‘इतनी तेज चलेगी आंधी, हमको ये मालूम न था’

इस गजल के द्वारा कवयित्री ने यह बताने की कोशिश की है कि दुनिया व जिंदगी में काफी कुछ घटित होने के बावजूद किस तरह इनसे अनभिज्ञता बनी रहती है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 12 October, 2019
Last Modified:
Saturday, 12 October, 2019
Dr Kamini


डॉ. कामिनी कामायनी।। बरकरार थी दिल की तमन्ना, हमको ये मालूम न था खुद से ही कोई बात कही क्या? हमको ये मालूम न था। बरस पड़ी थी गरज गरज कर, मौसम दे...
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