है। यह विज्ञापन 12 सितंबर को अखबार के दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों में प्रकाशित हुआ था। विवाद के बाद 13 सितंबर को द हिंदू ने अपने फ्रंट पेज पर ‘Apology’ शीर्षक से माफी प्रकाशित की।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश के प्रमुख अंग्रेजी अखबार द हिंदू (The Hindu) ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह से जुड़े एक विज्ञापन के प्रकाशन पर अपने पाठकों से बिना शर्त माफी मांगी है। यह विज्ञापन 12 सितंबर को अखबार के दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों में प्रकाशित हुआ था। विवाद के बाद 13 सितंबर को द हिंदू ने अपने फ्रंट पेज पर ‘Apology’ शीर्षक से माफी प्रकाशित की।
अखबार ने अपने माफीनामे में इस विज्ञापन को “offensive front-page advertisement” और “deeply offensive advertisement” बताया। द हिंदू ने कहा कि उसे इस विज्ञापन के प्रकाशन पर गहरा खेद है। अखबार के निदेशक एन. राम (N. Ram) की ओर से भी इस मामले को लेकर जानकारी साझा की गई है।
Apology -- This is a screenshot of the front page of today’s Delhi edition of The Hindu. The apology that appears on this page has been published on the front page of all the editions of The Hindu. pic.twitter.com/manZfhQkER
— N. Ram (@nramind) September 13, 2026
यह था पूरा मामला: दरअसल, 12 सितंबर के द हिंदू के दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों के फ्रंट पेज पर डेरा सच्चा सौदा की ओर से एक पूरे पेज का विज्ञापन प्रकाशित हुआ था। इसका शीर्षक था “What is Dera Sacha Sauda? (Facts vs Fiction)”। विज्ञापन में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ लगे आरोपों और मामलों को लेकर डेरा की ओर से अपना पक्ष रखा गया था। विज्ञापन में उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर साजिश का दावा भी किया गया था। विज्ञापन में डेरा सच्चा सौदा की ओर से सामाजिक कार्यों को लेकर कई आंकड़े भी दिए गए थे। इनमें नशे से लोगों को बाहर निकालने, पेड़ लगाने, रक्तदान और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से जुड़े दावे शामिल थे।
राम रहीम को लेकर क्या है मामला?: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को वर्ष 2017 में सीबीआई की विशेष अदालत ने दो महिला अनुयायियों से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें 20 साल की सजा सुनाई थी। विज्ञापन प्रकाशित होने के समय वह 21 दिन की फरलो पर जेल से बाहर थे। इसी पृष्ठभूमि में द हिंदू के फ्रंट पेज पर इस विज्ञापन के प्रकाशन को लेकर पत्रकारों और सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने सवाल उठाए। इसके बाद द हिंदू ने अपने पाठकों से इस विज्ञापन को प्रकाशित करने के लिए बिना शर्त माफी मांगी।
द हिंदू ने क्या कहा?: 13 सितंबर को फ्रंट पेज पर प्रकाशित अपने माफीनामे में अखबार ने कहा कि उसे दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों में “डेरा सच्चा सौदा क्या है? (तथ्य बनाम कल्पना)” शीर्षक से प्रकाशित आपत्तिजनक फ्रंट-पेज विज्ञापन के प्रकाशन पर गहरा खेद है। अखबार ने विज्ञापन में किए गए उन दावों का भी उल्लेख किया, जिनमें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख और दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ “ड्रग माफिया और डेरा के विरोधी ताकतों” की ओर से साजिश का दावा किया गया था।
हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) ने फिनटेक कंपनी Assetgro Fintech Pvt Ltd (StockGro) में रखे अपने Optionally Convertible Debentures (OCDs) को इक्विटी शेयरों में बदल दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) ने फिनटेक कंपनी Assetgro Fintech Pvt Ltd (StockGro) में रखे अपने Optionally Convertible Debentures (OCDs) को इक्विटी शेयरों में बदल दिया है। कंपनी ने बताया कि 8 सितंबर 2026 को 8,708 OCDs को 16,02,011 इक्विटी शेयरों में कन्वर्ट किया गया है। इन शेयरों की कुल राशि 85 करोड़ रुपये है।
इस कन्वर्जन के बाद HMVL को StockGro में 2.48 प्रतिशत हिस्सेदारी मिली है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह हिस्सेदारी OCDs के इक्विटी शेयरों में कन्वर्जन के जरिए हासिल हुई है।
StockGro में नहीं हुआ नया कैश निवेश
कंपनी के मुताबिक, यह लेन-देन OCDs को इक्विटी शेयरों में बदलने के रूप में हुआ है। यानी इस चरण में 85 करोड़ रुपये का कोई नया नकद निवेश करने की बात नहीं कही गई है। HMVL ने पहले StockGro में निवेश के तहत ये OCDs रखे हुए थे, जिन्हें अब शेयरों में बदला गया है।
निवेश का उद्देश्य क्या है?
कंपनी ने बताया है कि इस निवेश का उद्देश्य तेजी से बढ़ रही कंपनी में निवेश के जरिए भविष्य में पूंजी पर रिटर्न हासिल करना है। इसके साथ ही HMVL की ओर से कंपनी के मीडिया एसेट्स का लाभ उठाने की भी बात कही गई है।
StockGro क्या करती है?
Assetgro Fintech Pvt Ltd, जिसे StockGro के नाम से जाना जाता है, फिनटेक सेक्टर में काम करती है। कंपनी के अनुसार, StockGro एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो निवेश सलाह, ज्ञान साझा करने और कम्युनिटी आधारित बातचीत को एक ही इकोसिस्टम में जोड़ता है।
इसके प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर्ड निवेश सलाहकारों और यूजर्स के बीच बातचीत की सुविधा उपलब्ध है। कंपनी ने इसे भारत का पहला ऐसा प्लेटफॉर्म बताया है जो इन अलग-अलग सुविधाओं को एक साथ जोड़ता है।
StockGro का कारोबार बढ़ा
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, StockGro का टर्नओवर पिछले तीन वित्त वर्षों में बढ़ा है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी का टर्नओवर 99 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 125.51 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2025-26 में 231.10 करोड़ रुपये हो गया।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह लेन-देन रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन नहीं है। साथ ही HMVL के प्रमोटर, प्रमोटर ग्रुप या ग्रुप कंपनियों की StockGro में कोई रुचि नहीं है। इस कन्वर्जन के लिए किसी सरकारी या नियामकीय मंजूरी की जरूरत नहीं थी।
भारत के बड़े मीडिया समूहों में शामिल Bennett, Coleman & Co Ltd (BCCL) और OpenAI ने रणनीतिक साझेदारी की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत के बड़े मीडिया समूहों में शामिल Bennett, Coleman & Co Ltd (BCCL) और OpenAI ने रणनीतिक साझेदारी की है। इस साझेदारी का मकसद BCCL के अखबारों और डिजिटल प्रकाशनों की खबरों को ChatGPT के जरिए ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुंचाना है। खास बात यह है कि ChatGPT पर दिखाई जाने वाली खबरों के साथ मूल प्रकाशन और खबर की पूरी रिपोर्ट तक पहुंचने के लिए सीधे लिंक भी दिए जाएंगे।
इस साझेदारी के तहत BCCL के चुनिंदा प्रकाशनों, जिनमें The Times of India और The Economic Times शामिल हैं, की सामग्री संबंधित सवालों के जवाब में ChatGPT पर दिखाई जा सकेगी। जहां किसी खबर का संक्षिप्त सार या कुछ हिस्सा दिखाया जाएगा, वहां संबंधित प्रकाशन का नाम भी बताया जाएगा और मूल खबर का सीधा लिंक दिया जाएगा। इससे पाठक पूरी खबर और उसका संदर्भ BCCL के प्लेटफॉर्म पर जाकर देख सकेंगे।
अंग्रेजी के साथ भारतीय भाषाओं की खबरें भी होंगी शामिल
यह साझेदारी सिर्फ लाइव खबरों तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें BCCL के अंग्रेजी के साथ-साथ भारतीय भाषाओं में प्रकाशित होने वाली अन्य सामग्री भी शामिल होगी। हालांकि, दोनों कंपनियों ने इस समझौते की वित्तीय शर्तों का खुलासा नहीं किया है।
BCCL के लिए इस साझेदारी में खबर के मूल स्रोत और उसकी पहचान को बनाए रखने पर खास जोर दिया गया है। BCCL के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर और बोर्ड मेंबर मोहित जैन ने कहा कि इस साझेदारी से पाठकों को BCCL के अलग-अलग प्रकाशनों की पत्रकारिता खोजने में मदद मिलेगी, साथ ही मूल खबर के स्रोत, संदर्भ और पहचान को भी बरकरार रखा जाएगा।
वहीं, OpenAI के मीडिया पार्टनरशिप्स के वाइस प्रेसिडेंट वरुण शेट्टी ने कहा कि साझेदारी से ChatGPT के यूजर्स BCCL के अंग्रेजी और भारतीय भाषाओं के प्रकाशनों की खबरें स्पष्ट स्रोत जानकारी और मूल खबर के सीधे लिंक के साथ खोज सकेंगे।
सिर्फ खबरों तक पहुंच नहीं, AI के दूसरे इस्तेमाल पर भी काम
BCCL और OpenAI की साझेदारी केवल ChatGPT पर खबरें दिखाने तक सीमित नहीं है। दोनों कंपनियां BCCL के अलग-अलग उत्पादों, पाठक सेवाओं और आंतरिक कामकाज में OpenAI की तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं भी तलाशेंगी।
इसमें पुराने समाचारों और आर्काइव को खोजने, रिसर्च, डेटा विश्लेषण, अनुवाद, पाठक सेवाओं और कारोबारी कामकाज जैसे क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल की संभावनाएं शामिल हैं।
न्यूजरूम में AI इस्तेमाल पर संपादकीय नियंत्रण बरकरार रहेगा
BCCL ने साफ किया है कि उसके न्यूजरूम में AI का इस्तेमाल होने की स्थिति में संबंधित प्रकाशनों के संपादकीय नियमों और नीतियों का पालन किया जाएगा। साथ ही हर स्तर पर मानवीय निगरानी भी बनी रहेगी।
BCCL के प्रकाशनों का संपादकीय नियंत्रण पूरी तरह स्वतंत्र रहेगा। खबर क्या होगी, उसकी जांच कैसे होगी, उसे कैसे संपादित किया जाएगा और कब प्रकाशित किया जाएगा, इसका फैसला संपादक और पत्रकार ही करेंगे। OpenAI को BCCL के कवरेज या संपादकीय रुख तय करने में कोई भूमिका नहीं होगी।
AI के दौर में बदल रहा है खबरों तक पहुंचने का तरीका
यह साझेदारी ऐसे समय में हुई है जब जनरेटिव AI लोगों के लिए जानकारी और खबरें खोजने का एक नया माध्यम बनता जा रहा है। ऐसे में मीडिया कंपनियों के सामने खबर के मूल स्रोत, सही श्रेय, मूल रिपोर्ट तक पाठकों की पहुंच और संपादकीय स्वतंत्रता जैसे कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
BCCL और OpenAI की यह साझेदारी इसी बदलते माहौल का हिस्सा है। इसमें एक ओर ChatGPT के जरिए BCCL की पत्रकारिता को नए पाठकों तक पहुंचाने पर जोर है, तो दूसरी ओर पाठकों को पूरी खबर और उसका मूल संदर्भ देखने के लिए BCCL की वेबसाइट और प्लेटफॉर्म पर वापस भेजने की व्यवस्था भी रखी गई है।
OpenAI दुनिया भर के प्रकाशकों के साथ ऐसी साझेदारियों के जरिए विश्वसनीय जानकारी तक लोगों की पहुंच बेहतर करने और समाचार व प्रकाशन के कामकाज में AI के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाश रहा है। BCCL के लिए यह साझेदारी पाठकों तक खबरों की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ प्रकाशन और कारोबारी कामकाज के कई क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल का रास्ता भी खोलती है।
TAM AdEx की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान प्रिंट में विज्ञापन के लिए इस्तेमाल होने वाली जगह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले सिर्फ 2% कम हुई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
साल 2026 के शुरुआती सात महीनों में प्रिंट विज्ञापन बाजार लगभग स्थिर रहा है। TAM AdEx की जनवरी-जुलाई 2026 बनाम जनवरी-जुलाई 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान प्रिंट में विज्ञापन के लिए इस्तेमाल होने वाली जगह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले सिर्फ 2% कम हुई है। यानी प्रिंट विज्ञापन में इस दौरान कोई बड़ी गिरावट नहीं देखने को मिली।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रिंट विज्ञापन में शिक्षा क्षेत्र सबसे आगे रहा। कुल ऐड स्पेस में शिक्षा क्षेत्र की हिस्सेदारी 20% रही। इसके बाद सेवा क्षेत्र 15% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। ऑटो और बैंकिंग व वित्तीय सेवाएं भी प्रिंट में प्रमुख विज्ञापन देने वाले क्षेत्रों में शामिल रहे।
शीर्ष पांच क्षेत्रों ने मिलकर प्रिंट की कुल ऐड स्पेस में 66% से ज्यादा हिस्सेदारी दर्ज की। वहीं, कॉरपोरेट/ब्रैंड छवि शीर्ष 10 क्षेत्रों में शामिल होने वाला एकमात्र नया क्षेत्र रहा। जनवरी-जुलाई 2025 की तुलना में इस साल भी शीर्ष चार क्षेत्रों ने अपनी जगह बरकरार रखी।
कारों का विज्ञापन सबसे ज्यादा, मल्टीपल कोर्सेज में सबसे बड़ी बढ़त
कैटेगरीज की बात करें तो कारें प्रिंट विज्ञापन में सबसे बड़ी श्रेणी बनी हुई हैं। शीर्ष 10 कैटेगरीज ने मिलकर कुल प्रिंट ऐड स्पेस का करीब 48% हिस्सा हासिल किया। इस दौरान चार कैटेगरीज ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया, जबकि खुदरा दुकानें-कपड़े/टेक्सटाइल/फैशन ने शीर्ष 10 कैटेगरीज में जगह बनाई।
शीर्ष 10 कैटेगरीज में शिक्षा से जुड़ी तीन कैटेगरीज और ऑटो से जुड़ी दो कैटेगरीज शामिल रहीं। वहीं, जनवरी-जुलाई 2025 की तुलना में ऐड स्पेस में वास्तविक बढ़ोतरी के मामले में मल्टीपल कोर्सेज श्रेणी सबसे आगे रही। इसके बाद खुदरा दुकानें-ज्वेलर्स और ई-कॉमर्स-अन्य सेवाओं का नंबर रहा।
मारुति सुजुकी लगातार दूसरी बार सबसे बड़ा विज्ञापनदाता
विज्ञापनदाताओं की रैंकिंग में Maruti Suzuki India ने लगातार दूसरे साल शीर्ष स्थान हासिल किया है। जनवरी-जुलाई 2025 के शीर्ष 10 विज्ञापनदाताओं में शामिल सात कंपनियां इस साल भी शीर्ष 10 में बनी रहीं। इस साल SBS Biotech, GCMMF और Renault India ने शीर्ष 10 विज्ञापनदाताओं की सूची में नई जगह बनाई है।
ब्रैंड की बात करें तो Allen Career Inst जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान प्रिंट में सबसे ज्यादा विज्ञापन देने वाला ब्रैंड रहा। इसके बाद LIC of India दूसरे स्थान पर रहा। पूरी अवधि के दौरान प्रिंट माध्यम में 1.08 लाख से ज्यादा ब्रैंडों ने विज्ञापन दिया। शीर्ष 10 ब्रैंडों में तीन ऑटो क्षेत्र और तीन शिक्षा क्षेत्र से जुड़े रहे।
हिंदी और अंग्रेजी प्रकाशनों का दबदबा कायम
प्रिंट विज्ञापन में भाषा के मामले में भी पिछले साल की स्थिति लगभग वैसी ही रही। शीर्ष तीन प्रकाशन भाषाओं की रैंकिंग में साल-दर-साल कोई बदलाव नहीं हुआ। हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं के प्रकाशनों ने मिलकर जनवरी-जुलाई 2025 और जनवरी-जुलाई 2026, दोनों अवधियों में प्रिंट विज्ञापन की मात्रा का 60% से ज्यादा हिस्सा हासिल किया।
सेल्स प्रमोशन का भी बड़ा हिस्सा
रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान सेल्स प्रमोशन से जुड़े विज्ञापनों की प्रिंट ऐड स्पेस में हिस्सेदारी 28% रही।
सेल्स प्रमोशन वाले विज्ञापनों में एक साथ कई तरह के प्रमोशन (Multiple Promotion) सबसे आगे रहे, जिनकी हिस्सेदारी 45% रही। इसके बाद छूट से जुड़े प्रमोशन (Discount Promotion) का नंबर आया। दोनों प्रमोशन फॉर्मेट्स ने मिलकर सेल्स प्रमोशन से जुड़े विज्ञापनों की कुल जगह का 85% हिस्सा हासिल किया।
कुल मिलाकर, TAM AdEx के आंकड़े बताते हैं कि 2026 के पहले सात महीनों में प्रिंट विज्ञापन में मामूली गिरावट के बावजूद इस माध्यम की स्थिति काफी हद तक स्थिर रही। शिक्षा, सेवा और ऑटो जैसे क्षेत्रों का प्रिंट में दबदबा बना हुआ है, जबकि Maruti Suzuki, Allen Career Inst और LIC जैसे बड़े विज्ञापनदाताओं और ब्रैंडों की मजबूत मौजूदगी कायम है।
दैनिक भास्कर समूह की कंपनी D.B. Corp Limited की 30वीं सालाना आम बैठक यानी AGM में शेयरधारकों ने बैठक में रखे गए सभी चार प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दैनिक भास्कर समूह की कंपनी D.B. Corp Limited की 30वीं सालाना आम बैठक यानी AGM में शेयरधारकों ने बैठक में रखे गए सभी चार प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने 2 सितंबर 2026 को शेयर बाजारों को इसकी जानकारी दी।
कंपनी के मुताबिक, AGM 2 सितंबर को सुबह 11:30 बजे शुरू हुई और दोपहर 12:48 बजे तक चली। बैठक में शेयरधारकों ने रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान हुई ई-वोटिंग के जरिए मतदान किया।
सभी चार प्रस्तावों को मिली मंजूरी
कंपनी ने बताया कि स्वतंत्र जांचकर्ता की रिपोर्ट के आधार पर AGM में रखे गए चारों प्रस्ताव जरूरी बहुमत से पास हो गए। पहले प्रस्ताव में 31 मार्च 2026 को खत्म हुए वित्त वर्ष के लिए कंपनी के ऑडिट किए गए स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय परिणामों को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव के पक्ष में 15.98 करोड़ वोट पड़े, जबकि केवल 160 वोट इसके खिलाफ रहे। यानी प्रस्ताव को करीब 99.99% वोट के साथ मंजूरी मिली।
पवन अग्रवाल की दोबारा निदेशक के रूप में नियुक्ति
दूसरे प्रस्ताव में पवन अग्रवाल की रोटेशन के आधार पर दोबारा निदेशक के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दी गई। उन्हें दोबारा नियुक्त किए जाने के पक्ष में करीब 15.27 करोड़ वोट पड़े, जबकि करीब 9.57 लाख वोट विरोध में रहे। प्रस्ताव को 99.38% वोट मिले।
कॉस्ट ऑडिटर के पारिश्रमिक को भी मंजूरी
तीसरे प्रस्ताव में कंपनी के कॉस्ट ऑडिटर को दिए जाने वाले पारिश्रमिक को मंजूरी देने की बात थी। इस प्रस्ताव के पक्ष में करीब 16.02 करोड़ वोट पड़े और सिर्फ 721 वोट इसके खिलाफ रहे। प्रस्ताव को करीब 99.9995% वोट के साथ मंजूरी मिली।
सुधीर अग्रवाल की फिर नियुक्ति
AGM का सबसे अहम प्रस्ताव सुधीर अग्रवाल की दोबारा नियुक्ति से जुड़ा था। शेयरधारकों ने उन्हें कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर फिर नियुक्त करने और उनके पारिश्रमिक को मंजूरी दे दी है। सुधीर अग्रवाल की नया कार्यकाल 1 जनवरी 2027 से 31 दिसंबर 2031 तक यानी पांच साल तक रहेगा।
इस प्रस्ताव के पक्ष में करीब 15.28 करोड़ वोट पड़े, जबकि करीब 7.96 लाख वोट इसके खिलाफ रहे। कुल मतदान में से करीब 99.48% वोट प्रस्ताव के पक्ष में रहे।
AGM में कितने शेयरधारक जुड़े?
कंपनी के रिकॉर्ड के मुताबिक, 26 अगस्त 2026 की रिकॉर्ड डेट पर कुल 42,349 शेयरधारक थे। AGM में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 12 प्रमोटर/प्रमोटर ग्रुप और 66 सार्वजनिक शेयरधारक शामिल हुए। कंपनी ने बताया कि चारों प्रस्ताव शेयरधारकों के जरूरी बहुमत के साथ पास हो गए हैं।
बिजनेस मैगजीन ‘BW Businessworld’ के नवीनतम अंक में भारतीय कारोबारी जगत को प्रभावित करने वाले दो बड़े बदलावों पर विस्तृत विश्लेषण प्रकाशित किया गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जानी-मानी बिजनेस मैगजीन ‘BW Businessworld’ के नवीनतम अंक में भारतीय कारोबारी जगत को प्रभावित करने वाले दो बड़े बदलावों पर विस्तृत विश्लेषण प्रकाशित किया गया है। इनमें टाटा समूह में जारी नेतृत्व परिवर्तन और फिनटेक सेक्टर का तेजी से वित्तीय बुनियादी ढांचे (Financial Infrastructure) के रूप में उभरना शामिल है।
इस अंक की प्रमुख कवर स्टोरी ‘Back To Tata’ है, जिसमें रतन टाटा के बाद और टाटा संस के अगले चेयरमैन की नियुक्ति से पहले आकार ले रहे संस्थागत बदलावों का विश्लेषण किया गया है। इसके साथ ही BW Businessworld के Festival of Fintech 2026 पर आधारित एक विशेष फिनटेक पैकेज भी प्रकाशित किया गया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पेमेंट्स, लेंडिंग, वेल्थटेक, इंश्योरटेक और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में हो रहे बदलावों को विस्तार से समझाया गया है।
अगले चेयरमैन से आगे की सोच पर केंद्रित है ‘Back To Tata’: कवर स्टोरी केवल संभावित चेयरमैन उम्मीदवारों की चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस बड़े सवाल पर केंद्रित है कि भविष्य का टाटा समूह कैसा होगा और अगले पेशेवर नेता को किस तरह की जिम्मेदारियां विरासत में मिलेंगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘Back To Tata’ किसी पारिवारिक प्रबंधन व्यवस्था की वापसी का संकेत नहीं देती। इसके बजाय यह बताती है कि नोएल टाटा के नेतृत्व में टाटा ट्रस्ट्स एक बार फिर उस संस्थागत केंद्र के रूप में उभरे हैं, जो समूह के दीर्घकालिक उद्देश्य, जोखिम लेने की क्षमता और पेशेवर प्रबंधन से अपेक्षाओं को स्पष्ट करने की भूमिका निभा रहे हैं।
इस विशेष पैकेज में एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल का भी आंकड़ों के आधार पर संतुलित मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2020 से वित्त वर्ष 2026 के बीच टाटा समूह का राजस्व 2.1 गुना बढ़ा, जबकि कर पश्चात लाभ (PAT) में 5.4 गुना वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में समूह की सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 2.6 गुना बढ़ा।
रिपोर्ट में समूह के नए व्यवसायों के प्रदर्शन पर भी प्रकाश डाला गया है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, एयर इंडिया, टाटा डिजिटल और अग्राटास (Agratas) ने वित्त वर्ष 2026 में संयुक्त रूप से लगभग 2.39 लाख करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जबकि इनका कुल संयुक्त घाटा 29,924 करोड़ रुपये रहा।
वहीं, इस बदलाव के दौर में टाटा संस ने 31,961 करोड़ रुपये के कर पश्चात लाभ, 21,841 करोड़ रुपये की शुद्ध नकद राशि (Net Cash) और शून्य उधारी के साथ प्रवेश किया है। रिपोर्ट के अनुसार, समूह के सामने सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय क्षमता नहीं, बल्कि पूंजी आवंटन, क्रियान्वयन और संस्थागत समन्वय की है।
इस विषय पर BW Businessworld के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ तथा एक्सचेंज4मीडिया समूह के फाउंडर डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा कि टाटा समूह केवल भारत की सबसे बड़ी कारोबारी संस्थाओं में से एक नहीं है, बल्कि यह उद्यम, पेशेवर प्रबंधन, स्वामित्व और सार्वजनिक उद्देश्य के बीच एक विशिष्ट संतुलन का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि समूह का अगला अध्याय महत्वाकांक्षा और जवाबदेही के साथ-साथ विकास और सामाजिक जिम्मेदारी के संतुलन पर आधारित होना चाहिए। कवर पैकेज में डॉ. अनुराग बत्रा के लेख भी शामिल हैं, जिनमें नोएल टाटा की भूमिका को एक ऑपरेटर, निर्माता और टाटा मूल्यों के संरक्षक के रूप में परखा गया है।
वित्तीय सेवाएं बन रही हैं बुनियादी ढांचा: इस अंक का फिनटेक विशेषांक ‘The Infrastructuralisation Of Finance’ शीर्षक से प्रकाशित किया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर वित्तीय सेवाओं को उपभोक्ता केंद्रित सेवाओं से आगे बढ़ाकर आधुनिक अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढांचे में बदल रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, UPI, Aadhaar, Account Aggregators, ONDC और Open Credit Enablement Network (OCEN) जैसे प्लेटफॉर्म और प्रणालियां, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से, भुगतान, ऋण, बीमा और निवेश जैसी सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ गहराई से जोड़ रही हैं।
विशेष पैकेज में यह भी बताया गया है कि वित्तीय सेवाएं अब धीरे-धीरे उपभोक्ताओं के लिए अदृश्य लेकिन हर जगह मौजूद बुनियादी व्यवस्था बनती जा रही हैं। इसका प्रभाव यात्रा बुकिंग, ई-कॉमर्स, सप्लाई चेन प्लेटफॉर्म, गिग इकॉनमी और एंटरप्राइज सिस्टम्स तक देखा जा सकता है।
रिपोर्ट में MSMEs, पहली बार ऋण लेने वाले ग्राहकों और वित्तीय रूप से कम सेवाएं प्राप्त करने वाले वर्गों के लिए उभर रहे अवसरों का भी विश्लेषण किया गया है। इसमें यह समझाया गया है कि सहमति आधारित कैश-फ्लो डेटा किस तरह पारंपरिक जमानत और क्रेडिट इतिहास का पूरक बन रहा है।
इस विश्लेषण में भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) की प्रबंध निदेशक एवं सीईओ प्रवीणा राय सहित भुगतान, एम्बेडेड फाइनेंस, डिजिटल सार्वजनिक प्रणालियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कई विशेषज्ञों के विचार शामिल किए गए हैं।
‘India’s Fintech Architects’ को भी मिली जगह: फिनटेक विशेषांक में ‘India’s Fintech Architects’ शीर्षक के तहत उन संगठनों और उद्योग नेताओं को भी स्थान दिया गया है, जिन्हें BW Businessworld Festival of Fintech 2026 में सम्मानित किया गया।
इन पुरस्कारों के माध्यम से लेंडिंग प्लेटफॉर्म, पेमेंट सॉल्यूशंस, वित्तीय समावेशन, ग्राहक अनुभव, फिनटेक उत्पाद, वेल्थटेक, इंश्योरटेक, फिनटेक में एआई के उपयोग, स्टार्टअप्स और नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन को मान्यता दी गई। पुरस्कारों के लिए प्राप्त प्रविष्टियों का मूल्यांकन नवाचार, कारोबारी प्रभाव, विस्तार क्षमता, ग्राहक मूल्य, सुशासन, तकनीकी उत्कृष्टता, बाजार में अलग पहचान और व्यापक वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान जैसे मानकों के आधार पर किया गया।
BW Businessworld की ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर नूर फातिमा वारसिया ने कहा कि टाटा समूह और फिनटेक, दोनों ही वर्तमान समय में महत्वपूर्ण संस्थागत बदलावों के दौर से गुजर रहे हैं। एक ओर टाटा समूह अपने अगले चरण के लिए स्वामित्व, उद्देश्य और पेशेवर प्रबंधन के संतुलन को परिभाषित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर फिनटेक क्षेत्र व्यवधान पैदा करने वाले उद्योग से आगे बढ़कर बुनियादी ढांचे और संस्थान निर्माण की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। BW Businessworld का यह नवीनतम अंक डिजिटल और प्रिंट दोनों फॉर्मेट्स में उपलब्ध है।
अंतिम अंक में प्रकाशित संपादकीय ‘अलविदा नहीं, जुड़ाव की नई शुरुआत’ के जरिए अखबार ने पाठकों को भावुक संदेश देते हुए अपनी यात्रा के एक नए पड़ाव की घोषणा की।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली-एनसीआर की शामों को खबरों से जोड़ने वाला हिंदी का चर्चित शाम का अखबार ‘सांध्य टाइम्स’ अब प्रकाशित नहीं होगा। करीब 46 वर्षों तक पाठकों तक दिनभर की ताजा खबरें पहुंचाने वाले इस अखबार ने अपने अंतिम संस्करण के साथ प्रकाशन पर विराम लगा दिया। अंतिम अंक में प्रकाशित संपादकीय ‘अलविदा नहीं, जुड़ाव की नई शुरुआत’ के जरिए अखबार ने पाठकों को भावुक संदेश देते हुए अपनी यात्रा के एक नए पड़ाव की घोषणा की।
संपादकीय में कहा गया है कि पिछले 46 वर्षों से दिल्ली-एनसीआर की हर हलचल, विचार और जनसरोकार के मुद्दों पर अखबार ने अपने पाठकों के साथ एक मजबूत रिश्ता कायम किया। बदलते दौर और सूचना के नए माध्यमों के विस्तार के बीच पत्रकारिता की इस यात्रा को अब एक नए मोड़ पर ले जाने का फैसला किया गया है। हालांकि अखबार ने यह भी स्पष्ट किया कि जनसरोकार, निष्पक्षता और लोगों की आवाज बनने का उसका संकल्प आगे भी बना रहेगा।
करीब 46 वर्षों तक प्रकाशित रहा सांध्य टाइम्स राजधानी में हिंदी शाम के अखबार की एक मजबूत पहचान बनकर उभरा था। उस दौर में जब डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल न्यूज का चलन नहीं था, तब दफ्तरों से लौटते लोगों और बाजारों में मौजूद पाठकों के लिए दिनभर की ताजा खबरों का प्रमुख माध्यम सांध्य टाइम्स ही हुआ करता था। स्थानीय खबरों, नागरिक समस्याओं, अपराध, राजनीति और जनहित के मुद्दों पर इसकी विशेष पकड़ मानी जाती थी।
टाइम्स समूह के इस प्रकाशन ने दिल्ली-एनसीआर की स्थानीय पत्रकारिता को मजबूत पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और लंबे समय तक राजधानी के पाठकों के बीच लोकप्रिय बना रहा।
अंतिम संस्करण के प्रकाशित होने के बाद सोशल मीडिया पर भी पत्रकारों, पूर्व कर्मचारियों और पाठकों ने अपनी यादें साझा कीं। कई लोगों ने इसे हिंदी पत्रकारिता के एक महत्वपूर्ण अध्याय के अंत के रूप में देखा। अखबार के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर भी अंतिम संस्करण को लेकर पोस्ट साझा की गई, जिस पर बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
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— सान्ध्य टाइम्स (@SandhyaTimes4u) August 31, 2026
अंतिम अंक में प्रकाशित संपादकीय 'अलविदा नहीं, जुड़ाव की नई शुरुआत' में सांध्य टाइम्स ने अपने पाठकों को यह संदेश दिया:
पिछले 46 वर्षों से दिल्ली-एनसीआर की हर धड़कन की खबरों, विचारों और आपसे जुड़े तमाम मुद्दों पर बेखौफ कलम से रोशनी करने वाला आपका अखबार 'सांध्य टाइम्स' अब अपनी इस यात्रा को विराम दे रहा है। चार दशकों से भी लंबे इस अटूट रिश्ते से आपने हमें जो प्यार, विश्वास और अपनापन दिया, उसके लिए हम आपके सदैव आभारी रहेंगे।
पिछले दिनों लगातार आठ सप्ताह तक चले एक जटिल संघर्ष के बावजूद हम डटे रहे। बदलते दौर और सूचना के नए माध्यमों के साथ हमने अपनी पत्रकारिता यात्रा को एक नए मोड़ देने का निर्णय लिया है।
'सांध्य टाइम्स' के पन्ने भले ही अब आपके हाथों में न हों, लेकिन जनसरोकार, निष्पक्षता और आपकी आवाज बनने का हमारा संकल्प कायम रहेगा।
हमारा और आपका यह सफर यहीं समाप्त नहीं होता। आप 'नवभारत टाइम्स' (NBT) के माध्यम से हमारे साथ लगातार जुड़े रहेंगे। आपकी समस्याएं, आपके मुद्दे और आपके शहर की हर खबर को पहले की तरह पूरी मजबूती और प्रामाणिकता के साथ नवभारत टाइम्स से उठाते रहेंगे।
46 वर्षों के इस शानदार सफर में हमारा साथी बनने के लिए आप सभी पाठकों का हृदय से धन्यवाद।
— संपादकीय टीम, सांध्य टाइम्स
English Headline जागरण प्रकाशन को हरियाणा के हिसार के एक्साइज व टैक्सेशन ऑफिसर की ओर से ₹21.73 लाख के कथित GST बकाये को लेकर कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) मिला है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जागरण प्रकाशन (Jagran Prakashan Limited) को हरियाणा के हिसार के एक्साइज व टैक्सेशन ऑफिसर की ओर से ₹21.73 लाख के कथित GST बकाये को लेकर कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) मिला है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि यह नोटिस 26 अगस्त 2026 को प्राप्त हुआ है।
यह नोटिस Central Goods and Services Tax Act, 2017 की धारा 74 के तहत जारी किया गया है। इसमें कंपनी से पूछा गया है कि कथित GST मांग के साथ धारा 50 के तहत ब्याज और धारा 74 के तहत जुर्माना क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए।
2020-21 की अवधि से जुड़ा है मामला
कंपनी के मुताबिक, यह मामला वित्त वर्ष 2020-21 की अवधि से संबंधित है। नोटिस में मुख्य तौर पर कंपनी की ओर से लिए गए Input Tax Credit (ITC) की पात्रता को लेकर टैक्स भुगतान या स्पष्टीकरण मांगा गया है। हालांकि, जागरण प्रकाशन ने कहा है कि कानूनी सलाह लेने के बाद उसका मानना है कि यह कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) टिकाऊ नहीं है और मामले में कंपनी का पक्ष मजबूत है।
तय समय में देगी जवाब
कंपनी ने बताया कि वह निर्धारित समय सीमा के भीतर इस नोटिस का उचित जवाब दाखिल करेगी। साथ ही, जरूरत पड़ने पर कंपनी इस मामले के खिलाफ दूसरे कानूनी विकल्पों पर भी विचार करेगी।
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर असर नहीं
जागरण प्रकाशन ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा स्थिति में इस नोटिस का कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार या अन्य गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ा है। कंपनी के अनुसार, कानूनी सलाह के आधार पर उसका मानना है कि नोटिस में उठाई गई मांग उचित नहीं है और उसके पास मामले में मजबूत आधार हैं। इसलिए फिलहाल इस नोटिस से किसी वित्तीय प्रभाव की आशंका नहीं है।
कंपनी ने यह जानकारी SEBI Listing Regulations के Regulation 30 के तहत शेयर बाजारों को दी है।
भारत में अगले तीन से चार महीनों में तीन नए फाइनेंशियल डेली लॉन्च होने की उम्मीद है। एक्सप्रेस पब्लिकेशंस, कुमुदम और दिनमलर बिजनेस न्यूज सेगमेंट में उतरने की तैयारी में हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय मीडिया इंडस्ट्री में फाइनेंशियल न्यूज सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा बढ़ने वाली है। अगले तीन से चार महीनों के दौरान तीन नए बिजनेस डेली लॉन्च होने की संभावना है। Express Publications (Madurai), Kumudam और Dinamalar अपने-अपने बिजनेस अखबार शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं।
एक्सप्रेस पब्लिकेशंस (Express Publications), जो The New Indian Express का प्रकाशन करता है, अक्टूबर के अंत तक एक नया राष्ट्रीय बिजनेस अखबार लॉन्च करने की योजना बना रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इसे राष्ट्रीय वित्तीय दैनिक के तौर पर पेश किया जाएगा। इसके लॉन्च के बाद देश में राष्ट्रीय स्तर के फाइनेंशियल डेली की संख्या छह हो जाएगी।
नए अखबार के संपादकीय नेतृत्व की जिम्मेदारी फिलहाल The New Indian Express के तमिलनाडु एडिटर रंजनाथन को दिए जाने की बात सामने आई है। वह कोच्चि से नए बिजनेस डेली के एडिटर के तौर पर काम संभाल सकते हैं।
वहीं, कुमुदम (Kumudam) सितंबर के मध्य तक चेन्नई से तमिल और अंग्रेजी भाषा में बिजनेस डेली शुरू करने की तैयारी कर रहा है। समूह की यह पहल दक्षिण भारत के बिजनेस न्यूज मार्केट में उसकी मौजूदगी को मजबूत कर सकती है।
इसके अलावा दिनमलर (Dinamalar) भी बिजनेस अखबारों के सेगमेंट में प्रवेश करने की योजना बना रहा है। समूह साल के अंत तक तमिल भाषा में अपना बिजनेस डेली लॉन्च कर सकता है।
एचटी मीडिया लिमिटेड (HT Media Limited) ने 3,87,87,137 वारंट आवंटित किए हैं। कंपनी के बोर्ड की शेयर अलॉटमेंट कमेटी ने 20 अगस्त 2026 को सर्कुलेशन के जरिए हुई बैठक में इस आवंटन को मंजूरी दी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एचटी मीडिया लिमिटेड (HT Media Limited) ने 3,87,87,137 वारंट आवंटित किए हैं। कंपनी के बोर्ड की शेयर अलॉटमेंट कमेटी ने 20 अगस्त 2026 को सर्कुलेशन के जरिए हुई बैठक में इस आवंटन को मंजूरी दी। इन वारंट की इश्यू कीमत 24.57 रुपये प्रति वारंट तय की गई है।
कंपनी ने यह जानकारी BSE और NSE को भेजी गई सूचना में दी है। यह आवंटन 11 जुलाई 2026 को कंपनी की ओर से दी गई पिछली सूचना और 7 अगस्त 2026 को हुई असाधारण आम बैठक (EGM) में शेयरधारकों की मंजूरी के बाद किया गया है।
कंपनी को इस वारंट इश्यू के लिए BSE और NSE से इन-प्रिंसिपल अप्रूवल भी मिल चुका है।
कंपनी को मिले 23.82 करोड़ रुपये
HT Media ने बताया कि प्रस्तावित निवेशकों से वारंट की कुल कीमत का 25 फीसदी हिस्सा यानी 23,82,49,989.02 रुपये मिल चुका है। प्रेफरेंशियल इश्यू (Preferential Issue) के तहत कुल वारंट की कीमत करीब 95.30 करोड़ रुपये है।
हर वारंट की कीमत 24.57 रुपये है। इन वारंट के बदले कंपनी को अभी कुल रकम का 25 फीसदी हिस्सा मिला है, जबकि बाकी 75 फीसदी रकम बाद में वारंट को इक्विटी शेयर में बदलने के समय देनी होगी।
इन 6 निवेशकों को मिले वारंट
कंपनी ने कुल 3.88 करोड़ वारंट छह प्रस्तावित निवेशकों को आवंटित किए हैं। इनमें सबसे ज्यादा वारंट The Hindustan Times Limited को मिले हैं।
इन सभी वारंट की कुल कीमत 95,29,99,956.09 रुपये है, जिसमें से 25 फीसदी यानी 23,82,49,989.02 रुपये कंपनी को मिल चुके हैं।
एक वारंट पर मिलेगा एक इक्विटी शेयर
कंपनी के मुताबिक, हर वारंट धारक को एक वारंट के बदले HT Media का एक पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर लेने का अधिकार होगा। इस शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है।
हालांकि, इसके लिए वारंट धारक को कुल वारंट कीमत की बाकी 75 फीसदी रकम का भुगतान करना होगा। यानी मौजूदा आवंटन के बाद भविष्य में इन वारंट को शेयरों में बदलने पर कंपनी की इक्विटी पूंजी में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
HT Media ने बताया कि यह पूरा Preferential Issue SEBI के ICDR Regulations, 2018 के Chapter V के तहत किया गया है। कंपनी ने इस मामले में SEBI के Listing Obligations and Disclosure Requirements Regulations, 2015 के Regulation 30 के तहत स्टॉक एक्सचेंजों को जानकारी दी है।
देश के बड़े अखबार समूह अब प्रिंट से आगे बढ़कर डिजिटल, OOH विज्ञापन और इवेंट्स जैसे कारोबारों पर फोकस कर रहे हैं, जिसका असर उनकी कमाई में भी दिख रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश के बड़े अखबार समूह अब सिर्फ अखबार बेचने और प्रिंट विज्ञापन पर निर्भर नहीं रहना चाहते। डिजिटल, आउटडोर विज्ञापन (OOH), इवेंट्स और दूसरे कारोबारों की ओर बढ़ते कदमों का असर अब उनकी कमाई में भी साफ दिखाई दे रहा है।
Crisil Ratings की एक स्टडी के मुताबिक, देश के बड़े अखबार समूहों की कुल कमाई में नॉन-प्रिंट कारोबार की हिस्सेदारी इस वित्त वर्ष करीब 25% तक पहुंचने की उम्मीद है, जो वित्त वर्ष 2019 में करीब 13% थी। यानी पिछले कुछ वर्षों में अखबार कंपनियों ने अपनी कमाई के स्रोतों में बड़ा बदलाव किया है।
प्रिंट से आगे बढ़ रहे हैं अखबार समूह
Crisil Ratings ने देश के पांच सबसे ज्यादा प्रसारित अखबारों को संचालित करने वाले बड़े अखबार समूहों का अध्ययन किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सात वित्त वर्षों में इन कंपनियों के नॉन-प्रिंट कारोबार की हिस्सेदारी 11-13 प्रतिशत अंक बढ़ी है। इसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म, आउटडोर विज्ञापन, इवेंट मैनेजमेंट और दूसरे संबंधित कारोबार शामिल हैं।
इस बदलाव से साफ है कि अखबार कंपनियां अब केवल सर्कुलेशन बढ़ाने वाले पुराने मॉडल पर निर्भर रहने के बजाय अपने ब्रांड और बड़ी ऑडियंस का इस्तेमाल अलग-अलग तरह की कमाई के लिए कर रही हैं।
अखबारों की सर्कुलेशन में आई गिरावट
अखबार कंपनियों के लिए कारोबार में बदलाव की सबसे बड़ी वजह प्रिंट सर्कुलेशन में लगातार आ रही गिरावट है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी अखबार कंपनियों का कुल सर्कुलेशन 2019 में करीब 1.5 करोड़ से घटकर 2025 में लगभग 1 करोड़ रह गया है। आने वाले समय में इसमें और गिरावट की आशंका है, क्योंकि युवा पाठक तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर जा रहे हैं।
इसका सीधा असर प्रिंट से होने वाली कमाई पर पड़ा है। पिछले सात वर्षों में प्रिंट से जुड़ी कमाई, जिसमें प्रिंट विज्ञापन भी शामिल है, में 1-2% की सालाना चक्रवृद्धि दर से गिरावट आई है।
नॉन-प्रिंट कारोबार तेजी से बढ़ेगा
Crisil Ratings के Senior Director और Deputy Chief Rating Officer Manish Gupta के मुताबिक, बड़े अखबार समूहों के लिए कारोबार में विविधता लाना अब विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बन गया है।
उनके मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 से 2027 के बीच नॉन-प्रिंट कारोबार से होने वाली कमाई में 10-12% सालाना वृद्धि होने की उम्मीद है। इसके मुकाबले पारंपरिक प्रिंट कारोबार की वृद्धि सिर्फ 2-3% रहने का अनुमान है।
Gupta ने कहा कि बड़े मीडिया समूहों की मजबूत ब्रांड पहचान, देश के अलग-अलग क्षेत्रों में मजबूत पहुंच और प्रिंट, डिजिटल, रेडियो, इवेंट्स और आउटडोर मीडिया को एक साथ जोड़कर विज्ञापन समाधान देने की क्षमता नॉन-प्रिंट कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद कर रही है।
डिजिटल कारोबार से बढ़ रही उम्मीद
नॉन-प्रिंट कारोबार बढ़ने से अखबार कंपनियों की कमाई के साथ-साथ मुनाफे पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक नॉन-प्रिंट कारोबार अभी भी पारंपरिक प्रिंट बिजनेस के मुकाबले कम मुनाफे वाला है।
इस वित्त वर्ष कंपनियों का मार्जिन करीब 12-13% पर स्थिर रहने की उम्मीद है। डिजिटल और उससे जुड़े कारोबार में बढ़ते पैमाने का फायदा कंपनियों को मिल रहा है।
आउटडोर विज्ञापन और इवेंट मैनेजमेंट में लागत ज्यादा होने और प्रतिस्पर्धा कड़ी होने के कारण मार्जिन पर दबाव रहता है। वहीं, डिजिटल कारोबार में शुरुआती निवेश का दौर धीरे-धीरे कम हो रहा है और कारोबार का पैमाना बढ़ने से EBITDA घाटे में सुधार देखने को मिल रहा है।
मजबूत बैलेंस शीट से मिल रहा सहारा
प्रिंट कारोबार में दबाव के बावजूद बड़े अखबार समूहों की वित्तीय स्थिति फिलहाल मजबूत बनी हुई है। इसकी वजह उनकी अपेक्षाकृत कम कर्ज वाली बैलेंस शीट, नेट कैश पोजिशन और बड़े लिक्विड निवेश हैं।
Crisil Ratings के Director Ankit Hakhu के मुताबिक, इन कंपनियों की क्रेडिट मजबूती अब सिर्फ प्रिंट कारोबार के प्रदर्शन पर निर्भर नहीं है, बल्कि उनकी मजबूत बैलेंस शीट भी अहम भूमिका निभा रही है।
उन्होंने बताया कि इन कंपनियों की नेटवर्थ का करीब 90% हिस्सा लिक्विड और निवेश वाली परिसंपत्तियों, जैसे वित्तीय संपत्तियों और कैश इक्विवेलेंट्स में है।
इन निवेशों से होने वाली आय और कम कर्ज का स्तर कंपनियों को नए कारोबारों में निवेश करने और उन्हें बड़ा करने के दौरान पुराने प्रिंट कारोबार से मिलने वाली कमाई में कमी की भरपाई करने में मदद कर सकता है।
डिजिटल से कमाई बढ़ाना अब बड़ी चुनौती
हालांकि, सेक्टर के सामने कुछ जोखिम भी बने हुए हैं। इनमें उम्मीद से ज्यादा तेजी से अखबारों के सर्कुलेशन में गिरावट, डिजिटल प्लेटफॉर्म से कमाई बढ़ाने में देरी और नॉन-प्रिंट कारोबार को तेजी से बड़े पैमाने पर पहुंचाने में आने वाली दिक्कतें शामिल हैं।
फिलहाल, डिजिटल, आउटडोर विज्ञापन और इवेंट जैसे कारोबारों से बढ़ती कमाई और मजबूत बैलेंस शीट देश के बड़े अखबार समूहों को प्रिंट बिजनेस पर लंबे समय से बने दबाव से निपटने में मदद कर रही है।
कुल मिलाकर, भारतीय अखबार उद्योग का कारोबार अब सिर्फ प्रिंट तक सीमित नहीं रह गया है। डिजिटल और दूसरे नॉन-प्रिंट कारोबार आने वाले वर्षों में मीडिया कंपनियों की कमाई और ग्रोथ की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।