सीनियर ब्रैंड, ग्रोथ और मीडिया एक्सपर्ट केतन के. भारती के मुताबिक, FAANG से MANGOS का बदलाव सिर्फ टेक लीडरशिप का नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के फैसले लेने के तरीके में आए बड़े बदलाव का संकेत है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
केतन के. भारती, सीनियर ब्रैंड, ग्रोथ व मीडिया एक्सपर्ट ।।
कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक ग्राफिक तेजी से वायरल हुआ। इसमें पांच परिचित अक्षरों को हटाकर उनकी जगह छह नए अक्षर जोड़ दिए गए थे।
FAANG बाहर था और MANGOS अंदर। (FAANG was out. MANGOS was in.)
डिजिटल युग के बड़े हिस्से में FAANG- फेसबुक, एमेजॉन, एप्पल, नेटफ्लिक्स और गूगल- यह तय करते थे कि लोग अपना समय कहां बिताएंगे, जानकारी कहां से हासिल करेंगे, कंटेंट कैसे देखेंगे और खरीदारी कहां करेंगे। मार्केटिंग की पूरी रणनीतियां इन्हीं प्लेटफॉर्म्स के इर्द-गिर्द बनाई जाती थीं।
लेकिन MANGOS- मेटा, एंथ्रोपिक, एनवीडिया, गूगल, ओपनएआई और स्पेसएक्स- कुछ अलग दर्शाता है। ये कंपनियां सिर्फ लोगों का ध्यान आकर्षित करने की होड़ में नहीं हैं, बल्कि वे उस इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रही हैं जो तेजी से लोगों के फैसलों को प्रभावित कर रहा है।
मार्केटर्स के लिए यह अंतर बेहद महत्वपूर्ण है। पिछले दो दशकों में ब्रैंड्स लोगों का ध्यान खींचने के लिए संघर्ष करते रहे हैं। लेकिन आने वाले दशक में उन्हें उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण चीज के लिए लड़ना पड़ सकता है- AI द्वारा लिए जा रहे फैसलों में अपनी जगह बनाने के लिए।
मेरी नजर में FAANG से MANGOS की ओर बदलाव की असली कहानी यही है। यह सिर्फ तकनीकी नेतृत्व में बदलाव नहीं है, बल्कि इस बात में बदलाव है कि उपभोक्ता किसी चीज को कैसे खोजते हैं, उसका मूल्यांकन कैसे करते हैं और अंततः उसे चुनते कैसे हैं।
मार्केटिंग इंडस्ट्री ने हर बड़े तकनीकी बदलाव के साथ खुद को ढाला है- चाहे वह टेलीविजन हो, सर्च इंजन, सोशल मीडिया या स्मार्टफोन। लेकिन AI कुछ अलग महसूस होता है। इसलिए नहीं कि यह एक और नया प्लेटफॉर्म लेकर आया है, बल्कि इसलिए कि इसमें उपभोक्ताओं और उनके फैसलों के बीच बैठने की क्षमता है।
वह बदलाव जिसकी चर्चा कम हो रही है
AI को लेकर अधिकांश चर्चाएं कंटेंट क्रिएशन पर केंद्रित हैं। लेकिन इससे भी बड़ा बदलाव यह है कि AI अब सिर्फ कंटेंट बनाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोगों की पसंद और फैसलों को प्रभावित करने लगा है।
मान लीजिए कोई व्यक्ति अपने परिवार के लिए सबसे अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस प्लान ढूंढ़ रहा है। कुछ साल पहले वह सर्च इंजन पर जाता, अलग-अलग वेबसाइट्स की तुलना करता, रिव्यू पढ़ता और फिर फैसला लेता। आज वही उपभोक्ता सीधे किसी AI असिस्टेंट से सवाल पूछने की संभावना ज्यादा रखता है।
AI असिस्टेंट विभिन्न जानकारियों को एक साथ जोड़ता है, विकल्पों की तुलना करता है और कुछ चुनिंदा सुझाव देता है। न कोई सर्च रिजल्ट पेज। न दस नीले लिंक और कई बार तो किसी वेबसाइट पर क्लिक करने की भी जरूरत नहीं पड़ती।
सालों तक मार्केटर्स विजिबिलिटी के लिए प्रतिस्पर्धा करते रहे। अब उन्हें AI की सिफारिशों में शामिल होने के लिए प्रतिस्पर्धा करनी होगी। ब्रैंड्स की अगली लड़ाई क्लिक्स के लिए नहीं, बल्कि उपभोक्ता की पसंद बनने के लिए होगी।
अटेंशन इकोनॉमी से इंटेलिजेंस इकोनॉमी तक
FAANG युग ने अटेंशन इकोनॉमी को जन्म दिया था। मार्केटिंग का फॉर्मूला सीधा था- ध्यान आकर्षित करो, उसे ग्राहक में बदलो और उसका आंकलन करो। लेकिन AI का उभरता दौर अलग तरीके से काम करता है।
आज जो सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं, वे लोगों को जटिल जानकारियों के बीच रास्ता दिखाने और बेहतर फैसले लेने में मदद करते हैं। इसी वजह से मार्केटिंग अब अटेंशन-आधारित ग्रोथ से इंटेलिजेंस-आधारित ग्रोथ की ओर बढ़ रही है।
पहले सफलता का मतलब सही दर्शकों तक पहुंचना था। अब सफलता इस बात पर निर्भर हो सकती है कि आपका ब्रैंड सबसे भरोसेमंद जवाब बन पाए या नहीं। एल्गोरिद्म बड़े पैमाने पर कंटेंट तैयार कर सकते हैं, लेकिन भरोसा नहीं।
जानकारी से भरी दुनिया में वे ब्रैंड आगे रहेंगे जिन्हें लगातार सुझाया जाएगा, जिनका संदर्भ दिया जाएगा और जिन्हें लोग याद रखेंगे।
कैंपेन से मार्केटिंग ऑपरेटिंग सिस्टम तक
AI का सबसे बड़ा प्रभाव सिर्फ क्रिएटिव ऑटोमेशन नहीं है। असल बदलाव संगठनों के काम करने के तरीके में है। दशकों से मार्केटिंग कैंपेन आधारित मॉडल पर चलती रही है। टीम ब्रीफ बनाती है, मीडिया लॉन्च करती है, प्रदर्शन मापती है और फिर अगले कैंपेन पर चली जाती है। अब यह मॉडल पुराना पड़ने लगा है।
आज के CMO कुछ नए सवाल पूछ रहे हैं:
भविष्य की मार्केटिंग अलग-अलग कैंपेन के इर्द-गिर्द नहीं बनेगी। यह ऐसे कनेक्टेड ऑपरेटिंग सिस्टम पर आधारित होगी जो लगातार सीखते, सुधारते और बेहतर होते रहेंगे। भविष्य में वही संगठन आगे बढ़ेंगे जो क्रिएटिविटी, डेटा, टेक्नोलॉजी और बिजनेस परिणामों को सबसे बेहतर तरीके से जोड़ पाएंगे।
सवाल यह नहीं है कि AI मार्केटर्स की जगह लेगा या नहीं। सवाल यह है कि क्या कंपनियां अब भी AI-पूर्व दुनिया के लिए बने ढांचे पर काम करती रहेंगी। काम का बड़ा हिस्सा ऑटोमेट हो जाएगा, लेकिन निर्णय लेने की क्षमता, विभिन्न चीजों को जोड़ने की समझ और रणनीतिक सोच की अहमियत और बढ़ जाएगी।
क्यों AI एजेंट्स बदल देंगे पूरा खेल
AI की अगली बड़ी लहर AI असिस्टेंट नहीं, बल्कि AI एजेंट्स होंगे। असिस्टेंट सवालों के जवाब देते हैं। एजेंट्स काम पूरा करते हैं। आज उपभोक्ता AI से पूछते हैं कि क्या खरीदना चाहिए। कल वे AI से कह सकते हैं कि वह उनकी ओर से खरीदारी भी कर दे। कल्पना कीजिए कि कोई AI एजेंट कीमतों की तुलना कर रहा है, रिव्यू पढ़ रहा है, उत्पाद चुन रहा है और उपभोक्ता की तरफ से खरीदारी भी पूरी कर रहा है। यह ब्रैंड्स के लिए एक नई चुनौती पैदा करेगा।
क्या होगा जब अगला ग्राहक कोई इंसान नहीं, बल्कि उसकी ओर से काम करने वाला AI एजेंट होगा? पारंपरिक विज्ञापन लोगों को प्रभावित करने के लिए बनाए गए थे। लेकिन आने वाले दशक में ब्रैंड्स को इंसानों के साथ-साथ उनके लिए काम करने वाले डिजिटल एजेंट्स को भी प्रभावित करना होगा।
मीडिया के लिए इसका क्या मतलब है?
हर तकनीकी बदलाव नए गेटकीपर्स पैदा करता है। एक समय टीवी नेटवर्क गेटकीपर थे। फिर सर्च इंजन आए। उसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने यह भूमिका निभाई। अब AI असिस्टेंट और AI एजेंट्स अगली पीढ़ी के गेटकीपर बन सकते हैं।
पब्लिशर्स के लिए चुनौती साफ है- कम क्लिक्स और बदलते ट्रैफिक पैटर्न। लेकिन अवसर भी उतना ही बड़ा है।
जब इंटरनेट सिंथेटिक कंटेंट से भरता जा रहा है, तब ओरिजिनल रिपोर्टिंग, विशेषज्ञ विश्लेषण और रिसर्च आधारित कंटेंट की अहमियत बढ़ रही है। भविष्य में जरूरी नहीं कि सबसे ज्यादा कंटेंट बनाने वाले जीतें। जीत उन्हीं की हो सकती है जो सबसे ज्यादा भरोसेमंद कंटेंट तैयार करें। एजेंसियों के लिए भी यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है।
भविष्य की एजेंसी डेटा, टेक्नोलॉजी, क्रिएटिविटी और AI को जोड़कर एकीकृत ग्रोथ सिस्टम तैयार करेगी। एक्जिक्यूशन सस्ता होगा, लेकिन सही निर्णय लेने की क्षमता की कीमत बढ़ेगी।
भारत के लिए अवसर अलग हैं
भारत के लिए AI का अवसर अगला OpenAI बनाने में नहीं हो सकता। बल्कि उन भारतीय समस्याओं का समाधान करने में हो सकता है जहां भाषा, बड़े पैमाने और पहुंच का संगम होता है।
साथ ही AI से जुड़े सबसे बड़े बदलाव केवल चैट इंटरफेस तक सीमित नहीं रहेंगे। वे उन जगहों पर होंगे जहां खोज, खरीदारी और लेनदेन एक-दूसरे से मिलते हैं। मार्केटप्लेस, रिटेल मीडिया नेटवर्क और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अब सिर्फ वितरण चैनल नहीं रह गए हैं, बल्कि निर्णय लेने वाले इंजन बनते जा रहे हैं।
जैसे-जैसे AI इन प्लेटफॉर्म्स में शामिल होगा, सिफारिश और खरीदारी के बीच की दूरी काफी कम हो सकती है। भारत को सफल होने के लिए सिलिकॉन वैली की नकल करने की जरूरत नहीं है। उसे भारतीय समस्याओं का भारतीय पैमाने पर समाधान करना होगा।
एक अलग नजरिया: AI ब्रैंड्स को और मजबूत बनाएगा
AI को लेकर अक्सर यह माना जाता है कि तकनीक ब्रैंड्स की भूमिका को कमजोर कर देगी, लेकिन मेरा मानना है कि इसका उल्टा होगा। जैसे-जैसे AI से तैयार कंटेंट बढ़ेगा, अलग पहचान बनाना और मुश्किल होता जाएगा। उपभोक्ता AI की सिफारिशों पर भरोसा कर सकते हैं, लेकिन अंतिम फैसला लेते समय वे उन्हीं ब्रैंड्स को प्राथमिकता देंगे जिन्हें वे जानते हैं और जिन पर भरोसा करते हैं।
जानकारी से भरी दुनिया में पहचान और विश्वसनीयता सबसे बड़ी ताकत बन जाएंगी। अगले दशक के सबसे मजबूत ब्रैंड वे होंगे जो तकनीकी क्षमता और सांस्कृतिक जुड़ाव, दोनों को साथ लेकर चलेंगे। सिर्फ एक चीज पर्याप्त नहीं होगी। मार्केटिंग लीडर्स को अब क्या करना चाहिए? मार्केटिंग लीडर्स को एक सरल सवाल से शुरुआत करनी चाहिए।
अगर आज कोई उपभोक्ता या उसकी ओर से काम कर रहा AI एजेंट हमारी कैटेगरी के बारे में पूछे, तो क्या हमारे ब्रैंड का नाम जवाब में आता है? अधिकांश कंपनियों को इसका जवाब नहीं पता और यही सबसे बड़ी चुनौती है।
कंपनियों को ग्राहकों के साथ सीधे संबंध मजबूत करने होंगे, फर्स्ट-पार्टी डेटा क्षमताओं को बढ़ाना होगा और मार्केटिंग, एनालिटिक्स, टेक्नोलॉजी तथा कस्टमर एक्सपीरियंस के बीच मौजूद दीवारों को तोड़ना होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ब्रैंड बिल्डिंग में निवेश जारी रखना होगा।
FAANG युग ने उन ब्रैंड्स को पुरस्कृत किया जो लोगों का ध्यान आकर्षित करना जानते थे। MANGOS युग उन ब्रैंड्स को पुरस्कृत करेगा जो लोगों और AI दोनों की सिफारिश हासिल कर सकेंगे,क्योंकि AI द्वारा संचालित फैसलों के इस दौर में सिर्फ दिखना काफी नहीं होगा। ब्रैंड्स को चुना जाना भी जरूरी होगा।
सरकार से जुड़े एक अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि MeitY ऐसा ढांचा तैयार करना चाहता है, जिससे सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर समान प्रकार के फीचर्स एक जैसे नियमों के तहत संचालित हों।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) भारत में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए एक समान नियामकीय मानक (Common Regulatory Framework) तैयार करने पर काम कर रहा है। इस बीच सरकार व्हाट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम (Username) फीचर को लेकर अपनी आपत्तियां भी बनाए हुए है। यह जानकारी हिंदुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) की एक रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय का मानना है कि व्हाट्सऐप (WhatsApp) पर यूजरनेम फीचर लागू होने से प्रतिरूपण (Impersonation), तथाकथित डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) और ऑनलाइन धोखाधड़ी (Online Fraud) जैसे मामलों का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही इससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) के लिए जांच करना भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, MeitY द्वारा जारी नोटिस के जवाब में व्हाट्सऐप (WhatsApp) और टेलीग्राम (Telegram) दोनों ने अपने-अपने उत्तर मंत्रालय को सौंप दिए हैं। इन जवाबों में कंपनियों ने यूजरनेम फीचर में शामिल सुरक्षा उपायों (Safeguards) की जानकारी दी है।
वर्तमान में व्हाट्सऐप (WhatsApp), टेलीग्राम (Telegram), सिग्नल (Signal) और अरट्टई (Arattai) सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 (Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021) के तहत इंटरमीडियरी (Intermediary) के रूप में कार्य करते हैं।
गूगल ने Google Marketing Live 2026 में जेमिनी आधारित कई नए AI विज्ञापन और मार्केटिंग टूल्स लॉन्च किए हैं। इनमें Search, YouTube, Google Ads के लिए नए फीचर्स शामिल हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गूगल (Google) ने Google Marketing Live 2026 के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) आधारित विज्ञापन और मार्केटिंग टूल्स की नई श्रृंखला पेश की है। कंपनी ने जेमिनी (Gemini) की क्षमताओं का विस्तार करते हुए Search, YouTube, Google Ads और Merchant Center के लिए कई नए फीचर्स, एड फॉर्मेट्स और कैंपेन मैनेजमेंट टूल्स लॉन्च किए हैं।
गूगल इंडिया (Google India) की मैनेजिंग डायरेक्टर, कनेक्टेड कंज्यूमर कॉमर्स (Connected Consumer Commerce) रोमा दत्ता चोबे (Roma Datta Chobey) ने कहा कि ऑनलाइन भारतीयों में सर्वेक्षण के अनुसार 86 प्रतिशत लोग Google Search और YouTube का उपयोग करते हैं। ऐसे में भारतीय व्यवसायों के लिए ग्राहकों तक पहुंचने का बड़ा अवसर है और जेमिनी (Gemini) इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि जेमिनी (Gemini) अब केवल मार्केटिंग ऑटोमेशन (Marketing Automation) तक सीमित नहीं है, बल्कि मार्केटिंग इंटेलिजेंस (Marketing Intelligence) को गति देने वाला इंजन बन चुका है। इससे एजेंटिक एरा (Agentic Era) की शुरुआत होगी, जहां AI व्यवसायों के लिए रणनीतिक विकास साझेदार की भूमिका निभाएगा।
कंपनी ने भारत के लिए बीटा (Beta) चरण में 'बिजनेस एजेंट फॉर लीड्स' (Business Agent for Leads) फीचर भी पेश किया है। इसके जरिए Search Ads में उपयोगकर्ता AI आधारित ब्रांड एजेंट के साथ सीधे बातचीत कर सकेंगे। गूगल (Google) के अनुसार, अपग्रेड (upGrad) इस फीचर का परीक्षण अपने लीड जनरेशन (Lead Generation) अभियान में कर रहा है।
गूगल (Google) ने भारत में विकसित YouTube BrandStack भी लॉन्च किया है। यह कैंपेन प्लानिंग, मीडिया बाइंग और परफॉर्मेंस मेजरमेंट (Campaign Planning, Buying & Measurement) के लिए एक नया समाधान है। एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस (Axis Max Life Insurance) इस उत्पाद का उपयोग करने वाले शुरुआती ब्रांड्स में शामिल है।
इसके अलावा कंपनी ने YouTube Affiliate Partnerships Boost नामक नया विज्ञापन प्रारूप पेश किया है, जिसके जरिए ब्रांड्स क्रिएटर्स (Creators) के कंटेंट को सीधे अपने विज्ञापन अभियानों में शामिल कर सकेंगे।
गूगल (Google) ने AI Max for Shopping, AI Brief for Search Campaigns, Performance Max में Retention Only Mode, Demand Gen की विस्तारित क्षमताएं और AI की मदद से विज्ञापन सामग्री तैयार करने के लिए Asset Studio में भी कई नए अपडेट की घोषणा की।
तालोद फूड्स ने वैभव पटेल (Vaibhav Patel) को हेड – ब्रांडिंग एवं कम्युनिकेशन नियुक्त किया है। इससे पहले वह टेक्सपिन बेयरिंग्स (Texspin Bearings) में मैनेजर – ब्रांडिंग, कम्युनिकेशन एवं पीआर थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
तालोद फूड्स (Talod Foods) ने वैभव पटेल (Vaibhav Patel) को हेड – ब्रांडिंग एवं कम्युनिकेशन (Head – Branding & Communication) नियुक्त किया है। कंपनी ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के माध्यम से उनकी नियुक्ति की घोषणा की।
अपने पोस्ट में कंपनी ने कहा, "वैभव पटेल (Vaibhav Patel), तालोद फूड्स (Talod Foods) में हेड – ब्रांडिंग एवं कम्युनिकेशन के रूप में आपका स्वागत है। हमें विश्वास है कि आपका अनुभव, नई सोच और रणनीतिक दृष्टिकोण तालोद ब्रांड को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।"
नई भूमिका में वैभव पटेल (Vaibhav Patel) कंपनी की ब्रांडिंग, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन और ब्रांड रणनीति से जुड़े कार्यों का नेतृत्व करेंगे। तालोद फूड्स (Talod Foods) से पहले वैभव पटेल (Vaibhav Patel) टेक्सपिन बेयरिंग्स (Texspin Bearings) में मैनेजर – ब्रांडिंग, कम्युनिकेशन एवं पीआर (Manager – Branding, Communication & PR) के पद पर कार्यरत थे।
भारत में AI प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन विज्ञापन बाजार अभी शुरुआती चरण में है। आने वाले समय में क्लिक नहीं, बल्कि AI Citation और भरोसा ब्रांड्स की नई पहचान बनेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन AI आधारित विज्ञापन बाजार अभी शुरुआती दौर में है। दिलचस्प बात यह है कि जिस प्लेटफॉर्म पर भारतीय उपयोगकर्ता सबसे अधिक समय बिता रहे हैं, वहां फिलहाल विज्ञापन देने की सुविधा ही उपलब्ध नहीं है। दूसरी ओर, कम उपयोग वाले प्लेटफॉर्म पहले ही विज्ञापन से कमाई शुरू कर चुके हैं। यही वजह है कि भारत में AI उपयोग और AI विज्ञापन बाजार के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
कॉमस्कोर (Comscore) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में डेस्कटॉप पर AI विजिटेशन अवधि का 86% और मोबाइल पर 83% हिस्सा ओपनएआई (OpenAI) के प्लेटफॉर्म के पास है। इसके मुकाबले गूगल जेमिनी (Google Gemini) की हिस्सेदारी डेस्कटॉप पर केवल 4% और मोबाइल पर 9% है। माइक्रोसॉफ्ट कोपायलट (Microsoft Copilot), एंथ्रोपिक (Anthropic), परप्लेक्सिटी (Perplexity), डीपसीक (DeepSeek) और मेटा एआई (Meta AI) बाकी हिस्सेदारी साझा करते हैं। सबसे अधिक AI उपयोग 18 से 24 वर्ष के युवा कर रहे हैं, जो बातचीत, इमेज और वीडियो तैयार करने जैसे कार्यों के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं।
हालांकि उपयोगकर्ताओं का इतना बड़ा आधार होने के बावजूद ओपनएआई के पास भारत में अभी ऐसा कोई विज्ञापन प्लेटफॉर्म नहीं है, जहां ब्रांड सीधे विज्ञापन खरीद सकें। कॉमस्कोर एपीएसी के कंट्री मैनेजर विवेक जायसवाल का कहना है कि भारत में AI अभी प्रत्यक्ष विज्ञापन माध्यम नहीं बना है, लेकिन यह भविष्य के डिजिटल विज्ञापन की दिशा जरूर तय कर रहा है। फिलहाल पूरा उद्योग यह समझने में लगा है कि AI पर उपयोगकर्ताओं की मंशा (Intent) को विज्ञापन अवसरों में कैसे बदला जाए।
दूसरी ओर, डब्ल्यूपीपी मीडिया (WPP Media) का अनुमान है कि भारत का AI आधारित विज्ञापन बाजार 2026 में 2.5 अरब डॉलर से अधिक का हो जाएगा। फिलहाल इसका सबसे बड़ा लाभ गूगल को मिल रहा है, क्योंकि उसके AI Overviews पहले से ही सर्च इंजन के साथ जुड़े हुए हैं और उसकी विज्ञापन प्रणाली सक्रिय है। यानी फिलहाल विज्ञापन का पैसा उसी प्लेटफॉर्म तक पहुंच रहा है, जिसके पास विज्ञापन इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है, भले ही उसके पास सबसे अधिक AI उपयोगकर्ता न हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI युग में अब केवल क्लिक या सर्च रैंकिंग महत्वपूर्ण नहीं रहेगी, बल्कि AI द्वारा दिए जाने वाले उत्तरों में किसी ब्रांड या वेबसाइट का उल्लेख (Citation) होना नई प्रतिस्पर्धा का आधार बन रहा है। कॉमस्कोर के अध्ययन में मनोरंजन श्रेणी में विकिपीडिया (Wikipedia), यूट्यूब (YouTube), रिटेल में अमेजन (Amazon), फ्लिपकार्ट (Flipkart) और वित्तीय सेवाओं में क्लियरटैक्स (ClearTax) जैसे प्लेटफॉर्म AI उत्तरों में सबसे अधिक उद्धृत किए जा रहे हैं।
इप्सोस (Ipsos) की विशेषज्ञ शालिनी सिन्हा का मानना है कि AI को नए विज्ञापन चैनल के बजाय मौजूदा मार्केटिंग रणनीति को मजबूत करने वाले उपकरण के रूप में देखना चाहिए। उनके अनुसार भारतीय उपभोक्ता केवल AI की सिफारिशों के आधार पर खरीदारी नहीं करते, बल्कि वे भरोसेमंद और पहचान वाले ब्रांडों को प्राथमिकता देते हैं। इसलिए ब्रांड निर्माण, विश्वसनीयता और उपभोक्ता विश्वास की भूमिका आगे भी उतनी ही महत्वपूर्ण रहेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में AI विज्ञापन पारिस्थितिकी तंत्र अभी विकसित हो रहा है। आने वाले समय में यह प्रतिस्पर्धा केवल विज्ञापन दिखाने की नहीं होगी, बल्कि AI के उत्तरों में जगह बनाने और उपभोक्ताओं के विश्वास को हासिल करने की होगी। यही तय करेगा कि भविष्य में भारत के डिजिटल विज्ञापन बाजार का सबसे बड़ा हिस्सा किसके पास जाएगा।
व्हाट्सएप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर मेटा (Meta) के प्रतिनिधियों ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों से मुलाकात की।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
व्हाट्सएप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर (Username Feature) को लेकर केंद्र सरकार और मेटा (Meta) के बीच चर्चा तेज हो गई है। गुरुवार को मेटा (Meta) के प्रतिनिधियों ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) के अधिकारियों से मुलाकात की। यह बैठक सरकार द्वारा कंपनी को नोटिस जारी किए जाने के एक दिन बाद हुई।
पीटीआई (PTI) के हवाले से सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय ने मेटा (Meta) को तलब कर यूजरनेम फीचर (Username Feature) और उससे जुड़ी संभावित सुरक्षा चुनौतियों पर स्पष्टीकरण मांगा। बैठक के दौरान अधिकारियों ने विस्तार से बताया कि यदि पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना यह फीचर लागू किया जाता है, तो इसका दुरुपयोग साइबर अपराधी कर सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, मेटा (Meta) को तीन दिनों के भीतर विस्तृत लिखित जवाब देने के लिए कहा गया है और कंपनी निर्धारित समयसीमा के भीतर अपना औपचारिक उत्तर सौंपेगी।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने बुधवार को मेटा (Meta) को नोटिस जारी कर निर्देश दिया था कि भारत में व्हाट्सएप (WhatsApp) का यूजरनेम फीचर फिलहाल लॉन्च न किया जाए। सरकार ने कहा था कि जब तक इस विषय पर परामर्श प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती और सरकार संतुष्ट नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर का रोलआउट रोक कर रखा जाए।
सरकार का कहना है कि यदि व्हाट्सएप (WhatsApp) यूजर्स को मोबाइल नंबर के बजाय यूजरनेम के जरिए जोड़ने की सुविधा देता है, तो इससे ऑनलाइन फ्रॉड (Online Fraud), फिशिंग (Phishing), डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) और फर्जी पहचान (Impersonation) के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है।
नोटिस में सरकार ने मेटा (Meta) से यह भी पूछा है कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act) और उससे जुड़े इंटरमीडियरी नियमों (Intermediary Rules) के तहत कंपनी के खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। सरकार का मानना है कि यह फीचर पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना साइबर अपराध (Cybercrime) के जोखिम को बढ़ा सकता है।
सरकार ने यह भी याद दिलाया कि एक महत्वपूर्ण सोशल मीडिया इंटरमीडियरी (Significant Social Media Intermediary) के रूप में व्हाट्सएप (WhatsApp) पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act) के तहत निर्धारित ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) दायित्व लागू होते हैं। इनमें यूजर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करना और प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकने के लिए उचित कदम उठाना शामिल है।
माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) अगले सप्ताह नई छंटनी का ऐलान कर सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी 2.5% से कम एंप्लॉयीज की नौकरी खत्म करने की तैयारी में है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) एक बार फिर एंप्लॉयीज की छंटनी (Layoffs) की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अपने कुल एंप्लॉयीज के 2.5 प्रतिशत से कम हिस्से की नौकरी खत्म कर सकती है।
हालांकि यह प्रतिशत कम है, लेकिन माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) के वैश्विक कर्मचारी आधार को देखते हुए इससे हजारों एंप्लॉयीज प्रभावित हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि कंपनी अगले सप्ताह तक इस फैसले का आधिकारिक ऐलान कर सकती है। फिलहाल माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) ने इन रिपोर्ट्स की पुष्टि नहीं की है।
रॉयटर्स (Reuters) की रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून तक माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) के पास दुनिया भर में करीब 2 लाख 28 हजार फुल-टाइम (Full-time) कर्मचारी थे। यदि कंपनी 2.5 प्रतिशत से कम कर्मचारियों की भी छंटनी करती है, तो हजारों लोगों की नौकरी जा सकती है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कुल कितने कर्मचारियों को निकाला जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की अलग-अलग बिजनेस यूनिट्स (Business Units) के कर्मचारी इस फैसले की चपेट में आ सकते हैं।
बताया जा रहा है कि इस बार सबसे ज्यादा असर सेल्स (Sales) और कंसल्टिंग (Consulting) डिवीजन पर देखने को मिल सकता है। इन विभागों में कई पद समाप्त किए जा सकते हैं। कंपनी अपने खर्च को कम करने और कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी के तहत कर्मचारियों की संख्या घटाने की योजना बनाई जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) का गेमिंग कारोबार एक्सबॉक्स (Xbox) भी इस छंटनी से अछूता नहीं रहेगा। एक्सबॉक्स (Xbox) टीम में भी कर्मचारियों की संख्या कम किए जाने की संभावना है। इससे पहले भी खबरें आई थीं कि कंपनी गेमिंग बिजनेस में लागत कम करने के लिए मार्केटिंग बजट (Marketing Budget) और अन्य खर्चों में कटौती कर रही है। हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) ने कई देशों में एक्सबॉक्स (Xbox) कंसोल की कीमतें भी बढ़ाई थीं।
यह पहली बार नहीं है जब माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) एंप्लॉयीज की संख्या कम करने जा रही है। जुलाई 2025 में कंपनी ने अपने वैश्विक एंप्लॉयीज में करीब 4 प्रतिशत की कटौती का ऐलान किया था।
टेलीग्राम (Telegram) ने भारत में अपना मैसेज एडिट फीचर दोबारा शुरू कर दिया है। NEET-UG पुनर्परीक्षा के दौरान गलत सूचना रोकने के लिए इस सुविधा पर अस्थायी रोक लगाई गई थी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
टेलीग्राम (Telegram) ने भारत में अपने मैसेज एडिट फीचर (Message Edit Feature) को फिर से बहाल कर दिया है। यह सुविधा 30 जून को समाप्त हुई उस अस्थायी अवधि के बाद दोबारा शुरू की गई है, जिसके तहत NEET-UG पुनर्परीक्षा (Re-examination) के दौरान गलत सूचना (Misinformation) के प्रसार को रोकने के लिए मैसेज एडिट करने पर रोक लगाई गई थी।
टेलीग्राम (Telegram) ने 16 जून को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (National Testing Agency-NTA) के अनुरोध पर मैसेज एडिट फीचर को बंद कर दिया था। इससे पहले NEET-UG परीक्षा पेपर लीक (Paper Leak) विवाद के बाद यह कदम उठाया गया था। हालांकि 22 जून को टेलीग्राम (Telegram) की सेवाएं बहाल कर दी गई थीं, लेकिन कंपनी को 30 जून तक मैसेज एडिट फीचर बंद रखने के निर्देश दिए गए थे।
सरकार का मानना था कि मैसेज एडिट फीचर का दुरुपयोग कर पुराने संदेशों में बदलाव करके यह गलत दावा किया जा सकता है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र (Question Paper) लीक हुआ था। पुराने पोस्ट में बदलाव रोककर फर्जी सबूत (Fake Evidence) और भ्रामक दावों के प्रसार को सीमित करने की कोशिश की गई।
अब प्रतिबंध अवधि समाप्त होने के बाद भारत में टेलीग्राम (Telegram) यूजर्स पहले की तरह अपने चैट्स (Chats) में संदेशों को एडिट कर सकेंगे। इस अस्थायी प्रतिबंध को न्यायिक समर्थन भी मिला था।
23 जून को दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने केंद्र सरकार के फैसले को उचित ठहराते हुए कहा था कि टेलीग्राम (Telegram) जैसे प्लेटफॉर्म पर बड़ी मात्रा में कंटेंट तेजी से प्रसारित किया जा सकता है और पुनर्परीक्षा के दौरान इसका दुरुपयोग कर लीक सामग्री या गलत जानकारी फैलाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
यह मामला इस बात का उदाहरण भी है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (Digital Platforms) की सुविधाओं को बनाए रखने और महत्वपूर्ण सार्वजनिक परीक्षाओं को गलत सूचना से सुरक्षित रखने के बीच संतुलन बनाना सरकारों के लिए लगातार बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
पर्यटन मंत्रालय (Ministry of Tourism) ने गूगल इंडिया (Google India) के साथ MoU पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे भारत के डिजिटल टूरिज्म इकोसिस्टम और पर्यटन प्रचार को नई मजबूती मिलेगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पर्यटन मंत्रालय (Ministry of Tourism) ने भारत के डिजिटल टूरिज्म (Digital Tourism) इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए गूगल इंडिया (Google India) के साथ एक समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding-MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह किसी वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी (Global Technology Company) के साथ उसकी पहली व्यापक साझेदारी है।
इस साझेदारी का उद्देश्य पर्यटन विकास से जुड़ी मंत्रालय की योजनाओं को गूगल (Google) की तकनीक, डेटा इनसाइट्स (Data Insights) और डिजिटल एंगेजमेंट (Digital Engagement) विशेषज्ञता के साथ जोड़ना है, ताकि यात्रियों के लिए भारत के विभिन्न पर्यटन स्थलों की खोज, यात्रा योजना और अनुभव को बेहतर बनाया जा सके।
समझौते को तीन प्रमुख स्तंभों में विभाजित किया गया है। पहला स्तंभ ट्रैवल इनसाइट्स (Travel Insights) पर आधारित है, जिसके तहत गूगल (Google) ऐसे डैशबोर्ड उपलब्ध कराएगा जो वैश्विक यात्रा मांग (Global Travel Demand) और उभरते पर्यटन रुझानों (Tourism Trends) की जानकारी देंगे। इससे मंत्रालय बदलती यात्रियों की पसंद के अनुसार तेजी से डेटा-आधारित निर्णय ले सकेगा।
दूसरा स्तंभ डिजिटल डिस्कवरी (Digital Discovery) पर केंद्रित है। इसके तहत इनक्रेडिबल इंडिया (Incredible India) ऐप में गूगल मैप्स (Google Maps) के साथ बेहतर इंटीग्रेशन (Integration) की संभावनाओं पर काम किया जाएगा, जिससे यात्रियों को नेविगेशन (Navigation) और पर्यटन स्थलों की जानकारी अधिक सहज तरीके से मिल सके।
साथ ही यूट्यूब (YouTube) के माध्यम से भारत से जुड़े प्रामाणिक यात्रा कंटेंट (Travel Content) का निर्माण और वैश्विक स्तर पर प्रसार किया जाएगा, जिससे इनक्रेडिबल इंडिया (Incredible India) चैनल की पहुंच बढ़ाई जा सके।
तीसरा स्तंभ क्षमता निर्माण (Capacity Building) से जुड़ा है। गूगल (Google) मंत्रालय के अधिकारियों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों के लिए डिजिटल मार्केटिंग (Digital Marketing) और कैंपेन मैनेजमेंट (Campaign Management) पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा, ताकि भारत के पर्यटन प्रचार को डिजिटल माध्यमों पर और प्रभावी बनाया जा सके।
सरकार का मानना है कि तकनीक, डेटा और डिजिटल स्टोरीटेलिंग (Digital Storytelling) के बेहतर उपयोग से भारत का पर्यटन इकोसिस्टम बदलती वैश्विक यात्रा प्रवृत्तियों के अनुरूप अधिक सक्षम और प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।
गूगल इंडिया (Google India) ने रुक्मिणी वैष (Rukmini Vaish) को हेड -कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स नियुक्त किया है। वह AI आधारित डिवाइस इकोसिस्टम से जुड़ी साझेदारियों और विकास का नेतृत्व करेंगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गूगल इंडिया (Google India) ने रुक्मिणी वैष (Rukmini Vaish) को हेड – कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स (Head – Consumer Electronics) नियुक्त किया है। वह कंपनी के कंज्यूमर डिवाइस (Consumer Devices) इकोसिस्टम से जुड़ी साझेदारियों और कारोबार के विस्तार का नेतृत्व करेंगी, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) तेजी से हार्डवेयर अनुभव का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।
इससे पहले वह चार वर्षों से अधिक समय तक गूगल (Google) के लार्ज कस्टमर सॉल्यूशंस (Large Customer Solutions) बिजनेस में इंडस्ट्री मैनेजर (Industry Manager) के रूप में कार्यरत थीं। इस दौरान उन्होंने कंज्यूमर टेक्नोलॉजी (Consumer Technology) और रिटेल (Retail) सेक्टर से जुड़े ब्रांड्स के साथ डिजिटल रणनीतियों और प्रीमियमाइजेशन (Premiumisation) पहलों पर काम किया।
अपनी नई जिम्मेदारी पर रुक्मिणी वैष (Rukmini Vaish) ने कहा कि स्मार्टफोन (Smartphones) और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स (Consumer Electronics) उद्योग तेजी से बदल रहा है और हार्डवेयर अब उपभोक्ताओं के लिए AI का प्रमुख माध्यम बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह गूगल (Google) की मौजूदा साझेदारियों को आगे बढ़ाने और ब्रांड्स को तकनीकी बदलाव के अगले चरण में सहयोग देने के लिए उत्साहित हैं।
गूगल (Google) से पहले रुक्मिणी वैष (Rukmini Vaish) वर्ष 2022 तक ग्रोहे (GROHE) में हेड – ब्रांड एंड डिजिटल (Head of Brand & Digital) के पद पर कार्यरत थीं। वहां उन्होंने ब्रांडिंग, मार्केटिंग कम्युनिकेशन (Marketing Communications) और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (Direct-to-Consumer) पहलों का नेतृत्व किया।
उन्होंने हॉस्पिटैलिटी (Hospitality) वेंचर ट्रैवलफोक (TravelFolk) की स्थापना भी की और पालतू जानवरों के अनुकूल यात्रा प्लेटफॉर्म कॉलरफोक (CollarFolk) की सह-संस्थापक (Co-founder) भी रहीं। अपने करियर के शुरुआती वर्षों में उन्होंने एक्जो नोबेल इंडिया (AkzoNobel India) के डुलक्स पेंट्स (Dulux Paints) ब्रांड और वोडाफोन इंडिया (Vodafone India) में भी विभिन्न मार्केटिंग भूमिकाओं में काम किया।
एमेजॉन (Amazon) ने 2026 से 2030 के बीच भारत में 48 अरब डॉलर निवेश करने की घोषणा की है। कंपनी AI, क्लाउड, AWS, ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करेगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एमेजॉन (Amazon) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी जेसी (Andy Jassy) ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने भारत के प्रति कंपनी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता दोहराते हुए वर्ष 2026 से 2030 के बीच देश में 48 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की।
कंपनी ने बताया कि इस निवेश के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए 2030 तक अतिरिक्त 13 अरब डॉलर निवेश किए जाएंगे। इसके साथ ही 2026-2030 की अवधि में भारत में AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर अमेजन (Amazon) का कुल नियोजित निवेश 21 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा।
एमेजॉन के अनुसार, यह निवेश 'अमेजन वेब सर्विसेज' (Amazon Web Services-AWS) के मुंबई (Mumbai) और हैदराबाद (Hyderabad) स्थित डेटा सेंटरों की क्षमता बढ़ाने में किया जाएगा। इससे स्टार्टअप्स, उद्यमों और सरकारी संस्थाओं को कस्टम AI चिप्स, मैनेज्ड AI सर्विसेज, क्लाउड टेक्नोलॉजी और डेवलपर टूल्स तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी।
कंपनी ने यह भी कहा कि AI और क्लाउड के अलावा वह अपने ई-कॉमर्स (E-commerce) और क्विक कॉमर्स (Quick Commerce) कारोबार को मजबूत करने के लिए भी बड़े पैमाने पर निवेश जारी रखेगी।
इसी योजना के तहत एमेजॉन इस वर्ष देशभर में 20 से अधिक नए फुलफिलमेंट सेंटर (Fulfilment Centres) और 100 से ज्यादा लास्ट-माइल डिलीवरी स्टेशन (Last-Mile Delivery Stations) शुरू करेगा। कंपनी का लक्ष्य विशेष रूप से टियर-3 और टियर-4 शहरों में अपनी डिलीवरी क्षमता और नेटवर्क को मजबूत करना है।
कंपनी का मानना है कि यह निवेश भारत के डिजिटल इकोसिस्टम, AI नवाचार, क्लाउड सेवाओं और ई-कॉमर्स इंफ्रास्ट्रक्चर को गति देने के साथ-साथ रोजगार और कारोबारी अवसरों को भी बढ़ावा देगा।