FAANG से MANGOS तक: AI के दौर में भारतीय मार्केटर्स को क्यों करनी होगी नई तैयारी?

सीनियर ब्रैंड, ग्रोथ और मीडिया एक्सपर्ट केतन के. भारती के मुताबिक, FAANG से MANGOS का बदलाव सिर्फ टेक लीडरशिप का नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के फैसले लेने के तरीके में आए बड़े बदलाव का संकेत है।

Last Modified:
Thursday, 11 June, 2026
KetanKBharati5441


केतन के. भारती, सीनियर ब्रैंड, ग्रोथ व मीडिया एक्सपर्ट ।।

कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक ग्राफिक तेजी से वायरल हुआ। इसमें पांच परिचित अक्षरों को हटाकर उनकी जगह छह नए अक्षर जोड़ दिए गए थे।

FAANG बाहर था और MANGOS अंदर।  (FAANG was out. MANGOS was in.)

डिजिटल युग के बड़े हिस्से में FAANG- फेसबुक, एमेजॉन, एप्पल, नेटफ्लिक्स और गूगल- यह तय करते थे कि लोग अपना समय कहां बिताएंगे, जानकारी कहां से हासिल करेंगे, कंटेंट कैसे देखेंगे और खरीदारी कहां करेंगे। मार्केटिंग की पूरी रणनीतियां इन्हीं प्लेटफॉर्म्स के इर्द-गिर्द बनाई जाती थीं।

लेकिन MANGOS- मेटा, एंथ्रोपिक, एनवीडिया, गूगल, ओपनएआई और स्पेसएक्स- कुछ अलग दर्शाता है। ये कंपनियां सिर्फ लोगों का ध्यान आकर्षित करने की होड़ में नहीं हैं, बल्कि वे उस इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रही हैं जो तेजी से लोगों के फैसलों को प्रभावित कर रहा है।

मार्केटर्स के लिए यह अंतर बेहद महत्वपूर्ण है। पिछले दो दशकों में ब्रैंड्स लोगों का ध्यान खींचने के लिए संघर्ष करते रहे हैं। लेकिन आने वाले दशक में उन्हें उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण चीज के लिए लड़ना पड़ सकता है- AI द्वारा लिए जा रहे फैसलों में अपनी जगह बनाने के लिए।

मेरी नजर में FAANG से MANGOS की ओर बदलाव की असली कहानी यही है। यह सिर्फ तकनीकी नेतृत्व में बदलाव नहीं है, बल्कि इस बात में बदलाव है कि उपभोक्ता किसी चीज को कैसे खोजते हैं, उसका मूल्यांकन कैसे करते हैं और अंततः उसे चुनते कैसे हैं।

मार्केटिंग इंडस्ट्री ने हर बड़े तकनीकी बदलाव के साथ खुद को ढाला है- चाहे वह टेलीविजन हो, सर्च इंजन, सोशल मीडिया या स्मार्टफोन। लेकिन AI कुछ अलग महसूस होता है। इसलिए नहीं कि यह एक और नया प्लेटफॉर्म लेकर आया है, बल्कि इसलिए कि इसमें उपभोक्ताओं और उनके फैसलों के बीच बैठने की क्षमता है।

वह बदलाव जिसकी चर्चा कम हो रही है

AI को लेकर अधिकांश चर्चाएं कंटेंट क्रिएशन पर केंद्रित हैं। लेकिन इससे भी बड़ा बदलाव यह है कि AI अब सिर्फ कंटेंट बनाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोगों की पसंद और फैसलों को प्रभावित करने लगा है।

मान लीजिए कोई व्यक्ति अपने परिवार के लिए सबसे अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस प्लान ढूंढ़ रहा है। कुछ साल पहले वह सर्च इंजन पर जाता, अलग-अलग वेबसाइट्स की तुलना करता, रिव्यू पढ़ता और फिर फैसला लेता। आज वही उपभोक्ता सीधे किसी AI असिस्टेंट से सवाल पूछने की संभावना ज्यादा रखता है।

AI असिस्टेंट विभिन्न जानकारियों को एक साथ जोड़ता है, विकल्पों की तुलना करता है और कुछ चुनिंदा सुझाव देता है। न कोई सर्च रिजल्ट पेज। न दस नीले लिंक और कई बार तो किसी वेबसाइट पर क्लिक करने की भी जरूरत नहीं पड़ती।

सालों तक मार्केटर्स विजिबिलिटी के लिए प्रतिस्पर्धा करते रहे। अब उन्हें AI की सिफारिशों में शामिल होने के लिए प्रतिस्पर्धा करनी होगी। ब्रैंड्स की अगली लड़ाई क्लिक्स के लिए नहीं, बल्कि उपभोक्ता की पसंद बनने के लिए होगी।

अटेंशन इकोनॉमी से इंटेलिजेंस इकोनॉमी तक

FAANG युग ने अटेंशन इकोनॉमी को जन्म दिया था। मार्केटिंग का फॉर्मूला सीधा था- ध्यान आकर्षित करो, उसे ग्राहक में बदलो और उसका आंकलन करो। लेकिन AI का उभरता दौर अलग तरीके से काम करता है।

आज जो सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं, वे लोगों को जटिल जानकारियों के बीच रास्ता दिखाने और बेहतर फैसले लेने में मदद करते हैं। इसी वजह से मार्केटिंग अब अटेंशन-आधारित ग्रोथ से इंटेलिजेंस-आधारित ग्रोथ की ओर बढ़ रही है।

पहले सफलता का मतलब सही दर्शकों तक पहुंचना था। अब सफलता इस बात पर निर्भर हो सकती है कि आपका ब्रैंड सबसे भरोसेमंद जवाब बन पाए या नहीं। एल्गोरिद्म बड़े पैमाने पर कंटेंट तैयार कर सकते हैं, लेकिन भरोसा नहीं।

जानकारी से भरी दुनिया में वे ब्रैंड आगे रहेंगे जिन्हें लगातार सुझाया जाएगा, जिनका संदर्भ दिया जाएगा और जिन्हें लोग याद रखेंगे।

कैंपेन से मार्केटिंग ऑपरेटिंग सिस्टम तक

AI का सबसे बड़ा प्रभाव सिर्फ क्रिएटिव ऑटोमेशन नहीं है। असल बदलाव संगठनों के काम करने के तरीके में है। दशकों से मार्केटिंग कैंपेन आधारित मॉडल पर चलती रही है। टीम ब्रीफ बनाती है, मीडिया लॉन्च करती है, प्रदर्शन मापती है और फिर अगले कैंपेन पर चली जाती है। अब यह मॉडल पुराना पड़ने लगा है।

आज के CMO कुछ नए सवाल पूछ रहे हैं:

  • क्या प्लानिंग को ऑटोमेट किया जा सकता है?
  • क्या ऑप्टिमाइजेशन रियल टाइम में हो सकता है?
  • क्या ग्राहक की यात्रा को डायनेमिक तरीके से बदला जा सकता है?
  • क्या AI पारंपरिक कैंपेन मॉडल से ज्यादा तेजी से बेहतर फैसले ले सकता है?

भविष्य की मार्केटिंग अलग-अलग कैंपेन के इर्द-गिर्द नहीं बनेगी। यह ऐसे कनेक्टेड ऑपरेटिंग सिस्टम पर आधारित होगी जो लगातार सीखते, सुधारते और बेहतर होते रहेंगे। भविष्य में वही संगठन आगे बढ़ेंगे जो क्रिएटिविटी, डेटा, टेक्नोलॉजी और बिजनेस परिणामों को सबसे बेहतर तरीके से जोड़ पाएंगे।

सवाल यह नहीं है कि AI मार्केटर्स की जगह लेगा या नहीं। सवाल यह है कि क्या कंपनियां अब भी AI-पूर्व दुनिया के लिए बने ढांचे पर काम करती रहेंगी। काम का बड़ा हिस्सा ऑटोमेट हो जाएगा, लेकिन निर्णय लेने की क्षमता, विभिन्न चीजों को जोड़ने की समझ और रणनीतिक सोच की अहमियत और बढ़ जाएगी।

क्यों AI एजेंट्स बदल देंगे पूरा खेल

AI की अगली बड़ी लहर AI असिस्टेंट नहीं, बल्कि AI एजेंट्स होंगे। असिस्टेंट सवालों के जवाब देते हैं। एजेंट्स काम पूरा करते हैं। आज उपभोक्ता AI से पूछते हैं कि क्या खरीदना चाहिए। कल वे AI से कह सकते हैं कि वह उनकी ओर से खरीदारी भी कर दे। कल्पना कीजिए कि कोई AI एजेंट कीमतों की तुलना कर रहा है, रिव्यू पढ़ रहा है, उत्पाद चुन रहा है और उपभोक्ता की तरफ से खरीदारी भी पूरी कर रहा है। यह ब्रैंड्स के लिए एक नई चुनौती पैदा करेगा।

क्या होगा जब अगला ग्राहक कोई इंसान नहीं, बल्कि उसकी ओर से काम करने वाला AI एजेंट होगा? पारंपरिक विज्ञापन लोगों को प्रभावित करने के लिए बनाए गए थे। लेकिन आने वाले दशक में ब्रैंड्स को इंसानों के साथ-साथ उनके लिए काम करने वाले डिजिटल एजेंट्स को भी प्रभावित करना होगा।

मीडिया के लिए इसका क्या मतलब है? 

हर तकनीकी बदलाव नए गेटकीपर्स पैदा करता है। एक समय टीवी नेटवर्क गेटकीपर थे। फिर सर्च इंजन आए। उसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने यह भूमिका निभाई। अब AI असिस्टेंट और AI एजेंट्स अगली पीढ़ी के गेटकीपर बन सकते हैं।

 पब्लिशर्स के लिए चुनौती साफ है- कम क्लिक्स और बदलते ट्रैफिक पैटर्न। लेकिन अवसर भी उतना ही बड़ा है।

जब इंटरनेट सिंथेटिक कंटेंट से भरता जा रहा है, तब ओरिजिनल रिपोर्टिंग, विशेषज्ञ विश्लेषण और रिसर्च आधारित कंटेंट की अहमियत बढ़ रही है। भविष्य में जरूरी नहीं कि सबसे ज्यादा कंटेंट बनाने वाले जीतें। जीत उन्हीं की हो सकती है जो सबसे ज्यादा भरोसेमंद कंटेंट तैयार करें। एजेंसियों के लिए भी यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है।

भविष्य की एजेंसी डेटा, टेक्नोलॉजी, क्रिएटिविटी और AI को जोड़कर एकीकृत ग्रोथ सिस्टम तैयार करेगी। एक्जिक्यूशन सस्ता होगा, लेकिन सही निर्णय लेने की क्षमता की कीमत बढ़ेगी। 

भारत के लिए अवसर अलग हैं

भारत के लिए AI का अवसर अगला OpenAI बनाने में नहीं हो सकता। बल्कि उन भारतीय समस्याओं का समाधान करने में हो सकता है जहां भाषा, बड़े पैमाने और पहुंच का संगम होता है।

  • क्षेत्रीय भाषाओं में स्वास्थ्य संबंधी सलाह
  • किसानों के लिए कृषि परामर्श
  • नए निवेशकों के लिए वित्तीय शिक्षा
  • व्यक्तिगत शिक्षण व्यवस्था
  • छोटे कारोबारों को सशक्त बनाना

साथ ही AI से जुड़े सबसे बड़े बदलाव केवल चैट इंटरफेस तक सीमित नहीं रहेंगे। वे उन जगहों पर होंगे जहां खोज, खरीदारी और लेनदेन एक-दूसरे से मिलते हैं। मार्केटप्लेस, रिटेल मीडिया नेटवर्क और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अब सिर्फ वितरण चैनल नहीं रह गए हैं, बल्कि निर्णय लेने वाले इंजन बनते जा रहे हैं।

जैसे-जैसे AI इन प्लेटफॉर्म्स में शामिल होगा, सिफारिश और खरीदारी के बीच की दूरी काफी कम हो सकती है। भारत को सफल होने के लिए सिलिकॉन वैली की नकल करने की जरूरत नहीं है। उसे भारतीय समस्याओं का भारतीय पैमाने पर समाधान करना होगा।

एक अलग नजरिया: AI ब्रैंड्स को और मजबूत बनाएगा

AI को लेकर अक्सर यह माना जाता है कि तकनीक ब्रैंड्स की भूमिका को कमजोर कर देगी, लेकिन मेरा मानना है कि इसका उल्टा होगा। जैसे-जैसे AI से तैयार कंटेंट बढ़ेगा, अलग पहचान बनाना और मुश्किल होता जाएगा। उपभोक्ता AI की सिफारिशों पर भरोसा कर सकते हैं, लेकिन अंतिम फैसला लेते समय वे उन्हीं ब्रैंड्स को प्राथमिकता देंगे जिन्हें वे जानते हैं और जिन पर भरोसा करते हैं।

जानकारी से भरी दुनिया में पहचान और विश्वसनीयता सबसे बड़ी ताकत बन जाएंगी। अगले दशक के सबसे मजबूत ब्रैंड वे होंगे जो तकनीकी क्षमता और सांस्कृतिक जुड़ाव, दोनों को साथ लेकर चलेंगे। सिर्फ एक चीज पर्याप्त नहीं होगी। मार्केटिंग लीडर्स को अब क्या करना चाहिए? मार्केटिंग लीडर्स को एक सरल सवाल से शुरुआत करनी चाहिए।

अगर आज कोई उपभोक्ता या उसकी ओर से काम कर रहा AI एजेंट हमारी कैटेगरी के बारे में पूछे, तो क्या हमारे ब्रैंड का नाम जवाब में आता है? अधिकांश कंपनियों को इसका जवाब नहीं पता और यही सबसे बड़ी चुनौती है।

कंपनियों को ग्राहकों के साथ सीधे संबंध मजबूत करने होंगे, फर्स्ट-पार्टी डेटा क्षमताओं को बढ़ाना होगा और मार्केटिंग, एनालिटिक्स, टेक्नोलॉजी तथा कस्टमर एक्सपीरियंस के बीच मौजूद दीवारों को तोड़ना होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ब्रैंड बिल्डिंग में निवेश जारी रखना होगा।

FAANG युग ने उन ब्रैंड्स को पुरस्कृत किया जो लोगों का ध्यान आकर्षित करना जानते थे। MANGOS युग उन ब्रैंड्स को पुरस्कृत करेगा जो लोगों और AI दोनों की सिफारिश हासिल कर सकेंगे,क्योंकि AI द्वारा संचालित फैसलों के इस दौर में सिर्फ दिखना काफी नहीं होगा। ब्रैंड्स को चुना जाना भी जरूरी होगा।

 

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दुनियाभर में करीब एक घंटे ठप रही ओपनएआई की चैटजीपीटी सर्विस

ओपनएआई (OpenAI) की चैटजीपीटी (ChatGPT) सेवा शनिवार दोपहर करीब एक घंटे तक प्रभावित रही। भारत समेत कई देशों के यूजर्स ने दिक्कत की शिकायत की।

Last Modified:
Saturday, 25 July, 2026
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ओपनएआई (OpenAI) का लोकप्रिय एआई चैटबॉट चैटजीपीटी (ChatGPT) शनिवार दोपहर अचानक तकनीकी समस्या का शिकार हो गया। इस दौरान भारत सहित दुनिया के कई देशों के यूजर्स करीब एक घंटे तक सेवा का उपयोग नहीं कर सके। बाद में कंपनी ने समस्या दूर होने की पुष्टि की और सेवाएं सामान्य हो गईं।

आउटेज ट्रैक करने वाली वेबसाइट डाउनडिटेक्टर (Downdetector) पर भी बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज की गईं। यूजर्स ने बताया कि उन्हें चैटजीपीटी का वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप दोनों इस्तेमाल करने में दिक्कत आ रही थी।

यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं रही। अमेरिका, यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों के यूजर्स ने भी सेवा बाधित होने की रिपोर्ट दी। ओपनएआई (OpenAI) ने स्वीकार किया कि चैटजीपीटी (ChatGPT) के साथ-साथ उसकी एपीआई (APIs) और कोडैक्स (Codex) सेवाएं भी प्रभावित हुईं। कंपनी ने कहा कि तकनीकी गड़बड़ी के कारणों की जांच की जा रही है और समस्या की वजह का पता लगाया जा रहा है।

चैटजीपीटी (ChatGPT) एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित चैटबॉट है, जिसे ओपनएआई (OpenAI) ने विकसित किया है। यह यूजर्स के प्रॉम्प्ट के आधार पर जवाब तैयार करता है और ईमेल, लेख, अनुवाद, कहानियां तथा सोशल मीडिया पोस्ट जैसी सामग्री बनाने में मदद करता है। इसके अलावा, यह इमेज जनरेट करने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराता है।

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Apple बनाम OpenAI: पूर्व एंप्लॉयीज से मांगे दस्तावेज, बढ़ा कानूनी विवाद

नोटिस में उनसे कंपनी से जुड़े दस्तावेज, नोट्स और इलेक्ट्रॉनिक संचार रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के साथ-साथ एप्पल के कॉर्पोरेट वकीलों से व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए भी कहा गया है।

Last Modified:
Monday, 20 July, 2026
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एप्पल (Apple) ने ओपनएआई (OpenAI) के साथ चल रहे कानूनी विवाद को और आगे बढ़ाते हुए अपने करीब 40 पूर्व एंप्लॉयीज को औपचारिक कानूनी नोटिस जारी किए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सभी कर्मचारी अब ओपनएआई में कार्यरत हैं। नोटिस में उनसे कंपनी से जुड़े दस्तावेज, नोट्स और इलेक्ट्रॉनिक संचार रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के साथ-साथ एप्पल के कॉर्पोरेट वकीलों से व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए भी कहा गया है।

यह कदम उस संघीय मुकदमे (Federal Lawsuit) के बाद उठाया गया है, जिसमें एप्पल ने आरोप लगाया है कि ओपनएआई ने अपने हार्डवेयर कारोबार को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए गोपनीय हार्डवेयर डिजाइनों, इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं और मैन्युफैक्चरिंग ब्लूप्रिंट्स तक पहुंच बनाने की संगठित कोशिश की।

मुकदमे में एप्पल (Apple) ने अपने दो पूर्व एंप्लॉयीज का नाम लिया है, जो अब ओपनएआई (OpenAI) के हार्डवेयर डिवीजन से जुड़े हैं। इनमें पूर्व वाइस प्रेसिडेंट, प्रोडक्ट डिजाइन (Vice President of Product Design) तांग तान (Tang Tan) शामिल हैं, जो वर्तमान में ओपनएआई में हेड ऑफ हार्डवेयर (Head of Hardware) हैं। दूसरे नाम चांग लियू (Chang Liu) का है, जो पहले आईफोन (iPhone) के वरिष्ठ सिस्टम इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (Senior System Electrical Engineer) रह चुके हैं।

अदालती दस्तावेजों के अनुसार, एप्पल का मानना है कि यह मामला केवल दो एंप्लॉयीज तक सीमित नहीं है। कंपनी का दावा है कि उसके 400 से अधिक पूर्व कर्मचारी वर्तमान में ओपनएआई में कार्यरत हैं और मुकदमे में नामित दोनों लोग इस बड़े मामले का केवल "आइसबर्ग का ऊपरी हिस्सा" (Tip of the Iceberg) हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल ने मुकदमा दायर करने के तुरंत बाद अपने लगभग 10 प्रतिशत पूर्व एंप्लॉयीज को लीगल प्रिजर्वेशन नोटिस भेजे हैं। कंपनी का उद्देश्य ऐसे साक्ष्य जुटाना है, जिनसे यह साबित किया जा सके कि ओपनएआई का हार्डवेयर कारोबार कथित रूप से एप्पल के ट्रेड सीक्रेट्स के अनुचित उपयोग पर आधारित है।

वहीं ओपनएआई (OpenAI) ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसे प्रतिस्पर्धी कंपनियों के ट्रेड सीक्रेट्स में कोई रुचि नहीं है। कंपनी का कहना है कि उसे ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे एप्पल की शिकायत को उचित ठहराया जा सके।

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ओपनएआई ने उदय रुद्दारराजू को बनाया ''Chief Technology Officer, Compute''

अपने करियर में उदय रुद्दारराजू (Uday Ruddarraju) ने वित्तीय सेवा कंपनी रॉबिनहुड (Robinhood) में लगभग सात वर्षों तक विभिन्न तकनीकी नेतृत्व भूमिकाएं निभाईं।

Last Modified:
Saturday, 18 July, 2026
Uday Ruddarraju

ओपनएआई (OpenAI) ने उदय रुद्दारराजू (Uday Ruddarraju) को चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर, कंप्यूट (Chief Technology Officer, Compute) के पद पर पदोन्नत किया है। इससे पहले वह कंपनी में हेड ऑफ कंप्यूट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर (Head of Compute and Infrastructure) के रूप में कार्यरत थे।

उदय रुद्दारराजू (Uday Ruddarraju) जुलाई 2025 में ओपनएआई (OpenAI) से जुड़े थे। इससे पहले वह एलन मस्क (Elon Musk) की एआई कंपनी एक्सएआई (xAI) में हेड ऑफ इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग (Head of Infrastructure Engineering) के पद पर कार्यरत थे। OpenAI में शामिल होने से पहले उन्होंने xAI में अपनी जिम्मेदारियों से इस्तीफा दिया था।

अपने करियर में उदय रुद्दारराजू (Uday Ruddarraju) ने वित्तीय सेवा कंपनी रॉबिनहुड (Robinhood) में लगभग सात वर्षों तक विभिन्न तकनीकी नेतृत्व भूमिकाएं निभाईं। इससे पहले वह वर्ष 2013 से 2018 तक ईबे (eBay) के साथ भी जुड़े रहे, जहां उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग से संबंधित जिम्मेदारियां संभालीं।

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AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर HCLTech का बड़ा दांव, डेटा सेंटर बनाने में लगाएगी ₹3,500 करोड़

देश की प्रमुख आईटी कंपनी HCLTech ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ा निवेश करने का ऐलान किया है।

Last Modified:
Wednesday, 15 July, 2026
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देश की प्रमुख आईटी कंपनी HCLTech ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ा निवेश करने का ऐलान किया है। कंपनी AI डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए 3,500 करोड़ रुपये तक का निवेश करेगी। इन डेटा सेंटरों की क्षमता भविष्य में बढ़ाकर 50 मेगावाट (MW) तक की जा सकती है।

कंपनी का कहना है कि यह निवेश सरकारी और निजी संस्थानों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। खास तौर पर ऐसे सॉवरेन AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए जाएंगे, जिनमें डेटा देश के भीतर ही सुरक्षित रखा और प्रोसेस किया जा सके।

HCLTech के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सी. विजयकुमार ने कहा कि AI ने कंप्यूटिंग की पूरी अर्थव्यवस्था बदल दी है। उनके मुताबिक, डेटा सेंटर अब AI समाधान की सबसे मजबूत नींव बन चुके हैं। इन्हीं के जरिए GPU, AI मॉडल और एंटरप्राइज एप्लिकेशन जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि यह HCLTech के लिए भविष्य में विकास का एक नया बड़ा अवसर साबित होगा।

यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब HCLTech ने हाल ही में भारत के AI स्टार्टअप Sarvam AI में 15 करोड़ डॉलर (150 मिलियन डॉलर) का निवेश किया है। कंपनी का उद्देश्य देश में स्वदेशी AI तकनीक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देना है।

वहीं, कंपनी ने पहली तिमाही (Q1) के वित्तीय नतीजे भी जारी किए हैं। इस दौरान HCLTech की आय 3.6 अरब डॉलर रही। यह पिछली तिमाही के मुकाबले 0.9 प्रतिशत कम, लेकिन पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 3 प्रतिशत अधिक है। वहीं, कॉन्स्टेंट करेंसी के आधार पर कंपनी की आय तिमाही-दर-तिमाही 0.5 प्रतिशत घटी, जबकि सालाना आधार पर 2.6 प्रतिशत बढ़ी है।

कंपनी का मानना है कि AI डेटा सेंटर और AI आधारित सेवाओं में बढ़ता निवेश आने वाले वर्षों में उसके कारोबार को नई गति देगा।

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स्पैम कॉल के खिलाफ TRAI की बड़ी तैयारी, WhatsApp-Google से होगी साझेदारी

देश में बढ़ती स्पैम कॉल और फर्जी मैसेज की समस्या से निपटने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है।

Last Modified:
Tuesday, 14 July, 2026
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देश में बढ़ती स्पैम कॉल और फर्जी मैसेज की समस्या से निपटने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, TRAI इस समय Meta Platforms और Google के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि WhatsApp और Google Phone Dialer पर यूजर्स द्वारा की गई स्पैम शिकायतों को टेलीकॉम कंपनियों की शिकायत प्रणाली से जोड़ा जा सके।

रिपोर्ट के अनुसार, TRAI ने दोनों टेक कंपनियों के साथ कई दौर की बैठकें की हैं। इसका उद्देश्य ऐसा सिस्टम तैयार करना है, जिससे थर्ड पार्टी ऐप्स पर दर्ज स्पैम शिकायतों का डेटा सीधे टेलीकॉम इंडस्ट्री के Distributed Ledger Technology (DLT) प्लेटफॉर्म और TRAI के Do Not Disturb (DND) पोर्टल तक पहुंच सके।

फिलहाल अगर कोई यूजर WhatsApp पर किसी बिजनेस अकाउंट को स्पैम के रूप में रिपोर्ट करता है या Google के फोन डायलर पर किसी नंबर को स्पैम बताता है, तो यह जानकारी सिर्फ Meta या Google के सिस्टम तक ही सीमित रहती है। टेलीकॉम कंपनियों या नियामक एजेंसियों को इसका सीधा फायदा नहीं मिल पाता।

TRAI चाहता है कि इस डेटा को DLT नेटवर्क से जोड़ा जाए। DLT प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल टेलीकॉम कंपनियां टेलीमार्केटर्स के पंजीकरण और कमर्शियल कॉल व मैसेज की निगरानी के लिए करती हैं। वहीं, DND पोर्टल पर उपभोक्ता अनचाहे प्रमोशनल कॉल और एसएमएस की शिकायत दर्ज कराते हैं।

अगर यह डेटा एक साथ उपलब्ध होगा, तो बार-बार स्पैम कॉल और मैसेज भेजने वाले लोगों या कंपनियों की पहचान करना आसान हो जाएगा। इससे ऐसे नंबरों और नेटवर्क पर तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी।

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि Meta और Google के साथ स्पैम मैनेजमेंट को लेकर सक्रिय रूप से बातचीत चल रही है। TRAI चाहता है कि WhatsApp अपने स्पैम से जुड़े डेटा को टेलीकॉम कंपनियों के साथ साझा करे, ताकि दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

बताया जा रहा है कि पिछले एक साल में DLT सिस्टम के सख्त होने के बाद कई स्पैम करने वाले पारंपरिक SMS छोड़कर WhatsApp जैसे इंटरनेट आधारित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने लगे हैं। ऐसे में TRAI अब मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट दोनों पर स्पैम फैलाने वालों पर एक साथ नजर रखने की तैयारी कर रहा है।

हालांकि, यह प्रस्ताव अभी विचार-विमर्श के चरण में है और इस पर Meta व Google के साथ चर्चा जारी है। अंतिम ढांचा तैयार होने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा। अगर यह योजना लागू होती है, तो देश में स्पैम कॉल और फर्जी संदेशों पर लगाम लगाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

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प्राइवेसी विवाद के बाद मेटा ने 'Muse AI' का विवादित फीचर हटाया

मेटा ने यूजर्स की आलोचना के बाद अपने AI इमेज जनरेटर 'Muse AI' का विवादित फीचर हटा दिया है। यह फीचर पब्लिक 'Instagram' अकाउंट की तस्वीरों के आधार पर AI इमेज बनाने की सुविधा देता था।

Last Modified:
Monday, 13 July, 2026
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मेटा (Meta) ने अपने AI इमेज जनरेटर म्यूज़ एआई (Muse AI) का एक विवादित फीचर हटा दिया है। इस फीचर को लेकर यूजर्स और डिजिटल अधिकार (Digital Rights) से जुड़े विशेषज्ञों ने प्राइवेसी (Privacy) और डेटा सुरक्षा (Data Safety) पर गंभीर सवाल उठाए थे। इसके जरिए किसी पब्लिक इंस्टाग्राम (Instagram) अकाउंट की तस्वीरों का इस्तेमाल कर AI इमेज बनाई जा सकती थी।

मेटा (Meta) ने हाल ही में म्यूज़ एआई (Muse AI) को एक नए AI इमेज जनरेशन टूल के रूप में पेश किया था। इस फीचर के तहत यूजर्स किसी पब्लिक इंस्टाग्राम (Instagram) प्रोफाइल को टैग कर उसकी तस्वीरों के आधार पर नई AI इमेज तैयार कर सकते थे। कंपनी का कहना था कि इसका उद्देश्य यूजर्स को अधिक रचनात्मक (Creative) अनुभव उपलब्ध कराना है।

हालांकि, फीचर लॉन्च होते ही इसकी आलोचना शुरू हो गई। यूजर्स और डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना था कि इससे बिना स्पष्ट सहमति (Consent) के पब्लिक इंस्टाग्राम (Instagram) तस्वीरों का AI मॉडल में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा इमेज स्क्रैपिंग (Image Scraping) और डेटा प्राइवेसी (Data Privacy) को लेकर भी चिंताएं जताई गईं।

लगातार बढ़ते विरोध के बाद मेटा (Meta) ने कहा कि उसने यूजर्स की प्रतिक्रिया को गंभीरता से लिया है। कंपनी ने स्वीकार किया कि यह फीचर लोगों की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा, इसलिए इसे हटा दिया गया है। मेटा (Meta) के अनुसार उसका उद्देश्य केवल एक उपयोगी क्रिएटिव टूल उपलब्ध कराना था।

इस विवाद के बाद भारत सरकार ने भी मामले पर नजर रखी है। सरकार इस फीचर से जुड़ी शिकायतों और सुझावों की समीक्षा कर रही है। आवश्यकता पड़ने पर मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत मामले का आकलन किया जाएगा।

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''WhatsApp Username विवाद'' : सरकार लाएगी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए समान नियम

सरकार से जुड़े एक अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि MeitY ऐसा ढांचा तैयार करना चाहता है, जिससे सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर समान प्रकार के फीचर्स एक जैसे नियमों के तहत संचालित हों।

Last Modified:
Saturday, 11 July, 2026
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इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) भारत में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए एक समान नियामकीय मानक (Common Regulatory Framework) तैयार करने पर काम कर रहा है। इस बीच सरकार व्हाट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम (Username) फीचर को लेकर अपनी आपत्तियां भी बनाए हुए है। यह जानकारी हिंदुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) की एक रिपोर्ट में सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय का मानना है कि व्हाट्सऐप (WhatsApp) पर यूजरनेम फीचर लागू होने से प्रतिरूपण (Impersonation), तथाकथित डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) और ऑनलाइन धोखाधड़ी (Online Fraud) जैसे मामलों का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही इससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) के लिए जांच करना भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, MeitY द्वारा जारी नोटिस के जवाब में व्हाट्सऐप (WhatsApp) और टेलीग्राम (Telegram) दोनों ने अपने-अपने उत्तर मंत्रालय को सौंप दिए हैं। इन जवाबों में कंपनियों ने यूजरनेम फीचर में शामिल सुरक्षा उपायों (Safeguards) की जानकारी दी है।

वर्तमान में व्हाट्सऐप (WhatsApp), टेलीग्राम (Telegram), सिग्नल (Signal) और अरट्टई (Arattai) सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 (Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021) के तहत इंटरमीडियरी (Intermediary) के रूप में कार्य करते हैं।

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''Google'' ने पेश किए ''Gemini AI'' आधारित नए विज्ञापन टूल्स

गूगल ने Google Marketing Live 2026 में जेमिनी आधारित कई नए AI विज्ञापन और मार्केटिंग टूल्स लॉन्च किए हैं। इनमें Search, YouTube, Google Ads के लिए नए फीचर्स शामिल हैं।

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2026
googlegeminiads

गूगल (Google) ने Google Marketing Live 2026 के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) आधारित विज्ञापन और मार्केटिंग टूल्स की नई श्रृंखला पेश की है। कंपनी ने जेमिनी (Gemini) की क्षमताओं का विस्तार करते हुए Search, YouTube, Google Ads और Merchant Center के लिए कई नए फीचर्स, एड फॉर्मेट्स और कैंपेन मैनेजमेंट टूल्स लॉन्च किए हैं।

गूगल इंडिया (Google India) की मैनेजिंग डायरेक्टर, कनेक्टेड कंज्यूमर कॉमर्स (Connected Consumer Commerce) रोमा दत्ता चोबे (Roma Datta Chobey) ने कहा कि ऑनलाइन भारतीयों में सर्वेक्षण के अनुसार 86 प्रतिशत लोग Google Search और YouTube का उपयोग करते हैं। ऐसे में भारतीय व्यवसायों के लिए ग्राहकों तक पहुंचने का बड़ा अवसर है और जेमिनी (Gemini) इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि जेमिनी (Gemini) अब केवल मार्केटिंग ऑटोमेशन (Marketing Automation) तक सीमित नहीं है, बल्कि मार्केटिंग इंटेलिजेंस (Marketing Intelligence) को गति देने वाला इंजन बन चुका है। इससे एजेंटिक एरा (Agentic Era) की शुरुआत होगी, जहां AI व्यवसायों के लिए रणनीतिक विकास साझेदार की भूमिका निभाएगा।

कंपनी ने भारत के लिए बीटा (Beta) चरण में 'बिजनेस एजेंट फॉर लीड्स' (Business Agent for Leads) फीचर भी पेश किया है। इसके जरिए Search Ads में उपयोगकर्ता AI आधारित ब्रांड एजेंट के साथ सीधे बातचीत कर सकेंगे। गूगल (Google) के अनुसार, अपग्रेड (upGrad) इस फीचर का परीक्षण अपने लीड जनरेशन (Lead Generation) अभियान में कर रहा है।

गूगल (Google) ने भारत में विकसित YouTube BrandStack भी लॉन्च किया है। यह कैंपेन प्लानिंग, मीडिया बाइंग और परफॉर्मेंस मेजरमेंट (Campaign Planning, Buying & Measurement) के लिए एक नया समाधान है। एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस (Axis Max Life Insurance) इस उत्पाद का उपयोग करने वाले शुरुआती ब्रांड्स में शामिल है।

इसके अलावा कंपनी ने YouTube Affiliate Partnerships Boost नामक नया विज्ञापन प्रारूप पेश किया है, जिसके जरिए ब्रांड्स क्रिएटर्स (Creators) के कंटेंट को सीधे अपने विज्ञापन अभियानों में शामिल कर सकेंगे।

गूगल (Google) ने AI Max for Shopping, AI Brief for Search Campaigns, Performance Max में Retention Only Mode, Demand Gen की विस्तारित क्षमताएं और AI की मदद से विज्ञापन सामग्री तैयार करने के लिए Asset Studio में भी कई नए अपडेट की घोषणा की।

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तालोद फूड्स ने वैभव पटेल को बनाया ''हेड-ब्रांडिंग एवं कम्युनिकेशन''

तालोद फूड्स ने वैभव पटेल (Vaibhav Patel) को हेड – ब्रांडिंग एवं कम्युनिकेशन नियुक्त किया है। इससे पहले वह टेक्सपिन बेयरिंग्स (Texspin Bearings) में मैनेजर – ब्रांडिंग, कम्युनिकेशन एवं पीआर थे।

Last Modified:
Tuesday, 07 July, 2026
talodfoods

तालोद फूड्स (Talod Foods) ने वैभव पटेल (Vaibhav Patel) को हेड – ब्रांडिंग एवं कम्युनिकेशन (Head – Branding & Communication) नियुक्त किया है। कंपनी ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के माध्यम से उनकी नियुक्ति की घोषणा की।

अपने पोस्ट में कंपनी ने कहा, "वैभव पटेल (Vaibhav Patel), तालोद फूड्स (Talod Foods) में हेड – ब्रांडिंग एवं कम्युनिकेशन के रूप में आपका स्वागत है। हमें विश्वास है कि आपका अनुभव, नई सोच और रणनीतिक दृष्टिकोण तालोद ब्रांड को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।"

नई भूमिका में वैभव पटेल (Vaibhav Patel) कंपनी की ब्रांडिंग, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन और ब्रांड रणनीति से जुड़े कार्यों का नेतृत्व करेंगे। तालोद फूड्स (Talod Foods) से पहले वैभव पटेल (Vaibhav Patel) टेक्सपिन बेयरिंग्स (Texspin Bearings) में मैनेजर – ब्रांडिंग, कम्युनिकेशन एवं पीआर (Manager – Branding, Communication & PR) के पद पर कार्यरत थे।

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AI युग में बदल रहा डिजिटल विज्ञापन : क्लिक नहीं अब 'Citation' बनेगा ताकत

भारत में AI प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन विज्ञापन बाजार अभी शुरुआती चरण में है। आने वाले समय में क्लिक नहीं, बल्कि AI Citation और भरोसा ब्रांड्स की नई पहचान बनेंगे।

Last Modified:
Monday, 06 July, 2026
aiworld

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन AI आधारित विज्ञापन बाजार अभी शुरुआती दौर में है। दिलचस्प बात यह है कि जिस प्लेटफॉर्म पर भारतीय उपयोगकर्ता सबसे अधिक समय बिता रहे हैं, वहां फिलहाल विज्ञापन देने की सुविधा ही उपलब्ध नहीं है। दूसरी ओर, कम उपयोग वाले प्लेटफॉर्म पहले ही विज्ञापन से कमाई शुरू कर चुके हैं। यही वजह है कि भारत में AI उपयोग और AI विज्ञापन बाजार के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।

कॉमस्कोर (Comscore) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में डेस्कटॉप पर AI विजिटेशन अवधि का 86% और मोबाइल पर 83% हिस्सा ओपनएआई (OpenAI) के प्लेटफॉर्म के पास है। इसके मुकाबले गूगल जेमिनी (Google Gemini) की हिस्सेदारी डेस्कटॉप पर केवल 4% और मोबाइल पर 9% है। माइक्रोसॉफ्ट कोपायलट (Microsoft Copilot), एंथ्रोपिक (Anthropic), परप्लेक्सिटी (Perplexity), डीपसीक (DeepSeek) और मेटा एआई (Meta AI) बाकी हिस्सेदारी साझा करते हैं। सबसे अधिक AI उपयोग 18 से 24 वर्ष के युवा कर रहे हैं, जो बातचीत, इमेज और वीडियो तैयार करने जैसे कार्यों के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं।

हालांकि उपयोगकर्ताओं का इतना बड़ा आधार होने के बावजूद ओपनएआई के पास भारत में अभी ऐसा कोई विज्ञापन प्लेटफॉर्म नहीं है, जहां ब्रांड सीधे विज्ञापन खरीद सकें। कॉमस्कोर एपीएसी के कंट्री मैनेजर विवेक जायसवाल का कहना है कि भारत में AI अभी प्रत्यक्ष विज्ञापन माध्यम नहीं बना है, लेकिन यह भविष्य के डिजिटल विज्ञापन की दिशा जरूर तय कर रहा है। फिलहाल पूरा उद्योग यह समझने में लगा है कि AI पर उपयोगकर्ताओं की मंशा (Intent) को विज्ञापन अवसरों में कैसे बदला जाए।

दूसरी ओर, डब्ल्यूपीपी मीडिया (WPP Media) का अनुमान है कि भारत का AI आधारित विज्ञापन बाजार 2026 में 2.5 अरब डॉलर से अधिक का हो जाएगा। फिलहाल इसका सबसे बड़ा लाभ गूगल को मिल रहा है, क्योंकि उसके AI Overviews पहले से ही सर्च इंजन के साथ जुड़े हुए हैं और उसकी विज्ञापन प्रणाली सक्रिय है। यानी फिलहाल विज्ञापन का पैसा उसी प्लेटफॉर्म तक पहुंच रहा है, जिसके पास विज्ञापन इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है, भले ही उसके पास सबसे अधिक AI उपयोगकर्ता न हों।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI युग में अब केवल क्लिक या सर्च रैंकिंग महत्वपूर्ण नहीं रहेगी, बल्कि AI द्वारा दिए जाने वाले उत्तरों में किसी ब्रांड या वेबसाइट का उल्लेख (Citation) होना नई प्रतिस्पर्धा का आधार बन रहा है। कॉमस्कोर के अध्ययन में मनोरंजन श्रेणी में विकिपीडिया (Wikipedia), यूट्यूब (YouTube), रिटेल में अमेजन (Amazon), फ्लिपकार्ट (Flipkart) और वित्तीय सेवाओं में क्लियरटैक्स (ClearTax) जैसे प्लेटफॉर्म AI उत्तरों में सबसे अधिक उद्धृत किए जा रहे हैं।

इप्सोस (Ipsos) की विशेषज्ञ शालिनी सिन्हा का मानना है कि AI को नए विज्ञापन चैनल के बजाय मौजूदा मार्केटिंग रणनीति को मजबूत करने वाले उपकरण के रूप में देखना चाहिए। उनके अनुसार भारतीय उपभोक्ता केवल AI की सिफारिशों के आधार पर खरीदारी नहीं करते, बल्कि वे भरोसेमंद और पहचान वाले ब्रांडों को प्राथमिकता देते हैं। इसलिए ब्रांड निर्माण, विश्वसनीयता और उपभोक्ता विश्वास की भूमिका आगे भी उतनी ही महत्वपूर्ण रहेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में AI विज्ञापन पारिस्थितिकी तंत्र अभी विकसित हो रहा है। आने वाले समय में यह प्रतिस्पर्धा केवल विज्ञापन दिखाने की नहीं होगी, बल्कि AI के उत्तरों में जगह बनाने और उपभोक्ताओं के विश्वास को हासिल करने की होगी। यही तय करेगा कि भविष्य में भारत के डिजिटल विज्ञापन बाजार का सबसे बड़ा हिस्सा किसके पास जाएगा।

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