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चैनलों पर RLD कैसे डालेगा प्रभाव, BARC की गाइडलाइंस आने के बाद तस्वीर होगी साफ

BARC इंडिया किस कीमत पर चैनलों को रिस्पॉन्डेंट लेवल डेटा साझा करेगा, इस पर जल्द ही कोई निर्णय आने की उम्मीद है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago

ऐसे समय पर जब सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने हाल ही में ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) इंडिया को ब्रॉडकास्टर्स के साथ रिस्पॉन्डेंट लेवल डेटा (RLD) साझा करने की अनुमति दे दी है, फिर भी कुछ न्यूज चैनल्स इस पर अधिक जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। चैनल्स का कहना है कि वे अभी तक टीवी रेटिंग निकाय से प्रक्रिया (procedure), गाइडलाइंस (guidelines) और लागत (cost) पर अधिक जानकारी साझा करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। 

एक प्रमुख न्यूज चैनल के सीईओ ने कहा कि फिलहाल, कुछ भी स्पष्ट नहीं है क्योंकि हमें BARC इंडिया से कोई गाइडलाइंस नहीं मिली हैं, न ही हम प्रक्रिया के बारे में कुछ जानते हैं। मेरा मानना है कि स्पष्ट तस्वीर आने में एक सप्ताह लगेगा।  

एक अन्य न्यूज ब्रॉडकास्टर ने कहा कि यह अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी कि डेटा न्यूज जॉनर को कैसे प्रभावित करेगा। उन्होंने आगे कहा कि हमें डेटा और लागत के विवरण का इंतजार करना होगा और उसके बाद ही हम यह पता लगा पाएंगे कि यह कैसे काम करेगा। 

उन्होंने आगे कहा कि कुछ ब्रॉडकास्टर्स के लिए, यह एक अच्छा निर्णय है और कुछ के लिए नहीं। चैनल RLD का उपयोग यह निर्धारित करने के लिए कर सकते हैं कि किस मार्केट और टाउन को टार्गेट किया जाए, साथ ही लोग चैनल से न्यूज का उपभोग कैसे करते हैं। मुझे यकीन नहीं है कि रिस्पॉन्डेंट लेवल डेटा न्यूज में वैल्यू लाएगा, जोकि एक कमोडिटाइज्ड बिजनेस है। 

जैसा कि हमारी सहयोगी वेबसाइट एक्सचेंज4मीडिया ने पहले ही यह जानकारी दी थी कि 14 सितंबर को, सरकार ने सूचना-प्रसारण सचिव अपूर्व चंद्रा द्वारा बुलाई गई एक बैठक में, BARC इंडिया के अधिकारियों को रिस्पॉन्डेंट लेवल डेटा ब्रॉडकास्टर्स के साथ भी साझा करने की अपनी मंजूरी दे दी थी, जिसे वह पहले से ही ऐडवर्टाइजर्स और एजेंसियों के साथ साझा कर रही है। BARC ने MIB से यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या वह रेटिंग निकाय को ब्रॉडकास्टर्स के साथ रॉ लेवल डेटा या फिर रिस्पॉन्डेंट लेवल डेटा साझा करने को कह रहे हैं। रेटिंग एजेंसी ने MIB से स्पष्टता मांगी थी क्योंकि 'RLD' शब्द की व्याख्या पर भ्रम था। 

भ्रम इसलिए हुआ क्योंकि 10 अगस्त को BARC को भेजे गए अपने पत्र में सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने रेटिंग निकाय से वह डेटा देने के लिए कहा जो वे पहले से ही ऐडवर्टाइजर्स और मीडिया एजेंसियों के साथ साझा कर रहे हैं। हालांकि, डेटा को रॉ लेवल डेटा के रूप में संदर्भित किया गया है। लेकिन वास्तव में, यह रिस्पॉन्डेंट लेवल डेटा है, जिसे ऐडवर्टाइजर्स और एजेंसियों के साथ साझा किया जा रहा है। इसलिए BARC ने इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगा था। 

रॉ लेवल डेटा का तात्पर्य लोगों के मीटरों द्वारा घरों से एकत्र की गई जानकारी से है। यह अनिवार्य रूप से असंसाधित डेटा (unprocessed data) है, जिसमें किसी बाहरी बहिष्करण का अभाव है। वहीं दूसरी तरफ, रिस्पॉन्डेंट लेवल डेटा, रॉ डेटा पर आउटलियर मैनेजमेंट टूल्स और एल्गोरिदम लागू करने का परिणाम है। सरल शब्दों में कहें तो इसे अंतिम डेटा के रूप में वर्णित किया जा सकता है, जिसे टीआरपी (टेलीविजन रेटिंग पॉइंट्स) के रूप में पहचाना जाता है।

इस बीच, e4m ने यह भी बताया कि BARC उस कीमत को क्लोज करने लिए तैयार है, जिस पर रिस्पॉन्डेंट लेवल डेटा ब्रॉडकास्टर्स को उपलब्ध कराया जाएगा। अब तक केवल एजेंसियों को ही प्रति वर्ष 60 लाख रुपये की लागत पर रिस्पॉन्डेंट लेवल डेटा उपलब्ध कराया जा रहा है। इंडस्ट्री के सूत्रों का दावा है कि BARC रिस्पॉन्डेंट लेवल डेटा को ब्रॉडकास्टर्स को एजेंसियों द्वारा इसके लिए भुगतान की तुलना में और अधिक उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है। जबकि कुछ स्रोतों ने दावा किया कि यह एजेंसियों द्वारा भुगतान की जाने वाली लागत से लगभग 50% कम हो सकता है। वहीं अन्य का कहना है कि यह एजेंसियों द्वारा अभी भुगतान की जा रही लागत का 1/3 जितना कम हो सकता है। 

वैसे बता दें कि जिस कीमत पर डेटा उपलब्ध कराया जाना चाहिए, उसके सुझाव अप्रूवल के लिए BARC बोर्ड के सदस्यों के साथ साझा किए गए हैं। माना जा रहा है कि ज्यादातर सदस्यों का इस पर अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।


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