रियल मनी गेमिंग (RMG) और कैसीनो कंपनियों को जीएसटी विवाद में बड़ी राहत मिलती दिख रही है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
रियल मनी गेमिंग (RMG) और कैसीनो कंपनियों को जीएसटी विवाद में बड़ी राहत मिलती दिख रही है। 'इकनॉमिक टाइम्स' की रिपोर्ट अब तक जारी शुरुआती अंतिम आदेशों के मुताबिक, टैक्स अधिकारियों ने कम से कम चार गेमिंग कंपनियों के मामलों में जीएसटी की मांग को काफी कम कर दिया है। खास बात यह है कि कंपनी के निदेशकों पर व्यक्तिगत जुर्माना या व्यक्तिगत टैक्स देनदारी भी नहीं डाली गई है।
यह मामला ऑनलाइन गेमिंग और कैसीनो कंपनियों तथा जीएसटी विभाग के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विभाग की ओर से जारी किए जा रहे अंतिम आदेशों में टैक्स की मांगों में बड़ी कमी देखने को मिली है।
Pacific Gaming की मांग 721 करोड़ से घटकर 100.8 करोड़ रुपये
रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु से संचालित ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग कंपनी Pacific Gaming के मामले में जीएसटी विभाग के शो-कॉज नोटिस में करीब 721 करोड़ रुपये की मांग बताई गई थी। हालांकि, अंतिम आदेश में यह मांग घटकर करीब 100.8 करोड़ रुपये रह गई।
इसी तरह शेयर बाजार में सूचीबद्ध Delta Corp, जो गोवा और सिक्किम में कैसीनो कारोबार चलाती है, और उसकी दो सहायक कंपनियों के मामले में भी बड़ी राहत मिली है। तीनों कंपनियों के लिए शो-कॉज नोटिस में कुल करीब 16,000 करोड़ रुपये की जीएसटी मांग थी, जो अंतिम आदेश में घटकर करीब 117 करोड़ रुपये रह गई।
ये अंतिम आदेश जीएसटी कमिश्नरेट के वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता वाली निर्णायक अथॉरिटी की ओर से जारी किए गए हैं।
अभी बाकी कंपनियों के आदेश का इंतजार
हालांकि, गेमिंग इंडस्ट्री की नजर अब बाकी मामलों पर है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों में आदेश जारी करने के लिए 14 अक्टूबर की समयसीमा तय की है।
दो अन्य रियल मनी गेमिंग कंपनियों के मामलों में अधिकारियों ने फिलहाल जीएसटी की मांग कम करने से इनकार कर दिया है। अधिकारियों ने इन कंपनियों से कुछ और जानकारी मांगी है।
इंडस्ट्री की नजर खास तौर पर Gameskraft, Dream11 और Games24/7 जैसी बड़ी कंपनियों के मामलों पर है। इन कंपनियों को 20,000 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की जीएसटी मांग से जुड़े नोटिस मिल चुके हैं।
डायरेक्टर्स पर व्यक्तिगत कार्रवाई नहीं
इन शुरुआती आदेशों से इंडस्ट्री को एक और बड़ी राहत मिली है। कंपनी के प्रमोटर्स और डायरेक्टर्स पर व्यक्तिगत टैक्स देनदारी या जुर्माना नहीं लगाया गया है।
जीएसटी कानून के तहत कुछ परिस्थितियों में कंपनी से टैक्स की रकम वसूल नहीं होने पर उसके डायरेक्टर्स की संपत्ति, बैंक खाते या व्यक्तिगत संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, इसके लिए यह साबित करना जरूरी होता है कि टैक्स की वसूली कंपनी से नहीं हो पा रही है और इसमें डायरेक्टर की गंभीर लापरवाही, गलत आचरण या ड्यूटी में चूक की भूमिका रही है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट आशीष करुंडिया के मुताबिक, पहले यह साबित करना जरूरी है कि कंपनी से बकाया रकम वसूल नहीं की जा सकती। इसके बाद ही जीएसटी कानून की धारा 89 के तहत डायरेक्टर की व्यक्तिगत देनदारी पर विचार किया जा सकता है।
GST काउंसिल से भी राहत की मांग
करीब एक दर्जन रियल मनी गेमिंग कंपनियों के संस्थापकों ने मिलकर जीएसटी काउंसिल से भी व्यक्तिगत देनदारी से राहत देने की अपील की है।
इंडस्ट्री ने जीएसटी काउंसिल से जीएसटी एक्ट की धारा 11A का इस्तेमाल करते हुए टैक्स की मांगों को माफ करने की भी मांग की है। जीएसटी काउंसिल की बैठक 7 अक्टूबर को होनी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक कैसे लगेगा GST?
जिन मामलों में अंतिम आदेश जारी हुए हैं, उनमें विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाया है। इसके मुताबिक, रियल मनी गेमिंग में जीएसटी खिलाड़ी की शुरुआती जमा रकम पर लगाया जाएगा, न कि उस रकम पर जो खिलाड़ी अपनी जीत की राशि जोड़कर दोबारा दांव में लगाता है।
उदाहरण के तौर पर, अगर कोई खिलाड़ी 10,000 रुपये जमा करता है और 2,000 रुपये जीतकर कुल 12,000 रुपये दोबारा खेल में लगाता है, तो जीएसटी 12,000 रुपये पर नहीं, बल्कि 10,000 रुपये की शुरुआती जमा रकम पर लगाया जाएगा।
वहीं, अगर खिलाड़ी 12,000 रुपये निकाल लेता है और बाद में 7,000 रुपये दोबारा जमा करके खेलता है, तो इस नई जमा रकम यानी 7,000 रुपये पर जीएसटी लगेगा।
अंतिम टैक्स मांगों की गणना जुलाई 2017 से 1 अक्टूबर 2023 के विवादित समय के लिए 28 प्रतिशत की दर से की गई है। हालांकि, जुलाई 2017 से 24 जनवरी 2018 के बीच करीब छह महीने की अवधि में लागू दर 18 प्रतिशत थी।
सिनेमा हॉल में फिल्म शुरू होने से पहले दिखाए जाने वाले विज्ञापनों और ट्रेलर को लेकर हैदराबाद की एक कंज्यूमर कमीशन ने PVR INOX पर 75 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सिनेमा हॉल में फिल्म शुरू होने से पहले दिखाए जाने वाले विज्ञापनों और ट्रेलर को लेकर हैदराबाद की एक कंज्यूमर कमीशन ने PVR INOX पर 75 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कमीशन ने माना कि तय समय के बाद भी विज्ञापन और दूसरे कंटेंट दिखाने से फिल्म शुरू होने में देरी हुई, जो सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के दायरे में आता है।
मामला 20 जून 2025 का है। हैदराबाद के मूसीरामबाग स्थित PVR के नेक्स्ट गैलेरिया मॉल आउटलेट में तेलुगु फिल्म 'कुबेर' की रात 10:35 बजे की स्क्रीनिंग थी। अधिवक्ता चंदा अथीश कुमार ने इस शो के लिए दो टिकट बुक किए थे।
शिकायत के मुताबिक, शो का तय समय निकलने के बाद भी सिनेमा हॉल में व्यावसायिक विज्ञापन और फिल्म के ट्रेलर चलते रहे। ये करीब 10:52 बजे तक दिखाए गए। इसके बाद जनहित जागरूकता से जुड़े वीडियो दिखाए गए। इस वजह से फिल्म करीब 22 मिनट की देरी से शुरू हुई।
देर से फिल्म शुरू होने से सफर भी प्रभावित
चंदा अथीश कुमार का कहना था कि रात के शो में हुई इस देरी का असर उनके वापस लौटने के सफर पर भी पड़ा और उनका सफर रात 3 बजे के बाद तक खिंच गया।
उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी एक कार्यालय ज्ञापन का भी हवाला दिया। उनका कहना था कि जनहित जागरूकता वाले स्वीकृत वीडियो की निर्धारित अवधि दो मिनट थी और इसके मुकाबले लंबे समय तक प्री-फिल्म कंटेंट दिखाना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है।
PVR INOX ने क्या कहा?
PVR INOX ने शिकायत का विरोध करते हुए कहा कि विज्ञापन, फिल्म ट्रेलर और जनहित से जुड़े वीडियो उसके कारोबारी कामकाज का हिस्सा हैं।
कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट के KC Cinema बनाम जम्मू-कश्मीर राज्य मामले के फैसले का भी हवाला दिया। कंपनी का तर्क था कि सिनेमा हॉल निजी संपत्ति हैं और सामाजिक हित को ध्यान में रखते हुए उचित शर्तें लागू कर सकते हैं।हालांकि, कंज्यूमर कमीशन ने कंपनी की इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
कमीशन ने क्या आदेश दिया?
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-II, हैदराबाद ने PVR Cinemas और PVR INOX को शिकायतकर्ता को कुल 25 हजार रुपये देने का आदेश दिया है। इसमें 20 हजार रुपये मुआवजे और 5 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के लिए हैं। इसके अलावा कमीशन ने 50 हजार रुपये का दंडात्मक हर्जाना भी लगाया है, जिसे जिला उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा करना होगा। इस तरह कुल रकम 75 हजार रुपये होती है।
कमीशन ने कहा कि तय समय के बाद व्यावसायिक कंटेंट दिखाते रहना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है। कंपनियों को इस प्रथा को रोकने और भविष्य में इसे दोबारा नहीं दोहराने का भी निर्देश दिया गया है।
PVR INOX को आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन का समय दिया गया है। तय अवधि में मुआवजा नहीं देने पर डिफॉल्ट की तारीख से 9 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के रीजनल ऑफिसर और एडिशनल रीजनल ऑफिसर पदों पर प्रतिनियुक्ति के आधार पर भर्ती को लेकर जारी वैकेंसी सर्कुलर में संशोधन किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के रीजनल ऑफिसर और एडिशनल रीजनल ऑफिसर पदों पर प्रतिनियुक्ति के आधार पर भर्ती को लेकर जारी वैकेंसी सर्कुलर में संशोधन किया है। मंत्रालय ने 1 अक्टूबर 2026 को जारी करेक्शन नोटिस में पात्रता शर्तों में बदलाव किया है।
मंत्रालय ने 17 सितंबर 2026 को CBFC के चेन्नई, कटक, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई स्थित रीजनल ऑफिस में रीजनल ऑफिसर के पदों के लिए वैकेंसी जारी की थी। इन पदों का पे मैट्रिक्स लेवल-12 है, जिसमें वेतन ₹78,800 से ₹2,09,200 तक है। इसके अलावा मुंबई स्थित CBFC ऑफिस में एडिशनल रीजनल ऑफिसर के एक पद के लिए भी वैकेंसी निकाली गई थी। इस पद का पे मैट्रिक्स लेवल-11 है और वेतन ₹67,700 से ₹2,08,700 तक है।
क्या बदला है?
नए करेक्शन नोटिस में मंत्रालय ने कहा है कि पहले जारी वैकेंसी सर्कुलर के एनेक्सर-1 में पात्रता शर्तों के तहत “Indian Administrative Service” शब्द का इस्तेमाल किया गया था। अब दोनों जगहों पर इसे बदलकर “All India Service” पढ़ा जाएगा। यानी रीजनल ऑफिसर पद के लिए पात्रता में अब “All India Service या Central Service Group ‘A’” के अधिकारी शामिल होंगे। इसी तरह एडिशनल रीजनल ऑफिसर पद के लिए भी “All India Service या Central Service Group A” के उपयुक्त अधिकारी पात्र होंगे।
मंत्रालय ने साफ किया है कि वैकेंसी सर्कुलर की बाकी सभी शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
60 दिनों के भीतर भेजना होगा आवेदन
मंत्रालय के मुताबिक, सभी तरह से पूरा आवेदन करेक्शन नोटिस के ‘Employment News’ में प्रकाशित होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी (फिल्म्स), कार्तव्य भवन-2, नई दिल्ली को भेजना होगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों, केंद्र सरकार के विभागों, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी इस संशोधन की जानकारी भेजी है। CBFC को भी इसे अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने और संबंधित केंद्रीय सरकारी कार्यालयों के बीच प्रसारित करने को कहा गया है।
डिज्नी अपने टेलीविजन कारोबार में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। वॉल्ट डिज्नी की योजना के तहत टीवी बिजनेस का पुनर्गठन किया जा सकता है
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिज्नी अपने टेलीविजन कारोबार में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। वॉल्ट डिज्नी की योजना के तहत टीवी बिजनेस का पुनर्गठन किया जा सकता है, जिसमें सैकड़ों एम्प्लॉयीज की छंटनी और अलग-अलग डिवीजनों को एक साथ लाने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने यह रिपोर्ट दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना का नेतृत्व डिज्नी एंटरटेनमेंट टेलीविजन की चेयरमैन डेबरा ओ’कॉनेल कर रही हैं। हालांकि, यह योजना अभी अंतिम रूप में नहीं है और साल के अंत से पहले इसमें बदलाव हो सकते हैं।
स्ट्रीमिंग को ध्यान में रखकर होगा बदलाव
इस पुनर्गठन का मुख्य उद्देश्य डिज्नी के टीवी कारोबार को पारंपरिक टीवी चैनलों और ब्रांड्स के बजाय स्ट्रीमिंग दर्शकों को ध्यान में रखकर व्यवस्थित करना है।
दरअसल, दुनियाभर में लोग तेजी से पारंपरिक केबल और ब्रॉडकास्ट टीवी से दूर होकर स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की तरफ जा रहे हैं। इसे आम तौर पर कॉर्ड-कटिंग कहा जाता है। इससे मीडिया कंपनियों के पुराने केबल और ब्रॉडकास्ट नेटवर्क से होने वाली कमाई पर दबाव पड़ा है। वहीं, स्ट्रीमिंग कारोबार से होने वाली कमाई अभी तक इस कमी की पूरी भरपाई नहीं कर पाई है। इसी वजह से कई मीडिया कंपनियां लागत कम करने और अपने कारोबार को नए तरीके से व्यवस्थित करने पर जोर दे रही हैं।
ABC, 20th Television और Hulu Originals पर भी असर
रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित बदलाव का असर कंपनी की कई प्रमुख टीवी यूनिट्स के अधिकारियों पर पड़ सकता है। इनमें ABC Entertainment, 20th Television, Hulu Originals और Freeform शामिल हैं।
इस बदलाव में कंपनी अपने टीवी कारोबार को इस तरह व्यवस्थित करना चाहती है कि दर्शकों की जरूरत और स्ट्रीमिंग की मांग केंद्र में रहे, न कि कई दशक पहले पारंपरिक टीवी के लिए बनाए गए अलग-अलग ब्रांड और चैनल।
नए CEO के आने के बाद कई बदलाव
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में जोश डी’अमारो के CEO बनने के बाद डिज्नी में यह कई पुनर्गठनों की कड़ी में नया बदलाव है। डी’अमारो इससे पहले कंपनी के पार्क्स कारोबार से जुड़े रहे हैं।
डिज्नी पहले भी लागत कम करने के लिए एम्प्लॉयीज की संख्या घटा चुकी है। पिछले साल कंपनी ने फिल्म और टीवी मार्केटिंग, टीवी पब्लिसिटी, कास्टिंग और डेवलपमेंट से जुड़े विभागों में कई सौ एम्प्लॉयीज की नौकरियां कम की थीं।
इस साल भी कई विभागों में हुई छंटनी
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में डिज्नी पहले ही मार्केटिंग, पिक्सार, ABC News और ESPN समेत कई हिस्सों में एम्प्लॉयीज की संख्या कम कर चुकी है। मंगलवार को भी कंपनी ने कुछ सौ एम्प्लॉयीज की छंटनी की, जिनमें ज्यादातर कर्मचारी ह्यूमन रिसोर्स और टेक्नोलॉजी विभागों से जुड़े थे।
डिज्नी की ओर से प्रस्तावित टीवी पुनर्गठन पर रॉयटर्स के सवाल का तत्काल कोई जवाब नहीं दिया गया।
जिनेमा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट लिमिटेड (Zinema Media & Entertainment) के शेयरधारकों ने कंपनी की 42वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में 24.99 लाख तक इक्विटी शेयर जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जिनेमा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट लिमिटेड (Zinema Media & Entertainment) के शेयरधारकों ने कंपनी की 42वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में 24.99 लाख तक इक्विटी शेयर जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह बैठक 30 सितंबर 2026 को कंपनी के चेन्नई स्थित रजिस्टर्ड ऑफिस में हुई थी। कंपनी ने 1 अक्टूबर को बैठक के मतदान परिणाम बीएसई के पास दाखिल किए।
कंपनी के मुताबिक, इन शेयरों को 10 रुपये प्रति शेयर के इश्यू प्राइस पर जारी किया जाएगा। इस तरह कंपनी को कुल 2.49 करोड़ रुपये तक की राशि मिल सकती है। शेयरों का आवंटन प्रमोटर वर्ग के बाहर के आवंटियों को प्राइवेट प्लेसमेंट और प्रेफरेंशियल आधार पर किया जाना है। यह प्रक्रिया 19 दिसंबर 2024 के नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के आदेश के अनुपालन में की जा रही है।
AGM में इन प्रस्तावों को भी मंजूरी
बैठक में वित्तीय मामलों के साथ-साथ कंपनी के प्रशासन और पूंजी से जुड़े कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें प्रमुख रूप से:
11 शेयरधारकों ने मतदान में लिया हिस्सा
स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट के अनुसार, 23 सितंबर 2026 की कट-ऑफ तारीख पर कंपनी के रिकॉर्ड में कुल 155 शेयरधारक थे। इनमें से केवल 11 फोलियो ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लिया। इनमें 3 प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप के शेयरधारक और 8 पब्लिक-नॉन-इंस्टीट्यूशनल शेयरधारक शामिल थे। पब्लिक इंस्टीट्यूशनल श्रेणी से किसी शेयरधारक ने मतदान नहीं किया।
कुल 28,06,500 वोट पड़े और सभी वोट प्रस्तावों के पक्ष में रहे। किसी भी प्रस्ताव के खिलाफ कोई वोट नहीं पड़ा और किसी भी एजेंडा आइटम में अमान्य वोट दर्ज नहीं किया गया।
मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर फिर नियुक्त हुए भास्करन सत्य प्रकाश
भास्करन सत्य प्रकाश, जो AGM की अध्यक्षता भी कर रहे थे, को विशेष प्रस्ताव के जरिए दोबारा मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया। इसके अलावा, रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के बाद उन्हें एक साधारण प्रस्ताव के जरिए फिर से डायरेक्टर नियुक्त किया गया।
कंपनी की AGM दोपहर 3 बजे शुरू हुई और 3:50 बजे समाप्त हुई। इस दौरान मतदान की प्रक्रिया भी पूरी की गई।
कंपनी द्वारा दाखिल किए गए मतदान परिणामों के अनुसार, प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट से जुड़े विशेष प्रस्ताव समेत AGM में रखे गए सभी प्रस्तावों को हिस्सा लेने वाले शेयरधारकों का 100 फीसदी समर्थन मिला।
प्रभात एंटरटेनमेंट लिमिटेड, जिसे पहले प्रभात टेक्नोलॉजीज के नाम से जाना जाता था, ने अपनी 18वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में रखे गए सभी 9 प्रस्तावों को शेयरधारकों की मंजूरी हासिल कर ली है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रभात एंटरटेनमेंट लिमिटेड, जिसे पहले प्रभात टेक्नोलॉजीज के नाम से जाना जाता था, ने अपनी 18वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में रखे गए सभी 9 प्रस्तावों को शेयरधारकों की मंजूरी हासिल कर ली है। यह बैठक 30 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई।
शेयरधारकों ने वित्त वर्ष 2025-26 के स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी देने के साथ-साथ ऑडिटर्स की नियुक्ति समेत सभी प्रस्तावों के पक्ष में लगभग सर्वसम्मति से मतदान किया।
99.99999% वोट प्रस्तावों के पक्ष में
स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट के मुताबिक, सभी प्रस्तावों पर कुल 85,05,582 वोट पड़े। इनमें से 85,05,581 वोट प्रस्तावों के पक्ष में रहे, जबकि सिर्फ 1 वोट प्रस्ताव के खिलाफ पड़ा। इस तरह हर प्रस्ताव को 99.99999% वोट के साथ मंजूरी मिली।
कंपनी के बोर्ड ने 5 सितंबर 2026 को शेखावत एंड एसोसिएट्स की मोनिका शेखावत को इस बैठक के लिए स्क्रूटिनाइजर नियुक्त किया था।
866 में से 32 शेयरधारकों ने लिया हिस्सा
23 सितंबर 2026 की रिकॉर्ड डेट पर कंपनी के कुल 866 शेयरधारक थे। इनमें से सिर्फ 32 शेयरधारकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए AGM में हिस्सा लिया। इनमें 4 शेयरधारक प्रमोटर ग्रुप से और 28 शेयरधारक पब्लिक कैटेगरी से थे। किसी भी शेयरधारक ने व्यक्तिगत रूप से या प्रॉक्सी के जरिए बैठक में हिस्सा नहीं लिया। बैठक पूरी तरह डिजिटल माध्यम से आयोजित की गई।
वोटिंग का आंकड़ा

AGM में किन प्रस्तावों को मिली मंजूरी?
शेयरधारकों ने कंपनी के कामकाज, ऑडिट और वित्तीय अधिकारों से जुड़े कई प्रस्तावों को मंजूरी दी। इनमें प्रमुख प्रस्ताव इस तरह हैं:
प्रमोटर और पब्लिक शेयरधारकों की वोटिंग में अंतर
वोटिंग आंकड़ों के मुताबिक, प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप ने अपनी हिस्सेदारी के 95.45% के बराबर वोट डाले, जबकि पब्लिक नॉन-इंस्टीट्यूशनल शेयरधारकों की वोटिंग भागीदारी 41.87% रही।
पब्लिक कैटेगरी से सिर्फ एक वोट प्रस्तावों के खिलाफ पड़ा। यह एक शेयर के बराबर था, जबकि कुल 85 लाख से ज्यादा वोट डाले गए थे।
इस तरह AGM में रखे गए सभी प्रस्तावों को लगभग पूरी तरह शेयरधारकों का समर्थन मिला और कंपनी के ऑडिट, निदेशक नियुक्तियों तथा वित्तीय अधिकारों से जुड़े प्रस्ताव मंजूर हो गए।
इरोज इंटरनेशनल मीडिया (Eros International Media Limited) की 32वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 30 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की गई।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इरोज इंटरनेशनल मीडिया (Eros International Media Limited) की 32वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 30 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की गई। बैठक में कंपनी के सदस्यों ने कुल चार प्रस्तावों पर वोटिंग की। कंपनी के स्क्रूटिनाइजर C R Bhagwat & Associates की रिपोर्ट के मुताबिक, चारों प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ पास हो गए।
कंपनी ने AGM से पहले सदस्यों को Remote E-Voting की सुविधा दी थी। इसके अलावा, जिन सदस्यों ने पहले वोट नहीं किया था, उन्हें AGM के दौरान E-Voting के जरिए वोट करने का मौका दिया गया। Remote E-Voting 26 सितंबर 2026 से 29 सितंबर 2026 तक उपलब्ध रही।
क्या थे चार प्रस्ताव?
पहला प्रस्ताव: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कंपनी के Audited Standalone और Consolidated Financial Statements को मंजूरी देना। इस प्रस्ताव के पक्ष में 99.23% वोट पड़े, जबकि 0.77% वोट विरोध में रहे।
दूसरा प्रस्ताव: प्रदीप द्विवेदी को रोटेशन के आधार पर दोबारा डायरेक्टर नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा गया था। इस प्रस्ताव को 99.19% वोट मिले, जबकि 0.81% वोट विरोध में रहे।
तीसरा प्रस्ताव: मनमोहन कुमार सरदाना को इंडिपेंडेंट नॉन-एग्जिक्यूटिव डायेरक्टर के रूप में दोबारा नियुक्त करने का प्रस्ताव था। इसे 99.18% वोट के साथ मंजूरी मिली, जबकि 0.82% वोट विरोध में पड़े।
चौथा प्रस्ताव: कंपनी के इंडिपेंडेंट डायेरक्टर को Companies Act की Schedule V के प्रावधानों के अनुसार पारिश्रमिक देने का प्रस्ताव रखा गया था। इस प्रस्ताव के पक्ष में 99.81% वोट पड़े और 0.19% वोट विरोध में रहे।
चारों प्रस्ताव हुए पास
स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट के अनुसार, AGM में रखे गए प्रस्ताव संख्या 1, 2, 3 और 4 सभी जरूरी बहुमत के साथ पास हो गए। रिपोर्ट की तारीख 1 अक्टूबर 2026 है और इसे C R Bhagwat & Associates के प्रोपराइटर C. R. Bhagwat ने जारी किया है।
यहां उन्होंने बतौर एसोसिएट प्रड्यूसर और एंकर जॉइन किया है। सुरभि तिवारी ने कुछ दिनों पूर्व ही न्यूज़ इंडिया 24X7 (News India 24X7) में अपनी पारी को विराम दिया था।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पत्रकार और न्यूज एंकर सुरभि तिवारी करीब चार साल बाद फिर ‘जी मीडिया’ (Zee Media) की टीम में शामिल हो गई हैं। यहां उन्होंने जी (यूपी//यूके) में बतौर एसोसिएट प्रड्यूसर और एंकर जॉइन किया है। सुरभि तिवारी ने कुछ दिनों पूर्व ही न्यूज़ इंडिया 24X7 (News India 24X7) में अपनी पारी को विराम दिया था। वह यहां करीब ढाई साल से अपनी जिम्मेदारी संभाल रही थीं।
बता दें कि सुरभि तिवारी पूर्व में ‘जी हिन्दुस्तान’ में बतौर एंकर अपनी भूमिका निभा चुकी हैं। इसके अलावा वह ‘भारत24’, ‘न्यूज नेशन’ और ‘इंडिया न्यूज’ की टीम में भी शामिल रही हैं।
मूल रूप से बलिया (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली और बचपन में ही पश्चिम बंगाल जा बसीं सुरभि ने पत्रकारिता की पढ़ाई करते हुए ही मीडिया में अपने कदम बढ़ा दिए थे। उन्होंने सिलीगुड़ी कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है।
पढ़ाई के दौरान ही सुरभि ने बंगाल के एक लोकल चैनल में बतौर न्यूज एंकर अपने करियर की शुरुआत कर दी थी। इसके बाद वह वर्ष 2018 में दिल्ली आ गईं और यहां ‘भारती विद्या भवन‘ से पत्रकारिता में एक साल का डिप्लोमा किया।
इसके बाद सुरभि तिवारी ने एक भक्ति चैनल (कात्यायनी) से यहां अपने नए सफर की शुरुआत की। फिर यहां से अलविदा कहकर उन्होंने ‘नेशनल वॉइस‘ और ‘न्यूज1 इंडिया‘ न्यूज चैनल्स में बतौर एंकर अपनी जिम्मेदारी संभाली।
‘न्यूज1 इंडिया‘ में काम करते हुए ही उन्हें ‘इंडिया न्यूज‘ जॉइन करने का मौका मिला। करीब एक वर्ष तक बतौर एंकर उन्होंने यहां काम किया। इसके बाद कुछ महीने पहले यहां से बाय बोलकर पहले ‘न्यूज नेशन’ फिर ‘जी हिन्दुस्तान’ और ‘भारत24’ होती हुईं न्यूज़ इंडिया 24X7 पहुंची थीं, जहां से अलग होकर अब वह फिर जी मीडिया से जुड़ गई हैं।
समाचार4मीडिया की ओर से सुरभि तिवारी को उनके नए सफर के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।
जी ग्रुप के फाउंडर डॉ. सुभाष चंद्रा ने सोशल मीडिया पर लिखी पोस्ट में कहा, यह उपलब्धि सिर्फ मेरी नहीं, तकनीशियनों, कलाकारों, टीम के सदस्यों और दर्शकों की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जी ग्रुप के फाउंडर डॉ. सुभाष चंद्रा ने सोशल मीडिया पर ‘जी’ की 34 साल की यात्रा को याद करते हुए एक पोस्ट साझा की है। उन्होंने बताया कि 34 साल पहले जब इस सफर की शुरुआत हुई थी, तब एक कमरे में सिर्फ पांच लोग थे। चुनौतियां बड़ी थीं, लेकिन सपना स्पष्ट था- भारतीयों के लिए भारतीयों द्वारा तैयार किया गया मनोरंजन उपलब्ध कराना।
डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि 34 साल का यह सफर एक पूरी जिंदगी जैसा लगता है, फिर भी ऐसा महसूस होता है जैसे यह कल की ही बात हो। उन्होंने उस शुरुआत को याद किया, जब जी के सफर की शुरुआत सिर्फ पांच लोगों के साथ हुई थी।
उन्होंने कहा कि उस समय मुश्किलें बहुत थीं और परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन लक्ष्य साफ था। मकसद था कि भारत के लोगों के लिए भारतीयों द्वारा तैयार किया गया मनोरंजन सामने आए।
डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा कि आज पीछे मुड़कर देखने पर यह महसूस होता है कि उस एक कदम ने पूरे ब्रॉडकास्टिंग क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव शुरू किया। उनके मुताबिक, इस सफर ने 3 करोड़ से ज्यादा लोगों के लिए अवसर, करियर और आजीविका के रास्ते खोलने में भूमिका निभाई।
उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय सिर्फ खुद को देने के बजाय उन सभी लोगों को दिया, जिन्होंने जी को इस मुकाम तक पहुंचाने में योगदान दिया। उन्होंने खास तौर पर तकनीशियनों, कलाकारों, टीम के सदस्यों और दर्शकों का जिक्र करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उन सभी की है, जिन्होंने जी को अपने परिवार का हिस्सा बनाया।
डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपनी पोस्ट के अंत में 34 साल के इस सफर के लिए सभी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों ने एक विरासत तैयार की है, लेकिन अब नजरें भविष्य पर हैं और भारतीय इनोवेशन के जरिए आने वाले कल को नए सिरे से आकार देने पर फोकस है।
यह नियुक्ति उनकी कंपनी SwiftSeed Ventures के WOI India के साथ एकीकरण के बाद हुई है। दीक्षित ने SwiftSeed Ventures की स्थापना की थी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमर दीक्षित को WOI India का चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति उनकी कंपनी SwiftSeed Ventures के WOI India के साथ एकीकरण के बाद हुई है। दीक्षित ने SwiftSeed Ventures की स्थापना की थी।
अपनी नई भूमिका में अमर दीक्षित का फोकस WOI India को ऐसे इकोसिस्टम के तौर पर विकसित करने पर रहेगा, जो उद्यमियों को पूंजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, ज्ञान, संस्थानों, कॉरपोरेट्स, सरकारों और ग्लोबल नेटवर्क से जोड़ सके।
WOI India फिलहाल Startup Park Bangalore का संचालन करता है। यह 2 लाख वर्ग फुट से अधिक का इंफ्रास्ट्रक्चर है, जिसे स्टार्टअप्स के लिए तैयार किया गया है। इसके इकोसिस्टम में पांच वेंचर स्टूडियो और आठ Centres of Excellence भी शामिल हैं।
कंपनी के पास 45 से ज्यादा निवेश वाला पोर्टफोलियो भी है। अमर दीक्षित के मुताबिक, नई भूमिका में उनका उद्देश्य इन मौजूदा पहलों से आगे बढ़कर ऐसा संस्थान तैयार करना है, जो भारतीय उद्यमिता की अगली पीढ़ी को सपोर्ट कर सके और स्टार्टअप्स को आगे बढ़ने के रास्ते उपलब्ध करा सके।
लिंक्डइन पर इस बदलाव की जानकारी साझा करते हुए दीक्षित ने SwiftSeed Ventures के साथ जुड़े फाउंडर्स, निवेशकों, पार्टनर्स और अन्य लोगों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि WOI India का यह नया चरण वेंचर फर्म की यात्रा के दौरान बने रिश्तों और किए गए काम को आगे बढ़ाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले महीनों में मौजूदा पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने और नई साझेदारियों से जुड़े कई डेवलपमेंट सामने आ सकते हैं।
बोधि ट्री मल्टीमीडिया लिमिटेड (Bodhi Tree Multimedia Limited) की 13वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में रखे गए सभी चार प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
बोधि ट्री मल्टीमीडिया लिमिटेड (Bodhi Tree Multimedia Limited) की 13वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में रखे गए सभी चार प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए हैं। कंपनी ने 1 अक्टूबर 2026 को स्टॉक एक्सचेंजों को इसकी जानकारी दी। कंपनी की एजीएम 30 सितंबर 2026 को हुई थी।
कंपनी के मुताबिक, एजीएम में वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिट किए गए स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी दी गई। इसके अलावा रोटेशन के आधार पर रिटायर हो रहे सुकैश देवदास मोटवानी को दोबारा निदेशक नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली।
कर्ज लेने की सीमा बढ़ाने को मंजूरी
एजीएम में कंपनी की कुल उधारी यानी Borrowing Limits बढ़ाने से जुड़ा विशेष प्रस्ताव भी मंजूर किया गया। कंपनी ने बताया कि इस प्रस्ताव को जरूरी बहुमत मिला है। इसके अलावा कंपनी से जुड़े पक्षों के साथ होने वाले Material Related Party Transactions को मंजूरी देने का प्रस्ताव भी पारित हो गया।
99.99 फीसदी वोट प्रस्तावों के पक्ष में
वोटिंग के नतीजों के अनुसार, कुल 18,16,97,777 शेयरों में से 4,43,42,216 वोट डाले गए। यह कुल बकाया शेयरों का 24.4044 फीसदी है। इनमें से 4,43,39,124 वोट प्रस्तावों के पक्ष में और सिर्फ 3,092 वोट विरोध में पड़े। यानी कुल डाले गए वैध वोटों में 99.993 फीसदी वोट प्रस्तावों के पक्ष में रहे, जबकि 0.007 फीसदी वोट विरोध में थे।
कंपनी के रिकॉर्ड के मुताबिक, 23 सितंबर 2026 की रिकॉर्ड डेट पर उसके कुल 21,510 शेयरधारक थे। एजीएम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप के 2 तथा पब्लिक के 38 शेयरधारकों ने हिस्सा लिया।
ये चार प्रस्ताव हुए मंजूर
इन सभी प्रस्तावों में प्रमोटर/प्रमोटर ग्रुप के हित जुड़े होने की बात नहीं बताई गई थी।
स्क्रूटिनाइजर ने दी रिपोर्ट
वोटिंग प्रक्रिया की जांच जयमिन मोदी एंड कंपनी के कंपनी सेक्रेटरी जयमिन मोदी ने स्क्रूटिनाइजर के तौर पर की। उनकी नियुक्ति 5 सितंबर 2026 को हुई थी और उन्होंने 1 अक्टूबर 2026 को अपनी रिपोर्ट कंपनी को सौंपी।
रिमोट ई-वोटिंग 26 सितंबर 2026 से 29 सितंबर 2026 तक चली। एजीएम के बाद 30 सितंबर को वोटों को दो गवाहों की मौजूदगी में खोला गया। स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट के अनुसार, चारों प्रस्तावों पर कोई अमान्य वोट नहीं पाया गया।