भाजपा के IT हेड अमित मालवीय के ट्वीट पर क्यों भड़क गए सचिन पायलट? जानिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1966 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा मिजोरम में भारतीय वायुसेना का उपयोग करने के फैसले की आलोचना की थी।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 17 August, 2023
Last Modified:
Thursday, 17 August, 2023
Sachin and Amit


कांग्रेस विधायक सचिन पायलट ने भाजपा के आईटी हेड अमित मालवीय द्वारा 13 अगस्त को किए गए एक ट्वीट को झूठा करार दिया है। दरअसल अमित मालवीय ने एक ट्वीट में लिखा, 'राजेश पायलट और सुरेश कलमाड़ी भारतीय वायुसेना के उन विमानों को उड़ा रहे थे, जिन्होंने 5 मार्च 1966 को मिजोरम की राजधानी आइज़वाल पर बम गिराये। बाद में दोनों कांग्रेस के टिकट पर सांसद और सरकार में मंत्री भी बने। स्पष्ट है कि नार्थ ईस्ट में अपने ही लोगों पर हवाई हमला करने वालों को इंदिरा गांधी ने बतौर इनाम राजनीति में जगह दी, सम्मान दिया।'

इसके जवाब में सचिन पायलट ने इस ट्वीट के जवाब में उत्तर देते हुए लिखा, 'आपके पास गलत तारीखें और तथ्य हैं। हां, भारतीय वायुसेना के पायलट के रूप में मेरे दिवंगत पिता ने बम गिराए थे। मगर वो बम 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान पर गिराए थे। उन्होंने मिजोरम पर बम नहीं गिराया, जैसा आप दावा कर रहे हैं।' सचिन ने आगे लिखा, 'मेरे पिता को 29 अक्टूबर 1966 को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था।'

सचिन पायलट ने एक सर्टिफिकेट भी शेयर किया है। उस सर्टिफिकेट के मुतबाकि राजेश पायलट को 29 अक्टूबर 1966 को भारतीय वायु सेना में नियुक्त किया गया था और अमित मालवीय जिस घटना का जिक्र कर रहे हैं, वो मार्च की है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 1966 में मिजोरम में भारतीय वायुसेना का उपयोग करने के फैसले की आलोचना की थी।

 

 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

महाराष्ट्र की राजनीति में केवल स्थायी हित होते हैं : राजदीप सरदेसाई

भाजपा 137 और शिवसेना 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। यह समझौता राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है क्योंकि सीटों के इस बंटवारे से महायुति में भाजपा का प्रभुत्व साफ़ दिख रहा है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 31 December, 2025
Last Modified:
Wednesday, 31 December, 2025
rajdeepsardesai

मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव 2026 की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं और सियासी हलचल तेज़ हो गई है। महाराष्ट्र की बृहन्मुंबई नगर निगम के 227 वार्डों पर चुनाव 15 जनवरी 2026 को होंगे और 16 जनवरी को नतीजे आएँगे, जिससे लंबे समय के बाद शहर में सत्ता की दिशा तय होगी।

इस बीच वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई का कहना है कि महाराष्ट्र जैसा राज्य शायद ही कोई हो, जहाँ गठबंधन इतनी तेजी से बदलते हों। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट कर लिखा, पवार परिवार जैसा उदाहरण भी राजनीति में कम ही मिलता है। लोकसभा और विधानसभा में एनसीपी (शरद पवार गुट) कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के साथ है, जबकि एनसीपी (अजित पवार गुट) एनडीए के साथ खड़ी है।

लेकिन पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के नगर निगम चुनावों में पवार परिवार एक साथ आकर भाजपा और कांग्रेस-शिवसेना दोनों के खिलाफ चुनाव लड़ने जा रहा है। मुंबई में कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ रही है, जबकि पुणे में वह शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के साथ गठबंधन कर रही है। भाजपा भी कहीं अकेले तो कहीं गठबंधन में चुनाव लड़ रही है। यही राजनीति की पुरानी सच्चाई है।

यहाँ न कोई स्थायी दोस्त होता है, न स्थायी दुश्मन, केवल स्थायी हित होते हैं। आपको बता दें, महायुति के घटक भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना (शिंदे गुट) ने सीट शेयरिंग फाइनल कर ली है—भाजपा 137 और शिवसेना 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। यह समझौता राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है क्योंकि सीटों के इस बंटवारे से महायुति में भाजपा का प्रभुत्व साफ़ दिख रहा है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

घुसपैठ राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल : डॉ. सुधांशु त्रिवेदी

उन्होंने कहा कि सीमा पर कंटीली बाड़ लगाने के लिए राज्य सरकार द्वारा ज़मीन नहीं दी जा रही है, जिसकी वजह से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) अपना कार्य प्रभावी ढंग से नहीं कर पा रहा है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 31 December, 2025
Last Modified:
Wednesday, 31 December, 2025
sudhanshutrivedi

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठ को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में संदिग्ध घुसपैठ की बढ़ती घटनाओं को लेकर ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि असम, त्रिपुरा, राजस्थान, पंजाब, कश्मीर और गुजरात की सीमाओं पर घुसपैठ रुक गई है, लेकिन पश्चिम बंगाल में यह क्यों नहीं रुकती है।

इस मुद्दे पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद डॉक्टर सुधांशु त्रिवेदी ने एक टीवी डिबेट में अपनी बात कही। उन्होंने कहा, घुसपैठ कोई चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल है। अगर किसी को इसमें समस्या नहीं दिखती, तो उसे यूरोप के हालात देखने चाहिए, जहाँ सुरक्षा कारणों से कई शहरों में इस बार क्रिसमस तक के कार्यक्रम स्थगित करने पड़े।

गृह मंत्री का सीधा सवाल है कि घुसपैठ असम और त्रिपुरा में ही क्यों रुक जाती है, पंजाब, राजस्थान और गुजरात में क्यों नहीं होती। हकीकत यह है कि घुसपैठिया पहले सीमावर्ती गांव में आता है तो क्या गांव, ग्राम पंचायत, पटवारी, थाना और तहसील में किसी को इसकी भनक तक नहीं लगती?

इसका मतलब साफ है: या तो सरकार सोई हुई और अक्षम है, या फिर वह इतनी घुसपैठिया-परस्त हो चुकी है कि अपनी जीत उन्हीं के सहारे देख रही है। आपको बता दें, गृह मंत्री शाह ने आरोप लगाया कि बंगाल में घुसपैठियों को संरक्षण दिया जा रहा है और यह चुनावी फ़ायदे के लिए किया जा रहा है, जिससे जनसांख्यिकी में बदलाव हो रहा है।

उन्होंने कहा कि सीमा पर कंटीली बाड़ लगाने के लिए राज्य सरकार द्वारा ज़मीन नहीं दी जा रही है, जिसकी वजह से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) अपना कार्य प्रभावी ढंग से नहीं कर पा रहा है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

डिजिटल आज़ादी का मतलब अराजकता नहीं : राणा यशवंत

आईटी अधिनियम और आईटी नियम, 2021 की याद दिलाकर सरकार ने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया कंपनियां कानून से ऊपर नहीं हैं। डिजिटल आज़ादी का मतलब डिजिटल अराजकता नहीं हो सकता।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 31 December, 2025
Last Modified:
Wednesday, 31 December, 2025
ranayashwant

केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को अश्लील, अभद्र और विशेष रूप से बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसे किसी भी गैरकानूनी कंटेंट को प्लेटफॉर्म पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स से एक पोस्ट की और अपनी राय दी।

उन्होंने लिखा, केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को अश्लील, अभद्र और बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री हटाने की कड़ी चेतावनी दी है और आदेश न मानने पर कानूनी कार्रवाई की बात कही है। यह चेतावनी समय की सबसे बड़ी ज़रूरत है, क्योंकि आज सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर नग्नता, अश्लीलता और अभद्रता खुलेआम परोसी जा रही है।

जिस कंटेंट को कभी “सॉफ्ट पोर्न” कहा जाता था, वह अब बिना रोक-टोक रील, शॉर्ट्स और पोस्ट के रूप में आम लोग बना और फैला रहे हैं। एल्गोरिदम ऐसे कंटेंट को बढ़ावा दे रहे हैं और प्लेटफॉर्म्स मूकदर्शक बने हुए हैं। ऐसे माहौल में सरकार का सख्त रुख देर से सही, लेकिन बिल्कुल जरूरी कदम है।

आज देश में अधिकांश लोगों, खासकर बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन है और ऐसे कंटेंट का उनके मन पर पड़ने वाला असर गंभीर है। कम उम्र में अश्लील सामग्री देखने से बच्चों की सोच विकृत हो रही है, रिश्तों को देखने का नजरिया बदल रहा है और समाज में असंवेदनशीलता बढ़ रही है।

यह केवल नैतिकता नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक संतुलन और भविष्य की पीढ़ी का सवाल है। आईटी अधिनियम और आईटी नियम, 2021 की याद दिलाकर सरकार ने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया कंपनियां कानून से ऊपर नहीं हैं। डिजिटल आज़ादी का मतलब डिजिटल अराजकता नहीं हो सकता।

अगर अभी लगाम नहीं लगी, तो आने वाली पीढ़ियां इसका खामियाज़ा भुगतेंगी। आपको बता दें, मंत्रालय के अनुसार, कई मामलों में कंपनियां लापरवाही बरत रही हैं, जो कानून का उल्लंघन है। चेतावनी में यह भी कहा गया है कि यदि नियमों का पालन नहीं किया गया तो सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ आईटी अधिनियम और अन्य आपराधिक कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

न्यायिक प्रणाली की वर्तमान स्थिति चिंताजनक: भूपेंद्र चौबे

23 दिसंबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी उम्रकैद की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें जमानत दी थी, लेकिन इसके खिलाफ सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और इसे चुनौती दी।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 30 December, 2025
Last Modified:
Tuesday, 30 December, 2025
bhupendrachaube

सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप मामले में दोषी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली जमानत/रिहाई के आदेश पर रोक लगा दी है, ताकि वह जेल से बाहर न निकल सके। इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार भूपेंद्र चौबे ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से एक पोस्ट की और अपनी राय व्यक्त की।

उन्होंने पोस्ट कर लिखा, कुलदीप सिंह सेंगर को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा दी गई रिहाई के आदेश पर जब सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है, तो यह सवाल भी गंभीरता से उठता है कि हमारी उच्च अदालतों की स्थिति आखिर क्या हो गई है। ट्रायल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक, बार-बार दिए जा रहे फैसले सुप्रीम कोर्ट द्वारा पलटे जा रहे हैं।

सेंगर मामले में भारी जनआक्रोश ने शायद शीर्ष अदालत को तुरंत हस्तक्षेप के लिए मजबूर किया, लेकिन असली और बुनियादी सवाल यह है कि आज देशभर के हाईकोर्ट की बेंचों पर आखिर कौन लोग बैठे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट की कभी शानदार साख हुआ करती थी, लेकिन पहले जस्टिस वर्मा प्रकरण, उससे पहले जस्टिस कांत ट्रांसफर मामला और अब यह चर्चित केस, इन सबने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

इस मामले में सिर्फ एक सुनवाई में ही सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। कई राजनीतिक रूप से संवेदनशील ज़मानत मामलों में दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला करने के बजाय मामला सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ दिया है, जबकि सेंगर केस में उलटा हुआ। हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट को रोकना पड़ा।

यह स्थिति न्यायिक प्रणाली पर गहरी चिंता पैदा करती है। आपको बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि यह मामला कानूनी रूप से गहन विचार का है। इस दौरान कोर्ट ने सेंगर की दूसरी सजा और हिरासत की परिस्थितियों पर भी ध्यान दिया है, और अगली सुनवाई बाद में होगी।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

उत्तराखंड में 24 साल के छात्र की हत्या निंदनीय: रजत शर्मा

इस हमले के बाद पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक आरोपी नेपाल भाग गया है और उसकी तलाश जारी है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 30 December, 2025
Last Modified:
Tuesday, 30 December, 2025
rajatsharma

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में त्रिपुरा के 24 वर्षीय छात्र एंजेल चकमा की हत्या हो गई। एंजेल पर 9 दिसंबर 2025 को देहरादून के सेलाकुई इलाके में नस्लीय टिप्पणियों का विरोध करने के बाद हमला किया गया था। इस पूरे मामले पर वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा का कहना है कि हेट क्राइम्स को अलग-थलग घटनाएँ कहकर टालना गलत होगा।

उन्होंने अपने एक्स हैंडल से एक पोस्ट कर लिखा, उत्तराखंड में 24 साल के छात्र की पीट-पीटकर हत्या, तमिलनाडु में 34 साल के महाराष्ट्र के प्रवासी मज़दूर की गला काटकर हत्या ये घटनाएँ समाज के चेहरे पर ऐसे बदनुमा दाग हैं जिन्हें मिटने में सालों लगेंगे। यह सोचना भी मुश्किल था कि साल इतनी शर्मनाक घटनाओं के साथ खत्म होगा।

साल के आख़िरी महीने में ही ऐसी चार घटनाएँ सामने आईं जो बेहद निंदनीय हैं। त्रिपुरा और तिरुवल्लुर में हत्यारे नशे में थे, इसी महीने ओडिशा में दो प्रवासी मज़दूरों की लिंचिंग हुई, और केरल में 31 साल के युवक को बांग्लादेशी बताकर मार दिया गया। इन सभी मामलों में सोशल मीडिया पर रील्स डाली गईं और अपराध करने वालों के दिमाग में नफरत का ज़हर भरा हुआ था।

नफरत फैलाने वाले सोशल मीडिया के ख़तरनाक प्रोपेगेंडा को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। इन हेट क्राइम्स को अलग-थलग घटनाएँ कहकर टालना गलत होगा। अगर राज्य सरकारें राजनीति से ऊपर उठकर इन्हें गंभीरता से नहीं लेंगी और अपने राज्यों में आए लोगों को सुरक्षा नहीं देंगी, तो ये ज़ख़्म और गहरे होते चले जाएंगे।

आपको बता दें, इस हमले के बाद पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक आरोपी नेपाल भाग गया है और उसकी तलाश जारी है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन प्रारंभिक जांच में नस्लीय कारणों पर स्पष्ट निष्कर्ष नहीं बताया गया है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

देवभूमि की बेटी होने के नाते बहुत दुखी और शर्मिंदा: मीनाक्षी कंडवाल

देवभूमि की पहचान तो हमेशा से अतिथि-सत्कार, अपनापन, प्रेम और मिलजुलकर रहने की संस्कृति रही है। यही मूल्य हमारी रगों में बसे रहे हैं। लेकिन एंजेल पर हुआ हमला हमें सामूहिक रूप से शर्मसार करता है।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 29 December, 2025
Last Modified:
Monday, 29 December, 2025
AngelChakmadeath,

उत्तराखंड के देहरादून (सेलाकुई) में नस्लीय टिप्पणी पर हुई हिंसक झड़प में त्रिपुरा के 21 वर्षीय छात्र एंजेल चकमा गंभीर रूप से घायल हो गए। एंजेल ने इलाज के बाद 26 दिसंबर को दम तोड़ा। इस मामले पर पत्रकार और एंकर मीनाक्षी कंडवाल ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स से एक पोस्ट की और कहा कि आज वो दुखी और शर्मिंदा महसूस कर रही है।

उन्होंने लिखा, उत्तराखंड और देवभूमि की बेटी होने के नाते आज मन बेहद आहत है। भीतर एक गहरा दुख भी है और शर्म का एहसास भी। त्रिपुरा से आए एक छात्र के साथ मेरे राज्य में जो कुछ हुआ, वह किसी भी हाल में माफ़ किए जाने लायक नहीं है। देवभूमि की पहचान तो हमेशा से अतिथि-सत्कार, अपनापन, प्रेम और मिलजुलकर रहने की संस्कृति रही है।

यही मूल्य हमारी रगों में बसे रहे हैं। लेकिन एंजेल पर हुआ हमला हमें सामूहिक रूप से शर्मसार करता है। ऐसे अपराध में शामिल दोषियों को ऐसी सख्त सज़ा मिलनी चाहिए, जो आने वाले समय के लिए एक मिसाल बने। पहाड़ में अपराध, खासकर नफ़रत से उपजा अपराध, आखिर बढ़ कहां से रहा है? यह किन सामाजिक, प्रशासनिक और नैतिक विफलताओं का नतीजा है? जिस पहाड़ को कभी शांति, सहअस्तित्व और भरोसे की मिसाल माना जाता था, वहां यह ज़हर कैसे फैलता चला गया?

अंकिता केस में एक के बाद एक परतें खुल रही हैं, लेकिन उसके साथ जो रहस्यमयी खामोशी जुड़ी हुई है, वह बहुत कुछ कहती है। यह चुप्पी कहीं न कहीं अपराधियों को सत्ता का संरक्षण मिलने का संकेत तो नहीं दे रही? अगर ऐसा है, तो यह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल है।

पहाड़ की बेलगाम लूट-खसोट ने आज हालात यहां तक पहुंचा दिए हैं कि हमारी परंपराएं और मूल्य-व्यवस्था लगभग ढह चुकी हैं। मिनी दिल्ली बनाने की होड़, मिनी पार्टी प्लेस की संस्कृति, रिसॉर्ट इकॉनमी के नाम पर पहाड़ों को ऐशगाह में बदलने की सोच, अगर इन सब पर अब भी लगाम नहीं लगी, तो फिर कुछ भी नहीं बचेगा।

वैसे भी, आज सच पूछिए तो बचाने को आखिर बचा ही क्या है? उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड आखिर क्या बन पाया? क्या हम वही राज्य बन सके, जिसका सपना देखा गया था? या फिर उत्तराखंड में गहराता लीडरशिप क्राइसिस ही इस देवभूमि को धीरे-धीरे भीतर से खोखला करता चला गया?

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

हर्षा भोगले की इस पोस्ट पर बोले भूपेंद्र चौबे: दोहरा रवैया ज्यादा खटकता है

यह सोचकर ही डर लगता है कि अगर ऐसा ही कुछ किसी टेस्ट मैच में वानखेड़े या विशाखापट्टनम में हुआ होता तो क्या होता। तब भारतीय पिचों की खराब हालत पर ज़बरदस्त हंगामा मच जाता।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 27 December, 2025
Last Modified:
Saturday, 27 December, 2025
bhupendra

मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड की पिच पर बॉक्सिंग डे टेस्ट के पहले ही दिन 20 विकेट गिरे। ऑस्ट्रेलिया पहली पारी में 152 पर सिमटी तो इंग्लैंड की टीम 110 रन पर सिमट गई। इसके साथ ही पिच की आलोचना भी तेज हो गई है। भारतीय क्रिकेट कमेंटेटर और पत्रकार हर्षा भोगले ने एक पोस्ट में लिखा कि खेल को परखने के लिए आप चाहे कोई भी पैमाना अपनाएँ, टेस्ट मैच के पहले ही दिन दोनों टीमों का ऑलआउट हो जाना क्रिकेट के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता।

उनकी इस पोस्ट पर पत्रकार भूपेंद्र चौबे ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, यह सोचकर ही डर लगता है कि अगर ऐसा ही कुछ किसी टेस्ट मैच में वानखेड़े या विशाखापट्टनम में हुआ होता तो क्या होता। तब भारतीय पिचों की खराब हालत पर ज़बरदस्त हंगामा मच जाता। ग्राउंड्समैन को जमकर निशाना बनाया जाता और कहा जाता कि भारत जानबूझकर अनुचित और एकतरफा पिचें बनाता है।

तरह-तरह के आरोप लगाए जाते। लेकिन जब यही हाल ऑस्ट्रेलिया के भव्य और प्रतिष्ठित मैदानों में देखने को मिलता है, तो हम पिच की आलोचना करने के बजाय टेस्ट क्रिकेट की गुणवत्ता पर अफ़सोस जताने लगते हैं। यही दोहरा रवैया सबसे ज़्यादा खटकता है। आपको बता दें, मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड की पिच पर आखिरी बार किसी एशेज टेस्ट के पहले ही दिन 20 या उससे ज्यादा विकेट 1901-02 में गिरे थे। तब टेस्ट के पहले दिन 25 विकेट गिरे थे।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

अरावली पर सरकार ने पैदा किया भ्रम: संकेत उपाध्याय

यह निर्देश इसलिए भी अहम है क्योंकि अरावली पर्वत की नई परिभाषा के बाद केंद्र पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि उसमें यह परिभाषा इसलिए बनाई है कि अरावली के बड़े हिस्से में खनन की अनुमति दी जा सके।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 27 December, 2025
Last Modified:
Saturday, 27 December, 2025
sanketupadhyay

अरावली पर्वतमाला को लेकर खड़े हुए विवाद के बीच केंद्र सरकार ने अरावली रेंज में नया खनन पट्टा देने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार नई नीति के तहत अरावली के संरक्षण और खनन के लिए नए क्षेत्रों की पहचान नहीं हो जाती है तब तब यह प्रतिबंध लागू रहेगा।

इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार संकेत उपाध्याय ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल से एक पोस्ट कर अपनी राय व्यक्त की है। उन्होंने एक्स पर लिखा, अरावली को लेकर स्थिति ‘स्पष्ट’ करने के नाम पर सरकार ने पहाड़ियों की ऊँचाई मापने की परिभाषा में और ज़्यादा भ्रम पैदा कर दिया है। बात को आसान रखिए।

साफ़ बताइए कि कितनी पहाड़ियाँ संरक्षित रहेंगी और कितनी नहीं। क्षेत्रों को स्पष्ट रूप से चिन्हित कीजिए। साफ़ और सीधी भाषा में बात कीजिए, उलझी हुई पीआर इंटरव्यू से काम नहीं चलेगा। आपको बता दें, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के मुख्य सचिवों को इस बारे में पत्र लिखा है।

मंत्रालय का यह निर्देश इसलिए भी अहम है क्योंकि अरावली पर्वत की नई परिभाषा के बाद केंद्र पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि उसमें यह परिभाषा इसलिए बनाई है कि अरावली के बड़े हिस्से में खनन की अनुमति दी जा सके।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

कुलदीप सिंह सेंगर मामला उतना सरल नहीं: अवधेश कुमार

अभी कुलदीप सेंगर जेल के बाहर नहीं आ पाएँगे। उन्हें इस बलात्‍कार केस से जुड़े एक और मामले में सज़ा मिली हुई है। साल 2020 में उन्हें सर्वाइवर के पिता की हत्या के आरोप में 10 साल की सज़ा हुई थी।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 26 December, 2025
Last Modified:
Friday, 26 December, 2025
avdheshkumar

दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार 23 दिसंबर को पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सज़ा निलंबित करते हुए उन्हें ज़मानत दे दी। एक नाबालिग़ लड़की के साथ बलात्कार के मामले में साल 2019 में कुलदीप सेंगर को उम्र क़ैद की सज़ा हुई थी। उत्तर प्रदेश के उन्नाव में साल 2017 की यह घटना देश भर में सुर्खियों में रही थी।

बलात्‍कार के ख़‍िलाफ़ आवाज उठाने वाली वह लड़की, उनकी माँ, कई सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ विपक्ष के नेताओं ने इस फ़ैसले का विरोध किया है। इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार ने एक टीवी डिबेट में अपनी राय दी। उन्होंने कहा, कुलदीप सिंह सेंगर को हाईकोर्ट से ज़मानत मिली है और इस मामले की पैरवी सीबीआई कर रही है।

यह मानना मुश्किल है कि सीबीआई किसी पूर्व विधायक को बलात्कार जैसे गंभीर मामले में बचाने के लिए काम करेगी और हाईकोर्ट भी उसका साथ देगा। इस पूरे मामले में सरकार की कोई सीधी भूमिका दिखाई नहीं देती। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या हम दरअसल हाईकोर्ट के फैसले का विरोध कर रहे हैं?

यह मुद्दा उतना सरल नहीं है, जितना पहली नज़र में लगता है, और इसे भावनाओं के बजाय कानूनी प्रक्रिया और तथ्यों के आधार पर समझने की ज़रूरत है। आपको बता दें, अभी कुलदीप सेंगर जेल के बाहर नहीं आ पाएँगे। उन्हें इस बलात्‍कार केस से जुड़े एक और मामले में सज़ा मिली हुई है।

साल 2020 में उन्हें सर्वाइवर के पिता की हत्या के आरोप में 10 साल की सज़ा हुई थी। हालांकि, ग़ौर करने वाली बात है कि इस मामले में भी कुलदीप सेंगर ने सज़ा को निलंबित करने की अर्जी दिल्ली हाई कोर्ट में डाली थी। 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने ये अर्जी ख़ारिज कर दी थी।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

एनडीटीवी राइजिंग राजस्थान कॉन्क्लेव में बोले CM: अरावली से नहीं होगी छेड़छाड़

एनडीटीवी राइजिंग राजस्थान कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अरावली संरक्षण, पेपर लीक पर सख्ती, जल परियोजनाओं और विरासत–विकास के संतुलन को लेकर राज्य सरकार की नीतियों को स्पष्ट किया।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 26 December, 2025
Last Modified:
Friday, 26 December, 2025
rajasthancm

झुंझुनूं जिले के ऐतिहासिक नगर मंडावा में आयोजित एनडीटीवी राजस्थान कॉन्क्लेव ‘राइजिंग राजस्थान: विकास भी, विरासत भी’ में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य सरकार के दो वर्षों की उपलब्धियों का विस्तृत खाका पेश किया। उन्होंने साफ कहा कि अरावली पर्वतमाला के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं होने दी जाएगी और पर्यावरण संरक्षण से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने अरावली को राजस्थान की जीवनरेखा बताते हुए कहा कि यह केवल पहाड़ों की श्रृंखला नहीं, बल्कि जल संतुलन और पर्यावरण सुरक्षा का आधार है। पेपर लीक के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले राजनीतिक संरक्षण में संगठित तरीके से पेपर लीक होते थे।

उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के चलते 200 से अधिक परीक्षाएं निष्पक्ष रूप से संपन्न कराई गई हैं और 300 से ज्यादा आरोपियों को जेल भेजा गया है। जल संकट को राज्य की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट के तहत हजारों करोड़ रुपये के काम शुरू हो चुके हैं, जिससे पेयजल और सिंचाई की समस्या का दीर्घकालिक समाधान होगा।

शेखावाटी क्षेत्र तक यमुना जल लाने की योजना को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। कॉन्क्लेव में उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने नई फिल्म पर्यटन नीति का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि राजस्थान की किलों, हवेलियों और सांस्कृतिक धरोहरों को फिल्म पर्यटन से जोड़कर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे।

साथ ही, हेरिटेज लाइब्रेरी की स्थापना और हवेलियों को संरक्षित कर यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की दिशा में काम जारी है। कार्यक्रम में मंत्रियों ने ऊर्जा, सामाजिक न्याय, खाद्य सुरक्षा और कानून व्यवस्था में सरकार की उपलब्धियों को भी साझा किया और अरावली संरक्षण को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए