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फिल्म 'इमरजेंसी' को लेकर पत्रकार कूमी कपूर का बड़ा आरोप, करेंगी मानहानि का दावा
वरिष्ठ पत्रकार और 'दि इमरजेंसी: ए पर्सनल हिस्ट्री' की लेखिका कूमी कपूर ने फिल्म प्रोडक्शन कंपनी मणिकर्णिका फिल्म्स और नेटफ्लिक्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का ऐलान किया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 9 months ago
वरिष्ठ पत्रकार और 'दि इमरजेंसी: ए पर्सनल हिस्ट्री' की लेखिका कूमी कपूर ने फिल्म प्रोडक्शन कंपनी मणिकर्णिका फिल्म्स और नेटफ्लिक्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का ऐलान किया है। उनका आरोप है कि कंगना रनौत की फिल्म 'इमरजेंसी' में उनकी किताब से बिना सहमति के सामग्री ली गई और इससे उनकी प्रतिष्ठा को गहरी ठेस पहुंची है।
कपूर का कहना है कि उन्होंने 3 अप्रैल को मणिकर्णिका फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड और नेटफ्लिक्स को लीगल नोटिस भेजा था, लेकिन उनके जवाब से वह संतुष्ट नहीं हैं और अब वे कोर्ट का रुख करेंगी।
कंगना रनौत द्वारा निर्देशित और सह-निर्मित इस फिल्म में वह खुद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भूमिका निभा रही हैं। फिल्म की शुरुआत में एक डिस्क्लेमर दिया गया है कि यह फिल्म कूमी कपूर की किताब द इमरजेंसी और जयंथ वसंत सिन्हा की प्रियदर्शिनी, साथ ही पब्लिक डोमेन में मौजूद सामग्री से प्रेरित है। लेकिन नेटफ्लिक्स पर दिखने वाले डिस्क्लेमर के आखिर में लिखा गया है कि फिल्म इन दोनों किताबों पर “आधारित” है। कपूर के नोटिस के बावजूद नेटफ्लिक्स पर यह डिस्क्लेमर अब तक बदला नहीं गया है।
कपूर, जो द इंडियन एक्सप्रेस की कंसल्टिंग एडिटर हैं, कहती हैं कि, “एक पत्रकार और लेखक के रूप में मेरी जो साख है, उसे इस फिल्म से अपूरणीय नुकसान पहुंचा है।”
कपूर की किताब 2015 में पेंगुइन रैंडम हाउस द्वारा प्रकाशित की गई थी, जिसमें उन्होंने 1975 की इमरजेंसी के 21 महीनों का दस्तावेजी विवरण दिया है — वो भी बतौर पत्रकार अपने निजी अनुभवों के आधार पर।
उनका कहना है कि 2021 में कंगना के भाई अक्षत रानौत ने मुंबई में उनसे मुलाकात की थी और फिल्म के लिए किताब के अधिकार मांगे थे, खासतौर से उस अध्याय के, जिसमें इंदिरा गांधी पर सामग्री थी। इसके बाद कपूर ने मणिकर्णिका फिल्म्स और पेंगुइन रैंडम हाउस के साथ एक त्रिपक्षीय अनुबंध पर हस्ताक्षर किए।
हालांकि, अपनी वकील बेटी की सलाह पर उन्होंने अनुबंध में दो शर्तें शामिल करवाईं- पहली, कि निर्माता को फिल्म बनाने की पूरी कलात्मक स्वतंत्रता होगी, लेकिन कोई भी तथ्य ऐसा न हो जो इतिहास से मेल न खाता हो। दूसरी, कि लेखक के नाम और किताब का इस्तेमाल फिल्म के प्रचार में बिना पूर्व अनुमति नहीं किया जाएगा।
कपूर का आरोप है कि उन्हें न तो फिल्म की स्क्रिप्ट दिखाई गई, न ही निर्माण से पहले उनकी राय ली गई। शूटिंग पूरी होने से पहले भी उन्होंने अक्षत को दो व्हाट्सएप संदेश भेजे थे, लेकिन फोन कॉल्स का कोई जवाब नहीं मिला।
वो बताती हैं कि जब फिल्म 17 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तब वे देश से बाहर थीं और पहली बार 17 मार्च को नेटफ्लिक्स पर ही उन्होंने फिल्म देखी।
कपूर का कहना है कि कई लोगों ने उन्हें फिल्म में तथ्यों की गड़बड़ी को लेकर शिकायतें भेजीं — जिनमें संजय गांधी के करीबी रहे अकबर अहमद डंपी भी शामिल हैं। फिल्म में दिखाया गया है कि ऑल इंडिया रेडियो पर किशोर कुमार के गानों पर प्रतिबंध लगाने की पहल अकबर अहमद ने की थी। जबकि कपूर की किताब में साफ तौर पर लिखा गया है कि यह प्रतिबंध तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री वीसी शुक्ला ने लगाया था।
कपूर अब अदालत के जरिए न्याय चाहती हैं और कहती हैं कि यह सिर्फ कॉपीराइट का मामला नहीं है, बल्कि उनके पत्रकार और लेखक के रूप में 50 साल की साख पर सवाल खड़ा करने जैसा है।
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