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राजदीप सरदेसाई के बारे में नेता ने कही ऐसी बात, भड़क उठे पत्रकार
किसी विषय पर दो लोगों के विचार अलग हो सकते हैं, यह स्वाभाविक है, लेकिन जब बात पत्रकारों की आती है तो यह ‘स्वाभाविक’ एकदम से ‘अस्वाभाविक’ हो जाता है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
किसी एक विषय पर दो लोगों के विचार अलग-अलग हो सकते हैं, यह स्वाभाविक है। लेकिन जब बात पत्रकारों की आती है तो यह ‘स्वाभाविक’ एकदम से ‘अस्वाभाविक’ हो जाता है। लोग यह तक भूल जाते हैं कि पत्रकार भी उनकी तरह इंसान हैं। नागरिकता संशोधन कानून पर फिलहाल कुछ ऐसा ही माहौल है। वरिष्ठ पत्रकार और ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है। वजह महज इतनी है कि उन्होंने डिटेंशन सेंटर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दावे पर सवाल उठाये। हालांकि, उन्होंने राहुल गांधी को भी कठघरे में खड़ा किया, लेकिन मोदी के दावे पर सवाल उठाना अधिकांश लोगों को पसंद नहीं आया।
राजदीप ने अपने ‘माय टेक’ शो में सीएए और एनआरसी को लेकर चल रही राजनीति पर बात की। उन्होंने कहा कि इस सियासत में सत्य पराजित हुआ है। इसके अलावा उन्होंने सीएए को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के संबंध में भी एक ट्वीट किया। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा ‘सीएए विरोधी हर रैली में मैंने तिरंगा और महात्मा गांधी की फोटो देखी, जबकि कानून के समर्थकों की रैली में तिरंगे के साथ-साथ भगवा झंडा भी दिखाई दिया। इस बारे में सोचें।’
At every anti CAA rally, I have spotted only the tricolor and pics of Mahatma Gandhi.. at pro CAA rallies, the saffron flag is seen along with the tricolour.. think about it.. have a good Friday..
— Rajdeep Sardesai (@sardesairajdeep) December 27, 2019
राजदीप ने अपने विचार व्यक्त किये, लेकिन यह कुछ सोशल मीडिया यूजर्स को नागवार गुजरा। भाजपा की नेशनल इनफार्मेशन एंड टेक्नोलॉजी टीम के इंचार्ज अमित मालवीय ने तो राजदीप के खिलाफ ऑनलाइन पोल ही शुरू कर डाला। इस पोल में उन्होंने पूछा कि क्या राजदीप सरदेसाई को आईएसआईएस का पीआर संभालना चाहिए? हालांकि, राजदीप ने मालवीय को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उन्होंने जवाबी ट्वीट में कहा ‘मेरे मित्र, इस बेशर्मी भरे भड़काऊ अभियान को आगे बढ़ाएं। मेरा नया साल का संकल्प शांत रहना है! आपका नववर्ष शांतिपूर्ण और खुशहाल हो।’
My friend, carry on with this brazenly slanderous and incendiary campaign. My new year resolution is to stay calm! Have a peaceful and happy new year.. may spirit of India shine bright!
— Rajdeep Sardesai (@sardesairajdeep) December 27, 2019
वहीं, कई पत्रकारों ने अमित मालवीय को अपने इस असभ्य पोल के लिए आड़े हाथ लिया। ‘न्यूज24’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर मानक गुप्ता ने मालवीय से पूछा,‘राजदीप ने कब आईएसआई या किसी अन्य आतंकी संगठन का समर्थन किया और जब नहीं किया तो फिर ऐसे पोल का क्या औचित्य’?
वरिष्ठ पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने अपने ट्वीट में राजदीप के साथ ही एडिटर गिल्ड को टैग करते हुए लिखा ‘मालवीय को इसके लिए कोर्ट में घसीटा जाना चाहिए।’ इसी तरह ‘न्यूज24’ की एसोसिएट एडिटर साक्षी जोशी ने स्वाति के ट्वीट के जवाब में लिखा ‘और ऐसा तब हुआ जब उन्होंने असम के डिटेंशन सेंटर पर एक शो किया और लगातार भाजपा प्रवक्ता से पूछा कि पीएम झूठ क्यों बोलते हैं’!
‘द हिंदू’ की नेशनल एडिटर सुहासनी हैदर और ‘एनडीवी इंडिया’ के वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर सिंह ने भी राजदीप को निशाना बनाने वालों को निशाना बनाया। उमाशंकर ने पूछा है, ‘अमित मालवीय की मानसिक हालत दयनीय है। उन्हें मानसिक अस्पताल में ले जाने की जरूरत है। सवाल है कि इलाज कहां और कब संभव है?
इस बारे में लोगों का मानना है कि पत्रकारों को भी यह अधिकार है कि वह सरकार के फैसले या किसी अन्य विषय पर अपने विचारों को व्यक्त कर सकते हैं। यदि उनकी सोच या विचार आपकी सोच के विपरीत हैं, तो इसका यह मतलब नहीं कि आप उन्हें जिस भाषा में चाहें जवाब दें। आपके पास भी विरोध का अधिकार है, लेकिन विरोध का तरीका सभ्य और शालीन होना चाहिए।
'माय टेक' में राजदीप सरदेसाई ने सीएए और एनआरसी को लेकर क्या कहा, वह आप यहां इस विडियो में देख सकते हैं-
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