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संसद में मणिपुर पर घमासान, शिवकांत ने कह दी ये बड़ी बात
सरकार को सफाई देनी चाहिए कि वह मणिपुर में हुई बर्बरता को क्यों नहीं रोक पाई।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
मणिपुर हिंसा पर चर्चा को लेकर संसद में घमासान मचा है। मॉनसून सत्र शुरू होने के तीसरे दिन भी विपक्ष ने लोकसभा और राज्यसभा में हंगामा किया है।
मणिपुर पर चर्चा को लेकर विपक्ष पीएम मोदी के बयान की मांग पर अड़ा हुआ है। विपक्ष का कहना है कि पहले पीएम मणिपुर पर बयान दें, फिर चर्चा शुरू होगी। हालांकि, सरकार की तरफ से साफ कर दिया गया है कि मणिपुर पर तो केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ही बोलेंगे।
मणिपुर के इस मसले पर वरिष्ठ पत्रकार शिवकांत ने ट्वीट कर अपनी राय प्रकट की है। उन्होंने लिखा, सरकार को सफाई देनी चाहिए कि वह मणिपुर में हुई बर्बरता को क्यों नहीं रोक पाई। अफीम की खेती रोकने और वन बचाने के लिए वन सर्वेक्षण कराना और मणिपुर के आदिवासी मैतियों को जनजाति का दर्जा देना सही है। पर इनके लिए आम सहमति बनाना भी तो सरकार की ही जिम्मेदारी थी, जिसके बिना यह हाल हुआ है!
अपने एक और ट्वीट में उन्होंने लिखा, कोर्ट के आदेश ने केवल आग में घी का काम किया! असली रोष अफीम की खेती पर रोक लगाने और वन सर्वेक्षण को लेकर था। तस्करों के गिरोह, स्थानीय नेता और मिशनरियां सब मिले हुए हैं। पश्चिमी देश बर्मा, कंबोडिया और लाओस में अफीम की खेती रोकने का पैसा देते हैं जिसके कारण वह मणिपुर में फैली है।
आपको बता दें कि सरकार संसद में अपने जवाब को केवल मणिपुर तक सीमित रखेगी। विपक्षी राज्यों में हो रही हिंसा का जिक्र नहीं होगा। हालांकि, सरकार को लगता है कि विपक्ष अपनी मांग से पीछे नहीं हटेगा। वरिष्ठ पत्रकार शिवकांत के इस ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं-
कोर्ट के आदेश ने केवल आग में घी का काम किया! असली रोष अफ़ीम की खेती पर रोक लगाने और वन सर्वेक्षण को लेकर था! तस्करों के गिरोह, स्थानीय नेता और मिशनरियाँ सब मिले हुए हैं। पश्चिमी देश बर्मा , कंबोडिया और लाओस में अफीम की खेती रोकने का पैसा देते हैं जिसके कारण वह मणिपुर में फैली है।
— Shiv Kant (@shivkant) July 24, 2023
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