बीस सालों में भी नहीं बदला।
भारत का पॉडकास्ट बाजार तेजी से बढ़ रहा है। दूसरी तरफ टीवी विज्ञापनों की रफ्तार धीमी पड़ रही है, जबकि डिजिटल-ओनली दर्शकों की संख्या 31 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। और सबसे बड़ा संकेत यह है कि देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi भी अब पॉडकास्ट पर नजर आ रहे हैं।
इसका मतलब यह नहीं कि टीवी खत्म हो जाएगा। FICCI-EY की रिपोर्ट के मुताबिक, टीवी आज भी करीब 74.5 करोड़ साप्ताहिक दर्शकों वाला बड़ा माध्यम है। इतना बड़ा प्लेटफॉर्म अचानक खत्म नहीं होता। लेकिन अब वह अकेला भी नहीं है।
जो ताकत कभी सिर्फ टीवी के पास थी, लोगों की राय बनाने की और मुद्दे तय करने की, वह अब धीरे-धीरे उन लोगों की तरफ जा रही है, जिनके पास एक अच्छा माइक्रोफोन, एक कैमरा और अपनी बात कहने का भरोसा है।
हो सकता है कि भारत के अगले बड़े opinion leaders किसी बड़े टीवी स्टूडियो में नहीं, बल्कि घर के एक छोटे से कमरे में, हेडफोन लगाकर माइक्रोफोन के सामने बैठे हों।
AIDCF की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से मांगा जवाब, 11 जून से न्यूज रेटिंग्स दोबारा शुरू करने की तैयारी में था BARC
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टेलीविजन न्यूज रेटिंग्स यानी TRP को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। केरल हाईकोर्ट ने बिना लैंडिंग पेज डेटा के न्यूज चैनलों की TRP जारी करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह फैसला ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) की याचिका पर आया है।
जानकारी के मुताबिक, AIDCF ने संशोधित ऑडियंस मेजरमेंट फ्रेमवर्क के क्लॉज 5.4.1 को चुनौती देते हुए केरल हाईकोर्ट का रुख किया था। मामले की सुनवाई जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस की बेंच में हुई। कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) को इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार की TRP पॉलिसी गाइडलाइंस के अमल पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन बिना लैंडिंग पेज डेटा के रेटिंग्स जारी करने पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) ने 11 जून से न्यूज चैनलों की साप्ताहिक रेटिंग्स दोबारा जारी करने की घोषणा की थी।
दरअसल, BARC ने कहा था कि शुरुआती चरण में न्यूज रेटिंग्स में लैंडिंग पेज इम्प्रेशंस को शामिल नहीं किया जाएगा। इसी फैसले को लेकर इंडस्ट्री में विवाद बढ़ गया।
न्यूज ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री से जुड़े कई विशेषज्ञों का मानना है कि अनिवार्य या प्रोत्साहित किए गए लैंडिंग पेज दर्शकों की वास्तविक पसंद को प्रभावित करते हैं और इससे TRP आंकड़ों में असंतुलन पैदा होता है। वहीं, कई ब्रॉडकास्टर्स का तर्क है कि लैंडिंग पेज चैनलों के प्रमोशन का एक वैध तरीका है और इन्हें पूरी तरह हटाने से प्रतिस्पर्धी बाजार में चैनलों की पहुंच और विजिबिलिटी प्रभावित हो सकती है।
मीडिया इंडस्ट्री के लिए यह मामला बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि न्यूज TRP दोबारा शुरू होने से विज्ञापन दरों, चैनलों की मार्केट पोजिशनिंग और फेस्टिव सीजन की रणनीतियों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि केरल हाईकोर्ट में चल रही यह सुनवाई भविष्य में टीवी ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम और ब्रॉडकास्टर्स व डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म्स के बीच शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई केंद्र सरकार के जवाब दाखिल करने के बाद होगी।
देश की बड़ी मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी Sun TV Network ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी कर दिए हैं।
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देश की बड़ी मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी सन टीवी नेटवर्क (Sun TV Network) ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी की कमाई में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन मुनाफा पिछले साल के मुकाबले कम रहा। इसके साथ ही कंपनी ने निवेशकों को बड़ा तोहफा देते हुए पूरे साल में कुल 250% डिविडेंड देने का ऐलान किया है।
कंपनी की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में Sun TV की स्टैंडअलोन कुल आय बढ़कर 4,637.70 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले साल यह 4,543.96 करोड़ रुपये थी। वहीं कंपनी का रेवेन्यू भी करीब 6% बढ़कर 4,102.13 करोड़ रुपये पहुंच गया।
हालांकि कंपनी के मुनाफे में गिरावट देखने को मिली। पूरे वित्त वर्ष में Sun TV का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स 1,393.52 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल 1,654.46 करोड़ रुपये था।
मार्च 2026 तिमाही की बात करें तो कंपनी की कुल आय 941.67 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 1,135.86 करोड़ रुपये थी। वहीं तिमाही मुनाफा घटकर 218.64 करोड़ रुपये रह गया, जो एक साल पहले 362.18 करोड़ रुपये था।
कंपनी ने बताया कि मौजूदा तिमाही में कुछ एकबारगी खर्च और निवेश से जुड़े प्रावधानों का असर मुनाफे पर पड़ा। म्यूचुअल फंड निवेश पर मार्क-टू-मार्केट प्रावधान और रेडियो बिजनेस में निवेश से जुड़ी कमजोरी की वजह से कंपनी की कमाई प्रभावित हुई।
Sun TV का सब्सक्रिप्शन बिजनेस मजबूत बना हुआ है। घरेलू सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 10% बढ़कर 1,891.68 करोड़ रुपये पहुंच गया।
कंपनी का क्रिकेट बिजनेस भी लगातार बढ़ रहा है। Sun TV के पास IPL टीम SunRisers Hyderabad, South Africa T20 League की SunRisers Eastern Cape और UK की The Hundred League टीम SunRisers Leeds Limited है।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी ने शेयरधारकों को चार अंतरिम डिविडेंड दिए। कुल मिलाकर निवेशकों को 12.50 रुपये प्रति शेयर यानी 250% डिविडेंड मिला।
Sun TV Network दक्षिण भारत की सबसे बड़ी टीवी ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों में से एक है। कंपनी तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम समेत कई भाषाओं में चैनल चलाती है। इसके अलावा कंपनी का OTT प्लेटफॉर्म SunNXT भी तेजी से बढ़ रहा है।
करीब दो महीने की रोक के बाद अब टीवी न्यूज चैनलों की TRP रेटिंग फिर से शुरू होने जा रही है।
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करीब दो महीने की रोक के बाद अब टीवी न्यूज चैनलों की TRP रेटिंग फिर से शुरू होने जा रही है। ब्रॉ़कास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) 11 जून 2026 से न्यूज चैनलों की रेटिंग दोबारा जारी करेगा। लेकिन इस बार बड़ा बदलाव यह होगा कि “लैंडिंग पेज” की व्युअरशिप को TRP कैलकुलेशन में शामिल नहीं किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस फैसले से टीवी न्यूज इंडस्ट्री का पूरा समीकरण बदल सकता है।
दरअसल, “लैंडिंग पेज” उस चैनल को कहा जाता है जो टीवी ऑन करते ही अपने आप स्क्रीन पर खुल जाता है। इससे चैनल को बिना दर्शक की पसंद के भी ज्यादा व्युअरशिप मिल जाती थी। लंबे समय से कई ब्रॉडकास्टर्स और विज्ञापन एजेंसियां इस व्यवस्था पर सवाल उठा रही थीं। उनका कहना था कि इससे असली दर्शकों की पसंद नहीं, बल्कि डिस्ट्रीब्यूशन डील्स के आधार पर TRP बढ़ती है।
सूत्रों के मुताबिक, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने मार्च 2026 में अमेरिका-ईरान संघर्ष की सनसनीखेज कवरेज को लेकर न्यूज चैनलों की साप्ताहिक TRP पर चार हफ्ते की रोक लगाई थी। बाद में इंडस्ट्री में नए रेटिंग सिस्टम पर चर्चा के चलते यह रोक आगे बढ़ा दी गई।
अब BARC, ब्रॉडकास्टर्स और रेगुलेटर्स के बीच कई दौर की बातचीत के बाद नया सिस्टम लागू किया जा रहा है। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि इससे उन चैनलों को ज्यादा फायदा मिलेगा जिनकी ऑर्गेनिक ऑडियंस मजबूत है। वहीं, वे चैनल प्रभावित हो सकते हैं जो अब तक लैंडिंग पेज व्यवस्था के जरिए ज्यादा पहुंच हासिल करते रहे हैं।
मीडिया एजेंसियों और विज्ञापनदाताओं ने भी इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे डेटा ज्यादा साफ और भरोसेमंद होगा, जिससे विज्ञापन की प्लानिंग बेहतर तरीके से हो सकेगी। पहले कई बार ऐसा होता था कि मजबूत कंटेंट की बजाय डिस्ट्रीब्यूशन ताकत रखने वाले चैनलों को फायदा मिल जाता था।
गौरतलब है कि “लैंडिंग पेज” विवाद पहली बार 2020 के TRP स्कैम के दौरान बड़े स्तर पर सामने आया था। उस समय कई चैनलों पर आरोप लगे थे कि वे केबल नेटवर्क पर खुद को डिफॉल्ट चैनल बनवाकर व्युअरशिप बढ़ा रहे हैं। इसके बाद से ही न्यूज रेटिंग सिस्टम में सुधार की मांग लगातार उठती रही।
इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि हिंदी और क्षेत्रीय न्यूज चैनलों की रैंकिंग में अब बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। क्योंकि इन जॉनर में डिस्ट्रीब्यूशन डील्स का असर काफी ज्यादा माना जाता था।
BARC पिछले कुछ वर्षों से अपने डेटा सिस्टम और पैनल मॉनिटरिंग को मजबूत करने पर काम कर रहा है। संस्था ने रेटिंग सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए कई नए नियम और जांच प्रक्रियाएं भी लागू की हैं।
टीवी न्यूज इंडस्ट्री के लिए यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चुनौती लगातार बढ़ रही है और दर्शकों की देखने की आदतें तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में ब्रॉडकास्टर्स को उम्मीद है कि नया और ज्यादा पारदर्शी TRP सिस्टम विज्ञापनदाताओं का भरोसा वापस लाने में मदद करेगा।
प्रसार भारती ने डीडी फ्री डिश प्लेटफॉर्म पर खाली पड़े MPEG-4 स्लॉट्स के लिए मिड-ईयर ई-ऑक्शन का ऐलान किया है।
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प्रसार भारती ने डीडी फ्री डिश प्लेटफॉर्म पर खाली पड़े MPEG-4 स्लॉट्स के लिए मिड-ईयर ई-ऑक्शन का ऐलान किया है। यह 99वां ई-ऑक्शन 26 मई 2026 से शुरू होगा। इस ऑक्शन में सफल रहने वाले चैनलों को 5 जून 2026 से लेकर 31 मार्च 2027 तक डीडी फ्री डिश प्लेटफॉर्म पर जगह मिलेगी।
इस ई-ऑक्शन में निजी सैटेलाइट टीवी चैनल और अंतरराष्ट्रीय पब्लिक ब्रॉडकास्टर्स हिस्सा ले सकते हैं। हालांकि, इसके लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) से वैध लाइसेंस और अनुमति होना जरूरी होगा।
प्रसार भारती ने चैनलों को भाषा और जॉनर के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी यानी “बकेट” में बांटा है। न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनलों के लिए सबसे ज्यादा रिजर्व प्राइस तय किया गया है, जो 61.65 लाख रुपये है। वहीं, हिंदी और उर्दू को छोड़कर बाकी क्षेत्रीय भाषा चैनलों के लिए शुरुआती रिजर्व प्राइस 4.94 लाख रुपये रखा गया है।
इस बार कंटेंट से जुड़े नियम भी सख्त किए गए हैं। चैनलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके हर महीने के कम से कम 75% कंटेंट (विज्ञापन और प्रमोशन छोड़कर) उसी भाषा और जॉनर का हो, जिसके तहत उन्होंने आवेदन किया है। साथ ही, कुल मासिक प्रसारण समय में कम से कम 60% कंटेंट घोषित कैटेगरी का होना जरूरी होगा।
अगर कोई चैनल इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसका मामला एक विशेष समिति के पास जाएगा। शुरुआत में चैनल को अपनी भाषा या जॉनर बदलने के लिए आधिकारिक अनुरोध करने का मौका दिया जाएगा, लेकिन सुधार नहीं होने पर उसे प्लेटफॉर्म से हटाया भी जा सकता है।
ई-ऑक्शन में हिस्सा लेने के इच्छुक ब्रॉडकास्टर्स को 25 मई 2026 दोपहर 3 बजे तक आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन जमा करना होगा।