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‘डीकोड’ के 100 एपिसोड पूरे: सुधीर चौधरी ने DD News को डिजिटल दौर में दी नई दिशा

Decode की सफलता रणनीति, व्यक्तित्व और टाइमिंग-  तीनों के मेल का नतीजा है। DD News ने सिर्फ एक एंकर को नहीं जोड़ा, बल्कि अपने कंटेंट की सोच को बदला।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 4 months ago

जब 15 मई 2025 को DD News पर ‘Decode with Sudhir Chaudhary’ की शुरुआत हुई, तो यह एक साहसी प्रयोग जैसा लगा था। सरकारी चैनल पर एक प्राइम-टाइम शो का भारत के तेज-तर्रार न्यूज स्पेस में उतरना किसी कठिन चुनौती से कम नहीं था। लेकिन सौ एपिसोड पूरे होने के बाद आंकड़े एक अलग कहानी कहते हैं- पुनर्निर्माण (reinvention), पहुंच (reach) और प्रासंगिकता (relevance) की कहानी।

सितंबर 2025 तक Decode के यूट्यूब पर 23.22 करोड़ व्यूज दर्ज हुए, जबकि क्रॉस-प्लेटफॉर्म पर इसकी पहुंच 30 करोड़ से ज्यादा रही। जो शुरुआत में एक संपादकीय प्रयोग था, वह अब इस बात का उदाहरण बन चुका है कि पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग डिजिटल दौर में कैसे आगे बढ़ सकती है।

‘डीकोड’ का ब्रेकआउट महीना

मई 2025 DD News के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। जिस महीने Decode लॉन्च हुआ, उस दौरान चैनल के कुल 4.92 करोड़ यूट्यूब व्यूज में से 2.39 करोड़ व्यूज सिर्फ इसी शो के थे यानी लगभग 48.6% ट्रैफिक। शो ने 14.8 करोड़ इंप्रेशंस बनाए, जो उस अवधि में नेटवर्क के कुल इंप्रेशंस का 68% था।

इसका असर तुरंत और साफ दिखा। DD News ने सिर्फ उसी महीने में 4.53 लाख नए यूट्यूब सब्सक्राइबर्स जोड़े, जिनमें सबसे बड़ा योगदान Decode का था। इसके पहले एपिसोड ने अकेले ही 26 लाख व्यूज हासिल किए, जो चैनल के इतिहास में सबसे ज्यादा थे और लॉन्च के 24 घंटे के भीतर 10 लाख व्यूज का आंकड़ा पार कर लिया, जबकि पहले DD News के ज्यादातर वीडियो कुछ सौ व्यूज तक ही सीमित रहते थे।

क्यों कामयाब हुआ ‘डीकोड’

Decode की सफलता रणनीति, व्यक्तित्व और टाइमिंग-  तीनों के मेल का नतीजा है। DD News ने सिर्फ एक एंकर को नहीं जोड़ा, बल्कि अपने कंटेंट की सोच को बदला। सुधीर चौधरी अपने साथ दशकों का न्यूजरूम अनुभव, तीखा संपादकीय दृष्टिकोण और एक वफादार दर्शकवर्ग लेकर आए, जो सालों से उनके प्राइम-टाइम से जुड़ा रहा था।

पहले दिन से फोकस साफ था- डिजिटल फर्स्ट। हर एपिसोड को यूट्यूब पर खोजे जाने योग्य बनाया गया, आकर्षक थंबनेल, सीधे हेडलाइन और सोशल मीडिया हुक्स के साथ। टीम ने यूट्यूब एनालिटिक्स को लाइव डैशबोर्ड की तरह इस्तेमाल किया और दर्शकों की प्रतिक्रिया के अनुसार तुरंत बदलाव किए। विषयों का चयन सिर्फ टीवी अपील के लिए नहीं, बल्कि शेयर करने लायक, साफ और लगातार जुड़ाव वाले विषयों पर किया गया।

DD News का 9 से 10 बजे का स्लॉट, जो पहले शांत माना जाता था, अचानक जीवंत हो गया। Decode एक ऐसा शो बन गया जिसे दर्शक नियमित रूप से देखने लगे- बड़े मुद्दों पर स्पष्ट, गहराई से और बिना दिखावे की व्याख्या के लिए।

जोखिम और विश्वास की छलांग

Decode की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि इसके पीछे व्यक्तिगत जोखिम था। जब सुधीर चौधरी ने Aaj Tak जैसे देश के सबसे बड़े न्यूज प्लेटफॉर्म पर अपने प्राइम-टाइम शो को छोड़कर DD News से जुड़ने का फैसला किया, तो यह एक साहसी और असंभव-सा कदम माना गया। वे एक स्थापित मंच और निश्चित दर्शकवर्ग छोड़कर एक ऐसे सरकारी चैनल पर आए जो लंबे समय से धीमे और संस्थागत होने की छवि से जूझ रहा था।

यह एक सोचा-समझा विश्वास का कदम था जिसने न सिर्फ DD News की दिशा बदली बल्कि भारतीय प्राइम-टाइम पत्रकारिता का प्लेबुक भी नया लिख दिया।

DD News के लिए मास्टरस्ट्रोक

सुधीर चौधरी को सार्वजनिक प्रसारण नेटवर्क में शामिल करने का निर्णय अब एक रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। इससे DD News को एक भरोसेमंद चेहरा मिला और ऐसा कंटेंट ब्रैंड जो निजी न्यूज चैनलों से सीधे मुकाबला कर सके।

अक्सर “संस्थागत” या “पुराने ढर्रे वाला” कहे जाने वाले चैनल के लिए यह बदलाव ऐतिहासिक साबित हुआ। Decode ने दिखाया कि जब पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टिंग में कहानी कहने की कला और ठोस पत्रकारिता एक साथ आती हैं, तो दर्शक भी पूरे दिल से जुड़ते हैं।

इस शो की पहुंच भारत से बाहर भी फैली है। गल्फ देशों, उत्तरी अमेरिका और यूरोप में बसे भारतीयों के बीच इसकी हिंदी विश्लेषण शैली को खूब सराहा गया है, जो बताता है कि विश्वसनीय और मातृभाषा आधारित पत्रकारिता की डिजिटल युग में वैश्विक अपील है।

पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग की नई परिभाषा

Decode के 100वें एपिसोड के साथ DD News ने सिर्फ एक नया शो नहीं जोड़ा, बल्कि अपनी सोच को नया आकार दिया है। चैनल ने यह साबित किया कि कंटेंट की विश्वसनीयता और डिजिटल समझदारी, दोनों एक साथ सार्वजनिक प्रसारक के ढांचे में फल-फूल सकती हैं।

इस शो की सफलता भारत के मीडिया परिदृश्य में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है, जहां “पुराने” और “डिजिटल” की रेखाएं मिटती जा रही हैं और अब कहानी कहने की शैली ही असर तय करती है।

DD News के लिए यह सफर, सरकारी प्रवक्ता जैसी छवि से निकलकर गंभीर डिजिटल पकड़ तक पहुंचने का, किसी रूपांतरण से कम नहीं। और सुधीर चौधरी के लिए Decode एक नए अध्याय की शुरुआत है, जहां पत्रकारिता स्पष्टता से मिलती है और स्पष्टता जनसामान्य की लोकप्रियता से।

जब Decode ने अपने 100 एपिसोड पूरे किए, तो यह भारतीय मीडिया के विकास की एक मिसाल बन गया, इस साक्ष्य के रूप में कि जब भरोसा, निरंतरता और साफ संवाद साथ आते हैं, तो 65 साल पुराना सार्वजनिक प्रसारक भी डिजिटल बातचीत का नेतृत्व कर सकता है।


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