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बीबीसी की इस रिपोर्ट पर क्यों मचा है बवाल, पढ़ें यहां
घाटी के पुलिस अधिकारी इम्तियाज हुसैन ने मीडिया हाउस की एक रिपोर्ट पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
अपनी एक रिपोर्ट को लेकर बीबीसी को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, बीबीसी उर्दू में जम्मू कश्मीर के संबंध में एक न्यूज पब्लिश हुई है, जिस पर काफी बवाल मचा हुआ है। घाटी के पुलिस अधिकारी इम्तियाज हुसैन ने मीडिया हाउस की उस रिपोर्ट पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है, जिसमें रिपोर्टर ने ट्रक ड्राइवर की हत्या को अप्रत्यक्ष रूप से जायज ठहराया है।
हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद बीबीसी ने रिपोर्ट के विवादित हिस्से को हटा दिया है, लेकिन उसका विरोध कम नहीं हुआ है। बीबीसी वैसे ही हिंदूवादी संगठनों के निशाने पर रहा है और इस घटना के बाद उसकी मुश्किलों में इजाफा होना तय है।
अरनब गोस्वामी के रिपब्लिक टीवी ने इस मुद्दे को उठाया है। चैनल की वेबसाइट पर बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट और पुलिस अधिकारी के ट्वीट के साथ एक स्टोरी लगाई गई है। इम्तियाज हुसैन के अनुसार, बीबीसी उर्दू के रिपोर्टर ने पत्थरबाजी की एक घटना को कवर किया था, जिसमें उन्होंने पत्थरबाजों द्वारा की गई ट्रक ड्राइवर की हत्या को एक तरह से जायज ठहराया है। रिपोर्टर ने लिखा है कि पत्थरबाजों ने ट्रक पर इसलिए हमला किया, क्योंकि उसमें सुरक्षा बल के जवान भी सवार थे और उन्होंने सोचा कि ट्रक सेना का है।
हुसैन ने बीबीसी रिपोर्टर के पूर्वाग्रह को उजागर करते हुए उनकी जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसे पत्रकारों को शर्म आनी चाहिए। हुसैन जानते थे कि मामले के तूल पकड़ने के बाद बीबीसी की साइट से विवादित खबर को हटा लिया जाएगा, इसलिए उन्होंने पहले ही स्क्रीनशॉट ले लिए थे। पुलिस अधिकारी ने पत्रकारिता के गिरते मानकों पर दुःख जाहिर करते हुए कहा कि हत्याओं का समर्थन करने वाली पत्रकारिता को पत्रकारिता नहीं कहा जा सकता।
Truth is the ultimate causality in journalism driven by agenda.
— Imtiyaz Hussain (@hussain_imtiyaz) August 27, 2019
Wish we had reporters on ground reporting truth. Absolving murderers is no journalism. https://t.co/zzCRLmay4M
वहीं, सोशल मीडिया पर भी लोग बीबीसी के खिलाफ गुस्सा निकाल रहे हैं। कुछ का कहना है कि अपने गैरजिम्मेदार और अनैतिक लेखन के लिए मीडिया हाउस पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए। आदित्य केरनी नामक यूजर ने बीबीसी की उर्दू रिपोर्ट के विवादित भाग का अनुवाद करते हुए बताया है कि रिपोर्टर के मुताबिक, ‘बड़ी तादाद होने की वजह से सुरक्षा बल आम ट्रकों में भी सफर करते हैं और नौजवानों ने यह सोच लिया कि इस ट्रक में भी जवान हैं’। वहीं, बीबीसी की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। लिहाजा यह कहना मुश्किल है कि रिपोर्टर ने जानबूझकर ऐसा लिखा या फिर यह महज संपादन त्रुटि है।
Badi tadaad hone ki wajah se security forces civil truck on mei bhi safar krti h aur nojwanon ne y farz kr liya ki iss truck m forces h.
— Aditya Kerni (@adityakerni) August 27, 2019
Hadn't found the utility of my school curriculum having urdu compulsory till 8th in J&K till this day.
रिपब्लिक टीवी की वेबसाइट में पब्लिश स्टोरी को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं।
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