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भोजपुरी फिल्म ‘आपन कहाये वाला के बा’ दर्शकों को बांधे रखने वाली खास फिल्म: मनोज भावुक
भोजपुरी सिनेमा के पुराने सुनहरे दिनों की याद दिलाती फिल्म ‘आपन कहाये वाला के बा’ हाल ही में दर्शकों के बीच आई है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 5 months ago
भोजपुरी सिनेमा के पुराने सुनहरे दिनों की याद दिलाती फिल्म ‘आपन कहाये वाला के बा’ हाल ही में दर्शकों के बीच आई है। 'समाचार4मीडिया' से बातचीत में गीतकार मनोज भावुक ने कहा कि आमतौर पर भोजपुरी फिल्मों को लेकर लोग असहज हो जाते हैं कि कब कौन सा दृश्य आएगा, लेकिन यह फिल्म हर स्तर पर– कहानी, अभिनय, निर्देशन और गीत-संगीत दर्शकों को पूरी तरह बांधकर रखती है।
उन्होंने कहा कि फिल्म में भोजपुरी इलाके की सच्ची और सकारात्मक तस्वीर पेश की गई है। यह सिर्फ मनोरंजन ही नहीं करती, बल्कि दर्शकों को अपने भीतर झांकने और टूटते-बिखरते परिवार को जोड़ने का संदेश भी देती है। फिल्म भोजपुरी सिनेमा पर लगे कलंक को धोती है और इसकी स्थापित अवधारणा को चुनौती देती है।
निर्देशक रजनीश मिश्रा ने फिल्म का निर्देशन कमाल का किया है। गीतकार मनोज भावुक के लिखे गीत और कलाकारों का अभिनय फिल्म की जान हैं। अवधेश मिश्रा, अंजना सिंह, देव सिंह, माया यादव, प्रीति मौर्या ने उत्कृष्ट अभिनय किया है। नवोदित अभिनेत्री संयुक्ता राय बहन के किरदार में प्रभावशाली लगी हैं। इसके अलावा रिंकू भारती, राघव पाण्डेय, अमरीश सिंह, राम सूजन सिंह ने भी अपने किरदारों में न्याय किया है। फिल्म के निर्माता हैं रजनीश मिश्रा और विनय सिंह।
गीत-संगीत फिल्म का प्रमुख आकर्षण हैं। सभी गीत मनोज भावुक ने लिखे हैं। प्रियंका सिंह की आवाज में गाया गया गीत:
"भउजी जब खिसियाली बड़ी काड़ा लागेली / बाकिर हंस के छोहाली त छोहाड़ा लागेली"
बहुत मधुर और असरदार है। वहीं गीत
"धान कुटाये लागल, हरदी कुंचाये लागल / लगनौती बबुनी के मन कसमसाये लागल"
पूर्वांचल की शादियों में खूब गाया जाएगा।
टाइटल सॉन्ग ‘आपन कहाये वाला के बा’ विशेष रूप से दिल छू लेने वाला है:
"भाई के दुखवा में भाई सटे ना
खुनवो के रिश्ता में नेहिया टिके ना
अइसन में साथ निभावे वाला के बा?
छाती से अपना लगावे वाला के बा
आपन कहाये वाला के बा?"
यह गीत भावनाओं को उभारता है और रिश्तों में दरार पैदा करने वालों को अपराधबोध से भर देता है।
गीतकार मनोज भावुक और संगीतकार रजनीश मिश्रा की जोड़ी ने भोजपुरी सिनेमा के सुनहरे दौर की याद ताजा कर दी है। उनके गीत शैलेन्द्र, मजरुह और अंजान के समय के भोजपुरी गीतों की याद दिलाते हैं। यह फिल्म और इसके गीत भविष्य में भोजपुरी सिनेमा के महत्वपूर्ण योगदान के रूप में याद किए जाएंगे।
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