देश में निजी एफएम रेडियो की शुरुआत जुलाई 1999 में हुई थी। उस समय निजी कंपनियों की भागीदारी के लिए 12 शहरों में 21 एफएम चैनल शुरू किए गए थे।
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Vikas Saxena
भारत में निजी एफएम (FM) रेडियो का नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है। कभी केवल 12 शहरों तक सीमित रहा निजी एफएम रेडियो अब देश के 113 शहरों में पहुंच चुका है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक देश में निजी एफएम रेडियो के कुल 385 चैनल चालू थे। ये चैनल 26 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में काम कर रहे थे।
मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में निजी एफएम रेडियो की शुरुआत जुलाई 1999 में हुई थी। उस समय निजी कंपनियों की भागीदारी के लिए 12 शहरों में 21 एफएम चैनल शुरू किए गए थे। इसके बाद सरकार ने एफएम रेडियो के विस्तार के लिए अलग-अलग चरणों में नीतियां लागू कीं, जिससे धीरे-धीरे इसका नेटवर्क छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचा।
FM Phase-II में 86 शहरों तक पहुंचा नेटवर्क
निजी एफएम रेडियो के विस्तार के लिए साल 2005 में एफएम फेज-II शुरू किया गया। इसके तहत 26 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के 86 शहरों में 245 निजी एफएम चैनल चालू हुए। इनमें फेज-I से स्थानांतरित किए गए 21 चैनल भी शामिल थे।
इसके बाद सरकार ने 25 जुलाई 2011 को एफएम फेज-III की नीति का ऐलान किया। इस चरण में एक लाख या उससे अधिक आबादी वाले शहरों के साथ जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और द्वीपीय क्षेत्रों के 11 सीमावर्ती शहरों को भी शामिल किया गया। इसका मकसद उन इलाकों तक निजी एफएम रेडियो की पहुंच बढ़ाना था, जहां पहले इसकी सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
लेह, कारगिल समेत सीमावर्ती इलाकों तक पहुंच
एफएम फेज-III के तहत हुई ई-नीलामी के पहले दो चरणों के बाद देशभर में 162 अतिरिक्त चैनल जोड़े गए। इस विस्तार में लद्दाख के लेह और कारगिल के साथ जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह, कठुआ और पुंछ जैसे इलाकों में भी एफएम रेडियो चैनल चालू किए गए।
234 नए शहरों में विस्तार की तैयारी
निजी एफएम रेडियो का नेटवर्क और बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने फेज-III के तीसरे चरण में 234 ऐसे शहरों में 730 चैनलों की ई-नीलामी को मंजूरी दी, जहां पहले निजी एफएम रेडियो की सुविधा नहीं थी। इसके लिए फेज-III की नीति में भी बदलाव किए गए, जिन्हें 10 सितंबर 2024 को अधिसूचित किया गया।
इस नीलामी के लिए कुल 19 कंपनियों को योग्य घोषित किया गया। इसके बाद 9 और 10 जुलाई 2025 को हुई ई-नीलामी में 43 नए शहरों के 63 चैनलों की बिक्री हुई। सफल बोलीदाताओं को एकमुश्त प्रवेश शुल्क मिलने के बाद 28 अगस्त 2025 को लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) जारी किए गए। हालांकि, इन 63 चैनलों को पहले से चालू चैनलों की संख्या में शामिल नहीं किया जा सकता, क्योंकि रिपोर्ट इन्हें नीलामी में बिके चैनलों के तौर पर बताती है।
स्थानीय कारोबार और भाषाओं को मिलेगा बढ़ावा
मंत्रालय के मुताबिक, स्थानीय भाषाओं में एफएम रेडियो चैनलों की उपलब्धता ने इस माध्यम की लोकप्रियता बढ़ाने में मदद की है। यह स्थानीय कारोबारियों के लिए भी विज्ञापन का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। रेडियो के जरिए छोटे और स्थानीय व्यवसाय अपने आसपास के लोगों तक अपने उत्पादों और सेवाओं की जानकारी पहुंचा सकते हैं।
मंत्रालय का मानना है कि नए शहरों में निजी एफएम रेडियो के विस्तार से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके साथ ही स्थानीय बोलियों, संस्कृति और महिलाओं की भागीदारी को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार को निजी एफएम रेडियो से लाइसेंस फीस, टावर किराया और अन्य शुल्क के रूप में राजस्व भी मिलता है।
रेडियो मिर्ची और म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Gaana का संचालन करने वाली कंपनी एंटरटेनमेंट नेटवर्क (इंडिया) लिमिटेड (ENIL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं।
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Samachar4media Bureau
रेडियो मिर्ची और म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Gaana का संचालन करने वाली कंपनी एंटरटेनमेंट नेटवर्क (इंडिया) लिमिटेड (ENIL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस दौरान 117 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया। वहीं, उसका EBITDA सालाना आधार पर 9.5% बढ़कर 11.3 करोड़ रुपये हो गया।
कंपनी ने 3 नवंबर को जारी प्रेस रिलीज में बताया कि 30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही में उसका घरेलू कारोबार से रेवेन्यू 114 करोड़ रुपये रहा। कंपनी की कमाई में अब रेडियो के अलावा इवेंट्स, डिजिटल सॉल्यूशंस और Gaana की भी हिस्सेदारी बढ़ रही है। घरेलू रेवेन्यू में रेडियो की हिस्सेदारी 53% रही।
डिजिटल कारोबार की कमाई में 4.6% की बढ़ोतरी
ENIL के डिजिटल कारोबार ने भी दूसरी तिमाही में बेहतर प्रदर्शन किया। इस सेगमेंट से कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 4.6% बढ़कर 33 करोड़ रुपये हो गया। घरेलू रेवेन्यू में डिजिटल कारोबार की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। Q2 FY26 में यह 23.3% थी, जो Q2 FY27 में बढ़कर 29% हो गई।
कंपनी के मुताबिक, डिजिटल कारोबार में घाटा भी कम हुआ है। दूसरी तिमाही में डिजिटल सेगमेंट का EBITDA घाटा घटकर 7.5 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 9.8 करोड़ रुपये था। इस तरह डिजिटल घाटे में 23.3% की कमी आई है।
Gaana और Digital Solutions पर कंपनी का फोकस
कंपनी अपने डिजिटल कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए नई साझेदारियों पर काम कर रही है। Gaana का लक्ष्य ऐसी पार्टनरशिप के जरिए ज्यादा सब्सक्राइबर जोड़ना है। इसके साथ ही म्यूजिक की खोज और यूजर्स की पसंद के मुताबिक कंटेंट उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है, ताकि यूजर्स की भागीदारी और प्लेटफॉर्म से जुड़े रहने की अवधि बढ़ाई जा सके।
वहीं, Digital Solutions कारोबार के जरिए कंपनी अपने क्लाइंट्स के साथ संबंधों को मजबूत कर रही है। इसका उद्देश्य विज्ञापनदाताओं के बजट में पारंपरिक रेडियो सेवाओं से आगे बढ़कर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना है।
अंतरराष्ट्रीय कारोबार से 3.2 करोड़ रुपये का रेवेन्यू
ENIL के अंतरराष्ट्रीय कारोबार से दूसरी तिमाही में 3.2 करोड़ रुपये का रेवेन्यू आया। कंपनी ने बताया कि 30 सितंबर 2026 तक उसके पास कंसोलिडेटेड आधार पर 371.5 करोड़ रुपये का कैश बैलेंस था।
CEO ने विज्ञापन मांग में सुस्ती को बताया चुनौती
ENIL के CEO यतिश मेहरिशी ने नतीजों पर कहा कि कंपनी अपने मुख्य कारोबार की मुनाफा कमाने की क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ विकास के नए रास्ते तैयार कर रही है। दूसरी तिमाही में विज्ञापन की मांग कमजोर रहने और त्योहारों का सीजन देर से आने का असर रेवेन्यू पर पड़ा। हालांकि, लागत में किए गए बदलावों से EBITDA में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
उन्होंने कहा कि कंपनी के ब्रैंड, ऑडियंस के साथ उसके संबंध और विज्ञापनदाताओं तक पहुंच उसे पारंपरिक रेडियो कारोबार से आगे बढ़ने का मजबूत आधार देते हैं। Gaana और Digital Solutions के जरिए कंपनी उपभोक्ताओं के साथ जुड़ाव बढ़ाने और क्लाइंट्स के खर्च में अपनी भागीदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
CEO ने Gaana के सब्सक्राइबर बढ़ाने के लिए Noise जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, ऐसी साझेदारियों से प्लेटफॉर्म की पहुंच बढ़ाने और सह-ब्रैंडेड प्रोडक्ट के जरिए नए यूजर्स तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
63 शहरों में रेडियो स्टेशन चलाती है ENIL
एंटरटेनमेंट नेटवर्क (इंडिया) लिमिटेड एक सिटी-सेंट्रिक मीडिया कंपनी है। इसकी शुरुआत जून 1999 में हुई थी और इसका मुख्यालय मुंबई में है। कंपनी भारत के 63 शहरों में FM रेडियो स्टेशन संचालित करती है। इसका प्रमुख रेडियो ब्रैंड Radio Mirchi है। इसके अलावा कंपनी Gaana के जरिए डिजिटल ऑडियो स्ट्रीमिंग कारोबार में भी मौजूद है।
देश में निजी एफएम रेडियो का नेटवर्क पिछले कुछ वर्षों में तेजी से फैला है। जुलाई 1999 में 12 शहरों और 21 चैनलों से शुरू हुआ यह नेटवर्क अब 113 शहरों तक पहुंच चुका है।
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Vikas Saxena
देश में निजी एफएम रेडियो का नेटवर्क पिछले कुछ वर्षों में तेजी से फैला है। जुलाई 1999 में 12 शहरों और 21 चैनलों से शुरू हुआ यह नेटवर्क अब 113 शहरों तक पहुंच चुका है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक देश में निजी एफएम रेडियो के कुल 385 चैनल काम कर रहे थे। ये चैनल 26 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में प्रसारण कर रहे थे।
मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, निजी कंपनियों की भागीदारी के लिए एफएम रेडियो सेक्टर को जुलाई 1999 में खोला गया था। शुरुआत में 12 शहरों में 21 निजी एफएम रेडियो चैनल शुरू हुए थे। इसके बाद सरकार ने इस नेटवर्क को और बढ़ाने के लिए एफएम रेडियो के दूसरे और तीसरे चरण की नीतियां लागू कीं।
फेज-2 में 86 शहरों तक पहुंचा नेटवर्क
निजी एफएम रेडियो के विस्तार के लिए वर्ष 2005 में दूसरे चरण यानी फेज-2 की शुरुआत हुई। इसके तहत 26 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के 86 शहरों में कुल 245 निजी एफएम चैनल चालू हुए। इस संख्या में पहले चरण के 21 चैनल भी शामिल थे।
इसके बाद सरकार ने 25 जुलाई 2011 को एफएम रेडियो के तीसरे चरण यानी फेज-3 की नीति घोषित की। इसका उद्देश्य निजी एफएम रेडियो की पहुंच को बड़े शहरों से आगे छोटे शहरों और सीमावर्ती इलाकों तक बढ़ाना था। इस नीति में एक लाख या उससे अधिक आबादी वाले शहरों के साथ जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और द्वीपीय क्षेत्रों के 11 सीमावर्ती शहरों को भी शामिल किया गया।
लेह, कारगिल और पुंछ जैसे शहर भी जुड़े
मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, फेज-3 के तहत ई-नीलामी के शुरुआती दो दौर पूरे होने के बाद देशभर में 162 अतिरिक्त चैनल जोड़े गए। इस विस्तार के तहत लद्दाख के लेह और कारगिल के अलावा जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह, कठुआ और पुंछ जैसे शहरों में भी निजी एफएम रेडियो चैनल शुरू हुए।
इस तरह निजी एफएम रेडियो का दायरा उन इलाकों तक भी पहुंचा, जहां पहले इस तरह के प्रसारण की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। सरकार की नीति में स्थानीय भाषाओं और क्षेत्रीय संस्कृति को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है।
234 नए शहरों के लिए 730 चैनलों की नीलामी को मंजूरी
निजी एफएम रेडियो नेटवर्क के आगे विस्तार के लिए सरकार ने 234 ऐसे शहरों में 730 चैनलों की तीसरे दौर की ई-नीलामी को मंजूरी दी थी, जहां पहले निजी एफएम रेडियो की सुविधा नहीं थी। इस नीलामी में हिस्सा लेने के लिए 19 कंपनियां योग्य पाई गईं।
9 और 10 जुलाई 2025 को हुई ई-नीलामी में 43 नए शहरों के लिए कुल 63 चैनल बिके। सफल बोली लगाने वाली कंपनियों को 28 अगस्त 2025 को लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) जारी किए गए।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि 730 चैनलों की नीलामी की मंजूरी और 63 चैनलों की बिक्री का मतलब यह नहीं है कि ये सभी चैनल प्रसारण शुरू कर चुके थे। मंत्रालय की रिपोर्ट में 31 दिसंबर 2025 तक चालू निजी एफएम चैनलों की संख्या 385 बताई गई है। इसलिए नीलामी के आंकड़ों को चालू चैनलों की संख्या से अलग समझना चाहिए।
निजी एफएम रेडियो से सरकार को मिला 7,088 करोड़ रुपये से ज्यादा राजस्व
निजी एफएम रेडियो के विस्तार से सरकार को राजस्व भी मिला है। मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, निजी एफएम रेडियो प्रसारण की शुरुआत से लेकर 31 दिसंबर 2025 तक सरकार को करीब 7,088.31 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
इसमें एकमुश्त प्रवेश शुल्क, माइग्रेशन शुल्क, सालाना लाइसेंस फीस, टावर किराया और प्रोसेसिंग फीस से मिली रकम शामिल है। निजी एफएम रेडियो चैनलों के लिए कंपनियों को ई-नीलामी प्रक्रिया के जरिए अनुमति दी जाती है। प्रसारकों से तिमाही लाइसेंस फीस भारत कोष पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जमा कराई जाती है।
स्थानीय कारोबार और संस्कृति के लिए भी अहम
मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में एफएम रेडियो को युवाओं और वयस्कों के बीच मनोरंजन के पसंदीदा माध्यमों में से एक बताया है। स्थानीय भाषाओं में कार्यक्रम प्रसारित करने की वजह से एफएम रेडियो की क्षेत्रीय स्तर पर भी अहम भूमिका है।
यह माध्यम स्थानीय कारोबारियों को अपने उत्पादों और सेवाओं का प्रचार करने का मौका देता है। वहीं, छोटे शहरों में निजी एफएम चैनलों की शुरुआत से स्थानीय कलाकारों, संगीत और संस्कृति को भी प्रसारण में जगह मिल सकती है।
कुल मिलाकर, मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि भारत में निजी एफएम रेडियो का नेटवर्क 12 शहरों से बढ़कर 113 शहरों तक पहुंच गया है। 31 दिसंबर 2025 तक देश में 385 निजी एफएम चैनल चालू थे। वहीं, 234 नए शहरों के लिए की गई नीलामी इस नेटवर्क के आगे विस्तार की योजना को दिखाती है।
रेडियो और मीडिया कारोबार से जुड़ी कंपनी BIG FM ने अपने न्यूज कारोबार का विस्तार करने की तैयारी शुरू कर दी है।
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Samachar4media Bureau
रेडियो और मीडिया कारोबार से जुड़ी कंपनी BIG FM ने अपने न्यूज कारोबार का विस्तार करने की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) से छह नए न्यूज चैनल शुरू करने की मंजूरी मांगी है। यह कदम कंपनी की ओर से सफायर मीडिया (Sapphire Media) के मौजूदा न्यूज कारोबार का अधिग्रहण करने के बाद उठाया गया है। इस कारोबार में ‘इंडिया डेली 24x7’ भी शामिल है।
कंपनी की योजना BIG न्यूज नेटवर्क के तहत एक राष्ट्रीय न्यूज नेटवर्क तैयार करने की है। इसके जरिए पारंपरिक प्रसारण के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी जोड़ा जाएगा, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों और भाषाओं के दर्शकों तक पहुंच बनाई जा सके। हालांकि, छह नए चैनलों को शुरू करने की योजना अभी मंत्रालय की जरूरी मंजूरी पर निर्भर है।
क्षेत्रीय और स्थानीय खबरों पर रहेगा फोकस
BIG FM की प्रस्तावित विस्तार योजना में समय पर और सटीक खबरें देने के साथ स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कंपनी हाइपरलोकल यानी किसी खास शहर, इलाके या समुदाय से जुड़ी खबरों और अलग-अलग भारतीय भाषाओं में समाचार पेश करने की योजना बना रही है। इसके अलावा, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए छोटे वीडियो और कम समय में देखे जा सकने वाले न्यूज कंटेंट पर भी जोर रहेगा।
कंपनी का उद्देश्य क्षेत्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के साथ ऐसा न्यूज नेटवर्क तैयार करना है, जो टीवी प्रसारण और डिजिटल माध्यमों, दोनों पर दर्शकों तक पहुंच सके।
‘वन बिग वर्ल्ड’ पहल का भी हिस्सा
छह नए न्यूज चैनलों की योजना BIG FM की व्यापक ‘ONE BIG WORLD’ पहल से भी जुड़ी है। कंपनी इस पहल के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एकीकृत मीडिया व्यवस्था विकसित करना चाहती है।
इसमें रेडियो, न्यूज, डिजिटल प्लेटफॉर्म, डिजिटल आउट ऑफ होम (DOOH) विज्ञापन और लाइव कार्यक्रमों को एक साथ जोड़ने की योजना है। DOOH के तहत डिजिटल स्क्रीन और डिस्प्ले के जरिए सार्वजनिक स्थानों पर विज्ञापन दिखाए जाते हैं।
कंपनी की कोशिश है कि इन सभी माध्यमों को जोड़कर अलग-अलग बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाई जाए और दर्शकों को कई प्लेटफॉर्म पर कंटेंट उपलब्ध कराया जाए।
क्या बोले BIG FM के सीईओ?
BIG FM के सीईओ अशित कुकियन ने कहा कि कंपनी अपने मौजूदा अनुभव और क्षमताओं के साथ डिजिटल को प्राथमिकता देने वाले नए फॉर्मेट के जरिए न्यूज कारोबार को आगे बढ़ाने का अवसर देख रही है।
उन्होंने कहा कि दर्शकों की पसंद लगातार बदल रही है। ऐसे में कंपनी का ध्यान अलग-अलग प्लेटफॉर्म, भाषाओं और क्षेत्रीय बाजारों में खबरों को ज्यादा सुलभ, प्रासंगिक और दिलचस्प बनाने पर है।
कुकियन के मुताबिक, छह नए चैनलों की योजना न्यूज कारोबार को बढ़ाने और उसे कंपनी के बड़े ‘ONE BIG WORLD’ मीडिया नेटवर्क का अहम हिस्सा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही शुरू होंगे चैनल
BIG FM की ओर से छह नए न्यूज चैनलों के लिए आवेदन किया गया है, लेकिन अभी इनके लॉन्च को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। चैनलों की शुरुआत सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से जरूरी नियामकीय अनुमति मिलने के बाद ही हो सकेगी।
इस विस्तार के जरिए कंपनी न्यूज प्रसारण के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के साथ क्षेत्रीय और डिजिटल दर्शकों तक पहुंच मजबूत करना चाहती है।
इस पहल के जरिए कंपनी BIG News Network को मजबूत करने और देश में एक बड़ा न्यूज नेटवर्क बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
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Samachar4media Bureau
जानी-मानी रेडियो कंपनी BIG FM ने न्यूज ब्रॉडकास्टिंग के क्षेत्र में विस्तार की तैयारी की है। कंपनी ने छह नए डिजिटल-फर्स्ट ब्रॉडकास्ट न्यूज चैनल शुरू करने की अनुमति के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) में आवेदन किया है। इस पहल के जरिए कंपनी BIG News Network को मजबूत करने और देश में एक बड़ा न्यूज नेटवर्क बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
'इंडिया डेली 24x7' सहित 'सैफायर मीडिया' के मौजूदा न्यूज़ बिज़नेस के अधिग्रहण के साथ-साथ, यह प्रस्तावित विस्तार 'बिग एफएम' (BIG FM) की उस योजना में एक अहम कदम है, जिसका मकसद न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग में अपनी मौजूदगी को मज़बूत करना और 'बिग न्यूज़ नेटवर्क' (BIG News Network) के तहत एक राष्ट्रीय न्यूज नेटवर्क तैयार करना है।
BIG News Network की योजना ब्रॉडकास्ट की पहुंच को डिजिटल प्लेटफॉर्म की व्यापकता और सुलभता के साथ जोड़ने की है। प्रस्तावित चैनलों पर समय पर और सटीक खबरों के साथ विश्वसनीय रिपोर्टिंग पर ध्यान दिया जाएगा। कंपनी हाइपरलोकल यानी स्थानीय स्तर की खबरों, क्षेत्रीय भाषाओं की न्यूज, क्षेत्रीय नजरिये और डिजिटल दर्शकों के लिए छोटे कंटेंट फॉर्मेट पर भी फोकस करेगी। कंपनी का लक्ष्य भारत के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क में से एक बनना है।
यह पहल BIG FM के व्यापक विजन ‘ONE BIG WORLD’ का हिस्सा है। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एकीकृत मीडिया इकोसिस्टम है, जिसमें रेडियो, न्यूज, डिजिटल प्लेटफॉर्म, डिजिटल आउट ऑफ होम (DOOH) मीडिया और लाइव एक्सपीरियंस को एक साथ जोड़ने की परिकल्पना की गई है। प्रस्तावित विस्तार के जरिए इस इकोसिस्टम में न्यूज कारोबार की भूमिका मजबूत करने और विभिन्न प्लेटफॉर्म व बाजारों तक इसकी पहुंच बढ़ाने की योजना है।
BIG FM के सीईओ अशित कुकियन (Ashit Kukian) ने कहा कि कंपनी अपनी मौजूदा क्षमताओं को नए डिजिटल-फर्स्ट फॉर्मेट के साथ जोड़कर न्यूज ब्रॉडकास्टिंग के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है। दर्शकों की बदलती पसंद को ध्यान में रखते हुए कंपनी अलग-अलग प्लेटफॉर्म, भाषाओं और क्षेत्रीय बाजारों में न्यूज को अधिक सुलभ, प्रासंगिक और आकर्षक बनाने पर ध्यान दे रही है।
कंपनी की यह पहल राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने तथा अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रीय बाजारों में विस्तार की संभावनाएं तलाशने की रणनीति का हिस्सा है। छह नए चैनलों के लिए फिलहाल मंत्रालय की मंजूरी मिलना बाकी है।
रेडियो सिटी का संचालन करने वाली कंपनी म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं।
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Samachar4media Bureau
रेडियो सिटी का संचालन करने वाली कंपनी म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। 30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी ने 6.68 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी को 6.88 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था।
कंपनी ने 26 अक्टूबर को शेयर बाजारों को दी गई जानकारी में बताया कि दूसरी तिमाही में उसका परिचालन से राजस्व 40.96 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के 37.84 करोड़ रुपये से करीब 8.2% अधिक है।
कुल आय 48.43 करोड़ रुपये रही
सितंबर 2026 में समाप्त तिमाही के दौरान कंपनी की कुल आय 48.43 करोड़ रुपये रही। एक साल पहले इसी अवधि में यह 44.68 करोड़ रुपये थी। इस तरह कुल आय में करीब 8.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
कंपनी का तिमाही खर्च घटकर 39.49 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 53.44 करोड़ रुपये था। खर्च में कमी और आय में बढ़ोतरी के चलते कंपनी घाटे से मुनाफे में लौट आई।
पहली छमाही में भी मुनाफा
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड ने 15.91 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में कंपनी को 9.05 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था।
पहली छमाही में कंपनी का परिचालन से राजस्व 85.50 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 87.17 करोड़ रुपये था। यानी परिचालन से राजस्व में करीब 1.9% की गिरावट आई। इसके बावजूद कंपनी का कुल खर्च घटने से उसके नतीजों में सुधार देखने को मिला।
खर्च में कमी से नतीजों को सहारा
कंपनी के नतीजों के मुताबिक, दूसरी तिमाही में कर्मचारियों पर होने वाला खर्च 12.84 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 15.73 करोड़ रुपये था। वहीं, मूल्यह्रास और अमूर्त संपत्तियों से जुड़ा खर्च 4.06 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 7.05 करोड़ रुपये से कम है।
कंपनी के ये नतीजे बताते हैं कि इस तिमाही में राजस्व बढ़ने के साथ खर्च में कमी भी मुनाफे में लौटने की एक अहम वजह रही।
म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड ने बताया कि उसके वित्तीय नतीजों की ऑडिट समिति ने समीक्षा की और 26 अक्टूबर 2026 को बोर्ड ने इन्हें मंजूरी दी। कंपनी के वैधानिक ऑडिटर एस.एन. धवन एंड कंपनी एलएलपी ने इन नतीजों की सीमित समीक्षा रिपोर्ट भी जारी की है।
भारत में रेडियो को डूबता माध्यम माना जाता है, लेकिन विज्ञापनों की मात्रा में हल्की बढ़त और स्थानीय कारोबारियों की दिलचस्पी बताती है कि इसकी भूमिका अब भी बनी हुई है।
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Vikas Saxena
भारत में रेडियो को अक्सर डूबता माध्यम कहा जाता है। आंकड़े देखें तो तस्वीर इतनी सीधी नहीं है। कमाई दबाव में है, पर विज्ञापनों की मात्रा हल्की रफ्तार से बढ़ रही है और शहर-आधारित कारोबारी अब भी रेडियो का इस्तेमाल कर रहे हैं। सवाल यह है कि रेडियो अब किस भूमिका में बचा है।
कमाई: दबाव साफ है
FICCI-EY की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में रेडियो सेगमेंट की आय 7% गिरकर 23 अरब रुपये रह गई, जिसकी मुख्य वजह विज्ञापन दरों में कमी रही। इससे पहले 2024 में यह आय 9% बढ़कर 25 अरब रुपये हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार रेडियो के विज्ञापन राजस्व में आगे भी करीब 2% सालाना गिरावट आ सकती है।
ताजा तिमाही भी राहत नहीं देती। TRAI की 12 अक्टूबर को जारी रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल-जून 2026 में निजी FM का विज्ञापन राजस्व 376.16 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछली तिमाही में यह 414.03 करोड़ रुपये था। यह करीब 9.1% की तिमाही गिरावट है। तुलना के लिए जून 2025 की तिमाही देखें। तब 388 चैनलों का विज्ञापन राजस्व 383.14 करोड़ रुपये था। मेरी गणना में सालाना गिरावट लगभग 1.8% बैठती है। यानी कमाई लगभग ठहरी हुई है।
बड़ी तस्वीर में रेडियो की हिस्सेदारी भी छोटी है। पिच-मैडिसन रिपोर्ट के अनुसार 2025 में रेडियो का विज्ञापन खर्च 2% बढ़कर 2,515 करोड़ रुपये रहा, पर कुल विज्ञापन खर्च में हिस्सेदारी 2.3% से घटकर 2.2% हो गई। एजेंसियों के अनुमान आपस में मेल नहीं खाते। डेंड्सू-एक्सचेंज4मीडिया रिपोर्ट रेडियो का AdEx (विज्ञापन खर्च) 2025 में 1,501 करोड़ रुपये और बाजार हिस्सेदारी 1% बताती है। दिशा सबमें एक है, पर स्तर पद्धति के साथ बदलता है।
स्थानीय पहुंच: कौन सी श्रेणियां रेडियो पर टिकी हैं
विज्ञापन मात्रा में हल्की लेकिन लगातार बढ़त दिख रही है। TAM AdEx के अनुसार जनवरी-जुलाई 2026 में रेडियो विज्ञापन की मात्रा पिछले साल की इसी अवधि से 1.2% बढ़ी, और यह जनवरी-जुलाई 2024 से 5% अधिक है। 2025 के पूरे साल में मात्रा में 2% की मामूली बढ़त दर्ज हुई थी।
बढ़त का बड़ा हिस्सा स्थानीय और सेवा-आधारित श्रेणियों से आता है:
2025 की रुपये-आधारित तस्वीर भी ऐसी ही है। रियल एस्टेट 4% बढ़कर 393 करोड़ रुपये और ऑटो 13% बढ़कर 299 करोड़ रुपये हुआ, जबकि FMCG का खर्च 11% घटकर 254 करोड़ रुपये रह गया।
शहर और श्रोताओं की आदतें
विज्ञापन का भूगोल रेडियो के स्थानीय चरित्र को दिखाता है। शहरों में जयपुर सबसे आगे है, उसके बाद नागपुर और इंदौर। नई दिल्ली, सूरत, हैदराबाद, अहमदाबाद, बेंगलुरु, लखनऊ और भोपाल बाकी शीर्ष दस में हैं। राज्यों में गुजरात का हिस्सा 17% और महाराष्ट्र का 15% है, और शीर्ष पांच राज्य मिलकर 61% मात्रा संभालते हैं। शीर्ष 10 शहर 63% विज्ञापन मात्रा के हिस्सेदार हैं, जो जनवरी-सितंबर 2025 में भी 63% ही था। ढांचा स्थिर है, और रेडियो की पहुंच व्यापक होने के बावजूद विज्ञापन मांग बड़े शहरों में सिमटी है।
समय के हिसाब से देखें तो शाम में 38%, सुबह में 32%, दोपहर में 28% और रात में 2% विज्ञापन मात्रा रही। सुबह और शाम मिलाकर 70% है। विज्ञापनदाता इन्हीं पट्टियों पर दांव लगाते हैं।
एक सावधानी जरूरी है। श्रोताओं की संख्या पर नवीनतम स्वतंत्र राष्ट्रीय आंकड़े मुझे नहीं मिले। इंडस्ट्री का दावा है कि AIR, निजी FM और सामुदायिक रेडियो मिलाकर 40 करोड़ से अधिक दैनिक श्रोता हैं। यह Red FM की COO का कथन है और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है। इसलिए श्रोताओं की आदतों पर निष्कर्ष विज्ञापन-मात्रा के आंकड़ों से ही निकल सकते हैं।
नेटवर्क की स्थिति भी बदली है। TRAI के अनुसार जून 2026 के अंत में निजी FM के 386 चैनल 121 शहरों में 30 कंपनियों द्वारा चलाए जा रहे थे और 578 सामुदायिक रेडियो स्टेशन चालू थे। जून 2025 में 388 चैनल 113 शहरों में और 540 सामुदायिक स्टेशन चालू थे। निजी FM के शहर बढ़े हैं पर चैनल घटे हैं, जबकि सामुदायिक रेडियो फैल रहा है।
विज्ञापन की कीमत: सस्ता सौदा, पर कमजोरी का संकेत भी
रेडियो की दरें सार्वजनिक रेट कार्ड पर आधारित नहीं हैं। एजेंसियों की वेबसाइटें अलग-अलग और परस्पर विरोधी दर-सीमाएं बताती हैं, इसलिए मैंने उन्हें शामिल नहीं किया। भरोसेमंद संकेत ये हैं:
स्थानीय ब्रैंड्स के लिए इसका मतलब मोलभाव की गुंजाइश है। इंडस्ट्री के लिए यही चिंता है। Radio City के CEO के अनुसार इंडस्ट्री ने स्थानीय विज्ञापन बूम के भरोसे आक्रामक विस्तार किया था, पर वह बूम उम्मीद से धीमा रहा। प्रारूप भी बदल रहा है। 20-40 सेकंड के विज्ञापन 66% मात्रा रखते हैं, जो 2025 की इसी अवधि में 65% था, और 20 सेकंड से छोटे विज्ञापन 28% हैं।
आयोजन और नॉन-FCT: नई कमाई की जमीन
रेडियो कंपनियां अब केवल स्पॉट नहीं बेचतीं। FICCI-EY के अनुसार रेडियो की कुल आय में गैर-विज्ञापन हिस्सा अब 25% है, जबकि 2024 में औसतन करीब 20% रेडियो आय आयोजनों, कंटेंट निर्माण और अन्य स्रोतों से आती थी। रिपोर्ट का अनुमान है कि नॉन-FCT आय 2028 तक 14% सालाना बढ़कर कुल राजस्व का लगभग 39% हो जाएगी।
पर यह रास्ता जोखिम-मुक्त नहीं है। रेडियो मिर्ची चलाने वाली ENIL की अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में नॉन-FCT सेगमेंट आयोजनों के रद्द होने और कलाकारों की यात्रा में बाधा से प्रभावित हुआ, और प्रबंधन के अनुसार आयोजन आमतौर पर साल की दूसरी छमाही में ज्यादा होते हैं। यह अगस्त के नतीजों का आंकड़ा है, इसलिए संदर्भ की तरह पढ़ें। स्थानीय ब्रैंड्स के लिए सीख यह है कि RJ-आधारित आयोजन और ऑन-ग्राउंड एक्टिवेशन को स्पॉट के साथ जोड़कर खरीदें, पर आयोजनों की बुकिंग में लचीलापन रखें।
डिजिटल ऑडियो: प्रतिस्पर्धी भी, साझेदार भी
कुछ रेडियो कंपनियां डिजिटल ऑडियो को विस्तार का रास्ता बना रही हैं। ENIL का डिजिटल राजस्व अप्रैल-जून 2026 में 43.3% बढ़ा और कुल राजस्व में उसका हिस्सा 30.2% हो गया, जो पिछले साल 23% था। रेडियो के शीर्ष पांच ब्रैंड्स में Gaana.com भी शामिल है। ध्यान रहे कि Gaana और रेडियो मिर्ची एक ही कंपनी के हैं, इसलिए इसे समूह के भीतर क्रॉस-प्रमोशन का संकेत मानना चाहिए, स्वतंत्र प्रमाण नहीं।
बाजार का संदर्भ यह है:
सार यह है कि श्रोता मुफ्त, मोबाइल-आधारित ऑडियो की ओर बढ़ रहे हैं।
नीति की अड़चनें
इंडस्ट्री की चार मांगें हैं: निजी FM को न्यूज प्रसारण की अनुमति, GST 18% से घटाकर 5%, स्मार्टफोन में FM रिसीवर अनलॉक करना, और लाइसेंस शुल्क को वास्तविक आय के प्रतिशत से जोड़ना। इंडस्ट्री का अनुमान है कि सकल राजस्व का करीब 40% GST, लाइसेंस और स्पेक्ट्रम शुल्क में चला जाता है। 12 जून 2026 के मसौदा नियमों में निजी रेडियो के लिए कम से कम 20% हाइपरलोकल सामग्री का प्रस्ताव है, जबकि न्यूज पर मौजूदा प्रतिबंध जारी है। यानी रेडियो को स्थानीय दिशा में धकेला जा रहा है, पर कमाई के बड़े रास्ते अभी नहीं खुले।
स्थानीय ब्रैंड्स के लिए क्या सबक
रेडियो अब बड़े राष्ट्रीय अभियानों का केंद्र नहीं, बल्कि शहर के भीतर बार-बार दोहराई जाने वाली आवाज है। जिस ब्रैंड का ग्राहक उसी शहर में रहता है, उसके लिए यह अब भी किफायती और सीधा माध्यम है।
मीडिया कंपनी B.A.G. Films and Media Limited ने एफएम रेडियो कारोबार के लिए एक नई कंपनी बनाई है।
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Vikas Saxena
मीडिया कंपनी B.A.G. Films and Media Limited ने एफएम रेडियो कारोबार के लिए एक नई कंपनी बनाई है। कंपनी ने शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि उसकी सहायक कंपनी स्काईलाइन रेडियो नेटवर्क (Skyline Radio Network Limited) ने स्काईलाइन एफएम रेडियो नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड (Skyline FM Radio Network Private Limited) नाम से एक पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बनाई है। इसके साथ ही नई कंपनी B.A.G. Films and Media की स्टेप-डाउन पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बन गई है।
कंपनी के मुताबिक, Skyline FM Radio Network Private Limited दिल्ली में कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत नई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में 3 अक्टूबर 2026 को गठित हुई है।
एफएम रेडियो प्रसारण के लिए बनाई गई कंपनी
नई कंपनी का कारोबार एफएम रेडियो प्रसारण उद्योग से जुड़ा होगा। इसका उद्देश्य एफएम रेडियो प्रसारण केंद्रों को स्थापित करना, उनका स्वामित्व रखना, प्रबंधन करना, उनका अधिग्रहण करना और उनका संचालन करना है।
स्काईलाइन रेडियो नेटवर्क के पास 100% हिस्सेदारी
Skyline FM Radio Network Private Limited में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी Skyline Radio Network Limited के पास है। Skyline Radio Network Limited, B.A.G. Films and Media की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। इसी वजह से नई कंपनी B.A.G. Films and Media की स्टेप-डाउन सहायक कंपनी बन गई है।
कंपनी ने बताया कि यह एक नई गठित कंपनी है, इसलिए इसके पिछले तीन वर्षों के कारोबार का विवरण लागू नहीं होता। इसी तरह इसके लिए किसी सरकारी या नियामकीय मंजूरी की जरूरत नहीं बताई गई है। नई कंपनी में शुरुआती शेयर पूंजी का निवेश नकद के जरिए और मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन की प्रारंभिक शेयर सदस्यता के तहत अंकित मूल्य पर किया गया है।
B.A.G. Films and Media ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई कंपनी उसके लिए संबंधित पक्ष यानी रिलेटेड पार्टी होगी।
म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड को उत्तर प्रदेश जीएसटी अथॉरिटी की ओर से करीब 11.57 करोड़ रुपये का शो कॉज नोटिस मिला है।
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Vikas Saxena
एफएम 'रेडियो सिटी' की ऑपरेटर कंपनी म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड को उत्तर प्रदेश गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) अथॉरिटी की ओर से करीब 11.57 करोड़ रुपये का शो कॉज नोटिस मिला है। कंपनी ने 22 सितंबर 2026 को स्टॉक एक्सचेंजों को इसकी जानकारी दी।
कंपनी के मुताबिक, यह नोटिस लखनऊ स्थित स्टेट जीएसटी अथॉरिटी के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय की ओर से भेजा गया है। नोटिस 21 सितंबर 2026 को जारी हुआ और उसी दिन कंपनी को मिल गया। इस नोटिस में वित्त वर्ष 2022-23 के लिए कम टैक्स जमा करने और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत या ज्यादा लाभ लेने का आरोप लगाया गया है।
कंपनी ने बताया कि नोटिस में कुल करीब 11,57,81,759 रुपये की मांग बताई गई है। इसमें करीब 10,52,56,145 रुपये टैक्स और 1,05,25,614 रुपये पेनल्टी शामिल है।
नोटिस में GSTR-7/GSTR-8 और GSTR-3B में दिखाई गई टैक्स देनदारी में अंतर का जिक्र किया गया है। इसके आधार पर करीब 5,723.81 लाख रुपये के आउटपुट टैक्स के कम भुगतान का आरोप लगाया गया है, जिस पर 18 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाया गया है।
इसके अलावा, कुछ वेंडरों से ली गई सप्लाई पर कंपनी की ओर से करीब 6,72,923 रुपये IGST और 7,76,682 रुपये-7,76,682 रुपये CGST और SGST का इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने पर भी सवाल उठाया गया है। जीएसटी अथॉरिटी के अनुसार, ये खर्च कारोबार से जुड़े नहीं थे और इसलिए इन पर ITC का लाभ नहीं मिलना चाहिए था।
इसके साथ ही रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत 639 रुपये CGST और 639 रुपये SGST कम जमा करने की बात भी नोटिस में कही गई है। इस पर लागू ब्याज भी शामिल है। हालांकि, म्यूजिक ब्रॉडकास्ट ने इन आरोपों से असहमति जताई है। कंपनी ने कहा है कि वह तय समय के भीतर जरूरी रिकॉर्ड और दस्तावेजों के साथ विस्तृत जवाब देगी।
कंपनी ने यह भी कहा है कि यह फिलहाल शो कॉज नोटिस है और इसे अंतिम मांग या आदेश नहीं माना जा सकता। कंपनी इस मामले में अपना पक्ष रखेगी और फिलहाल उसे किसी बड़े वित्तीय असर की उम्मीद नहीं है।
पारंपरिक ऑडियो माध्यम रेडियो के लिए विज्ञापन बाजार में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं। जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान रेडियो पर विज्ञापन की मात्रा पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 1.2% बढ़ी है
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Samachar4media Bureau
पारंपरिक ऑडियो माध्यम रेडियो के लिए विज्ञापन बाजार में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं। जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान रेडियो पर विज्ञापन की मात्रा पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 1.2% बढ़ी है। इससे संकेत मिलता है कि रेडियो पर विज्ञापन की मांग धीरे-धीरे वापस आ रही है। हालांकि, विज्ञापन का बड़ा हिस्सा अभी भी कुछ चुनिंदा क्षेत्रों और बाजारों तक ही सीमित है।
TAM AdEx के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी-जुलाई 2026 में रेडियो विज्ञापन की मात्रा जनवरी-जुलाई 2024 की तुलना में 5% ज्यादा रही। इस अध्ययन में आरसीएस इंडिया से जुड़े 122 से ज्यादा रेडियो स्टेशनों को शामिल किया गया है और विज्ञापन को प्रसारण के सेकंड के आधार पर मापा गया है।
10 प्रमुख क्षेत्रों का 92% हिस्सा
आंकड़ों के मुताबिक, रेडियो विज्ञापन का बाजार कुछ खास क्षेत्रों पर काफी निर्भर है। जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान टॉप 10 क्षेत्रों की कुल रेडियो विज्ञापन मात्रा में करीब 92% हिस्सेदारी रही।
इस दौरान सेवा क्षेत्र सबसे आगे रहा। अलग-अलग श्रेणियों की बात करें तो संपत्ति और रियल एस्टेट सबसे ज्यादा विज्ञापन देने वाली श्रेणी रही। इसका कुल रेडियो विज्ञापन में 17% हिस्सा रहा। इस श्रेणी ने जनवरी-जुलाई 2025 की तरह इस साल भी पहला स्थान बनाए रखा।
रियल एस्टेट रेडियो पर तेजी से बढ़ने वाली श्रेणियों में भी शामिल रहा। जनवरी-जुलाई 2026 में इसके विज्ञापन में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 20% बढ़ोतरी हुई।
बीमा और NBFC के विज्ञापन में तेज बढ़ोतरी
वित्तीय सेवाओं से जुड़ी श्रेणियों ने भी रेडियो विज्ञापन को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। जीवन बीमा के विज्ञापन में 79%, जबकि कॉरपोरेट-NBFC के विज्ञापन में 64% की बढ़ोतरी हुई। इलेक्ट्रॉनिक्स और टिकाऊ सामान की खुदरा दुकानों के विज्ञापन में 27%, आभूषण की खुदरा दुकानों में 16% और कारों के विज्ञापन में 8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
टॉप 10 तेजी से बढ़ने वाली श्रेणियों में कहीं से भी बैंकिंग श्रेणी की विज्ञापन मात्रा छह गुना बढ़ी। वहीं, पाचन से जुड़े उत्पादों के विज्ञापन में 82%, खाद्य तेल में 92% और बिना डॉक्टर की पर्ची मिलने वाले उत्पादों की श्रेणी में 66% की बढ़ोतरी हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान 140 से ज्यादा श्रेणियों में रेडियो विज्ञापन बढ़ा, यानी यह बढ़ोतरी सिर्फ कुछ चुनिंदा श्रेणियों तक सीमित नहीं रही।
मारुति सुजुकी सबसे बड़ा विज्ञापनदाता
विज्ञापनदाताओं की बात करें तो मारुति सुजुकी इंडिया ने जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान रेडियो पर अपना पहला स्थान बरकरार रखा। हालांकि, टॉप 10 विज्ञापनदाताओं की सूची में बदलाव भी देखने को मिला। इस सूची में शामिल 10 में से तीन विज्ञापनदाता नए थे।
ब्रैंड के स्तर पर विमल पान मसाला रेडियो पर सबसे ज्यादा विज्ञापन करने वाला ब्रैंड रहा। इसके बाद मुथूट फाइनेंशियल एंटरप्राइजेज और मारुति सुजुकी अरेना का स्थान रहा। इसके बाद भारतीय स्टेट बैंक, Gaana.com और पेट सफा शीर्ष ब्रैंडों में शामिल रहे। मारुति सुजुकी के ई विटारा और ग्रैंड विटारा भी टॉप 10 ब्रैंडों में रहे। सूची में एलआईसी बीमा लक्ष्मी और डॉ. ऑर्थो रेंज ऑफ प्रोडक्ट्स भी शामिल रहे।
जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान 7,500 से ज्यादा ब्रैंडों ने रेडियो पर विज्ञापन दिया। हालांकि, टॉप 10 ब्रैंडों की कुल हिस्सेदारी सिर्फ 11% रही। इससे पता चलता है कि रेडियो पर विज्ञापन देने वाले ब्रैंडों का आधार काफी व्यापक है।
टॉप 10 ब्रैंडों में भी तीन नए नाम शामिल हुए। वहीं, पान मसाला भी इस दौरान टॉप 10 विज्ञापन श्रेणियों में पहुंच गया, जबकि 2025 की समान अवधि में यह इस सूची में शामिल नहीं था।
गुजरात और महाराष्ट्र सबसे आगे
राज्यों के स्तर पर रेडियो विज्ञापन में गुजरात और महाराष्ट्र पहले और दूसरे स्थान पर रहे। गुजरात की कुल रेडियो विज्ञापन मात्रा में 17%, जबकि महाराष्ट्र की 15% हिस्सेदारी रही। शीर्ष पांच राज्यों की कुल हिस्सेदारी 61% रही।
शहरों की बात करें तो जयपुर सबसे आगे रहा। इसके बाद नागपुर और इंदौर का स्थान रहा। टॉप 10 शहरों में नई दिल्ली, सूरत, हैदराबाद, अहमदाबाद, बेंगलुरु, लखनऊ और भोपाल भी शामिल रहे। टॉप 10 शहरों की कुल रेडियो विज्ञापन मात्रा में 63% हिस्सेदारी रही। यानी रेडियो की पहुंच देशभर में होने के बावजूद विज्ञापन की मांग का बड़ा हिस्सा अभी भी प्रमुख शहरों में केंद्रित है।
शाम का समय विज्ञापनदाताओं की पहली पसंद
रेडियो पर विज्ञापन देने वालों की पसंद में शाम का समय सबसे आगे रहा। इसके बाद सुबह और दोपहर का स्थान रहा। जनवरी-जुलाई 2026 में कुल रेडियो विज्ञापन मात्रा में शाम के समय की हिस्सेदारी 38%, सुबह की 32% और दोपहर की 28% रही। रात के समय विज्ञापन की हिस्सेदारी सिर्फ 2% रही। इस तरह सुबह और शाम के समय को मिलाकर रेडियो के कुल विज्ञापनों में 70% हिस्सेदारी रही।
20 से 40 सेकंड के विज्ञापन सबसे ज्यादा
विज्ञापन की अवधि की बात करें तो छोटे विज्ञापन अब भी रेडियो पर सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। 20 से 40 सेकंड वाले विज्ञापनों की कुल विज्ञापन मात्रा में 66% हिस्सेदारी रही, जो 2025 की समान अवधि में 65% थी।
20 सेकंड से छोटे विज्ञापनों की हिस्सेदारी 28% रही। यानी 40 सेकंड से कम अवधि वाले विज्ञापनों की कुल हिस्सेदारी रिपोर्ट के आंकड़ों के आधार पर 94% रही। रिपोर्ट में अलग से 20-40 सेकंड और 20 सेकंड से छोटे विज्ञापनों को मिलाकर 93% हिस्सेदारी बताई गई है। वहीं, 45 से 60 सेकंड वाले विज्ञापनों की हिस्सेदारी 4% और 60 सेकंड से ज्यादा अवधि वाले विज्ञापनों की हिस्सेदारी 2% रही।
कुल मिलाकर, जनवरी-जुलाई 2026 के आंकड़े बताते हैं कि रेडियो विज्ञापन बाजार में मामूली सुधार जारी है। बीमा, NBFC, खाद्य तेल, पाचन से जुड़े उत्पाद और बिना डॉक्टर की पर्ची मिलने वाले उत्पादों जैसी श्रेणियों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। साथ ही, 140 से ज्यादा श्रेणियों और 7,500 से ज्यादा ब्रैंडों की भागीदारी बताती है कि रेडियो अब भी कई तरह के कारोबारों के लिए विज्ञापन का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है।
म्यूजिक कंपनी TIPS Music Limited ने शेयर बायबैक (Buyback) के तहत 9 सितंबर 2026 को कुल 488 इक्विटी शेयरों की वापस खरीदारी (Buyback) की है।
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Vikas Saxena
म्यूजिक कंपनी TIPS Music Limited ने शेयर बायबैक (Buyback) के तहत 9 सितंबर 2026 को कुल 488 इक्विटी शेयरों की वापस खरीदारी (Buyback) की है। कंपनी ने यह जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में साझा की है।
कंपनी के मुताबिक, ITI Securities Broking Limited को बायबैक के लिए ब्रोकर नियुक्त किया गया है। इसके जरिए 9 सितंबर को BSE से 100 शेयर और NSE से 388 शेयर खरीदे गए। कंपनी ने इस दौरान कुल 488 शेयरों की खरीदारी की। इन शेयरों को खरीदने की औसत कीमत ₹649 प्रति शेयर रही। यह कीमत ट्रांजेक्शन कॉस्ट को छोड़कर है।
कंपनी ने बताया कि 9 सितंबर को बायबैक के तहत खरीदे गए कुल शेयरों की संख्या 488 रही। वहीं, इस दिन किसी भी शेयर को Closed Out नहीं किया गया। कंपनी के मुताबिक, पिछले दिन तक भी Closed Out की मात्रा शून्य थी।
यह बायबैक SEBI (Buyback of Securities) Regulations, 2018 के प्रावधानों के तहत खुले बाजार (Open Market) में स्टॉक एक्सचेंज के जरिए किया जा रहा है। कंपनी ने इसके तहत रेगुलेशन 18(i) के अनुसार 9 सितंबर की बायबैक गतिविधि की डेली रिपोर्ट दाखिल की है।
TIPS Music ने बताया कि बायबैक से जुड़ी जानकारी कंपनी की वेबसाइट के साथ-साथ BSE और NSE की वेबसाइटों पर भी उपलब्ध रहेगी। गौरतलब है कि TIPS Music Limited का पहले नाम Tips Industries Limited था। कंपनी म्यूजिक कंटेंट और उससे जुड़े कारोबार में सक्रिय है।
बायबैक का मतलब क्या है?
बायबैक का मतलब है कि कंपनी अपने ही जारी किए गए शेयरों को बाजार से वापस खरीदती है। इससे बाजार में मौजूद कंपनी के शेयरों की संख्या कम हो सकती है। कंपनियां आमतौर पर बायबैक का इस्तेमाल शेयरधारकों को पैसा लौटाने और अपनी पूंजी संरचना को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए करती हैं।