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वाकई में ‘भौकाल‌’ काट दिया ‘आजतक’ ने

आजतक की भौकाली की चर्चा उसके विपक्षी चैनलों के पत्रकारों के साथ-साथ आम जनता भी कर रही है

समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago

‘भौकाल‌’ काट दिया आजतक ने और ये केवल हम नहीं कह रहे,  बल्कि आजतक की भौकाली की चर्चा उसके विपक्षी चैनलों के पत्रकार भी कर रहे हैं और दिल्ली-एनसीआर की आम जनता भी कर रही है। देशभर में टीवी पर जो इनके शोज को लाइव देख रहे थे, वह भी कर रहे हैं। आजतक की भौकाली की चर्चा की वजह बना है, उनके सालाना जलसा 'साहित्य आजतक' का शानदार कार्यक्रम। 3 दिन का यह जश्न मनाया गया दिल्ली के इंदिरा गांधी नेशनल आर्ट सेंटर में।

पब्लिक की नजर से सोचकर देखिए तो एक कार्यक्रम, जिसमें बिना टिकट एंट्री, 3 दिन में करीब 200 सेलिब्रिटीज, इनमें से कई के साथ बिना लाइन के सेल्फी लेने का मौका भी। कैलाश खेर, इम्तियाज अली, अनुपम खेर, शोभा मुद्गल जैसे फिल्म और म्यूजिक की दुनिया के सितारे तो थे ही, चेतन भगत जैसे राइटर्स, राहत इंदौरी जैसे शायर और कुमार विश्वास, सुरेंद्र शर्मा जैसे नामचीन कवि भी थे। जिन चेहरों को आप टीवी पर देखते हैं, वो चेहरे आपको उस कार्यक्रम में एक से दूसरे स्टेज के बीच हर 50 मीटर के फासले पर दिख रहे थे और ऐसे में शायद ही कोई हो, जिसको आप सेल्फी लेने के लिए कहते‌ और वो मना कर दे।

पब्लिक तो 3 दिन के इस समारोह में इतनी दीवानी थी कि गेट से एंट्री करने के बाद आजतक और इंडिया टुडे ग्रुप के जिन एंकर्स के कटआउट लगे हुए थे, उन्हीं के साथ फोटो खिंचवाकर खुश हो रही थी। इन‌ एंकर्स में सबसे आगे नजर आ रहे थे, अपनी चिर परिचित मुस्कान के साथ चेहरे पर सौम्यता लिए सईद अंसारी। इनमें राजदीप सरदेसाई, रोहित सरदाना, श्वेता सिंह, चित्रा त्रिपाठी, राहुल कंवल और निशांत चतुर्वेदी जैसे चेहरे तो थे ही, अंजना ओम कश्यप के कटआउट के चेहरे पर वही तेवर नजर आ रहे थे, जिन तेवरों के लिए वो जानी जाती हैं। ऐसे में जो भी आता था और जो जिस एंकर का फैन था, उसके साथ, उसके आदमकद कटआउट के साथ तस्वीरें लेने का मौका नहीं चूक रहा था।

यूं तो सेल्फी लेने के इस समारोह में कई पॉइंट थे, लेकिन ऐसे लोग जो अपना हुनर प्रदर्शित करने के लिए मंच तलाश रहे थे उनकी चहेती मंजिल थी 'माइक के लाल', जिसका जिक्र खुद अपने भाषण में टीवी टुडे ग्रुप की वाइस चेयरमैन कली पुरी ने किया था। कोई व्यक्ति जिसे लगता है कि उसके अंदर हुनर है, कविता गा सकता है,  कहानी सुना सकता है, गाना गा सकता है, शायरी कर सकता है,  'माइक के लाल' आजतक की तरफ से 'साहित्य आजतक' में उन सबके लिए सबसे बड़ा तोहफा था।

जो लोग भी अंदर आ रहे थे, उनको ऐसे लग रहा था जैसे ट्रेड फेयर मैं आ गए हों, जहां उन्हें हर हॉल में कुछ न कुछ मिलेगा यहां शॉपिंग के नाम पर पर एक कोने में बुक फेयर जरूर था, जहां कई बड़े पब्लिशर्स अपने-अपने स्टाल के साथ मौजूद थे।

आइसक्रीम, बर्गर जैसी चीजें मिल रही थीं और मिल रही थी चाय, वो भी टीवी टुडे ग्रुप की तरफ से बिल्कुल मुफ्त लेकिन बाकी सारे हॉल्स में था उनके मिजाज और तबीयत के हिसाब से मनोरंजन करने का पूरा मौका। किसी मंच पर साहित्य लेखिकाओं के बीच सईद अंसारी एक अलग अंदाज में गुफ्तगू कर रहे थे, तो  किसी हॉल में कवि सम्मेलन चल रहा था, जिसको होस्ट करते हुए चित्रा त्रिपाठी मशहूर कवियों की लाइंस बीच-बीच में सुना रही थीं, तो किसी में रोहित सरदाना देश के बड़े नेताओं की किताबें लिखने वाले लेखकों के  साथ पॉलिटिकल चर्चा करते हुए राजनीति के कई डिस्कोर्स पर बात कर रहे थे, तो किसी मंच पर शम्स ताहिर खान भूतों पर चर्चा कर रहे थे। किसी मंच पर हिंदी के अलावा किसी दूसरी भाषा में डिस्कशन चल रहा था, किसी मंच पर किसी की बुक लॉन्च हो रही थी तो किसी मंच पर कोई सेलिब्रिटी डायरेक्टर या सिंगर अपनी प्रेजेंटेशन दे रहा था और यह सब बिना लाइन, बिना किसी धक्का-मुक्की के।

यानी आप अपने मन चाहे किसी भी कार्यक्रम का आनंद उठा सकते थे। साहित्य आजतक में इस बार कई भाषाओं के लिए कार्यक्रम रखे गए थे और खासतौर पर इंग्लिश के लिए एक अलग से मंच बनाया गया था, जहां इंग्लिश की किताबों पर, इंग्लिश के साहित्य पर चर्चा हो रही थी। तमाम जानी-मानी अंग्रेजी साहित्य की हस्तियां‌ इस चर्चा में शामिल थीं। यहां तक कि इरॉटिक साहित्य जैसे विषयों पर भी। इस विषय पर आमतौर पर हिंदी में चर्चा नहीं होती। सबसे खास थी आजतक की कला प्रदर्शनी। 17 बड़े पेंटर्स की पेंटिंग्स की प्रदर्शनी के साथ-साथ कलाओं से जुड़े तमाम उत्पाद वहां प्रदर्शित किए गए थे।

कुल मिलाकर साहित्य में म्यूजिक का तड़का तो लोगों को खींचकर ला ही रहा था, आर्ट पेंटिंग जैसी विधाओं से जोड़कर साहित्य आजतक को एक विशाल कैनवास दे दिया गया था। हर मंच के बाहर इंडिया टुडे की साहित्य वार्षिकी का विशेषांक भी बिकता नजर आ रहा था। इंडिया टुडे के संपादक अंशुमान तिवारी और उनकी टीम के मनीष दीक्षित आदि पत्रकार भी एक कोने से दूसरे कोने में जायजा लेते हुए नजर आ रहे थे।

3 दिन के समारोह के जरिए टीवी टुडे ग्रुप ने यह साबित कर दिया कि वह केवल टीआरपी में ही नंबर वन नहीं है, बल्कि वाकई में भारत की नब्ज समझता है और भारत में मीडिया का नंबर वन  ब्रैंड है। कम से कम इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का तो। साहित्य आजतक के चौथे एडिशन को उसने जिस तरह से मेले का रूप दिया, उनकी टीम की मेहनत देखी जा रही थी। खुद कली पुरी और अरुण पुरी कई कार्यक्रमों में वहां मौजूद रहे। इन 3 दिनों में आजतक के एडिटोरियल हेड सुप्रिय प्रसाद एक सभागार से दूसरी मंच पर भागते-दौड़ते नजर आ रहे थे। इस कार्यक्रम ने जिस तरह से दूसरे चैनल्स के लोगों को, बड़े-बड़े बड़े पत्रकारों को आने पर मजबूर कर दिया, वो देखने लायक था।

सुप्रिय प्रसाद खुद जाकर उन लोगों को अपनी तैयारियां दिखा रहे थे, बीच-बीच में फोन पर चैनल में क्या चलना है, वह बता रहे थे। कौन से स्टेज पर लगातार चलने वाला कार्यक्रम रुक गया, वहां निर्देश दे रहे थे। एक अच्छे लीडर के तौर पर साथी एंकर नेहा बाथम का जन्मदिन भी उन्होंने वहां मनाया। आजतक एचडी की कमान संभालने वाले अपने साथी संजीव पालीवाल की बुक 'नैना' की लॉन्चिंग में डिस्कशन में भी उनको बैठे देखा गया। ऐसे में दूसरे चैनल्स के पत्रकारों के केवल चेहरे के रिएक्शंस बता रहे थे कि आजतक ने वाकई में भौकाल काट दिया है।

कार्यक्रम की कुछ झलकियां...


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