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भारतीय न्यूजरूम्स के लिए Google ने लॉन्च की AI Skills Academy, जानें क्या है उद्देश्य
गूगल ने भारत में अपनी AI Skills Academy की शुरुआत की है, जिसका मकसद पत्रकारों और न्यूजरूम को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के व्यावहारिक इस्तेमाल की ट्रेनिंग देना है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 7 months ago
गूगल ने भारत में अपनी AI Skills Academy की शुरुआत की है, जिसका मकसद पत्रकारों और न्यूजरूम को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के व्यावहारिक इस्तेमाल की ट्रेनिंग देना है। यह पहल Google News Initiative का हिस्सा है और इसका उद्देश्य संपादकीय टीमों को ऐसे टूल्स और वर्कफ्लो से लैस करना है जो रिपोर्टिंग, रिसर्च, ट्रांसलेशन, ट्रांसक्रिप्शन और फैक्ट वेरिफिकेशन जैसे कार्यों को बेहतर बना सकें।
यह पहल ऐसे समय पर आई है जब भारतीय न्यूजरूम सीमित संसाधनों और तेजी से बदलती डिजिटल खपत की आदतों के साथ तालमेल बिठाने की चुनौती से जूझ रहे हैं। गूगल का प्रस्ताव सीधा है: AI वह सारा बुनियादी काम कर सकती है, जिससे पत्रकारों को कहानी कहने और प्रभाव बनाने पर ज्यादा ध्यान देने का मौका मिल सके।
AI Skills Academy देशभर के मीडिया संगठनों में हैंड्स-ऑन वर्कशॉप्स और डिजाइन स्प्रिंट्स आयोजित करेगी, जहां पत्रकारों को सिखाया जाएगा कि कैसे वे AI टूल्स को जिम्मेदारी के साथ अपने रोजमर्रा के काम में शामिल करें। इसमें गूगल के अपने टूल्स जैसे Pinpoint और Fact Check Explorer शामिल होंगे, साथ ही जनरेटिव AI मॉडल्स का इस्तेमाल सार-संक्षेप तैयार करने, स्थानीय भाषाओं में अनुवाद और डेटा प्रोसेसिंग के लिए कैसे किया जाए, इस पर भी व्यापक प्रशिक्षण मिलेगा।
इस घोषणा के जरिए गूगल ने भारत के न्यूज इकोसिस्टम के प्रति अपने व्यापक योगदान को आगे बढ़ाया है। पिछले एक साल में गूगल ने 60,000 से ज्यादा पत्रकारों और पत्रकारिता के छात्रों को ट्रेनिंग दी है, फैक्ट-चेकिंग नेटवर्क को सपोर्ट किया है और लोकल पब्लिशर्स के साथ मिलकर रेवेन्यू बढ़ाने की पहलें की हैं। लेकिन AI Skills Academy एक नया मोड़ दर्शाता है, अब फोकस केवल क्षमताओं के निर्माण से आगे बढ़कर उनके वास्तविक इस्तेमाल की ओर बढ़ रहा है।
मीडिया व मार्केटिंग से जुड़े प्रोफेशनल्स के लिए यह ट्रेंड ध्यान देने लायक है। जैसे-जैसे न्यूजरूम कंटेंट प्रोडक्शन और ऑडियंस इनसाइट्स के लिए AI टूल्स अपनाते हैं, पत्रकारिता और ब्रैंड स्टोरीटेलिंग के बीच की दूरी घट सकती है। स्थानीय भाषाओं में पर्सनलाइजेशन, तेज टर्नअराउंड और अधिक इंटरएक्टिव फॉर्मेट्स जैसे प्रयोग अब दूर की बात नहीं।
एक सीनियर डिजिटल पब्लिशर ने एक्सचेंज4मीडिया को बताया, “यह केवल पत्रकारों की चुनौती नहीं है। जो भी कंटेंट इकोसिस्टम का हिस्सा है- चाहे मार्केटर हो (एजेंसी हो या कोई प्लेटफॉर्म) उसे यह समझना जरूरी है कि AI किस तरह से कहानियों को बनाने, जांचने और पेश करने के तरीकों को बदल रहा है।”
यह पहल भारत के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में चल रहे एक बड़े बदलाव से भी जुड़ी हुई है। MeitY के IndiaAI Mission, बढ़ते टेक बजट और गूगल जैसी निजी पहलों के जरिए ऐसा आधार तैयार हो रहा है, जिससे मीडिया को AI-सक्षम बनाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती है- AI का जिम्मेदार और नैतिक उपयोग। गूगल का कहना है कि उसकी अकादमी एथिकल AI को प्राथमिकता देती है और बायस, मिसइन्फॉर्मेशन और तथ्यों से भटके हुए कंटेंट से बचने के लिए गाइडलाइंस भी लागू की गई हैं। लेकिन क्या ये मानक हाई-प्रेशर न्यूजरूम्स में बड़े पैमाने पर कायम रह पाएंगे, यह अभी देखने की बात है।
फिर भी, संदेश साफ है: जनरेटिव AI अब आधिकारिक रूप से भारतीय न्यूजरूम में प्रवेश कर चुका है। और अगर पत्रकार AI की मदद से बेहतर कहानियां गढ़ने की ट्रेनिंग ले रहे हैं, तो मार्केटिंग की दुनिया को भी अब ध्यान देना शुरू कर देना चाहिए।
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