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सरकारी आलोचना व नए दबाव के बीच रेटिंग सिस्टम सुधारने की तैयारी में BARC
सरकार की आलोचना और अधिक रेटिंग एजेंसियों के लिए बाजार खोलने की मांगों के बीच ऐसा प्रतीत होता है कि ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल आखिरकार अपनी संचालन प्रणाली को सुचारू और मजबूत करने के लिए तैयार है
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 5 months ago
कंचन श्रीवास्तव, सीनियर एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
सरकार की आलोचना और अधिक रेटिंग एजेंसियों के लिए बाजार खोलने की मांगों के बीच ऐसा प्रतीत होता है कि ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) आखिरकार अपनी संचालन प्रणाली को सुचारू और मजबूत करने के लिए तैयार है, ताकि अपने रेटिंग सिस्टम को बेहतर बना सके।
गौरव बनर्जी की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने इस दिशा में एक योजना पर पिछले महीने हुई अपनी वार्षिक आम बैठक में चर्चा की थी, ऐसी जानकारी सूत्रों ने एक्सचेंज4मीडिया को दी।
एक उच्च अधिकारी ने कहा, “कुछ इनीशिएटिव्स जो इस साल के अंत तक शुरू किए जाने की संभावना है, जिसमें CTV मीजरमेंट सिस्टम की लॉन्चिंग और लंबे समय से लंबित बेसलाइन सर्वे का फिर से आरंभ करना शामिल है। ये दोनों मुद्दे एक्सचेंज4मीडिया बार-बार उठाता रहा है। इन उपायों को आकार देने की ठोस योजना अगली बोर्ड बैठक में अंतिम रूप से तय होने की संभावना है।”
एक्सचेंज4मीडिया ने ने पहले बताया था कि BARC ने 2018 से अब तक कोई बेसलाइन सर्वे नहीं किया है। इस वजह से टीवी के दर्शकों की संख्या (viewership data) की सटीकता पर संदेह बना हुआ है, खासकर तब जब महामारी के बाद लोगों की मीडिया देखने की आदतें बहुत तेजी से बदल चुकी हैं। इसके अलावा, BARC की जो योजनाएं थीं, जैसे कि घरों (households/HH) के पैनल कवरेज को बढ़ाना, मल्टी-स्क्रीन मीजरमेंट सिस्टम शुरू करना और एक कनेक्टेड टीवी सर्वे कराना, जोकि अभी तक साकार नहीं हो पाई हैं। सूत्रों का कहना है कि इस रुकावट का कारण कुछ ब्रॉडकास्टर्स के बीच इन कामों के प्रति लगातार रुचि की कमी है।
टीवी से जुड़े एक एग्जिक्यूटिव ने कहा, “ये दोनों कदम (बेसलाइन सर्वे और CTV मीजरमेंट) सिस्टम की विश्वसनीयता वापस लाने के लिए बेहद जरूरी हैं। बेसलाइन सर्वे से यह फायदा होता है कि पैनल को भारत की तेजी से बदल रही आबादी और दर्शकों की देखने की आदतों के हिसाब से ताजा और सही दिशा में किया जा सके। वहीं, CTV (कनेक्टेड टीवी) मीजरमेंट को अगला बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि भारत में 5 करोड़ से ज़्यादा घरों में अब बिना तार वाले टीवी हैं।
BARC के सीईओ नकुल चोपड़ा ने इस मामले पर कुछ भी कहने से फिलहाल इनकार कर दिया है। चेयरमैन गौरव बनर्जी ने भी बार-बार किए गए कॉल और संदेशों का जवाब नहीं दिया।
असली परीक्षा
BARC से उम्मीद की जा रही है कि वह नवंबर में प्रस्तावित अपनी अगली बोर्ड बैठक में इन इनीशिएटिव्स के लिए एक ठोस योजना को अंतिम रूप देगा। कई लोगों के लिए यह समय-सीमा BARC की नीयत और कार्रवाई की तत्परता की एक कसौटी होगी।
इंडस्ट्री अब भी 2020-21 के उस भरोसे के संकट को याद करता है, जब न्यूज रेटिंग्स एक साल से अधिक समय के लिए निलंबित कर दी गई थीं, जिससे ऐडवर्टाइजर और ब्रॉडकास्टर असमंजस में पड़ गए थे। शेयरहोल्डर्स का कहना है कि BARC अब और किसी देरी का जोखिम नहीं उठा सकता, जो उसकी स्थिति को कमजोर करे।
यह तत्परता पॉलिसी मेकर्स और ऐडवर्टाइजर्स दोनों की सीधी आलोचना की पृष्ठभूमि में सामने आई है। ब्रॉडकास्टर्स और मार्केटर्स के लिए विश्वसनीय और समय पर दर्शक डेटा उन विज्ञापन खर्चों की नींव है, जिनकी कीमत हजारों करोड़ रुपये है।
हाल ही में TRAI के चेयरमैन ए.के. लाहोटी ने भी इस पारिस्थितिकी तंत्र को “विकृत” बताया और एक से अधिक रेटिंग एजेंसियों के प्रवेश, मजबूत तकनीकी एकीकरण और सरकार के हस्तक्षेप की वकालत की, ताकि पारंपरिक टीवी और ओटीटी के बीच समानता सुनिश्चित हो सके।
एक इंडस्ट्री एक्सपर्ट ने कहा, “पैनल को ताजा करने और सर्वे शुरू करने में लगातार हो रही देरी ने न केवल ऐडवर्टाइजर्स का टीवी प्लेटफॉर्म पर विश्वास घटाया है, बल्कि BARC के सिस्टम की प्रासंगिकता पर भी असहज सवाल खड़े किए हैं। जितना अधिक BARC इंतजार करेगा, उतना ही वह बाजार की वास्तविकताओं से कटा हुआ माना जाएगा।”
कुछ पर्यवेक्षकों ने कहा, “कुछ हितधारक, खासकर ब्रॉडकास्टर, लंबे समय से इन अभ्यासों को लेकर आशंकित रहे हैं, इस डर से कि यह जो डेटा सामने ला सकता है। जहां वे ब्रॉडकास्ट क्षेत्र में हावी हैं, वहीं CTV क्षेत्र में उनका भरोसा कमजोर है, क्योंकि देखने के पैटर्न बहुत गतिशील बने हुए हैं, जिससे चीजें ऐडवर्टाइजर्स के लिए जटिल हो सकती हैं।”
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