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विवादों में DD फ्री डिश पर MPEG-2 स्लॉट की नीलामी , छोटे ब्रॉडकास्टर्स ने लगाए गंभीर आरोप

डीडी फ्री डिश पर MPEG-2 स्लॉट की ताजा ई-नीलामी अब एक बड़े विवाद में बदल गई है, जहां कई छोटे ब्रॉडकास्टर्स ने प्रसार भारती पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाए हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 11 months ago

डीडी फ्री डिश पर MPEG-2 स्लॉट की ताजा ई-नीलामी अब एक बड़े विवाद में बदल गई है, जहां कई छोटे ब्रॉडकास्टर्स ने प्रसार भारती पर प्रतिभागियों को चुनिंदा रूप से अयोग्य ठहराने और उन्हें हटाने के समय पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाए हैं। इनमें से कई ब्रॉडकास्टर अब इस पर स्पष्टीकरण मांग रहे हैं।

अयोग्य ठहराए गए एक ब्रॉडकास्टर के एक अधिकारी ने सवाल किया, "यदि प्रसार भारती को हमारी पात्रता को लेकर संदेह था, तो उन्होंने हमें आमंत्रण क्यों भेजा?" 

उन्होंने आगे कहा, "यदि हम बोली लगाने के योग्य नहीं थे, तो उन्हें प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही हमें बता देना चाहिए था, न कि नीलामी के बीच में।" 

इंडस्ट्री के जानकारों ने अयोग्य ठहराए जाने को मनमाना और संदेहास्पद बताया है, जिससे डीडी फ्री डिश नीलामी में पहले से मौजूद पारदर्शिता की कमी को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।

इन ब्रॉडकास्टर्स की शिकायतें तब और बढ़ गईं, जब कई अयोग्य ठहराए गए ब्रॉडकास्टर्स ने दावा किया कि उन्हें जांच अनुरोधों का अनुपालन करने के लिए असंभव समय सीमा दी गई थी।

एक R1 बकेट के अयोग्य ठहराए गए ब्रॉडकास्टर ने कहा, "हमें शनिवार, 8 फरवरी को एक जांच ई-मेल मिला, जिसमें सोमवार सुबह 11 बजे तक तीन महीने की कंटेंट रिकॉर्डिंग जमा करने की मांग की गई थी," 

उन्होंने आगे कहा, "जब मीडिया कार्यालय वीकेंड पर बंद रहते हैं, तो हम इस समय सीमा को कैसे पूरा कर सकते थे?" 

पहले दौर की नीलामी 10 फरवरी 2025 को शुरू हुई थी।

इन ब्रॉडकास्टर्स ने दावा किया कि उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए थे, लेकिन 12 फरवरी को रात 10 बजे उन्हें अस्वीकृति ईमेल मिला, जिससे उन्हें किसी भी प्रकार की स्पष्टीकरण देने या अपील करने का अवसर नहीं मिला और नीलामी आगे बढ़ गई।

एक अन्य ब्रॉडकास्टर ने सवाल किया, "असल सवाल यह है कि यदि R1 बकेट आवेदनों की जांच अभी भी चल रही थी, तो प्रसार भारती नीलामी कैसे शुरू कर सकता था?" 

इसके अलावा, इन ब्रॉडकास्टर्स ने आरोप लगाया कि प्रसार भारती ने R1 बकेट आवेदकों को नीलामी प्लेटफॉर्म तक पहुंचने की बुनियादी जानकारी कभी नहीं दी।

एक छोटे ब्रॉडकास्टर ने नाम न छापने की शर्त पर सवाल उठाया, "अन्य बकेट आवेदकों को 8 फरवरी को ई-मेल प्राप्त हुआ, जिसमें बताया गया था कि उन्हें 10 फरवरी को प्रशिक्षण के लिए अपने यूजर आईडी और पासवर्ड मिलेंगे। फिर R1 बकेट आवेदकों को वही जानकारी क्यों नहीं दी गई? क्या वे कभी पूरी तरह से नीलामी में भाग लेने के लिए थे भी?" 

छोटे ब्रॉडकास्टर्स की शिकायतों की सूची लंबी होती जा रही है।

अयोग्य ठहराए गए एक ब्रॉडकास्टर के सूत्र ने कहा, "हमें 7वीं ई-नीलामी के लिए आधिकारिक निमंत्रण मिले, हमने अपने दस्तावेज जमा किए और आवश्यक शुल्क का भुगतान किया।" 

एक अन्य ब्रॉडकास्टर, जिन्होंने नाम न छापने का अनुरोध किया, ने आरोप लगाया कि प्रसार भारती ने केवल कुछ निश्चित खिलाड़ियों को ही अयोग्य ठहराया। "उनका एक इतिहास रहा है, जहां वे कुछ चैनलों को निशाना बनाते हैं और दूसरों को बचाते हैं। नियमों को उनकी सुविधा के अनुसार बदला जाता है।"

इंडस्ट्री के विश्लेषकों का कहना है कि इन अयोग्य ठहराए जाने का समय इस बात का संकेत देता है कि यह जानबूझकर किया गया था। कई ब्रॉडकास्टर्स ने बताया कि प्रसार भारती ने केवल बोली शुरू होने के बाद अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग की, जिससे प्रतिभागियों के लिए समय पर अनुपालन करना असंभव हो गया।

वहीं, एक रीजनल ब्रॉडकास्टर के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "यह नीलामी नहीं, बल्कि एक जाल था।"

पहले दौर के बोलीदाताओं के बाहर हो जाने के बाद, दूसरा दौर लगभग बेस-प्राइस क्लीयरेंस सेल में बदल गया, क्योंकि ब्रॉडकास्टर्स ने बोली लगाने के बजाय प्रक्रिया को देखते रहने का विकल्प चुना।

पहले दौर में अच्छी प्रतिस्पर्धा देखी गई, लेकिन दूसरे दौर में कीमतें गिर गईं, जहां विजेता बोलियां केवल 10-15 लाख रुपये प्रति स्लॉट के मामूली अंतर से बढ़ीं।

एक इंडस्ट्री से जुड़े एक सूत्र ने कहा, "हम आक्रामक रूप से बोली क्यों लगाते, जब हमें पता था कि स्लॉट्स बिना किसी प्रतिस्पर्धा के मिलेंगे? प्रसार भारती ने पहले दौर के खिलाड़ियों को बाहर कर बड़ी गलती कर दी। इससे हमें बहुत कम कीमतों पर स्लॉट्स मिल गए।"

इसका नतीजा यह हुआ कि प्रतिस्पर्धा की कमी और ब्रॉडकास्टर्स की रणनीतिक बोली प्रक्रिया के कारण प्रसार भारती को अनुमानित 150 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।


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