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IBDF ने TRAI से कहा, एकाधिक रेटिंग एजेंसीज से पैदा होगी बड़ी समस्या
इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन ने ट्राई से कहा कि मौजूदा ऑडियंस मीजरमेंट एजेंसी BARC पर्याप्त है और एकाधिक एजेंसियों को लाने की कोई जरूरत नहीं है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 1 year ago
इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) ने बुधवार को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) से कहा कि मौजूदा ऑडियंस मीजरमेंट एजेंसी BARC पर्याप्त है और एकाधिक एजेंसियों को लाने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि इससे बड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
IBDF ने 'राष्ट्रीय प्रसारण नीति' पर ट्राई की ओपन हाउस चर्चा के दौरान यह बात कही। ट्राई इस महीने के अंत तक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को अपनी सिफारिशें भेज सकता है।
चर्चा में हितधारकों द्वारा विरोधाभासी विचार और मजबूत राय सामने रखी गई, जो लीनियर और OTT प्लेटफॉर्म्स की मौजूदा ऑडियंस मीजरमेंट सिस्टम पर विभाजित हैं। कुछ ने जोर देकर कहा कि भ्रम और हितों के टकराव से बचने के लिए BARC पर्याप्त है, तो वहीं कुछ अन्य सटीकता सुनिश्चित करने के लिए एक से अधिक एजेंसीज की मांग कर रहे हैं।
टीवी और डिजिटल पर मीजरमेंट के दो अलग-अलग मेट्रिक्स हैं। लीनियर से शुरू करते हुए BARC का गठन एक संसदीय समिति के निर्देश पर किया गया था और इसमें तीन हितधारक शामिल हैं- ऐडवर्टाइजर्स, एजेंसीज और ब्रॉडकास्टर्स। रेटिंग प्राप्त करने के दो तरीके हैं - एक जनगणना-आधारित विधि और दूसरा सैम्पल आधारित विधि। अधिकांश देश सैम्पल आधारित विधियों का उपयोग करते हैं, क्योंकि जनगणना आधारित विधि महंगी है और इसे प्राप्त करना कठिन है।
IBDF के महासचिव सिद्धार्थ जैन ने कहा कि BARC अपने दम पर सैम्पल साइज बढ़ाने और लीनियर साइड से अधिक डेटा प्राप्त करने के लिए बॉक्स की संख्या बढ़ाने के लिए बड़े प्रयास कर रहा है। मैं इस बात पर फिर से जोर देता हूं कि जो भी नई कंपनी आएंगी, वह बड़ी समस्या पैदा करेंगी। समस्या यह है कि इंडस्ट्री के पास एक कॉमन करेंसी होनी चाहिए। यदि एक से अधिक रेटिंग एजेंसीज होती हैं, तो करेंसी कमजोर और विभाजित हो जाती है और फिर इंडस्ट्री इस मुद्दे से जूझेगी कि वास्तविक करेंसी कौन सी है।
OTT के पक्ष पर बात करते हुए जैन ने कहा कि सभी प्लेटफॉर्म्स प्रोग्रामेटिक ऐड्स देने के लिए यूजर्स प्रोफाइल और प्राथमिकताएं क्रिएट करने के लिए एल्गोरिदम के साथ-साथ एआई-जनरेटेड डेटा सैंपलर्स और एनलिसिस का उपयोग करते हैं, जो कि लीनियर प्लेसमेंट्स पर संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह डेटा बेहद गोपनीय है। यदि हम एक कॉमन एजेंसी की बात करते हैं तो यह जटिल इसलिए हो जाती है क्योंकि आप उन प्लेटफॉर्म्स से डेटा प्राप्त करने के बारे में बात कर रहे हैं जिनकी पहुंच उन लोगों तक होती है जो प्लेटफॉर्म्स की सदस्यता लेते हैं और फिर अपना डेटा तीसरे पक्ष को साझा करते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि हम विनम्रतापूर्वक अनुरोध करते हैं कि हमें इस चर्चा की शुरुआत भी नहीं करनी चाहिए कि ट्राई को OTT या लीनियर के लिए मीजरमेंट एजेंसीज के बारे में आम सहमति पर गौर करे।
इसके उलट अपनी बात रखते हुए एबीपी नेटवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड के इंडिपेंडेंट काउंसिल राज वरियर ने कहा कि BARC न्यूज रेटिंग्स के लिए अच्छा नहीं था और अब समय आ गया है कि न्यूज जॉनर पर उचित ध्यान दिया जाए।
उन्होंने कहा कि ट्राई ने रेटिंग पर सवाल सही उठाया है और इस चिंता का समाधान करना उनका अधिकार क्षेत्र है।
राज वरियर ने कहा कि जहां तक एक जॉनर के तौर पर न्यूज का संबंध है, तो यह एक समस्या है। इस जॉनर को BARC रेटिंग के दायरे से हटा दिया गया और फिर से इसे शुरू किया गया। एक मीजरमेंट एजेंसी के तौर पर BARC किसी भी जॉनर के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन न्यूज के लिए ऐसा नहीं है। सच्चाई यह है कि इसे दो चीजों पर मापा जाता है - रीच और टाइम स्पेंट।
उन्होंने कहा कि रीच कैरिएज पर खर्च किए गए पैसे पर निर्भर है, जो एक और समस्या है जिसे संबोधित करने की जरूरत है। जहां तक टाइम स्पेंट का सवाल है, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर है कि यदि मेरे पास कुछ बेहतर न्यूज है, तो लोग देखेंगे, अन्यथा, न्यूज को उस तरह का अटेंशन नहीं मिलेगा जो आमतौर पर एंटरटेनमेंट को मिलता है। जहां तक न्यूज मीजर करने का सवाल है, तो यह सटीक नहीं है। अब समय आ गया है कि इस जॉनर पर उचित ध्यान दिया जाए।
IBDF की भावनाओं को दोहराते हुए कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड (सोनी पिक्चर्स) के प्रिंसिपल लीगल काउंसिल (सीनियर वाइस प्रेजिडेंट) गुरुराजा राव ने कहा कि BARC सटीक है और रेटिंग सिस्टम पर किसी भी नियामक नीति की कोई आवश्यकता नहीं है।
“BARC एक सटीक और निष्पक्ष ऑडियंस मीजरमेंट व रेटिंग सिस्टम प्रदान करने में सक्षम है। BARC द्वारा निष्पादित एक स्वतंत्र कार्य के तौर पर डेटा कलेक्शन को अलग करने के कारण ट्रांसपेरेंट डेटा कलेक्शन और एनालिसिस मेथोलॉजी मेंटेन की जाती है।
राव ने कहा, “हमारा मानना है कि इस संबंध में किसी नियामक नीति या बदलाव की कोई जरूरत नहीं है। 55,000 घरों के मौजूदा सैंपल साइज को देखें तो हो सकता है कि यह देश में 182 मिलियन टीवी घरों के वर्तमान विशाल परिदृश्य के मुकाबले कम हो, लिहाजा हम टीवी दर्शकों के विविध परिदृश्य को पर्याप्त रूप से प्रस्तुत करने के लिए मीटर वाले घरों के विस्तार पर विचार कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि एकाधिक मीजरमेंट एजेंसीज होने से डेटा में दिक्कतें पैदा हो सकती हैं और यह विभिन्न रेटिंग्स की प्रामाणिकता के संबंध में अस्पष्टता और भ्रम भी पैदा कर सकता है।
वहीं एकाधिक एजेंसीज की मांग करते हुए हैथवे डिजिटल लिमिटेड के डायरेक्टर अजय सिंह ने ट्राई से कहा कि अब समय आ गया है कि इसे आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि जहां तक दर्शकों की संख्या का सवाल है, अब समय आ गया है कि हम लिफाफे को थोड़ा आगे बढ़ाएं। बेशक, हमारे पास मौजूद टीवी घरों के साइज को देखते हुए 55000 बहुत ही छोटा सैम्प्ल साइज है। एकाधिक एजेंसीज ही बेहतर हैं, क्योंकि कॉम्पटीशन भी होना चाहिए।
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