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फ्रीडिश ने TV ब्रॉडकास्टर्स को दी ‘राहत’, अब उठा ये सवाल
इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि फीस के भुगतान में देरी की वजह से उन्हें बैंक व प्रसार भारती दोनों को ब्याज देनी होगी, इससे दोहरी मार पड़ेगी
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
प्रसार भारती के ‘डायरेक्ट टू होम’ (DTH) प्लेटफॉर्म ‘डीडी फ्रीडिश’ (DD Free Dish) ने ब्रॉडकास्टर्स की एक मांग को मानते हुए उन्हें देरी से कैरिज फीस का भुगतान करने की छूट तो दे दी है, लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या इस कदम से इंडस्ट्री को मदद मिल पाएगी, जो काफी आर्थिक संकट का सामना कर रही है।
दरअसल, न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन (NBF) ने महामारी कोरोना के मद्देनजर आर्थिक संकट का हवाला देते हुए पिछले दिनों केंद्र सरकार से कैरिज फीस में छूट देने की मांग की थी लेकिन सरकार ने इसके बजाय कैरिज फीस जमा करने की डेडलाइन बढ़ा दी है, जिसमें अब अतिरिक्त शुल्क भी शामिल हो गया है।
‘एफटीए’ चैनल्स सरकार से पहली तिमाही की कैरिज फीस को माफ करने और दूसरी तिमाही की कैरिज फीस में 50 प्रतिशत की छूट देने की मांग कर रहे थे। लेकिन यदि नए प्लान को देखें तो वास्तव में उन्हें राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है। मार्च-अप्रैल और मई की कैरिज फीस अब 27 जून 2020 तक जमा की जा सकती है। विलंब शुल्क पर कैरिज फीस का भुगतान करने वाले ब्रॉडकास्टर्स को टैक्स समेत 5.7 प्रतिशत सालाना की दर से एक महीने का ब्याज और ब्याज की राशि पर जीएसटी समेत मासिक किस्त का भुगतान करना होगा। देरी से भुगतान की इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए ब्रॉडकास्टर्स को ‘परफॉर्मेंस बैंक गारंटी’ (PBG) के रूप में एक मौद्रिक गारंटी (monetary guarantee) भी देनी होगी।
इस बारे में एक न्यूज ब्रॉडकास्टर का कहना है, ‘अब यदि हम देरी से भुगतान करते हैं तो हमें ब्याज की दोहरी मार झेलनी पड़ेगी। एक तो परफॉर्मेंस बैंक गारंटी के रूप में और दूसरा विलंब शुल्क के रूप में। इस समय हम पहले ही आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, ऐसे में राहत के नाम पर यह दोहरी मार है।’
बता दें कि मार्केट की स्थिति इन दिनों अच्छी नहीं है। इसका असर प्रत्येक ब्रॉडकास्टर पर पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें मिलने वाले विज्ञापन राजस्व में काफी कमी आई है। डीडी फ्रीडिश पर मौजूद ब्रॉडकास्टर्स का कहना है कि वे प्रसार भारती को कैरिज फीस के रूप में मासिक किस्त का भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं। कुछ ब्रॉडकास्टर्स का यह भी मानना है कि प्रसार भारती को इस लोड को आपस में साझा करना चाहिए।
उनके अनुसार, फ्री टू एयर प्लेटफॉर्म पर होने का मतलब ज्यादा से ज्यादा एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू हासिल करना है और यदि वह उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है तो फिर स्लॉट के लिए इतना भुगतान क्यों करना चाहिए। एक अन्य ब्रॉडकास्टर का कहना है, ‘हम ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाने के लिए और उसके अनुसार प्लेटफॉर्म के मुद्रीकरण (monetize) के तहत स्लॉट के लिए करोंड़ों में भुगतान कर रहे हैं, ऐसे में डीडी को इस नुकसान के बोझ को आपस में बांटना चाहिए। यदि विमुद्रीकरण (monetization) नहीं हो रहा है तो दूरदर्शन को इतनी भारी भरकर कैरिज फीस देने का कोई उद्देश्य नहीं है।’
प्रसार भारती द्वारा 44वीं ई-नीलामी में फ्रीडिश पर ‘MPEG-2’ स्लॉट्स आवंटित किए गए थे। इसके तहत चैनल्स द्वारा प्रसार भारती को कैरिज फीस का भुगतान किया जाता है। इस कैरिज फीस को 12 मासिक किस्तों में बांटा गया है। जो ब्रॉडकास्टर्स किस्तों का भुगतान समय से करने अथवा देर से करने की स्थिति में नहीं हैं, उनका कहना है कि इस प्लेटफॉर्म से हटना ही उन्हें एकमात्र विकल्प दिखाई दे रहा है।
प्रादेशिक भाषा के एक ब्रॉडकास्टर का कहना है, ‘एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू घटकर करीब 20 प्रतिशत रह गया है। हमारा बिजनेस इससे काफी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। हम दूरदर्शन को कैरिज फीस का भुगतान करने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि यह करोड़ों में बैठती है। ऐसे में हमारे जैसे छोटे ब्रॉडकास्टर्स फ्रीडिश प्लेटफॉर्म से अपने कदम पीछे खींचने के लिए मजबूर हैं।’ सूत्रों का कहना है कि आर्थिक संकट को देखते हुए चार-पांच चैनल्स ने इस प्लेटफॉर्म से अपने कदम वापस खींच लिए हैं।
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