सीनियर ब्रैंड, ग्रोथ और मीडिया एक्सपर्ट केतन के. भारती के मुताबिक, FAANG से MANGOS का बदलाव सिर्फ टेक लीडरशिप का नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के फैसले लेने के तरीके में आए बड़े बदलाव का संकेत है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
केतन के. भारती, सीनियर ब्रैंड, ग्रोथ व मीडिया एक्सपर्ट ।।
कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक ग्राफिक तेजी से वायरल हुआ। इसमें पांच परिचित अक्षरों को हटाकर उनकी जगह छह नए अक्षर जोड़ दिए गए थे।
FAANG बाहर था और MANGOS अंदर। (FAANG was out. MANGOS was in.)
डिजिटल युग के बड़े हिस्से में FAANG- फेसबुक, एमेजॉन, एप्पल, नेटफ्लिक्स और गूगल- यह तय करते थे कि लोग अपना समय कहां बिताएंगे, जानकारी कहां से हासिल करेंगे, कंटेंट कैसे देखेंगे और खरीदारी कहां करेंगे। मार्केटिंग की पूरी रणनीतियां इन्हीं प्लेटफॉर्म्स के इर्द-गिर्द बनाई जाती थीं।
लेकिन MANGOS- मेटा, एंथ्रोपिक, एनवीडिया, गूगल, ओपनएआई और स्पेसएक्स- कुछ अलग दर्शाता है। ये कंपनियां सिर्फ लोगों का ध्यान आकर्षित करने की होड़ में नहीं हैं, बल्कि वे उस इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रही हैं जो तेजी से लोगों के फैसलों को प्रभावित कर रहा है।
मार्केटर्स के लिए यह अंतर बेहद महत्वपूर्ण है। पिछले दो दशकों में ब्रैंड्स लोगों का ध्यान खींचने के लिए संघर्ष करते रहे हैं। लेकिन आने वाले दशक में उन्हें उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण चीज के लिए लड़ना पड़ सकता है- AI द्वारा लिए जा रहे फैसलों में अपनी जगह बनाने के लिए।
मेरी नजर में FAANG से MANGOS की ओर बदलाव की असली कहानी यही है। यह सिर्फ तकनीकी नेतृत्व में बदलाव नहीं है, बल्कि इस बात में बदलाव है कि उपभोक्ता किसी चीज को कैसे खोजते हैं, उसका मूल्यांकन कैसे करते हैं और अंततः उसे चुनते कैसे हैं।
मार्केटिंग इंडस्ट्री ने हर बड़े तकनीकी बदलाव के साथ खुद को ढाला है- चाहे वह टेलीविजन हो, सर्च इंजन, सोशल मीडिया या स्मार्टफोन। लेकिन AI कुछ अलग महसूस होता है। इसलिए नहीं कि यह एक और नया प्लेटफॉर्म लेकर आया है, बल्कि इसलिए कि इसमें उपभोक्ताओं और उनके फैसलों के बीच बैठने की क्षमता है।
वह बदलाव जिसकी चर्चा कम हो रही है
AI को लेकर अधिकांश चर्चाएं कंटेंट क्रिएशन पर केंद्रित हैं। लेकिन इससे भी बड़ा बदलाव यह है कि AI अब सिर्फ कंटेंट बनाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोगों की पसंद और फैसलों को प्रभावित करने लगा है।
मान लीजिए कोई व्यक्ति अपने परिवार के लिए सबसे अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस प्लान ढूंढ़ रहा है। कुछ साल पहले वह सर्च इंजन पर जाता, अलग-अलग वेबसाइट्स की तुलना करता, रिव्यू पढ़ता और फिर फैसला लेता। आज वही उपभोक्ता सीधे किसी AI असिस्टेंट से सवाल पूछने की संभावना ज्यादा रखता है।
AI असिस्टेंट विभिन्न जानकारियों को एक साथ जोड़ता है, विकल्पों की तुलना करता है और कुछ चुनिंदा सुझाव देता है। न कोई सर्च रिजल्ट पेज। न दस नीले लिंक और कई बार तो किसी वेबसाइट पर क्लिक करने की भी जरूरत नहीं पड़ती।
सालों तक मार्केटर्स विजिबिलिटी के लिए प्रतिस्पर्धा करते रहे। अब उन्हें AI की सिफारिशों में शामिल होने के लिए प्रतिस्पर्धा करनी होगी। ब्रैंड्स की अगली लड़ाई क्लिक्स के लिए नहीं, बल्कि उपभोक्ता की पसंद बनने के लिए होगी।
अटेंशन इकोनॉमी से इंटेलिजेंस इकोनॉमी तक
FAANG युग ने अटेंशन इकोनॉमी को जन्म दिया था। मार्केटिंग का फॉर्मूला सीधा था- ध्यान आकर्षित करो, उसे ग्राहक में बदलो और उसका आंकलन करो। लेकिन AI का उभरता दौर अलग तरीके से काम करता है।
आज जो सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं, वे लोगों को जटिल जानकारियों के बीच रास्ता दिखाने और बेहतर फैसले लेने में मदद करते हैं। इसी वजह से मार्केटिंग अब अटेंशन-आधारित ग्रोथ से इंटेलिजेंस-आधारित ग्रोथ की ओर बढ़ रही है।
पहले सफलता का मतलब सही दर्शकों तक पहुंचना था। अब सफलता इस बात पर निर्भर हो सकती है कि आपका ब्रैंड सबसे भरोसेमंद जवाब बन पाए या नहीं। एल्गोरिद्म बड़े पैमाने पर कंटेंट तैयार कर सकते हैं, लेकिन भरोसा नहीं।
जानकारी से भरी दुनिया में वे ब्रैंड आगे रहेंगे जिन्हें लगातार सुझाया जाएगा, जिनका संदर्भ दिया जाएगा और जिन्हें लोग याद रखेंगे।
कैंपेन से मार्केटिंग ऑपरेटिंग सिस्टम तक
AI का सबसे बड़ा प्रभाव सिर्फ क्रिएटिव ऑटोमेशन नहीं है। असल बदलाव संगठनों के काम करने के तरीके में है। दशकों से मार्केटिंग कैंपेन आधारित मॉडल पर चलती रही है। टीम ब्रीफ बनाती है, मीडिया लॉन्च करती है, प्रदर्शन मापती है और फिर अगले कैंपेन पर चली जाती है। अब यह मॉडल पुराना पड़ने लगा है।
आज के CMO कुछ नए सवाल पूछ रहे हैं:
भविष्य की मार्केटिंग अलग-अलग कैंपेन के इर्द-गिर्द नहीं बनेगी। यह ऐसे कनेक्टेड ऑपरेटिंग सिस्टम पर आधारित होगी जो लगातार सीखते, सुधारते और बेहतर होते रहेंगे। भविष्य में वही संगठन आगे बढ़ेंगे जो क्रिएटिविटी, डेटा, टेक्नोलॉजी और बिजनेस परिणामों को सबसे बेहतर तरीके से जोड़ पाएंगे।
सवाल यह नहीं है कि AI मार्केटर्स की जगह लेगा या नहीं। सवाल यह है कि क्या कंपनियां अब भी AI-पूर्व दुनिया के लिए बने ढांचे पर काम करती रहेंगी। काम का बड़ा हिस्सा ऑटोमेट हो जाएगा, लेकिन निर्णय लेने की क्षमता, विभिन्न चीजों को जोड़ने की समझ और रणनीतिक सोच की अहमियत और बढ़ जाएगी।
क्यों AI एजेंट्स बदल देंगे पूरा खेल
AI की अगली बड़ी लहर AI असिस्टेंट नहीं, बल्कि AI एजेंट्स होंगे। असिस्टेंट सवालों के जवाब देते हैं। एजेंट्स काम पूरा करते हैं। आज उपभोक्ता AI से पूछते हैं कि क्या खरीदना चाहिए। कल वे AI से कह सकते हैं कि वह उनकी ओर से खरीदारी भी कर दे। कल्पना कीजिए कि कोई AI एजेंट कीमतों की तुलना कर रहा है, रिव्यू पढ़ रहा है, उत्पाद चुन रहा है और उपभोक्ता की तरफ से खरीदारी भी पूरी कर रहा है। यह ब्रैंड्स के लिए एक नई चुनौती पैदा करेगा।
क्या होगा जब अगला ग्राहक कोई इंसान नहीं, बल्कि उसकी ओर से काम करने वाला AI एजेंट होगा? पारंपरिक विज्ञापन लोगों को प्रभावित करने के लिए बनाए गए थे। लेकिन आने वाले दशक में ब्रैंड्स को इंसानों के साथ-साथ उनके लिए काम करने वाले डिजिटल एजेंट्स को भी प्रभावित करना होगा।
मीडिया के लिए इसका क्या मतलब है?
हर तकनीकी बदलाव नए गेटकीपर्स पैदा करता है। एक समय टीवी नेटवर्क गेटकीपर थे। फिर सर्च इंजन आए। उसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने यह भूमिका निभाई। अब AI असिस्टेंट और AI एजेंट्स अगली पीढ़ी के गेटकीपर बन सकते हैं।
पब्लिशर्स के लिए चुनौती साफ है- कम क्लिक्स और बदलते ट्रैफिक पैटर्न। लेकिन अवसर भी उतना ही बड़ा है।
जब इंटरनेट सिंथेटिक कंटेंट से भरता जा रहा है, तब ओरिजिनल रिपोर्टिंग, विशेषज्ञ विश्लेषण और रिसर्च आधारित कंटेंट की अहमियत बढ़ रही है। भविष्य में जरूरी नहीं कि सबसे ज्यादा कंटेंट बनाने वाले जीतें। जीत उन्हीं की हो सकती है जो सबसे ज्यादा भरोसेमंद कंटेंट तैयार करें। एजेंसियों के लिए भी यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है।
भविष्य की एजेंसी डेटा, टेक्नोलॉजी, क्रिएटिविटी और AI को जोड़कर एकीकृत ग्रोथ सिस्टम तैयार करेगी। एक्जिक्यूशन सस्ता होगा, लेकिन सही निर्णय लेने की क्षमता की कीमत बढ़ेगी।
भारत के लिए अवसर अलग हैं
भारत के लिए AI का अवसर अगला OpenAI बनाने में नहीं हो सकता। बल्कि उन भारतीय समस्याओं का समाधान करने में हो सकता है जहां भाषा, बड़े पैमाने और पहुंच का संगम होता है।
साथ ही AI से जुड़े सबसे बड़े बदलाव केवल चैट इंटरफेस तक सीमित नहीं रहेंगे। वे उन जगहों पर होंगे जहां खोज, खरीदारी और लेनदेन एक-दूसरे से मिलते हैं। मार्केटप्लेस, रिटेल मीडिया नेटवर्क और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अब सिर्फ वितरण चैनल नहीं रह गए हैं, बल्कि निर्णय लेने वाले इंजन बनते जा रहे हैं।
जैसे-जैसे AI इन प्लेटफॉर्म्स में शामिल होगा, सिफारिश और खरीदारी के बीच की दूरी काफी कम हो सकती है। भारत को सफल होने के लिए सिलिकॉन वैली की नकल करने की जरूरत नहीं है। उसे भारतीय समस्याओं का भारतीय पैमाने पर समाधान करना होगा।
एक अलग नजरिया: AI ब्रैंड्स को और मजबूत बनाएगा
AI को लेकर अक्सर यह माना जाता है कि तकनीक ब्रैंड्स की भूमिका को कमजोर कर देगी, लेकिन मेरा मानना है कि इसका उल्टा होगा। जैसे-जैसे AI से तैयार कंटेंट बढ़ेगा, अलग पहचान बनाना और मुश्किल होता जाएगा। उपभोक्ता AI की सिफारिशों पर भरोसा कर सकते हैं, लेकिन अंतिम फैसला लेते समय वे उन्हीं ब्रैंड्स को प्राथमिकता देंगे जिन्हें वे जानते हैं और जिन पर भरोसा करते हैं।
जानकारी से भरी दुनिया में पहचान और विश्वसनीयता सबसे बड़ी ताकत बन जाएंगी। अगले दशक के सबसे मजबूत ब्रैंड वे होंगे जो तकनीकी क्षमता और सांस्कृतिक जुड़ाव, दोनों को साथ लेकर चलेंगे। सिर्फ एक चीज पर्याप्त नहीं होगी। मार्केटिंग लीडर्स को अब क्या करना चाहिए? मार्केटिंग लीडर्स को एक सरल सवाल से शुरुआत करनी चाहिए।
अगर आज कोई उपभोक्ता या उसकी ओर से काम कर रहा AI एजेंट हमारी कैटेगरी के बारे में पूछे, तो क्या हमारे ब्रैंड का नाम जवाब में आता है? अधिकांश कंपनियों को इसका जवाब नहीं पता और यही सबसे बड़ी चुनौती है।
कंपनियों को ग्राहकों के साथ सीधे संबंध मजबूत करने होंगे, फर्स्ट-पार्टी डेटा क्षमताओं को बढ़ाना होगा और मार्केटिंग, एनालिटिक्स, टेक्नोलॉजी तथा कस्टमर एक्सपीरियंस के बीच मौजूद दीवारों को तोड़ना होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ब्रैंड बिल्डिंग में निवेश जारी रखना होगा।
FAANG युग ने उन ब्रैंड्स को पुरस्कृत किया जो लोगों का ध्यान आकर्षित करना जानते थे। MANGOS युग उन ब्रैंड्स को पुरस्कृत करेगा जो लोगों और AI दोनों की सिफारिश हासिल कर सकेंगे,क्योंकि AI द्वारा संचालित फैसलों के इस दौर में सिर्फ दिखना काफी नहीं होगा। ब्रैंड्स को चुना जाना भी जरूरी होगा।
‘स्टारलिंक’ ने भारत में अपनी कमर्शियल सर्विस की मंजूरी रुकने की खबरों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि भारत सरकार के साथ उसकी बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी 'स्टारलिंक' (Starlink) ने भारत में अपनी कमर्शियल सर्विस (Commercial Service) की मंजूरी रुकने संबंधी खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कंपनी का कहना है कि भारत सरकार के साथ उसकी बातचीत सकारात्मक और रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
'स्टारलिंक' (Starlink) के अनुसार, उसे देश के दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों तक हाई-स्पीड इंटरनेट (High-Speed Internet) पहुंचाने की अपनी योजना को लेकर सरकार की ओर से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है। फिलहाल कंपनी को भारत में सेवाएं शुरू करने के लिए अंतिम रेगुलेटरी क्लीयरेंस (Regulatory Clearance) और स्पेक्ट्रम आवंटन (Spectrum Allocation) का इंतजार है।
हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि गृह मंत्रालय के तहत आने वाली सुरक्षा एजेंसियों ने 'स्टारलिंक' (Starlink) को मिलने वाली अंतिम मंजूरी को रोक दिया है। रिपोर्ट्स में ईरान संघर्ष के दौरान बिना लाइसेंस वाले स्टारलिंक टर्मिनल्स (Starlink Terminals) के इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा चिंताओं का हवाला दिया गया था।
हालांकि, कंपनी ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। 'स्टारलिंक' (Starlink) की बिजनेस ऑपरेशंस वाइस प्रेसिडेंट (Business Operations Vice President) लॉरेन ड्रायर (Lauren Dreyer) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर जारी बयान में कहा कि गुमनाम सूत्रों के हवाले से किए जा रहे दावे पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं।
लॉरेन ड्रायर (Lauren Dreyer) ने यह भी कहा कि कंपनी को अब तक सरकार की ओर से केवल सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और वह भारत में अपनी सेवाएं जल्द शुरू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
'स्टारलिंक' (Starlink), एलन मस्क की कंपनी 'स्पेसएक्स' (SpaceX) की सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवा (Satellite Broadband Service) है। यह पृथ्वी की निचली कक्षा यानी लो अर्थ ऑर्बिट (Low Earth Orbit) में मौजूद हजारों सैटेलाइट्स (Satellites) के नेटवर्क के जरिए इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराती है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta) ने भारत में AI-सक्षम डेटा सेंटर विकसित करने के लिए साझेदारी की घोषणा की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta) ने भारत में AI-सक्षम डेटा सेंटर विकसित करने के लिए साझेदारी की घोषणा की है। इस परियोजना के तहत गुजरात के जामनगर में एक अत्याधुनिक डेटा सेंटर बनाया जाएगा, जो भारत को वैश्विक AI इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 10 जून 2026 को जारी एक मीडिया विज्ञप्ति में बताया कि कंपनी और मेटा ने भारत में AI-सक्षम डेटा सेंटर विकसित करने पर सहमति बनाई है। इस परियोजना के तहत रिलायंस अगले दो वर्षों में 168 मेगावाट क्षमता वाला डेटा सेंटर विकसित करेगी। भविष्य में इसकी क्षमता बढ़ाने का विकल्प भी मौजूद रहेगा।
यह भारत में मेटा का पहला "बिल्ट-टू-सूट" डेटा सेंटर होगा। मेटा इस सुविधा की क्षमता को लीज पर लेकर अपने वैश्विक इंफ्रास्ट्रक्चर, मुख्य व्यवसाय और AI कंप्यूटिंग जरूरतों को पूरा करेगी। यह कदम मेटा के वैश्विक इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के साथ-साथ रिलायंस और मेटा के लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक संबंधों को भी और मजबूत करेगा। दोनों कंपनियां पहले से कनेक्टिविटी, कॉमर्स और AI इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में साथ काम कर रही हैं।
कंपनी के अनुसार, यह डेटा सेंटर मेटा के वैश्विक नेटवर्क का हिस्सा होगा और AI से जुड़ी कंप्यूटिंग जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे वैश्विक डिजिटल और AI इकोसिस्टम में भारत की बढ़ती भूमिका भी और मजबूत होगी।
समझौते के तहत रिलायंस डेटा सेंटर के पूरे जीवनचक्र से जुड़ी एंड-टू-एंड सेवाएं प्रदान करेगी। इसमें डिजाइन, निर्माण, यूटिलिटी मैनेजमेंट, नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति, नेटवर्क कनेक्टिविटी और संचालन संबंधी सभी प्रबंधित सेवाएं शामिल होंगी। इसके साथ ही रिलायंस भारत में हाइपरस्केल AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सिंगल-विंडो सॉल्यूशन प्रदाता के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करेगी।
जामनगर में इस डेटा सेंटर की स्थापना के पीछे कई रणनीतिक कारण हैं। गुजरात का यह क्षेत्र बड़े डेटा सेंटर संचालन के लिए उपयुक्त माना जाता है। यहां नवीकरणीय ऊर्जा की उपलब्धता, पर्याप्त जल संसाधन, भारत के पश्चिमी समुद्री केबल लैंडिंग स्टेशनों की निकटता और जियो के व्यापक फाइबर नेटवर्क का लाभ मिलेगा।
यह डेटा सेंटर पूरी तरह नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित होगा और इसके कूलिंग सिस्टम में समुद्री जल को मीठा बनाकर उपयोग किया जाएगा। इससे रिलायंस और मेटा दोनों की स्थिरता (Sustainability) के प्रति प्रतिबद्धता भी सामने आती है।
कंपनी ने कहा कि यह साझेदारी भारत सरकार की उन प्राथमिकताओं के अनुरूप है, जिनमें डेटा सेंटरों को राष्ट्रीय रणनीतिक अवसंरचना का दर्जा दिया गया है। साथ ही यह पहल भारत में वैश्विक AI इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश आकर्षित करने की दीर्घकालिक नीति को भी मजबूती देगी।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने कहा, "मेटा के साथ यह साझेदारी भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक परिवर्तनकारी क्षण है। मेटा जैसी वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनी के लिए भारत का पहला बिल्ट-टू-सूट डेटा सेंटर बनाना इस बात का प्रमाण है कि भारत वैश्विक AI क्रांति में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। रिलायंस में हम विश्वस्तरीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो अगली पीढ़ी के AI नवाचारों को गति देगा। जामनगर हाइपरस्केल AI कंप्यूटिंग का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बनेगा और इस लक्ष्य को साकार करने के लिए मेटा के साथ साझेदारी पर हमें गर्व है।"
मेटा के फाउंडर और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर मार्क जुकरबर्ग ने कहा, "हमें भारत में अपना पहला AI-सक्षम डेटा सेंटर विकसित करने के लिए रिलायंस के साथ काम करने पर गर्व है। जामनगर में बनने वाली यह विश्वस्तरीय सुविधा हमारी वैश्विक AI इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था में हमारे दीर्घकालिक निवेश को भी और मजबूत करेगी।"
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड भारत की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की कंपनी है। 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में कंपनी का समेकित राजस्व 11,75,919 करोड़ रुपये, नकद लाभ 1,71,258 करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ 95,754 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का कारोबार हाइड्रोकार्बन अन्वेषण, पेट्रोलियम रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल्स, उन्नत सामग्री, नवीकरणीय ऊर्जा, रिटेल, डिजिटल सेवाओं तथा मीडिया एवं मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है।
वहीं, मेटा दुनिया भर में मानव संपर्क और डिजिटल अनुभवों को AI तथा इमर्सिव तकनीकों के माध्यम से नया स्वरूप देने पर काम कर रही है। फेसबुक, मैसेंजर, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए कंपनी अरबों लोगों को जोड़ चुकी है और अब AI आधारित भविष्य के डिजिटल अनुभवों पर फोकस कर रही है।
WhatsApp जल्द ही टेक्स्ट मैसेज के लिए View Once फीचर ला सकता है। इस फीचर के तहत रिसीवर के मैसेज पढ़ते ही वह अपने आप डिलीट हो जाएगा और दोबारा नहीं देखा जा सकेगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इंस्टैंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) अपने यूजर्स के लिए एक नया प्राइवेसी फीचर लाने की तैयारी कर रहा है। जल्द ही ऐप में टेक्स्ट मैसेज के लिए भी View Once फीचर का सपोर्ट मिल सकता है, जिससे सीक्रेट मैसेज भेजना पहले से ज्यादा आसान हो जाएगा।
'WABetaInfo' की रिपोर्ट के मुताबिक यह फीचर फिलहाल डेवलपमेंट फेज में है और अभी तक बीटा वर्जन के लिए भी जारी नहीं किया गया है। अभी View Once फीचर केवल फोटो और वीडियो जैसी मीडिया फाइल्स के लिए उपलब्ध है, लेकिन कंपनी अब इसे टेक्स्ट मैसेज के साथ भी जोड़ने की तैयारी कर रही है।
इस फीचर के आने के बाद यूजर किसी भी व्यक्ति को View Once मोड में टेक्स्ट मैसेज भेज सकेगा। जैसे ही रिसीवर उस मैसेज को पढ़ेगा, वह अपने आप डिलीट हो जाएगा। इसके लिए मैसेज भेजते समय View Once विकल्प को ऑन करना होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, View Once फीचर वाले टेक्स्ट मैसेज का स्क्रीनशॉट नहीं लिया जा सकेगा और उसे दोबारा भी नहीं पढ़ा जा सकेगा। इससे निजी बातचीत की सुरक्षा और गोपनीयता पहले से बेहतर हो सकती है।
'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) लगातार अपने प्लेटफॉर्म में नए फीचर्स जोड़ रहा है। हाल के वर्षों में कंपनी ने सिंपल यूजर इंटरफेस के साथ कई एडवांस फीचर्स पेश किए हैं, जिससे यूजर्स का अनुभव बेहतर हुआ है।
'एमेजॉन' (Amazon) में AI निवेश और कर्मचारियों की छंटनी को लेकर विवाद बढ़ गया है। कंपनी के कुछ इंजीनियर्स ने AI डेटा सेंटर्स और 30 हजार नौकरियां खत्म किए जाने पर सवाल उठाए हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी 'एमेजॉन' (Amazon) इस समय AI निवेश और कर्मचारियों की छंटनी को लेकर चर्चा में है। एक ओर कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भारी निवेश कर रही है, वहीं दूसरी ओर हजारों कर्मचारियों की नौकरियां खत्म होने से विरोध के स्वर उठने लगे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक 'एमेजॉन' (Amazon) ने करीब 30 हजार कर्मचारियों की छंटनी की है। इसी दौरान कंपनी AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर्स और नई तकनीकों पर अरबों डॉलर का निवेश जारी रखे हुए है।
अमेरिका के सिएटल में आयोजित एक सिटी काउंसिल सुनवाई के दौरान कंपनी के कुछ इंजीनियर्स ने खुलकर इस नीति का विरोध किया। उनका कहना था कि जब कंपनी बड़े पैमाने पर AI डेटा सेंटर्स पर खर्च कर रही है, तब कर्मचारियों की छंटनी करना उचित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार 'एमेजॉन' (Amazon) 2026 में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर करीब 200 अरब अमेरिकी डॉलर निवेश करने की योजना पर काम कर रहा है।
ऐसे में 30 हजार कर्मचारियों की छंटनी को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यह संख्या कंपनी के कुल वर्कफोर्स का करीब 8.6 प्रतिशत बताई जा रही है। इंजीनियर्स ने डेटा सेंटर्स के पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि ये सेंटर्स बड़ी मात्रा में बिजली और संसाधनों की खपत करते हैं, जिसका असर स्थानीय समुदायों और पर्यावरण पर पड़ सकता है।
हालांकि AI की दौड़ में सिर्फ 'एमेजॉन' (Amazon) ही नहीं, बल्कि 'माइक्रोसॉफ्ट' (Microsoft), 'गूगल' (Google) और 'एनवीडिया' (NVIDIA) जैसी कंपनियां भी बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं।
रेडसीर की रिपोर्ट के मुताबिक AI वैश्विक विज्ञापन उद्योग को तेजी से बदल रहा है। मजबूत टेक इकोसिस्टम और बड़ी डेवलपर क्षमता के चलते भारत दुनिया का बड़ा AdTech innovation hub बन सकता है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल चैटबॉट और कंटेंट जनरेशन तक सीमित नहीं रह गया है। AI तेजी से वैश्विक विज्ञापन उद्योग की कार्यप्रणाली को बदल रहा है। कंसल्टिंग फर्म 'रेडसीर' (Redseer) की एक रिपोर्ट के मुताबिक AI विज्ञापन कारोबार को ज्यादा स्मार्ट, डेटा आधारित और परिणाम केंद्रित बना रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत दुनिया की प्रमुख AdTech कंपनियों का बड़ा केंद्र बनने की मजबूत स्थिति में है। इसकी वजह देश का तेजी से बढ़ता टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम और बड़ी डेवलपर क्षमता है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल करीब 27 लाख इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी छात्रों का नामांकन होता है। वहीं देश में करीब 2.4 करोड़ GitHub developers मौजूद हैं। इसके अलावा लगभग 1,900 Global Capability Centres (GCC) सक्रिय हैं, जो 65 से 75 अरब डॉलर का export revenue पैदा कर रहे हैं।
'रेडसीर' (Redseer) का कहना है कि यही मजबूत टेक आधार AI आधारित products और platforms के विकास को बढ़ावा दे रहा है। इसी वजह से भारत वैश्विक AdTech innovation का अगला बड़ा केंद्र बन सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक विज्ञापन बाजार 1 ट्रिलियन डॉलर से आगे निकल चुका है। इसमें मीडिया खरीद, creative content निर्माण, performance measurement, ई-कॉमर्स और customer targeting जैसी प्रक्रियाएं तेजी से AI आधारित होती जा रही हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डिजिटल विज्ञापन अब वैश्विक विज्ञापन खर्च का 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा बन चुके हैं। वहीं भारत का डिजिटल विज्ञापन बाजार 2025 तक करीब 21 अरब डॉलर का हो सकता है, जो 2030 तक बढ़कर 33 से 42 अरब डॉलर के बीच पहुंचने का अनुमान है।
मलेशिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। नए नियम के तहत एज वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा और नियम तोड़ने वाली टेक कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मलेशिया ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए 1 जून 2026 से सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए एज लिमिट लागू कर दी है। नए नियम के तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
इस फैसले के बाद 'टिकटॉक' (TikTok), 'इंस्टाग्राम' (Instagram), 'फेसबुक' (Facebook) और 'यूट्यूब' (YouTube) जैसी बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों की चिंता बढ़ गई है। मलेशिया सरकार का कहना है कि बच्चों में सोशल मीडिया की बढ़ती लत, कम होती फिजिकल एक्टिविटी और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। सरकार ने खास तौर पर “ब्रेनरॉट कंटेंट” को लेकर चिंता जताई है, जिसका बच्चों के अटेंशन स्पैन और मानसिक स्थिति पर असर पड़ सकता है।
नए नियम के तहत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को एज वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करना होगा। इसके लिए पासपोर्ट या नेशनल आइडेंटिटी कार्ड जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाएगा। उम्र सत्यापित होने के बाद ही सोशल मीडिया एक्सेस मिलेगा। मलेशिया में सोशल मीडिया के 80 लाख से ज्यादा यूजर्स हैं। ऐसे में नए नियम से प्लेटफॉर्म्स के यूजर बेस, ट्रैफिक और कमाई पर असर पड़ सकता है। कंपनियों को नए सुरक्षा फीचर्स और सिस्टम भी तैयार करने होंगे।
सरकार ने साफ किया है कि इस कानून का मकसद बच्चों को साइबर बुलिंग, साइबर अपराध और सोशल मीडिया की लत से बचाना है। नियमों का पालन नहीं करने वाली टेक कंपनियों पर करीब 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने Google पर ₹30 लाख का जुर्माना लगाया है। अदालत ने कहा कि Google Ads में किसी दूसरी कंपनी के पंजीकृत ट्रेडमार्क का इस्तेमाल विज्ञापन दिखाने के लिए नहीं किया जा सकता।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने Google को बड़ा झटका देते हुए उसके विज्ञापन प्लेटफॉर्म को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि कोई भी कंपनी Google Ads में किसी दूसरी कंपनी के पंजीकृत ट्रेडमार्क का इस्तेमाल अपने विज्ञापन दिखाने के लिए नहीं कर सकती।
हाईकोर्ट ने यह फैसला सैनिटरीवेयर कंपनी Hindware से जुड़े मामले में सुनाया। अदालत ने ट्रेडमार्क के दुरुपयोग को गंभीर मानते हुए Google पर ₹30 लाख का जुर्माना भी लगाया है। जस्टिस मिनी पुष्कर्णा (Mini Pushkarna) की पीठ ने कहा कि विज्ञापन मामलों में Google सिर्फ एक माध्यम की भूमिका में नहीं है। अदालत के मुताबिक Google विज्ञापनदाताओं को ‘की-वर्ड’ सुझाने और विज्ञापनों की रैंकिंग तय करने में सक्रिय भूमिका निभाता है।
कोर्ट ने कहा कि अगर कोई कंपनी किसी दूसरी कंपनी के पंजीकृत ट्रेडमार्क को ‘की-वर्ड’ के तौर पर खरीदती है ताकि उसका विज्ञापन सर्च रिजल्ट में ऊपर दिखाई दे, तो यह ट्रेडमार्क कानून का उल्लंघन माना जाएगा। अदालत ने Google को निर्देश दिया कि भविष्य में ऐसे ‘की-वर्ड’ के आधार पर विज्ञापन न दिखाए जाएं, जो किसी दूसरी कंपनी के ट्रेडमार्क हों।
यह मामला साल 2013 में शुरू हुआ था। Hindware ने आरोप लगाया था कि उसकी प्रतिस्पर्धी कंपनियों Cera Sanitaryware और Grohe India ने Google के विज्ञापन प्रोग्राम के जरिए “Hindware” शब्द को ‘की-वर्ड’ के रूप में खरीदा था। इससे Hindware सर्च करने पर ऊपर दूसरी कंपनियों के विज्ञापन दिखाई देते थे।
Meta एक नए AI Pendant पर काम कर रहा है, जिसे गले में पहनकर इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह डिवाइस ऑडियो कमांड पर काम करेगा और बातचीत रिकॉर्ड व ट्रांसक्राइब जैसे फीचर्स देगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मेटा (Meta) अब एक नए AI डिवाइस पर काम कर रहा है, जिसे यूजर्स गले में पहन सकेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी जल्द AI Pendant लॉन्च कर सकती है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फीचर्स के साथ आएगा और आवाज के जरिए काम करेगा। बताया जा रहा है कि यह AI Pendant ऑडियो कमांड पर आधारित होगा। यूजर्स इससे बातचीत रिकॉर्ड कर सकेंगे, उसे ट्रांसक्राइब कर पाएंगे और जरूरी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से सेव भी कर सकेंगे।
Meta ऐसे समय यह तैयारी कर रहा है, जब उसके हार्डवेयर कारोबार को लगातार नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी की Reality Labs यूनिट, जो Smart Glasses और Virtual Reality devices बनाती है, उसे इस साल की पहली तिमाही में 4 अरब डॉलर से ज्यादा का घाटा हुआ। इस दौरान यूनिट की आय करीब 40.2 करोड़ डॉलर रही।
AI Pendant प्रोजेक्ट को मजबूत करने के लिए Meta ने पिछले साल AI wearable startup “Limitless” का अधिग्रहण भी किया था। यह स्टार्टअप pendant-style AI devices बनाने के लिए जाना जाता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक Meta ने अपने wearable business के लिए बड़ा लक्ष्य तय किया है। कंपनी 2026 की दूसरी तिमाही तक करीब 1 करोड़ wearable devices बेचने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए Meta आने वाले समय में कई नए प्रोडक्ट्स को वैश्विक बाजार में उतार सकती है।
OpenAI जल्द ही ChatGPT के शेयरिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। नए अपडेट के बाद यूजर्स चैट्स को कलरफुल प्रीव्यू कार्ड्स और स्मार्ट स्क्रीनशॉट फीचर्स के साथ शेयर कर सकेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आजकल सोशल मीडिया पर लोग ChatGPT के साथ हुई अपनी मजेदार और दिलचस्प बातचीत खूब शेयर कर रहे हैं। अब OpenAI इस अनुभव को और बेहतर बनाने की तैयारी में है। कंपनी जल्द ही ChatGPT के शेयरिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव करने जा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक नए अपडेट के बाद ChatGPT चैट्स किसी साधारण लिंक की तरह नहीं, बल्कि आकर्षक और रंगीन प्रीव्यू कार्ड्स के रूप में शेयर होंगी। इससे यूजर्स को अपनी बातचीत सोशल मीडिया और दूसरे एप्स पर ज्यादा बेहतर तरीके से शेयर करने का मौका मिलेगा।
फिलहाल जब कोई यूजर ChatGPT चैट शेयर करता है, तो सामने वाले को सिर्फ एक सामान्य URL लिंक दिखाई देता है। कई बार लिंक खोले बिना यह समझना मुश्किल होता है कि बातचीत किस विषय पर है। लेकिन नए फीचर के बाद लिंक के साथ एक विजुअल प्रीव्यू कार्ड भी दिखाई देगा।
रिपोर्ट के अनुसार, यूजर्स को तीन तरह के कार्ड स्टाइल मिल सकते हैं। इसमें एक सिंपल सफेद कार्ड और दो अलग-अलग रंगीन कार्ड शामिल होंगे। इन कार्ड्स पर चैट का टाइटल भी साफ दिखाई देगा, जिससे रिसीवर को पहले ही अंदाजा हो जाएगा कि बातचीत किस बारे में है।
इसके अलावा OpenAI एक नए स्मार्ट स्क्रीनशॉट फीचर पर भी काम कर रहा है। इसके जरिए यूजर्स स्क्रीनशॉट के साथ पूरी चैट का लिंक भी भेज सकेंगे। वहीं केवल स्क्रीनशॉट शेयर करने का अलग विकल्प भी मिलेगा। माना जा रहा है कि यह नया अपडेट ChatGPT चैट्स को सोशल मीडिया पर शेयर करना पहले से ज्यादा आसान और आकर्षक बना देगा।
मेटा (Meta) ने Facebook, Instagram और WhatsApp के लिए नए कंज्यूमर सब्सक्रिप्शन प्लान्स लॉन्च करने की घोषणा की है। इन प्लान्स में यूजर्स को कई एक्स्ट्रा और प्रीमियम फीचर्स मिलने वाले हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अगर आप Facebook, Instagram और WhatsApp पर आम यूजर्स से अलग एक्स्ट्रा फीचर्स चाहते हैं, तो Meta आपके लिए नया सब्सक्रिप्शन प्लान लेकर आ रहा है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह अपने प्रमुख एप्स के लिए नए कंज्यूमर सब्सक्रिप्शन प्लान्स को ग्लोबली रोलआउट करेगी।
Meta की प्रोडक्ट हेड नाओमी ग्लाइट (Naomi Gleit) ने बताया कि कुछ डॉलर प्रति महीने की कीमत पर यूजर्स को कई नए और मजेदार फीचर्स मिलेंगे। उन्होंने साफ किया कि ये प्लान Meta Verified यानी ब्लू टिक सेवा से अलग होंगे। Meta Verified पहले की तरह वेरिफिकेशन, सुरक्षा और एक्स्ट्रा सपोर्ट के लिए काम करता रहेगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक Instagram Plus और Facebook Plus की कीमत 3.99 डॉलर प्रति माह हो सकती है। वहीं WhatsApp Plus के लिए यूजर्स को हर महीने 2.99 डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं।
WhatsApp Plus में यूजर्स को कस्टम थीम, अलग रिंगटोन, प्रीमियम स्टिकर्स और ज्यादा चैट्स पिन करने जैसे फीचर्स मिल सकते हैं। वहीं Instagram और Facebook Plus में एडवांस टूल्स और अतिरिक्त कंट्रोल दिए जाने की तैयारी है। हालांकि ये फीचर्स फिलहाल भारतीय यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं हुए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि कंपनी जल्द इन्हें भारत में भी लॉन्च कर सकती है।
इसके अलावा Meta, AI और क्रिएटर फोकस्ड “Meta One” प्लान भी लाने की तैयारी में है। इसके Plus प्लान की कीमत 7.99 डॉलर और Premium प्लान की कीमत 19.99 डॉलर प्रति माह बताई जा रही है।