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2025 में रेडियो विज्ञापन खर्च 2,515 करोड़ रुपये पर पहुंचा: PMAR
पिच मैडिसन ऐडवर्टाइजिंग रिपोर्ट (PMAR) 2026 के मुताबिक, साल 2025 में रेडियो विज्ञापन में हल्की-फुल्की बढ़त दर्ज की गई।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 6 hours ago
पिच मैडिसन ऐडवर्टाइजिंग रिपोर्ट (PMAR) 2026 के मुताबिक, साल 2025 में रेडियो विज्ञापन में हल्की-फुल्की बढ़त दर्ज की गई। रेडियो पर कुल विज्ञापन खर्च 2% बढ़कर 2024 के ₹2,462 करोड़ से 2025 में ₹2,515 करोड़ हो गया। हालांकि कुल AdEx (विज्ञापन खर्च) में इसकी हिस्सेदारी थोड़ी कम होकर 2.3% से 2.2% रह गई। इसका मतलब यह है कि रेडियो अभी भी एक स्थिर और सपोर्टिंग माध्यम बना हुआ है, लेकिन डिजिटल के बढ़ते दौर में यह मुख्य रीच देने वाला प्लेटफॉर्म नहीं रहा।
रिपोर्ट बताती है कि रेडियो की वैल्यू ग्रोथ मुख्य रूप से शहरी बाजारों और पैकेज्ड सॉल्यूशंस की वजह से हुई। फिर भी कुल विज्ञापन खर्च में इसका योगदान छोटा ही है। PMAR 2026 के अनुसार, अब रेडियो को एक टैक्टिकल प्लेटफॉर्म की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। यानी विज्ञापनदाता इसे सालभर लगातार चलाने के बजाय खास समय और मौके पर, कम अवधि के लेकिन ज्यादा फ्रीक्वेंसी वाले कैंपेन के लिए इस्तेमाल करते हैं।
तिमाही आंकड़े भी यही कहानी बताते हैं। तीसरी तिमाही (Q3) सबसे मजबूत रही। इस दौरान राजस्व 9% बढ़कर ₹573 करोड़ से ₹622 करोड़ हो गया, जिसमें त्योहारों की मांग का बड़ा योगदान रहा। चौथी तिमाही (Q4) साल की सबसे बड़ी तिमाही रही, जहां ₹758 करोड़ का कारोबार हुआ, जो सालाना राजस्व का 30% था, लेकिन यह पिछले साल के मुकाबले स्थिर रहा। पहली तिमाही (Q1) में 3% की गिरावट आई, जबकि दूसरी तिमाही (Q2) में 4% की हल्की रिकवरी देखने को मिली। कुल मिलाकर 2025 में जो भी अतिरिक्त ग्रोथ हुई, उसमें सबसे ज्यादा योगदान Q3 का रहा।
कैटेगरी के हिसाब से देखें तो रेडियो का इस्तेमाल ज्यादा लोकल और एक्टिवेशन आधारित नजर आता है। रियल एस्टेट सबसे बड़ा योगदान देने वाला सेक्टर रहा, जहां खर्च 4% बढ़कर ₹393 करोड़ हो गया। ऑटो सेक्टर ने टॉप कैटेगरी में सबसे तेज 13% की बढ़त दर्ज की और खर्च ₹299 करोड़ तक पहुंच गया। ई-कॉमर्स, क्लोदिंग एंड फैशन और एजुकेशन कैटेगरी में भी दो अंकों की ग्रोथ रही। इससे साफ है कि शहर स्तर पर प्रचार और खास अभियानों के लिए रेडियो का इस्तेमाल जारी है।
वहीं FMCG सेक्टर रेडियो के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुआ। इस कैटेगरी में खर्च 11% घटकर ₹254 करोड़ रह गया। BFSI और रिटेल सेक्टर में भी गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट पारंपरिक मीडिया में दिख रहे बड़े बदलाव का हिस्सा है, जहां बड़ी FMCG कंपनियां अपने बजट को डिजिटल ऑडियो, इन्फ्लुएंसर कैंपेन और शॉर्ट-फॉर्म वीडियो जैसे प्लेटफॉर्म की ओर शिफ्ट कर रही हैं, ताकि ज्यादा सटीक टारगेटिंग और फ्रीक्वेंसी मिल सके।
PMAR 2026 का निष्कर्ष है कि रेडियो अब राष्ट्रीय स्तर का बड़ा मास मीडिया नहीं, बल्कि एक लोकल एम्प्लीफायर बन चुका है। 2026 के लिए सुझाव दिया गया है कि रेडियो का इस्तेमाल खास इलाकों में, सीमित समय के लिए और सटीक टारगेटिंग के साथ किया जाए। इसे OOH और डिजिटल के साथ जोड़कर स्टोर ट्रैफिक बढ़ाने, डीलर एक्टिवेशन, प्रोडक्ट लॉन्च और इवेंट आधारित कम्युनिकेशन के लिए इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद होगा। यानी अब रेडियो को एक सामान्य फ्रीक्वेंसी प्लेटफॉर्म की तरह नहीं, बल्कि चुनिंदा बाजारों में जागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया पैदा करने वाले सटीक टूल के रूप में देखा जा रहा है।
Pitch Madison Advertising Report (PMAR) 2026 की पूरी रिपोर्ट डाउनलोड करने के लिए इस लिंक पर क्लिक किया जा सकता है:
https://e4mevents.com/pitch-madison-advertising-report-2026/download-report
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