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DTH लाइसेंस फीस घटाने की TRAI की सिफारिश पर AIDCF का विरोध, MIB से की ये मांग
ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) को पत्र लिखकर भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) की उस सिफारिश को खारिज करने की अपील की है
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 6 months ago
ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) को पत्र लिखकर भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) की उस सिफारिश को खारिज करने की अपील की है, जिसमें डायरेक्ट-टू-होम (DTH) लाइसेंस फीस को 8% से घटाकर 3% करने की बात कही गई है। फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि यदि यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया, तो इससे केबल टीवी ऑपरेटर्स के अस्तित्व और देश में डिजिटल समावेशन के व्यापक लक्ष्यों पर दूरगामी और अपूरणीय असर पड़ेगा।
पत्र में AIDCF ने लिखा, “हम विनम्रतापूर्वक कहना चाहते हैं कि TRAI की यह सिफारिश, यदि मान ली गई, तो यह न केवल मल्टी सिस्टम ऑपरेटर (MSO) के रूप में हमारे अस्तित्व पर संकट ला सकती है, बल्कि देशभर में ब्रॉडबैंड के विस्तार और डिजिटल समावेशन जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों को भी प्रभावित करेगी।”
AIDCF का तर्क है कि DTH सेक्टर को पहले से ही कई संरचनात्मक और वाणिज्यिक लाभ मिलते हैं, जिनमें सबसे अहम है – फ्री स्पेक्ट्रम का प्रशासनिक आवंटन। फेडरेशन के अनुसार, जब यह लाभ शुरू हुआ था, तब इसकी भरपाई के लिए 10% लाइसेंस फीस लागू की गई थी। पत्र में यह भी बताया गया है कि यदि यही स्पेक्ट्रम नीलामी के ज़रिए उपलब्ध कराया गया होता, तो इसकी लागत बीते 20 वर्षों में लगभग 45,000 करोड़ रुपये होती।
पत्र में लिखा गया, “प्रस्तावित कटौती DTH ऑपरेटर्स को पहले से मिल रहे बड़े फायदे को नजरअंदाज़ करती है, विशेष रूप से फ्री स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट को। यदि स्पेक्ट्रम की कीमत को ध्यान में रखा जाए तो वह 20 वर्षों के लिए करीब ₹45,000 करोड़ होती।”
फेडरेशन ने चेताया कि इस तरह की कटौती से DTH और केबल टीवी ऑपरेटर्स के बीच पहले से मौजूद असंतुलन और गहराएगा और इससे बाजार की प्रतिस्पर्धा असमान हो जाएगी। “यह फैसला केबल टीवी ऑपरेटर्स के लिए बाज़ार को पूरी तरह से असमान और अनुचित बना देगा।”
AIDCF ने प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए। उसने कहा कि TRAI द्वारा जनवरी 2023 में जारी परामर्श पत्र में कहीं भी लाइसेंस फीस में कटौती का प्रस्ताव स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया था, जिससे स्टेकहोल्डर्स को समय रहते प्रतिक्रिया देने का अवसर नहीं मिल सका। “इस सिफारिश प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी और यह हितधारकों के लिए सार्थक इनपुट देने का उचित मंच नहीं बना सकी।”
फेडरेशन ने आशंका जताई कि यदि यह सिफारिश लागू हुई, तो देशभर में 880 MSOs और 1.6 लाख लोकल केबल ऑपरेटर्स (LCOs) के संचालन बंद हो सकते हैं। इससे सीधे तौर पर इस क्षेत्र से जुड़े लगभग 10 लाख लोगों की आजीविका पर असर पड़ेगा और दूर-दराज़ के क्षेत्रों में सस्ती डिजिटल सेवाओं की पहुंच बाधित होगी।
पत्र के अंत में AIDCF ने मंत्रालय से आग्रह किया कि सभी उद्योग खिलाड़ियों के बीच समान नियम बनाए रखें। “हम आपसे अपील करते हैं कि इस प्रस्तावित कटौती या DTH लाइसेंस फीस की माफी को खारिज करें और सभी उद्योगों के लिए बराबरी का माहौल बनाए रखें।”
इसके साथ ही फेडरेशन ने मंत्रालय से मुलाकात कर अपनी बात विस्तार से रखने का अनुरोध भी किया है।
बता दें कि फिलहाल DTH प्लेटफॉर्म्स को अपने समायोजित सकल राजस्व (AGR) पर 8% की दर से लाइसेंस फीस चुकानी पड़ती है, जैसा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा निर्धारित किया गया है। लेकिन अगस्त 2023 में TRAI ने अपनी सिफारिशों में इस दर को घटाकर 3% करने की सलाह दी थी, और कहा था कि इसे वित्त वर्ष 2027 तक पूरी तरह समाप्त कर देना चाहिए। यह सिफारिश अभी तक लागू नहीं की गई है।
देश के प्रमुख DTH ऑपरेटर जैसे कि टाटा प्ले और डिश टीवी पहले ही TRAI के समक्ष उच्च लाइसेंस फीस के चलते वित्तीय दबाव की शिकायत कर चुके हैं।
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