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नए कानून के बाद BBC, CNN, ब्लूमबर्ग समेत कई मीडिया कंपनियों ने रूस में रोका कामकाज
रूस के यूक्रेन पर हमले अभी भी जारी हैं। इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फेक न्यूज फैलाने से रोकने के लिए रूस शुक्रवार को नया कानून लेकर आया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
रूस के यूक्रेन पर हमले अभी भी जारी हैं। इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फेक न्यूज फैलाने से रोकने के लिए रूस शुक्रवार को नया कानून लेकर आया है। संसद में पास इस नए कानून के तहत सशस्त्र बलों के खिलाफ जानबूझकर फर्जी खबरें फैलाने पर 15 साल तक जेल की सजा का प्रावधान किया गया है।
वहीं दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फेक न्यूज फैलाने से रोकने के लिए लाए गए रूस के नए कानून को मीडिया की स्वतंत्रता के खिलाफ बताते हुए ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी), कैनेडियन ब्रॉडकास्टिंग कार्पोरेशन (सीबीसी) और अमेरिका स्थित ब्लूमबर्ग न्यूज, सीबीएस न्यूज, एबीसी न्यूज और सीएनएन ने रूस में अपने पत्रकारों का कामकाज अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है।
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक नए कानून पर हस्ताक्षर किया है जिसके बाद सीबीएस न्यूज रूस से बाहर निकलने वाला लेटेस्ट मीडिया आउटलेट बन गया है।
शुक्रवार को, सीबीएस न्यूज के प्रवक्ता ने कहा कि आउटलेट वर्तमान में रूस से प्रसारित नहीं हो रहा था, क्योंकि हम पारित किए गए नए मीडिया कानूनों को देखते हुए अपनी टीम के लिए परिस्थितियों की निगरानी कर रहे हैं।
रूसी अधिकारियों का आरोप है कि अमेरिका व उसके पश्चिमी यूरोपीय सहयोगियों द्वारा रूसी लोगों के बीच झगड़ा कराने और जंग के दौरान रूसी सेना के खिलाफ फेक न्यूज फैलाने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद रूस की संसद में नया कानून पारित किया गया, जिसके बाद ब्लूमबर्ग न्यूज, कैनेडियन ब्रॉडकास्टिंग कार्पोरेशन और बीबीसी ने कहा कि वे वहां अपने पत्रकारों के काम को फिलहाल के लिए निलंबित कर रहे हैं।
बीबीसी ने शुक्रवार को कहा कि रूस के एक नया कानून लाने के बाद उसके पास रूस में अपने पत्रकारों का कामकाज अस्थायी रूप से निलंबित करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।
बीबीसी के महानिदेशक टिम डेवी ने कहा कि यह कानून ‘स्वतंत्र पत्रकारिता की प्रक्रिया का अपराधीकरण करता प्रतीत’ होता है और बीबीसी स्टाफ की सुरक्षा ‘सर्वोपरि’ है। उन्होंने कहा कि रूस में बीबीसी समाचार सेवा रूस के बाहर से काम करना जारी रखेगी।
बीबीसी न्यूज के एक अंतरिम निदेशक जोनाथन मुनरो ने कहा कि बीबीसी रूस से पत्रकारों को बाहर नहीं निकाल रहा है, बल्कि नए कानून के प्रभाव का आकलन कर रहा है।
कैनेडियन ब्रॉडकास्टिंग कार्पोरेशन (सीबीएस) ने कहा कि उसने रूस में ग्राउंड रिपोर्टिंग को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है ताकि वह नए कानून पर स्पष्टता की मांग कर सके।
सीबीसी ने एक बयान में कहा कि वह कानून के बारे में बहुत चिंतित है, जो यूक्रेन और रूस में मौजूदा स्थिति पर स्वतंत्र रिपोर्टिंग को अपराधीकरण करने के लिए प्रतीत होता है।
अमेरिका स्थित ब्लूमबर्ग न्यूज ने कहा कि वह रूस के अंदर अपने पत्रकारों के काम को भी अस्थायी रूप से निलंबित कर रहा है। ब्लूमबर्ग के एडिटर-इन-चीफ जॉन मिकलेथवेट ने एक बयान में कहा कि आपराधिक संहिता में बदलाव देश के अंदर सामान्य पत्रकारिता के किसी भी प्रकार को जारी रखना असंभव बनाता है।
वहीं, सीएनएन के एक प्रवक्ता ने कहा कि नेटवर्क रूस में प्रसारण बंद कर देगा, जबकि हम स्थिति का मूल्यांकन करना जारी रखेंगे।
एबीसी न्यूज, जिसके रूस में कई संवाददाता काम कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि रूस में पारित नए सेंसरशिप कानून के कारण, एबीसी न्यूज सहित कुछ पश्चिमी नेटवर्क आज रात देश से प्रसारित नहीं हो रहे हैं। हम स्थिति का आकलन करना और निर्धारित करना जारी रखेंगे कि क्या इसका मतलब जमीन पर हमारी टीमों की सुरक्षा के लिए है।
वहीं अब यूक्रेन के साथ जारी जंग के बीच रूस ने फेसबुक के साथ-साथ ट्विटर और यूट्यूब को भी देश में बैन कर दिया है। रूस का आरोप है कि यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स रूसी मीडिया कंपनियों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपना रहे थे। उधर, फेसबुक का कहना है कि रूस ने इस प्रतिबंध से लाखों लोगों को विश्वसनीय जानकारी से वंचित कर दिया है।
रूस सरकार की सेंसरशिप एजेंसी रोसकोम्नाडजोर (Roskomnadzor) का कहना है अक्टूबर 2020 से फेसबुक द्वारा रूसी मीडिया के खिलाफ भेदभाव के 26 मामले सामने आए हैं, जिसमें आरटी और आरआईए न्यूज एजेंसी जैसे सरकार समर्थित चैनलों के अकाउंट्स की पहुंच (Reach) घटाने का आरोप है।
रूस में लगे इस बैन पर फेसबुक व इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta के वैश्विक मामलों के प्रमुख निक क्लेग ने कहा कि कंपनी अपनी सेवाओं को बहाल करने के लिए वह सब कुछ करना जारी रखेगी, जो वह कर सकती है।
गौरतलब है कि यूक्रेन के साथ युद्ध की शुरुआत के दूसरे दिन यानी 25 फरवरी को रूस ने फेसबुक पर आंशिक प्रतिबंध लगा दिया गया था। रूस की सरकारी एजेंसी रोसकोम्नाडजोर का आरोप था कि फेसबुक ने रूस के सरकारी के मीडिया आउटलेट्स के पेजों को अपने प्लेटफॉर्म पर बैन कर दिया था। जब रूस की ओर से इस प्रतिबंध को हटाने की मांग की गई, तो फेसबुक ने मांग को नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद पहले रूस ने फेसबुक पर आंशिक रूप से बैन लगाया और अब इसे पूरी तरह ब्लॉक कर दिया।
शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ की गई इस कार्रवाई के साथ ही रूस ने अमेरिकी सरकार द्वारा वित्त पोषित ‘वॉयस ऑफ अमेरिका’ और ‘रेडियो फ्री यूरोप’/’रेडियो लिबर्टी’, जर्मन प्रसारक ‘डॉयचे वेले’ और लातविया स्थित वेबसाइट ‘मेडुजा’ को भी ब्लॉक कर दिया। रूसी भाषा में समाचार प्रकाशित करने वाले विदेशी आउटलेट्स के खिलाफ सरकार की व्यापक कार्रवाई ने पुतिन के तेवर साफ कर दिए हैं। रूस लगातार इस बात का आरोप लगाता रहा है कि यूक्रेन पर आक्रमण के बारे में घरेलू दर्शकों को गलत सूचना दी जा रही है।
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