FAANG से MANGOS तक: AI के दौर में भारतीय मार्केटर्स को क्यों करनी होगी नई तैयारी?

सीनियर ब्रैंड, ग्रोथ और मीडिया एक्सपर्ट केतन के. भारती के मुताबिक, FAANG से MANGOS का बदलाव सिर्फ टेक लीडरशिप का नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के फैसले लेने के तरीके में आए बड़े बदलाव का संकेत है।

Last Modified:
Thursday, 11 June, 2026
KetanKBharati5441


केतन के. भारती, सीनियर ब्रैंड, ग्रोथ व मीडिया एक्सपर्ट ।।

कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक ग्राफिक तेजी से वायरल हुआ। इसमें पांच परिचित अक्षरों को हटाकर उनकी जगह छह नए अक्षर जोड़ दिए गए थे।

FAANG बाहर था और MANGOS अंदर।  (FAANG was out. MANGOS was in.)

डिजिटल युग के बड़े हिस्से में FAANG- फेसबुक, एमेजॉन, एप्पल, नेटफ्लिक्स और गूगल- यह तय करते थे कि लोग अपना समय कहां बिताएंगे, जानकारी कहां से हासिल करेंगे, कंटेंट कैसे देखेंगे और खरीदारी कहां करेंगे। मार्केटिंग की पूरी रणनीतियां इन्हीं प्लेटफॉर्म्स के इर्द-गिर्द बनाई जाती थीं।

लेकिन MANGOS- मेटा, एंथ्रोपिक, एनवीडिया, गूगल, ओपनएआई और स्पेसएक्स- कुछ अलग दर्शाता है। ये कंपनियां सिर्फ लोगों का ध्यान आकर्षित करने की होड़ में नहीं हैं, बल्कि वे उस इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रही हैं जो तेजी से लोगों के फैसलों को प्रभावित कर रहा है।

मार्केटर्स के लिए यह अंतर बेहद महत्वपूर्ण है। पिछले दो दशकों में ब्रैंड्स लोगों का ध्यान खींचने के लिए संघर्ष करते रहे हैं। लेकिन आने वाले दशक में उन्हें उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण चीज के लिए लड़ना पड़ सकता है- AI द्वारा लिए जा रहे फैसलों में अपनी जगह बनाने के लिए।

मेरी नजर में FAANG से MANGOS की ओर बदलाव की असली कहानी यही है। यह सिर्फ तकनीकी नेतृत्व में बदलाव नहीं है, बल्कि इस बात में बदलाव है कि उपभोक्ता किसी चीज को कैसे खोजते हैं, उसका मूल्यांकन कैसे करते हैं और अंततः उसे चुनते कैसे हैं।

मार्केटिंग इंडस्ट्री ने हर बड़े तकनीकी बदलाव के साथ खुद को ढाला है- चाहे वह टेलीविजन हो, सर्च इंजन, सोशल मीडिया या स्मार्टफोन। लेकिन AI कुछ अलग महसूस होता है। इसलिए नहीं कि यह एक और नया प्लेटफॉर्म लेकर आया है, बल्कि इसलिए कि इसमें उपभोक्ताओं और उनके फैसलों के बीच बैठने की क्षमता है।

वह बदलाव जिसकी चर्चा कम हो रही है

AI को लेकर अधिकांश चर्चाएं कंटेंट क्रिएशन पर केंद्रित हैं। लेकिन इससे भी बड़ा बदलाव यह है कि AI अब सिर्फ कंटेंट बनाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोगों की पसंद और फैसलों को प्रभावित करने लगा है।

मान लीजिए कोई व्यक्ति अपने परिवार के लिए सबसे अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस प्लान ढूंढ़ रहा है। कुछ साल पहले वह सर्च इंजन पर जाता, अलग-अलग वेबसाइट्स की तुलना करता, रिव्यू पढ़ता और फिर फैसला लेता। आज वही उपभोक्ता सीधे किसी AI असिस्टेंट से सवाल पूछने की संभावना ज्यादा रखता है।

AI असिस्टेंट विभिन्न जानकारियों को एक साथ जोड़ता है, विकल्पों की तुलना करता है और कुछ चुनिंदा सुझाव देता है। न कोई सर्च रिजल्ट पेज। न दस नीले लिंक और कई बार तो किसी वेबसाइट पर क्लिक करने की भी जरूरत नहीं पड़ती।

सालों तक मार्केटर्स विजिबिलिटी के लिए प्रतिस्पर्धा करते रहे। अब उन्हें AI की सिफारिशों में शामिल होने के लिए प्रतिस्पर्धा करनी होगी। ब्रैंड्स की अगली लड़ाई क्लिक्स के लिए नहीं, बल्कि उपभोक्ता की पसंद बनने के लिए होगी।

अटेंशन इकोनॉमी से इंटेलिजेंस इकोनॉमी तक

FAANG युग ने अटेंशन इकोनॉमी को जन्म दिया था। मार्केटिंग का फॉर्मूला सीधा था- ध्यान आकर्षित करो, उसे ग्राहक में बदलो और उसका आंकलन करो। लेकिन AI का उभरता दौर अलग तरीके से काम करता है।

आज जो सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं, वे लोगों को जटिल जानकारियों के बीच रास्ता दिखाने और बेहतर फैसले लेने में मदद करते हैं। इसी वजह से मार्केटिंग अब अटेंशन-आधारित ग्रोथ से इंटेलिजेंस-आधारित ग्रोथ की ओर बढ़ रही है।

पहले सफलता का मतलब सही दर्शकों तक पहुंचना था। अब सफलता इस बात पर निर्भर हो सकती है कि आपका ब्रैंड सबसे भरोसेमंद जवाब बन पाए या नहीं। एल्गोरिद्म बड़े पैमाने पर कंटेंट तैयार कर सकते हैं, लेकिन भरोसा नहीं।

जानकारी से भरी दुनिया में वे ब्रैंड आगे रहेंगे जिन्हें लगातार सुझाया जाएगा, जिनका संदर्भ दिया जाएगा और जिन्हें लोग याद रखेंगे।

कैंपेन से मार्केटिंग ऑपरेटिंग सिस्टम तक

AI का सबसे बड़ा प्रभाव सिर्फ क्रिएटिव ऑटोमेशन नहीं है। असल बदलाव संगठनों के काम करने के तरीके में है। दशकों से मार्केटिंग कैंपेन आधारित मॉडल पर चलती रही है। टीम ब्रीफ बनाती है, मीडिया लॉन्च करती है, प्रदर्शन मापती है और फिर अगले कैंपेन पर चली जाती है। अब यह मॉडल पुराना पड़ने लगा है।

आज के CMO कुछ नए सवाल पूछ रहे हैं:

  • क्या प्लानिंग को ऑटोमेट किया जा सकता है?
  • क्या ऑप्टिमाइजेशन रियल टाइम में हो सकता है?
  • क्या ग्राहक की यात्रा को डायनेमिक तरीके से बदला जा सकता है?
  • क्या AI पारंपरिक कैंपेन मॉडल से ज्यादा तेजी से बेहतर फैसले ले सकता है?

भविष्य की मार्केटिंग अलग-अलग कैंपेन के इर्द-गिर्द नहीं बनेगी। यह ऐसे कनेक्टेड ऑपरेटिंग सिस्टम पर आधारित होगी जो लगातार सीखते, सुधारते और बेहतर होते रहेंगे। भविष्य में वही संगठन आगे बढ़ेंगे जो क्रिएटिविटी, डेटा, टेक्नोलॉजी और बिजनेस परिणामों को सबसे बेहतर तरीके से जोड़ पाएंगे।

सवाल यह नहीं है कि AI मार्केटर्स की जगह लेगा या नहीं। सवाल यह है कि क्या कंपनियां अब भी AI-पूर्व दुनिया के लिए बने ढांचे पर काम करती रहेंगी। काम का बड़ा हिस्सा ऑटोमेट हो जाएगा, लेकिन निर्णय लेने की क्षमता, विभिन्न चीजों को जोड़ने की समझ और रणनीतिक सोच की अहमियत और बढ़ जाएगी।

क्यों AI एजेंट्स बदल देंगे पूरा खेल

AI की अगली बड़ी लहर AI असिस्टेंट नहीं, बल्कि AI एजेंट्स होंगे। असिस्टेंट सवालों के जवाब देते हैं। एजेंट्स काम पूरा करते हैं। आज उपभोक्ता AI से पूछते हैं कि क्या खरीदना चाहिए। कल वे AI से कह सकते हैं कि वह उनकी ओर से खरीदारी भी कर दे। कल्पना कीजिए कि कोई AI एजेंट कीमतों की तुलना कर रहा है, रिव्यू पढ़ रहा है, उत्पाद चुन रहा है और उपभोक्ता की तरफ से खरीदारी भी पूरी कर रहा है। यह ब्रैंड्स के लिए एक नई चुनौती पैदा करेगा।

क्या होगा जब अगला ग्राहक कोई इंसान नहीं, बल्कि उसकी ओर से काम करने वाला AI एजेंट होगा? पारंपरिक विज्ञापन लोगों को प्रभावित करने के लिए बनाए गए थे। लेकिन आने वाले दशक में ब्रैंड्स को इंसानों के साथ-साथ उनके लिए काम करने वाले डिजिटल एजेंट्स को भी प्रभावित करना होगा।

मीडिया के लिए इसका क्या मतलब है? 

हर तकनीकी बदलाव नए गेटकीपर्स पैदा करता है। एक समय टीवी नेटवर्क गेटकीपर थे। फिर सर्च इंजन आए। उसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने यह भूमिका निभाई। अब AI असिस्टेंट और AI एजेंट्स अगली पीढ़ी के गेटकीपर बन सकते हैं।

 पब्लिशर्स के लिए चुनौती साफ है- कम क्लिक्स और बदलते ट्रैफिक पैटर्न। लेकिन अवसर भी उतना ही बड़ा है।

जब इंटरनेट सिंथेटिक कंटेंट से भरता जा रहा है, तब ओरिजिनल रिपोर्टिंग, विशेषज्ञ विश्लेषण और रिसर्च आधारित कंटेंट की अहमियत बढ़ रही है। भविष्य में जरूरी नहीं कि सबसे ज्यादा कंटेंट बनाने वाले जीतें। जीत उन्हीं की हो सकती है जो सबसे ज्यादा भरोसेमंद कंटेंट तैयार करें। एजेंसियों के लिए भी यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है।

भविष्य की एजेंसी डेटा, टेक्नोलॉजी, क्रिएटिविटी और AI को जोड़कर एकीकृत ग्रोथ सिस्टम तैयार करेगी। एक्जिक्यूशन सस्ता होगा, लेकिन सही निर्णय लेने की क्षमता की कीमत बढ़ेगी। 

भारत के लिए अवसर अलग हैं

भारत के लिए AI का अवसर अगला OpenAI बनाने में नहीं हो सकता। बल्कि उन भारतीय समस्याओं का समाधान करने में हो सकता है जहां भाषा, बड़े पैमाने और पहुंच का संगम होता है।

  • क्षेत्रीय भाषाओं में स्वास्थ्य संबंधी सलाह
  • किसानों के लिए कृषि परामर्श
  • नए निवेशकों के लिए वित्तीय शिक्षा
  • व्यक्तिगत शिक्षण व्यवस्था
  • छोटे कारोबारों को सशक्त बनाना

साथ ही AI से जुड़े सबसे बड़े बदलाव केवल चैट इंटरफेस तक सीमित नहीं रहेंगे। वे उन जगहों पर होंगे जहां खोज, खरीदारी और लेनदेन एक-दूसरे से मिलते हैं। मार्केटप्लेस, रिटेल मीडिया नेटवर्क और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अब सिर्फ वितरण चैनल नहीं रह गए हैं, बल्कि निर्णय लेने वाले इंजन बनते जा रहे हैं।

जैसे-जैसे AI इन प्लेटफॉर्म्स में शामिल होगा, सिफारिश और खरीदारी के बीच की दूरी काफी कम हो सकती है। भारत को सफल होने के लिए सिलिकॉन वैली की नकल करने की जरूरत नहीं है। उसे भारतीय समस्याओं का भारतीय पैमाने पर समाधान करना होगा।

एक अलग नजरिया: AI ब्रैंड्स को और मजबूत बनाएगा

AI को लेकर अक्सर यह माना जाता है कि तकनीक ब्रैंड्स की भूमिका को कमजोर कर देगी, लेकिन मेरा मानना है कि इसका उल्टा होगा। जैसे-जैसे AI से तैयार कंटेंट बढ़ेगा, अलग पहचान बनाना और मुश्किल होता जाएगा। उपभोक्ता AI की सिफारिशों पर भरोसा कर सकते हैं, लेकिन अंतिम फैसला लेते समय वे उन्हीं ब्रैंड्स को प्राथमिकता देंगे जिन्हें वे जानते हैं और जिन पर भरोसा करते हैं।

जानकारी से भरी दुनिया में पहचान और विश्वसनीयता सबसे बड़ी ताकत बन जाएंगी। अगले दशक के सबसे मजबूत ब्रैंड वे होंगे जो तकनीकी क्षमता और सांस्कृतिक जुड़ाव, दोनों को साथ लेकर चलेंगे। सिर्फ एक चीज पर्याप्त नहीं होगी। मार्केटिंग लीडर्स को अब क्या करना चाहिए? मार्केटिंग लीडर्स को एक सरल सवाल से शुरुआत करनी चाहिए।

अगर आज कोई उपभोक्ता या उसकी ओर से काम कर रहा AI एजेंट हमारी कैटेगरी के बारे में पूछे, तो क्या हमारे ब्रैंड का नाम जवाब में आता है? अधिकांश कंपनियों को इसका जवाब नहीं पता और यही सबसे बड़ी चुनौती है।

कंपनियों को ग्राहकों के साथ सीधे संबंध मजबूत करने होंगे, फर्स्ट-पार्टी डेटा क्षमताओं को बढ़ाना होगा और मार्केटिंग, एनालिटिक्स, टेक्नोलॉजी तथा कस्टमर एक्सपीरियंस के बीच मौजूद दीवारों को तोड़ना होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ब्रैंड बिल्डिंग में निवेश जारी रखना होगा।

FAANG युग ने उन ब्रैंड्स को पुरस्कृत किया जो लोगों का ध्यान आकर्षित करना जानते थे। MANGOS युग उन ब्रैंड्स को पुरस्कृत करेगा जो लोगों और AI दोनों की सिफारिश हासिल कर सकेंगे,क्योंकि AI द्वारा संचालित फैसलों के इस दौर में सिर्फ दिखना काफी नहीं होगा। ब्रैंड्स को चुना जाना भी जरूरी होगा।

 

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डेविड रॉबिन्सन का ओपनएआई से इस्तीफा : एआई सेफ्टी पर उठाए सवाल

ओपनएआई के लंबे समय तक सेफ्टी लीडर रहे डेविड रॉबिन्सन ने इस्तीफा देकर एआई डेवलपमेंट और सेफ्टी तरीकों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मजबूत सेफ्टी सिस्टम की जरूरत बताई है।

Last Modified:
Tuesday, 06 October, 2026
openai

ओपनएआई (OpenAI) में लंबे समय तक सेफ्टी लीडर रहे डेविड रॉबिन्सन (David Robinson) ने इस्तीफा दे दिया है। कंपनी छोड़ने के बाद उन्होंने ओपनएआई की वर्क कल्चर (Work Culture) और एआई को आगे बढ़ाने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। रॉबिन्सन ने कहा कि एआई इंडस्ट्री जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, उसके साथ सेफ्टी पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है। उनके मुताबिक, मौजूदा तरीके से एआई को डेवलप करना अब सही नहीं है।

अपने एक लेख में रॉबिन्सन ने बताया कि एआई कंपनियां अक्सर पहले सिस्टम को डेवलप और डिप्लॉय करती हैं और समस्या सामने आने के बाद सेफ्टी सिस्टम को बेहतर करती हैं। ओपनएआई इस तरीके को इटरेटिव डिप्लॉयमेंट (Iterative Deployment) कहता है। रॉबिन्सन के मुताबिक, एआई के लिए यह तरीका बड़ा रिस्क बन सकता है।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे एआई मॉडल ज्यादा पावरफुल होंगे, किसी गलती का असर भी बड़ा हो सकता है। अगर कोई बड़ी गलती हो गई तो हर बार उसे बाद में ठीक करने का मौका नहीं मिलेगा। इसलिए एआई कंपनियों को पहले से ज्यादा मजबूत सेफ्टी सिस्टम बनाने होंगे। रॉबिन्सन ने एआई एजेंट (AI Agents) से जुड़ी कुछ घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक घटना में ओपनएआई से गलती से एआई एजेंट्स का एक स्वॉर्म रिलीज हो गया था।

उन्होंने एक अन्य मामले का जिक्र करते हुए बताया कि ट्रेनिंग के दौरान एक एआई मॉडल ने इंटरनेट एक्सेस से जुड़ी पाबंदियों को पार कर लिया। सिस्टम ने इसकी जानकारी दी, लेकिन उसे अपने आप बंद नहीं किया जा सका, जबकि ऐसा होना चाहिए था। रॉबिन्सन के मुताबिक, इस तरह की गलतियां सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं हैं। एआई इंडस्ट्री में तेजी से काम करने की वजह से ऐसी घटनाएं हो रही हैं।

हालांकि, रॉबिन्सन ने एआई को पूरी तरह खराब नहीं बताया। उनके मुताबिक, एआई लोगों के लिए काफी उपयोगी और फायदेमंद हो सकता है। लेकिन इसकी कैपिसिटी बढ़ने के साथ सेफ्टी भी उसी हिसाब से मजबूत होनी चाहिए।

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साइबर सुरक्षा से लेकर कोडिंग तक मदद करेगा गूगल का 'Gemini 4 Argon'

गूगल ने नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल जेमिनी 4 आर्गन पेश किया है। फिलहाल इसकी पहुंच चुनिंदा साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों और साझेदारों तक सीमित है, सार्वजनिक लॉन्च की तारीख घोषित नहीं हुई है।

Last Modified:
Thursday, 01 October, 2026
gogolegemini

गूगल (Google) ने नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल जेमिनी 4 आर्गन (Gemini 4 Argon) पेश किया है। हालांकि, कंपनी ने इसकी शुरुआती पहुंच आम यूजर्स के लिए नहीं रखी है। फिलहाल इसे चुनिंदा साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों और साझेदारों को दिया जा रहा है।

गूगल का कहना है कि जेमिनी 4 आर्गन को मुश्किल कामों के लिए तैयार किया गया है, लेकिन इसकी क्षमता का गलत इस्तेमाल साइबर हमलों में हो सकता है। इसी वजह से मॉडल को चरणबद्ध तरीके से जारी किया जा रहा है।

जेमिनी 4 आर्गन सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, वित्तीय और कानूनी कामों के साथ साइबर सुरक्षा में भी मदद कर सकता है। गूगल के मुताबिक, यह सॉफ्टवेयर में मौजूद कमियों को पहचानने और उन्हें ठीक करने में सहायता कर सकता है। कंपनी का दावा है कि कोडिंग और साइबर सुरक्षा जांच में इसका प्रदर्शन ओपनएआई (OpenAI) और एंथ्रोपिक (Anthropic) के प्रमुख मॉडलों के बराबर रहा है।

साइबर सुरक्षा में इसकी क्षमता का एक उदाहरण जांच के दौरान सामने आया। गूगल के अनुसार, आर्गन ने अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले एक सॉफ्टवेयर सिस्टम की ऐसी कमी पहचानी, जिससे संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी सामने आने का खतरा था। कंपनी का कहना है कि दूसरे एआई मॉडल इस कमी को पहचान नहीं पाए थे।

गूगल ने आर्गन में सुरक्षा उपाय भी लगाए हैं, जो साइबर हमलों या रासायनिक, जैविक और परमाणु हथियारों से जुड़े खतरनाक अनुरोधों को रोकते हैं।

फिलहाल गूगल ने आर्गन को चुनिंदा साइबर सुरक्षा साझेदारों तक सीमित रखा है और आम यूजर्स के लिए इसकी उपलब्धता की तारीख नहीं बताई है। कंपनी अमेरिका सरकार की स्वैच्छिक प्रक्रिया में भी शामिल है, जिसमें रिलीज से पहले सरकार को उन्नत एआई मॉडलों की शुरुआती पहुंच दी जाती है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ने टेक कंपनियों संग साइन किया एआई सेफ्टी समझौता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेक कंपनियों के साथ एआई सुरक्षा समझौते पर चर्चा की। कंपनियों ने आंतरिक जांच, निगरानी, बाहरी ऑडिट और बोर्ड स्तर की समीक्षा पर सहमति जताई।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2026
trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने मंगलवार को व्हाइट हाउस (White House) में बड़ी टेक कंपनियों के सीईओ (CEO) के साथ बैठक की। बैठक में एआई (AI) की सुरक्षा और निगरानी को लेकर गूगल (Google), एंथ्रोपिक (Anthropic), मेटा (Meta), ओपनएआई (OpenAI), एक्सएआई (xAI) और एनवीडिया (Nvidia) समेत कंपनियों ने एक स्वैच्छिक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए।

समझौते के तहत कंपनियों ने अपने एआई सिस्टम की सुरक्षा को लेकर कई स्तरों पर निगरानी रखने पर सहमति जताई है। इसमें कंपनियों की ओर से अपने एआई मॉडल की जांच, अलग टीम के जरिए निगरानी, बाहरी विशेषज्ञों या स्वतंत्र संस्थाओं से ऑडिट और बोर्ड की स्वतंत्र समिति की ओर से रिपोर्ट की समीक्षा शामिल है।

बैठक के दौरान ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के लिए ‘सुपर इंटेलिजेंस’ यानी एसआई (Super Intelligence - SI) नाम के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘आर्टिफिशियल’ शब्द तकनीक को बनावटी बताता है। इससे पहले 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी ट्रंप ने एआई के लिए ‘सुपर इंटेलिजेंस’ शब्द का इस्तेमाल करने की बात कही थी।

ट्रंप ने एआई की दौड़ को अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा से भी जोड़ा और अमेरिका के आगे होने की बात कही। बैठक में टेक कंपनियों के एआई विकास और सुरक्षा के साथ डेटा सेंटर (Data Center) से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

ट्रंप ने टेक कंपनियों से कहा कि जिन शहरों और कस्बों में डेटा सेंटर बनाए जाएंगे, वहां की स्थानीय कम्युनिटी (Local Community) के साथ मिलकर काम किया जाए। उन्होंने कहा कि कंपनियों को स्थानीय लोगों के लिए स्कूलों, शिक्षकों और दूसरी जरूरतों में मदद करने पर भी ध्यान देना चाहिए।

ट्रंप ने एआई कंपनियों के लिए सेल्फ-रेगुलेशन (Self-Regulation) पर भी जोर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह समझौता फिलहाल स्वैच्छिक है और इसमें कंपनियों की ओर से अपने सिस्टम की सुरक्षा के लिए आंतरिक नियंत्रण और स्वतंत्र ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।

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एआई एजेंट्स के गलत व्यवहार पर रोक लगाएंगे एनवीडिया के नए ओपन-सोर्स टूल

एनवीडिया ने दो ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर सिक्योरिटी टूल लॉन्च किए हैं, जो एआई एजेंट्स की रियल-टाइम एक्सेस को नियंत्रित करेंगे और नियम तोड़ने पर उन्हें बंद कर सकेंगे।

Last Modified:
Tuesday, 29 September, 2026
nvidia

सेमीकंडक्टर कंपनी एनवीडिया (Nvidia) ने दो ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर सिक्योरिटी टूल (Open-Source Software Security Tools) लॉन्च किए हैं। ये टूल कंपनी के हार्डवेयर (Hardware) पर चलेंगे और यह नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई (Artificial Intelligence) एजेंट रियल-टाइम में किन चीजों का एक्सेस (Access) ले सकते हैं।

अगर एआई एजेंट तय नियमों को तोड़ते हैं, तो ये टूल उन्हें बंद भी कर सकते हैं। कंपनी ने यह कदम ऑटोनॉमस एजेंट (Autonomous Agent) के गलत व्यवहार से जुड़ी कई घटनाओं के बाद उठाया है।

एनवीडिया के एंटरप्राइज एआई के वाइस प्रेसिडेंट जस्टिन बोइटानो (Justin Boitano) ने कहा कि अगर अत्याधुनिक एआई लैब्स ने अपने एआई मॉडल को टेस्ट करने के लिए इस टेक्नोलॉजी का पहले ही इस्तेमाल किया होता, तो हगिंग फेस (Hugging Face) पर हुआ हमला रोका जा सकता था।

कंपनी को उम्मीद है कि उसका ओपन एजेंट सेफ्टी प्लेटफॉर्म (Open Agent Safety Platform) एआई डेवलपमेंट (AI Development) की रफ्तार को धीमा किए बिना भविष्य में होने वाली ऐसी सेंधमारी को रोकने में मदद करेगा। इसे तकनीक की सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम बताया जा रहा है।

एनवीडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेंसेन हुआंग (Jensen Huang) ने नए एआई नियमों की जरूरत को ज्यादा अहमियत नहीं दी है, लेकिन सुरक्षा की कड़ी जांच पर जोर दिया है। वह सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को इंजीनियरिंग चैलेंज (Engineering Challenge) मानते हैं, न कि ऐसी समस्या जिसके लिए ज्यादा नियमों या वैश्विक तालमेल की जरूरत हो।

हुआंग ने कुछ एआई डेवलपर्स के उन दावों को भी खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि उनकी टेक्नोलॉजी से इंसानों का अस्तित्व खत्म हो सकता है।

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सरकार 20,000 करोड़ रुपये तक का AI फंड बनाने पर कर रही विचार

भारत सरकार AI को बढ़ावा देने के लिए 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये का नया फंड बनाने पर विचार कर रही है। इससे AI कंपनियों और कंप्यूटिंग ढांचे को मदद मिल सकती है।

Last Modified:
Saturday, 26 September, 2026
aifund

भारत सरकार देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) यानी एआई (AI) को बढ़ावा देने के लिए 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये का नया फंड बनाने पर विचार कर रही है। द इकोनॉमिक टाइम्स (The Economic Times) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फंड का मकसद एआई कंपनियों को फंडिंग देने के साथ बड़े एआई मॉडल तैयार करने के लिए जरूरी कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Computing Infrastructure) विकसित करना है।

प्रस्तावित नेशनल फ्रंटियर एआई एंड कंप्यूट फंड (National Frontier AI and Compute Fund) के तहत एआई कंपनियों और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर को लंबी अवधि के लिए फंड उपलब्ध कराने की योजना पर चर्चा हो रही है।

प्रस्तावित फंड से दो प्रमुख क्षेत्रों को मदद मिलने की उम्मीद है। पहला, बड़े एआई मॉडल तैयार करने वाले भारतीय स्टार्टअप्स और कंपनियों को लंबे समय के लिए फंडिंग उपलब्ध कराना। दूसरा, एआई मॉडल बनाने और चलाने के लिए जरूरी जीपीयू क्लस्टर्स (GPU Clusters) और डाटा सेंटर (Data Centre) तैयार करने में मदद करना। इससे उन कंपनियों को फायदा मिल सकता है, जिन्हें शुरुआती दौर में बड़े निवेश की जरूरत होती है।

इस फंड में सरकार के साथ निजी निवेशकों को जोड़ने की योजना पर भी चर्चा हो रही है। एक प्रस्ताव के तहत सरकार और निजी निवेशक 50-50 हिस्सेदारी के साथ फंड में पैसा लगा सकते हैं। हालांकि, फंड का कुल आकार, निवेश का तरीका और सरकार की भूमिका अभी तय नहीं हुई है। वित्तीय संस्थानों को भी इसमें शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

यह प्रस्तावित फंड इंडिया एआई मिशन (India AI Mission) से अलग होगा, लेकिन उसे मजबूत करने में मदद कर सकता है। इंडिया एआई मिशन के लिए सरकार ने 10,372 करोड़ रुपये का खर्च मंजूर किया है। इसके तहत कंपनियों को कम कीमत पर कंप्यूटिंग सुविधा उपलब्ध कराने और देश में एआई क्षमता बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।

नया फंड खास तौर पर बड़े एआई मॉडल बनाने वाली कंपनियों और बड़े कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लंबी अवधि की फंडिंग उपलब्ध कराने पर ध्यान देगा।

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Google Gemini का नया फीचर : सामान से लेकर टेबल बुकिंग तक AI करेगा कॉल

गूगल ने जेमिनी में ‘कॉल फॉर मी’ फीचर शुरू किया है। इसके जरिए एआई यूजर की तरफ से बिजनेस को फोन कर सामान, बुकिंग और अपॉइंटमेंट से जुड़े काम कर सकेगा।

Last Modified:
Friday, 25 September, 2026
gogolegemini

गूगल (Google) ने जेमिनी (Gemini) के लिए ‘कॉल फॉर मी’ (Call for Me) नाम का नया फीचर शुरू किया है। इसकी मदद से जेमिनी यूजर की तरफ से किसी बिजनेस (Business) को फोन कर सकेगा। शुरुआत में यह सुविधा अमेरिका में रहने वाले पिक्सल 11 (Pixel 11) यूजर्स के लिए उपलब्ध होगी, जो जेमिनी की पेड मेंबरशिप (Paid Membership) लेते हैं। इसके लिए एंड्रॉयड (Android) के गूगल फोन ऐप (Google Phone App) का बीटा वर्जन (Beta Version) भी जरूरी होगा।

गूगल फिलहाल इस फीचर को प्रयोग के तौर पर सीमित स्तर पर उपलब्ध करा रहा है। ‘कॉल फॉर मी’ की मदद से जेमिनी किसी दुकान पर फोन करके सामान उपलब्ध है या नहीं, इसकी जानकारी ले सकता है। इसके अलावा रेस्टोरेंट में टेबल बुक करने, अपॉइंटमेंट की तारीख बदलने या किसी सामान को कुछ समय के लिए रखने जैसे काम भी किए जा सकेंगे।

फोन कॉल के दौरान एआई अपना परिचय देगा, मेन्यू के विकल्प चुनेगा और जरूरत पड़ने पर होल्ड पर भी इंतजार करेगा। गूगल के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर जेमिनी यूजर की मंजूर की गई निजी जानकारी भी फोन पर साझा कर सकेगा। इससे बिजनेस के साथ बातचीत के दौरान ज्यादा काम पूरा किया जा सकेगा।

कॉल शुरू होने के बाद यूजर बातचीत को लाइव ट्रांसक्रिप्ट (Live Transcript) के जरिए देख सकेंगे और जरूरत पड़ने पर कॉल को नियंत्रित भी कर सकेंगे। खास बात यह है कि फोन करने के लिए जेमिनी यूजर के अपने मोबाइल नंबर (Mobile Number) का इस्तेमाल करेगा।

गूगल का नया फीचर कंपनी की पहले से मौजूद एआई कॉलिंग (AI Calling) तकनीक पर आधारित है। इससे पहले कंपनी ‘कॉल फॉर मी’, ‘होल्ड फॉर मी’ (Hold for Me) और दूसरे फीचर भी दे चुकी है, जो फोन कॉल में मदद करते हैं।

कंपनी के मुताबिक, वास्तविक फोन बातचीत कई बार आसान नहीं होती और अलग-अलग स्थितियां सामने आ सकती हैं। इसी वजह से ‘कॉल फॉर मी’ को अभी छोटे स्तर पर शुरू किया गया है। बड़े स्तर पर उपलब्ध कराने से पहले फीचर में सुधार किया जाएगा।

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X पर आया नया X Number फीचर : बिना फोन नंबर शेयर किए करें चैट और कॉल

एलॉन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर X Number फीचर आया है। इसके जरिए यूजर्स बिना फोन नंबर शेयर किए चैट, कॉल और वीडियो कॉल कर सकते हैं।

Last Modified:
Thursday, 24 September, 2026
xnumber

एलॉन मस्क (Elon Musk) के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर नया एक्स नंबर (X Number) फीचर आया है। इसकी मदद से यूजर्स बिना अपना फोन नंबर शेयर किए किसी से चैट (Chat), कॉल (Call) या वीडियो कॉल (Video Call) कर सकते हैं। खास बात यह है कि इसके लिए दोनों लोगों का एक-दूसरे को फॉलो करना भी जरूरी नहीं है।

कई बार लोग प्राइवेसी (Privacy) की वजह से किसी के साथ फोन नंबर शेयर नहीं करना चाहते। वहीं, कुछ मामलों में सामने वाले व्यक्ति को फॉलो किए बिना बातचीत करना चाहते हैं। ऐसे में एक्स नंबर फीचर उपयोगी हो सकता है।

एक्स नंबर कोई फोन नंबर नहीं है, बल्कि एक प्राइवेट कोड (Private Code) है। यूजर इस कोड को उस व्यक्ति के साथ शेयर कर सकता है, जिससे वह एक्स पर बात करना चाहता है। कोड शेयर करने के बाद दोनों लोग प्लेटफॉर्म पर चैट कर सकते हैं।

यह सुविधा केवल चैट तक सीमित नहीं है। यूजर्स एक्स पर कॉल और वीडियो कॉल भी कर सकते हैं। हालांकि, कॉल और वीडियो कॉल का विकल्प एक्स की प्राइवेसी सेटिंग्स (Privacy Settings) पर निर्भर करता है।

एक्स नंबर फीचर में प्राइवेसी को लेकर एक और सुविधा दी गई है। अगर यूजर अपने एक्स नंबर को रिफ्रेश करके नया कोड बनाता है, तो पुराना कोड काम करना बंद कर देता है। इसके बाद पुराने कोड के जरिए कोई व्यक्ति दोबारा संपर्क नहीं कर पाएगा।

इस तरह एक्स नंबर यूजर्स को अपना फोन नंबर निजी रखते हुए प्लेटफॉर्म पर चैट और कॉल करने की सुविधा देता है। यह एक प्राइवेट कोड है, जिसे यूजर अपनी जरूरत के मुताबिक शेयर और रिफ्रेश कर सकता है।

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गूगल बदलेगा सीएसएएम रिपोर्टिंग सिस्टम : भारतीय एजेंसियों को मिलेगी सीधी जानकारी

गूगल भारत से जुड़े बाल यौन शोषण सामग्री मामलों की रिपोर्टिंग व्यवस्था बदलने पर विचार कर रहा है। प्रस्ताव के तहत संबंधित जानकारी सीधे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र को दी जाएगी।

Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2026
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गूगल (Google) भारत से जुड़े चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (Child Sexual Abuse Material) यानी सीएसएएम (CSAM) मामलों की रिपोर्टिंग व्यवस्था में बदलाव करने की तैयारी में है। रॉयटर्स (Reuters) की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ऐसी व्यवस्था पर काम कर रही है जिसमें इन मामलों की जानकारी पहले अमेरिका स्थित मध्यस्थ के पास भेजने के बजाय सीधे भारतीय अधिकारियों को दी जा सके।

यह कदम मेटा (Meta) की ओर से पिछले सप्ताह उठाए गए इसी तरह के कदम के बाद सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सरकारी अधिकारियों ने बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों से बच्चों से जुड़े मामलों में रिपोर्टिंग चेन (Reporting Chain) को छोटा करने की मांग की थी। दो भारतीय सरकारी सूत्रों ने मौजूदा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई थी कि इससे स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई में काफी देरी हो सकती है।

गूगल ने कहा है कि वह प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर भारत सरकार के साथ चर्चा कर रहा है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि गूगल सीएसएएम का पता लगाने, उसे रोकने, हटाने और रिपोर्ट करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश करता है। कंपनी के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था सरकार के साथ चल रही बातचीत का हिस्सा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, गूगल ने सीएसएएम से जुड़े मामलों में संबंधित जानकारी इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (Indian Cyber Crime Coordination Centre) यानी आई4सी (I4C) के साथ साझा करने की व्यवस्था शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। इससे भारतीय अधिकारियों को ऐसे मामलों में ज्यादा सीधा रिपोर्टिंग चैनल मिल सकेगा।

कई वर्षों से गूगल और मेटा संदिग्ध सीएसएएम मामलों के लिए इंटरनेशनल रिपोर्टिंग प्रोसेस (International Reporting Process) का इस्तेमाल करते रहे हैं। इसके तहत संदिग्ध सामग्री की जानकारी अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन (National Center for Missing & Exploited Children) यानी एनसीएमईसी (NCMEC) को भेजी जाती है।

एनसीएमईसी साइबरटिपलाइन (CyberTipline) संचालित करता है और संबंधित देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक रिपोर्ट पहुंचाता है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि इस अतिरिक्त चरण में महत्वपूर्ण समय लग सकता है, खासकर उन मामलों में जहां किसी बच्चे को तत्काल खतरा हो और स्थानीय पुलिस को तेजी से कार्रवाई करने की जरूरत हो।

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ऐपल पे की भारत में एंट्री की तैयारी : एक्सिस बैंक के साथ शुरुआत संभव

ऐपल भारत में अगले महीने अपनी पेमेंट सर्विस ऐपल पे लॉन्च कर सकती है। शुरुआत एक्सिस बैंक के क्रेडिट कार्ड से होने की संभावना है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

Last Modified:
Friday, 18 September, 2026
applepay

टेक कंपनी ऐपल (Apple) अगले महीने भारत में अपनी पेमेंट सर्विस (Payment Service) ऐपल पे (Apple Pay) लॉन्च कर सकती है। मनीकंट्रोल (Moneycontrol) की रिपोर्ट के अनुसार, इसकी शुरुआत एक्सिस बैंक (Axis Bank) के क्रेडिट कार्ड (Credit Card) के साथ होने की संभावना है। हालांकि, ऐपल और संबंधित बैंकों ने संभावित लॉन्च की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

ऐपल पे के आने के बाद आईफोन (iPhone) यूजर्स को अलग पेमेंट ऐप (Payment App) खोलने की जरूरत नहीं होगी। वे अपने फोन में सुरक्षित तरीके से सेव कार्ड की जानकारी का इस्तेमाल कर सकेंगे और भुगतान मशीन के पास फोन ले जाकर टैप-एंड-पे (Tap-and-Pay) कर सकेंगे। भुगतान की पुष्टि फेस आईडी (Face ID) और टच आईडी (Touch ID) के जरिए की जा सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ऐपल एक्सिस बैंक के अलावा एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) और आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) के साथ भी बातचीत कर रही है। दोनों बैंकों के साथ चर्चा जारी है, लेकिन अभी कारोबारी शर्तों (Business Terms) पर सहमति नहीं बनी है। कंपनी की योजना अलग-अलग बैंकों के साथ सीधे समझौते करके सेवा का विस्तार करने की है।

शुरुआत एक बड़े बैंकिंग पार्टनर (Banking Partner) के साथ हो सकती है और बाद में अन्य बैंकों को जोड़ा जा सकता है। पिछले साल भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने कार्ड भुगतान के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (Biometric Authentication) की अनुमति दी थी।

भारत में ऐपल पे को पहले से मजबूत डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) बाजार में जगह बनानी होगी। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface) यानी यूपीआई (UPI) देश के डिजिटल भुगतान में करीब 84 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। यूपीआई के जरिए क्यूआर कोड (QR Code), फोन नंबर और टैप-एंड-पे से भुगतान किया जा सकता है।

काउंटरपॉइंट रिसर्च (Counterpoint Research) की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 से भारत के स्मार्टफोन बाजार में ऐपल की हिस्सेदारी बढ़कर आठ प्रतिशत हो गई है। इससे भारत कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बन गया है।

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हीरो फिनकॉर्प से 12.84 करोड़ की कथित साइबर ठगी : 5 आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने हीरो फिनकॉर्प से जुड़े 12.84 करोड़ रुपये के कथित साइबर ठगी मामले में बैंक रिलेशनशिप मैनेजर समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

Last Modified:
Thursday, 17 September, 2026
Cyber Fraud

दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने हीरो फिनकॉर्प लिमिटेड (Hero FinCorp Ltd.) से जुड़े कथित 12.84 करोड़ रुपये के साइबर ठगी (Cyber Fraud) मामले में बैंक रिलेशनशिप मैनेजर (Bank Relationship Manager) समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, कंपनी के खाते से बिना अनुमति 317 डिजिटल ट्रांजैक्शन (Digital Transactions) किए गए और रकम 34 अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई। मामले में 1.7 करोड़ रुपये की ठगी की रकम रोकी गई है।

कंपनी को एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के सिस्टम अलर्ट (System Alert) के जरिए खाते में संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिली। शिकायत के अनुसार, कंपनी के प्रबंधन की जानकारी, अनुमति या सहमति के बिना 12,84,09,997 रुपये के 317 डिजिटल ट्रांजैक्शन किए गए। यह रकम पहले स्तर के 34 अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई।

स्पेशल सेल (Special Cell) की आईएफएसओ यूनिट (IFSO Unit) ने जांच के दौरान बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड और लेनदेन की जानकारी खंगाली। इसके बाद देश के कई हिस्सों में छापेमारी कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनकी पहचान बुलंदशहर के अभय कुमार सोलंकी, कुरुक्षेत्र के लवली, जयपुर के नमन कुमार, बीकानेर के हरमन और जयपुर के विकास के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार, सोलंकी के खाते में 60 हजार रुपये पहुंचे, जिन्हें बाद में एटीएम (ATM) से निकाला गया। लवली के खाते में कथित तौर पर 80 लाख रुपये और नमन के खातों में करीब 1.10 करोड़ रुपये मिले हैं।

पुलिस का आरोप है कि हरमन ने कमीशन लेकर नमन का बैंक खाता चलाया और उसके मोबाइल में एपीके फाइल (APK File) इंस्टॉल कराई। वहीं बैंक रिलेशनशिप मैनेजर विकास ने नमन को बैंक खाते खुलवाने और हरमन से संपर्क कराने में मदद की। हरमन कथित तौर पर टेलीग्राम (Telegram) पर विदेशी समूहों के संपर्क में था।

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