आज संकट के दौर से गुजर रही है प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता: हरिवंश

टेक्नोलॉजी बेहद खतरनाक है, जो हमारे मानवीय मूल्यों और सिद्धांतों पर ग्रहण लगा रही है। इससे बचने की जरूरत है। पहले दुनिया विचारों से बदलती थी, लेकिन अब टेक्नोलॉजी से बदल रही है।

Last Modified:
Monday, 11 April, 2022
Harivansh45454

टेक्नोलॉजी बेहद खतरनाक है, जो हमारे मानवीय मूल्यों और सिद्धांतों पर ग्रहण लगा रही है। इससे बचने की जरूरत है। पहले दुनिया विचारों से बदलती थी, लेकिन अब टेक्नोलॉजी से बदल रही है। पहले हमारे सबसे बड़े विचारों के पुंज काशी, प्रयाग, पाटलिपुत्र हुआ करते थे, लेकिन अब सिलिकॉन वैली, हैदराबाद पुणे जैसे स्थान हो गए हैं। यह विचार राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के हैं, जो उन्होंने इंदौर प्रेस क्लब के 60वें स्थापना दिवस पर जाल सभागृह में आयोजित सोशल मीडिया के दौर में प्रिंट मीडिया कैसे बचाए अपना वजूद विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री आलोक मेहता ने की। विषय प्रवर्तन वरिष्ठ पत्रकार डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने किया। यह व्याख्यान मूर्धन्य पत्रकार राजेंद्र माथुर की स्मृति में किया गया था। इस अवसर पर पत्रकारिता की स्वर्णिम यात्रा पूर्ण कर चुके वरिष्ठ पत्रकारों का सम्मान किया गया। मंच पर हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल जस्टिस वी.एस. कोकजे, सांसद शंकर लालवानी, दे.अ.वि.वि. की कुलपति डॉ. रेणी जैन विशेष रूप से मौजूद थे।

अपने धाराप्रवाह संबोधन में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने भाषाई पत्रकारिता के इतिहास के साथ हिंदी पत्रकारिता की मूर्धन्य पत्रकार स्व. राजेंद्र माथुर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को विस्तार से रेखांकित करते हुए कहा कि आज दुनिया एक छोटे से गांव में तब्दील हो चुकी है। इस समय हमें ऐसे अखबारों के प्रकाशन की आवश्यकता है, जो विचारों से संपन्न होने के साथ उसकी प्रमाणिकता हो, क्योंकि सोशल मीडिया के दौर में आज प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता भी संकट के दौर से गुजर रही है। उन्होंने आगे कहा कि राजेंद्र माथुर ऋषितुल्य पत्रकार थे। उनकी दूरदृष्टि थी और उन्होंने उन विषयों पर भी अपनी कलम चलाई जिस पर लोग लिखने से डरते थे। आज हमें उनके पदचिह्नों पर चलने की जरूरत है। 50 वर्ष पहले रज्जू बाबू ने वंशवाद के खिलाफ लिखा था और आज वह बात सही साबित हुई।

अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री आलोक मेहता ने कहा कि इंदौर से मेरा गहरा रिश्ता रहा है और मूर्धन्य पत्रकार राजेंद्र माथुर मेरे गुरु रहे हैं। उनसे मैंने बहुत कुछ सीखा। उन्होंने ही मुझे बड़े-बड़े स्थानों पर रिपोर्टिंग के लिए भेजा। उन्होंने आगे कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि हम ग्रामीण और जिला स्तर पर स्थानीय समाचार पत्र निकालें, ताकि वे छोटे और कमजोर लोगों को शिक्षित होने के साथ उन्हें जागरूक भी करें। राजेंद्र बाबू की सोच भी यही थी। यह सोच एकदम गलत है कि जिनके हाथों में मोबाइल या स्मार्ट फोन है वे राष्ट्रीय जानकारियों से बहुत अधिक अपडेट हैं। आज हिंदी पत्रकारिता में भी विश्वसनीयता का संकट है, इस संकट को दूर करने के लिए जरूर है कि हम रज्जू बाबू जैसे श्रेष्ठ संपादकों के मार्गदर्शन में मूल्य आधारित पत्रकारिता करें।

विषय का प्रवर्तन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने कहा कि इंदौर केवल एक शहर नहीं एक संस्कार, परम्परा, मिसाल और अनुकरण है, जिसने सफाई के क्षेत्र में पूरे देश में एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया जिसकी चर्चा विदेशों तक में है। अत: सोशल मीडिया के दौर में प्रिंट मीडिया कैसे बचाए अपना वजूद जैसे विषय पर चर्चा करने के लिए इंदौर से बेहतर कोई दूसरा मंच नहीं हो सकता। यह सही है कि आज प्रिंट मीडिया भी विश्वसनीयता के संकट से गुजर रहा है। इसके लिए केवल अखबार ही नहीं पाठक भी जिम्मेदार हैं, जो चाय की पत्ती और बाल्टी की लालच में अपनी रुचि का अखबार कुर्बान कर देता है। यदि हमें प्रिंट मीडिया को बचाने है तो पाठकों को त्याग करने के लिए तैयार रहना चाहिए। एक दौर था, जब हिंदी अखबारों को बाइबिल और गीता की तरह पढ़ा जाता था, लेकिन अब उसकी विश्वसनीयता पर ग्रहण लगता जा रहा है। जब 36 रुपए किलो का कागज 80 रुपए किलों में मिलेगा तब अखबार मालिक की भी मजबूरी बन जाती है कि वह जन सरोकारों से जुड़े मुद्दों से अधिक उद्योगों से जुड़ी खबरों को महत्व दें।

वरिष्ठ पूर्व महाधिवक्ता एवं समाजसेवी आनंद मोहन माथुर ने कहा कि मूर्धन्य पत्रकार राजेंद्र माथुर हमेशा सत्य के साथ थे। देश में जब आपातकाल लगा तो उन्होंने अपने अखबार में विरोधस्वरूप संपादकीय स्थान को खाली छोड़ दिया था। रज्जू बाबू ही थे जिन्होंने एक प्रकरण में अपनी पत्रकारिता को किसी भी बड़े व्यक्ति के आगे झुकने नहीं दिया था।

इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि इंदौर प्रेस क्लब के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर मैं बहुत गौरव का अनुभव कर रहा हूं। यह दिन हमारे संस्थापकों में से एक हिंदी के मूर्धन्य पत्रकार राजेंद्र माथुर व सिटी रिपोर्टिंग के पितामह गोपीकृष्ण गुप्ता का पुण्य स्मरण दिवस भी है। हम इन दोनों महान व्यक्तित्व को इस मौके पर अपने श्रद्धासुमन भी अर्पित करते हैं। 

उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की नर्सरी कहे जाने वाले इंदौर के इस प्रेस क्लब ने यदि देश में अपनी एक अलग पहचान बनाई है तो इसका श्रेय आप सभी को है। आप सबको तो पता है ही कि देश में हमारे प्रेस क्लब की अहमियत ऐसी रही है कि चाहे जिस दल के जनप्रतिनिधि हों, चाहे जिस सरकार के नुमाइंदे हों, उनकी प्राथमिकता में भोपाल या अन्य बड़े शहरों की अपेक्षा इंदौर प्रेस क्लब हमेशा सूची में प्रथम रहता है। इसकी वजह यह भी है कि इस संस्था में आकर उनके कार्य-व्यवहार-विभागीय कामकाज को प्रेस से चर्चा में जो राष्ट्रीय ख्याति मिलती वह उनके व्यक्तित्व को भी ऊंचाइयां प्रदान करती रही हैं।

खबर के प्रति इंदौर की मीडिया की जो प्रतिबद्धता रही है, उसके मूल में इंदौर प्रेस क्लब के संस्कार हैं। 'ऑफ द रिकॉर्ड’ का जितना पालन इंदौर की मीडिया ने किया है, उतना अन्यत्र शायद ही होता हो। इसके साथ ही पत्रकारिता की स्वर्णिम यात्रा पूर्ण कर चुके सम्मानित होने वाले इंदौर प्रेस क्लब मार्गदर्शक हमारे वरिष्ठ पत्रकार साथियों के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं।

इसके पूर्व आज सुबह इंदौर प्रेस क्लब संस्थापक और पूर्व अध्यक्ष स्व. राजेंद्र माथुर की पलासिया स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें स्मरण किया।

इन वरिष्ठ पत्रकारों का हुआ सम्मान

इंदौर प्रेस क्लब के 60वें स्थापना दिवस समारोह में ऐसे कलमकारों का सम्मान किया, जिन्होंने पत्रकारिता के पांच दशक पूर्ण कर लिए, जिनमें पद्मश्री अभय छजलानी, विमल झांजरी, कृष्णकुमार अष्ठाना, उमेश रेखे, महेश जोशी, श्रवण गर्ग, सुरेश ताम्रकर, रवीन्द्र शुक्ला, श्रीकृष्ण बेडेकर, ब्रजभूषण चतुर्वेदी, शशिकांत शुक्ल, बहादुरसिंह गेहलोत, विद्यानंद बाकरे, कृष्णचंद दुबे, चंद्रप्रकाश गुप्ता, सतीश जोशी, चंदू जैन,  गजानंद वर्मा, दिलीप गुप्ते, विक्रम कुमार और मदनलाल बम शामिल हैं।

इस अवसर पर स्व. बालाराव इंगले जी की स्मृति में कृष्णकुमार अष्ठाना को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवल कर किया। अतिथियों का स्वागत दे.अ.वि.वि. कुलपति डॉ. रेणु जैन, प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी, महासचिव हेमंत शर्मा, उपाध्यक्ष दीपक कर्दम, प्रदीप जोशी, कोषाध्यक्ष संजय त्रिपाठी, सचिव अभिषेक मिश्रा, कार्यकारिणी सदस्य राहुल वावीकर, विपिन नीमा, अंकुर जायसवाल, अभ्यास मंडल के अध्यक्ष रामेश्वर गुप्ता, सेवा सुरभि के अध्यक्ष ओम नरेडा, वरिष्ठ पत्रकार क्रांति चतुर्वेदी, रमण रावल ने किया। अतिथियों को प्रतीक चिह्न वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिंदुस्तानी, तपेन्द्र सुगंधी, प्रवीण शर्मा, कार्यकारिणी सदस्य अभय तिवारी, प्रवीण बरनाले ने प्रदान किए। कार्यक्रम में मौजूद श्रीमती हरिवंश का स्वागत श्रुति अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम का संचालन संजय पटेल ने किया। आभार प्रेस क्लब महासचिव हेमन्त शर्मा ने माना।

इस मौके पर कार्यक्रम में पद्मश्री भालू मोंढे, पद्मश्री सुशील दोशी, पद्मश्री जनक पलटा, पूर्व सांसद कल्याण जैन, वरिष्ठ भाजपा नेता गोविंद मालू, अभ्यास मंडल के शिवाजी मोहिते, इंटक के अध्यक्ष श्यामसुंदर यादव, विधायक विशाल पटेल, पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता, अश्विन जोशी, ख्यात गायिका शोभा चौधरी, रमेश निर्मल, गौतम काले, सेवा सुरभि के अध्यक्ष ओम नरेडा, स्वदेशी जागरण मंच की राष्ट्रीय सहप्रमुख अलका सैनी, म.प्र. हिंदी साहित्य समिति के हरेराम वाजपेयी, प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कृपाशंकर शुक्ला, राजेश चौकसे, गिरधर नागर, वरिष्ठ भाजपा नेता गोपी नेमा, बालकृष्ण अरोरा, डी.एन. तिवारी, नवीन जैन, कीर्ति राणा, सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी, आलोक खरे, सुनील जोशी, जयश्री पिंगले, राशिका नीमा, डॉ. रजनी भंडारी, डॉ. प्रतीक श्रीवास्तव, महेंद्र सोनगिरा, अनमोल तिवारी, प्रदीप मिश्रा, संजीव मालवीय, अद्र्धेंधु भूषण, मुकेश तिवारी, अर्पण जैन, सुधाकर सिंह, राजेंद्र कोपरगांवकर, सुभाष सातालकर, अनिल शुक्ला, लक्ष्मीकांत पंडित, प्रवीण जोशी, जयसिंह रघुवंशी, समाजसेवी अजय शारडा, किरण वाईकर, शिवप्रसाद चौहान, मार्टिन पिंटो, अजीज खान, धर्मेश यशलहा, उज्जवल शुक्ला, दिनेश पुराणिक, सहित मीडिया के साथियों के साथ ही शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं के अनेक प्रतिनिधि व गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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वरिष्ठ पत्रकार की पीट-पीटकर हत्या, पोल्ट्री फार्म से मिला शव

बिहार में आपराधिक घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं। इस बीच सुपौल से एक बड़ी खबर सामने आयी है। यहां एक पत्रकार की हत्या कर दी गयी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 26 September, 2022
Last Modified:
Monday, 26 September, 2022
Journalist5481

बिहार में आपराधिक घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं। इस बीच सुपौल से एक बड़ी खबर सामने आयी है। यहां एक पत्रकार की हत्या कर दी गयी। बताया जा रहा कि पत्रकार महाशंकर पाठक की पीट-पीटकर हत्या की गई। अपराधियों ने खुलेआम इस बड़ी घटना को अंजाम दिया है।   

जानकारी के मुताबिक, सुपौल जिला के हुलास गांव स्थित पोल्ट्री फार्म से बिहार के वरिष्ठ पत्रकार महाशंकर का शव बरामद किया गया है। महाशंकर ‘सौभाग्य मिथिला’, ‘राष्ट्रीय प्रसंग’ समेत कई संस्थानों से जुड़े रहे। वे खुद भी ‘आर्यव्रत प्रसंग’ नाम से पत्रिका निकालते थे। इसी बीच उन्होंने पोल्ट्री फार्म शुरू किया। ये फार्म राघोपुर थाना इलाके के राधानगर गांव के पास स्थित है। 

बता दें कि पत्रकार महाशंकर की हत्या का आरोप फार्म में काम करने वाले एक दंपती पर लगा है। वारदात के बाद से आरोपी फरार हैं, पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

घटना के बारे में बताया जा रहा है कि किसी बात पर अपने ही कर्मचारी से उनकी अनबन हो गई। रविवार सुबह जब वे फार्म पर पहुंचे तो कई घंटों तक वापस नहीं लौटे। कुछ देर के बाद लोगों ने पाया कि फार्म में बाहर से ताला मारा हुआ है।  घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है। आरोपी ने बेलचा से सिर पर कई वार कर महाशंकर को गंभीर रूप घायल कर दिया था, जिसके बाद  महाशंकर घायल अवस्था में अंदर अचेत पड़े हुए हैं। बेहतर इलाज के लिए उनको स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।  

महाशंकर पाठक का शव मिलते ही पुलिस टीम जांच में जुट गई है। वहीं बताया ये जा रहा कि महाशंकर पाठक के पोल्ट्री फार्म में काम करने वाले एक दंपती गुड्डू और उसकी पत्नी सविता ने वारदात को अंजाम दिया है। फार्म में काम करने वाले कर्मियों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि कुछ दिन पहले ही महाशंकर पाठक ने इस दंपती को अंडों की चोरी के आरोप पर फटकार लगाई थी।

बताया जा राह कि ये दंपती फार्म में ही रहा करता था। आशंका जताई जा रही कि जिस तरह से उन्हें फटकार लगाई गई थी उसी से नाराज होकर दंपती ने पोल्ट्री फार्म मालिक की पीट-पीटकर हत्या कर दी। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में कुछ भी साफ तौर से नहीं कहा है। मामले की जांच की जा रही है। इन्वेस्टिगेशन के बाद बाद ही अधिकारी इस पर कुछ स्पष्ट तौर पर कहेंगे। आरोपी दंपती की तलाश की जा रही है।

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उपराष्ट्रपति से मिले MCU के वीसी प्रो. केजी सुरेश, विवि की उपलब्धियों से कराया अवगत

‘माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय’ भोपाल के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने उपराष्ट्रपति एवं विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष जगदीप धनखड़ से नई दिल्ली में भेंट की।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 24 September, 2022
Last Modified:
Saturday, 24 September, 2022
Meeting

‘माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय’ भोपाल के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने उपराष्ट्रपति एवं विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष जगदीप धनखड़ से नई दिल्ली में भेंट की। उप राष्ट्रपति निवास में हुई मुलाकात में प्रो. केजी सुरेश ने उन्हें विश्वविद्यालय की गतिविधियों से अवगत कराया । उल्लेखनीय है कि एशिया के पहले पत्रकारिता विश्वविद्यालय होने का गौरव रखने वाले माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष देश के उपराष्ट्रपति हैं।

इस मुलाकात के दौरान प्रो. केजी सुरेश ने उपराष्ट्रपति को विश्वविद्यालय की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि भोपाल के निकट बिशनखेड़ी में पचास एकड़ में स्वयं का भवन बनकर तैयार हो चुका है, और शीघ्र ही पूरा विश्वविद्यालय यहां शिफ्ट होने वाला है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में अकादमिक भवन, प्रशासनिक भवन, विशाल सभागार के साथ ही गर्ल्स हॉस्टल, बायस हॉस्टल, कैंटिन, कर्मचारियों,अधिकारियों, शिक्षकों के लिए कैंपस के भीतर ही निवास की भी सुविधा भी उपलब्ध है । इस साल पिछले वर्ष से ज्यादा विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। विगत वर्ष एक लाख तीन हजार विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया था।

कुलपति ने उपराष्ट्रपति को बताया कि विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत नए पाठ्यक्रमों को भी पिछले साल ही शुरु कर दिया है । उन्होंने बताया कि देश एवं राज्य में पत्रकारिता के पाठ्यक्रम को शुरु करने वाला भी यह देश का पहला विश्वविद्यालय है, जिसने बहुत तेजी से नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को अपनाया । इसके साथ ही प्रो. केजी सुरेश ने बताया कि ‘इंडिया टुडे’ की टॉप-10 सूची में भी पत्रकारिता विश्वविद्यालय को शामिल किया गया है, उन्होंने कहा कि इस सूची में शामिल होने वाला यह देश का पहला हिंदी पत्रकारिता का संस्थान है ।

गौरतलब है कि ‘द वीक’ ने भी पत्रकारिता विश्वविद्यालय का नाम अपनी सूची में शामिल किया है। प्रो. केजी सुरेश ने उपराष्ट्रपति को बताया कि इसी वर्ष विवि के बिशनखेड़ी स्थित नवीन कैंपस में तीन दिवसीय राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का भी आयोजन हुआ था, जिसमें देश के ख्याति प्राप्त अभिनेता, निर्माता, निर्देशक, कलाकारों ने भाग लिया था और तत्पश्चात सिनेमा अध्ययन विभाग का गठन भी हुआ था। उपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर उत्सुकता एवं खुशी व्यक्त की । उन्होंने कुलपति प्रो. केजी सुरेश को उपलब्धियों के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए विश्वविद्यालय के प्रगति की कामना की और इससे संबंधित और जानकारी उपलब्ध कराने के लिए आग्रह कियाl

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इस बीमारी ने निगल ली 'दैनिक भास्कर' के पत्रकार अमित मिश्रा की जिंदगी

फिलहाल झारखंड में ओरमांझी स्थित अब्दुल रज्जाक कैंसर हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था, जहां शनिवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 24 September, 2022
Last Modified:
Saturday, 24 September, 2022
Amit Mishra

झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार अमित मिश्रा का शनिवार को निधन हो गया है। ‘दैनिक भास्कर’ में कार्यरत अमित मिश्रा कैंसर से पीड़ित थे। बताया जाता है कि अमित मिश्रा कैंसर के अंतिम स्टेज से गुजर रहे थे। कई जगह उन्होंने इलाज भी कराया, लेकिन ठीक नहीं हो पाए। फिलहाल ओरमांझी स्थित अब्दुल रज्जाक कैंसर हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था, जहां उनका निधन हो गया।

अमित मिश्रा ने ‘ईटीवी’ सहित तमाम मीडिया प्रतिष्ठानों में काम किया था। भागलपुर स्मार्ट सिटी के पीआरओ के तौर पर भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी थीं। उनके परिवार में पत्नी और एक बेटा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमित मिश्रा के पिता ज्ञानवर्धन मिश्रा भी झारखंड- बिहार के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह लगातार. इन और हिंदी दौनिक शुभम संदेश के धनबाद संपादक हैं।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत तमाम नेताओं और पत्रकारों ने अमित मिश्रा के निधन पर गहरा शोक जताते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति एवं शोक संतप्त परिजनों को दु:ख की इस घड़ी को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। अपने शोक संदेश में हेमंत सोरेन ने कहा है, ‘अमित मिश्रा का निधन पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। अमित मिश्रा एक सुलझे हुए अनुभवी पत्रकार थे। उनके परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।’  

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कोई भी भाषा नहीं ले सकती 'मातृभाषा' की जगह: प्रो. द्विवेदी

गुवाहाटी में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान आईआईएमसी के महानिदेशक ने कहा कि मातृभाषा में सोचने और बोलने से अभिव्यक्ति में आसानी होती है और हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 24 September, 2022
Last Modified:
Saturday, 24 September, 2022
Pro. Sanjay Dwivedi

‘भारतीय जनसंचार संस्थान‘ (IIMC) के महानिदेशक प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी का कहना है कि कोई भी भाषा किसी व्यक्ति की मातृभाषा की जगह नहीं ले सकती। हम अपनी मातृभाषा में सोचते हैं और उस पर हमारा स्वाभाविक अधिकार होता है। गुवाहाटी में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि मातृभाषा में सोचने और बोलने से अभिव्यक्ति में आसानी होती है और हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता असम विधानसभा के प्रधान सचिव हेमेन दास ने की।

असम में मीडिया के 175 वर्ष से अधिक पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन 'महाबाहू' संस्थान एवं मल्टीकल्चरल एजुकेशनल डेवलेपमेंट ट्रस्ट द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम में एलिजाबेथ डब्ल्यू ब्राउन द्वारा लिखित पुस्तक 'द होल वर्ल्ड किन: ए पायनियर एक्सपीरियंस अमंग रिमोट ट्राइब्स, एंड अदर लेबर्स ऑफ नाथन ब्राउन'  के रिप्रिंटेड वर्जन का विमोचन किया गया। इस अवसर पर असम की पहली मासिक समाचार पत्रिका 'ओरुनोदोई' का डिजिटल संस्करण भी लॉन्च किया गया।

समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. द्विवेदी ने कहा, ‘लोग कई भाषाएं सीख सकते हैं, लेकिन उनकी एक ही मातृभाषा हो सकती है जिसमें वे सोचते हैं, सपने देखते हैं और भावनाओं को महसूस करते हैं। अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का मातृभाषा सबसे शक्तिशाली उपकरण है।’

डॉ. द्विवेदी ने सांस्कृतिक विविधता और विरासत के संरक्षण में मातृभाषा के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, ’गुवाहाटी में घूमते हुए यह देखकर आश्चर्य हुआ कि कई दुकानों के साइनबोर्ड असमिया के बजाय अंग्रेजी भाषा में लिखे गए थे। अगर हम चाहें तो ये साइनबोर्ड अंग्रेजी और असमिया, दोनों भाषाओं में हो सकते हैं।’

आईआईएमसी के महानिदेशक ने कहा कि असम में मीडिया के 175 वर्ष से अधिक पूर्ण होने का अवसर असमिया साहित्य और पत्रकारिता के उन दिग्गजों के बलिदान को याद करने का अवसर है, जिन्होंने असम में मीडिया की नींव रखी। ऐसी महान हस्तियों के कारण ही असम, न सिर्फ पूर्वोत्तर भारत के प्रहरी के रूप में स्थापित हुआ, बल्कि साहित्य, संस्कृति और आध्यात्म के क्षेत्र में भी उसने अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने कहा कि असम की पत्रकारिता को अब अगले 25 वर्षों का लक्ष्य तय करना करना चाहिए। उसे नए विचारों पर काम करना चाहिए और समाज की समस्याओं का समाधान कर नई उपलब्धियां हासिल करनी चाहिए।

इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत राजगुरु ने कहा, ’भाषा हमारा प्रतिनिधित्व करती है और इसे किसी भी परिस्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।’ पूर्व राज्यसभा सदस्य कुमार दीपक दास, वरिष्ठ पत्रकार बेदब्रत मिश्रा और अमल गोस्वामी व एडवोकेट सत्येन सरमा और डॉ. रेजाउल करीम ने भी कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त किए।

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दोस्त ने दी पत्रकार को 'सर तन से जुदा' करने की धमकी, जानें वजह

गाजियाबाद में पत्रकार निशांत आजाद को ‘सिर तन से जुदा’ करने की धमकी देने वाला आरोपी आखिरकार पुलिस के हत्थे लग गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 September, 2022
Last Modified:
Wednesday, 21 September, 2022
Journalist34875

गाजियाबाद में पत्रकार निशांत आजाद को ‘सिर तन से जुदा’ करने की धमकी देने वाला आरोपी आखिरकार पुलिस के हत्थे लग गया है। मंगलवार को गाजियाबाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जोकि पुराना परिचित है। आरोपी का नाम प्राणप्रिय वत्स है, जोकि बिहार का रहने वाला है।   

पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद प्राणप्रिय ने बताया कि निशांत से उसने पैसे उधार ले रखे थे, जिसकी वापसी के लिए निशांत उस पर दबाव बना रहा था, जिससे बचने के लिए उसने यह धमकी दी थी।

पत्रकार निशांत कुमार आजाद आरएसएस और अंग्रेजी साप्ताहिक पत्रिका ‘ऑर्गनाइजर’ के लिए मुख्य रूप से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। 13 सितंबर को दी अपनी शिकायत में पत्रकार ने बताया था कि 10 सितंबर को एक वर्चुअल नंबर से उन्हें 'सर तन से जुदा' की धमकी दी गई है।  इसके अलावा इस्लाम के खिलाफ एजेंडे का प्रचार बंद करने की भी धमकी दी गई है। पत्रकार ने जब उससे उसकी पहचान के बारे में पूछा, तो उसने जवाब दिया कि वह पत्रकार के बारे में सब कुछ जानता है और यदि वह इस तरह के मुद्दों पर फिर से लिखना जारी रखता है, तो उसे परिणाम भुगतने होंगे।

शिकायत में पत्रकार ने बताया था कि यह धमकी उसे यूएस-आधारित मोबाइल नंबर से दी गई है। उन्हें वॉट्सऐप काल भी की गई, जिसका रिप्लाई उन्होंने नही दिया। घटना की शिकायत गाजियाबाद पुलिस से की गई।

इंदिरापुरम क्षेत्र के रहने वाले निशांत आजाद पेशे से पत्रकार हैं। 13 सितंबर को उन्होंने थाना इंदिरापुरम में एफआईआर दर्ज कराई थी।  

सीओ अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि आरोपी निशांत को ढाई साल से जानता है। दोनों की मुलाकात बिहार चुनाव के दौरान हुई थी। आरोपी पर निशांत के करीब ढाई लाख रुपए उधार चल रहे थे। निशांत ये रुपए लगातार मांग रहा था। इस पर आरोपी ने निशांत का ध्यान बांटने का प्लान बनाया। इंटरनेट से एक वर्चुअल नंबर जेनरेट करके वॉट्सएप पर थ्रेट दे डाली। सीओ ने कहा कि आरोपी पर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

गाजियाबाद के डॉक्टर अरविंद अकेला को भी ऐसी ही धमकी मिली थी, लेकिन पुलिस जांच में उनका मामला झूठा निकला।

डॉक्टर को धमकी देने का मामला निकल चुका है झूठा
11 सितंबर को डॉक्टर अरविंद वत्स 'अकेला' ने भी एक ऐसी ही FIR थाना सिहानी गेट में दर्ज कराई थी। डॉक्टर अकेला के मुताबिक, उन्हें यूएस नंबर से सिर कलम करने की धमकी दी गई। हालांकि SP सिटी निपुण अग्रवाल ने दावा किया है कि डॉक्टर ने सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए धमकी की झूठी खबर फैलाई थी। वॉट्सएप पर जिस नंबर से कॉल आई थी, वो नंबर डॉक्टर के ही मरीज का था।

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उपराष्ट्रपति का मीडिया से आग्रह, इस मामले में सावधानी बरतते हुए करें रिपोर्टिंग

उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक मजबूत, निष्पक्ष और स्वतंत्र न्याय प्रणाली, लोकतांत्रिक मूल्यों के फलने-फूलने और प्रभावी होने की सबसे सुरक्षित गारंटी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 19 September, 2022
Last Modified:
Monday, 19 September, 2022
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भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को मीडिया से न्यायपालिका के बारे में रिपोर्टिंग करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि हमें न्यायाधीशों की गरिमा और न्यायपालिका के लिए सम्मान को बनाये रखना चाहिए, क्योंकि ये कानून के शासन और संवैधानिकता के मूल सिद्धांत हैं।

रविवार को जबलपुर, मध्य प्रदेश में आयोजित पहले 'न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा स्मृति व्याख्यान' में मुख्य अतिथि के तौर पर अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक मजबूत, निष्पक्ष और स्वतंत्र न्याय प्रणाली, लोकतांत्रिक मूल्यों के फलने-फूलने और प्रभावी होने की सबसे सुरक्षित गारंटी है। उन्होंने कहा, ‘निर्विवाद रूप से लोकतंत्र का सबसे अच्छा विकास तब होता है, जब सभी संवैधानिक संस्थानों का आपस में पूर्ण समन्वय होता है और वे अपने क्षेत्र विशेष तक ही सीमित होते हैं।’

पहले 'न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा स्मृति व्याख्यान' में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने मुख्य व्याख्यान दिया। राजस्थान उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति वर्मा के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में अपनी कई बातचीत को याद करते हुए उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि उनके कार्यकाल को न्यायिक इकोसिस्टम को बेहतर बनाने एवं पारदर्शिता और जवाबदेही को विस्तार देने के रूप में याद किया जा सकता है।

समाज पर दूरगामी प्रभाव वाले कई फैसले देने के लिए न्यायमूर्ति वर्मा की प्रशंसा करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि विशाखा मामले में उनके ऐतिहासिक फैसले ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से महिलाओं की विशिष्ट सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था के लिए पूरे तंत्र के संरचना निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा, ‘स्वर्गीय न्यायमूर्ति जगदीश शरण वर्मा को हमेशा पथ-प्रदर्शक निर्णयों और उन विचारों के लिए याद किया जाएगा, जिन्होंने नागरिकों को सशक्त बनाया है और सरकार को भी सक्षम बनाया है, ताकि वह लोगों के कल्याण के लिए संस्थानों में व्यापक बदलाव कर सके।’

न्यायमूर्ति वर्मा द्वारा संघवाद से लेकर धर्मनिरपेक्षता तक और भारत में लैंगिक समानता से जुड़े कानूनों के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित किये जाने का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि उनका जीवन एवं उनके विचार हमें और आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।

मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल; मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान; मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश; सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल; सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी; मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति रवि मलीमथ; लोकसभा सदस्य राकेश सिंह; राज्यसभा सदस्य और जे.एस. वर्मा स्मृति समिति के अध्यक्ष विवेक के तन्खा एवं दिवंगत न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा के परिवार के सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति कार्यक्रम में शामिल हुए।

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ऑफिस के लिए निकली थी न्यूज24 की महिला पत्रकार, हो गई यह वारदात

यदि आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं, तो सावधान हो जाइए, क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली व उससे सटे इलाकों में चेन स्नैचर का गिरोह सक्रिय है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 19 September, 2022
Last Modified:
Monday, 19 September, 2022
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यदि आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं, तो सावधान हो जाइए, क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली व उससे सटे इलाकों में चेन स्नैचर का गिरोह सक्रिय है। शहर की सड़कों पर चेन स्नैचर बेखौफ होकर घूम रहे हैं। यहां चेन छीनने की घटनाएं होना आमबात हो चुकी हैं। बदमाशों ने इस बार ‘न्यूज24’ में कार्यरत एक महिला पत्रकार को अपना निशाना बनाया। घटना रविवार सुबह करीब 06:30 बजे की है, जब महिला पत्रकार सिमरन सिंह दफ्तर जाने के लिए अपने घर से निकली थीं।

इस दौरान कश्मीरी गेट बस अड्डे के करीब ऑफिस कैब का इंतजार करते समय दो बदमाशों ने उनके साथ लूट की घटना को अंजाम दिया। सिमरन का कहना है कि दोनों लुटेरे बाइक पर आए थे और उन्होंने अपना चेहरा ढका हुआ था, इसके अलावा उन्होंने सिर पर टोपी भी पहन रखी थी।

सिमरन का कहना है कि दोनों युवकों में से एक बाइक पर ही बैठा रहा, जबकि दूसरा उतरकर उनके करीब पहुंचा और पीछे से गला दबाते हुए उनकी चेन लूट ली। बाद में दोनों बदमाश बाइक पर रफूचक्कर हो गए। 

वैसे हैरान करने वाली बात यह है कि कश्मीरी गेट पर स्थित एक पुलिस बूथ से कुछ ही मीटर दूर घटी ही सिमरन के साथ यह घटना घटी। सिमरन का कहना है कि उन्होंने जानबूझकर कैब का इंतजार करने के लिए वही स्थान चुना, क्योंकि पुलिस चौकी के करीब होने की वजह से वह वहां सुरक्षित महसूस कर रही थीं।

लेकिन यह घटना बताती है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद है कि उन्हें  पुलिस का भी कोई खौफ नहीं है। बदमाश दिन दहाड़े वारदात को अंजाम देने में लगे हुए हैं, तो वहीं पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। 

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जानिए, क्यों अमेरिकी मीडिया ने पीएम मोदी को दी बड़ी कवरेज, की तारीफ भी

पीएम नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के बीच उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुई वार्ता को अमेरिकी मीडिया ने व्यापक कवरेज दी और पीएम मोदी की सराहना की

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 17 September, 2022
Last Modified:
Saturday, 17 September, 2022
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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के बीच उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुई वार्ता को मुख्यधारा की अमेरिकी मीडिया ने व्यापक कवरेज दी है और पीएम मोदी की सराहना की है। दरअसल, अमेरिकी मीडिया ने रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन को यह बताने के लिए पीएम मोदी की सराहना की है कि यह यूक्रेन में युद्ध करने का समय नहीं है।

अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ ने अपने शीर्षक में लिखा, ‘मोदी ने यूक्रेन में युद्ध के लिए पुतिन को फटकार लगाई’

दैनिक समाचार पत्र ने लिखा, ‘मोदी ने पुतिन को आश्चर्यजनक रूप से सार्वजनिक फटकार लगाते हुए कहा: ‘आधुनिक दौर युद्ध का युग नहीं है और मैंने आपसे इस बारे में फोन पर बात की है’। इसमें कहा गया, ‘इस दुर्लभ निंदा के कारण 69 वर्षीय रूसी नेता सभी पक्षों की ओर से अत्यधिक दबाव में आ गए’।

पुतिन ने मोदी से कहा, ‘मैं यूक्रेन में संघर्ष पर आपका रुख जानता हूं, मैं आपकी चिंताओं से अवगत हूं, जिनके बारे में आप बार-बार बताते रहते हैं। हम इसे जल्द से जल्द रोकने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। दुर्भाग्यपूर्ण रूप से, विरोधी पक्ष यूक्रेन के नेतृत्व ने वार्ता प्रक्रिया छोड़ने का ऐलान किया और कहा कि वह सैन्य माध्यमों से यानी ‘युद्धक्षेत्र में’ अपना लक्ष्य हासिल करना चाहता है। फिर भी, वहां जो भी हो रहा है, हम आपको उस बारे में सूचित करते रहेंगे।’ यह ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ और ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के वेबपेज की मुख्य खबर थी।  

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने शीर्षक दिया, ‘भारत के नेता ने पुतिन को बताया कि यह युद्ध का दौर नहीं है’ उसने लिखा, ‘बैठक का लहजा मित्रवत था और दोनों नेताओं ने अपने पुराने साझा इतिहास का जिक्र किया। मोदी के टिप्पणी करने से पहले पुतिन ने कहा कि वह यूक्रेन में युद्ध को लेकर भारत की चिंताओं को समझते हैं।’ समाचार पत्र ने कहा, ‘मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग की यूक्रेन के हमले के बाद पुतिन के साथ पहली आमने-सामने की बैठक के एक दिन बाद टिप्पणियां कीं। चिनपिंग ने रूसी राष्ट्रपति की तुलना में अधिक शांत लहजा अपनाया और अपने सार्वजनिक बयानों में यूक्रेन के जिक्र से बचने की कोशिश की।’

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RSS के मुखपत्र के लिए लिखने पर पत्रकार को मिली धमकी, FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पत्रकार को 'सर तन से जुदा' करने की धमकी मिली है। पत्रकार ने इस संबंध में गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 16 September, 2022
Last Modified:
Friday, 16 September, 2022
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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पत्रकार को 'सर तन से जुदा' करने की धमकी मिली है। पत्रकार ने इस संबंध में गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

बता दें कि पत्रकार का नाम निशांत कुमार आजाद है, जोकि आरएसएस और अंग्रेजी साप्ताहिक पत्रिका ‘ऑर्गनाइजर’ के लिए लिखते हैं। वह मुख्य रूप से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। अपनी शिकायत में पत्रकार ने बताया कि लगातार कुछ लोग ‘सर तन से जुदा’ करने के लिए धमकियां दे रहे हैं। यह धमकी उन्हें यूएस-आधारित मोबाइल नंबर से दी जा रही है। उन्हें वॉट्सऐप काल भी की गई, जिसका रिप्लाई उन्होंने नही दिया। घटना की शिकायत स्थानीय पुलिस से की गई है और पुलिस ने इस पूरे मामले में मुकदमा दर्ज कर धमकी देने वालों की तलाश शुरू कर दी है।

पत्रकार निशांत कुमार आजाद को 10 सितंबर को एक यूएस-आधारित मोबाइल नंबर से जान से मारने की धमकी मिली है, जिसमें चेतावनी दी गई कि अगर उन्होंने हिंदुत्व संगठनों का समर्थन करना जारी रखा, तो उनका सिर तन से जुदा कर दिया जाएगा। इसके अलावा इस्लाम के खिलाफ एजेंडे का प्रचार बंद करने की भी धमकी दी गई है। पत्रकार ने जब उससे उसकी पहचान के बारे में पूछा, तो उसने जवाब दिया कि वह पत्रकार के बारे में सब कुछ जानता है और यदि वह इस तरह के मुद्दों पर फिर से लिखना जारी रखता है, तो उसे परिणाम भुगतने होंगे।

दर्ज की शिकायत के मुताबिक, फोन करने वाले ने कन्हैया कुमार (एसआईसी) और उमेश कोल्हे का उल्लेख किया और उन्हें दोनों की तरह ही अंजाम भुगतने की चेतावनी दी है। धमकाने वाले ने निशांत के एक ट्वीट का स्क्रीनशॉट भी साझा किया। इस ट्वीट में निशांत ने भारत जोड़ो यात्रा के बीच आरएसएस की 'जलती हुई वर्दी' की तस्वीर पोस्ट करने के लिए कांग्रेस की आलोचना की थी।

बता दें कि हाल ही में गाजियाबाद के एक डॉक्टर को भी इसी तरह के संदेशों के साथ कई धमकियां मिलीं हैं। राजस्थान में भी इसी प्रकार की धमकी कन्हैया लाल नाम के एक हिंदू दर्जी को मिली थी, जिसके बाद दो इस्लामवादियों, मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने 28 जून, 2022 को उदयपुर में उनकी हत्या कर दी थी।

वहीं इसी प्रकार का मामला महाराष्ट्र के अमरावती में देखने को मिला जहां एक फार्मासिस्ट उमेश कोल्हे की 22 जून को चार इस्लामवादियों ने हत्या कर दी थी। कोल्हे की हत्या इसलिए की गई, क्योंकि वह भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में खड़े हुए थे।

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वरिष्ठ पत्रकार जयदीप कर्णिक समेत 12 हिंदी सेवियों को CM ने किया सम्मानित

हिंदी दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार देर शाम राजधानी भोपाल में देश-विदेश के 12 हिंदी सेवियों को सम्मानित किया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 15 September, 2022
Last Modified:
Thursday, 15 September, 2022
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हिंदी दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार देर शाम राजधानी भोपाल में देश-विदेश के 12 हिंदी सेवियों को सम्मानित किया। बता दें कि भोपाल के रवीन्द्र भवन में हिंदी भाषा सम्मान अलंकरण समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें कार्यक्रम में मुख्यमंत्री चौहान राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी सम्मान से वरिष्ठ पत्रकार व अमर उजाला डिजिटल के एडिटर जयदीप कर्णिक को वर्ष 2019 के लिए और नई दिल्ली की ऋतम संस्था को वर्ष 2020 के लिए सम्मानित किया गया।

यह सम्मान पाकर वरिष्ठ पत्रकार जयदीप कर्णिक ने कहा, ‘अभिभूत हूं, गौरवान्वित हूं, आभारी हूं, कृतज्ञ हूं और इस सबसे बढ़कर संकल्पित हूं अधिक समर्पित भाव से सेवारत रहने के लिए। इस अलंकरण ने नई सोच, नए विचार और योजनाएं दी हैं। अपनी भाषा में सतत अभिव्यक्ति मेरे लिए बहुत सामान्य सी प्रक्रिया रही है। इसके लिए अलंकरण भी मिल सकता है, ये अब पता चला। इसी ने मुझे सोचने पर विवश किया है... अभी तो इस सम्मान के लिए आभार...’

वहीं इस कार्यक्रम के दौरान, राष्ट्रीय निर्मल वर्मा सम्मान से डेनमार्क की डॉ. अर्चना पैन्यूली को वर्ष 2018 के लिए, बर्मिघम के डॉ. कृष्ण कुमार वर्ष 2019 के लिए तथा न्यूजीलैंड के रोहित कुमार ‘हैप्पी को वर्ष 2020 के लिए सम्मानित किया गया।

राष्ट्रीय फादर कामिल बुल्के सम्मान से पेरिस की आनी मांतो को वर्ष 2018 के लिए, मारीशस के डॉ. बीरसेन जागा सिंह को वर्ष 2019 के लिए और टोकियो के प्रो. हिदेआकि इशिदा को वर्ष 2020 के लिए सम्मानित किया गया।

राष्ट्रीय गुणाकर मुले सम्मान से वर्ष 2019 के लिए भोपाल के पद्माकर धनंजय सराफ को और वर्ष 2020 के लिए भोपाल के डॉ. संतोष चौबे को सम्मानित किया गया। इसी तरह राष्ट्रीय हिंदी सेवा सम्मान से त्रिवेन्द्रम की डॉ. शीला कुमारी वर्ष 2019 के लिए और भोपाल के सुधीर मोता को वर्ष 2020 के लिए सम्मानित किया गया।

इन सभी सम्मानों में प्रत्येक सम्मानित को एक-एक लाख रुपए की सम्मान राशि, सम्मान पट्टिका एवं शाल-श्रीफल प्रदान किया गया।

सूचना प्रौद्योगिकी सम्मान हिंदी सॉफ्टवेयर और इससे जुड़े कार्यों में उत्कृष्ट योगदान के लिए निर्मल वर्मा सम्मान विदेशों में अप्रवासी भारतीय द्वारा हिंदी के विकास में योगदान देने, फादर कामिल बुल्के सम्मान विदेशी मूल के हिंदी प्रचारकों, गुणाकर मुले सम्मान हिंदी में वैज्ञानिक और तकनीकी लेखन के लिए और हिंदी सेवा सम्मान अहिंदी भाषी लेखकों को हिंदी में सृजन के लिए प्रदान किया गया। विभिन्न सम्मानों के निर्णायकों में प्रतिष्ठित लेखक और हिंदी सेवी शामिल थे।

कार्यक्रम में सम्मानित हिंदी सेवियों ने भी अपने विचार रखे। टोकियो के प्रोफेसर हिदेआकि इशिदा ने कहा कि भोपाल मध्यप्रदेश में सम्मानित होकर वे स्वयं को बहुत सौभाग्यशाली मानते हैं। डॉ. संतोष चौबे ने इस क्षण को स्मरणीय बताया। पेरिस की सुश्री आनी मान्तो, डेनमॉर्क की अर्चना पैन्यूली ने भी मध्यप्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग की इस पहल को प्रशंसनीय बताया।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में कवि सम्मेलन हुआ, जिसमें प्रख्यात कवि अशोक चक्रधर नई दिल्ली, कीर्ति काले नई दिल्ली, डॉ. विनय विश्वास नई दिल्ली, विष्णु सक्सेना अलीगढ़ और मधु मोहिनी उपाध्याय नोएडा ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को आनंदित किया। सम्मानित हिंदी सेवियों का प्रशस्ति वाचन संस्कृति संचालक अदिति कुमार त्रिपाठी ने किया।

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