दुनियाभर में सरकारें इस बात को लेकर सख्त हो रही हैं कि कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया से दूर रहें या उसका इस्तेमाल सीमित करें।
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Vikas Saxena
सोशल मीडिया आज की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन अब यही प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए चिंता का कारण भी बनता जा रहा है। दुनियाभर में सरकारें इस बात को लेकर सख्त हो रही हैं कि कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया से दूर रहें या उसका इस्तेमाल सीमित करें। इसी कड़ी में अब भारत के कुछ राज्य भी तेजी से कदम उठा रहे हैं और नए नियमों की तैयारी कर रहे हैं।
सबसे बड़ा और सख्त कदम ऑस्ट्रेलिया ने उठाया है, जिसने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले ने भारत समेत कई देशों में नई बहस को जन्म दे दिया है। इस कानून के तहत TikTok, YouTube, Instagram और Facebook जैसे प्लेटफॉर्म्स पर 16 साल से कम उम्र के बच्चों का अकाउंट बनाना या इस्तेमाल करना बैन कर दिया गया है। नियम तोड़ने पर कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। यह फैसला बच्चों की मानसिक सेहत, ऑनलाइन सुरक्षा और बढ़ती स्क्रीन टाइम की समस्या को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
भारत में भी कोशिशें तेज
भारत में भी इस मुद्दे पर अब तेजी से चर्चा हो रही है। खासकर कर्नाटक ने इस दिशा में पहला बड़ा कदम उठाते हुए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने का फैसला किया है। बेंगलुरु जैसे टेक हब वाले इस राज्य का यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में डिजिटल यूजर्स रहते हैं।
इसके अलावा आंध्र प्रदेश भी इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है और एक बड़ा कानून लाने की तैयारी में है। राज्य सरकार 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर सख्त पाबंदी लगाने की योजना बना रही है। इसके साथ ही 13 से 16 साल के बच्चों के लिए “सेफ मोड” वाला सिस्टम लागू करने पर विचार हो रहा है, ताकि उन्हें सीमित और सुरक्षित डिजिटल एक्सेस मिल सके।
आंध्र प्रदेश का नया मॉडल: डिजिलॉकर से उम्र की जांच
आंध्र प्रदेश सरकार इस नए सिस्टम में डिजिलॉकर के साथ “एज टोकन” तकनीक जोड़ने की योजना बना रही है। इसके जरिए यूजर्स की असली उम्र की पुष्टि की जा सकेगी, जिससे फर्जी अकाउंट, प्राइवेसी ब्रीच और बच्चों तक हानिकारक कंटेंट पहुंचने के खतरे को कम किया जा सके। इस पहल का नेतृत्व राज्य के आईटी और एजुकेशन मंत्री नारा लोकेश कर रहे हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया कंपनियों के साथ बैठक भी की है।
सरकार का कहना है कि यह कानून बच्चों की सुरक्षा, उनकी क्रिएटिविटी और मानसिक स्वास्थ्य—इन तीनों को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा। साथ ही, स्कूलों में डिजिटल सेफ्टी से जुड़े पाठ भी शामिल किए जाएंगे, ताकि बच्चों और अभिभावकों को जागरूक किया जा सके।
भारत में गोवा भी ऐसे ही नियमों पर विचार कर रहा है। वहीं केंद्र सरकार स्तर पर भी इस मुद्दे पर चिंता जताई जा चुकी है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को “प्रिडेटरी” बताया था, यानी ऐसे प्लेटफॉर्म जो यूजर्स को लंबे समय तक स्क्रीन पर बांधे रखते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई, नींद और मानसिक विकास प्रभावित होता है।
वैश्विक स्तर पर सख्त होते नियम
अगर वैश्विक तस्वीर देखें तो कई देश इस दिशा में तेजी से कदम उठा रहे हैं। ऑस्ट्रिया 14 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की तैयारी में है। फ्रांस ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर रोक लगाने वाला बिल पास किया है, हालांकि अंतिम मंजूरी अभी बाकी है। डेनमार्क, स्पेन और सिंगापुर भी सख्त नियमों पर काम कर रहे हैं।
ग्रीस ने तो 2027 से 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने का ऐलान कर दिया है। वहीं इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे एशियाई देश भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के अकाउंट सीमित करने या बंद करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
दूसरी तरफ चीन ने अलग मॉडल अपनाया है, जहां “माइनर मोड” के जरिए बच्चों के स्क्रीन टाइम को कंट्रोल किया जाता है। इसमें उम्र के हिसाब से ऐप्स और डिवाइस पर समय सीमा तय की जाती है। जर्मनी और इटली जैसे देशों में बच्चों के लिए पैरेंटल कंसेंट जरूरी है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ यही उपाय काफी नहीं है।
ब्राजील ने इस समस्या से निपटने के लिए सोशल मीडिया अकाउंट को माता-पिता से लिंक करना अनिवार्य किया है और एडिक्टिव फीचर्स पर भी रोक लगाई है। वहीं ब्रिटेन 300 परिवारों के साथ सोशल मीडिया बैन, कर्फ्यू और टाइम लिमिट जैसे प्रयोग कर रहा है, ताकि इसके असर को समझा जा सके।
बच्चों की सुरक्षा क्यों बन रही बड़ी चिंता
सोशल मीडिया पर पाबंदी या सीमाएं लगाने की सबसे बड़ी वजह बच्चों की मानसिक सेहत और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता है। कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि छोटे बच्चों में सोशल मीडिया के कारण एंग्जायटी, डिप्रेशन और साइबर बुलिंग के मामले बढ़ रहे हैं। “इन्फिनिट स्क्रॉल” जैसे फीचर्स बच्चों को लंबे समय तक स्क्रीन पर बांधे रखते हैं, जिससे उनकी नींद और पढ़ाई प्रभावित होती है।
टेक कंपनियों की बात करें तो TikTok, Facebook और Snapchat जैसी कंपनियां कहती हैं कि उनके प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाने की न्यूनतम उम्र 13 साल है। लेकिन कई देशों के आंकड़े बताते हैं कि इससे कम उम्र के बच्चे भी बड़ी संख्या में इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे नियमों की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं।
आगे क्या? भारत में बन सकते हैं सख्त नियम
भारत में फिलहाल कोई राष्ट्रीय स्तर का कानून नहीं है, लेकिन जिस तरह से राज्यों ने पहल शुरू कर दी है और नई तकनीकों जैसे डिजिलॉकर आधारित एज वेरिफिकेशन पर काम हो रहा है, उससे साफ है कि आने वाले समय में यहां भी सख्त नियम लागू हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, दुनिया अब इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है कि बच्चों के लिए डिजिटल दुनिया को सुरक्षित बनाया जाए। भारत भी इस वैश्विक ट्रेंड से अछूता नहीं है। अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि तकनीक के फायदे और बच्चों की सुरक्षा के बीच सही संतुलन कैसे बनाया जाए।
मलेशिया ने बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए नए नियम लागू किए हैं। अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए हानिकारक कंटेंट रोकने की व्यवस्था करनी होगी।
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Samachar4media Bureau
बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मलेशिया ने बड़ा कदम उठाया है। देश में एक जून से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया कंपनियों के लिए नए और सख्त नियम लागू कर दिए गए हैं। इन नियमों का उद्देश्य बच्चों तक हानिकारक कंटेंट की पहुंच रोकना और इंटरनेट को उनके लिए सुरक्षित बनाना है।
मलेशियन कम्युनिकेशंस एंड मल्टीमीडिया कमीशन (Malaysian Communications and Multimedia Commission - MCMC) ने घोषणा की है कि अब ऑनलाइन सेवा प्रदाताओं को अपनी सेवाओं में कई बड़े बदलाव करने होंगे। नए नियमों के तहत कंपनियों को ऐसे सुरक्षा फीचर्स लागू करने होंगे, जो 16 साल से कम उम्र के बच्चों के अकाउंट रजिस्ट्रेशन और उपयोग को सीमित कर सकें।
सरकार ने प्लेटफॉर्म्स को हाई-रिस्क फीचर्स पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था लागू करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके तहत बच्चों के लिए हानिकारक कंटेंट को तेजी से हटाने या उस पर रोक लगाने की जिम्मेदारी कंपनियों की होगी। नए नियमों में प्रभावी रिपोर्टिंग सिस्टम, तेज प्रतिक्रिया तंत्र और विज्ञापनदाताओं की वेरिफिकेशन प्रक्रिया को भी अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा एआई या एडिटेड मैनिपुलेटेड कंटेंट को लेबल करना भी जरूरी होगा।
मलेशिया सरकार जल्द ही एज वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करने की तैयारी में है, जिससे प्लेटफॉर्म्स यूजर्स की वास्तविक उम्र की पहचान कर सकेंगे। इससे नाबालिग यूजर्स तक हानिकारक सामग्री पहुंचने से रोकने में मदद मिलेगी।
हवास मीडिया नेटवर्क इंडिया ने अविनाश तिवारी को 'Managing Partner' पद पर प्रमोट किया है। इससे पहले वह कंपनी में 'Head of Digital Services, North' की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
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हवास मीडिया नेटवर्क इंडिया ने अविनाश तिवारी को प्रमोट करते हुए मैनेजिंग पार्टनर नियुक्त किया है। अविनाश ने इस नई जिम्मेदारी की जानकारी लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए साझा की। प्रमोशन से पहले अविनाश तिवारी कंपनी में Head of Digital Services, North के पद पर कार्यरत थे। इस भूमिका में वह उत्तरी क्षेत्र के लिए डिजिटल स्ट्रेटेजी और सर्विसेज की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
मार्केटिंग और एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री में अविनाश तिवारी को लंबा अनुभव हासिल है। उन्हें डिजिटल स्ट्रेटेजी, मीडिया प्लानिंग एंड बाइंग, कैंपेन एग्जीक्यूशन, SEO और एड टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स में विशेषज्ञता हासिल है। उन्होंने DoubleClick जैसे एड टेक प्लेटफॉर्म्स के साथ भी व्यापक स्तर पर काम किया है। इसके अलावा वह टीम मेंटरिंग और डिजिटल ग्रोथ स्ट्रेटेजी के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
हवास मीडिया नेटवर्क इंडिया से पहले अविनाश तिवारी डेंट्सू (Dentsu), ओम्निकॉम मीडिया ग्रुप (Omnicom Media Group) और क्रिसेंट ग्रुप (Crescent Group) जैसी कंपनियों के साथ भी काम कर चुके हैं।
रस्क मीडिया (Rusk Media) ने जलज कुकरेजा (Jalaj Kukreja) को General Manager- Brand Partnerships and IP Integrations नियुक्त किया है।उन्हें 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
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रस्क मीडिया (Rusk Media) ने जलज कुकरेजा (Jalaj Kukreja) को General Manager – Brand Partnerships and IP Integrations नियुक्त किया है। मीडिया सेल्स, ब्रांड पार्टनरशिप और एडवरटाइजिंग स्ट्रेटेजी में एक दशक से अधिक अनुभव रखने वाले जलज अब कंपनी की नई जिम्मेदारियां संभालेंगे।
रस्क मीडिया (Rusk Media) से पहले जलज कुकरेजा (Jalaj Kukreja) Mygate में कार्यरत थे, जहां वह Deputy General Manager के पद पर अपनी भूमिका निभा रहे थे। इससे पहले उन्होंने सात वर्षों से अधिक समय तक टाइम्स ग्रुप (The Times Group) के साथ काम किया। इस दौरान उन्होंने प्रिंट, डिजिटल, टेलीविजन, रेडियो और आउट-ऑफ-होम प्लेटफॉर्म्स पर कई बड़े ब्रांड्स के लिए इंटीग्रेटेड मीडिया कैंपेन और रणनीतियों को संभाला।
जलज कुकरेजा (Jalaj Kukreja) अपने करियर के शुरुआती दौर में इंफो एज इंडिया लिमिटेड (Info Edge India Ltd.) और अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड (Earth Infrastructures Ltd.) जैसी कंपनियों के साथ भी काम कर चुके हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में ब्रांड पार्टनरशिप और बिजनेस ग्रोथ रणनीतियों में उनके अनुभव को देखते हुए माना जा रहा है कि वह रस्क मीडिया (Rusk Media) के ब्रांड इंटीग्रेशन और स्ट्रैटेजिक कोलैबोरेशन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी के प्राइम टाइम शो ‘Decode With Sudhir Chaudhary’ ने एक साल पूरा कर लिया है। शो को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अब तक 1.4 बिलियन व्यूज मिल चुके हैं।
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वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी (Sudhir Chaudhary) के प्राइम टाइम शो ‘Decode With Sudhir Chaudhary’ ने अपना एक साल पूरा कर लिया है। इस मौके पर सुधीर चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट साझा करते हुए दर्शकों का आभार जताया।
उन्होंने बताया कि 15 मई 2025 को शुरू हुआ यह न्यूज शो अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर 1.4 बिलियन व्यूज हासिल कर चुका है। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि यह संख्या दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की आबादी के बराबर है।
सुधीर चौधरी ने दर्शकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि लोगों ने ‘Decode’ को सिर्फ एक न्यूज शो नहीं, बल्कि रोज की आदत, चर्चा और एक आंदोलन बना दिया है। उन्होंने लिखा, “एक साल पहले खबरों में एक नया प्रयोग शुरू हुआ था। अब यह केवल शो नहीं, बल्कि लोगों की बातचीत और सोच का हिस्सा बन चुका है।”
शो की पहली वर्षगांठ को खास बनाने के लिए उन्होंने दर्शकों से भी भागीदारी की अपील की। उन्होंने लोगों से कहा कि वे ‘Decode’ से जुड़े अपने अनुभव का छोटा वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा करें। सुधीर चौधरी ने संकेत दिया कि चुनिंदा संदेशों को शो के एनिवर्सरी सेलिब्रेशन में शामिल किया जा सकता है।
‘Decode With Sudhir Chaudhary’ डिजिटल और टीवी न्यूज दर्शकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है। शो अपनी विश्लेषणात्मक शैली और समसामयिक मुद्दों की विस्तृत व्याख्या के लिए जाना जाता है।
One year ago, a new experiment in news began on 15th May,2025 #DecodeWithSudhirChaudhary completes one year with 1.4 BILLION views across digital platforms.
— Sudhir Chaudhary (@sudhirchaudhary) May 14, 2026
That’s equal to the population of the world’s largest democracy - India ??
Thank you for making DECODE not just a show, but… pic.twitter.com/jnSCAq492M
भारतीय सोशल मीडिया कंपनी ShareChat अगले 12 से 18 महीनों में IPO ला सकती है। कंपनी ने कैश फ्लो पॉजिटिव और EBITDA ब्रेकईवन जैसे अहम वित्तीय लक्ष्य हासिल करने का दावा किया है।
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भारतीय सोशल मीडिया कंपनी शेयरचैट (ShareChat) अगले 12 से 18 महीनों में शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है। कंपनी के सह-संस्थापक और CEO अंकुश सचदेवा (Ankush Sachdeva) ने एक बिजनेस न्यूज प्लेटफॉर्म को दिए इंटरव्यू में IPO की योजना की जानकारी दी।
अंकुश सचदेवा के मुताबिक कंपनी अब पूंजी बाजार में जाने के लिए पहले से बेहतर स्थिति में है। उन्होंने कहा कि शेयरचैट ने कैश फ्लो पॉजिटिव और EBITDA ब्रेकईवन जैसे महत्वपूर्ण वित्तीय लक्ष्य हासिल किए हैं, जिससे बिजनेस में स्थिरता और बेहतर अनुमान क्षमता आई है।
उन्होंने कहा, “हमने कई अहम लक्ष्य हासिल किए हैं, जिनमें कैश फ्लो पॉजिटिविटी और EBITDA ब्रेकईवन शामिल हैं। अगले 12-18 महीने हमारे लिए लक्ष्य अवधि है।” रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2022 में फंडिंग राउंड के दौरान कंपनी का वैल्यूएशन करीब 5 बिलियन डॉलर आंका गया था। हालांकि सचदेवा ने कहा कि IPO के समय कंपनी का बाजार मूल्य निवेशकों की धारणा पर निर्भर करेगा।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अप्रैल 2026 कंपनी के लिए ऐतिहासिक महीना साबित हो सकता है। उम्मीद जताई जा रही है कि पहली बार कंपनी EBITDA प्रॉफिटेबिलिटी, नेट प्रॉफिट (PAT) और पॉजिटिव कैश फ्लो एक साथ दर्ज कर सकती है। 2015 में शुरू हुई ShareChat ने क्षेत्रीय भाषाओं के कंटेंट पर फोकस करके तेजी से लोकप्रियता हासिल की। कंपनी के ShareChat और Moj प्लेटफॉर्म्स पर हर महीने करीब 20 करोड़ सक्रिय यूजर्स आते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की सोशल मीडिया कंपनी 'Trump Media & Technology Group' को 2026 की पहली तिमाही में 406 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। इसका बड़ा कारण बिटकॉइन निवेश में गिरावट है।
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल (Truth Social) की पैरेंट कंपनी 'ट्रंप मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप (Trump Media & Technology Group)' को साल 2026 की पहली तिमाही में भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। कंपनी ने जनवरी से मार्च 2026 के बीच करीब 406 मिलियन डॉलर यानी लगभग ₹3,300 करोड़ के घाटे की जानकारी दी है।
कंपनी की फाइनेंशियल फाइलिंग के मुताबिक, इस दौरान उसकी नेट सेल्स में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और कुल रेवेन्यू 8.7 लाख डॉलर से ज्यादा रहा। हालांकि डिजिटल संपत्तियों में हुए भारी नुकसान ने कंपनी की वित्तीय स्थिति को प्रभावित किया।
कंपनी ने बताया कि कुल घाटे में 368 मिलियन डॉलर का “नॉन-कैश” नुकसान शामिल है, जो मुख्य रूप से डिजिटल एसेट्स यानी क्रिप्टोकरेंसी निवेश से जुड़ा है। इसके अलावा 11.5 मिलियन डॉलर का ब्याज खर्च और 11.8 मिलियन डॉलर का स्टॉक-आधारित मुआवजा भी घाटे का हिस्सा रहा।
दरअसल, ट्रंप मीडिया ने 2025 में करीब 3.5 बिलियन डॉलर मूल्य के बिटकॉइन खरीदे थे। उस समय क्रिप्टोकरेंसी बाजार तेजी पर था और कंपनी “बिटकॉइन ट्रेजरी” तैयार करना चाहती थी। लेकिन बाद में बिटकॉइन की कीमतों में भारी गिरावट आई, जिससे कंपनी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।
टीवी पत्रकार मनोज भावुक को पटना में ‘भोजपुरी भाषा शिखर सम्मान’ से सम्मानित किया गया। उन्हें “ग्लोबल भोजपुरी एम्बेसडर” और “भोजपुरी आइकॉन” की उपाधियां भी प्रदान की गईं।
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भोजपुरी भाषा, साहित्य, सिनेमा और मीडिया जगत में उल्लेखनीय योगदान के लिए वरिष्ठ साहित्यकार, फिल्म गीतकार और टीवी पत्रकार मनोज भावुक को ‘भोजपुरी भाषा शिखर सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पटना के ऐतिहासिक बापू सभागार में जी मीडिया (Zee Media) द्वारा आयोजित समारोह में प्रदान किया गया।
इस मौके पर मनोज भावुक को “ग्लोबल भोजपुरी एम्बेसडर” और “भोजपुरी आइकॉन” जैसी प्रतिष्ठित उपाधियों से भी सम्मानित किया गया। सम्मान उन्हें ज़ी बिहार-झारखंड (Zee Bihar-Jharkhand) के संपादक राजकमल चौधरी, ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-Uttarakhand) के संपादक रमेश चंद्रा और भोजपुरी अभिनेता दिनेश लाल निरहुआ ने संयुक्त रूप से प्रदान किया।
सम्मान ग्रहण करते हुए मनोज भावुक ने कहा कि जब साहित्य सिनेमा के साथ चलता है तो सिनेमा और अधिक प्रभावशाली बनता है। उन्होंने भोजपुरी सिनेमा को साहित्य से जोड़ने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि भोजपुरी एक अंतरराष्ट्रीय भाषा है और इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाना चाहिए।
मनोज भावुक लंबे समय से भोजपुरी साहित्य, सिनेमा और पत्रकारिता में सक्रिय हैं। ‘भोजपुरी जंक्शन’ के संपादक के रूप में उन्होंने दुनिया भर के भोजपुरी रचनाकारों को एक मंच पर जोड़ने का काम किया है। भोजपुरी सिनेमा के इतिहास को भोजपुरी भाषा में लिखने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। इससे पहले भी उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। समारोह में राजनीति, मीडिया, साहित्य और संस्कृति जगत की कई हस्तियां मौजूद रहीं।
अपनी पोस्ट में चिंकी सिन्हा का यह भी कहना है, ‘एडिटर आते-जाते रहते हैं, लेकिन शब्द, तस्वीरें, यादें, दोस्ती और साथ खड़े रहने की भावना हमेशा बाकी रहती है।’
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जानी-मानी मैगजीन आउटलुक (Outlook) में एडिटर पद से कुछ दिनों पूर्व ही इस्तीफा देने के बाद चिंकी सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट शेयर की है। इस पोस्ट में उन्होंने लेखकों, कवियों, कलाकारों और सहयोगियों का आभार जताते हुए कहा कि अब वह आउटलुक मैगजीन के साथ नहीं हैं, इसलिए फिलहाल लोग उन्हें अपनी रचनाएं या लेख न भेजें।
चिंकी सिन्हा ने लिखा कि वह अब आउटलुक में एडिटर नहीं हैं और इस वजह से वह किसी भी लेख, कहानी, कविता या रिपोर्ट को स्वीकार या उस पर प्रतिक्रिया नहीं दे पाएंगी। उन्होंने उन तमाम लेखकों और सहयोगियों का विशेष रूप से जिक्र किया, जिन्होंने इस सफर में उनके साथ काम किया। उन्होंने कहा कि हर सुबह लॉग-इन करके नई कहानियां, तस्वीरें और कविताएं देखना उनके लिए बेहद खास अनुभव होता था और उनके भीतर दुनिया के प्रति भरोसा फिर से जगा देता था।
उन्होंने यह भी माना कि कई बार वह सभी लोगों को जवाब नहीं दे पाईं या सभी रचनाओं को प्रकाशित नहीं कर सकीं, लेकिन उनकी टीम ने पूरी कोशिश की। चिंकी सिन्हा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जब उन्होंने वर्ष 2021 में आउटलुक मैगजीन को जॉइन किया था, तब यह जिम्मेदारी काफी चुनौतीपूर्ण लग रही थी। हालांकि समय के साथ उन्हें कई सहयोगी और दोस्त मिले, जिनकी मदद से कठिन दौर में भी टीम ने अपना काम जारी रखा।
उन्होंने अपनी संपादकीय टीम की तारीफ करते हुए कहा कि उनके सहयोगियों में ईमानदारी और संवेदनशीलता थी। उनके मुताबिक, आउटलुक ऐसा मंच बना जहां तय पैटर्न पर चलने के बजाय अपनी अलग राह बनाई गई, खासकर ऐसे समय में जब पत्रकारिता में लगातार समझौते बढ़ते जा रहे हैं।
अपनी पोस्ट में चिंकी सिन्हा ने लिखा, ‘एडिटर आते-जाते रहते हैं, लेकिन शब्द, तस्वीरें, यादें, दोस्ती और साथ खड़े रहने की भावना हमेशा बाकी रहती है।’ चिंकी सिन्हा ने यह भी बताया कि आउटलुक की पिछली टीम के कई सदस्य अब संस्थान छोड़ चुके हैं। इनमें मैनेजिंग एडिटर, फॉरेन अफेयर्स एडिटर, एंटरटेनमेंट और कल्चर एडिटर, सोशल मीडिया लीड समेत कई अन्य लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनकी पुरानी टीम आउटलुक के लिए कोई पिच या लेख स्वीकार नहीं कर पाएगी, हालांकि लोग अपनी सामग्री या लेख नई टीम को भेज सकते हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में चिंकी सिन्हा ने आउटलुक मैगजीन में एडिटर पद से इस्तीफा दे दिया था। वह इस मैगजीन के 26 साल के इतिहास में इस पद तक पहुंचने वाली पहली महिला एडिटर थीं। पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे अनुभव के साथ चिंकी सिन्हा ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। आउटलुक से पहले चिंकी सिन्हा कई बड़े मीडिया संस्थानों के साथ जुड़ी रही हैं।
उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस (The Indian Express) और ओपन मैगजीन (Open magazine) जैसे प्रतिष्ठित पब्लिकेशंस में काम किया है। इसके अलावा उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों जैसे बीबीसी न्यूज (BBC News) और अल जजीरा (Al Jazeera) के लिए भी योगदान दिया है।
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने ‘अतुल माहेश्वरी स्कॉलरशिप’ कार्यक्रम में छात्रों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि आज के युवा सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विषयों को लेकर गंभीर रुचि रखते हैं।
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राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह नई दिल्ली में आयोजित ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ के ‘अतुल माहेश्वरी स्कॉलरशिप’ कार्यक्रम में शामिल हुए। यह आयोजन उनके सरकारी आवासीय परिसर में आयोजित किया गया, जहां विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं के साथ उन्होंने संवाद किया।
हरिवंश ने कहा कि छात्रों से देश के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विषयों पर चर्चा करना उनके लिए यादगार अनुभव रहा। उन्होंने खुशी जताई कि आज की युवा पीढ़ी गंभीर मुद्दों को समझने और उन पर विचार रखने में गहरी रुचि दिखा रही है। कार्यक्रम में ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक विनोद अग्निहोत्री और राष्ट्रीय संपादक इंदु शेखर पंचोली भी मौजूद रहे।
इस स्कॉलरशिप कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड से कुल 46 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया, जिनमें दो दिव्यांग विद्यार्थी भी शामिल थे। हरिवंश जी ने कहा कि इन विद्यार्थियों का चयन कठिन परीक्षा और इंटरव्यू प्रक्रिया के बाद किया गया है। उन्होंने बताया कि पत्रकारिता के दिनों से उनका अतुल माहेश्वरी से व्यक्तिगत संबंध रहा और वे हमेशा नई पीढ़ी में ज्ञान के प्रसार को लेकर गंभीर रहते थे।
उन्होंने ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ की इस पहल को सामाजिक रूप से कमजोर और आर्थिक रूप से पिछड़े विद्यार्थियों के लिए बेहद सार्थक कदम बताया, जो उन्हें आगे की पढ़ाई जारी रखने में मदद कर रहा है।
आदित्य हूरिया Netflix India में Marketing Manager के रूप में जुड़ने जा रहे हैं। वह Films और Series के लिए culture-first कैंपेन पर काम करेंगे और ऑडियंस एंगेजमेंट को मजबूत करेंगे।
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सूत्रों के मुताबिक, आदित्य हूरिया Netflix India में Marketing Manager के रूप में जुड़ने जा रहे हैं। वह Films और Series Marketing टीम का हिस्सा होंगे और culture-first कैंपेन के जरिए कंटेंट को दर्शकों से जोड़ने पर फोकस करेंगे।
इससे पहले आदित्य हूरिया YouTube में Digital Marketing Lead – YouTube Creators India के रूप में कार्यरत थे। उनके पास मीडिया और टेक इंडस्ट्री में एक दशक से अधिक का अनुभव है। अपने करियर में उन्होंने YouTube, Bumble, MTV, Times Network और Foxymoron जैसी कंपनियों के साथ काम किया है, जहां उन्होंने डिजिटल कैंपेन और ब्रांड एंगेजमेंट को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।